Thursday, 28 May 2026

मुसवा

 *मुसवा*

एक ठन बड़े घर मे सैंकड़ा अकन मुसवा राहय।वो मन अराम से खाय अऊ खतरा जान के बिला मे खुसर जाय।फेर एक दिन बिलई आगे।मुसवा ल देख के ओकर मुंह मे पानी आगे।अउ उहेंच अपन डेरा जमा लिस। अंधियार मे मौका देख के मुसवा मन ल खाय लगिस।बिलई के सेती मुसवा मन के गिनती (संख्या)घटत गिस।तब हलाकान होके मुसवा मन मिटिंग बुलाइस ताकि बिलई ले बचे के उपाय खोज सके।कई ठन सुझाव आईस फेर कोनो ठंसा नि परिस।तब एक ठन सियान मुसवा ह कहिथे , कोनो (अगर)बिलई के गला म घंटी बांध दे जही त ओकर अवाज ल सुनके बिला म खुसर जबो।ऐ बात ल सुनके सब मुसवा खुश होगे।तब एक झन समझार मुसवा ह कहिथे बात तो बने हे फेर घंटी ल बांधही कोन।ऐला सुनके सब मुसवा कलेचुप होगे। कोनो करा ऐकर जवाब नइ रिहिस।वतका बेरा म बिलई के आरो ल सुनके सब मुसवा डर के मारे बिल म खुसरगे।

         फकीर प्रसाद साहू 

                सुरगी 🙏

No comments:

Post a Comment