नशा सोशल मीडिया के
आजकल सूचना अउ संचार के जमाना मा सरी दुनिया के शोर-खबर हा घर बैठे मिल जथे। ये साधन हा हम सब के बीच मा अपन पहुँच बना डरे हे। फेर मनखे-मन के आदत हा पड़ोसी घर ला ताँके-झाँके के जादा रहिथे। पुरखा-सियान मन के कहना रहिस कि कभू अपनो घर ला झाँक के देख ले करव रे बाबू हो। शुरू-शुरू मा हमला ये बात के रहस्य हा समझे मा नइ आत रहिस। फेर सोशल मीडिया ला झाँके मा जम्मों बिसकुटा के खइरपा हा अपने-अपन खुलत गीस।तब समझ मा आइस येकर बुखार हा कतका नशीला हे। आजकल कन्हों जरूरी संदेश ला एक आदमी ले दूसर आदमी तक पहुँचाय बर सोशल मीडिया के एकतरफा उपयोग होवत हे।सोच-समझ के बउरे मा येकर लाभ तो हे फेर अनर-बनर बउरे मा शारीरिक, मानसिक अउ आर्थिक हानि के संभावना घलव हे। येमा एके ठन मेसेज ला एके घाँव मा कतको झन ला भेजे के वेवस्था हावय।आज देश के बहुत बड़े आबादी के हाथ मा स्मार्टफोन के पहुँच हे। कतको पढ़ईया लइका-मन अपन घर बैठे आनलाइन एजूकेशन एप ले जुड़के पड़ई-लिखई जैसे महत्वपूर्ण काम ला करत हें। बड़े-बड़े कंपनी वाले मन अपन आफिस के कई ठन काम ला अपने घर मा बैठ के आनलाइन निपटाय के उदीम करत रहिथें। कोरोना के समय मा येकर उपयोग ला भला कोन हा भुला सकथे। तब आफिस के सरी काम घर बैठे होवत रहिस। येकर ले आय-जाय के खरचा के संग समय के बचत हो जाय। कला जगत हा घलव एकर ले अछूता नइ हे। देश होय चाहे विदेश इहाँ ले लेके उहाँ तक छोटे ले लेके बड़े कलाकार-मन अपन कला के प्रदर्शन बर इही माध्यम ला चयन करके दूर-दराज तक अपन पहुँच बनाए मा सफल होवत हे।
ओ गुजरे दिन के सुरता ला समोख के रखना घलव जरूरी हे जब मनखे-मन सिरिफ टेलिफोन के नाव ला सुने बस रहिन। अखबार, पोस्टर अउ सनीमा के चित्र ला देख के टेलिफोन के शकल-सूरत ला जानिन। जब शहर डहर जाना होइस तब लोगन-मन सेठ-साहूकार-मन ला उनकर दुकान मा गोठियावत देख के येकर मुखा दर्शन कर पाइन। फेर एक लंबा समय निकले के बाद विज्ञान अउ तकनीक के क्षेत्र मा समाज हा बहुत बड़े बदलाव के अनुभव करिस। नब्बे के दशक मा टीवी हा निम्न मध्यम वर्गीय परिवार तक अपन पहुँच बनाइस। आबादी के हिसाब ले बड़े गाँव मन मा टेलिफोन तार के माध्यम ले संचार सेवा के शुरुआत हो गे रहिस। फेर येकर लाभ कस्बा अउ शहर के आसपास के गाँव-मन ला ही मिल पाइस। इक्कीसवीं सदी के शुरुआत मा संचार-सेवा के क्षेत्र मा एक क्रांतिकारी बदलाव आइस। जिहाँ किफायती दर मा लगभग प्रत्येक गाँव बर एक मोबाइल टावर के संग डब्ल्यूएलएल के एक सेट देय के योजना लांच करे गीस। ये योजना ले सूचना-संचार के क्षेत्र मा व्यापक परिवर्तन होइस।
फेर येकर माध्यम ले दूर-दराज के मनखे-मन ले सीधा बातचीत अउ आवश्यक जानकारी तुरत प्राप्त कर के सुविधा मिलिस। फेर मनखे के जिनगी मा तेजी ले बदलाव लाइस ये मोबाइल हा। शुरूआती दौर मा मनखे के जिनगी मा बातचीत के काम ला आसान करे बर मोबाइल हा कीपैड मा सवार होगे हमर बीच मा आइस। समय के साथ नवा-नवा तकनीक के अविष्कार ले साफ्टवेयर अपग्रेड होवत गीस अउ आज एन्ड्राइड अउ आईफोन जैसे स्मार्टफोन हा हम सब के हाथ मा आगे हे।आज के दौर मा येकर बिना दुनिया हा अधूरा हे। इतिहास ला खोधियाय मा पता चलथे कि येकर अविष्कार अमेरिका के इंजिनियर मार्टिन कूपर हा 1973 मा करे रहिस।धीरे-धीरे कंप्यूटर अउ सॉफ्टवेयर के विकसित जुगलबंदी ले मोबाइल फोन हा नवा-नवा एप के माध्यम ले ज्ञान-विज्ञान के दुनिया मा अपन डंका बजावत हे। येमा अपन पसंद के कई ठन एप ला अपलोड करके जानकारी के संग दिनचर्या ला सरल बनाय जा सकथे। मौसम के जानकारी हा किसान भाई मन बर बड़ महत्व के होथे। कब पानी गिरही, कब सुक्खा रही अउ कब पाला पड़ही येकर जानकारी मौसम के एप ले समय रहत मिल जथे। तब किसान हा फसल के बोनी अउ कटाई ला समय रहते सफलतापूर्वक निपटा डारथे। अइसने ढंग ले बैंक मा पैसा-कौड़ी के लेन-देन बर यूपीआई , गुगल पे, फोन पे, अनजाना शहर मा मैप के जरिए ट्रेफिक के जानकारी, रेडियो, टीवी, घड़ी, कलेंडर,पंचांग अउ ट्विटर कई ठन एप हवय।वाट्सएप,फेसबुक, यूट्यूब अउ इंस्टाग्राम ले अपन अभिव्यक्ति ला आडियो, विडियो अउ लिखित रूप मा दुनियाभर मा सेकंड भर मा पहुँचा सकथन।
अलग-अलग जगह मा दूर-दराज मा बैठे सब मनखे-मन ले आडियो अउ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए गोठबात के सुविधा हा बहुत बड़े इनाम घलव आय।नवा पीढ़ी के लइका-मन मोबाइल के बारे मा एक-एक ठन जानकारी ले अपडेट रहिथें। तेपाय के पचास साल के सियान-मन हा पाँच साल के लइका के आगू मा पानी भरत नजर आथें। येकर अतिक नशा कि लइका-मन के हाथ ले कहुँ मोबाइल ला नँगा लेबे ते वोमन टेंशन मा आ जथें। अरे काला बताबे मरे-मारे बर जोम देथें। येकर नशा अतिक कि थोरको भी खयाल नइ रखे कते हा माँ हरे अउ कते हा बाप हरे।अभी मोबाइल के इही महिमा ला देखते रहेन कि विज्ञान के दुनिया मा एआई हा मेछरावत आके अपन धमक कायम कर दीस। येहर तो अइसे करिश्मा आय जेकर कन्हों जुवाब नइहे।
गोठ ला आगू बढ़ाबे तब येती मोबाइल मा आडियो-विडियो देखे-सुने के तकनीक हा लोक कला के मंचीय बेवस्था के पाया ला हिला के रख देहे। गाँव-गँवतरी मा नाचा-गम्मत, पंथी, पंडवानी अउ भरथरी जइसन लोक कला के अंकाल परे कस होगे हे। मोबाइल मा मिलने वाला मनोरंजन के सामग्री-मन मंचीय प्रस्तुति ले बहुत सस्ता हे। तेकर सेती सब येकरे पाछू-पाछू भागत हें। खास बात तो यहू हे कि येला जब समय मिले तब देखे जा सकथे। साथ ही समय के बचत बोनस मा। दृश्य-श्रव्य मनोरंजन के क्षेत्र मा येहा सिनेमा उपर सबले जादा प्रभाव डारे हे। आज आम जनता-मन सिनेमा घर मा बैठके फिलिम देखना पसंद नइ करें। तेकर सेती कई सिनेमा घर बदहाली के शिकार हे। आज सोशल मीडिया हा समाज ला अपन गिरफ्त मा ले डरे हे। गूगल, इंस्टाग्राम, फेसबुक ,यूट्यूब, ट्विटर अउ व्हाट्सएप्प जइसन एप हा ज्ञान के खजाना तो आय। फेर येकर ले समय जैसे मूल्यवान चीज के बरबादी घलव हे। जब येला देखना शुरू करबे ते तँय देखते रहि जबे। मोहनी-थापनी डारे कस समय कइसे पहाथे कुछु समझे मा नइ आय। ये दिशा मा होवत शोध ले यहू पता चले हे कि स्मार्टफोन चलइया दीदी-भैया मन चौबीस घंटा मा औसतन तीन घंटा अपन मोबाइल में व्यस्त रहिथें।
विडंबना ला देखव ये मोबाइल के सेती आजकल हुशियार मनखे-मन घलव डिजिटल अरेस्ट के शिकार होवत जात हें। अउ घबराहट मा अपन मेहनत के गाढ़ी कमई ला गवाँवत हें। विद्वान-मन के कहना हे कि सोशल मीडिया के सेती दुनिया के दूरी हा सिमट के मोबाइल मा समा गे हे ।फेर घर भीतरी के किस्सा-कहानी हा कुछ अलगेच हे। इहाँ तो एक ठन सोफा मा तीर-तीर मा बैठे परिवार वाले मन हा गजब दूरिहा होगे हें। काबर कि सबके हाथ मा एन्ड्राइड मोबाइल हे। अउ सबे मन मोबाइल के विशाल समुंदर मा खुसर के तउँरे के आनंद लेना चाहत हें।
मार्केट मा किसम-किसम के मोबाइल के आय ले नवा पीढ़ी के बहुत लइका-मन मा येकर मनमाने बुखार चढ़े हवय। येमन जरूरी काम-धाम ला छोड़ के मोबाइल खरीदे मा अपन ध्यान लगा देथें। तेकर कारण उनकर आर्थिक स्थिति के ऊपर भी बहुत फरक पड़त हे। ये लइका-मन छोटे-छोटे वीडियो देखके, रील बनाय मा अपन कीमती समय बर्बाद करत हें। अउ अपन पढ़ाई-लिखाई ले दूर होवत जात हे।सही कहिबे ते अभिव्यक्ति के आजादी के नाम मा इही सोशल मीडिया हा आजकल धरम-जात अउ वर्ग-भेद के नवा अध्याय वाला अखाड़ा घलव बनगे हवय। येकरे आड़ मा दबंगई के खुलेआम खेल चलत हे।गाली-गलौच के उत्पादन अउ वितरण केंद्र के रूप मा येकर इस्तेमाल हद ले जादा होवत जात हे। मनखे समाज मा अब समरसता के भाव हा खंडित होय कस जनाथे। काबर कि कोई ला जातिगत गाली देना हे, तलवार लहरावत प्रदर्शन करना हे तेकर बर अब ये धरती हा बड़ उर्वरा होगे हे। कते हा प्रधानमंत्री जैसे पद मा बैठे व्यक्ति ला जातिगत गाली देवत समाज मा अपन विशिष्टता प्रमाणित करे के होड़ मा लगे हे। कते हा बाबा अंबेडकर ला गरियावत हे, त कते हा समाज-सुधारक महापुरुष मन के मान-मर्दन करके अपन औकात दिखावत हे। तब लिल्हर लुरू-बुटु मन के का हालत होवत होही तेकर सहज अंदाजा लगाय जा सकथे।समझ मा ये नइ आवय कि येमन ला अइसन करे के साँस-पानी कहाँ ले मिलत हे। तलवार लहरावत कोई भी ला मारे-काटे के फतवा जारी करे के हिम्मत हा तो जगजाहिरे हे। अउ कमजोरहा मनखे-मन अंगरीच दिखा दिही ओतकीच मा अइसे ओइला देथे ते ओकर जमानत मिलना मुश्किल हो जथे। कते हा हिंदू देवी-देवता उपर अभद्र टिप्पणी करत हें ता कते हा दूसर धरम उपर घटिया टिप्पणी करके सुर्खी बटोरत हे। इहाँ संविधान अउ धार्मिक ग्रंथ मन ला चीर-फाड़ करे ले बाज घलव नइ आत हें।महापुरुष मन के मूर्ति-मन ला खंडित करके धौंस जमाय के नवा संस्कृति के उदय होवत हे। ये सब असमाजिक घटना ला सोशल मीडिया मा वायरल करके ये मन बड़े शान के साथ अपन धृष्टता के परिचय घलव देवत हें।
यूट्यूब ला देखे मा ये मनोरंजन अउ ज्ञान के खजाना आय। ओकरे संगे-संग येहा मिथ्या सूचना-समाचार के भंडार घलव आय। जेन ला जो मन लगीस वो वइसने वीडियो बनाके यूट्यूब मा अपन तमाशा देखावत हे। कभू-कभू अइसे लगथे मानो ये बउराय यूट्यूबर-मन अपन विशिष्टता सिद्ध करे बर धमा-चौकड़ी मचावत होही का। आप मन खुदे अनुमान लगा सकथो कि इनकर बिगड़ेपना ह डिजिटल इंडिया के नवाचार आय कि अत्याचार। इही कड़ी मा व्हाट्सएप, फेसबुक अउ इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्म-मन हा यूट्यूब ले जादा तो नइ फेर थोरको कम घलव नइ हे।अइसे भी देश के जनता-मन अपन कीमती समय के मूल्यांकन कहाँ कर पावत हे। अपन तीर-तखार के मनखे-मन ला मोबाइल मा घंटो धुनी रमाय देख के आप-मन येकर खुदे परछो पा सकथो। ये मोबाइल के नशा हा छोटे-बड़े ,अमीर-गरीब सबके चेत-बुध ला चीथ डरे हे। कोई भी नशा होवय हद ले जादा हा नाश के कारण बन जाथे। सही कहिबे ते डिजिटल युग के ये नशा हा भविष्य बर खतरनाक संकेत घलव देवत हे। तेकर कारण जागरूक रहना बहुत जरूरी हे। आशा हे बुधियार अउ गुणी-ज्ञानी जनता-मन ये नशा ला अपन तीर मा कभू ओधन नइ दीहीं। अउ घर-परिवार, समाज के सुख-समृद्धि, देश के विकास अउ मानवता बर सदा संकल्पित रइहीं।
महेन्द्र बघेल
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