Thursday, 28 May 2026

लघुकथा - " हलो भइय्या " - मुरारी लाल साव

 लघुकथा - " हलो भइय्या "

            -  मुरारी लाल साव 


मोबाईल बाजिस तुरत उठाइस "हलो भइय्या.... I "

  "हलो.. I 

"लड़की देखत हव का भइय्या बिहाव करे बर "

"हव "!  "कइसन लड़की देखत हव?" हमरो रिश्ता म एक लड़की हे पढ़े लिखे हे l "

"का करत हे तुंहर इहाँ के लड़का ह?" 

" अभी अइसने  ठलहा हे l "

"का उमर चलत हे?"

"35-36के होगे हे नौकरी देखतहे !"

" एहु लड़की के उमर ओइसने 34के होगे हे लड़का देखत l" 

नौकरी करत हे अलवा जलवा l

"त..  आके देख लो l"

"नोनी बने हे पढ़े लिखे हे काम बूता म हुशियार हे l "

"ले बताबो l"

ठीक हे भैय्या l"

अइसने मोबाईल ले कतको रिश्ता खोजत खोजत थक गे बुधिया ह अपन बहिनी के लड़की बर l  अचानक बहुत दिन के बाद मोबाइल आथे -"हलो 

हाँ हलो भैय्या "

"तुंहर इहाँ लड़की हे बर बिहाव के लाइक l" 

बुधिया कुछ नई कहि सकीस ए दफे l  दुःखी मन ले कहिस -" भइय्या, लड़की  ऊपर कोती चल दिस l कोनो लड़का देखे l नइ आइस l "

"ओहो!बड़ दुःख होइस l

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