- व्यंग "भाईचारा"
9/3/23
कभू -कभू कइ ठन शब्द बड़ उटपूटांग लगथे जइसे "भाईचारा"। अब ये भाई मे चारा के का काम।एक ठन चारा गायगरु जानवर मन बर काम आथे।एक ठन मछरी फंसाय के । मछरी फंसाना घलो एक कला आय। चारा कईसे गुथना हे, गरी ल कहाँ फेंकना हे, कतिक समें फेंकना हे, अऊ सब ले बड़े बात आय ओकर इशारा ल समझाना ।मछरी, मतलब ललचाहा जीव। जिहाँ चारा दिखिस खब्ब ले मुहँ म डारिस । थोरकुन मेहनत नइ करना चाहें। चारा मतलब फ्री के 'लालीपॉप कही सकथन। पहिली चारा फंसाय के कला एक समुदाय विशेष कर राहय । अब तो एकर आधिपत्य के दूसर उत्तराधिकारी घलो हो गे हे । जेन मन फोकट (फ्री) के जमगरहा चारा फेकथे ।जेकर गरी म जताका' फोकट (फ्री )के चारा रहिथे वोकर बेड़ा पार हो जथे । अऊ फंसे मछरी दिन रात पुछी हलात दिन गिनत रहिथे। अब चारा के फेंकईया ले ये उम्मीद नई करे जा सके के वो ह मछरी ल अपन घर में कांच में पानी डाल के सजाके रखही अऊ समे समे म पौष्टिक आहार दिही। फेर देना रहितिस त गरी म चारा कार फेंकतिस ।
हर मनखे ल अपन घर ल साफ सुथरा रखना चाहि।साफ सफाई म झाड़ू के बड़ योगदान है। कतको झन तो सुत उठ के झाडू ल परणाम घलो करथे । जेला झाइ के ताकत देखना हे त देश के दिल में जायबर पढ़ही । इंहा फोकट (फ्री) के जमगरदा-चारा अऊ ललचाहा जीव के कॉम्बीनेशन (तालमेल) ले झाड़ू वाले मन ह सरग के मजा उड़ावत हे।
मदिरालय म एक संग एक फ्री । ऐ ह इंहा के समृध्दि ( विकास) के राज आय । पूरा देश के समृद्धि (विकास) म ऐकर सब ले बड़े योगदान हे। येला हमर देश के अर्थव्यवस्था के पीठ के हाड़ा घलो कही सकथन । फेर ऐकर विज्ञापन हर टिवी अखबार म "दूंढते रह जाओगे"।
"लईका मन के कुपोषण बर बारा बिभ्भो (नाना परकार) योजना चलाथे। वईसने लईका मन बर एक लिटर दूध संग एक लिटर दूध फ्री के चारा फेकतिस त का चीन ह हमन ल खुसरा खुसरा आंखी ल देखातिस ।
ये देश ऋषि मुनि गनि मन के देश आय । इंहा ज्ञानचंद मन के तको खरही गंजाय हे। जिहाँ "भाईचारा " के गोठ आथे ताहन ले ज्ञानचंद मन के दिमाक म किरा कांटथे । देवारी भाई चारा ले मनाव फेर फटाका मत जलाव परदूषण के खतरा बाढ़ जाथे। कोन जनी युक्रेन वाला मन बछर भर होगे कइसे झेलत होही।वइसन दशा मे तो दिल वाले मन आज ले निपट जतिन । एक दिन के फटाका म उंकर सांसा ऊपर नीचे होत रहिथे । -फेर सिलेण्डर चोरों से सावधान कहिके कोनो जगा नइ पढ़हेहन हन ।ये दिल वाले मन बर बहुत बड़े बात आय।
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ज्ञानचंद मन के दिमाक के बत्ती साल म दू बेर जलथे, एक तो देवारी म दूसर होली। होली मनाय ले भाखड़ा नांगल बांध हिराकुंड बांध के सुखाय के खतरा बड़ जाये।
जेन मनखे मन "निवृत्त मान संस्था"म तीन चार बाल्टी पानी उरकाथे ,कार मे रोज पानी मारथे ,गार्डन म पानी डाल के दिल गार्डन गार्डन करथे तेन मन ह ज्ञान पेलथे । इहां पानी बचाय के ठेका ओ मन ल मिलथे जिंकर शौचालय म दू बाल्टी पानी नी राहय ।
-ज्ञान चंद मन के संगे संग बुद्धिजीवी मन के मुहुँ म मास्क कोरोना के खतरा असन आय।
ये समस्या ल देख के गांव के पंचायत म कम दिमाक वाले वैज्ञानिक मन ल दिल्ली के खस्सू कुकुर मन ल धर के शोध करे बर "भाईचारा" के नाता युक्रेन भेजे के घला प्रस्ताव पास करे गेहे ।
फकीर प्रसाद साहू सुरगी 🙏
9-3-23
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