Thursday, 28 May 2026

लघुकथा- " हाथ के रेखा "

 लघुकथा-

             " हाथ के रेखा "

         -मुरारी लाल साव 

आज से दस साल के पहिली के घटना ए l भागबली अपन हाथ ला एक बहुत बड़े पंडित ज्ञानी हस्त रेखा आचार्य के पास जाके देखाये रहिस l दूर दूर से अउ लोग आये रहिन अउ बहुत मनखे l सब के कहना इही रहिस "महराज बने बताथे हाथ ला देख के सब सही होथे l"

इही भरोसा भगबली ला रहिस l महराज ला अपन हाथ ला देखावत पूछे रहिस -" महराज मोरो भाग्य ला बने बताबे?

" का पूछना हे? "

"जउन हाथ म लिखाये हे तेन ला बता!"

"कुछु बड़े समस्या?" महराज पूछिस l 

भागबली कहिस -" अभी तो बिहाव नइ होये  l बिहाव होये रहतीस त बड़े समस्या रहतिस l बिहाव होही कि नइ होही अउ कइसे पत्नि आही?के झन लइका होही? इही सब ला पूछना हे l "

महराज हँसत कहिस " ला देखा जेवनी हाथ ला दे l "

संड़ौवा काड़ी ला रेंगावत कहिस -" तोर भाग्य म तीन बाई हे! भागबली अचरज म "तीन तीन झन!"  ऊपर वाले घलो का सोच के लिख दे हे?

महराज -" जइसन करम ओकर ओइसन भाग्य रेखा हाथ म होथे lपूर्व जन्म के अनुसार l"

"तोर एके झन लइका होही l

सहीच म!  हाथ के रेखा म लिखाये हे ना l कहूँ बिहाव नइ करहूँ कभू तभो?

महराज कहिस -" होना हे होके रहि l करम म दान धरम  जुड़े ले भाग्य बदल घलो जही l

भाग बली डर के मारे आज तक बिहाव नइ करिस l हाथ के रेखा का बताथे? बताइय्या के पीछू पड़े हे l ए मन कहाँ तक ककरो जिनगी ला पढ़े हे? का गढ़े हे?

"

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