भोकवा
बात ल जउन समझथें उन सम्हल के चलथें। जउन नइ समझॅंय उन रहि जथें भोकवा। मनखे अपन काम निकाले बर कतेक चतुरा होथे, कोनो चीज के महत्तम ल कइसे गिरा के अपन स्वारथ साधथे एकर बढ़िया उदाहरण देखौ;
दू झन राहगीर अपन अपन गॉंव जात रहॅंय।एक झन अपन बइलागाड़ी म धान लादे रहय।
फेर खुद रेंगत गाड़ी म फॅंदाए बइला ल हॉंकत जाय। रद्दा म खाए पिए के समान नइ धरे रहिस काय। दूसर मनखे तिरन धान पान नइ रहिस। हॉं सॅंग म एक झोला धरे रहिस जेमा सेतुआ रहय। भूख मिटाए के बढ़िया चीज। तुरते घोरव अउ पी लव।
ए बात ल ओ धान ले जइया जान डरिस। अब ओकर दिमाग कुलबुलाय लगिस के कइसे मैं एकर सेतुआ ल पावॅंव कहिके। यहू सोंचिस के फोकट म नइ लॅंव एकर बदला म धान दे देहूॅं कहिके। बड़ चतुरा। बाते बात म सेतुआ वाले ल कहत हे... भाई! तॅंय भूख मिटाए बर ए का पिचकाट वाले समान धर के रेंगत हस जी...ओला समझावत कहत हे
सेतुआ मन मेतुआ
जब घोरब जब घारब
तब खाब तब जाब---अउ
धान---
धान बिचारी भली
कूटी खाई चली
सेतुआ वाले भाई रहय भोकवा, ए बात ल सुन के अपन सेतुआ ल धान वाले ल देके ओकर तिर ले धान ले लिस.....बाकी जउन हे तउन हवयच
जोहारत 🙏🙏🙏🌹🌹
सूर्यकांत गुप्ता, जुनवानी, भिलाई (छत्तीसगढ़)
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