Thursday, 28 May 2026

हड़ताल अउ सिनेमा - 10(संस्मरण)

 हड़ताल अउ सिनेमा - 10(संस्मरण)

रायपुर म जैनधर्म वाला मन के प्रवचन चलत रहिस हे। अणुव्रत वाले आचार्य तुलसी के प्रवचन चलत रहिस हे। सन् 1970 के बात आये मैं नवमी म पढ़त रहेंव। एक दिन ओ ह माता सीता के बारे म कुछ कहि दिस। पहली रायपुर म तोड़फोड़ शुरु होगे। दूसर दिन जब स्कूल लगगे तब रायपुर बंद कराना शुरु होगे। कालेज के लड़कामन स्कूल मन ल बंद कराये ले लगगें। मैं बूढ़ापारा म जे आर दानी गर्ल्स उच्चतर माध्यमिक शाला म पढ़त रहेंव। उंहा के चेनल गेट ल बंद कर दे गेस। दोपहर के स्कूल रहिस हे। सवा बारह बजे करीब चार लड़का अइन अउ चिल्लाये ले लगगें "स्कूल बंद करो, स्कूल बंद करो।"

प्राचार्य ले बात करिन त भूटानी मैडम बोलिस के 'लड़की मन ल अतेक दंगा म नइ छोड़न। समय में ही स्कूल छूटही। बहुत लड़की मन रिक्शा म आथें त अभी कइसे जाहीं?' 


लड़का मन बोलिन के 'कोनो भी लड़की ल कुछु नइ होवय। सब के जाये के जिम्मेमेदारी हमर आये।' 


स्कूल छुटके। सब लड़की स्कूल के बाहिर आगें।  कुछ लड़का मन लड़की मन के संग संग चलत रहिन हें। काबर के पहिली ले ही इंहा दू गुट चलत रहिस हे। एक ब्राम्हणपारा अउ दूसर बैजनाथ पारा। हमेंशा दूनो के बजेच लड़ाई, मारपीट होवत राहय।


हमर ग्रुप निकलिस त बूढ़ा तरिया ले जब सत्तीबाजार डाहर मुड़त रहेन त आगू भीड़ दिखिस त हमन श्याम टॉकीज डाहर मुड़ गेन। श्याम टॉकिज म थोरिक रुक जथन सोचेन। उंहा के गेटकीपर कहिस 'अंदर हॉल में बैठ जाओ पैसा नहींं लगेगा।' हमन सोचे ले लगगेन। मैं अउ वीणा तिवारी साथ म रहेन। अउ लड़कीमन रहिस हे फेर सुरता नई आवत हे शायद रत्नप्रभा तिवारी रहिस हे। हमन करीब दस बारह झन लड़कीमन  सिनेमा देखे बर बइठ गेन। हॉल म चार पांच झन बइठे रहिन हें। हमन तीन बजे निकलेन तब तक चारो डाहर शांति होगे रहिस हे। हमन सत्तीबाजार डाहर चल देन। जइसे अजंता बुक डिपो तीर पहुँचेन त चार पांच लड़कामन बइठे रहिन हें।

"कहाँ ले आवत हव"

" रद्दा बंद रहिस हे त श्याम टॉकिज म रुक गे रहेन"

"ठीक से जाना" बोले के बाद हांका लगइन "लड़कीमन ल सीधा जावन देव"

 हमन चुपचाप चलत रहेन। पूरा रोड म सन्नाटा रहिस हे। हमन कंकाली अस्पताल के सामने गेन त फेर सात आठ झन लड़का खड़े रहिन हें। एक झन पूछथे, स्कूल ड्रेस म कहां रहेव? तब एक झन लड़का वीणा ल पहिचान लीस। ओ ह लड़का मन कहिस "जान दे ब्राह्मणपारा वाले के बहिनी आये।

वीणा ल बहुत झन मन पहिचानत रहिन हें। कन्हैयालाल तिवारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नातिन अउ पंकज तिवारी के बेटी रहिस हे। आज पंकज तिवारी के नाम ले ब्रामहणपारा म स्कूल हावय। वीणा ले बड़े चार भाई रहिन हें। ओ मन चौक म अक्सर खड़े राहंय। छोटे से रायपुर के लड़कामन के गेंग एक दूसर ल जानंय। हमन ब्राम्हणपारा चौक पहुँचेन त गांधी जी के मूर्ति तीर वीणा के भाइ संग अउ लड़कामन खड़े रहिन हें। सब लड़की मन रद्दा म अपन अपन घर चल दिन। अब आखरी म मैं बांचे रहेंव। वीणा के भैय्या पूछिस 'सुधा अकेले जायेगी?'


मोर चेहरा के डर देखके भैय्या मोला छोड़े बर गीस। आमापारा ले मुड़ के स्वीपर कालोनी पार करके ईदगाहभाठा हिन्दूस्पोर्टिंग मैदान तक छोड़ दिस। मैं छः नम्बर गली म  मुड़ के अपन घर चल देंव। 

मोर माँ बैठक के दरवाजा म गली के दूनो तरफ ल पारी पारी ले देखत बइठे रहिस हे। मैं गेट ल खोलके अँगना म आ गेंव त माँ घलो उठ के अंगना म आ गे। 


मैं मस्कुरावत रहेंव त पूछिस "स्कूल ल बंद करवा दें हें काहत रहिन हें तोर स्कूल खुल्ला रहिस हे का?" मैं हाथ गोड़ धोवत धोवत पूरा घटना ल बता देंव। अब चाय बना के माँ ल देंव अउ मैं टिफिन के रोटी ल निकाल के चाय संग खायेंव। मोर पसंदीदा नाश्ता चाय रोटी। बिहनिया चाय रोटी अउ शाम के चाय पराठा। शांति तो होगे फेर माँ ह दूवारी म बइठे बइठे अवइया जवइया वाले मन संग बात करके समाचार लेवत राहय। ये हमर माँ के दिनचर्या म रहिस हे। रात के हमर पिताजी जेन ल काका काहत रहेन अइस त सब बात सुनके चुप ही रहिस। बस अतका कहिस के "स्कूल ले सीधा घर आना चाही। आगे से कहीं अउ जाये के जरुरत नइये।"


घर साइंस कालेज इंजिनियरिंग कालेज के तीर म रहिस हे। आये दिन दंगा होवत राहय त लड़का मन हमरे मोहल्ला म आके  लुकावंय। फोन के जमाना नइ रहिस हे। घर के बाहिर गेस त बस इंतजार ही आखरी हथियार राहय।


आज अतेक क्राइम होवत हावय। दस बछर ले तो दू ही समाचार मिलथे बलात्कार अउ खून। आज छः महिना के बेटी ले सत्तर बछर के डोकरी दाई घलो सुरक्षित नइये। आज बेटी बस म स्कूल जाथे तब भी महतारी के जान सुखावत रहिथे। घर आ जथे तब ही ओ मन भर के सांस लेथे।

हमन ओ समय म एक ही बात देखेन छेड़छाड़ अउ एक से एक डॉयलॉग। हा हा हा हा । आज हँसी आथे सुरता करके। दानी स्कूल ले आवन त चार पाँच अड्डा राहय जिंहा लड़कामन खड़े रांहय। अइसना वाक्य बोलंय के डर के संग हाँसी आवय।

" ये पीली चुन्नी वाली आज रात के खिड़की घोल के रखबे।

"मैं काली आवत हंव बने नाश्ता कराबे।"

मोर भाग्य अच्छा रहिस हे जेन सुंदर भी नइ रहेंव, सांवली सलोनी , मोला कुछ सुने बर नइ मिलिस। हा हा हा।"


ओ कुछ बछर के समय अइसना रहिस हे तब कालेज म बहुत हड़ताल होवय अइ सत्तीबाजार  ब्राम्हणपारा अउ बैजनाथपारा म गुंडागर्दी अउ मारपीट होवत राहय।


माता सीता के ऊपर बोले के बाद तो हड़ताल बहुत चलिस मारपीट होइस। फेर लड़की मन सुरक्षित रहिन हें। सुरक्षा के जिम्मेदारी रायपुर दादागिरी करने वाला लड़का मन लेय रहिन हें। पुलिस ल हमेंशा बोलंय 'किसी भी लड़की को कुछ नहीं होगा।'


सन् 1965  ले 1980 तक जब कोई घटना सुने नइ रहेंन। ये हमर पढ़ाई के समय रहिस ह। बाद म कलयुग अपन गोड़ पसारना शुरु कर दिस। बीच के बेरा म नारी भ्रूण हत्या होवत रहिस हे दहेज के कारण। बाद म बलात्कार के कारण। जब भी बलात्कार के घटना सुनथंव त ओ सिनेमाघर सुरता आथे। ओ दिन हमन दू घंटा बइठ के सीधा लड़कामन के निगरानी म अपन अपन घर पहुँच गेन। 1980-90 तक लड़की मन सुरक्षित रहिंन हें। लोगन अपन बेटी ल आसपास के घर के भरोसा म बेटी ल छोड़ देवंय। आज बाप दादा ले घलो बेटी सुरक्षित नइये। ये सुरता येखरे कारण अइस। समय कतेक बदल के हावय। चालीस बछर म बेटी अकेल्ला दुनिया घूमत हावय फेर अस्मिता सुरक्षित नइये। हमन युवा रहेन त ये लड़कामन ही हमर अस्मिता के रक्षक रहिन हें।

सुधा वर्मा,12/4/2026

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