*बरबंदा के तुलेंद्र ले स्वामी आत्मानंद तक के सफर*
सेवा, शिक्षा अउ त्याग के वो ज्योति, जेन ह आज घलो छत्तीसगढ़ के रद्दा ला रोशन करत हे छत्तीसगढ़ के धरती ह अपन कोरा म अइसने अनेक विभूति मन ला जनम देहे हवय, जेमन अपन पूरा जिनगी ला समाज, गाँव, गरीब अउ पीड़ित मन के सेवा म समर्पित कर दिस। ये माटी के महान संत अउ सेवक मन म स्वामी आत्मानंद के नाँव बड़ आदर अउ श्रद्धा ले लेय जाथे। वो सिरिफ एक संन्यासी नइ रहिन, बल्कि वो शिक्षा के दूत, मानव सेवा के पुजारी, गरीब मन के सहारा अउ आदिवासी अंचल के विकास के सपना देखइया दूरदर्शी संत रहिन।आज छत्तीसगढ़ म जउँन-जउँन जगह म स्वामी आत्मानंद के नाँव ले शिक्षा, सेवा अउ समाज कल्याण के बात होथे, ओखर पाछू ओकर पूरा जिनगी के तपस्या, त्याग अउ संघर्ष के कहानी छुपे हे। स्वामी आत्मानंद के जिनगी हमन ला सिखाथे सच्चा संन्यास समाज ले दूर हो जाना नोहय, बल्कि समाज के दुख ला अपन दुख समझ के ओकर सेवा म अपन जिनगी लगा देना आय।स्वामी आत्मानंद के जन्म 6 अक्टूबर 1929 म रायपुर के नजदीक स्थित बरबंदा गाँव म एक संस्कारी परिवार म होय रिहिस।पिता धनीराम वर्मा शिक्षक रिहिन,माता भाग्यवती देवी गृहणी रिहिस। स्वामी जी पांच भाई अउ एक बहन म सबले बड़े रिहिन,उकर बालपन के नाँव तुलेंद्र रहिस। बचपन ले ही वोहा पढ़ई म बहुत तेज, गंभीर अउ चिंतनशील स्वभाव के रहिन। आगू चलके पढ़ई के क्षेत्र म घलो उनकर प्रतिभा के खूब चर्चा होइस। मैट्रिक म प्रथम श्रेणी हासिल करिन, नागपुर के कॉलेज म पढ़िन अउ गणित विषय म उच्च शिक्षा हासिल करिन। एम.एस.सी. म प्रथम श्रेणी म प्रथम आके स्वर्ण पदक घलो प्राप्त करिन।प्रशासनिक सेवा म भी जाय बर परीक्षा दिलाइस अउ लिखित परीक्षा म पूरे भारत म दस रेंक के अंदर आइस,फेर वोहा प्रशासनिक सेवा म जाय बर तैयार नइ रिहिन ओकर मन म जन सेवा के भाव कूट-कूट के भरे रिहिन,अइसन प्रतिभाशाली युवक के सामने सुख-सुविधा अउ उज्ज्वल सांसारिक भविष्य के बहुत अवसर रहिन। फेर तुलेंद्र के मन म अपन निजी भविष्य बनाय के बजाय समाज अउ मानवता बर कुछ करे के भाव धीरे-धीरे मजबूत होवत रिहिन। रामकृष्ण-विवेकानंद के विचारधारा ह उनकर मन ला गहिरई ले प्रभावित करिस।आखिरकार वो सांसारिक जीवन के मोह-माया ला छोड़के सेवा अउ साधना के रद्दा म निकल पड़िन। नागपुर के रामकृष्ण मठ म प्रवेश लेके ब्रह्मचर्य जीवन अपनाइन। बाद म वो ब्रह्मचारी तेज चैतन्य के रूप म जाने गिन, अउ आगू चलके संन्यास ग्रहण करके स्वामी आत्मानंद के नाँव ले प्रसिद्ध होइस। स्वामी आत्मानंद के व्यक्तित्व ऊपर स्वामी विवेकानंद के गहिर प्रभाव रहिस। विवेकानंद के मूल विचार रहिस हवय भगवान के पूजा सिरिफ मंदिर म नइ, बल्कि पीड़ित मानव के सेवा म घलो होथे। स्वामी आत्मानंद ह ये विचार ला अपन जिनगी म उतार के देखाइस।उनकर नजर म गरीब, बीमार, अशिक्षित, आदिवासी अउ उपेक्षित मन समाज के बोझ नइ रहिन। वो मनखे मन म भगवान के रूप देखत रहिन। ओकरे सेती वो अपन सेवा के केंद्र म सबले कमजोर अउ जरूरतमंद मनखे मन ला रखिन। उनकर जिनगी के मूल मंत्र ला एक लाइन म कहे जाय, त वोला अइसे कहि सकथन-मनखे के सेवा करई ह सच्ची साधना आय। स्वामी विवेकानंद के रायपुर प्रवास के स्मृति ला चिरस्थायी बनाय बर स्वामी आत्मानंद के मन म एक बड़े सपना रहिस। वो चाहत रहिन रायपुर म अइसन संस्था बने, जिहाँ आध्यात्मिकता के संग शिक्षा अउ समाज सेवा के काम होय।इही सपना ला पूरा करे बर रायपुर म विवेकानंद आश्रम के स्थापना के काम शुरू होइस। वर्तमान विवेकानंद आश्रम के इतिहास म बताय गे हवय, आश्रम के स्थापना अप्रैल 1962 म होइस अउ 7 अप्रैल 1968 म एकर रामकृष्ण मिशन, बेलूर मठ ले औपचारिक संबंध स्थापित होइस।ये आश्रम धीरे-धीरे सिरिफ पूजा-पाठ के जगह नइ रहिस, बल्कि शिक्षा, चिकित्सा, समाज सेवा अउ आध्यात्मिक जागरण के महत्वपूर्ण केंद्र बनिस। स्वामी आत्मानंद के सेवा भावना के सबले मार्मिक उदाहरण 1974 के अकाल के समय देखे बर मिलथे।छत्तीसगढ़ के बहुत बड़े हिस्सा म जब अकाल के संकट आइस, तब गरीब किसान, मजदूर अउ गाँव के परिवार मन के हालत बहुत खराब होगे रहिस। अइसन बखत म आश्रम के काम बर जुटाय गे धन ला स्वामी आत्मानंद ह अपन संस्था के विकास म खर्च नइ करिन। वो धन ला अकाल पीड़ित जनता के राहत बर लगा दिन।बताय जाथे ओकर नेतृत्व म छत्तीसगढ़ के अनेक गाँव म सूखा राहत के काम युद्धस्तर म चलाय गे रहिस।ये घटना स्वामी आत्मानंद के चरित्र के सबले बड़े पहचान आय। वो कहिनी म नइ, बल्कि काम म विश्वास करत रहिन। जिहाँ जनता भूख ले तड़पत हो, उहां आश्रम के भवन बनाना उनकर नजर म उचित नइ रहिस।इही सोच ह उन ला साधारण संत ले अलग करके जन संत बनाथे। स्वामी आत्मानंद के सेवा यात्रा के सबले महत्वपूर्ण अध्याय बस्तर अउ अबूझमाड़ ले जुड़थे।ओ समय बस्तर के बहुत बड़े हिस्सा म शिक्षा के सुविधा लगभग नइ के बराबर रहिस। घनघोर जंगल, गरीबी, अशिक्षा अउ स्वास्थ्य सुविधा के कमी के कारण वनवासी समाज मुख्यधारा ले बहुत दूर रहिस।स्वामी आत्मानंद ह ये स्थिति ला सिरिफ देखिन नइ, बल्कि बदले के संकल्प करिन।नारायणपुर ला अपन सेवा के प्रमुख केंद्र बनाके वो शिक्षा अउ स्वास्थ्य के माध्यम ले आदिवासी समाज के जीवन म बदलाव लाय के काम शुरू करिन। रामकृष्ण मिशन आश्रम नारायणपुर आगू चलके शिक्षा, आवासीय विद्यालय, स्वास्थ्य अउ ग्रामीण विकास के महत्वपूर्ण केंद्र बनिस। आश्रम म सेवा,अनुशासन,श्रम,आत्मनिर्भरता,सामाजिक जिम्मेवारी के भावना के संग अपन संस्कार अउ संस्कृति ल बचाय अउ विकसित करे बर आज भी बल देवत हें,ओकरे सेती ये आश्रम सिरिफ विद्यालय भर नोहय ये व्यक्तित्व निर्माण के केंद्र बन गेहे, नारायणपुर के ये आश्रम भारत के एक नामी आश्रम म गिनती होथे,उनकर सपना रहिस जंगल म रहइया लइका मन घलो शहर के लइका मन जइसने पढ़-लिख के अपन भविष्य गढ़ सकय। शिक्षा उनकर नजर म सिरिफ नौकरी पाय के साधन नइ रहिस; शिक्षा मनखे मन ल अपन अधिकार समझे के साथ, आत्मविश्वासी बने अउ समाज म सम्मान के संग जीये के ताकत देथे। स्वामी आत्मानंद आदिवासी समाज के प्रति गहिर सम्मान के भावना रखत रहिन। वो वनवासी मन ला दया के पात्र नइ, बल्कि समाज के बराबरी के सदस्य मानत रहिन।उनकर प्रयास रहिस हवय अबूझमाड़ अउ बस्तर के लोग मन अपन परंपरा, संस्कृति अउ सम्मान ला बचावत शिक्षा अउ विकास के मुख्यधारा म जुड़ँय। अबूझमाड़ ग्रामीण विकास के प्रयास के माध्यम ले गरीबी, अशिक्षा अउ पिछड़ेपन ले लड़ई के काम करे गीस। उनकर सोच रहिस विकास ऊपर ले थोपे नइ जाना चाही, बल्कि गाँव के जरूरत अउ उहाँ के मनखे के भागीदारी ले विकास के रद्दा बनना चाही। ये सोच आज के समय म घलो उतनेच प्रासंगिक हे।नारी अउ बालिका शिक्षा के पक्षधर स्वामी आत्मानंद के सेवा दृष्टि म समाज के आधा आबादी महिला अउ बालिका के शिक्षा ला विशेष महत्व मिलिस। उनकर प्रयास ले शिक्षा अउ समाज कल्याण के अइसन काम शुरू होइस, जेमन म बालिका अउ महिला शिक्षा ला बढ़ावा देय के कोशिश रहिस। उँकर सहयोगी मन के माध्यम ले विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल हेल्थ, वेलफेयर एंड सर्विस जइसन पहल के माध्यम ले घलो महिला अउ बालिका मन बर काम कर के दिखाइस।उनकर मानना रहिस एक परिवार ला मजबूत करे बर महिला के शिक्षित होना बहुत जरूरी हे। एक शिक्षित बेटी सिरिफ अपन जिनगी नइ सँवारय, बल्कि पूरा परिवार अउ अवइया पीढ़ी के भविष्य ला मजबूत बनाथे।स्वामी आत्मानंद के व्यक्तित्व के सबले सुग्घर पक्ष रहिस उनकर सौम्यता सरल व्यवहार अउ सादगी। अतेक बड़े-बड़े काम करे के बाद घलो उनकर जीवन म दिखावा नइ रहिस। वो सहज, संयमी अउ सबो के प्रति सम्मान अउ प्रेम रखइया संत रहिन। ओकर व्यक्तित्व के वर्णन म सहजता, संयम अउ सबो के प्रति आदर-प्रेम के विशेष उल्लेख मिलथे।वो अपन बर कुछ नइ माँगिन। अपन प्रतिभा, समय, श्रम अउ जीवन ला समाज बर समर्पित कर दिन।इही कारण आय स्वामी आत्मानंद के नाम सिरिफ एक संत के रूप म नइ, बल्कि सेवा के प्रतीक के रूप म याद करे जाथे।स्वामी आत्मानंद के जीवन के एक महत्वपूर्ण पारिवारिक पक्ष ये घलो हवय वो छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध साहित्यकार अउ छत्तीसगढ़ के राजगीत ‘अरपा पैरी के धार’ के रचयिता डॉ. नरेंद्र देव वर्मा के अग्रज रहिन। डॉ. नरेंद्र देव वर्मा अपन बड़े भैया स्वामी आत्मानंद ले गहिर रूप ले प्रभावित रहिन।नरेंद्र देव वर्मा के बारे म लिखे गे हवय उनकर जीवन म स्वामी आत्मानंद के प्रेरणा के महत्वपूर्ण भूमिका रहिस।ये संबंध छत्तीसगढ़ के इतिहास म विशेष महत्व रखथे, काबर एक भाई आध्यात्मिकता अउ समाज सेवा के माध्यम ले छत्तीसगढ़ ला दिशा देत रहिस, त दूसर भाई साहित्य, संस्कृति अउ लोकजागरण के माध्यम ले छत्तीसगढ़ महतारी के महिमा ला देश-दुनिया तक पहुंचाइस। आज छत्तीसगढ़ म स्वामी आत्मानंद के नाँव ले अनेक शिक्षा संस्थान संचालित होवत हें। ये बात अपने आप म बताथे ओकर शिक्षा संबंधी विचार आज घलो समाज ला प्रेरणा देत हें। हालांकि स्वामी आत्मानंद के मूल काम ला सिरिफ स्कूल के नाम तक सीमित कर देना ओकर व्यक्तित्व के साथ न्याय नइ होही। उकर असली सपना म शिक्षा के संग चरित्र निर्माण, सेवा भावना, अनुशासन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवीय संवेदना अउ समाज के अंतिम पंक्ति म खड़े मनखे के उत्थान शामिल रहिस। स्वामी आत्मानंद चाहत रहिन पढ़ई करइया लइका मन सिरिफ अपन भविष्य बर नइ पढ़य, बल्कि समाज बर घलो कुछ करे के भावना रखय। आज हमन तकनीक के जमाना म जीयत हवन। गाँव-गाँव म सड़क, बिजली, मोबाइल अउ इंटरनेट पहुँचत हे। शिक्षा के साधन बढ़गे हें। फेर समाज के सामने नवा किसिम के चुनौती घलो खड़े होवत हें।असमानता, बेरोजगारी, नशा, सामाजिक दूरी, पर्यावरण संकट, संवेदनहीनता अउ शिक्षा म बढ़त प्रतिस्पर्धा जइसन समस्या मन के बीच स्वामी आत्मानंद के विचार हमन ला फेर रद्दा दिखा सकथे। स्वामी आत्मानंद के जयंती मनाना, उनकर मूर्ति म फूल चढ़ाना अउ उनकर नाम ले कार्यक्रम करना निश्चय ही श्रद्धा के बात आय। फेर उन ला सच्ची श्रद्धांजलि तब मिलही, जब हमन उनकर विचार ला अपन जिनगी म उतारे के काम करन। स्वामी आत्मानंद के भौतिक जीवन 27 अगस्त 1989 म राजनांदगांव के पास एक सड़क दुर्घटना के बाद समाप्त होगे, फेर एक संत के जीवन के अंत ओकर देह के अंत के संग नइ होवय। ओकर विचार, सेवा अउ सपना आज घलो जिंदा हें। बरबंदा के एक प्रतिभाशाली बालक तुलेंद्र ले लेके स्वामी आत्मानंद बने तक के यात्रा, दरअसल एक मनखे के अपन आप ले ऊपर उठके समाज म गिरे पिछड़े मन ल उठाय के यात्रा रहिस।वो अपन बर नइ जीयत रिहिस। वो गरीब,अनपढ़,वनवासी,पीड़ित किसान,महिला अउ बालिका के शिक्षा बर,छत्तीसगढ़ के गांव अउ जल जंगल जमीन बर जीस हे,शिक्षा के उजियारा फैला के पीड़ित मनखे के हाथ पकड़ अउ समाज के अंतिम मनखे तक विकास के रोशनी पहुँचइया स्वामी आत्मानंद एक महान संत रिहिन,अइसन सेवक अउ अइसन महामानव विरले ही पइदा होथें।
विजेन्द्र कुमार वर्मा
नगरगाँव (धरसीवां)
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