लघुकथा-
" हाथ के रेखा "
-मुरारी लाल साव
आज से दस साल के पहिली के घटना ए l भागबली अपन हाथ ला एक बहुत बड़े पंडित ज्ञानी हस्त रेखा आचार्य के पास जाके देखाये रहिस l दूर दूर से अउ लोग आये रहिन अउ बहुत मनखे l सब के कहना इही रहिस "महराज बने बताथे हाथ ला देख के सब सही होथे l"
इही भरोसा भगबली ला रहिस l महराज ला अपन हाथ ला देखावत पूछे रहिस -" महराज मोरो भाग्य ला बने बताबे?
" का पूछना हे? "
"जउन हाथ म लिखाये हे तेन ला बता!"
"कुछु बड़े समस्या?" महराज पूछिस l
भागबली कहिस -" अभी तो बिहाव नइ होये l बिहाव होये रहतीस त बड़े समस्या रहतिस l बिहाव होही कि नइ होही अउ कइसे पत्नि आही?के झन लइका होही? इही सब ला पूछना हे l "
महराज हँसत कहिस " ला देखा जेवनी हाथ ला दे l "
संड़ौवा काड़ी ला रेंगावत कहिस -" तोर भाग्य म तीन बाई हे! भागबली अचरज म "तीन तीन झन!" ऊपर वाले घलो का सोच के लिख दे हे?
महराज -" जइसन करम ओकर ओइसन भाग्य रेखा हाथ म होथे lपूर्व जन्म के अनुसार l"
"तोर एके झन लइका होही l
सहीच म! हाथ के रेखा म लिखाये हे ना l कहूँ बिहाव नइ करहूँ कभू तभो?
महराज कहिस -" होना हे होके रहि l करम म दान धरम जुड़े ले भाग्य बदल घलो जही l
भाग बली डर के मारे आज तक बिहाव नइ करिस l हाथ के रेखा का बताथे? बताइय्या के पीछू पड़े हे l ए मन कहाँ तक ककरो जिनगी ला पढ़े हे? का गढ़े हे?
"
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