Saturday, 12 September 2026

जंगल म सुरुक्षा --( कहानी )

 ---- जंगल म सुरुक्षा --( कहानी )


​लछमी नारायन यादव गंडई गांव के रहइया ए। ओहू हा अपन ददा कस चरवाहा के काम करय। लछमी नारायन के दो ठन बेटका रहिन—नवरंग अउ बजरंग यादव। नवरंग के उमर 13 बछर अउ बजरंग 11 बछर के रिहिस। नवरंग अउ बजरंग घलो 5वीं तक पढ़े के बाद ढोर-डांगर चराए म लग गैन । दोनूं लइका गांव के चार ठन दाऊ मन के ढोर-डांगर ल नजीक के जंगल म चराए बर ले जावयं। ढोर-डांगर चरावत बेरा ओमन के हाथ म लाठी रहय। कभू-कभू ओमन कुल्हाड़ी घलो लेके जावयं, जेखर ले जंगल ले लकरी काट के आवय।

​नवरंग देह-दउर म तगड़ा रिहिस, पर थोकिन डरपोक रिहिस। ओहीच मेर बजरंग दुबरा-पतरा रिहिस, फेर ओहा भारी हिम्मती रिहिस।

​दोनूं भाई मवेशीमन ल जंगल के सुरूआत म एक ठन मैदान म चरइ बर छोड़ के पेड़ के छांव म बैठ जावयं। फेर दोनूं मिलके बिल्लस खेलयं या गाना-बजाना करयं। 4 बजे के बाद सबो जानवर ला स्केल के ले जावय। इन ढोर-डांगर के एक ठन खासियत रिहिस—जब घलो ओमन समूह म चलयं, तो समूह के आगू अउ पाछू जवान अउ ताक़तवर जानवर रहयं, अउ कमजोर, बूढ़ा अउ लइका जानवर बीच म रहयं।


​ओती उंकर ददा लछमी नारायन के पूरा समय गाय-भैंस के दूध दुहे म, चारा देवे म अउ ग्राहक मन तक दूध पहुंचाए म बीत जावय। बाप-बेटका मिलके अतेक कमा लेवयं कि कभू कंहू हाथ पसारे के नौबत नई आई।

​कुछू दिन ले गांव म हल्ला रिहिस कि कुछू ख़ूंख़ार जंगली जानवर  जंगल ले भटक के गांव कोती आ चुके हवयं अउ पालतू जानवर मन ऊपर हमला करत हवयं। तभे सबो ल सतर्क रहे के जरूरत रिहिस।

​लछमी नारायन हा अपन दोनूं लइका ल ए खतरा के बारे म बताईस अउ सलाह दीस कि ढोर-डांगर ल नजीक म ही चरावव, जादा दूर जंगल म मत जावव। कमर म छुरी-चाकू अउ कांधे म कुल्हाड़ी रखव। दोनूं लइका ददा के गोठ ल अक्षरस: मानिन अउ सुरुक्षा के संग जंगल जाए लागिन।

​अब खाली समय म बजरंग अपन जानवर मन ल बहादुरी के किस्सा सुनावयं कि कैसे एक हाथी हा मगरमच्छ ले अपन गोड़ ल छुड़ाईस, कैसे खरगोश हा शेर ल कुंवा म गिरा दीस अउ कैसे बंदर हा चालाकी ले अपन जान बचाईस। ओहा 6 ठन हट्टे-कट्टे जानवर (1 बैल अउ 5 भैंसा) ल आपस म लड़े के अउ हमला करे के ट्रेनिंग दे लागिन। बैल के नाम 'संग्राम सिंग' अउ भैंसा मन के नाम 'ज्वाला प्रसाद', 'बलबीर', 'काल भैरव', 'बहादुर प्रसाद' अउ 'शक्ति कुमार' रखिन। बजरंग ओमन के सींग ल खरोंच के नोकीला कर दे रिहिस अउ पूंछ म कांटा के लड़ी बांध दे रिहिस।

​दो महीना बीत गे, अइसन कोई घटना नई होईस।


​अब बड़े भाई नवरंग थोकिन बेफ़िक्र रहे लागिस, फेर छोटे भाई बजरंग अब भी सजग रिहिस। अब ओमन के बरदी म 55 ठन मवेशी हो चुके रिहिन। बजरंग कभू-कभू अपन छहों रणबांकुरा मन के परीक्षा लेवत रहय।

​बरसात के दिन आ चुके रिहिस। एक दिन दोपहर म दोनूं भाई खाना खावत रिहिन कि जानवर मन के दउड़े के अवाज आईस। नवरंग हा देखिस त तीन ठन शेरनी ओमन के पाछू परे रिहिन। नवरंग डर के मारे रुख ऊपर चढ़ के बैठ गे। फेर बजरंग हा हिम्मत नई हारिस, ओहा अपन कुल्हाड़ी उठाईस अउ संग्राम सिंग, ज्वाला प्रसाद, बलबीर, काल भैरव, बहादुर अउ शक्ति कुमार ल हुक्म दीस—"आज तुम्हर हिम्मत के परीक्षा ए, आगू आवव!" सबो मवेशी हुंकार भरत आगू आके ठाढ़ हो गैन।

​जब तीनों शेरनी सोझ म पहुंचीन अउ नज़ारा देखिन, त एक बेर ठिठक गिन। एक शेरनी आगू बढ़िस त संग्राम सिंग ओकर सोझ म आ गे। तीनों शेरनी हमला करिन—एक हा संग्राम सिंग के टेंटुवा ल धर लीस, दूसरी पीठ म चढे के कोसिस करिस अउ तीसरी पूंछ कोती आई। संग्राम सिंग हा अपन पूंछ ल जोर ले हिलाईस त कांटा के लड़ी ले तीसरी शेरनी पीरा के मारे पाछू हट गे। तब संग्राम के सहायता बर ज्वाला प्रसाद अउ बहादुर अली हा एक संग अपन सींग ले पीठ वाली शेरनी ऊपर वार करिन, जेखर ले ओहा भुंइया म धड़ाम ले गिर गे।

​गर्दन ल धरे शेरनी ल छुड़ाए बर बजरंग हा कुल्हाड़ी ले ओकर पीठ म जोरदार हमला करिस। शेरनी हा बजरंग कोती झपटी, बजरंग फिसल के गिर गे। तब बजरंग ला बचाय बर बलबीर, शक्ति कुमार अउ काल भैरव सोझ म ढाल बनके ठाढ़ हो गैन। एही मउका म संग्राम सिंग हा पाछू ले आके अपन नोकीला सींग ल शेरनी के पेट म पूरी ताक़त ले घोंस दीस। शेरनी ओहीच बेर ढेर हो गे अउ ओखर  प्राण पखेरू उड़ गे। ए दृश्य ल देख के बाकी दो ठन शेरनी दुम दबाके भाग गैन।

​बजरंग हा संग्राम सिंग के घाव म माटी के लेप लगाईस, जेखर ले लहू बहना बंद हो गे। सबो जानवर अपन पूंछ हिलाके अपन रणबांकुरा मन ल सलामी दे लागिन।

​संझा होगे रिहिस। बरदी वापस गांव कोती फिरीस। आज कतार म सबले आगू संग्राम सिंग रिहिस अउ ओकर पीठ म बजरंग शान ले बैठे रिहिस। नवरंग ल बीच म रखे गे रिहिस अउ बाकी योद्धा पाछू-पाछू चलत रिहिन।

​ए घटना के बाद गंडई के जंगल म कभू शेर के दहाड़ नई सुनाई दीस। ओही दिन ले गंडई म हर बछर विशाल पशु मेला लागथे, जेनहा पूरे छत्तीसगढ़ म प्रसिद्ध हवे।

​(समाप्त)

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