Saturday, 30 May 2026

समीक्षक के दुरूह दायित्व ला सफलता ले निभाय हे पोखनलाल जायसवाल*


 *समीक्षक के दुरूह दायित्व ला सफलता ले निभाय हे पोखनलाल जायसवाल*


 छत्तीसगढ़ी साहित्य म रचनात्मक लेखन बहुत होय हे।वो दिखथे भी, फेर गंभीर और संतुलित समीक्षा लेखन अपेक्षाकृत कम दिखथे।अइसन समय मा *“विमर्श के कसौटी म समकालीन छत्तीसगढ़ी साहित्य”* समीक्षक के रूप म पोखन लाल जायसवाल जी के ये कृति हर केवल समीक्षा-संग्रह नोहय, बल्कि समकालीन साहित्यिक प्रवृत्ति के परखइया अउ आलोचनात्मक दृष्टि के परिचायक बन के सामने आय हे।

पुस्तक के भूमिका म डाॅ विनोद कुमार वर्मा जी लिखे हें, "पोखनलाल जायसवाल जी छत्तीसगढ़ी में अबाध गति से विमर्श करने में सिद्धहस्त हैं। उनके स्वभाव में विमर्श है। चिन्तन उनकी प्रवृत्ति है। प्रतिभा उनकी चेतना है। उनके विमर्श का यह संयोजन मौलिक, विद्वतापूर्ण, चिंतनपरक सुस्पष्ट होने के साथ-साथ जनजीवन की सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं आदि का न केवल उद्घाटन करता है बल्कि विवेच्य को समष्टि के साथ सम्बद्ध कर देखना उनके विमर्श का मूल आधार है। उनके विमर्श में विवेचना, विश्लेषण और प्रभावात्मकता कूट-कूट कर विद्यमान है, जो उन्हें समीक्षकों की कतार में अलग एवं विशिष्ट स्थान देता है।"

समीक्षक ने इस किताब में 15 लेखकों के 18 पुस्तकों की समीक्षा लिखी है। 

वे पुस्तकें हैं-

1.हीरा सोना खान के (खण्ड काव्य) :मनीराम साहू

2.गति-मुक्ति (कहानी संग्रह) :रामनाथ साहू।

3.तैं तो पूरा कस पानी उतर जाबे रे(काव्य संग्रह) :शोभामोहन श्रीवास्तव

4.तुतारी(कहानी संग्रह) :चंद्रहास साहू

5.ठग अउ जग (लोककथा संग्रह) :वीरेंद्र सरल

6.बहू हाथ के पानी (उपन्यास) :दुर्गा प्रसाद पारकर

7.बेरा-बेरा के बात (काव्य संग्रह) :पीसी लाल यादव

8.जयकारी जनउला(छंदबद्ध काव्य) :कन्हैया साहू

9.गजामूँग के गीत(दोहा गीत संग्रह) मनीराम साहू

10.बहुरिया (कहानी संग्रह) चोवाराम वर्मा

11.ढेंकी(कहानी संग्रह) सुशील भोले

12.मोटरा संग मया नँदागे(निबंध - गद्य संग्रह) बलदाऊ राम साहू

13.पाँखी काटे जाही(गज़ल संग्रह) :राजकुमार चौधरी

14.फुरफुंदी(बालगीत संग्रह) :कन्हैया साहू

15.हमर स्वामी आत्मानंद (चम्पू काव्य) चोवाराम वर्मा बादल

16.मोर गाँव गँवागे(काव्य संग्रह) जीतेंद्र खैरझिटिया

17.मोर अँगना के फूल (काव्य संग्रह) वसंती वर्मा

18 वीर हनुमान सिंह (खण्ड काव्य) :मनीराम साहू

मोर सौभाग्य ये कि ये पुस्तक पढ़े बर मिलिस। समीक्षा-विमर्श के ये संग्रह अतेक पठनीय रहत होही कहिके मोला आकब नइ रहिस ।या फिर ये समीक्षक के कलम के कमाल होही कि विवेचनात्मक पुस्तक मा घलो मोला पढ़े के रस मिलगे।समीक्षा मन ला पढ़त-पढ़त अइसे लागत रहिस, जइसे लेखक मन के पुस्तक ला मैं पढ़ लेंव।

छंद के छ के संस्थापक गुरुदेव अरुण कुमार निगम जी अपन विचार व्यक्त करत लिखे हें, "पोखनलाल जायसवाल जी एक साहित्यकार के रूप मा छत्तीसगढ़ी के गद्य अउ पद्य दुनों विधा मा सृजन करत हे।सृजन के अलावा उनकर रुझान पुस्तक समीक्षा डहर घलो होगे हे। छत्तीसगढ़ी साहित्य बर ये शुभ संकेत आय।"

उन ये भी कहिन, " छत्तीसगढ़ी साहित्य के समीक्षक पुरोधा डाॅ बल्देव साव के कमी ला पूरा नइ करे जा सके फेर उनकर जाय के बाद समीक्षा विधा ला गति देहे के सुग्घर काम पोखनलाल जायसवाल जी करत हे। "

जायसवाल जी पुस्तक मा अपन गोठ रखत कहे हे," मोर ए कोशिश हे कि जिंकर भी किताब मोर हाथ लगे हे उन ला मैं अउ पाठक मन तिर पहुँचाय के उदिम करौं ।उही उदिम के एक ठन कोशिश अभी सउँहत ये विमर्श अउ समीक्षा के पुस्तक हरे। मोला पूरा अजम अउ विश्वास हे कि मोर ए कोशिश खच्चित रंग लाही अउ लिखइया-पढ़इया मन उत्साहित हो के एक दूसर ला मन ले पढ़ही, अउ नइ ते पढ़े के प्रयास करहीं। "

पुस्तक मा हर समीक्षा के पहिली विषय-वस्तु मा पोखन लाल जी सुग्घर भूमिका बाँधे हे, विधा के जानकारी दे हे। समीक्षा मा तटस्थता हे।चूँकि समीक्षक कवि घलो आय, शिल्प अउ भाव के साथ साथ रस छंद अलंकार के चर्चा घलो गंभीर हो के करे हे। जउन-जउन जघा लेखक मन ध्यान खींचे हे, मुक्त भाव ले प्रसंशा के साथ कमी-बेसी के उल्लेख घलो करे हे।

वाकई समीक्षक के काम मानसिक श्रम माँगथे। 18 पुस्तक के समीक्षा यानि जम्मो पुस्तक ला पहिली पढ़ना फिर चिंतन करना, गुण-दोष के विवेचना करना अउ फिर वोला लिखना अउ तन-मन-धन लगा के पुस्तक के आकार देना, साधारण आदमी के बुता नोहय।एकर सेती आज वरिष्ठ मन घलो आज पोखनलाल जी ला खुले मन ले आशीर्वाद देवत हें। वो स्वयं कतको कहानी, गीत-नवगीत, छंद अउ निबंध जइसे विधा मा लिखत हें।छत्तीसगढ़ी अउ हिंदी दोनों भाषा मा समान अधिकार ले लिखथें।

 रचना के समीक्षा ले रचनाकार मन ला अउ अच्छा लिखे के प्रेरणा मिलही, कलम सजोर होही।समीक्षक के हाथ मा पड़ के लेखक मन के पुस्तक के सही मुल्यांकन होथे। सुग्घर समीक्षा के ये उदिम बर पोखन लाल जायसवाल जी प्रसंशा के पात्र हे।साथ ही ये पुस्तक "विमर्श के कसौटी म समकालीन छत्तीसगढ़ी साहित्य" बर पोखन लाल जायसवाल जी ला गाड़ा गाड़ा बधाई। ये पुस्तक ला पढ़ के निश्चित ही लोगन छत्तीसगढ़ी साहित्य ला पढ़े पर प्रेरित होही, अइसे मोला विश्वास हे।


:बलराम चंद्राकर

सिसदेवरी, जिला बलौदाबाजार

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