छत्तीसगढ़ म राम के संदर्भ म बहुत महत्वपूर्ण लोक कथा--
फुलबासन
वीरेन्द्र सरल
बहुत समे पहिली के बात आय। एक दिन रतिहा माता जानकी ह सपना देखिस कि शिलासोत म जड़ रोपे अउ कैलाश में फूल फुले हे। जेखर सोन के डाड़ी हे अउ रूप के छत्ता । करशा के डुहरू असन फूल के सुगंध म अट्ठासी हजार ऋषि मन मतवाय सुते हे।
सपना देखे के बाद माता जानकी के नींद उमचगे अउ फेर नींद ह पड़बे नइ करिस। माता जानकी ह रात भर सपना के बारे म सोचत रहिगे।
बिहान दिन अपन चेरिया -सुवासिन ल ये सपना के मतलब पुछिस फेर कोन्हो बता नइ सकिन। जस -जस जानकी माता ह सपना के फूल ला बिसराहूं कहय तस- तस ओखरेच सुरता आवय।
माता जानकी के जीव हलाकान होगे। आखिर म ओहा थक- हार के भगवान राम अउ दरबारी मन ला पूछहूँ कहिके राज दरबार म पहुँचगे। ओ समे भगवान राम तो उहां नइ रिहिस फेर लक्ष्मण जती ह राजदरबार के काम- बुता ला देखत रिहिस।
माता जानकी ह रतिहा अपन देखे सपना के बात ला लक्ष्मण जती ला बता के पूछत किहिस-"अइसन फूल ह कहां फूलथे लक्ष्मण जती? मोर सपना के देखे फूल ला मोला सउंहत देखाबे तभेच मोर मन ह माढ़ही।"
लक्ष्मण जती ह माता जानकी ल अड़बड़ समझाय के उदिम करिस फेर माता जानकी ह मानबे नइ करिस अउ सपना के फूल ल सिरतोन म देखे के अपन जिद म अड़ दिस।
आखिरी म हार खा के लक्ष्मण जती ह किहिस-" ले ठीक हे माता! मैंहा तोर सपना म देखे फूल ला सिरतोन म लाके देखाहूं फेर मोरो एक शर्त हे। आप मन मोला बिना बीजा के भाजी के साग, बिना धरती के पानी, मांछी के दूध, हरिमूंगन के दार अउ बिना बंधना के लकड़ी लान के भोजन बना के खिलाहू तभेच मैंहा आपके सपना के फूल ला खोजे बर जाहूं।"
लक्ष्मण जती के शर्त ला सुन के माता जानकी ह बक खागे। ओहा गुने लगिस बिना बीजा के भाजी कहां मिलही? मांछी के दूध कहां होथे? बिना धरती के पानी कहां मिलही अउ हरि मूंगन के दार काय होथे? बिना बंधना के लकड़ी कहां ले लानहूं? अइसने गुनत -गुनत जानकी माता ह राज दरबार ले लहुट के अपन सतखंडा महल म आगे अउ अपन कुरिया म निचट मनटूटहा बइठगे।
ओखर चेरिया - सुवासिन मन जब ओखर सेवा- जतन करे बर कुरिया म आइस तब ओला निचट मनटूटहा देख के काय बात आय कहिके कारण पुछिन।
जानकी माता ह सब बात ला साफ -साफ बतादिस। जानकी माता के बात ला सुनके सब चेरिया- सुवासिन मन खलखला के हांसे लगिन अउ किहिन-" माता! नानकुन बात बर अतेक उदासी? लक्ष्मण जती के ये बात ला आप मन नइ समझेव। बिना बीजा के भाजी मतलब कांदा भाजी, बिना धरती के पानी मतलब ओस, मांछी के दूध मतलब मंदरस, हरिमूंगन के दार मतलब मुंगेसर के दार। अभी आप मन आदेश करहू तब अभी के अभी सबे समान ला लान के आपके आघू म मढ़ा देथन।"
ये सब ला सुन के जानकी माता खुश होगे अउ चेरिया- सुवासिन मन ला ये सब ला लाने के आदेश दे दिस।
थोड़किन समय म सब समान आ के ओखर आघू म माढ़गे।
जानकी माता लक्ष्मण जती बर भोजन बनाय के तैयारी करिस। जानकी माता संसार भर के देवता धामी के सुमिरन करिस फेर भोजन बनबे नइ करिस। आखिरी म खिसियाके ओहा किहिस-"लक्ष्मण जति के सत होबे तब भोजन बन जा।"
लक्ष्मण जती के सत म तुरते भोजन बनगे। जानकी माता एक मन के आगर अब लक्ष्मण जती के राजदरबार ले आय के अगोरा करे लगिस।
लक्ष्मण जती ह आइस तहन माता के बनाय अउ परोसे भोजन करिस अउ ओखर सपना के फूल ला खोजे बर निकलगे।
लक्ष्मण जती ह गुनत -गुनत रद्दा रेंगत रहय। रस्ता म एक ठन बहुत बड़े भिंभोरा दिखिस। लक्ष्मण जती ह तीर के तरिया ले अपन कमंडल म पानी भर के लानत जावय अउ उही भिंभोरा म डारत जावय।
भिंभोरा के माटी ह घूरगे। भिंभोरा भीतरी एक झन साधू महराज ह समाधि लगाय तपस्या करत बइठे रहय।
लक्ष्मण जती ह तन मन लगा के ओ साधू महराज के सेवा -जतन करे लगिस। बहुत दिन बाद जब साधू महराज के समाधि टूटिस अउ ओहा आंखी खोल के देखिस तब लक्ष्मण जती ला अपन आघू म पाईस।
साधू महराज ह लक्ष्मण जती ले परिचे पूछिस। तब लक्ष्मण जती ह सब बात ला बने फोरिया के बता दिस।
साधु खुश हो के किहिस- "बेटा! मय तोर सेवा जतन ले बहुत खुश हंव तोला जउन बरदान मांगना हे मांग ले।"
बरदान म लक्ष्मण जती ह माता जानकी के सपना के फूल के पता -ठिकाना मांगिस।
साधू महराज किहिस -"बेटा! ओ फूल ला फुलबासन कहे जाथे, फूल कहां मिलही येला तो महूं नइ जानव। ये रद्दा म जब तैहा अउ आघू जाबे तब मोरे असन मोर बड़े भाई ह घला तपस्या करत मिलही। ओखरो अइसनेच सेवा जतन करबे तब हो सकथे ओहा तोला फुलबासन मिले के ठउर ठिकाना ल बता दिही।"
लक्ष्मण जती ह आघू बढ़गे अउ सिरतोन म कुछ आघू बढ़े के बाद ओला फेर एक ठन वइसनेच भिंभोरा दिखिस। लक्ष्मण जती ह वहू साधु के वइसनेच सेवा- जतन करिस जइसे पहिली वाले के करे रिहिस।
साधू के तपस्या ह पूरा होइस अउ जब ओहा अपन आंखी ला खोलिस तब लक्ष्मण जती के सेवा ले खुश होके बरदान मांगे बर किहिस।
लक्ष्मण जती ह फेर बरदान म फुलबासन के पता मांगिस। साधू ह फुलबासन के पता नइ बता सकिस। ओहा आघू म अपन गुरू महराज के तपस्या अउ ओखर सेवा करे के बात कहिके अपन आंखी ला मूंद लिस। अइसने -अइसने अट्ठासी हजार ऋषि- मुनी के सेवा बजावत अउ फुलबासन के पता ला बरदान म मांगत लक्ष्मण जती ह समंदर के टापू के एक झन साधू के सेवा बजाय लगिस।
जब ओ साधू के तपस्या पूरा होइस अउ वरदान मांगे बर किहिस तब लक्ष्मण जी ह फेर फुलबासन के पता पूछिस। तब साधू ह किहिस-"बेटा! येला शालकेंवरा के राज कहे जाथे, फुलबासन इहां के राक्षस राजा के बेटी आय। फुलबासन रोज इहां अपन राक्षसिन संगवारी मन संग जल विहार करे बर ये समुदर म आथे। काली जब ओहा इहां नहाय बर आही अउ नहाय लगही तब तैहा ओखर कपड़ा लत्ता ला मोर ये कुटिया म ला के लुका देबे। अतका काम ल तैहा करबे अउ बाकी काम ला मैंहा सम्हाल लेहूँ।"
बिहान दिन मुंधरहा ले फुलबासन ह जब जल बिहार करे बर ओ समुंदर म आइस अउ सब कपड़ा ला उतार के समुंदर म डफोरे लगिस उहीच बेरा मौका पा के लक्ष्मण जती ह ओखर सब कपड़ा -ओनहा ला साधु के कुटिया म लान के लुका दिस अउ अपनो चुपचाप लुका के बइठगे।
नहाय के बाद जब फुलबासन अउ ओखर संगवारी मन अपन कपड़ा -लत्ता अपन ठउर म नइ पाइन तब ओमन दंग रहिगे। फुलबासन ह अपन सखी- सहेली मन संग अपन कपड़ा- लत्ता ल मनमाने खोजिस फेर कपड़ा ह मिलबे नइ करिस।
हार खा के फुलबासन ह अपन सखी सहेली मन संग साधु के कुटिया म पहुँचगे अउ अपन कपड़ा के बारे म पूछे लगिस।
साधू किहिस- "मैंहा तुंहर कपड़ा -लत्ता ल काय जानहूँ नोनी हो? मोला इहां तपस्या करत हजारों बरस बितगे हावय अभी तक कभु अइसन होय हे का? हो सकथे कोनहो तुंहरे सेवक मन अइसन बुता ला करे होही। ओला पूछ के देख लेव। "
फुलबासन के नजर ह कोन्टा म सपट के लुकाय लक्ष्मण जती उपर पड़गे। ओहा लक्ष्मण जती ला अपन कपड़ा- ओनहा के बारे म पूछिस।
साधू महराज लक्ष्मण जती ला पहिलीच ले पढ़ा -सिखो दे रहय ते पाय के उहू ह कहीं नइ बतावय। अउ मंद- मंद मुसकावत रहय।
फुलबासन अउ ओखर चेरिया -सुवासिन मन लक्ष्मण जती ल हांसत देख के जान डारिन कि हमर कपड़ा ला इहीच परदेशी ह लुकाय हावे। ओमन कपड़ा ला मांगत- मांगत हक खागे।
आखिर म एकेच संघरा किहिन-"परदेशिया! तैहा इहां जेखर उप्पर वरमाला डार देबे ओहा तोर रानी बनके तोर सेवा जतन करे बर तैयार हो जही फेर अभी हमर कपड़ा ल दे के हमर लाज ला राख दे।"
लक्ष्मण जती ह उंखर कपड़ा ला दे दिस।
फुलबासन के चेरिया -सुवासिन मन तुरते फूल के हार बना डारिन अउ सब झन एक सोझ म खड़े होगे।
लक्ष्मण जती ह हार ला धरके गजब दूरिहा म खड़े होगे अउ हार ला फुलबासन डहर फेंकिस, हार ह सोझे फुलबासन के घेंच म आके गिरिस। लक्ष्मण जती ह तीन बार हार ला अइसने -अइसने फेंकिस अउ हार ह तीनो बेर सोझे फुलबासन के घेच म गिरिस।
शर्त के मुताबिक लक्ष्मण जती ह फुलबासन ला जीत डारिस।
अब फूलबासन किहिस- "येहा राक्षस मन के राज आय अउ मैहा राक्षस राज के बेटी अवं। कोनहो मोर पिताजी ला इहां तोर आय के पता चलगे तब तोर जीव नइ बांचय तेखर ले चल, हम दुनो झन के तो अब बिहाव होइचगे हावे। हमन कलेचुप इंहा ले भाग के आपके राज म चल देथन।"
लक्ष्मण जती किहिस-"फूलबासन! महूं क्षत्री अवं। चोरहा- लबरा असन तोला इहां ले चुपचाप ले जाना मोर धरम नोहय। तोला लेगहूं ते तोर ददा राजा ले जीत के लेग हूं। अभी तो तैहा चल पहिली मोला अपन राज ला घुमा- फिरा । तब मैहा तोला अपन राज म लेगहूं। "
फुलबासन ह बहुत समझाइस फेर लक्ष्मण जती ह मानबे नइ करिस।
अब फुलबासन ह लक्ष्मण जती ला अपन राज ला घुमाय बर लेगगे। फुलबासन के पिताजी राक्षसराज ला लक्ष्मण जती के बारे म पता घला चलगे। राक्षस राज के आदेश पाके ओखर राजभर के जब्बर बीर सैनिक मन अपन- अपन हाथ हथियार धरके लक्ष्मण जती अउ फुलबासन ला मारे बर घेरलिन।
फुलबासन के जीव धुकुर- धुकुर करे लगिस। ओला कांपत देख के लक्ष्मण जती समझाइस -" तैहा संशो- फिकर झन कर, येमन मोर कुछु नइ बिगाड़ सकय। तैहा तो बस मोर धनुष -बाण के जादू ला देख कहिके लक्ष्मण जती ह अपन धनुष म बाण चढ़ाके छोड़ दिस। "
दुनो झन के चारो कोती बाणेच -बाण के सुरक्षा कवच बनगे।
शालकेंवरा राज के सैनिक मन बाण मारत -मारत थकगे फेर फूलबासन अउ लक्ष्मण के बाल बांका नइ होईस। लक्ष्मण जती के वीरता के समाचार पाके राजा समझगे कि लक्ष्मण जती ह कोन्हो साधारण बीर नोहे। राजा ह हार मान के लक्ष्मण जती के संग फुलबासन के बिहाव करा दिस।
अब फुलबासन अउ लक्ष्मण जती ह पति -पत्नी बनके अपन राज आय बर निकलगे। आवत -आवत रस्ता म बारा -बारा कोस के लंबा -चौड़ा तरिया दिखिस, तब लक्ष्मण जती ह फूलबासन ला किहिस -" अब तैहा मोला अपन ओ रूप ला देखा जेला माता जानकी ह अपन सपना म देखे हावे।"
फुलबासन किहिस -"स्वामी! अब मोर ओ रूप ला एके झन रद्दा म काबर देखहू अब तो मैहा आपके संगेच म रहूं। अवधपुरी म पहुंच के मैहा सबके आघू म अपन ओ रूप ला देख देहूं।"
फुलबासन के बात ला लक्ष्मण जती ह मानबे नइ करिस अउ ओ रूप ला देखे के जिद म अड़ दिस।
फुलबासन बहुत मनाइस फेर मानबे नइ करिस। फुलबासन समझगे कि अब लक्ष्मण जती ह मोर ओ रूप ला देखे बिना नइ माने।
ओहा तरिया के कनिहा भर पानी म जाके फेर किहिस- "मोर बात ला मान जाव स्वामी! " फेर लक्ष्मण जती ह नहीच कहि दिस।
धीरे -धीरे फुलबासन ह तरिया के अथाहा पानी म जाके अपन उही रूप म सउंहत परगट होगे जउन रूप ला माता जानकी ह अपन सपना म देखे रिहिस।
लक्ष्मण जती ह फुलबासन के सुगन्ध म अपन सुध -बुध बिसरगे। चारो डहर फुलबासन के सुगंध महर- महर करके बगरगे। फुलबासन के सुगंध के मारे लक्ष्मण जती के नींद ह उही तरिया पार म पड़गे।
फुलबासन के महक ह जब भंवरागढ़ के राजा भंवसिंग के नाक तक पहुंचिस तब ओहा अपन मंत्री मन ला किहिस-"ये सुगंध कहां ले आवत हे , तेला पता लगाय बर हमर राजा के सब्बो बीर सैनिक मन ला भेज देव।"
राजा के आदेश मिलते साठ मंत्री मन अपन -अपन सेना लेके चारों कोती बगरगे अउ फुलबासन फुले रहय तउन तरिया के पता लगा डारिन।
राजा भवसिंग घला अपन फौज -फटाका धर के तरिया पार म पहुंचगे अउ तरिया भीतरी महर -महर करत फुले फूल ल निकाले बर सब झन गजब उदिम करिन फेर फूल ला नइ निकाल सकिन।
आखिर म भवसिंग राजा ह तरिया के सब पार ला फोड़वा के सब पानी ला खल- खल ले निकलवा दिस। तरिया ठन - ठन ले सुख्खा पड़गे। राजा के सैनिक मन तरिया भीतरी फुले फूल ल जड़ सहित उखाड़ के राजा तीर म ले के आइन। राजा तीर म आके फुलबासन फेर अपन नारी रूप म आगे।
भवसिंग राजा फुलबासन के मोहनी नारी के रूप ला देख के मोहित होगे अउ अपन रथ म बइठार के अपन राज म लेगे लगिस।
फुलबासन ह गोहार पार -पार के लक्ष्मण जती ला जगाय के गजब उदिम करिस फेर लक्ष्मण जति ह तो सुगंध म मतवाय बेसुध पड़े रहय, कहां ले जागतिस?
आखिर म हार खा के फुलबासन ह तरिया पार म चिट्ठी लिख के लक्ष्मण जती के तीर म छोड़ दिस कि स्वामी मोला भंवरागढ़ राज के राजा भवसिंग ह मोर अपहरण करके लेगत हे। भवसिंग राजा ह गजब लड़ंका अउ जदुवंता हे, तैहा अब मोर सुरता ला भुला जबे, मोर खातिर अपन प्राण गंवाय बर भंवरागढ़ राज झन आबे। भवसिंग राजा फुलबासन ला अपन राज म लेगगे अउ अपन सतखंडा महल म धांध दिस।
राजा के आदेश के बिना उहां मालिन डोकरी के छोड़ अउ कोनहो नइ जा सके। राजा अपन राज के चारो डहर पहरा बइठार दिस अउ आदेश दे दिस कि कोनहो भी अजनबी परदेशी पुरूष ला देखते साठ मार देना हे। माईलोगन भले आ सकथे। आदेश पाके प्रहरेदार मन चारो कोती पहरा दे लगिन।
अब ये डहर जब लक्ष्मण जती ह सुत के उठिस तब तरिया ला ठन -ठन ले सुख्खा देख के अउ फुलबासन ला उहां नइ पाके हड़बड़ागे। चारो डहर फुलबासन ला खोजे लगिस फेर कहूं मेर ओखर नाव- निशान तक नइ मिलिस।
अब लक्ष्मण जती ह अपन जिद के सेती बहुत पछताय लगिस अउ मुड़ धरके तरिया पार म बइठगे।
उही बेरा उदुप ले ओखर नजर ह ओे चिट्ठी म पड़गे। चिट्ठी ला पढ़ के देखिस तहन ओहा सब बात ला समझगे।
लक्ष्मण जती ह अब भवरागढ़ के पता पूछत -पूछत भंवरागढ़ के सियार म पहुंचगे।
चारो डहर सख्त पहरा देख के ओहा पहिली पता लगा डारिस कि उहां राजा के आज्ञा के बिना कोनहो परदेशिया पुरूष ह कदम नइ धर सके।
लक्ष्मण जती ह तुरते नारी के रूप धरके भंवरागढ़ के राजधानी म पहुंचगे।
लक्ष्मण जती ला पता चलगे रिहिस कि मालिन डोकरी के छोड़ उहां कोन्हो दूसर ह फुलबासन संग नइ मिल सके। ओहा सोझ मालिन डोकरी के घर के पता पूछत उहींचे पहुंचिस। मालिन डोकरी ला देख के फोकटे -फोकट भेट लागे लगिस।
मालिन डाकरी ह पूछिस-" तैहा कोन अस बेटी!"
लक्ष्मण जती लबारी मारत किहिस- "मोला नइ चिन्हत हस मोसी ! मैहा तोर बहिन बेटी तो लक्षवंतीन अवं।"
मालिन डोकरी सिरतोन पतिया लिस अउ अपन बहिन बेटी समझ के लक्ष्मण जती ला अपन घर म राख लिस। मालिन डोकरी ह रोज फुलबासन बर फूल पहुंचाय बर सतखंडा महल म जाय। उही फूल ल फुलबासन ह भगवान म चढ़ा के पूजा -पाठ करे।
एक दिन लक्षवंतीन बने लक्ष्मण जती ह मालिन डोकरी ला पूछिस- "मोसी ! तैहा ये फूल मन ला रोज कहां लेगथस?"
मालिन डोकरी बताइस तहन फेर किहिस- "मोसी! महूं ला घर म एके झन असकट लागथे। एको दिन तोर संग जाके सतखंडा महल ला घूम के आ जतेंव अउ कोन फुलबासन आय तहू ला देख लेतेंव।"
बिहान दिन मालिन डोकरी ह लक्षवंतीन ला अपन संग महल म लेगे बर तैयाार होगे।
मालिन डोकरी संग अनचिन्हार मइलोगन ला सतखंडा महल म जावत देख के पहरेदार म पूछिन तब डोकरी ह अपन बहिन बेटी ह सगा आय हे कहि के परिचय दिस। पहरेदार मन चुप रहिगे।
लक्षवंतीन के भेष धरे लक्ष्मण जती ह डोकरी संग फुलबासन के सतखंडा महल म पहुंचगे।
लक्षवंतीन के मोहनी रूप देख के फुलबासन ह पूछिस तब डोकरी ह अपन बहिन बेटी आय कहिके परिचय करा दिस।
फुलबासन किहिस- "महू ला ये महल म एके झन अड़बड़ असकट लागथे दाई! तेखर ले तोर बहिन बेटी ला मोर संग मितान बधवा दे। तहन हमन इहां दुनो मितान रहिके गोठियात - बतरात रहितेन। "
मालिन डोकरी ह तैयाार होगे अउ मौका देख के
फुलबासन के इच्छा ला राजा भवसिंग कर बता दिस। राजा के आज्ञा मिलिस तहन दुनो झन ला मितान बधा दिन।
लक्ष्मण जती के चाल सफल होगे रिहिस। ओहा मने मन अड़बड़ खुश रहय।
एक दिन फुलबासन ह जान डारिस कि ये लक्षवंतीन के रूप म लक्ष्मण जती आाय। ओला गजब खुशी घला होईस अउ डर घला होगे । कहूं राजा ह जान डारही तब येखर प्राण नइ बाचय कहिके।
लक्ष्मण जती किहिस- "तैहा डर्रा झन, क्षत्री के बेटा अंव। भवसिंग संग पूरों अउ बांचव।" अब ओमन अवधपुरी जाय के विचार करे लगिन।
एक दिन मौका देख के दुनो झन महल ले कलेचुप निकलगे। रात भर रेंगिन फेर भंवरागढ़ के सियार ले बाहिर नइ निकल सकिन।
रात पंगपंगागे, पोहाती होय लगिस। लक्ष्मण जती सोचिस अब काय करना चाही। ओला एक उदिम सूझिस। ओहा रस्ता के एक बहुत बड़े बरगद के पेड़ ला बाण मारके खोखला कर दिस अउ फूलबासन ला उही खोलका म चुपचाप बइठार के अपन ह नानकुन रेमटा टुरा बनके बाहिर म पहरा दे लगिस।
रतिहा पोहाइस तहन राजा ला लक्षवंतीन अउ फुलबासन के एकेच संग घर ले भागे के पता चलगे। राजा के सैनिक मन चप्पा -चप्पा ला छान मारे लगिन। सैनिक मन बरगद पेड़ के खाल्हे म बइठे नानकुन रेमटा टुरा ला पूछे तब ओहा खिसयाय असन करे।
सैनिक मन एक दू बेर छोटे लइका आय कहिके कहीं नइ किहिन फेर तीसरइया बेर सही नइ सकिन अउ टुरा ला दु थप्पड़ मारबो कहिके हाथ ला उबाइन।
लक्ष्मण जति अपन असली रूप म आगे । अब सैनिक अउ लक्ष्मण जती के बीच भंयकर लड़ाई होय ला लगगे।
लड़ई ठउर म भवसिंग राजा घला पहुंचगे अउ लड़े बर भिड़गे।
लक्ष्मण जती ह अपन बाण से कतकोन सैनिक मन ला एक संग मार दे फेर चोंटी बइगा अउ कबरा मलदानो नाव के जदूवंता ह फेर अपन जादू ले सबो ला जिंया दे। अइसने -अइसने बहुत दिन बीतगे।
अब ये डहर जानकी माता ह फेर एक रतिहा सपना देखिस कि लक्ष्मण जती ह संकट म पड़े हे, माता जानकी ह अपन सपना के बात ल बिहिनिया भगवान राम ला बताइस। भगवान राम ह हनुमान ला विचार करे बर किहिस।
हनुमान जी ह विचार करके बताइस कि लक्ष्मण जती ह भंवरागढ़ राज म फंसे हावे हमन ला जा के ओखर मदद करना चाही।
भगवान राम अउ हनुमान जी तुरते अपन विमान म सवार हो के भौंरागढ़ पहुंचगे।
अगास मार्ग म अपन विमान ला खड़ा करके भगवान देखिस कि लक्ष्मण जती ह भंयकर लड़ाई लड़त हे फेर राजा भवसिंग ला नइ जीत सकत हे काबर कि चोंटी बइगा अउ कबरा मलदानो ह अपन जादू के बल म सब मरे सैनिक ला फेर जिंया देवत हे। मरहा सैनिक मन जीं के फेर लड़ाई लड़थे।
भगवान ह चोंटी बइगा अउ कबरा मलदानो के मंत्र शक्ति ला अपन माया के बल म खतम कर दिस।
अब मरहा सैनिक मन नइ जीं सकिन। धीरे -धीरे लक्ष्मण जती के बाण के मारे राजा भवंसिंग अउ ओखर सैनिक मन मरे लगिन। मैदान ल निचट सुन्ना देख के लक्ष्मण जती ह बाण चलाना बंद करिस अउ मने -मन अपने बड़ाई करत कहे लगिस अरे लक्ष्मण जती के बल के आघू म कोनहो नइ सके।
उहीच बेरा भगवान राम अउ हनुमान जी परगट होके सब भेद ला लक्ष्मण जती ला बताइस।
लक्ष्मण जती ह अपन बड़ाई करे म लजाइस अउ खुश हो के अपन बड़े भैया भगवान राम के भेंट पल्लगी करिस।
बरगद के खोलखा ले फुलबासन ला निकालिस अउ विमान म बइठ के अवधपुरी आगे।
अवधपुर म पहुंचे के कुछ दिन बाद राज भर के नर नारी के आघू म फुलबासन ह माता जानकी के सपना म देखे अपन फूल के रूप ला देखाइस। अवधपुर ह महर- महर महके लगिस। मोर कहिनी पूरगे दार भत चुरगे।
बोड़रा, मगरलोड
जिला-धमतरी , छत्तीसगढ़
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