Sunday, 13 September 2026

छत्तीसगढ़ी पंडवानी परंपरा अउ पद्मविभूषण तीजनबाई ( 8 अगस्त जनम दिन म विशेष आलेख )

 छत्तीसगढ़ी पंडवानी परंपरा अउ पद्मविभूषण तीजनबाई 

( 8 अगस्त जनम दिन म विशेष आलेख )            


 हमर भारतीय लोक गायन परंपरा म छत्तीसगढ़ी पंडवानी   के बड़का स्थान हे। जेन हमर लोक संस्कृति के आधार आए  । पंडवानी ह महाभारत के आख्यान अउ कथानक के संग संग छत्तीसगढ़ी लोकजीवन, लोक चेतना अउ सांस्कृतिक अस्मिता ल घलो पोठ करथे । हमर छत्तीसगढ़ के लोककला अउ लोकगाथा ल राष्ट्रीय अउ अंतर्राष्ट्रीय पहिचान दिलाए म पद्मविभूषण तीजनबाई के बड़का योगदान हे। सुर्रा, करधन, पहुँची,  अइठी, पुतरी,खिनवा ,लाली रंग के कोष्टउंहा लुगरा - पोलखर संग ठेठ छत्तीसगढ़ी संवाद अउ सवांगा म  बिंदाबन बिहारी लाल के जय घोष अउ मोर सना नना नना मोहन.... के अलाप अउ तंबूरा के  तान ह सोज्झे सुनइया मन ल अपन तीर आकर्षित करथे । संगीत के गुरतुरपन, अभिनय अउ रागी के संग कथा संवाद के सरलग जुड़ाव छत्तीसगढ़ी पंडवानी के बिसेसता आय।


छत्तीसगढ़ी पंडवानी ह मूलतः संघर्ष, प्रतिरोध, न्याय अउ वीरता के लोकगाथा हरे जेमा विशेष रूप से भीम के पराक्रम ह जादा प्रभावी हे। पंडवानी ह महर्षि वेदव्यास रचित महाभारत कथा के छत्तीसगढ़ी लोकगायन रूप आय। सबलसिंह चौहान (रतनपुर) के नाव छत्तीसगढ़ी पंडवानी के लोकरुप सिरजन म प्रमुखता से ले जाथे । पंडवानी के दूठन शैली वेदमती अउ कापालिक छत्तीसगढ़ म प्रचलित हे। तीजनबाई ह कापालिक शैली ल अपन कला के आधार बनावत ओमा नवाचार करके बिस्तार दिस अउ देश के लगभग सबो आकाशवाणी दूरदर्शन केंद्र म अपन प्रस्तुति देके पंडवानी ल लोक कंठ  के आवाज बना दिस।


तीजनबाई के जिनगी संघर्ष साहस अउ आत्मविश्वास ले भरे रिहिस। तभे तो घर, समाज अउ पारा परोस के ताना, रुढ़िवादी सोंच ह घलो ओला आघू बढ़े म नइ रोक सकिस । कतको कठिन समे म हार नइ मानिस अउ सरलग अपन कला साधना म लगे रिहिस। एक समे म घर, परिवार, समाज अउ अपन पति तक ल छोड़ दिस फेर अपन तंबूरा ल कभू नइ छोड़िस । उही जिद, संकल्प अउ पंडवानी बर अगाध समर्पन ह ओला आघू बढ़ेबर प्रेरित करिस।


पद्मविभूषण तीजनबाई के जनम 8 अगस्त 1956 म दुरुग जिला के गाँव अटारी (पाटन) म होय रिहिस। अटारी ह तीजन के महतारी सुखबती पारधी के ससुरार आय। इंखर पिताजी के नाव चुनुकलाल पारधी हे। बाद म ओमन परिवार सहित अपन नाना बृजलाल पारधी के गाँव गनियारी (उतई )  म रेहे लगिन। तीजनबाई अपन नाना ले पंडवानी के कथा सुने के बाद म प्रभावित हो के धीरे धीरे अभ्यास करिस अउ ओखर ले पंडवानी के दीक्षा लिस अउ 13 बच्छर के उमर म पंडवानी के यात्रा सुरू होगे।


कोनो कोनो मन 24 अप्रैल 1956 ल तीजनबाई के जनम  तिथि बताथे जेन ह प्रमाणित नइ लगय। काबर के तीजनबाई ह खुदे दूरदर्शन अउ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कतको भेंटवार्ता  म कहिन के "तीज के दिन मोर जनम होइस तेखरे सेती दाई ह मोर नाव ल तीजन रख दिस । "

इहाँ तीज के मतलब छत्तीसगढ़ म भादो म मनाथन तेन तीजा से बिल्कुल नइहे। बल्कि सावन महिना म शुक्ल पक्ष के तृतीया तिथि ले हे । जेला हमन श्रावण तीज, हरियाली तीज, मधुस्रवा तीज घलो कहिथन । ये तिहार ल उत्तर भारत म  विसेस रूप से मनाए जाथे । ये अधार ले तीजनबाई के जनम 8 अगस्त 1956 ह ज्यादा प्रमाणित अउ सही लगथे । ओखर जनम ल 24 अप्रैल अउ हरितालिका तीज ले जोड़ना उचित नइहे।


तीजन के जनम के बाद म एकदिन अइसे भी होइस। ओला जनम धरे दस ले बारह दिन होय रिहिस होही । सुखबती ह एकदिन तीजन ल कुंदरा म सुता के नहाय ल धर लिस । ठउका निझमहा देख के दुबली पतली तीजन ल कुकुर ह उठा के लेगत रहय। सुखबती के नजर परगे चिल्लइस । पारा भर सकलागे कुकुर के पीछू सब भागे लागिस। गाँव के सियार म  तीजन ल पखरा के ओधा म छोड़ के कुकुर ह भाग गे। नजर परिस त कोनो बड़े अलहन ले बांचगे हमर पंडवानी के विरासत ह ।


पद्मविभूषण तीजनबाई के दाम्पत्य जीवन ह घलो बड़ संघर्षमय रिहिस। 12 बच्छर के उमर म पारधी समाज के रीति रिवाज संग ओखर बिहाव (देवबलौदा) म होइस। बिहाव के बाद म अपन पंडवानी गवई ल नइ छोड़िस तेखर सेती कुछ महीना म उन ल अपन पति ले अलग होना परिस अउ समाज ह घलो तीजन ल छोड़ दिस।

कुछ बच्छर बीते के बाद तीजनबाई के बिहाव तुकाराम वर्मा (मटिया) संग होइस। ये बिहाव ह तीजन के जिनगी म ठहराव लाय के काम करिस। तीजन के कोख ले सत्रुहन पारधी, दिलहरण पारधी अउ कौसल पारधी जइसे बेटा मन के जनम होइस। पंडवानी गायबर मना करिस त कुछ बच्छर म पति तुकाराम वर्मा संग घलो तलाक होगे। तीजनबाई अब फिर से अपन लइकामन संग गनियारी म रेहे लगिस।

जिनगी म कतको समस्या अउ कटुता के बाद भी तीजनबाई अपन कला साधना ल सरलग जारी रखिस। तुकाराम वर्मा के निधन के बाद म ओखर मंडली के पंडवानी कलाकार तुलसीराम देशमुख (बेलौदी) ह चुरी पहिरा के तीजन संग बिहाव करिस अउ बहुत दिन तक ओखर साथ रिहिस। फेर बाद म तुलसीराम देशमुख अपन समाज के सर्त अउ नियम ल पालन करत अपन पहिली पत्नी कमला देशमुख के लइका मनके बिहाव खातिर तीजनबाई से अलग होगे अउ अपन समाज के मुख्यधारा म मिलगे।


 पंडवानी गायन खातिर ओखर समर्पन अउ एकाग्रता ह अद्भुत रिहिस चौबिसों घंटा अंतर्मन म कृष्ण के बांसुरी के आवाज ह गुंजय। मीरा के भक्ति असन तीजन के भक्ति घलो अगाध अउ अबाद होगे। झंउहा धर के गोबर बीने के बहाना गाँव ले बहिरी सुन्ना जगा म जा के पंडवानी के रियाज करय। देखइया मन जकही - पगली घलो कहय। फेर कतरो उलाहना आलोचना गारी -बखाना अउ मारपीट के बाद घलो तंबूरा अउ पंडवानी के धुन म मस्त रिहिस तीजन। अपन जोवकोपार्जन बर छिंद के पत्ता टोरई, सरकी अउ बाहरी बना- बना के गाँव गाँव सहर नगर म बेचई अउ खाली समे म पंडवानी गवई तीजन के दिनचर्या रिहिस। ओखर कला ल देख के भेलई इस्पात संयंत्र ह ओला नउकरी  घला दिस। ये नउकरी ह तीजनबाई के उन्नति अउ कला के बिस्तार के आधार बनिस।


तीजन बाई के विलक्षण प्रतिभा के परिचय ए बात ले मिलथे कि ओमन महाभारत के अठारहों परब के कथा ला कंठस्थ कर ले रिहिन । ओमन प्रसिद्ध निर्देशक श्याम बेनेगल के धारावाहिक ‘भारत एक खोज’ म घलो पंडवानी गाइन। मध्यप्रदेश के तत्कालीन सांस्कृतिक सचिव अशोक वाजपेयी, आदिवासी लोककला परिषद के विशेषज्ञ नवल शुक्ल, प्रसिद्ध समाजशास्त्री श्यामा चरण दुबे अऊ सुप्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर के मार्गदर्शन म दिल्ली, भोपाल , मुंबई सहित विदेश मन म घलो उंखर 

पंडवानी के यात्रा सुरू होइस। ओमन फ्रांस, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, इंग्लैंड, ट्यूनीशिया, तुर्की, ओमान, साइप्रस अऊ माल्टा सहित अनेक देस मन म पंडवानी के प्रस्तुति देके भारतीय लोकसंस्कृति के गौरव ला विश्व मंच म स्थापित करिन। खास करके पेरिस म ओमन लगभग आठ बार अपन प्रस्तुति दिन । अब तक ओमन 250 ले आगर शिष्य-शिष्या मन ला पंडवानी के शिक्षा दे चुके हवय, जेमा भारत के अलग-अलग राज, छत्तीसगढ़ अउ फ्रांस सहित कई देस के कलाकार मन सामिल हवय । तीजनबाई के पंडवानी यात्रा म अउ ओखर सम्मान संग मंचीय कार्यक्रम के लेखा जोखा म ओखर निज सहायक मनहरन सार्वा के घलो बड़का योगदान हे। 


तीजन बाई ल लोककला अउ पंडवानी परंपरा के संरक्षण, संवर्धन खातिर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर म कतरो प्रतिष्ठित सम्मान मिले हवय। भारत सरकार ह कला के क्षेत्र म

ओमन के उल्लेखनीय योगदान बर सन् 1988 मं पद्मश्री, 1995 म संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार अऊ 2003 म देस के तीसरइया सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मभूषण प्रदान करिस। उही बच्छर गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर ह ओमन ला डी.लिट्. (मानद) के उपाधि देके सम्मानित करिस। एखर बाद 2006 म पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर ह घलो ओमन ला मानद डी.लिट्. के उपाधि प्रदान करिस। सन् 2007 म पारंपरिक मंचीय कला अऊ प्रदर्शन के क्षेत्र म उत्कृष्ट योगदान बर ओमन ला नृत्य शिरोमणि पुरस्कार देके सम्मानित करे गिस। सन् 2012 म लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स ह ओमन ला ‘पीपुल ऑफ़ द ईयर’ सम्मान ले नवाजिस। एखर बाद 2016 म एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी शताब्दी सम्मान, 2018 म जापान के प्रतिष्ठित फुकुओका पुरस्कार (संस्कृति संरक्षण अऊ संवर्धन बर) अऊ 2019 म भारत के दूसरइया सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मविभूषण प्रदान करे गिस । ये सब्बो सम्मान ह भारतीय लोककला, खास करके पंडवानी परंपरा ल  विश्व स्तर म पहचान दिलाय म उंखर असाधारण योगदान के प्रमाण आय।


छत्तीसगढ़ के पंडवानी परंपरा के विकास अऊ संरक्षण म अनेक कलाकार मन के उल्लेखनीय योगदान हे। ए परंपरा के पुरोधा झाड़ूराम देवांगन  (बासिन) अउ नारायण वर्मा ( रावणझीपन) ले सुरू होके पुनाराम निषाद, रेवाराम साहू ,दानी परधान, गोगिया परधान, रामजी देवार, चेतन देवांगन, प्रह्लाद निषाद, परख दास वैष्णव, मोहन वैष्णव, सुखराम यादव , गणपत साहू, प्रेमलाल साहू , पं. दुर्ग्यंत त्रिवेदी, अर्जुन सेन, भरत निषाद, गौतम, नरेंद्र मांडले, सौरभ पारधी, खेमलाल चेलक, जामवंत निषाद ,गुलशन‌ निषाद अऊ संतराम जइसन कलाकार मन अपन विशिष्ट गायन अऊ कथावाचन शैली ले पंडवानी लोककला ला समृद्ध बनाइन। ए कलाकार मन के अथक साधना के परिणाम स्वरूप पंडवानी ल व्यापक पहचान मिलिस अऊ देस के प्रतिष्ठित मंच मन म प्रस्तुति देय के अवसर घलो कलाकार मन ल प्राप्त होइस।


महिला कलाकार मन घलो इहाँ के परंपरा ला राष्ट्रीय अउ अंतर्राष्‍ट्रीय स्तर तक पहुँचाय म खास भूमिका निभाइन हे। जेमा पद्मविभूषण तीजन बाई, शांति बाई चेलक, लक्ष्मी बंजारे, ऋतु वर्मा, उषा बाई बारले, रेखा निषाद, प्रभा चेलक, दूजन बाई, सीमा घोष (कलकत्ता), सुलैना मानिकपुरी, तरूणा साहू, चंद्रिका सोनवानी, त्रिवेणी साहू, हेमलता पटेल, मीना साहू, रंभा देशमुख,निर्मला भट्ट, अमृता साहू, रोशनी नागवंशी, शिवकुमारी पटेल, जानाबाई, खेमिन निषाद, अनामिका निषाद ,मिथिलेश जगत, नंदिनी पटेल, किरण वैष्णव, अक्ती निषाद, गंगाबाई मानिकपुरी, रानू निषाद, पूनम सिन्हा, गायत्री राजपूत, समप्रिया पूजा निषाद, रोशनी तिरपुरे, तुलसी मानिकपुरी, उर्मिला यादव,खेमिन यादव, वेदकुमारी मानिकपुरी, यशोमती सेन, भामिनी मानिकपुरी, पुष्पा निषाद, दुर्गा साहू, आराध्या साहू, होमिनबाई निषाद, टोमिन निषाद, सरोजनी निषाद, टिकेश्वरी निषाद अउ जंत्रीदेव जइसन कलाकार मन के योगदान बड़ सराहनीय हवय। 


5 जुलाई 2026 के दिन पंडवानी के महान कला-साधिका पद्मविभूषण तीजनबाई के निधन ले पंडवानी के गौरवशाली परंपरा अउ युग के अवसान जरूर होइस, फेर पंडवानी परंपरा के बिकास म उंखर  योगदान हमेसा अमर रही। भारत के संग दुनिया भर म  पंडवानी के संरक्षण, संवर्धन खातिर तीजनबाई के  कलात्मक अवदान ल हमेसा श्रद्धा अउ सम्मान के संग सुरता करे जाही। विनम्र श्रद्धांजलि। 

        

लखनलाल साहू 'लहर'

मोखला, राजनांदगांव

मो. 9630312197

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