Thursday, 28 May 2026

डिजिटल क्रांति अउ साहित्य

 डिजिटल क्रांति अउ साहित्य 

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     परिवर्तन प्रकृति के अमोघ नियम आय त साहित्य अउ साहित्यकार के लेखन ऊपर भी तो ए नियम हर लागू होही न ? चिटिक धीर धर के साहित्य के इतिहास के पन्ना पलट लिहिन ..। 

 वाचिक साहित्य उपदेशात्मक रहिस , पीढ़ी दर पीढ़ी मुँहखरा चलत रहिस ...1. एक राजा एक रानी रहिन 2 . गरीब बाम्हन के कथा , 2. बेंदरा अउ मंगर के कथा अउ बहुत अकन ...ए सबो कथा समाज ल सही दिशा मं ले जाए के उदिम रहिस । 

 लिपि के आविष्कार हर साहित्य ल नवा दिशा देखाइस त मुद्रण के आविष्कार हर साहित्य ल लिखित रुप मं आम आदमी तक पहुँचाइस .... कविता , कहानी , लेख के बहुतायत रहिस , पत्रिका भी छपे लागिस 'उदन्त मार्तंड 'के सुरता करव न ? 30 मई 2026 के दिन पत्रकारिता के दू सौ साल पुर जाही । लिखित साहित्य के प्राचीन अउ अर्वाचीन विधा मन के विकास होइस चाहे गद्य होय या पद्य ...। 

     विज्ञान के नवा देन हर लेखन माने साहित्य ल नवा रस्ता मं ले चलिस जेला डिजिटल क्रांति के नांव मिलिस । सन 1997 मं सोशल मीडिया के शुरुआत होइस जेला sixdegrees.com  के रुप मं पहिचान मिलिस । सन 2000 ले ब्लॉग मं साहित्यकार मन लिखे लगिन ...। सन 2004 मं फेसबुक आइस जेन मं साहित्यकार लिखे तो लगिन । सन 2009 / 10 मं साहित्यकार मन कविता , लघुकथा , समीक्षा ,संस्मरण , रिपोर्ताज असन विधा मं लिखे लगीन तभो कहे च बर परही के निजी जीवन के घटना , गोठ बात माने जन्मदिन , श्रद्धांजलि असन समाचार आजो बहुत दिखथे । 

     आजकल तो लगभग 100 मिलियन मनसे फेसबुक , इंस्टाग्राम , व्हाट्सएप , यू ट्यूब के जरिए मन के बात कहत , लिखत चलत हें .. डिजिटल क्रांति हर अभिव्यक्ति के सशक्त माध्यम बन गए हे ..। on line साहित्यिक कार्यक्रम घलाय तो होते च रहिथे साहित्य अउ साहित्यकार मन बर ये परिवर्तन हर वरदान आय । ध्यान देहे बर परही के डिजिटल साहित्य ल पुस्तक रुप देहे के बेर कोन विधा के अंतर्गत ओकर गिनती होही ? दूसर बात के व्हाट्सएप साहित्य , इंस्टाग्राम साहित्य , फेसबुक साहित्य के अभिव्यक्ति अउ क्रम बद्धता मं भी तो अंतर मिलबेच करही । 

     व्हाट्सएप मं लेख , कहानी , उपन्यास , संस्मरण ल धारावाहिक रुप मं प्रस्तुत करे जा सकत हे फेर फेसबुक , इंस्टाग्राम , यूट्यूब , ब्लॉग आदि मं तो धारावाहिकता मं बाधा परबे च करही । अइसन समय मं ये अभिव्यक्ति ल साहित्य के कोन विधा के अंतर्गत राखबो ? आजकल कई झन साहित्यकार डिजिटल मीडिया के साहित्य ल संग्रहित करके पुस्तक रुप मं प्रकाशित करवावत हें ...। बने बात आय काबर के जेन भी तरह से होय बढ़ोतरी तो साहित्य के ही होवत हे । अब तो A I के युग आगे , जेकर चर्चा फेर कोनो दिन करबो ...। 

    सोशल मीडिया मं बगरे साहित्य के विधा मन तो जुन्ना ,नवा दुनों हें फेर जौन मन अपन सुख , दुख ल सोशल मीडिया के सहारे बगरावत हें ओहू हर तो गने जाही न भाई ?  अवइया दिन मं सोशल मीडिया के साहित्य चर्चा करे जाही त साहित्यिक विधा मन के अधार मं नही बल्कि व्हाट्सएप , फेसबुक , इंस्टाग्राम , ब्लॉग , यू ट्यूब  आदि के द्वारा करे जाही ...चिटिक फोरिया के कहे जाय त व्हाट्सएप मं कोन , कब काय लिखिस त अइसनहे  फेसबुक , इंस्टाग्राम के लेखन ....। 

  जरुरी बात के ये सोशल मीडिया मं बगरे  लेखन हर  मूल रूप से साहित्य ही तो आय त एला किताब के रुप मं प्रकाशित करवाना घलाय तो जरूरी  हे तभे तो  यांत्रिक लेखन हर लिखित  साहित्य के रुप मं इतिहास बनही ..। अब लोकाक्षर के जम्मो लिखइया , पढ़इया मन मोर बिनती ल सुनव , पढ़व अउ अपन सोशल मीडिया के लेखन ल पुस्तक रुप देवव । 

  कोन अघुवा के कोन पिछुवा गे एला झन गुनव ..साहित्य के इतिहास लिखइया मन ऊपर एकर जिम्मा ल छोड़ देवव ...!

          सरला शर्मा 

           दुर्ग

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