बनकैना रानी
एक गाँव म एक झन डोकरी अउ डोकरा रहय। डोकरी-डोकरा के बेटिच-बेटी रहय। एको झन बेटा नइ रहय। बेटा के अगोरा करत परिवार ह बाढ़गे रहय। उखर न गांव म घर रहय अउ न खार म खेत। गांव के बाहिर म सबो मई-पिला झोपड़ी बना के रहय अउ एक लांघन एक फरहर उखर जिनगी चलत रहय। बनी-भूति म जउन आमदनी होवय उही म उखर अलवा-जलवा गुजारा होवय। एक तो सुरसा अस बाढ़त महंगाई अउ दूसर सउत बरोबर बैरी गरीबी। उपरहा म दूब्बर बर दू-अषाढ़ असन बाढ़े परिवार। न कोन्हो ल पेट भर जेवन मिलय अउ न तन भर पहिरे के कपड़ा। लइका मन भूख-पियास म जब किलिर-कालर करय तब डोकरी-डोकरा के जीव हलाकान हो जावय। लइका मन ला भर पेट भोजन कराय तब डोकरी-डोकरा मन ला खुदे लांघन-भूखन रहना पड़े।
एक दिन डोकरी-डोकरा मन बिचार करिन अइसन म काम नइ चलय लइका मन ला देखबो तब हमरे मन के परान छूट जाही। तेखर ले जब लइका मन के नींद ह पड़ जाही तभेच हमन अधरतिहा उठ के रांधबों-खाबो अउ बांचे पानी-पसिया ला बिहनिया लइका मन ला खवाबो-पियाबो।
अब डोकरी-डोकरा मन रोजेच अधरतिहा लइका मन के सुते के बाद रांधे अउ खाय। महीना दिन ले अइसना चल घला गे। फेर धीरे-धीरे लइका मन ला जानबा होगे। लइका मन घला रतिहा जागे के उपाय सोचे लगिन।
लइका मन खटिया म सुते बर छोड़ दिन अउ कोन्हों ढेकी मेरन, कोन्हों बाहिरी मेरन अउ कोन्हों सुपा मेरन तब कोन्हो बरतन-भाड़ा मेरन सुते के शुरू करिन। जब रतिहा डोकरी ह भात रांधहूं कहिके बरतन ल निकाले तब लइका ह उठ के बइठ जाय अउ कहय भात रांधबे का दई। डोकरी ह बाहरे बर बाहिरी ला निकाले तब बाहिरी मेरन सुते लइका ह जाग जाय। अइसने-अइसने सबो लइका ह जाग जावय अउ डोकरी के रांधे-पसाय जिनिस ला खा डारे। डोकरी-डोकरा मन एक-दूसर ला देखे अउ लइका मन ला खवा-पिया के फेर लांघन-भूखन सुत जाय।
डोकरी-डोकरा मन अपन हिरदे म पथरा रख के सोचिन ये बैरी गरीबी म लइका मन के पालन-पोषण नइ हो सके। तेखर ले ये मन ला कइसनो करके बहाना बना के जंगल म ले जा के छोड़ दे जाय।
मउका देख के एक दिन डोकरी ह अपन बेटी मन ला किहिस-‘‘देखव बेटी हो! घर म जउन दार-चउर रिहिस तैहा सबो सिरागे हे। बनी-भूति कहीं नइ चलत हे। तेखर ले तुमन रोज तुंहर ददा संग बिहनिया ले जंगल जाय करव अउ पेट भर चार-तेंदू खा के आय करव। लइका मन भल ला भल जानिन।
लइका मन जंगल अउ चार-तेंदू के नाव सुन के बहुत खुश होगे। ये दुनिया म कोन अइसन दाई -ददा होही जउन अपन करेजा के कुटका मन ला जंगल म ले जा के छोड़ना चाही फेर गरीबी ह मनखे ला जउन करादे कम होथे।
बिहान दिन डोकरा ह लइका मन ला चार-तेंदू के बहाना करके जंगल म ले जा के छोड़ दिस अउ अपन ह रोवत-कलपत घर आगे। लइका मन दाई-ददा के नाव के गोहार पारत जंगल म भटके लगिन। चार झन बहिनी के काय होइस ते कोन जनी फेर दू झन बहिनी बड़की अउ मंझली मन बांचगे। बड़की के नाव सुकुमारी अउ मंझली के नाव ह हिरौंदी रहय। ओमन भूख-पियास म तड़फत जंगल म भटके लगिन। थक-हार के एक ठन जब्बर रूख के छइहां म दुनों बहिनी बइठगे। चार-तेंदू खाके भूख ल तो मेटा डारिन फेर अब पियास के मारे टोंटा सुखाय लगिस।
हिरौंदी किहिस-‘‘अब तो पियास म मोर जीव नइ बांचही तइसे लागथे दीदी। तैहा कइसनो करके मोला पानी पिया तभे जीव ह बांचही।"
सुकुमारी ला एक उपाय सुझिस। ओहा जउन पेड़ के छइंहा म बइठे रिहिस उही रूख म चढ़ के चारो कोती ल देखे लगिस। बहुत दूरिहा म एक ठन तरिया के पार दिखिस। ओहा पेड़ ले उतरगे अउ पानी के तलाश करत दुनों बहिनी उही तरिया पार के रद्दा म आघू बढ़िस।
तीर म जा के तरिया के पार म चढ़गे फेर हाय रे फुटहा किस्मत। तरिया ह ठनठन ले सुख्खा रहय। जब्बर तरिया म घला बूंद भर पानी नहीं।
सुख्खा तरिया ला देख क हिरौंदी ह रोय लगिस। तब सुकुमारी ह समझावत किहिस-‘‘देख बहिनी! तैहा रो झन। मैंहा सुने हवं कि सुख्खा तरिया म कोन्हों अपन सबले अनमोल जिनिस ला फेंकथे तब जलदेवती माता ह खुश होके सुख्खा तरिया म पानी ओगार देथे कहिके। अभी तैहा जउन मुंदरी पहिरे हस उही हम दुनो बर सबले जादा अनमोल हे। तैहा मुंदरी ल निकाल के तरिया म फेंक दे तहन तरिया म पानी ओगर जाही।‘‘
हिरौंदी के मन ह तो मुंदरी ला निकाल के फेंके के होवत नइ रिहिस फेर जीव बचाय बर पानी के लालच म ओहा मुंदरी ला निकाल के बीच तरिया म फेंक दिस। मुंदरी ह तरिया म गिरिस तहन तरिया म सन-सन करत पानी ओगरे लगिस। देखते-देखत तरिया ह पानी म लबालब भरगे। दुनो बहिनी सोसन भर के पानी पिइस।
पियास बुझााइस तहन हिरौंदी ल अपन मुंदरी के सुरता आगे। ओहा अब सुकुमारी ल मोर मुंदरी ला लान कहिके जिद करे लगिस। सुकुमारी ह अड़बड़ समझाइस फेर ओहा मानबे नइ करिस।
सुकुमारी ह आखिरी बार पूछिस-‘‘तोला बहिनी चाही कि मुंदरी?‘‘
हिरौदी ह तपाक ले किहिस-‘‘ मोला बहिनी नहीं मोर मुंदरी चाही।‘‘
सुकुमारी ह तरिया के माड़ी भर पानी म जाके फेर पूछिस फेर हिरौंदी ह मुंदरी के रट लगाय रिहस। अइसने-अइसने सुकुमारी ह कनिहा भर पानी म जाके, पेट भर पानी म जाके, छाती भर पानी म जाके, टोंटा भर पानी म जाके पूछिस फेर हिरौंदी ह साफ कहि दिस तैहा तरिया के पानी म बुड़ के मरस चाहे बांचस मोला तो बस मोर मुंदरी चाही।
सुकुमारी ह तरिया के पानी म बुड़के मुंदरी ल तो खोज के पार म फेंक दिस फेर अपन ह बुड़गे।
मुंदरी मिलिस, तहन हिरौंदी ला अब फेर अपन बहिनी के सुरता आय लगिस। घनघोर जंगल के तरिया पार म बइठे हिरौंदी ह डर के मारे थर-थर कांपत रोय लगिस। बहिनी के अगोरा करत बिहिनिया ले संझा होगे। हुर्ड़ा-बघवा के हांव-हांव अउ कोलिहा मन के हुआं-हुआं ल सुनके हिरौंदी के खून सुखागे। ओहा डर के मारे उही तरिया पार के पीपरी पेड़ म चढ़गे। काल असन रतिहा ह लटपट पोहाइस।
बिहान दिन उही राज के राजा अपन सेना मन संग उहीच जंगल म शिकार खेले बर आय रिहिस। अपन हाथी-घोड़ा मन ला पानी पियाय बर उही तरिया के पार म अपन डेरा जमाइस। जंगल में अउ दूसर मनखे मन ल देख के हिरौंदी ला थोड़किन हिम्मत मिलिस। ओहा पेड़ ले उतरके खाल्हें म आगे अउ जोर-जोर से रोय लगिस।
कोन्हों नारी परानी के सुसकारी ला सुनके राजा अचरज म पड़गे। हे भगवान! अहा घनघोर जंगल म बड़े बिहिनया ले कोन दुखियारी ह रोवत हे? राजा बड़ा दयालू जीव रिहिस ओहा हिरौंदी के तीर म जाके ओखर रोय के कारण पुछिस। हिरौंदी अपन सबो दुख-पीरा ल राजा मेरन साफ-साफ बता दिस।
राजा ह अपन मंत्री ल किहिस-‘‘ये दुखियारी कैना ल रथ म बइठार के राजमहल म ले चलो। आज शिकार खेलई ह बंद समझो, सबो झन तुरते राजमहल म लहुटो।" राजा के आज्ञा पा के सबो झन लहुटगे।
राजा ह बनकैना पाय हे कहिके समाचार ह राज भर म आगी बरोबर बगरगे। तीर-तखार के सब मनखे मन बनकैना देखे बर राजमहल म सकलागे।
राज के सब नर-नारी मन हिरौंदी के सुघरई ला देख के मोहित होगे। सबो झन मन में विचार करे कि राजा ह कोन्हों ये बनकैना ल रानी बना लिही तब दुनो के जोड़ी ह घातेच फबही।
वइसे तो राजा के पहिलीच ले छै झन रानी रिहिन। फेर एको झन के कोरा ह हरियर नइ रिहिस। लोग लइका के मुहूं देखे बर राजा अउ राज भर के मनखे मन तरसत रहय। राजा के नेगीं, जोगी, पाड़े, परधान मन राजा ला सलाह दिन कि ये बनकैना ला अपन रानी बना लेव। भगवान के किरपा होही ते तुंहर वंश बढ़ाय बर हो सकथे कि इही रानी के कोख ले राजकुमार के जनम हो जाय।
राजा ह मन म विचार करिस। हिरौंदी ले घला पुछवाय गिस। हिरौदी ह राजी होगे तब राज करमचारी मन दुनो के बिहाव करा दिन। राज भर के नर - नारी मन उखर बिहाव के गवाही रिहिन।
धीरे-धीरे समे ह पखेरू के पंख सही उड़े लगिस। थोड़िक दिन होइस तहन हिरौंदी ह अम्मल म रहिगे। अब तो राजा अउ राज भर के नर-नारी के खुशी के ठिकाना नइ रिहिस। सब ला रानी के जचकी के अगोरा होय ला लगिस। अब राजा के जादा मया ह हिरौंदी उप्पर रहय। पहिली के छै झन जुन्ना रानी मन के जीव म आगी लगगे।
पहिली वाली रानी मन सोचय कहूँ ये बनकैना के कोरा ह हरियर हो जही तब राजा ह इही ला राजरानी बना दिही अउ हमर मन के कोन्हों पुछारी नइ करही।
राजा ह राजमहल म नइ रहय तहन ओमन बनकैना ला नाना किसम के दुख-दंड देवय। रानी मन के डर के मारे बनकैना ह राजा ला कुछु नइ बतावय। राजा ह बनकैना ला बने सुख म होही समझे।
अइसने-अइसने जब नौ ले दस पुरगे। तब बनकैना रानी के प्रसव पीड़ा उमड़गे। राजमहल म जुन्ना रानी अउ सुइन के छोड़ अउ कोन्हों दूसर नइ रिहिस।
बनकेैना रानी ह पीरा म बाय-व्याकुल हो के बेहोश होगे। जुन्ना रानी मन ओखर आंखी म टोपा बांध दिन। बनकैना रानी ह एक सुन्दर राजकुमार ला जनम दिस फेर जुन्ना रानी मन ओला सुईन ला एक थारी सोन के मोहर के लालच दे के घोड़सार म फेंकवा दिन अउ बनकैना के खटिया म ईंटा-पथरा ला मढ़ा दिन।
जब बनकैना ला होश आइस तब ओहा अपन लइका के हियाव करिस। जुन्ना रानी मन ईंटा-पथरा ला देखावत किहिन-‘‘ इही ला तो तैहा जनम दे हस।‘‘ बनकैना रानी ह गोहार पार के रोय लगिस।
येती जुन्ना रानी मन घोड़सार म जाके देखिन तब बनकैना रानी के लइका ह नारफूल सुध्धा खेलत रहय। लइका ला जिंयत देख के जुन्ना रानी मन डर्रागे। ओमन सोचे लगिन, कहूं राजा ला हमर मन के चाल पता चल जही तब ओहा हमन ला देश निकाला के सजा दे दिही।
ओमन चुप्पे फेर सुइन ला बला के लालच देके किहिन-‘‘ये लइका ल कोन्हों घनघोर जंगल के तरिया म फेंक दे। तरिया के पानी म बुड़के येहा मर जही तभेच हमर मन के जीव बाचहीं।‘‘
सुईन ह लइका ला उही तरिया म ले जा के फेकिंस जिहां बनकैना रानी के बड़े बहिनी ह बुड़ के मरे रिहिस। सुइन ह जइसे ही बनकैना के बेटा ला पानी म फेंकिस वइसनेच सुकुमारी के आत्मा ह ओला अपन अछरा म झोंक लिस। अपन बड़े दाई के अछरा म गिरते ही लइका ह कमल के फूल बनगे।
येती जब राजा ह अपन राजदरबार ले राजमहल म आके बनकैना के जंचकी अउ लइका के बारे म पूछिस। तब जुन्ना रानी मन ईटा-पथरा ला लान के राजा के आघू म मढ़ा के किहिन- "इही ला तो तोर बनकैना रानी ह जनम दे हावे राजा साहब।"
राजा के एड़ी के रिस तरवा म चढ़गे। ओहा रिस के मारे बनकैना ला अपन बगीचा के कौंआ हांकनिन बना दिस।
येती जंगल के ओ तरिया म जउन भी जाय ओहा कमल के फूल ला देख के मोहा जाय। सब झन ओ फूल ला तोड़े के अड़बड़ उदिम करय फेर कमल के ओ फूल ह काखरो हाथ नइ आय।
फूल के सुगंध म जंगल के चारो कोती महर-महर महके लगिस। ये फूल के बात धीरे-धीरे राजा के कान म पड़िस।
एक दिन राजा ह अपन सेना अउ दरबारी मन संग ओ तरिया म पहुँचगे। राजा ह ओ फूल ला टोड़हूँ कहिके कनिहा भर पानी म गिस तब फूल ह गीत गाय लगिस कि "दाई कहंव बड़े दाई ओ राजा ह मांगत हे फूल।" तब तरिया भीतरी ले आवाज आइस कि "बेटा कहंव हीरा लाल रे राजा ला झन देबे फूल। " राजा ह फूल टोड़े बर जतका पानी भीतरी खुसरे फूल ह वतके दूरिहा के गहरी पानी म जावत जाय। राजा ह बड़ अचरज म पड़गे। ओहा नेंगी, जोगी, पाड़े, परधान सब ला फूल टोरे बर किहिस फेर फूल काखरो हाथ म नइ आइस। तब राजा ह खिसिया के राज भर म ढिंढोरा पिटवा दिस। जउन ह तरिया के कमल फूल ला टोर के मोर हाथ म दिही ओला एक थारी सोन के मोहर अउ पांच गांव इनाम म दे जाही।
राज भर के नर-नारी ह इनाम के लालच म फूल टोरे बर रंग-रंग के उदिम करिन फेर कोनहों ह ओ फूल ला नइ टोर सकिन। राजा अपन जुन्ना रानी मन ला फूल तोड़े बर किहिस फेर फूल उखरो हाथ नइ आइस। तब एक झन सियान ह राजा ला सलाह दिस कि अब तोर बनकैना जउन ला आप मन कौंआ हांकनिन बना दे हव उहू ला घला बला के देख लेव कहूं ओखरे हाथ म जस होही तब फूल ह टुट जही।
राजा के आदेश पा के मंत्री मन बनकेैना रानी ला बने नवा कपड़ा-ओन्हा पहिना के तरिया मेर लानिन। बनकैना रानी ह जइसे ही फूल ला तोड़े बर पानी म उतरिस वइसनेच फूल ह अपने अपन तीर म आगे। बनकैना रानी ह फूल ला तोड़ के अपन अछरा म रखिस। तब फूल ह लइका बनके खेले लगिस। जुन्ना रानी अउ सुईन ह लइका ला चिन्ह डारिन ओमन ला अपन भेद खुले के डर होगे। ओमन अपने आप बफले लगिन कि ये तो बनकैना के कोख ले उपजे लइका आय हमन अपन स्वारथ बर येला मरवाय के उदिम करे रहेन।
येला सुन के राजा के जी म आगी बरगे। ओहा अपन छै झन जुन्ना रानी मन ला देश निकाला के सजा दे दिस। अउ बनकैना रानी ल अपन रथ म बइठार के राजमहल म लानिस। राजा ला अपन वंश चलइया बेटा मिलगे। राज के नर-नारी मन ला राजकुमार मिलगे अउ बनकैना ला राजपाट। अब ओमन बने सुदर असन खइन कमाइन राज करिन। मोर कहिनी पुरगे दार भात चुरगे।
वीरेन्द्र सरल
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