*लघुकथा एक दृष्टि*
कथा साहित्य मं तीन कथा उपन्यास, कहानी अउ लघुकथा शामिल करे जाथे। ए तीनों कथा ला आकार के दृष्टि ले क्रिकेट के भाषा मं टेस्ट, वनडे अउ टी-20 क्रिकेट के जइसे देखे जा सकत हे। फेर शिल्प (बुनावट/बनकट) मं अइसन नि होवय। तीनों मं कथानक, पात्र/चरित्र, संवाद अउ देश-काल या वातावरण चार तत्व मूल रूप ले पाए जाथे। साहित्य के कोनो विधा होवय, ओकर लेखन के अपन एक उद्देश्य होबे च करथे। एहा कथा साहित्य बर घलो लागू होथे। जउन ल कथा साहित्य के पचवइया तत्व माने जाथे।
हर विधा के अपन एक शिल्प होथे। जेकर ले वो विधा मं लिखे गे जिनिस ला साहित्य के कसौटी मं कसे जाथे। परखे जाथे। बिल्डिंग कतको बनथें, फेर जरुरत के पूर्ति संग आने-आने नाव दिए जाथे। स्कूल, ऑफिस, मंदिर, घर...।
कथा साहित्य मं सिरिफ लघुकथा हा एक अइसे विधा होथे जेन मं लेखक के प्रवेश मना रहिथे। जउन ल लेखकीय प्रवेश कहे जाथे। जेन मं लेखक अपन गोठ/विचार ला पात्र ले नइ कहवा के खुदे कहि देथे। लेखक कहूॅं लघुकथा मं एक पात्र हे तौ वोला लेखकीय प्रवेश नइ माने जाय। कहानी मं लेखकीय प्रवेश के गुंजाइश पूरा-पूरा रहिथे। लघुकथा टी-20 क्रिकेट जइसे फटाफट चलथे। एके घटना होथे। इही लघुता हा लघुकथा के खासियत आय। कहानी अउ उपन्यास मं उपकथा शामिल हो सकथे। एकर कथानक/घटना क्षण विशेष के होना चाही। लघुकथा मं कालांतर एकदम नाम मात्र के रहिथे। लघुकथा अउ टी-20 क्रिकेट मं अंतर ए रहिथे कि क्रिकेट मं जीत-हार के रूप मं रिजल्ट तय रहिथे। फेर लघुकथा मं बहुत अकन पाठक बर छोड़ दिए जाथे। एक पंच लाइन के संग पूरा करे के प्रयास होथे। जउन ह खासकर संवाद के रूप मं होथे।
बहुत झन मन छोटे आकार के कहानी ला लघुकथा समझ या मान लेथें। कहानी पूरा होय ऊप्पर ले पाठक बर कोनो सवाल नि छोड़े। ओकर उद्देश्य भले कतको सवाल खड़ा करथे।फेर लघुकथा अइसे खत्म करे जाथे कि पाठक के मन मं कई ठन सवाल छोड़ दै।
आखिर मं इही कहिहूॅं कि लघुकथा (विधा) अउ लघु कथा (कथा के छोटे रूप) दू अलग-अलग बात आय।
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पोखन लाल जायसवाल
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