Saturday, 14 February 2026

नान्हें कहिनी ओखर खुसी

 नान्हें कहिनी

     ओखर खुसी

     दुलारी ह साग भाजी के टुकना बोहे कालोनी  डहर जात रहिस।ओला कालोनी  कोती जात देखत समारू ह कहिस-"कहाँ जावत हस ओ दुलारी ।कालोनी म कोनो तो तोर साग भाजी ल नी बिसाये ।कालोनी वाला मन तो हमर असन गली -गली म बेचाईया मन ले कुछु जिनिस नी बिसाये ।ओमन तो आन लाइन जिनिस बिसाथे।तै ओती काबर जावत हस?"

     दुलारी ह हांसत कहिस -"सही कहत हस भैय्या , फेर वो बारा नम्बर वाली मेम साहब हे न तेखर सियानिन सास ह  गांव ले आये हवे। ओहा अपन बालकनी म एके झि बैठे रहिथे।एक दिन मोला देखिस त बुलाइस अउ कहिस।आना ओ बेटी का धरे हस?अउ मोर सन बड़ बेरा ले गोठियाइस ।बताइस कि ओखर बहु-बेटा मन नउकरी करथे। दु झि पोता मन बिहनिया ले स्कूल चल देथे सांझ कुन ओमन आथे अउ अपन-अपन काम म लग जाथे।मेहा दिन भर अउ रात कन घलो अकेल्ला पड़ जाथो ।एखर ले बने मोर गांव रहिस है।उहाँ पारा परोस के मन घर म आवे-जावे।सुख-दुख गोठियावय।इहा सहर म जम्मो घर के दुवार फ़ईका मन बंद रहिथे।कोनो परोसिन एक दूसरे ले कोनो वास्ता नी राखे। सुन ओ बेटी तें हा आथस त दु घड़ी गोठिया लेथो त मोला बड़ खुसी होथे।

बस समारू भैय्या एखरे कारण मेहा सियानीन तीर ये कालोनी म जाथो ताकि सियानीन ल खुशी होय।ओखर चेहरा म खुसी देखके और सुकून देख के महुँ ल खुसी लागथे।"

          ये सुनके समारू कहिस- "बढ़िया काम करत हस ओ दुलारी बहिनी।अइसने सोच सबके होना चाहिये।"

             डॉ. शैल चन्द्रा

             रावण भाठा, नगरी

             जिला-धमतरी

            छत्तीसगढ़

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