सुरता सुशील भोले
छत्तीसगढ़ी भाखा ल बढ़ावा देवइया, कला संस्कृति अउ साहित्य के संग-संग भाषा बर स्वाभिमान
के सकेला करइया सुशील वर्मा “भोले“ जी के जनम 2 जुलाई सन 1961 म भाठापारा म होय रहिस हे। उंखर पिता जी स्व. श्री रामचन्द्र वर्मा जी, माता स्व. श्रीमती उर्मिला देवी वर्मा जी, के घर म दूसर संतान के रूप म जनम लेय रहिस हे।श्री भोले जी मन चार भाई अउ दू बहिन हावंय। श्री भोले के पिता श्री प्राथमिक शाला म गुरुजी रिहीन। ओमन आदर्श शिक्षक रहिन अउ उंखर लिखे हिन्दी व्याकरण के किताब मिडिल स्कूल म चलत रहिस हे। पिता के शिक्षा अउ संस्कार सुशील ल मिले रहिस हे। अउ एकर से भोले जी ल अड़बड़ लाभ मिलिस। उंखर प्रतिभा सबो डाहर दिखे ले लगगे।आध्यात्मिक रुचि घलो ओखर चिन्हारी रहिस हे। वरिष्ठ साहित्यकार के संग संग पत्रकार, स्तम्भकार, साहित्य के पुरोधा रहिन हें।
जेन मनखे म प्रतिभा होथे ओ ह हर परिस्थिति म अपन ल साबित करत जाथे। कखरो मोहताज नइ राहय। प्रतिभा ह मौका मिलते ही उजागर होय ले लग जथे। सुशील के चौथी तक के पढ़ाई जनम स्थान भाठापारा म होइस ओखर बाद सातवीं तक के पढ़ाई नगरगांव म अउ ८वीं ले 11वीं तक के पढ़ाई रायपुर म होय रहिस हे। ऐखर पिताजी ह एक प्रिंटिंग प्रेस खोले रहिस हे। ओला इही म रुचि होगे प्रिंटिंग प्रेस लाइन वाला विषय म आई टीआई के कोर्स ल पास कर लीन। कंपोजिंग के काम करे ले लगगें।
सुशील भोले ह अपन साहित्यिक यात्रा सबले पहिली दैनिक अग्रदूत समाचार पत्र ले शुरू करे रहिस हे। सन 1983-84 म स्वयं के कविता, कहानी के प्रकाशन शुरु करे ले लगगें। ये लेखन के शुरुआत सरलग चलत रहिस हे जेन अंतिम सांस तक "कोंदा भैरा के गोठ" तक चलिस। ये बीच म दैनिक अग्रदूत, दैनिक तरुण छत्तीसगढ़ म सहसम्पादक के रूप म अपन सेवा दिन। समाचार, पत्र-पत्रिका म काम करत करत घर के प्रिंटिंग प्रेस के संचालन शुरू कर दिन। एक स्टूडियो स्थापित करिस। मासिक समाचार पत्रिका “मयारू माटी” के रुप म पहिली छत्तीसगढ़ी पत्रिका निकाले ले लगगें। 9 दिसम्बर 1987 ले निकलत रहिस हे। इहाँ ले साहित्यिक समाचार पत्र के प्रकाशन तो शुरु होबे करिस, येखर अलावा अपन स्टूडियो म ऑडियो गीत, कैसेट म रिकॉर्डिंग घलो होय ले लगगे।
भोले जी के जीवन के एक पक्ष आध्यात्मिक जीवन के घलो रहिस हे जेमा कठिन तप ,धियान, साधना ह सरलग 1994 ले 2000 तक 14 बच्छर तक चलिस। ओ ह शिव भक्त रहिस हे, शिवजी के साधना करिस। ए साधना के बाद सुशील वर्मा ले सुशील भोले लिखे ले लगगें। साधना ले आध्यात्मिक रहस्य ल जानिन अउ ओला आत्मज्ञान मिलिस। ओहर हमेंशा काहय "बिना आध्यात्म के जिनगी ल मुक्ति नई मिलय।”
छत्तीसगढ़ राज बने के बाद हमेंशा इंहा के आदिधर्म अउ मूल संस्कृति के बात करय।येखर बर एक संस्था के स्थापना करिस अउ जोर दरहा काम शुरु करे रहिस हे। अपन हर लेख म इंहा के तीज तिहार म हमर आदि संस्कृति के बात ल बतावय। "आज जेन तरिका ले तीज तिहार ल मनाथन ओ हर हमर सँस्कृति नोहय।ओ ह उत्तर भारत ले आए हावय जेन ल हमर ऊपर थोपे गे हावय। हमन ल अपन सँस्कृति के रक्षा करना हे, अउ ओखर प्रचार-प्रसार करना हे। बाहरी पूजा विधि जेन ल हमर उपर थोपे गे हावय ओला बदलव। हमर संस्कृति ल चिन्हव अउ बचावव।"
भोले जी ह छत्तीसगढ़ के निर्माण बर घलो काम करिस। । इंहा के अस्मिता अउ संस्कृति बर अपन आप ल समर्पित कर दिस। भोले ह अपन बात ल छत्तीसगढ़ी भाखा साहित्य के माध्यम से पोट्ठ ढंग ले रखय ले लग गीन। भोले जी जब अपन मासिक पत्रिका “ मयारू माटी” के शुरुवात करिन त सबसे पहिली येमा छतीसगढ़ी भाखा के उपयोग करिन।ये छत्तीसगढ़ी भाषा के पहिली पत्रिका रहिस हे। ये ह उंखर भाषा के प्रति प्रेम ल देखाथे। ऐमन जिनगी भर छत्तीसगढ़ी भाखा के उपयोग करे के बात करिन, अउ अपन राज के बोली भाखा के चिन्हारी ल जिनगी भर निभाइन। भाषा के अतेक सेवा के बाद भी ओला ओ सम्मान नइ मिलिस जेन मिलना रहिस हे।
सुशील ह हर अखबार म छत्तीसगढ़ी भाषा के बीज ल बोये के काम करिन। जईसे ही ओ अखबार म छत्तीसगढ़ी स्थापित हो जतिस त छोड़ के दूसर अखबार म आ के फेर छत्तीसगढ़ी शुरु करतिस। "इतवारी" साप्ताहिक पत्रिका जेन ह शुद्ध हिन्दी के रहिस हे उंहा के सह सपादक रहिस हे। ओखर हर अंक म छत्तीसगढ़ी कहानी, निबंध, पुस्तक समीक्षा निकालत रहिस हे। सुशील ह जिंहा जिंहा छत्तीसगढ़ी भाषा के बीज डारे हावय ओ ह आज लहलहावत हावय।
ओखर हिंदी के कविता कहानी मन घलो बहुत ही स्तरीय रहिस हे। ऐखर कविता मन ल देशबन्धु के प्रधान संपादक ललित सुरजन जी बहुत पसंद करय। कइ बेर ओखर कविता मन ल सुनय घलो अउ छापय घलो। ओमा के एक कविता खास रहिस हें...
पत्थर-पत्थर बोल रहा है,
मन की आंखें खोल रहा है,
तेरे श्रम का हर-एक पल,
इतिहास बन बोल रहा है।।
चलो आज फिर दीप जला दें
श्रम के सभी ठिकानों पर..।
भोले जी के प्रकाशित साहित्य
छितका कुरिया(काव्य संग्रह (1988)
दरस के साथ(लंबी कविता (1989)
जिनगी के रंग ( गीत व भजन संग्रह (1995)
ढेंकी (कहिनी संकलन (2006)
आखर अँजोर (छ ग के सँस्कृति उपर आलेख (2006) दूसर संस्करण (2017)
भोले के गोले ,काव्य संग्रह (2015)
सब ओखरे संतान (चार गोड़िया के संकलन 2021-22)
सुरता के संसार (संस्मरण के संकलन 2021-22)
कोंदा भैरा के गोठ 2024
भोले जी ह कइ अखबार अउ पत्रिका म कॉलम लिखे रहिस हे...
बेंदरा बिनास (साप्ताहिक छत्तीसगढ़ सेवक 88-89)
किस्सा कलयुगी हनुमान के (मयारू माटी 88-89)
तरकश अउ तीर (दैनिक नव भास्कर 1990)
आखर अँजोर (दैनिक तरुण छ. ग. 2006-2007)
डहर चलती(दैनिक अमृत सन्देश 2009)
गुड़ी के गोठ (साप्ताहिक इतवारी 2010 लोगों 2015 तक)
राष्ट्रीय स्तर के अनेक पत्र-पत्रिका मन म अउ छत्तीसगढ़ म कविता कहानी लेख, समीक्षा साक्षात्कार मन के नियमित प्रकाशन होवत रहिस हे।
“लहर” अउ “फूल बगिया” ऑडियो कैसेट म गीत लेखन अउ गायन करे रहिस हे।
अनेक साहित्यिक,सांस्कृतिक मंच मन म गीत अउ भजन गायव।
भोले जी ल छत्तीसगढ़ राज भाषा आयोग दूवारा राज भाषा सम्मान 2010 म मिलिस। कइ ठन सामाजिक,धार्मिक,साहित्यिक संस्था ले घलो सम्मान मिलिस।
भारत सरकार साहित्य अकादमी दूवारा
गुजराती एउ छत्तीसगढ़ी भाषा 2017 के सम्मेलन म भागीदारी घलो करे रहिस हे।
मोर ले ओखर बहुत ही अच्छा सम्बंध रहिस हे। मोर छोटे भाई आये, बहुत ही लाड़ दुलार ले मोर घर साइकिल ले आ जावय। बहुत जुवर ले बइठय घलो। हमेंशा साहित्यिक चर्चा ही करय। मैं ओखर घर बेटी मन के बिहाव म गेंव। ओखर अलावा बइठे बर भी गेंव। जब तबीयत खराब रहिस हे तब दू बेर देखे बर भी गेंव। अभी मोर पुस्तक के विमोचन म चार जनवरी के बलाये रहेंव त कोई लेगही तब जाहुँ कहिस। अभी बारह फरवरी के फोन करे रहेंव पुस्तक समीक्षा बर तब कहिस के "तबीयत ठीक नइये कमजोरी आगे हे, अभी पढ़ना लिखना बंद कर दे हंव दीदी।"
मैं ह "आराम कर भाई।" कहेंव
मोला का पता रहिह हे के छोटे भाई सुशील लम्बा आराम करे बर चल दिही। मोर बर ओ ह इनसाइक्लोपीडिया रहिस हे। बहुत कुछ जानकारी लेवत राहंव। ओ ह छत्तीसगढी भाषा अउ संस्कृति बर अपन पूरा जीवन दे दिस। आज भी मोला ओखर साधना के बाद के समय के सुरता आवत हें। जब मोर घर आके बहुत कुछ बतावय। मोर आध्यात्मिक रुचि ल देखके बहुत खुलके बात करय। ओखर घर के एक कुरिया के कोना म रखे करिया रंग के बड़े से शिवलिंग मोर आंखी के आगू म आ गे। जेखर ओ ह पूजा करय अउ ओखर सामने म साधना करय। कोनो ल ओला देखाये बर नइ लेगत रहिस हे। आज सुशील उही शिवलिंग म समागे। जेन सम्मान ओला मिलना रहिस हे तेन सम्मान ओला सरकार ले नइ मिलिस।
सुधा वर्मा 25/2/2026