. *इंटरव्यूह* (छत्तीसगढ़ी लघु कथा)
- डाॅ विनोद कुमार वर्मा
' बच्चा मँय काली भक्त हँव। काली माता तोर कल्याण करही।'
' धन्यवाद महराज! '
' बच्चा सौ रूपये दे दे। मँय तोर बर देवी माता ले मन्नत माँग लेहूँ! '
' बाबा, मोर करा देहे बर पइसा नि हे। इन्टरव्यूह देहे बर स्टेशन ले पैदल ही जावत हँव! '
' दान नि देबे त माता तोला इंटरव्यूह मा फेल करा देही। माता के प्रकोप ले डर! '
' माते तो जगत कल्याणी हे। ओकर अइसना निम्नस्तरीय सोच नि हो सके! '
' बेवकूफ, जा गंदी नाली मा गिर! मोर श्राप हे!!'
अमितेश के हाथ-पैर काँपे ला धर लीस फेर कोनो तरा वोहा संभल गे अउ इंटरव्यूह देहे पहुँचिच् गे।
थोरकुन दिन बाद रिजल्ट घोषित होइस। अमितेश नायब तहसीलदार सलेक्ट हो गे रहिस!
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