Thursday, 28 May 2026

आज के भक्ति मार्ग

 आज के भक्ति मार्ग 


मोला लगथे भगवान हा, चाहे जड़ होवय या चेतन, चर होवय या अचर,  सबो बर उंखर सुभाव के अनुसार नियम बनाए हे। कोनो भी होय हमेशा एक समान नइ रहय। बरसात के मौसम ले बसंत ऋतु तक प्रकृति के सुंदरता देखे के लाइक रथे। तहॉं ले पतझड़ शुरू....मनखे यदि अपन सुभाव म सदा बहार रथे त ओला कोनो फरक नइ परय। फेर कहूॅं थोरको प्रसिद्धि पा जथे त ओकर भाव झन पूछौ भाई, सातवॉं आसमान म चढ़ जथे। स्वाभिमान के नॉंव म पइधथे गरब, गुमान, घमंड। अउ दिमाग ओतके 

तेज घलो भागे लगथे। "हर्रा लगे न फिटकरी रंग चोखा" के हाना ल सकार करे लगथे। खोजत रथे कहॉं ले दू पइसा बचा लॅंव, खाली बचा लॅंव नहीं रपोट लॅंव। एकर बर मनखे के चतुराई, चलाकी के जवाब नहीं। हमर असन लेड़गा के दिमाग के ट्यूब लाइट देरी म बरथे। चोक दे बर परथे। फेर ए गरब गुमान जादा दिन नइ चलय। दुनिया ल देखाए बर संत। भीतरे भीतर पनपत हे विकार अनंत। 

           मनखे के पूछ परख गुणवत्ता के अधार म होथे ए बात सही ए। फेर खाली गुणवत्ता काम नइ आवय। चापलूसी चाटुकारिता के बहुत बड़े रोल रथे। काखर पदवी बढ़ाना हे, काला माछी कस निकाल फेंकना हे एकर ऑंकलन बर ए भक्ति मार्ग बहुत ज़रूरी हे। हमर एक अधिकारी रहिन। उन ककरो कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट लिखे के चार खंभा बनाए रहिन। चारो खंभा ल बराबर दस दस नंबर दे रहॅंय। कहॅंय के तुम एक खंभा -काम के गुणवत्ता म भले पूरा नंबर दे के लाइक हौ, लेकिन बाकी तीन खंभा; चापलूसी, सेवक, अउ तीसरा; दूसर काय करत हे ओकर खबर पॅंहुचाना एमा कहूॅं जीरो पा गेव त सब बेकारे हे न.....।  अउ एकर उलटा करके देखौ:- तीन खंभा के तीस नंबर... भले गुणवत्ता म झन पाए रहव। तौ कभू न कभू जीवन म ए बात होवत दिखबे करथे।


जय जोहार 🙏🌹

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