Thursday, 28 May 2026

नानकुन कहानी " मुड़ी ला मुड़वा "

 नानकुन कहानी 

    " मुड़ी ला मुड़वा "

   -मुरारी लाल साव 

आज से 60बछर पहली मोर उमर 6साल के रहिस तब के बात आय l बाबूजी हेचकारत लाके बैठार दय नाउ ठाकुर रामलाल के तीर l ओहा अपन अपन दूनो माड़ी के बीच मोर मुड़ी ला चपक के बाल काटय l सजवा ले कैची निकाल के कच कच कच कच करके कैची ला बजावय l जी डर्रावय l मुड़ी हालय त अउ जोर से माड़ी म कस के -" चुप रा  दाऊ, चुप मंडल के बाबू, मुड़ी ला मूड़त हँव l कट जाही..! कहय l चेथी ला धरे रहय l पूरा हो जय त असीस देवत कहय -"देख दरपन म कतका सुन्दर दिखत हस l" बाबू जी कहय  ले पाँव पर तोला सुन्दर बना दीस l " मुड़ी घलो मुड़वायेव पाँव घलो परेंव तभे सुन्दर होयेंव l

ओकर सजवा म चार आना घलो चढ़ाये हँव मुड़ मुड़ौनी l "

मुड़ी मुड़ाए के संस्कार चलत रहीस l

अबअइसे लगत हे कोनो मुड़ी ला मूड़त हे   दाऊ दाऊ कहिके भूलवार के राम लाल बनके l मुड़ी के जघा म रोजगार ला चपक के मुड़ौनी बरोबर घूस लेवत हे l मुड़ अब अइसे कटवावत हे चुप रहिके l

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