Saturday, 14 February 2026

छत्तीसगढ़िया खोइला”

 “छत्तीसगढ़िया खोइला”




            वइसन तो छत्तीसगढ़ हा धान के कटोरा आय।इहाँ धान के उत्पादन हा शुरुच ले अबड़ेच कन होथे।तइहा जमाना 

मा सबके घर मा कोठी रहय जेमा धान ला रखे जाय।धान ,जोंधरी, जुआर, गहूँ, चना, लाखड़ी, तिवरा, सरसों ,अरसी,

तिल, राहेर, के फसल होवय।सबके घर के पाछू म बड़का कोला - बारी रहय जेमा अपन खाय के पुरतन साग भाजी करेला ,बरबट्टी,खीरा, पताल, रमकेलिया ,कुंदरू, लाल भाजी,धनियाँ, मेथी,निकल जावय।चौमास मा साग भाजी के बड़ किल्लत होवय काबर तइहा अभी कस वैज्ञानिक उन्नति नइ होय रिसिस ते पाय के ना घर मा फ्रिज रहय ना कोला खेत मा ट्यूबवेल रहय ।सिंचाई के साधन नई रहे ले गर्मी मा सब्जी नइ लगाय जा सके सिरिफ आलू अउ गोंदली हा बारो महीना मिलय।अब चार महीना ले दुनो जुआर आलूच ला तो नइ खाय जा सकय ना त हमर माइलोगन मन येखर बर उपाय करय जेला देशी जुगाड़ कहे जा सकथे। ये सुपर उपाय  हा  एक तरह ले  फूड प्रोसेसिंग आय जेमा कोनों रासायनिक पदार्थ ला नइ बउरयँ।ये आय हमर छत्तीसगढ़िया खोइला। खोइला साग के सुखरी ला कहे जाथे ।

            जाड़ के दिन मा सब साग भाजी मन सस्ता हो जाथे काबर कि ये समय मा साग भाजी के उत्पादन भरपूर होथे।अकाश साफ रहिथे अउ घाम घलौ बढ़िया रहिथे ता माई लोगन मन अलग अलग साग मन ला धो ,पोंछ के छोट छोट काट लेवय तहने वोला घाम मा सुखा देवय भांटा, करेला पताल ला सुखा लेवँय इही खोइला आय  सेमी,चुरचुटिया ला उसन लेय फेर बगरा देंवय सुखाय बर ।खोइला ला गर्मी मा साग राँधय।।खोइला के साग अब्बड़ मिठावय कच्चा सागेच कस लागय।तिंवरा भाजी,चनौरी भाजी,चना भाजी ला अइसने सुखा के धर लेवयँ जेला सुसका कहे जावय ।सुसका    भाजी ला दार अउ सुक्खा बोइर डार के राँधय ।इही जाड़ के दिन मा किसिम किसिम के बरी बनावय।रखिया,मखना,पपीता, मुरई, जिमीकान्दा,तुमा, के बरी बना के बढ़िया सुखा के सुक्खा डब्बा मा भर के राख लेवय जेला, मुनगा, झुनगा,आलू संग राँधय।उरिद दार के  पीठी मा रखिया बीजा,तिल अउ मसाला डार के बिजौरी बना लेवय जेला तेल मा छान के पापड़ कस भात  मा खावयँ  संग मा आमा के अथान राहय।अभी घलौ बरी,  बिजौरी बनाय के चलन गाँव मा हावय ।कच्चा आमा ला छोल अउ काट के सुखों देवय जेहाअमचूर कहे जावय गर्मी के दिन मा अमचूर डार के अम्मठ साग राँधय ।गर्मी मा अम्मठ साग  बोरे बासी संग अब्बड़ मिठाथे दू कौरा अकतिहा  खवाथे।बोइर के सुखरी करके राख लेवय ।सुक्खा बोइर ला कूट के गुड़,नून अउ लाल मिर्चा डार के पपची बना के सुखा देवयँ ये पपची हा अब्बड़ मिठावय।सुक्खा बोइर ला गुड़ नून डार के उसन लेंवय जेहा खटमधु लागय येला लइकन मन खेलत खेलत खा डारँय।पाके अमली ला सुखो के राखय जेहा चटनी बनाय के काम आवय।अमली डार के अम्मठ साग  बनाय जाय।अमली मा गड़,नून हरदी डार के राख लेवय जेला लइकन सियान सब खावयँ।अमली मा नून ,मिरचा ,लसून धनिया डार के कूट लेंवय येला छोट कन बाँस के लकड़ी मा लपेट के लाटा बनावय जेला सब चूस चूस के खावयँ।अमली लाटा के नाम सुनके सबके मुँह मा पानी आ जाथे। अइसने कच्चा तिंवरा ,चना अउ बटुरा ला पैरा मा भूँज लेवँय जेला होरा कहे जाये होरा हा सोंध सोंध  सावन भादों मा अब्बड़ मिठावय ।

   ये तरह ले हमन देखथन कि छत्तीसगढ़ मा तरह तरह के खोइला बना के राखे के अउ गर्मी के दिन मा साग भाजी के कमती ला पूरा करें  मा  तइहा के हमर छत्तीगढ़िया खोइला हा बड़ काम के चीज राहय।



चित्रा श्रीवास 

सिरगिट्टी बिलासपुर

छत्तीसगढ़

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