Saturday, 30 May 2026

बिग्यान, भूगोल, खगोल, अउ चउथा रसायन।*


    

*बिग्यान, भूगोल, खगोल, अउ चउथा रसायन।*

            ए चारों मा मिलावट नइ होना चाहि जइसे_धरती, अगास, आगी, पानी, हवा। एमा मिलावट होय मा बिस्कुटक जनमथे। बिग्यान, भूगोल, खगोल ल मइनसे नई बना सके येमन अपन अनुसार चलथे, जेकर संगे संग मनखे चलथे। रसायन सिरिसटी मा मउजुद हे जेकर इजाद करके मेडिसिन नवा- नवा दवाई बनाथें। जेकर ले कुछ भी उत्पादन समय बेसमय करथें।

      हमर छत्तीसगढ के बारों महीना के तिहार मा बिग्यान, भूगोल, खगोल के परभाव देखेल मिलथे। जेमा मउसम के खास मेल मिलाप हे।

     जैव विविधता, प्रकृति संस्कृति संग लोक परब के मानव  जुड़ाव। सबों जीव सब्बों मउसम मा नइ दिखे _मेचका, सांप, कीरा मकोरा, पशु ,पंछी। डारा पाना के हरियई अउ सुखई। चिरइयां, गोंदा कतरो पानी रितो ले अभी नइ जामे। बीज के अवधि दिन। 

    बिग्यान, भूगोल,खगोल वो आय जेकर गति ल कोनो रोके नइ जा सकय। एक बार बिग्यानिक प्रयोग होय के बाद सदा मानव बर रद्दा बन जाथे। एला मानव चक्र या फसल चक्र मान लेवय।

       कृषि के बिग्यानिक पोठ परम्परा बर आदिम मानव कोती जाना चाहि जेन भोजन के तलाश मा जंगल- जंगल घुमत रिहीन। जेन मन सबले पहिली झूम खेती करके मानव मनबर भोज्य श्रृंखला तियार करीन जेन सब्बो जीव के काम आइस। आगी, पहिया के खोज करीन।

    जब बिग्यान के गोठ बात होथे वो जघा चमत्कार ल नइ लाना चाहि एकर ले वास्तविकता के खंडन होय लगथे बिग्यान के हनन होथे। माथा बने खोदीया के खोजे ल छोड़के बैसाखी के सहारा मा खड़े होथे। तहां आधा दूध आधा पानी हो जाथे।

         जब बिज्ञानिक शोध परख करत हन ता बाजारवाद ले बचना चाहि। बिशेष कर कथा, कंथली ले। जीनगी के ब्यथा हा कथा बन जाथे। सबले पहिली कहीं कुछू बनथे तेकर पिछू सजथे। अउ सजे वाले ल अउ सजा देबे ता काय बनही..? सबले पहिली उघरा मनखे ल कपड़ा पहिनाव, फेर भात खवाव, तब गाना गवाव। झोपड़ी ल घर बनाव, रोटी कपड़ा, मकान कइसे आइस समझाव। मानव सभ्यता के बिकास कइसे होइस.. काय ओला मिलगे तेकर खुशी मा तिहार मनाइस। अलग अलग दिन बादर म अलग_ अलग तिहार काबर मानथे..? तिहार मनाय के जीनिस मा तको अंतर हे..ये मनखे काकर पूजा करत हे.. फेर हर साल उहीच दिन बादर।

            

              मदन मंडावी

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