*ठेलहा*(बेरोजगार )
लेड़गा मुंह ल ओथराय मुड़ धरके बईठे रिहिस।मे पुछेंव काय होगे जी?लेड़गा कहिथे (ठेलहा) बेरोजगार मनखे काय बतांव भईया सरकार वेकेन्सी फेकेन्सी घलो नी निकाले। रोजगार के संसो धर लेहे।मे पूछ परेंव काय पढ़ें हस जी।लेड़गा ठसन (अकड़त)मारत कहिथे बारहवीं पास हों, अस्सी परसेंट, अव्वल आय हो।मे मनेमन भुनभुनात कहेंव इहां नीनानबे वाले मन ले देके डांकघर मे लगत हे अऊ कहां ये।मे बात ल सलटावत कहेंव तैं तो मंडल आदमी तोला का नौकरी के जरुरत? कोनों बिजनेस -विजनेश करतेस। हेल्दी हस, (तंदरुस्त हट्ठा -कट्ठा) स्मार्ट हस।लेड़गा मोर दिमाग के गरी म फंसगे।कहिथे दू,चार ठन बिजनेस के बारे में बतातेस भईया। मे कहेंव मोर बात ल ध्यान लगा के सुन । एक तो तै स्कूल खोल ले भले ते बारहवीं पास हस। पांच छै झन बने पढ़े लिखे मन ल गुरुजी बनादे।कहिदे वेतन (पगार)चार अंक म।वहू मन खुश कम से कम सागभाजी अऊ जेब खरचा चलही।भले कुंवारा मन बर बिहाव बर ऐंड़ी रगड़े ल पड़े।बाजू म एक ठन एटूजेड दुकान खोल ले।जिहां तोरेच स्कूल के डरेस , मोज़ा,जुता,टाई,कापी किताब मिले।अऊ बड़े -बड़े पोस्टर छपवा देबे। हमर इंहां केजी वन ले फलाना -फलाना तक स्मार्ट तरीका ले पढ़हाय जथे।जईसे जंतर-मंतर में। फेर लईका मन के एडमिशन फीस तोर एनवल फंसंन के पईसा तोर, परिक्षा फीस तोर, दुकान के कपड़ा लत्ता के पईसा तोर, स्कूल गाड़ी के पईसा तोर।लेड़गा गदगद् होगे।मन में पहली लड्डू फूटा।लेड़गा कहिथे अऊ दूसर बता न भईया।मे कहेंव दूसर म हस्पताल खोल ले। बने बने डाक्टर मन ल सेटिंग करले।अभीनेच मऊका बढ़िया हे जंतर-मंतर के भावी डाक्टर ल पूछ ले अऊ नर्सीग करके ठेलहा बइठईया मन नर्स।सादा सादा पहिरे हे परेतिन के बाना घेरी -बेरी आना सुजी लगाना,बाटल ल चढ़ाना।बगल म मेडिकल खोल ले।अऊ बड़े- बड़े बैनर म लिखवा दे हमर इंहां आधुनिक तरिका ले ईलाज करे जाथे।जान हे त जहांन हे।मनेमन कहेंव भले बीमारी ल तूही ल पूछ लिही अऊ खीसा भर दवई लिख दिही। नहीं ते सीधा भर्ती।जईसे चौकीदार के।लेड़गा कहिथे कतनो मन जांच बर भटकथे भईया ।अभीकुन एक ठन जचकी के रतिहा रिपोर्ट ल दिन के बारा बजे दिस ओकर बिना ईलाज नी होईस लईका गुजरगे।लेड़गा जब अतिक समझदारी हे त अस्पताल मे लैब घलो खोल लेबे। फेर मरिज के पईसा तोर, जांच के पईसा तोर, मेडिकल के पईसा तोर पईसच पईसा।मन मे दूसरा लड्डू फूटा।
लेड़गा कहिथे एकात ठन अऊ बताते भईया।मे कहेंव अब ते खोल अंडा रोल।सस्ताहा लगे न बड़काह हो गेहे सब खबड़ाहा।ओपन नही ते क्लोज।ऐकर आगू म सब्जी पसरा फेल।पईसच पईसा।लेड़गा बेसुध (बेहोश)।
फकीर प्रसाद
साहू फक्कड़
सुरगी ✍️🙏
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