Sunday, 13 September 2026

भारतीय जनता मा जागृति फैलाय बर सार्वजनिक गणेश परब के शुरूवात होइस

 भारतीय जनता मा जागृति फैलाय बर सार्वजनिक गणेश परब के शुरूवात होइस 


हमर सनातन संस्कृति मा बुद्धि के देवता गणेश जी के अब्बड़ महत्व हे।कोनो भी काम ला चालू करे ले पहली भगवान गणेश जी के पूजा करे जाथे। येकर ले कोनो भी कारज हा बने सिद्ध 

होथे अइसे आस्था के रुप मा रचे- बसे हे। यज्ञ,पूजन, बिहाव, गृह प्रवेश अउ आने आयोजन मा गणेश जी के पूजा करे जाथे।गणेश जी हा माता- पिता ला सबले बड़का धाम मानिस। अपन बुद्धि  ले मूसवा सवारी गणेश जी हा पिता भगवान महादेव जी अउ माता पार्वती के गोल- भांवर घूम के सुघ्घर आशीष पाइस ।पहिली पूजन के वरदान प्राप्त करिन। तब ले भगवान गणेश जी के पूजा कोनो काम करे ले पहिली जरूर करे जाथे।


        सार्वजनिक गणेश पूजा के शुरूवात 


  श्री गणेश जी के स्थापना हिंदू पंचाग के अनुसार भादो मास के शुक्ल पक्ष चतुर्थी के दिन करे जाथे। दस दिन भक्ति  के धार गांव -गांव शहर -शहर मा बोहाय ला लगथे। अनंत चतुर्दशी के दिन श्री गणेश जी के विसर्जन करे जाथे।दस दिन तक सनातनी मन भक्ति रुपी गंगा मा गोता लगाथे।


इतिहासकार मन के मानना हे कि हमर भारत वर्ष मा गणेश पूजा के  शुरुवात वीर शिवाजी हा अपन महतारी जीजा बाई के संग मिलके मुगल मन ले लड़े बर जनता मन ला संगठित करे के उद्देश्य ले करे रिहिन। छत्रपति शिवाजी महाराज के बाद गणेश महोत्सव के परंपरा ला मराठा साम्राज्य के आने पेशवा मन घलो जारी रखिन।बछर 1892 मा भाऊ साहब जावले हा पहली बार गणेश मूर्ति के स्थापना करिन।

       जब हमर देश मा अंग्रेजी शासन रिहिस ता बछर 1893 मा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता लोकमान्य बालगंगाधर तिलक हा येला बड़का रूप मा महाराष्ट्र मा सुरुवात करिन। सार्वजनिक गणेश पूजा के उद्देश्य भारतीय जनता मा राष्ट्रीयता के भावना मा बढ़वार कर अंग्रेजी शासन ला इहां ले भगाना रिहिस। गणेश पूजा के माध्यम ले भारत के सभी जाति, धर्म के मनखे मन ला एक साझा मंच देय के उद्देश्य रिहिनी जिहां सब सकला के अपन विचार रख सके।



सार्वजनिक गणेश पूजा के बेरा मा वीर सावरकर, लोकमान्य तिलक अउ आने नेता मन अपन भाषण मा भारतीय जनता मा जागृति फैलाय के काम करिन। अंग्रेजी शासन के शोषण, अत्याचार अउ कतको गलत नीति के बारे मा बताके देश के आजादी बर लड़े बर प्रेरित करे गिस। गणेश पूजा के समय पढ़इया लइका मन देशभक्ति के नारा अउ अंग्रेजी शासन के विरुद्ध नारा लगाय। मराठा मन ला  छत्रपति शिवाजी कस विद्रोह करे बर प्रेरित करे जाय।


 तो ये प्रकार ले देखथन कि सार्वजनिक गणेश पूजा हा आजादी के लड़ाई के बेरा मा भारतीय जनता मा देशभक्ति के भावना ला बढ़वार करे, छुआछूत दूर करे, समाज ला संगठित करे के दिसा मा  सुघ्घर माध्यम बनिस। ये सार्वजनिक पूजा हा अंग्रेजी शासन बर जी के जंजाल बनगे अउ जनता मन बर देश के आजादी के लड़ाई बर माध्यम बन गे।  तिलक जी के उदिम ले पहिली गणेश पूजा परिवार तक सीमित रिहिन। गणेश परब के बेरा मा भाषण देवइया प्रमुख नेता मन मा वीर सावरकर, लोकमान्य बालगंगाधर तिलक, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बैरिस्टर जय कर,रेंगलर परांजये,पं. मदन मोहन मालवीय, मौलिक चंद्र शर्मा, बैरिस्टर चक्रवर्ती,दादा साहब खापर्डे अउ सरोजिनी नायडू के नांव शामिल हे।कवि गोविंद अपन कविता के माध्यम ले जनमानस मा छाप छोड़य।


डीजे संस्कृति अउ अश्लील गाना चिंतनीय 


    देश ला आजादी मिले के बाद कतको शहर मा आयोजन के बड़का स्वरूप जारी हे। गणेश परब बर प्रसिद्ध शहर मन मा मुंबई , पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरु, अहमदाबाद, चेन्नई, नासिक, जयपुर, दिल्ली,गोवा, नागपुर,इंदौर, राजनांदगांव , रायपुर के संगे संग आने शहर मा गणेश पूजा के बड़का आयोजन देखे ला मिलथे।लोगन भक्ति भाव मा रम जाथे। भारतीय संस्कृति ले संबंधित बड़का आयोजन होथे।लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम अउ कवि सम्मेलन के आयोजन के माध्यम ले जन समुदाय हा जुड़थे अउ सुनता के गांठी मा बंधे के संदेश देथे।समय के साथ येकर स्वरूप मा अब्बड़ बदलाव घलो होइस। दिखावा के चलते अड़बड़ खरचा करे जाथे। लोक संस्कृति के जगह डीजे संस्कृति हा मूल संस्कृति ला दबा के रख देथे। डीजे के कानफोड़ू अवाज हा पर्यावरण बर अउ मानव समाज बर खतरा होवत जात हे। आयोजन समिति मन ला चाही कि आयोजन मा अश्लील गाना ला झन बजाय। अपन संस्कृति   के बढ़वार बर काम करय।तभे गणेश पूजा के महत्ता हा कायम रहि। गणेश परब हा पारा, गांव,शहर प्रदेश अउ देश ला एकता के के सूत्र मा पिरोय के सुघ्घर काम करथे। जरूरत हे आधुनिकता के चकाचौंध मा घलो अपन मूल संस्कृति ला सहेज के रख सकन तभे सार्वजनिक गणेश पूजा हा सार्थक हो पाही।


        - ओमप्रकाश साहू अंकुर 

       सुरगी, राजनांदगांव

दुलार चन्द्रहास साहू

 दुलार 

                चन्द्रहास साहू         

        ‌‌   मो न 8120578897


सिरतोन अब्बड़ थकासी लाग गे आज बुता के करत ले। फेर बुता तो सिराबेच नइ करे।....अउ एक बुता सिरा जाथे तब आने बुता मुहूॅं फार के ठाड़े रहिथे। बेरा पंगपंगाती ले उठे हावंव अउ बिन अतरे सरलग बुता करत हॅंव तभो ले एको बुता नइ सिराये। कनिहा मा पीरा भरगे । माथ धमके लागिस। आज तो चहा घला नइ पीये हावंव। टिक.. टिक...करत दीवाल घड़ी ला देखेंव। नौ बजके पचपन मिनट, ....दस बजत हाबे। अब तो चहा के तलब अउ बाढ़गे। फेर बिन दूध वाला ....? इही तो दुख आवय बहिनी !  घरो घर कुकुर पोस डारे हाबे तब कहाॅं ले गाय के दूध मिलही ? 

ननपन मा तो पारा-परोस मा बिन माॅंगे दूध मही मिल जावय। इही बहाना राम भजन अउ हाल-चाल के जानबा घला हो जावय। खाॅंसी-खोखड़ी होवय वोतकी मा गाॅंव के कोरी अकन हितु-पिरितु मन पुछ डारे फेर अब तो एक दूसर के जानबा नइ होवय। भलुक सरी दुनिया हाथ मा धरे मोबाइल मा समागे हाबे फेर परोसी के सुध नइ लेवय। मरके अईठ जाथे, सर जाथे अउ‌ बस्साये लागथे तब जानबा होथे पारा-परोस के मन ला। अइसना तो बदलत हाबे हमर देश अउ समाज हा। हे भगवान ! अउ कतका बदलही हमर छत्तीसगढ़ हा...? मानवता अउ संवेदना हा सिरा जाही का ये दुनिया ले  ? जी घुरघुरासी लागिस जम्मो ला गुणत-गुणत। हाॅल के सोफा मा बइठ गेंव अब।

"काकी काहॅंचो नइ मिलिस दूध हा।''

दूध बर पठोये रेहेंव तौन लइका लहुट के बताइस।

"मेंहा तो जानत रेहेंव बाबू ! वोकरे सेती आगू ले चहा चढ़ा डारे रेहेंव गा !''

अब लइका ला मेहनताना देये लागेंव। मया के मेहनताना। देवर के लइका आवय आज पढ़े ला नइ गेये हाबे। वोकर स्कूल के मास्टर मन वेतन बढ़ाओ कहिके हड़ताल मा हाबे। तोस अउ बिस्कुट ला देयेंव अउ इंडक्शन कुकर ले चहा उतार के दू कप मा ढ़ारेंव। मोर कप मा लिम्बु निचोड़ेंव अउ पीये लागेंव चहा ला। ....अउ दू घूंट चहा के चुस्की लेयेंव अउ अइसे लागिस जइसे  मूड़ पीरा हा माढ़गे। अंग-अंग मा नवा ऊर्जा के संचार समागे। मने-मन अंगरेज मन ला धन्यवाद दे डारेंव। भलुक अब्बड़ अत्याचारी करे हव रे परलोकिया हो फेर चहा ला हमर देश मा लान के बने करे हव। चहा के आखिरी घूॅंट हा उरकिस अउ उदुप ले नजर हा बाथरुम कोती गिस। गंदला कपड़ा के पहार परे रिहिस। अब तो फेर माथ पीरा उमड़गे मोर, मोर लइका के अउ पटवारी साहब माने मोर पति परमेश्वर के कपड़ा-लत्ता। ...बनियान अउ चड्डी ? सिरतोन धरती फाट जातिस अउ समा जातेंव अइसे लागिस। ...फेर कहाॅं ले धरती फाटही ? महतारी हा बेटी के दुख ला नइ देख सकिस तब सीता बर धरती हा फाटगे...अउ मोर दाई हा मोर दुख ला नइ देख सकिस तब मोर बर वाशिंग मशीन बिसा के पठोये हाबे।.... रहा ले ले वो !  तब बुता करहूॅं। सिरतोन साहब ला अब्बड़ बरजेंव। भलुक अपन कुर्ता-पेंट ला झन कांच फेर चड्डी-बनियान ला धो देये करे कर जी अइसे फेर वो तो बड़का साहब आवय अउ मेंहा ..? तभो ले अब्बड़ ठोसरा मारथे। घर मा रही के का बुता करथस ?  चार झन के जेवन बनाथस।  दू कुरिया ला झाड़ू-पोछा करथस।..बस ताहन दिन भर सुतथस। टीवी देखथस येकर ले जादा का बुता करथस ? सिरतोन  दुनिया के जम्मो नारी के जिनगी हा इही यक्ष प्रश्न मा अरहजगे हाबे तब मेंहा कइसे बाॅंच सकहूं ?

चार झन के जेवन, दू कुरिया के जतन येकर ले जादा का बुता  ?

जम्मो ला गुणत-गुणत अब कनिहा अउ माथ मा  बाम लगा के दीवान मा ढ़लंग के कम्मर ला सोझियायेंव। झटकुन आँखी लटके लागिस। रातकुन बने ढंग के नींद नइ‌ परे  रिहिन। लइका के यूनिट टेस्ट रिहिस । बिहनिया ले स्कूल पठोये के संसो अउ रिविजन करवाये के जिम्मेदारी। सिरतोन लइका मन के भलुक यूनिट टेस्ट होथे फेर महतारी बर तो बोर्ड के वार्षिक परीक्षा हो जाथे। काॅपी कहाॅं हे मम्मी ? किताब नइ मिलत हे, तब चेप्टर के गोठ। ...अउ ट्यूशन वाली मैडम के नखरा। हाय ...! जम्मो ला मैनेज करना हे तभो ले गोसइया के ठोसरा । घर मा रही के का बुता करथस ? जइसे घर के देख-रेख हा कोनो बुता नो हरे।

खट्...खट् मोहाटी बाजिस अउ कपाट ला खोलेंव। लइका के पीठ  मा लदाये क्विंटल भर के बेग ला उतारेंव। अंग्रेजी मीडियम के स्कूल आवय ना, आनी-बानी के किताब-कॉपी के बोझा ला बोहो के जाये ला परथे उप्पर ले लंच बॉक्स अउ पानी बाॅटल....! लइका छटाक भर अउ बस्ता किलो भर। भाग ले सातवी पढ़हइया नोनी आवय। छोटका क्लास मा अतका तब बड़का क्लास मा अउ कतका बोझा रही ते ?

अब लइका हा सोफा मा बइठिस अउ मेंहा धकर-लकर जूता-मोजा ला हेरे लागेंव। अब लइका के नखरा शुरु होगे। बेटी यूनिफॉर्म गंदला होगे हाबे वो ! हेर दे अउ गोड़-हाथ ला धो तब फुरसुदहा बइठ के जेवन कर ले बेटी ! फेर बेटी हा तो कनघटोर होगे। कोनो गोठ ला नइ सुनत हाबे मोर। 

"आ बेटी ! मेंहा हेर देथो यूनिफॉर्म ला।''

बेटी तो अब रिमोट ला धर के फटफीट-फटफीट चैनल बदलत हाबे। एक कार्टून मनपंसद नइ आवत हाबे आने चैनल चालू करत हाबे। चेचकार के अपन कोती तीरेंव लइका ला अउ सोज्झे बाथरूम मा धकेलेंव तब जाके यूनिफॉर्म ला चेंज करिस टूरी हा। अइसे लागिस जइसे प्रथम विश्व युद्ध जीत गेंव मेंहा अउ अब द्वितीय विश्व युद्ध जीते के उदिम करत हॅंव। 

डायनिंग टेबल मा बइठारेंव अउ खाना ला परोसेंव - कढ़ी भात । लइका तो देखते साठ जच्छार होगे।

"ये का साग आवय मम्मी ?''

लइका तमतमावत किहिस।

"कढ़ी साग तो आवय बेटी ! मही नइ मिलिस तब आमा‌ खोटली डार के बनाये हावंव।''

लइका ला समझाये के उदिम करेंव फेर लइका तो अब बीख उगले लागिस ।

"मार्बल टाईल्स लगे चकाचक करोड़ों के घर । बड़का टीवी फ्रिज कुलर वेस्टर्न आर्ट ले साजे  एक लाख  पैसठ हजार रुपिया के डायनिंग टेबल अउ ओमा खाना खाना हे तब आमा खोटली के बने कढ़ी भात ....।  हा....हा.... ये गरीबो वाला खाना.....हा ...हा..... बहुत नाइंसाफी है मम्मी ये तो....। सबका हिसाब होगा....बराबर होगा।''

लइका कोनो फिलिम के डायलॉग मारे लागिस।

"चुप रह ! ढ़ोंगयही टूरी !''

लइका ला बरजेंव अउ मनाये लागेंव। 

"का करबे बेटी ! घर मा कुछू साग-भाजी नइ रिहिस तब इही ला बना डारे हॅंव वो ! सब्बो किसम के खाये ला परथे बेटी ! कभु दुखम तब कभु सुखम । ... रातकुन बनाहूॅं ना वो ! तोर पसंद के सब्जी- मटर पनीर। गउकिन ईमान से बेटी !''

मेंहा किरिया खा डारेंव।

"मम्मी सुनो !''

तुम्हारी आदत थी वादा तोड़ने की,

मगर, 

इन्ही आदतों ने मेरी आस तोड़ दी।''

टूरी अब शायरी झाड़े लागिस अउ गुनगुनाये लागिस।

वादा तो टूट जाता है....।

अपन हाथ ले दू कौरा खवाये हॅंव अउ जम्मो भात ला छोड़ दिस अब। हाथ धोइस अउ मोबाइल ला कोचके लागिस।

"खा ले बेटी!''

अब्बड़ मनाये हॅंव फेर जम्मो अबिरथा होगे। सिरतोन तो आवय मुही ला मार्केट जाये के बेरा नइ मिलिस। अउ हमर साहब जी ला ? भलुक अपन साहब मन बर दारु बिसाये बर शरम नइ आवय अउ घर के सब्जी-भाजी लेये बर शरम आथे, मार्केट मा झोला धरके रेंगे बर शरम आथे गोसइया ला। साग-भाजी बिसाये मा मान सम्मान सिरा जाही .? नाक कटा जाही....?...अउ दारु बिसाथे तब ?

"मम्मी ! मेंहा पिज्जा लेये बर जावत हॅंव।''

टूरी सायकल निकालत किहिस। अब्बड़ बरजेंव फेर नइ मानिस मोर गोठ ला अउ पैडिल मारत चल दिस साहू पिज्जा सेंटर कोती। पइसा तो धरे हस कि नही....पुछते रही गेंव। ....अउ हमर घर पइसा के का कमती ? जी कलपगे मोर। टूरी के बेवहार ला देखके। बड़की के ये रंग तब अभिन तो चौथी पढ़इया नान्हे टूरा के का होही भगवान ! ...आगू नांगर टेड़गा हाबे तब पाछू नांगर के का ठिकाना ? मेंहा तो सबरदिन मान-सम्मान देये बर सीखोये हॅंव। मीठ बोली बोले बर सीखोये हॅंव फेर लइका के बेवहार..? लइका उप्पर नही भलुक मोर परवरिश उप्पर प्रश्न चिन्ह लगगे। सिरतोन जम्मो कोई भोकवी कहिथे मोला। लइका मन घला। का सिरतोन भोकवी हावंव का ? जौन अपनेच लइका के परवरिश नइ कर सकंव। .. अउ लइका ला जम्मो सीखोना  महतारीच हा सीखोही, ददा के कोनो बुता नइ हे का ?

              जम्मो ला गुणत-गुणत लइका के छोड़ल भात ला खाये हॅंव। आरुग सितागे रिहिस फेर का करंव ? नइ खाये ला भावय तभो ले झन फेंकाये कहिके खाये ला परथे अन्न महतारी ला।  

खट्.... खट्... मोहाटी के कपाट बाजिस।

जाके कपाट ला खोलेंव अउ देखेंव। मोहाटी मा मुचकावत मोटियारी ठाड़े रिहिस। 

"सील-लोड़हा ले ले बहिनी !''

मेंहा आँखी ला नटेरत  ससन भर देखेंव मोटियारी ला । मुड़ी मा सील पट्टी बोहे रिहिस। खाॅंध मा चोंगा कस दोनगी  बोहे रिहिस अउ ओमा नानकुन लइका जुगुर-जुगुर देखत रिहिस। एक झन बारा तेरह बच्छर के नोनी हा अचरा ला धरके जेवनी कोती ठाड़े रिहिस अउ तीसरइया आठ दस बच्छर के टूरा हा डेरी कोती ठाड़े रिहिस।

"बेरा ले कुबेरा आ जाथो। नइ लेवंव सील लोड़हा। अभिन कुछू जरुरत नइ हाबे। मिक्सी-फिक्सी के जबाना मा कोन सील लोड़हा बिसाथे ते ?''

रट्ट ले कहेंव। मोटियारी के चमकत चेहरा बुतागे। 

"बहिनी! भलुक कुछू ला झन बिसा फेर मोर लइका मन ला खाये बर कुछू दे दे। ये डेरउठी ले कभू बिन खाये नइ गेये हावंव। गौटनीन दाई कहाॅं हाबे ? नइ दिखत हाबे। आरो करके बता दे, मनटोरा आये हाबे। सील लोड़हा वाली मनटोरा ला जानथे वोहा।''

मोटियारी मोर सास ला पुछत  किहिस अउ बरपेली घर मा खुसरगे। बइठे बर केहेंव अउ एक लोटा पानी पीये बर देयेंव। पानी ला पीयिस गड़गड़-गड़गड़ अउ आरो करे लागिस। येती वोती ला देखे लागिस। 

"दाई ! का करत हावस वो ? ये...गौटनीन दाई ! का करत हस वो ?''  

"नइ हाबे दीदी ! दाई हा।''

हार लगे फोटू ला देखावत केहेंव अउ मोटियारी बम्फाड़ के रोये लागिस।

"मोला कभु लांघन नइ पठोये गौटनीन दाई !...अहहा....।''

"सबरदिन मोर पहिरे ओढ़े बर नवा-नवा ओन्हा कपड़ा देयेस वो ! ....अहहा....।''

"मोर लइका मन ला अब्बड़ दुलार करे हस दाई...!....अहहा....। ''

गो....गो.... हिच्च....।

मोटियारी ससन भर रोइस । सिरतोन अतका तो बटवारा लेवइया वोकर बेटी मन घला नइ रोइस अपन दाई के मरनी मा। आज सौंहत दिखत हाबे लहू ले जादा गहरा रिश्ता अनचिन्हार ले घला हो सकथे। मोरो आँखी ले अब अरपा-पैरी उफान मारे लागिस। अपन मन ला समझायेंव अउ चुप होयेंव। जम्मो कोई बर जेवन निकालेंव अब। मोर बेटी के जहुंरिया लइका तो अघागे खावत ले कढ़ी भात ला। एकसरिया, दूसरइया, तीसरइया तीन परोसा खाये लागिस नोनी हा। ...अउ मोटियारी हा घला दूसरइया माॅंग डारिस।

"आमा खोटली डार के कढ़ी ला अब्बड़ सुघ्घर बनाये हस बहिनी ! अब्बड़ गुरतुर हाबे वो। अघावत ले खाये हॅंव वो ! अब्बड़ दिन मा।''

मोटियारी किहिस। सिरतोन वोकर चेहरा दमकत रिहिस अब। उछाह के उजास आवय येहा। दोनगी के दूधपीया लइका घला ढ़कार मारत हाबे अब । 

"अब तो किचन मा मिक्सी अउ आनी-बानी के जिनिस आगे हे बहिनी ! हमरो धंधा वोकरे सेती मार खा गे हाबे वो ! अब अइसन पथरा के का बुता ? तभो ले मन नइ माढ़े अउ किंजार लेथन गाॅंव -गाॅंव, पारा-पारा। फेर कतका ला किंजरबे वो ?  पहिली तो मोहाटी मा सुस्वागतम लिखाये राहय। कपाट ला ढ़केल के चल देवन। अब तो घरो घर कुकुर पाले हाबे। कुत्ते से सावधान लिखाये रहिथे। डर लागथे काकरो घर जाये-आये बर। हबराहा कुकुर मन गरीब ला देखते साठ भुके लागथे अउ मोटियारी होगे तब तो दू गोड़ के कुकुर घला लार टपकाथे।''

मोटियारी अब्बड़ मरम के गोठ ला किहिस अउ अब्बड़ आसीस दिस।

"तोर कुटूम्ब के मान बढ़े वो !''

"लोग लइका मन दूधे खावय अउ दूधे अचोवव वो !''

"तोर गोड़ मा काँटा झन गढ़े बहिनी!''

"....अउ तोर चुरी अम्मर राहय वो बहिनी! तोर डीही मा दीया बरत राहय बहिनी ! अउ आनी-बानी के आसीस।''

अहा......मोटियारी के अतका आशीर्वचन। मन अघागे। सौंहत कोनो भगवान उतरे हाबे अँगना मा अइसे लागत हाबे। 

अब तो मोर लइका घला आगे रिहिस। पिज्जा ला धरके। मोर रिस तरवा मा चढ़गे। 

"बेटी! भात-बासी ला खाये बर केहेंव तब मुॅंहू नइ चलिस। ....अउ पिज्जा नपाके ले आनेस। कहाॅं ले पइसा पायेस तौनो ला बताना उचित नइ समझेस। जौन ला नइ खावंव कहिके छोड़े रेहेस। तौने ला ये लइका अउ सील वाली दीदी हा अघावत ले खाइस। अभिन नानचुन हावस जादा झन उड़ा वो !'' 

"मम्मी ! तेहां घलो तो कभु पिज्जा नइ खाये हावस वो! तोरो मन करत होही ? मोर नानी हा पइसा धराये रिहिस तौने पइसा ले लाने हॅंव वो  पिज्जा ला । .....अउ अकेल्ला खाये के रहितिस तब उही कोती ले खाके नइ आ जातेंव मम्मी।''

".... ले मम्मी खा ले।''

बेटी अब एक प्लेट मे ले आनिस मोर बर पिज्जा ला अउ आने प्लेट मा मोटियारी बर ले आनिस।

"अई, अइसना रहिथे बहिनी ! पिज्जा हा।''

मोटियारी देख के किहिस अउ लइका मन घला ललचावत रिहिस।‌... अब मोटियारी अउ वोकर लइका मन घला पिज्जा खावत हाबे। अउ मोला तो अपन हाथ ले मोर मयारुक बेटी हा खवावत हाबे। 

"....अउ तेहां बेटी ?''

ले मम्मी तेहां ससन भर खा। मेंहा तो खातेच रहिथो। 

नोनी किहिस अउ एक कुटका ला दुलरवा बेटा बर राखिस। वोकर स्कूल के छुट्टी सांझकुन होही। देवर के बेटा घला आ गे रिहिस अब जम्मो कोई बाॅंट के पिज्जा खाये लागेंन । 

"ले बहिनी बइठो। अब, महूं हा  सोज्झे अपन घर जाहूॅं। तुंहर मया पाके आज मइके के सुरता आगे। मोर कोती ले येला राख ले।''

मोटियारी किहिस सील ला देवत। 

"नइ राखव दीदी ! तेहां बेचके दू पइसा कमाबे। मोला अभिन जरुरत नइ हाबे फेर जब जरूरत होही तब तोर करा ले बिसा लुहूॅं।''

"नही बहिनी ! येला अब अपन घर नइ लेगो मेंहा। तुंहर घर के मोर गौटनीन दाई हा अब्बड़ हियाव करे रिहिस हमर‌। अब्बड़ करजा हाबे मोर उप्पर।

"तभो ले झन दे।''

".....मोर भतीजी के बिहाव बर वोकर फुफू कोती ले ये जोरन आवय मोर कोती ले राख ले। नोनी मन कब बड़े हो जाथे जानबा नइ होवय। अभिन ले बर-बिहाव के जोरन ला करत रहिबे तब एक-एक जिनिस हा वो  बेरा बर पूरा होथे। राख ले बहिनी मोर गरीब के चिन्हारी ला। ..अउ जिनगी के का भरोसा बहिनी ! जीयत रहिबोन कि उड़ा जाबोन ते ..? वोकरे सेती राख ले।''

मोटियारी अब गिलोली करे लागिस । अब तो मना करे के कोनो जगा घला नइ दिखत हाबे। एक नत्ता-गोत्ता अउ जुड़त हाबे। एक मया अउ बाढ़त हाबे।

"ठीक हाबे ....ले आन।''

महूॅं हा अब वोकर मया के आगू मा हरा गेंव। सील ला झोकेंव अउ अब देवता कुरिया मा लेग गेंव।... अउ अब जतन देयेंव। अब अइसे लागत हाबे जइसे अब मोर नोनी हा बड़े  होगे अउ अब बिहाव के तियारी करत‌‌‌ हाबो। ....अउ सिरतोन दाई-ददा मन तो बेटी के बिहाव के तियारी वोकर जनम धरते साठ शुरु कर देथे। 

कुरिया मा गेयेंव अउ सौ-सौ के दू नोट लानके मोटियारी के दूनो लइका ला धरायेंव।

भलुक अब्बड़ नही किहिस फेर आज नत्ता-गोत्ता जुरियावत हाबे।

"अपन मामी कोती ले देवत पइसा ला मना नइ करे भांची-भांचा हो !... झोंक ले। ...अउ येदे लुगरा मोर ननंद बर...!''

मेंहा केहेंव अउ मोटियारी के खाॅंध मा नवा लुगरा ला डार देंव। मोटियारी अब एक बेरा अउ गोहार पार के रो डारिस। अउ सिरतोन महूं तो रो डारेंव नवा नत्ता-गोत्ता पाये के उछाह मा। खोर के निकलत ले देखेंव मोटियारी अउ लइका मन ला। ...अउ मोर नोनी के उप्पर नजर थिरागे। आमा खोटली के कढ़ी भात खावत रिहिस।

"अब्बड़ सुघ्घर बनाये हावस मम्मी सब्जी ला। मजा आगे अउ ये ईज्जा-पिज्जा मा पेट नइ भरे मम्मी ! पेट भरथे ते तोर हाथ के जेवन मा। मोर हिरोइन मम्मी !''

लइका अब दाई बरोबर दुलार करत महूं ला खाना खवावत हाबे।...एक कौरा.... दू कौरा.....।

...अउ मोर आँखी मा फेर अरपा-पैरी छलछलाये लागिस। सिरतोन नारी के मन कतका कोंवर होथे...?  दू टिपका आँसू बोहाइच जाथे।


------//-------//--------//----

              चन्द्रहास साहू 

                 धमतरी

छत्तीसगढ़ी-व्यंग अजी----------।

 छत्तीसगढ़ी-व्यंग

    अजी----------।

रेडियो म एक ठन धारावाहिक देथे अजी सुनिये।सुनबे तेमे मन गदगद हो जथे।अजी सुनिये। कोनो मन लगाके गोठियाथे ताहन ते जान जा कोनो न कोनो खुशखबरी नहीं ते बुता जरूर हे।

          हमर घरवाली मुचकात -मुचकात किहिस अजी सुनिये,अजी सुनिये।मे अकचकागेंव आज सुरुजनरायण कदे डहर ले उवत हे भगवान। महूं कहेंव बोलो कहिये।वो न आज बड़ खुशी के दिन आय। घरवाली कहिथे वो न घर में आज एकोठन काकरोच नइ हे। महूं ह ठट्ठा दिल्लगी करत कहेंव थोड़ा बहुत समाचार,वमाचार, सोसल मिडिया देखेकर हो सकत हे जंतर-मंतर पहुंच गिस होही।ये हो घलो सकथे भई जब अमेरिका ले काकरोच आ सकत हे त हमर घर के घला जा सकत हे। फेर जंतर-मंतर के छोड़ दूसर जगा जाय बर एलर्जी हे। घरवाली अकबकागे कथे अई टार दई तहूं कईसे गोठियाथस ओसनो भला हो सकत हे।नाली ले किचन, किचन ले नाली इंकर ठऊर आय। काकरोच के दऊंड़ नाली तक।

            मे घरवाली ल समझावत कहेंव तहूं ह कुंआ के मेचका कस होगे हस जी।ये बेंदरा मन अब मनखे ल नी डरराय तईसे ये काकरोच मन हो गेहे।सब अपन- अपन बर लड़थे तईसे यहू मन लड़त हे।अऊ अपन हक बर लड़ना चाही।वह खुन कहो किस मतलब का जिसमें उबाल का नाम नहीं।देश के कोना -कोना ले काकरोच सकलाय हे। कतनो मन ल देखबे ते अईसे लागथे कोनो फ़ैशन शो के प्रतियोगीता चलत हे।फैशन शो के रिकार्ड ल इही मन टोरत हे।हमर परोसी पढ़ें लिखे लईका फुहरे फुहर गारी देत राहय मे कहेंव कुछु लाज सरम हे? तैं तो काकरोच मन ले गे गुजरे हस। पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोय। संस्कार घलो जरुरी हे।

          

              घरवाली कहिथे हमन तुंहर बर तीन -तीन दिन ले तीजा उपास रहिथन थोड़को हियाव चिंता नी करो जी। महूं कहेंव रात के बारा बजत ले करूभात अऊ फरहरी म दमोर के घलो खाथो जी। फेर तुमन काकरोच के आगू म फेल हो।ऐमन तो महिना भर झेल देथे।

सोंचथों ओकर घरवाली के उमर कतिक लम्बा होही।उंकर देखा सीखी मे घरवाली मन आमरन अनसन झिन कर दे आज ले तीजा के उपवास पतिमन करही। हमको चाहिए आजादी, हम सबको चाहिए आजादी,हम लेकर रहेंगे आजादी?


        घरवाली फेर चिल्लाय लगिस अजी सुनिये, अजी सुनते हो। महूं मसका लगात कहेंव बोलो कहिये? घरवाली कहिथे तब तो न आज ले हमर घर हिट स्प्रे के पईसा बांचही।उही पईसा ल थोड़िक- थोड़िक सकेल पुरो के लईका ल डाक्टर बनाबो।गोठ तो बने गोठियावत हस फेर हम लईका ल काकरोच असन डाक्टर नी बनान।जेमे संस्कार नाम के कोनो गुन नइ हे।जिंकर खाय के दांत अलग अऊ देखाय के दांत अलग।जे विरोध के आंड़ मे देश के मान सम्मान ल गिराय। विरोध करई अऊ विद्रोह करई अलग अलग बात आय।वो तो अच्छा हे हमर देश म बोले के आजादी हे।अऊ बोले के मतलब ये नई हे कुछ भी बोलो।

फ़ालतू बस नो बकवास।


       फकीर प्रसाद 

        साहू फक्कड़ 

           सुरगी ✍️ 🙏

छत्तीसगढ़ी पंडवानी परंपरा अउ पद्मविभूषण तीजनबाई ( 8 अगस्त जनम दिन म विशेष आलेख )

 छत्तीसगढ़ी पंडवानी परंपरा अउ पद्मविभूषण तीजनबाई 

( 8 अगस्त जनम दिन म विशेष आलेख )            


 हमर भारतीय लोक गायन परंपरा म छत्तीसगढ़ी पंडवानी   के बड़का स्थान हे। जेन हमर लोक संस्कृति के आधार आए  । पंडवानी ह महाभारत के आख्यान अउ कथानक के संग संग छत्तीसगढ़ी लोकजीवन, लोक चेतना अउ सांस्कृतिक अस्मिता ल घलो पोठ करथे । हमर छत्तीसगढ़ के लोककला अउ लोकगाथा ल राष्ट्रीय अउ अंतर्राष्ट्रीय पहिचान दिलाए म पद्मविभूषण तीजनबाई के बड़का योगदान हे। सुर्रा, करधन, पहुँची,  अइठी, पुतरी,खिनवा ,लाली रंग के कोष्टउंहा लुगरा - पोलखर संग ठेठ छत्तीसगढ़ी संवाद अउ सवांगा म  बिंदाबन बिहारी लाल के जय घोष अउ मोर सना नना नना मोहन.... के अलाप अउ तंबूरा के  तान ह सोज्झे सुनइया मन ल अपन तीर आकर्षित करथे । संगीत के गुरतुरपन, अभिनय अउ रागी के संग कथा संवाद के सरलग जुड़ाव छत्तीसगढ़ी पंडवानी के बिसेसता आय।


छत्तीसगढ़ी पंडवानी ह मूलतः संघर्ष, प्रतिरोध, न्याय अउ वीरता के लोकगाथा हरे जेमा विशेष रूप से भीम के पराक्रम ह जादा प्रभावी हे। पंडवानी ह महर्षि वेदव्यास रचित महाभारत कथा के छत्तीसगढ़ी लोकगायन रूप आय। सबलसिंह चौहान (रतनपुर) के नाव छत्तीसगढ़ी पंडवानी के लोकरुप सिरजन म प्रमुखता से ले जाथे । पंडवानी के दूठन शैली वेदमती अउ कापालिक छत्तीसगढ़ म प्रचलित हे। तीजनबाई ह कापालिक शैली ल अपन कला के आधार बनावत ओमा नवाचार करके बिस्तार दिस अउ देश के लगभग सबो आकाशवाणी दूरदर्शन केंद्र म अपन प्रस्तुति देके पंडवानी ल लोक कंठ  के आवाज बना दिस।


तीजनबाई के जिनगी संघर्ष साहस अउ आत्मविश्वास ले भरे रिहिस। तभे तो घर, समाज अउ पारा परोस के ताना, रुढ़िवादी सोंच ह घलो ओला आघू बढ़े म नइ रोक सकिस । कतको कठिन समे म हार नइ मानिस अउ सरलग अपन कला साधना म लगे रिहिस। एक समे म घर, परिवार, समाज अउ अपन पति तक ल छोड़ दिस फेर अपन तंबूरा ल कभू नइ छोड़िस । उही जिद, संकल्प अउ पंडवानी बर अगाध समर्पन ह ओला आघू बढ़ेबर प्रेरित करिस।


पद्मविभूषण तीजनबाई के जनम 8 अगस्त 1956 म दुरुग जिला के गाँव अटारी (पाटन) म होय रिहिस। अटारी ह तीजन के महतारी सुखबती पारधी के ससुरार आय। इंखर पिताजी के नाव चुनुकलाल पारधी हे। बाद म ओमन परिवार सहित अपन नाना बृजलाल पारधी के गाँव गनियारी (उतई )  म रेहे लगिन। तीजनबाई अपन नाना ले पंडवानी के कथा सुने के बाद म प्रभावित हो के धीरे धीरे अभ्यास करिस अउ ओखर ले पंडवानी के दीक्षा लिस अउ 13 बच्छर के उमर म पंडवानी के यात्रा सुरू होगे।


कोनो कोनो मन 24 अप्रैल 1956 ल तीजनबाई के जनम  तिथि बताथे जेन ह प्रमाणित नइ लगय। काबर के तीजनबाई ह खुदे दूरदर्शन अउ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कतको भेंटवार्ता  म कहिन के "तीज के दिन मोर जनम होइस तेखरे सेती दाई ह मोर नाव ल तीजन रख दिस । "

इहाँ तीज के मतलब छत्तीसगढ़ म भादो म मनाथन तेन तीजा से बिल्कुल नइहे। बल्कि सावन महिना म शुक्ल पक्ष के तृतीया तिथि ले हे । जेला हमन श्रावण तीज, हरियाली तीज, मधुस्रवा तीज घलो कहिथन । ये तिहार ल उत्तर भारत म  विसेस रूप से मनाए जाथे । ये अधार ले तीजनबाई के जनम 8 अगस्त 1956 ह ज्यादा प्रमाणित अउ सही लगथे । ओखर जनम ल 24 अप्रैल अउ हरितालिका तीज ले जोड़ना उचित नइहे।


तीजन के जनम के बाद म एकदिन अइसे भी होइस। ओला जनम धरे दस ले बारह दिन होय रिहिस होही । सुखबती ह एकदिन तीजन ल कुंदरा म सुता के नहाय ल धर लिस । ठउका निझमहा देख के दुबली पतली तीजन ल कुकुर ह उठा के लेगत रहय। सुखबती के नजर परगे चिल्लइस । पारा भर सकलागे कुकुर के पीछू सब भागे लागिस। गाँव के सियार म  तीजन ल पखरा के ओधा म छोड़ के कुकुर ह भाग गे। नजर परिस त कोनो बड़े अलहन ले बांचगे हमर पंडवानी के विरासत ह ।


पद्मविभूषण तीजनबाई के दाम्पत्य जीवन ह घलो बड़ संघर्षमय रिहिस। 12 बच्छर के उमर म पारधी समाज के रीति रिवाज संग ओखर बिहाव (देवबलौदा) म होइस। बिहाव के बाद म अपन पंडवानी गवई ल नइ छोड़िस तेखर सेती कुछ महीना म उन ल अपन पति ले अलग होना परिस अउ समाज ह घलो तीजन ल छोड़ दिस।

कुछ बच्छर बीते के बाद तीजनबाई के बिहाव तुकाराम वर्मा (मटिया) संग होइस। ये बिहाव ह तीजन के जिनगी म ठहराव लाय के काम करिस। तीजन के कोख ले सत्रुहन पारधी, दिलहरण पारधी अउ कौसल पारधी जइसे बेटा मन के जनम होइस। पंडवानी गायबर मना करिस त कुछ बच्छर म पति तुकाराम वर्मा संग घलो तलाक होगे। तीजनबाई अब फिर से अपन लइकामन संग गनियारी म रेहे लगिस।

जिनगी म कतको समस्या अउ कटुता के बाद भी तीजनबाई अपन कला साधना ल सरलग जारी रखिस। तुकाराम वर्मा के निधन के बाद म ओखर मंडली के पंडवानी कलाकार तुलसीराम देशमुख (बेलौदी) ह चुरी पहिरा के तीजन संग बिहाव करिस अउ बहुत दिन तक ओखर साथ रिहिस। फेर बाद म तुलसीराम देशमुख अपन समाज के सर्त अउ नियम ल पालन करत अपन पहिली पत्नी कमला देशमुख के लइका मनके बिहाव खातिर तीजनबाई से अलग होगे अउ अपन समाज के मुख्यधारा म मिलगे।


 पंडवानी गायन खातिर ओखर समर्पन अउ एकाग्रता ह अद्भुत रिहिस चौबिसों घंटा अंतर्मन म कृष्ण के बांसुरी के आवाज ह गुंजय। मीरा के भक्ति असन तीजन के भक्ति घलो अगाध अउ अबाद होगे। झंउहा धर के गोबर बीने के बहाना गाँव ले बहिरी सुन्ना जगा म जा के पंडवानी के रियाज करय। देखइया मन जकही - पगली घलो कहय। फेर कतरो उलाहना आलोचना गारी -बखाना अउ मारपीट के बाद घलो तंबूरा अउ पंडवानी के धुन म मस्त रिहिस तीजन। अपन जोवकोपार्जन बर छिंद के पत्ता टोरई, सरकी अउ बाहरी बना- बना के गाँव गाँव सहर नगर म बेचई अउ खाली समे म पंडवानी गवई तीजन के दिनचर्या रिहिस। ओखर कला ल देख के भेलई इस्पात संयंत्र ह ओला नउकरी  घला दिस। ये नउकरी ह तीजनबाई के उन्नति अउ कला के बिस्तार के आधार बनिस।


तीजन बाई के विलक्षण प्रतिभा के परिचय ए बात ले मिलथे कि ओमन महाभारत के अठारहों परब के कथा ला कंठस्थ कर ले रिहिन । ओमन प्रसिद्ध निर्देशक श्याम बेनेगल के धारावाहिक ‘भारत एक खोज’ म घलो पंडवानी गाइन। मध्यप्रदेश के तत्कालीन सांस्कृतिक सचिव अशोक वाजपेयी, आदिवासी लोककला परिषद के विशेषज्ञ नवल शुक्ल, प्रसिद्ध समाजशास्त्री श्यामा चरण दुबे अऊ सुप्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर के मार्गदर्शन म दिल्ली, भोपाल , मुंबई सहित विदेश मन म घलो उंखर 

पंडवानी के यात्रा सुरू होइस। ओमन फ्रांस, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, इंग्लैंड, ट्यूनीशिया, तुर्की, ओमान, साइप्रस अऊ माल्टा सहित अनेक देस मन म पंडवानी के प्रस्तुति देके भारतीय लोकसंस्कृति के गौरव ला विश्व मंच म स्थापित करिन। खास करके पेरिस म ओमन लगभग आठ बार अपन प्रस्तुति दिन । अब तक ओमन 250 ले आगर शिष्य-शिष्या मन ला पंडवानी के शिक्षा दे चुके हवय, जेमा भारत के अलग-अलग राज, छत्तीसगढ़ अउ फ्रांस सहित कई देस के कलाकार मन सामिल हवय । तीजनबाई के पंडवानी यात्रा म अउ ओखर सम्मान संग मंचीय कार्यक्रम के लेखा जोखा म ओखर निज सहायक मनहरन सार्वा के घलो बड़का योगदान हे। 


तीजन बाई ल लोककला अउ पंडवानी परंपरा के संरक्षण, संवर्धन खातिर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर म कतरो प्रतिष्ठित सम्मान मिले हवय। भारत सरकार ह कला के क्षेत्र म

ओमन के उल्लेखनीय योगदान बर सन् 1988 मं पद्मश्री, 1995 म संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार अऊ 2003 म देस के तीसरइया सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मभूषण प्रदान करिस। उही बच्छर गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर ह ओमन ला डी.लिट्. (मानद) के उपाधि देके सम्मानित करिस। एखर बाद 2006 म पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर ह घलो ओमन ला मानद डी.लिट्. के उपाधि प्रदान करिस। सन् 2007 म पारंपरिक मंचीय कला अऊ प्रदर्शन के क्षेत्र म उत्कृष्ट योगदान बर ओमन ला नृत्य शिरोमणि पुरस्कार देके सम्मानित करे गिस। सन् 2012 म लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स ह ओमन ला ‘पीपुल ऑफ़ द ईयर’ सम्मान ले नवाजिस। एखर बाद 2016 म एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी शताब्दी सम्मान, 2018 म जापान के प्रतिष्ठित फुकुओका पुरस्कार (संस्कृति संरक्षण अऊ संवर्धन बर) अऊ 2019 म भारत के दूसरइया सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मविभूषण प्रदान करे गिस । ये सब्बो सम्मान ह भारतीय लोककला, खास करके पंडवानी परंपरा ल  विश्व स्तर म पहचान दिलाय म उंखर असाधारण योगदान के प्रमाण आय।


छत्तीसगढ़ के पंडवानी परंपरा के विकास अऊ संरक्षण म अनेक कलाकार मन के उल्लेखनीय योगदान हे। ए परंपरा के पुरोधा झाड़ूराम देवांगन  (बासिन) अउ नारायण वर्मा ( रावणझीपन) ले सुरू होके पुनाराम निषाद, रेवाराम साहू ,दानी परधान, गोगिया परधान, रामजी देवार, चेतन देवांगन, प्रह्लाद निषाद, परख दास वैष्णव, मोहन वैष्णव, सुखराम यादव , गणपत साहू, प्रेमलाल साहू , पं. दुर्ग्यंत त्रिवेदी, अर्जुन सेन, भरत निषाद, गौतम, नरेंद्र मांडले, सौरभ पारधी, खेमलाल चेलक, जामवंत निषाद ,गुलशन‌ निषाद अऊ संतराम जइसन कलाकार मन अपन विशिष्ट गायन अऊ कथावाचन शैली ले पंडवानी लोककला ला समृद्ध बनाइन। ए कलाकार मन के अथक साधना के परिणाम स्वरूप पंडवानी ल व्यापक पहचान मिलिस अऊ देस के प्रतिष्ठित मंच मन म प्रस्तुति देय के अवसर घलो कलाकार मन ल प्राप्त होइस।


महिला कलाकार मन घलो इहाँ के परंपरा ला राष्ट्रीय अउ अंतर्राष्‍ट्रीय स्तर तक पहुँचाय म खास भूमिका निभाइन हे। जेमा पद्मविभूषण तीजन बाई, शांति बाई चेलक, लक्ष्मी बंजारे, ऋतु वर्मा, उषा बाई बारले, रेखा निषाद, प्रभा चेलक, दूजन बाई, सीमा घोष (कलकत्ता), सुलैना मानिकपुरी, तरूणा साहू, चंद्रिका सोनवानी, त्रिवेणी साहू, हेमलता पटेल, मीना साहू, रंभा देशमुख,निर्मला भट्ट, अमृता साहू, रोशनी नागवंशी, शिवकुमारी पटेल, जानाबाई, खेमिन निषाद, अनामिका निषाद ,मिथिलेश जगत, नंदिनी पटेल, किरण वैष्णव, अक्ती निषाद, गंगाबाई मानिकपुरी, रानू निषाद, पूनम सिन्हा, गायत्री राजपूत, समप्रिया पूजा निषाद, रोशनी तिरपुरे, तुलसी मानिकपुरी, उर्मिला यादव,खेमिन यादव, वेदकुमारी मानिकपुरी, यशोमती सेन, भामिनी मानिकपुरी, पुष्पा निषाद, दुर्गा साहू, आराध्या साहू, होमिनबाई निषाद, टोमिन निषाद, सरोजनी निषाद, टिकेश्वरी निषाद अउ जंत्रीदेव जइसन कलाकार मन के योगदान बड़ सराहनीय हवय। 


5 जुलाई 2026 के दिन पंडवानी के महान कला-साधिका पद्मविभूषण तीजनबाई के निधन ले पंडवानी के गौरवशाली परंपरा अउ युग के अवसान जरूर होइस, फेर पंडवानी परंपरा के बिकास म उंखर  योगदान हमेसा अमर रही। भारत के संग दुनिया भर म  पंडवानी के संरक्षण, संवर्धन खातिर तीजनबाई के  कलात्मक अवदान ल हमेसा श्रद्धा अउ सम्मान के संग सुरता करे जाही। विनम्र श्रद्धांजलि। 

        

लखनलाल साहू 'लहर'

मोखला, राजनांदगांव

मो. 9630312197

आजादी के लड़ाई म राजनांदगांव जिले के योगदान

 आजादी के लड़ाई म राजनांदगांव जिले के योगदान 


  जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस म गरम दल के नेता मन के धाक जमे लगिस तब भारतीय जनता म अंग्रेजी सासन के विरुद्ध भीतरे- भीतर आगी सुलगत 

गिस। वो समय लाल- बाल -पाल के रूप म लाला लाजपतराय, लोकमान्य बालगंगाधर तिलक अउ विपिनचंद्र पाल के अब्बड़ सोर रिहिस। 1905 म बंगाल विभाजन ले ये चिंगारी ह आगी बन गे अउ जनता मन अंग्रेज़ी सासन बर बागी बनगे। हमर देश के नेता मन जनता ल समझाय लगिस कि अंग्रेजी सासन फूट डालव अउ राज करव के नीति ल अपना के शुरू ले सासन करत आवत हे अउ बंगाल के विभाजन येकर एक बड़का उदाहरण हे।  देशभर म अंग्रेजी सासन के विरुद्ध वातावरण बनिस। अइसन बेरा म 1905  म राजनांदगांव में ठाकुर साहब के अगवाई म छात्र मन के पहली हड़ताल होइस ।ठाकुर साहब अपन सहयोगी छविराम चौबे अउ गज्जू लाल शर्मा के संग मिलके राजनांदगांव म राष्ट्रीय आंदोलन ल ठाहिल बनाइस। ये देश के छात्र मन के पहली हड़ताल माने जाथे।

अइसन दौर म छत्तीसगढ़ के कांग्रेस सदस्य मन घलो गरम दल के नेता मन ले प्रभावित होके उंकर संग सामिल होगे। बछर 1907 म सूरत म आयोजित कांग्रेस अधिवेशन म कांग्रेस दू भाग म बंट गे। अब उदारवादी नेता मन के जगह उग्रवादी दल के नेतामन के दौर चालू होगे अउ अंग्रेजी सासन के सोसन के विरुद्ध जनता संगठित होय लगिस। अइसन बेरा म छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले म घलो आजादी खातिर जन जागृति फैलाय बर सुघ्घर कारज होइस। छत्तीसगढ़ म स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के अर्जुन ठाकुर प्यारेलाल लाल सिंह बछर 1909 म राजनांदगांव म सरस्वती पुस्तकालय के स्थापना करिन। आगू चलके सरस्वती पुस्तकालय ह राजनीति गतिविधि के ठउर बनगे। अंग्रेजी सासन ल पता चलिस त सरस्वती पुस्तकालय ल जब्त कर लिस।


  बछर 1915 म महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका ले भारत लहुंटिस अउ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस म सामिल होगे। गांधी जी ह देश के दसा ल जाने खातिर दौरा करिन। अंग्रेज मन के सोसन ल जानके वोहा अहिंसक ढंग ले लड़ाई के योजना बना के जन जागृति के सुघ्घर कारज करिन। धीरे से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस म गांधी जी के धाक जमगे जेहा आजादी तक जारी रिहिस। गांधी जी के मानना रिहिस कि अंग्रेजी सासन ले अहिंसा अउ सत्याग्रह ल अपनाके लड़ना ठीक रहि। येकर प्रयोग गांधी जी ह दक्षिण अफ्रीका म मजदूर मन के हक खातिर लड़ाई म कर चुके रिहिन। भारत म खेड़ा सत्याग्रह के माध्यम ले गांधी जी अहिंसक आंदोलन के सुरुआत करिन। सितंबर 1920 में कलकत्ता म लाला लाजपत राय के अध्यक्षता म कांग्रेस के विशेष अधिवेशन आयोजित होइस ।येमा गांधी जी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन चलाय के स्वीकृति दे गिस ।फेर कांग्रेस के अधिवेशन नागपुर में 26 दिसंबर 1920  म होइस जेकर अध्यक्षता विजय राघवाचार्य करिन ।ये अधिवेशन म हमर छत्तीसगढ़ ले आने नेता मन  संग ठाकुर प्यारेलाल सिंह ह सामिल होइन।रोलेट एक्ट जइसे करिया कानून अउ जलियांवाला बाग हत्याकांड के सेति देश भर म अंग्रेज सरकार के विरुद्ध चिंगारी सुलगत रिहिस हे। अइसन समय म गांधी जी का आह्वान कर चुके रिहिन कि अंग्रेज

 सरकार के गुलामी ले छुटकारा पाय खातिर स्थानीय समस्या ल आधार बना के असहयोग आंदोलन चालू करय। 

ठाकुर प्यारेलाल सिंह ह असहयोग आंदोलन के समय वकालत छोड़के राजनांदगांव म राष्ट्रीय विद्यालय के स्थापना करिन ।हजार भर के संख्या म चरखा बनवा के जनता ल बांटिस । चरखा के महत्तम समझाइस अउ खादी के प्रचार करिन। ठाकुर साहब खादी पहने लागिस।राजनांदगांव ले हाथ में लिखे पत्रिका घलो निकालिन जउन ह जन चेतना बर अब्बड़ सहायक होइस। 


 गांधी जी जब पहिली बार 20 दिसंबर 1920 म छत्तीसगढ़ आइस त  इहां के नेतामन के संगे -संग जनता मन म अब्बड़ उछाह छागे। गांधी जी कंडेल नहर सत्याग्रह के सिलसिले म आय रिहिन। गांधी जी के छत्तीसगढ़ आय ले अंग्रेजी सासन म हड़कंप मचगे।गांधी जी के कंडेल जाय से पहिलीच अंग्रेजी सासन ह आंदोलनरत किसान अउ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन के बात ल मान लिस।


सन 1923 में जब झंडा सत्याग्रह चालू होइस त ठाकुर साहब ल प्रांतीय समिति द्वारा दुर्ग जिला ले सत्याग्रही भेजे के काम सौंपे गिस।नागपुर म सत्याग्रह आंदोलन चालू होइस ।झटकुन  नागपुर सत्याग्रह के प्रमुख ठउर  बनगे। 1924 में जब बीएनसी मिल के दुबारा हड़ताल चालू होइस तब ठाकुर प्यारेलाल सिंह ल जिला बदल कर दे गिस। राजनांदगांव ले निष्कासित करे के बाद सन 1925 म ठाकुर साहब रायपुर चले गे अउ अपन जिनगी के आखिरी तक ऊंहचे रहि के अपन राजनीतिक काम मन ल संचालन करत रिहिन। ठाकुर साहब के उदिम ले राजनंदगांव,  छुईखदान, खैरागढ़ रियासत मन मा कांग्रेस संगठन के निर्माण होइस।


बछर 1929 म भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन म पंडित जवाहरलाल नेहरू के अध्यक्षता म पूर्ण स्वाधीनता के प्रस्ताव पारित होइस ।येकर बाद  26 जनवरी 1930 म स्वाधीनता दिवस के रूप म मनाय गिस । गांधी जी देशवासी मन ले आह्वान कर चुके रिहिन कि स्थानीय समस्या ल लेके  आंदोलन चालू करय। अइसन बेरा म राजनांदगांव ,छुई खदान, मोहला ,मानपुर , कौड़ीकसा,डोगरगढ़ डोगरगांव ,  सहित छुरिया क्षेत्र के बादराटोला, चिरचारीकला, घोघरे, बापूटोला ( चिचोला)क्षेत्र ह आंदोलन के प्रमुख केंद्र बन गे।

   राजनांदगांव म विद्रोही कवि कुंज बिहारी  चौबे छात्र जीवन म  अंग्रेज शासन के झंडा ल उतार के भारतीय झंडा फहरा दिस । येकर सेति वोला बेत ले अब्बड़ मारे गिस पर वोहा महात्मा गांधी के जय अउ भारत माता के जय कहत गिस। 

1930 में गांधीजी ह नमक कानून तोड़ो आंदोलन चालू करिन अउ येकर असर  राजनांदगांव जिला म देखे ल मिलिस। सन 1930 में राजनांदगांव म स्टेट कांग्रेस के स्थापना  आर . एस. रूईकर के मार्गदर्शन म होइस ।कांग्रेस के प्रथम बैठक मानिक भाई गोंदिया वाले के मकान म रखे गिस जेमा जिले के 162 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन भाग लिस। फरवरी 1932 में देश -प्रदेश के  संगे- संग राजनंदगांव, छुईखदान ,छुरिया के बादराटोला बापूटोला (चिचोला), मानपुर , कौड़ीकसा,मोहला ,डोंगरगांव, डोंगरगढ़  क्षेत्र म ब्रिटिश शासन अउ स्थानीय राजशाही के विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन आवाज बुलंद करिन। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विश्राम दास बैरागी ला आजादी के लड़ाई म भाग ले खातिर सिद्ध दोष कैदी के रूप म  1932 म पहले रायपुर केंद्रीय जेल म रखे गिस फेर वोला अमरावती जेल में स्थानांतरित कर दे गिस।


22 नंबर 1933 म महात्मा गांधी छत्तीसगढ़ म द्वितीय प्रवास के रूप म आइस। येकर सुरूआत दुर्ग ले होइस।हरिजन मन के उत्थान, तिलक फंड अउ स्वराज्य फंड खातिर आयोजित कार्यक्रम म दुर्ग के मोती तालाब मैदान म गांधी जी के सभा म 50,000 ले अधिक लोगन मन  सामिल होइस। गांधी जी के दौरा 22 नवंबर ले 28 नवंबर तक रिहिन हे। 24 नवंबर 1933 म गांधी जी ह पं. सुंदर लाल शर्मा द्वारा संचालित सतनामी आश्रम के निरीक्षण करिन।  येकर बार सभा ल संबोधन करे के बेरा म शर्मा जी द्वारा करे गे हरिजन उद्धार के कारज बर गांधी जी ह उंकर अब्बड़ तारीफ करिन अउ ये काम खातिर शर्मा जी ल अपन गुरु कहिस। शर्मा जी ह गांधी जी ले 8 बछर पहिली हरिजनोंद्धार के बुता ल चालू कर दे रिहिन।


 गांधी जी के ये दूसरा दौरा  ह राजनांदगांव जिला के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी  मन ल अब्बड़ प्रभावित करिन अउ गांधी जी के दर्शन लाभ पाय बर इहां के कतको स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन दुर्ग पहुंचिस । घोघरे, छुरिया के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विश्वेश्वर प्रसाद यादव जउन ह लालूटोला स्कूल म शिक्षक रिहिन वोहा अपन स्कूल ल बंद करके गांधी जी के दर्शन करे खातिर अपन चचेरा भाई विद्या प्रसाद यादव जी के संग गिस।

सन 1938 म हरिपुर कांग्रेस अधिवेशन म राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ह रियासती जनता मन ले आजादी के आंदोलन म भाग लेय के आह्वान करिन। ए बछर छुईखदान म जंगल सत्याग्रह चालू होगे। गोवर्धन लाल वर्मा, गुलाब दास वैष्णव, अमृतलाल महोबिया मन सत्याग्रह के अगुवाई करिन।ठाकुर प्यारेलाल सिंह ह अपन प्रमुख सहयोगी राम नारायण हर्षुल मिश्र ल  कांग्रेस संगठन के मार्गदर्शन बर कवर्धा भेजिस ।राजनांदगांव जंगल सत्याग्रह के अगवाई ठाकुर लोटन सिंह के हाथ म रिहिन।


छत्तीसगढ़ ह वन संपदा ले भरपूर हावय। येहा इहां के रहवासी मन के जिनगी गुजारे के प्रमुख साधन हरे। अंग्रेजी सासन के गलत वन नीति के सेति जंगल क्षेत्र के रहवासी मन ल नंगत तकलीफ उठाय ल पड़त रिहिस। अंग्रेज जंगल ल अपन संपत्ति समझय। रक्षित वन क्षेत्र म मवेशी मन ल घास चराय खातिर कांजी हाउस म डाल दय येकर ले पशुपालक मन ल अब्बड़ परेसान होवय।अइसने जब लोगन मन जंगल ले लकड़ी अउ कांदी ( घास)काट के लाय त अंग्रेज मन नाना प्रकार के अतियाचार करय अउ गिरफ्तार कर लेय। येकर ले अंग्रेजी सासन के विरुद्ध जनता  मन म अब्बड़ गुस्सा छमागे।येकर परिणाम जंगल सत्याग्रह के रूप म सामने आइस। हमर छत्तीसगढ म सिहावा नगरी डाहर के जंगल सत्याग्रह ह देशभर म एक मिसाल बनगे।


जंगल सत्याग्रह अउ बादराटोला गोलीकांड 


राजनांदगांव रियासत म बछर 1939 म जंगल सत्याग्रह चालू होइस।  येकर सूचना भेज दे गिस।21 जनवरी 1939 के दिन राजनांदगांव जिले के छुरिया विकासखण्ड के बादराटोला म आस -पास  गांव  के जनता मन जंगल सत्याग्रह खातिर इकट्ठा होय लगिस। हजारों के भीड़ बादराटोला म सकला गे। इहां जंगल सत्याग्रह के अगुवाई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बुध लाल साहू करत रिहिन। तहसीलदार सुखदेव देवांगन ह 50 सशस्त्र पुलिस बल के संग बादराटोला पहुंच के सबले पहिली जंगल सत्याग्रह के मुखिया बुध लाल साहू ल गिरफ्तार कर लिन। येकर ले बादराटोला म सकलाय लोगन मन ल अब्बड़ गुस्सा आगे अउ तहसीलदार ल भीड़ ह घेर लिन।  बुधलाल साहू के चरवाहा रामाधीन गोंड ह तहसीलदार के सामने आके खड़े होगे अउ  महात्मा गांधी के जय,भारत माता के जय,वंदे मातरम के नारा लगा के गिरफ्तारी के विरोध करिस। भीड़ के  गुस्सा ल देखके तहसीलदार घबरा गे अउ जनता ल तितर बितर करे खातिर पुलिस मन ल गोली चलाय के आदेश दे दिस। ये गोली काण्ड म रेवती दास ल गोली लगिस अउ घायल स्थिति म अस्पताल ले जाय गिस। रामाधीन गोंड के छाती म गोली लगिस अउ शहीद होगे। सिरिफ 27 बछर के उमर म रामाधीन अपन मातृभूमि के रक्षा खातिर सहीद होगे अउ इतिहास म अमर होगे।  1939 म

जंगल सत्याग्रह म सामिल होय खातिर विश्वेश्वर प्रसाद यादव, विद्या प्रसाद यादव, तुलसी प्रसाद मिश्रा अउ आने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन ल जेल म डाल दे गिस।


राजनांदगांव , खैरागढ़ - छुईखदान - गंडई अउ मानपुर -मोहला -अंबागढ़ चौकी जिले के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन म  ठाकुर प्यारेलाल सिंह,लोटन सिंह ठाकुर,  गोवर्धन लाल वर्मा, गुलाब दास वैष्णव, अमृत लाल महोबिया, दामोदर प्रसाद त्रिपाठी, छवि राम चौबे, गज्जू लाल शर्मा 

रामाधीन गोंड,विश्राम दास बैरागी, बुध लाल साहू,रेवती दास, बहुर सिंह,विश्वेश्वर प्रसाद यादव, विद्या प्रसाद यादव, तुलसी प्रसाद मिश्रा, दामोदर दास टावरी,पी. वी. दास,देव प्रसाद आर्य, कुंज बिहारी चौबे,कन्हैया लाल अग्रवाल, दशरथ साहू,ईशना पवार , सतानंद साहू के संगे -संग आने नांव सामिल हे। वनांचल मानपुर -मोहला क्षेत्र म कतको स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रिहिन। अइसन भूले बिसरे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन उपर काम करे के जरूरत हे।


                ओमप्रकाश साहू अंकुर 

           सुरगी, राजनांदगांव।

आजादी के लड़ाई मा छत्तीसगढ़ के योगदान

 आजादी के लड़ाई मा छत्तीसगढ़ के योगदान


भारत हा पहिली सोन के चिरइया कहलाय। हमर देश मा बेपार करे खातिर पुर्तगाली, फ्रांसीसी,डच अउ अंग्रेज मन आइस। पहिली इंकर मन के बीच बेपार खातिर आपसी लड़ाई चलिस जेमा आगू चलके अंग्रेज मन हमर देश मा राज करे मा सफल होइस । अंग्रेज मन फूट डालव अउ राज करव के संगे संग रियासत मन बर हड़प नीति अपनाके  करीब दू सौ बछर ले जादा समय तक सरलग राज करिस । अंग्रेज मन के अत्याचार अउ कइ ठक उंकर गलत नीति के कारन इहां के राजा -महाराजा, जमींदार अउ आम मनखे मन मा भीतरे भीतर आगी सुलगत गिस।येकर पहिली परिणाम सन 1857 मा अंग्रेज मन ले राजा महाराजा मन के लड़ाई के रुप मा आगू आइस ।


अंग्रेज मन ले हमर भारत देस ल अजाद कराय के पुन्य काम म हमर छत्तीसगढ के सुघ्घर योगदान हे. हमर छत्तीसगढ़ के मनखे मन अब्बड़ सिधवा अउ शांतप्रिय रेहे हे। तइहा जमाना ले इहां के कृषि अउ ऋषि संस्कृति सुघ्घर सोर बगरे हावय।पर जब कोनो ह जबरन इहां के रहवासी मन के सोसन अउ अतियाचार करे ला लगथे ता अपन हक खातिर जुर मिल के लड़े मा कभू पाछु नइ रिहिन हे। अइसने छत्तीसगढ़ के  रहवासी मन अजादी के लड़ाई म बढ़ -चढ़ के भाग लिन. अंग्रेजी सासन ले लड़ाई करके सबले पहिली सहीद होइन बस्तर क्षेत्र के परलकोट के जमींदार गेंद सिंह हा. 1825 म अंग्रेज मन वोला उंकरे महल के आगू फांसी म लटका दिस. सन 1857 मा भारत के राजा- महाराजा मन अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संगठित होके लड़ाई लड़िन जेला प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्रामकहे जाथे। जब पूरा भारत वर्ष मा अंग्रेज मन बर चिंगारी सुलगत रिहिस ता छत्तीसगढ़ हा कइसे पाछु रहितिस। जब हमर देश मा मंगल पांडे,तात्या टोपे,नाना शाहब पेशवा, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, बहादुर शाह जफर,राजा कुंवर सिंह अउ आने राजा मन अंग्रेजी शासन ले जोम देके लड़िन तब येकर असर छत्तीसगढ़ के सोनाखान जमींदारी मा देखे ला मिलिस। सन् 1857 के पहिली भारतीय स्वतंत्रता संग्राम म सोनाखान के जमींदार वीर नारायण सिंह के अंग्रेज मन ले छापामार लड़ाई ले कोनो अनजान नइ हे.जब सोनाखान क्षेत्र मा अकाल पड़िस ता सोनाखान के जमींदार वीर नारायण सिंह हा करौद गांव,कसडोल के बेपारी माखन लाल बनिया के गोदाम ले अनाज लूट के जनता मा बंटवा दिस । माखन बनिया हा येकर शिकायत रायपुर के डिप्टी कमिश्नर चार्ल्स सी. इलियट ले करिन।24 अक्टूबर 1856 मा अंग्रेज अधिकारी कैप्टन स्मिथ हा  वीर नारायण सिंह ला संबलपुर ले गिरफ्तार कर रायपुर जेल मा बंद कर दिस । 10 दिसंबर 1857 म  वीर नारायण सिंह ल  रायपुर के जयस्तंभ चौक म फांसी म चढ़ा दिस. वीर नारायण सिंह के सहादत के बाद 10 जनवरी 1858 तक क्षेत्र मा नंगत के अशांति फैलगे । येकर ले हमर छत्तीसगढ़ मा अंग्रेज मन के विरुद्ध चिंगारी फूटे ला लगिस। वीर नारायण सिंह के सहादत हा  बैंसवाड़ा के राजपूत अउ छत्तीसगढ़ के मंगल पांडे वीर हनुमान सिंह ला अंग्रेजी सासन ले लड़े बर प्रेरित करिन. हनुमान सिंह तीसरी बटालियन मा मैग्जीन लश्कर के पद मा तैनात रिहिन । 18 जनवरी सन 1858 मा संझा साढ़े सात बजे वीर हनुमान सिंह हा तीसरी बटालियन के सार्जेंट मेजर सिडवल के घर मा घूंसके उंकर हत्या कर दिस  । हनुमान सिंह के सत्रह संगवारी मन ला लेफ्टिनेंट स्मिथ के अगुवाई मा गिरफ्तार कर ले गिस । 

अइसने संबलपुर सरगुजा क्षेत्र के उदयपुर रियासत अउ सोहागपुर मा अंग्रेज मन के विरूद्ध विद्रोह होइस।ये प्रकार ले देखथन कि छत्तीसगढ़ क्षेत्र मा प्रथम स्वतंत्रता संग्राम मा कतको राजा, जमींदार,सैनिक अउ नागरिक मन भाग लिस पर  अंग्रेज मन हा आने राजा अउ जमींदार मन के सहयोग ले विद्रोह ला दबाय मा सफल होगे।

जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस मा  गरम दल के नेता मन  के धाक जमे लगिस तब भारतीय जनता म अंग्रेजी सासन के विरुद्ध भीतरे- भीतर आगी सुलगत गिस । वो समय लाल-बाल-पाल के रूप म लाला लाजपतराय, लोकमान्य बालगंगाधर तिलक अउ विपिनचंद्र पाल के अब्बड़ सोर रिहिस । 1905 म बंगाल विभाजन ले ये चिंगारी ह आगी बन गे अउ जनता मन अंग्रेज़ी सासन बर बागी बनगे । सन 1907 मा कांग्रेस हा गरम दल अउ नरम दल के रूप मा विभाजन होगे।येकर असर छत्तीसगढ़ मा अब्बड़ पड़िस। हमर देश के नेता मन जनता ल समझाय लगिस कि अंग्रेजी सासन फूट डालव अउ राज करव के नीति ल अपना के शुरू ले सासन करत आवत हे अउ बंगाल के विभाजन येकर एक बड़का उदाहरण हे । देशभर म अंग्रेजी सासन के विरुद्ध वातावरण बनिस। अइसन बेरा म हमर छत्तीसगढ़ मा घलो असंतोष के चिंगारी सुलगत गिस। अइसन बेरा मा छत्तीसगढ़ मा गरम दल के नेता के रूप मा माधव राव सप्रे, पं. रविशंकर शुक्ल,दादा साहब खापर्डे, वामन राव लाखे, ई. राघवेन्द्र राव, हनुमान सिंह,लक्ष्मण राव उदगीरकर मन उभर के आगू आइस । येमन 1907 मा तात्यापारा हनुमान मंदिर के तीर जनसभा ला संबोधित करके विदेशी सामान मन के बहिष्कार अउ स्वदेशी सामान मन ला अपनाय बर समझाइस।

सन 1907 मा लोकमान्य बालगंगाधर तिलक हा बिलासपुर के यात्रा करिन।तिलक जी हा नागन्ना बाबू के घर रूकिस। 1907 म राजनांदगांव में ठाकुर  प्यारेलाल सिंह के  अगुवाई म देश के पहिली छात्र  हड़ताल होइस ।  ये हड़ताल लोकमान्य बालगंगाधर तिलक के गिरफ्तारी के विरोध मा स्टेट हाईस्कूल नांदगांव मा होय रिहिस । ठाकुर साहब अपन सहयोगी नंदलाल झा,छविराम चौबे अउ गज्जू लाल शर्मा के संग मिलके राजनांदगांव म राष्ट्रीय आंदोलन ल ठाहिल बनाइस । ये देश के छात्र मन के पहली हड़ताल माने जाथे। अइसन दौर म छत्तीसगढ़ के कांग्रेस सदस्य मन घलो गरम दल के नेता मन ले प्रभावित होके उंकर संग सामिल होगे ।  लोकमान्य बालगंगाधर तिलक हा जनवरी 1918 मा लखनऊ ले कलकत्ता जाय के समय रास्ता मा दुर्ग, रायपुर अउ बिलासपुर मा आमसभा ला संबोधित करिन । 1918 मा पं. सुंदर लाल शर्मा हा अछूतोद्धार  कार्यक्रम चलाइस। राजनांदगांव मा ये कारज पं. छविराम चौबे हा करिस।  अंग्रेजी शासन के काला कानून रोलेट एक्ट के विरोध मा रायपुर, बिलासपुर, रतनपुर, राजनांदगांव, राजिम मा  30 मार्च 1919 मा काला दिवस के रूप मा मनाय गिस । 30 मार्च 1919 मा रायपुर मा माधव राव सप्रे अउ राष्ट्र कवि माखन लाल चतुर्वेदी हा मध्य प्रांत हिंदी साहित्य सम्मेलन के आयोजन करिन जेकर उद्देश्य लोगन मा जनजागरण फैलाना रिहिस । सन 1920 मा रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर मा जिला राजनीतिक सम्मेलन होइस । येमा रोलेट एक्ट अउ जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध करे गिस ।


 हमर छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के आदिवासी मन के जिनगी जल, जंगल अउ जमीन पर टिके हावे । आदिवासी मन अब्बड़ सिधवा रहिथे अउ अपन संस्कृति, संस्कार ला पालन करत सुघ्घर जिनगी बितात रहिथे पर जब कोनो उंकर स्वाभिमान ला ठेस पहुंचाथे ता वोमन डोमी करिया कस फूंफकारे ला लगथे ।  अपन सुरक्षा खातिर तीर कमान ले निसाना लगाय बर नइ चुके । अइसने निरंकुश राजशाही अउ अंग्रेज मन के गलत वन नीति के कारण बस्तर क्षेत्र मा सन 1910 मा विद्रोह होइस तेला भूमकाल विद्रोह के नांव ले जाने जाथे । रानी सुवर्ण कुंवर,लाल कलेन्द्र सिंह हा ये आंदोलन के अगुवाई करे के जिम्मेदारी नेतानार गांव के रहवइया नवजवान आदिवासी वीर गुंडाधूर ला सौंपिस। वीर गुंडाधूर बस्तर के स्वाभिमान के प्रतीक माने जाथे । नायक वीर गुंडाधूर ला अंग्रेजी शासन आखिरी तक नइ पकड़ पाइस । 

गांधी जी जब पहिली बार 20 दिसंबर 1920 मा छत्तीसगढ़ आइस त इहां के नेतामन के संगे-संग जनता मन म अब्बड़ उछाह छागे ।  गांधी जी संग मौलाना शौकत अली घलो आय रिहिन । गाधी जी रायपुर के गांधी चौक मा सभा ला संबोधन करके असहयोग आन्दोलन के महत्ता ला बताइस । छत्तीसगढ़ के नारी मन गांधी जी ला तिलक स्वराज फंड खातिर लगभग दो हजार रूपया के आभूषण भेंट करिन ।  गांधी जी धमतरी क्षेत्र के कंडेल नहर सत्याग्रह के सिलसिले म आय रिहिन । गांधी जी के छत्तीसगढ़ आय ले अंग्रेजी सासन म हड़कंप मचगे।कंडेल नहर सत्याग्रह के अगुवाई पं. सुंदर लाल शर्मा करिन अउ सहयोगी मन मा छोटे लाल श्रीवास्तव, नारायण राव मेघावाले, नत्थूजी जगताप सामिल रिहिन । येकर संबंध असहयोग आंदोलन ले रिहिस ।  गांधी जी के कंडेल जाय से पहिलीच अंग्रेजी सासन ह आंदोलनरत किसान अउ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन के बात ल मान लिस।


छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहर मन मा सन 1921 मा स्कूल कालेज के बहिष्कार करके राष्ट्रीय विद्यालय,  सत्याग्रह अउ असहयोग आश्रम खोले गिस । 12 मई 1921मा राष्ट्र कवि अउ कर्मवीर पत्रिका के संपादक माखन लाल चतुर्वेदी ला बिलासपुर मा अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जमगरहा भाषण देय खातिर गिरफ्तार कर जेल भेज दे गिस । 5 जुलाई 1921 मा असहयोग आन्दोलन के समर्थन मा प्रचार प्रसार बर राष्ट्रीय नेता मन बिलासपुर पहुंचिस जेमा डा. राजेन्द्र प्रसाद,सी. राजगोपालाचारी अउ कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान मन पहुंच के आम सभा ला संबोधित करिस। अइसने रायपुर मा गांधी चौक मा जमनालाल बजाज अउ मौलाना कुतुबुद्दीन हा जनता मन ला संबोधित करके उछाह बढ़ाइस। 


21 जनवरी 1922 मा धमतरी के सिहावा नगरी मा छत्तीसगढ़ के पहिली जंगल सत्याग्रह चालू होइस। अंग्रेजी शासन के गलत वन नीति, आदिवासी मजदूर मन के शोषण के विरोध मा येकर अगुवाई पं. सुंदर लाल शर्मा, छोटे लाल श्रीवास्तव, नारायण राव मेघावाले के संगे संग स्थानीय नेता शोभा राम साहू, श्याम लाल,बिसंभर पटेल मन करिन।  1924 में जब बीएनसी मिल के दुबारा हड़ताल चालू होइस तब ठाकुर प्यारेलाल सिंह ल जिला बदल कर दे गिस। राजनांदगांव ले निष्कासित करे के बाद सन 1925 म ठाकुर साहब रायपुर चले गे अउ अपन जिनगी के आखिरी तक ऊंहचे रहि के अपन राजनीतिक काम मन ल संचालन करत रिहिन।

26 जनवरी 1930 मा पुरा भारत वर्ष मा स्वाधीनता दिवस के रूप म मनाय गिस । गांधी जी देशवासी मन ले आह्वान कर चुके रिहिन कि स्थानीय समस्या ल लेके आंदोलन चालू करय । येकर असर पूरा छत्तीसगढ़ मा देखे ला मिलिस । 26 जनवरी 1930 मा पूरा देश जइसे छत्तीसगढ़ मा घलो प्रतिज्ञा दिवस मनाके पूर्ण स्वाधीनता के मांग दुहराय गिस । रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, जांजगीर चांपा अउ आने जगह मा राष्ट्रीय झंडा फहराय गिस । गांधी जी द्वारा चलाय गे नमक कानून तोड़व आंदोलन छत्तीसगढ़ मा अब्बड़ जोर पकड़िस ।  

9 दिसंबर 1930 मा महासमुंद के तमोरा गांव मा जंगल सत्याग्रह के समय बालिका दयावती हा महिला मन संग जंगल गिस । महिला मन ला जब अनुविभागीय अधिकारी एम.पी. दुबे हा रोके के उदिम करिस ता बालिका दयावती हा वोला तमाचा मार दिस । 


 हमर छत्तीसगढ़ मा महात्मा गांधी के दूसरइया बार अवई  छुआछूत ला दूर करे के उद्देश्य ले 22 नवम्बर 1933 के होइस अउ हफ्ता भर रिहिन । ये समय गांधी जी संग मीराबेन, ठक्कर बापा, महादेव भाई देसाई मन आय रिहिन। गांधी जी के छत्तीसगढ़ दौरा ले इहां के राजनेता अउ आम मनखे मन मा स्वतंत्रता के प्रति जागृति भाव मा बढ़वार होइस। गांधी जी हा सबले पहिली दुर्ग पहुंच के मोती तरिया के पास एक बड़का सभा ला संबोधित करिन जेमा करीब 25 हजार लोगन मन गांधी जी के दरसन करे बर पहुंचिस । 18 जनवरी 1940 मा सरदार वल्लभ भाई पटेल हा रायपुर पहुंच के कार्यकर्ता मन मा जोश भरिस। 1938 मा छुईखदान मा समारू बरई अउ राजनांदगांव जिला के छुरिया, घोघरे, बापूटोला मा 3 जनवरी 1939 मा विद्या प्रसाद यादव अउ विश्वेश्वर प्रसाद यादव के अगुवाई मा जंगल सत्याग्रह होइस ।  राजनांदगांव म विद्रोही कवि कुंज बिहारी चौबे छात्र जीवन म अंग्रेज शासन के झंडा ल उतार के भारतीय झंडा फहरा दिस । येकर सेति वोला बेत ले अब्बड़ मारे गिस पर वोहा महात्मा गांधी के जय अउ भारत माता के जय कहत गिस ।  21 जनवरी 1939 मा राजनांदगांव जिला के छुरिया क्षेत्र मा जंगल सत्याग्रह चलिस जेमा बादराटोला गांव के आदिवासी युवक रामाधीन गोंड उपर गोली चला दे गिस जेमा वोहा शहीद होगे । इहां बुद्धू लाल साहू के अगुवाई मा अंग्रेजी शासन के गलत वन नीति के कारन जंगल सत्याग्रह चालू होय रिहिस । महात्मा गांधी के आह्वान मा 17 अक्टूबर 1940 मा देशभर मा व्यक्तिगत सत्याग्रह चालू होइस। ये समय छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, धमतरी मा स्थानीय कार्यकर्ता मन व्यक्तिगत सत्याग्रह ला सफल बनाइस।


1942 मा रायपुर षड्यंत्र केस इतिहास मा अमर होगे। छत्तीसगढ़ के भगत सिंह परस राम सोनी के अगुवाई मा विस्फोट सामग्री अउ बम बनाय के काम चलिस। परसराम सोनी के संगवारी मन मा गिरी लाल लोहार, सुधीर मुखर्जी, दशरथ लाल दुबे, प्रेमचंद वासनिक,क्रांति कुमार भारतीय, बिहारी चौबे  ,कुंज बिहारी चौबे,गोवर्धन राम, समर सिंह ,बहादुर , भूपेंद्रनाथ मुखर्जी, सुरेंद्रनाथ दास ,सीताराम शास्त्री, निखिल भूषण सूर अउ देविकांत झा सामिल रिहिन। परसराम सोनी ला सात बछर के सजा सुनाय गिस । 


 8 अगस्त 1942 मा बंबई मा आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के बैठक मा छत्तीसगढ़ के राजनेता मन भाग लिस। गांधी जी हा 9 अगस्त 1942 ले भारत छोड़ो आंदोलन के चालू होय के घोषणा करिन। आंदोलन चालू होय ले पहिली गांधी जी सहित देश के सबो बड़का नेता मन ला अंग्रेजी शासन हा गिरफ्तार कर लिस। बंबई बैठक मा सामिल छत्तीसगढ़ के ग्यारह राजनेता मन ला घलो मलकापुर रेलवे स्टेशन ले गिरफ्तार करके नागपुर जेल मा बंद कर दे गिस। छत्तीसगढ़ मा भारत छोड़ो आंदोलन जोर पकड़ लिस । सबो जिला के स्थानीय नेता मन ला अंग्रेजी शासन गिरफ्तार कर लिस तब इहां के कार्यकर्ता अउ रहवासी मन आजादी के लड़ाई मा खुदे आगू आके आंदोलन ला सफल बनाइस । इहां के आजादी के सेनानी मन अंग्रेजी शासन ले जोम देके लड़िस । हमर छत्तीसगढ़ ले आजादी के लड़ाई म अपन योगदान देवइया मन म  शहीद गेंद सिंह,वीर नारायण सिंह, हनुमान सिंह, सुरेन्द्र साय, कल्याण सिंह,वीर गुंडाधूर, पं. सुंदर लाल शर्मा, पं. रविशंकर शुक्ल, माधव राव सप्रे, दादा साहब खापर्डे, डा. मुंजे, कुंज बिहारी अग्निहोत्री, शहीद रामाधीन गोंड, ठाकुर प्यारेलाल लाल सिंह, केदार नाथ ठाकुर, डा. ई. राघवेन्द्र राव, बैरिस्टर छेदी लाल, घनश्याम सिंह गुप्त, मुंशी अब्दुल रउफ मेहवी, वामन राव लाखे, नारायण राव मेधावाले, पं माखन लाल चतुर्वेदी, हरख राम सोम, विशंभर पटेल, पंचम सिंह सोम, शोभा राम साहू, शिवदास डागा, महंत लक्ष्मी नारायण दास, महंत नयन दास, कुंज बिहारी चौबे, यति यतन लाल, क्रांति कुमार भारतीय, डा. खूबचंद बघेल, डा. राधा बाई, बालिका दयावती, बाबू छोटे लाल श्रीवास्तव, राम प्रसाद देशमुख, शोभा राम साहू, बुद्ध लाल साहू, हीरा लाल सोनबोइर,नरसिंह प्रसाद अग्रवाल, वाय, व्ही. तामस्कर, रत्नाकर झा, रघुनंदन सिंगरौल, नत्थू जी जगताप, सेठ गोविंददास, पं. द्वारिका प्रसाद मिश्र, गयाचरण त्रिवेदी, राम गोपाल तिवारी, गजाधर साव, कालीचरण शुक्ल, गंगाधर प्रसाद चौबे, नंद कुमार दानी, आनंद राम गोंड, श्याम लाल गोंड, फिरतू राम गोंडा, मंगलू गोंड, शंकर राव गनौद वाले, बालक बलीराम आजाद, अवध राम सोनी, पं. मुरलीधर मिश्र, कैलाश चंद्र श्रीवास्तव, कन्हैया लाल सोनी, परस राम सोनी, सुधीर मुखर्जी, रामचंद्र, बल्देव प्रसाद मिश्र, गोवर्धन लाल श्रीवास्तव, सखा राम रूईकर, शिव लाल मास्टर, केलकर, हरि सिंह गौर, शंकर खरे, तुलसी प्रसाद मिश्रा, विश्राम दास बैरागी, विश्वेश्वर प्रसाद यादव, विद्या प्रसाद यादव, कन्हैया लाल अग्रवाल, दामोदर दास टावरी, पं. राम नारायण मिश्र हर्षल, समारू बरई, वली मोहम्मद, इंदु केंवट, अरिमर्दन गिरि, रामाधार दुबे, वासुदेव देवरस, शेख मुंतजीमुद्दीन, सी.एम. ठक्कर, बद्री प्रसाद साव, राम राव चिंचोलकर, राजू लाल शर्मा, छवि लाल चौबे, पं. विष्णु दत्त शुक्ल, असगर अली, सोमेश्वर शुक्ल,जमुना प्रसाद वर्मा, विद्याचरण वर्मा, कैलाश सक्सेना, अब्दुल कादिर सिद्दीकी, बल्देव सतनामी, याकूब अली, ठाकुर राम कृष्ण सिंह सहित आने नांव सामिल है.

 भारतीय मन के अंग्रेजी शासन ले अब्बड़ लड़ाई के बाद भारत 15 अगस्त 1947 मा आजाद होइस । बिरबिट करिया रतिहा के बाद नवा बिहान आइस । अंग्रेज मन के सैकड़ों बछर के गुलामी के बाद भारतमाता हा मुक्त होइस अउ ये प्रकार ले अब इहां के जनता मन खुद मालिक बनगे । भारत मा अब राजा महाराजा मन के शासन समाप्त होके जनता द्वारा निर्वाचित जनप्रतिनिधि मन के शासन चालू होइस। भारत के तरक्की के रद्दा खुलगे । हम सब के कर्तव्य बनथे कि महापुरूष अउ शहीद मन के बताय रद्दा मा चल के देश के विकास मा योगदान देवन। 


भारत माता की जय । जय छत्तीसगढ़ । 


-ओमप्रकाश साहू "अंकुर"

ग्राम व पोष्ट - सुरगी

जिला व तह. - राजनांदगॉंव( छ.ग.)

लघुकथा ) असहयोग

 (लघुकथा )


असहयोग

--------

सब झन जल्दी में हें। एनाउंस होगे हे। ट्रेन आने वाला हे। टिकट बाबू हा बार बार काहत हे- लाइन से आओ--लाइन से आओ फेर कोनो मानयँ तब न। एक झन नवजवान हा दू-चार झन ला धकियावत सुट ले आगू मा पहुँच के कहिस-- "एक टिकट रायपुर।"

टिकट बाबू हा कन्नेखी देखत कहिस-- "पंद्रह रुपिया दो।"

 "ये दे सौ के नोट तो दे हँव ना"-- वो हा कहिस।

" मेरे पास चिलहर नहीं है।बहस करके टाइम खराब मत करो--हटो---दूसरे लोगों को टिकट लेने दो "--टिकट बाबू कहिस।

"वाह बिना टिकट लेये कइसे हट जहूँ। तोला चिलहर रखना चाही न"--वो नवजवान रोम्हीयावत कहिस।

"पढ़े लिखे जैसे दिखते हो और मूर्ख जैसे बहस कर रहे हो। सब बड़े बड़े नोट ही दोगे तो मैं कहाँ से छुट्टा लाऊँगा? असहयोग ही करोगे कि कभी सहयोग करना भी सीखोगे"- अतका कहिके वो फटरस ले खिड़की ला बंद कर देइस। 


चोवा राम वर्मा 'बादल '