पुरखा के सुरता
"पण्डित मुकुटधर पाण्डेय"
पण्डित मुकुटधर पाण्डेय, द्विवेदी युग के कवि माने जाते हैं। पाण्डेय जी के रुझान, "कोसली" बर, स्वतंत्रता के बाद होइस। कोसली के बारे मा उन कहयँ...
छत्तीसगढ़ शब्द के १-पहिली प्रयोग रतनपुर के महाराज
राजसिंह के दरबारी कवि गोपाल चंद्र मिश्र (१६८९- १७२३ईस्वी) के ग्रंथ "खूब तमाशा" मा होय हे।
२- छत्तीसगढ़ मा लोकगीत के परंपरा, बड़ प्राचीन अउ बड़ समद्ध हे, एकर अनुमान जायसी के पद्वमावत मा आये, छत्तीसगढ़ी के अनेक शब्दन से लगाए जा सकत हे।
३- छत्तीसगढ़ी मा आधुनिक साहित्य सृजन के सूत्रपात पण्डित सुंदर लाल शर्मा हर करिन।
४- छत्तीसगढ़ी के शब्द भण्डार व्यापक हावै।
५- छत्तीसगढ़ी हर जीवित भाषा आय, एमा नित्य नवा - नवा शब्दन के, समावेश जारी हे।
६- छत्तीसगढ़ी मा,लक्षणा अउ व्यंजना के, सुन्दर प्रयोग होवत हे। उँकर छत्तीसगढ़ी भाषा साहित्य के अनुराग के प्रमाण हे- "संस्कृत मेघदूत के छत्तीसगढ़ी अनुवाद।"
संस्कृत के महाकवि कालिदास के लिखे, "मेघदूत" हर, विश्व साहित्य के धरोहर ए। "मेघदूत" के
कई दृष्टि से अब्बड़ महत्त्व हावै। छत्तीसगढ़ी हर, पूर्वी हिन्दी के एक ठन बोली रहिस हे, जेहर अब भाषा बन चुके हे।
"मेघदूत" के आमुख मा, पाण्डेय जी हर, कालिदास के जीवन,मेघदूत मा वर्णित भौगोलिक क्षेत्र, काव्य सौंदर्य अउ संस्कृति के विस्तार से वर्णन करे हें। रामगिरि पर उँकर शोध हर, बड़ महत्वपूर्ण हावय। मेघदूत मा कथा विरल हे, प्राकृतिक सौन्दर्य ही ज्यादा हे। कथा के आरंभ मन से होथे-
"एक यक्ष हर, अपन काम मा, गलती कुछु कर डारिस।
तब कुबेर हर शाप छोड़, अलका ले वोला निकालिस ।
बच्छरदिन नारी से वोला,विलग रहे बर परही।
मोर नगर ला छोड़,
दुरहा मा बासा करही।
आवव अपन पुरखा के सुरता करके पितर पाख मा श्रद्धांजलि देबो।
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शकुन्तला शर्मा...
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