नानकुन कहानी
" नजर सबो कोती "
- मुरारी लाल साव
महापरसाद ला देखे बहुत दिन होगे रहिस l नानपन ले मितानी रहिस l आज पइंसठ बछर होगे हे सुरता आ गे ओकर हाल चाल ला जाने के l बिसाहू अपन मितान रमेसर के गाँव चल दीस l मोटर साईकिल म जात रहिस बीच रद्दा म बिगड़ गे l पैदल गाड़ी ला रेंगावत जात रहिस l एक झन ला पूछिस -" कोनो गाड़ी बनाथे का जी आस पास म? " राहगीर बताइस -"नइ जानन ग मालूम नइये हे l का होगे? का बिगड़ गे? "
बिसाहू कहिस -" आवत होही त तहीं देख ना!"
राहगीर -" मेकेनिक नोहंव फेर तोर मुसीबत ला देख के..... I
बिचारा फट फूट करके ऊपर नीचे देखिस l गाड़ी बिगड़ीस हे कोई कारण तो होही l
"पूछिस कहाँ जाबे?
"मितान के नाँव ला नइ लेवव फेर गुरूजी ला झाँकी वाले के नाम म सब जानथे l "
" हाँ हाँ मैं जानथव ओला l"
"बिसाहू गुरूजी "
"मोर मितान ए, मैं किसान के किसान रहिगेंव l ओहर... I
रमेसर अपन गोठ ला निकालत रहिस l राहगीर कइथे -" अइसे कर बिगड़हा गाड़ी ल इही मेऱ छोड़ चल मोर संग म l
मरता क्या नइ करता कोई चारा घलो नइ रहिस l
गुरूजी के घर पहुंचीस त गुरूजी पेपर के पन्ना ला उलट पल्ट के देखत रहिस l ओकर नजर सबो कोती रहिस l मस्टरनिन चाय बनावत हे कि नहीं l टुरा कति गिस? पेपर पढ़त तलाक सुदा विज्ञापन पढ़त रहिस l एती ओती नजर ला घुमा घुमा के देखत रहय l
हमन ला देखिस अब्बड़ खुश होगे l
"महाप्रसाद के आना कोई जरूर खास बात है!" बिसाहू गुरूजी कहिस l
रमेसर कहिस "मितान के सुध मितान नइ लिही ला कोन लिही l"
गोठ बात होते रहिस बिसाहू के आँखी के आँसू निकले ला धर लीस l " सब ला झाँकी देखाएंव मोरे घर म चलत हे l
बहू नइ रहंव कइके अपन मइके म जाके बइठ गे हे l उपराहा केस कर देहे l पेशी ऊपर पेशी
काला बतान मरे बिहान होगे हे l"
रमेसर -" मितान के पारी आथे अपनो ला सुनाथे -" मोर इहाँ तो मोर टुरा उड़ावत हे का बहू लानेंव आगी म भुंजत हे?हमन लेसात हन महापरसाद l चीज बस ला बेंच के बहू ऊपर उड़ावत हे l "
गुरूजी उमर भर सब ला बने रद्दा देखाइस l ओ�
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