Sunday, 4 July 2021

कुछ मजेदार सुरता प्रायमरी स्कूल के- अजय अमृतांशु,* भाटापारा

 कुछ मजेदार सुरता प्रायमरी स्कूल के- अजय अमृतांशु,* भाटापारा


1. प्राथमिक शाला म जब मैं पढ़त रहेंव तक हफ्ता मा मोला 10 पइसा मिलय, मोर एक झींन संगवारी ल 15 पइसा मिलय। अब हम दूनों मिल के 25 पइसा ला 5 दिन चलावन माने रोज के पाँच पइसा के खजानी खावन लंच ब्रेक म। 


2. पाँच पइसा म 4 उबले आलू मिल जाय जेला नमक अउ मिर्च मसाला डार के देवय वोला खाय म बड़ मजा आय।


3.  स्लेट ल पोंछे बर कई बेर हमन चिरइया फूल के तना के प्रयोग करन जेला घसरन त पानी निकलय। 


4. वो समय स्कूल ड्रेस बर हाफ पेंट अउ कुर्ता केवल एक जोड़ी नवा बछर म मिलय । पाछू साल के एक जोड़ी मिला के दू जोड़ी कपड़ा हो जावय। फेर हाफ पैंट के सिर्फ पाछू ह घसाँके चिरावय। वइसने शर्ट के केवल कंधा के ऊपर ह चिरावय बाकी साबुत रहय । तब वो पेंट कुर्ता ल फेंके म भारी अँखरय। 


5. पाँच पइसा मा अबड़ अकन अमली मिल जॉय जेला नून सँग चटकार चटकार के खावन। 


6. दस पइसा मा जबरदस्त छोले मिल जाय जेमा नीबू,प्याज,आलु ,धनिया आदि डले रहय येकर सुवाद आज तक सुरता हवय।


7. हमर ले बड़े लइका मन *खड़खड़िया* खेलावय। अउ कहय- एक कलम में खड़खड़िया शून्य मिलेगा दस कलम। लइका मन लालच म आ के खड़खड़िया खेल दँय, फेर जब कागज ल खोलन तब हमेंशा शून्य ही आवय अउ खड़खड़िया खेलाने वाला लइका ह शून्य आय हे तोला कलम नइ मिलय कहिके कलम ल धर के रेंग दय । खेलने वाला लुलवावत रे रहि जाय।


8. पाँच पइसा मा 2 ठिन चकरी मिल जाय जेन धागा म बँधे राहय । धागा ल खींचे म ये चकरी भन्ना जाय। फेर जादा रट्ठाय के फेर म चकरी टूट जाय अउ मुँह कान या हाँथ ल जोर से लगय। वो चकरी ल खाय म बड़ मजा आय


9. हमर मन के कुछ प्रसिद्ध स्लोगन रहय जेकर जादा समझ तो नइ रहिस फेर नारा लगाय म बड़ मजा आय -


(1) गुरुजी गुरुजी पट्टी दे..12 बजगे छुट्टी दे।

(2) गुरुजी गुरुजी चाम चटिया.....

(3) चार चवन्नी तेल में इंदिरा गाँधी जेल में...


10 . हमर अविस्मरणीय पाठ - 

     1/  चल रे मटके टम्मक टू...

     2/  पाँच बातें 

     3/  तीतर के दो आगे तीतर....


*अजय अमृतांशु,* भाटापारा

प्रायमरी स्कूल के सुरता* : पोखन लाल जायसवाल

 *प्रायमरी स्कूल के सुरता* : पोखन लाल जायसवाल

          १९८२ म स्कूल जाय बर शुरु करेंव। स्कूल म भर्ती होय बर पहिली माई (जेवनी) हाथ ले डेरी कान ल मुड़ ऊपर ले छुए के शर्त रहिस। जेन लइका कान ल छू लेतिस तेन स्कूल म भर्ती पा लय। अउ जेन लइका नइ छू सकय तेला कक्षा म भर्ती नइ करत रहिन हे। तरिया पार म बसे चार कोरी चूल्हा के गाँव म जादा पढ़े लिखे मनखे नइ रहिन। मनखे मन बनी भूती कर के पेट भरँय। कतको मनखे कुंवार म बाढ़ी खावँय अउ दू महीना के बीते ले बड़हर मनखे ल एक खाड़ी धान के डेढ़ खाड़ी लहुटावँय। तब गाँव म खेती आज सहीं चौकस नइ होत रहिस। बनिहार के जिनगी एक लाँघन एक फरहार कटत रहिन। नगदी करजा के बलदा खेत गहना धराय राहय अउ अपने खेत म साहूकार बर खेती करँय। रक्सेल अउ भंडार के दू ठन गाँव सिसदेवरी अउ कुसमी हवय। इही दूनो गाँव म मँजूरी कर के मनखे लोग लइका के जतन करँय। चारों मुड़ा ले गाँव बर कोनो पक्का रस्ता नइ रहिस। सड़क अउ बिजली का होथे तउन ल हमन नइ जानत रेहेंन। स्कूल म भर्ती होयेंव तउन साल एक झन नवा गुरुजी आइस। जेकर नाँव चँद्रिका प्रसाद चँद्राकर रहिन। गाँव वाले मन उन ल बहुत दिन ले ओला नवा गुरुजी काहत रहिन। उन मन पढ़ाय बर उत्ती मुड़ा के गाँव कौड़िया ले रेंगत आत रहिन। आठ दस ठन खेत ल पार करत गाँव के मेड़ों म आवँय अउ उही आठ दस ठन खेत ल पार कर स्कूल पहुँचँय। ए स्कूल ह दू कुरिया अउ परछी के संग एक ठन आफिस के लइक छोटेकुन कुरिया के रहिस जउन ह गाँव के रक्सेल म रहिस। तीसरी कक्षा के आवत ले ईंटा पथरा वाला दू कमरा अउ बनिस। 

       जेन साल मँय स्कूल गेंव तेने साल हमरे गाँव के गुरुजी स्कूल के प्रधानपाठक होइन। ओमन संजोग ले हमरे सगा (जात के)रहिन अउ मँय उँकर परोसी घलव। उँकर नाँव चोवाराम जायसवाल रहिस। 

         दूनो कुरिया म दूदी कक्षा बइठार के परछी म पाँचवी कक्षा ल बइठार के दूनो गुरुजी मन चेत लगा के पढ़ाँय। पहली दूसरी अउ तीसरी चौथी ल सँघरा बइठाँय। एक कक्षा ल काम दे के दूसर कक्षा म जावँय। गिनती पहाड़ा अउ बारह खड़ी ल जोर जोर से पढ़न। लड़का मन एक आखर पढ़न त लड़की मन दूसर आखर ल पढ़ँय। ईमला अउ गिनती पहाड़ा के नकल जरूरी राहय। इही तरा ले सबो विषय ल पढ़त गेन। लइका रखवार नइ रहे ले छोटे भाई बहिनी ल स्कूल लेके जावन। कभू कभू मना घलव करय। पास फेल सुनाय के दिन अच्छा बात ए राहय कि जब कोनो फेल हो जावँय त उन ल बड़े कक्षा पढ़ही काहँय। जइसे कोनो दूसरी फेल होगे त ओला बड़े दूसरी पढ़बे काहँय। अब तो फेल होय के बात नइ रहिगे।

         स्कूल जाय बर सबो मुड़ा के लइका तरिया पार म रेंगत जावँन। फेर स्कूल तिर दइहान रहिस , जिहाँ गाय गरवा मन ठोंकाय राहय अउ बरसात भर भारी चिखला मातय। ओला पार कर जावन। पानी गिरत म झोला म रखाय चुमड़ी टू इन वन काम आवय। छाता नइ रहे ले चुमड़ी ल बसदेवा मन के पहनावा सहीं मोड़ के ओढ़ लन। अउ स्कूल म बइठे बर बिछौना बना लेवँन। तब स्कूल म बरोबर टाटपट्टी नइ राहत रहिन। कोनो कोनो अपन घर के कमपापड़ ल ओढ़के स्कूल जावँय। त कोनो बरसात के बहाना कर छुट्टी मनावँय। चौथी पाँचवी पढ़इया लइका मन रोपा लगई म स्कूल के बेरा ले बिहनिया अउ  छुट्टी के पाछू संँझा रोपा लगा के पइसा कमावँय। बिस्कुट पीपरमेंट अउ गुड़ फल्ली खाय बर बेवस्था घलव हो जय। अइसने धान लुवई म सीला बीने बर जावन अउ मुर्रा खावन। इही लालच म कई कई दिन ले स्कूल नागा करन। तब पढ़ई के मरम ल नइ जानत रेहेंन। 

        खाना के छुट्टी होय चाहे लघुशंका के दइहान के गस्ती अउ पीकरी तरी छुट्टी मिलतेच अट्टक, बाँटी अउ गिल्ली के डाँड़ खिंचा जय। दाम नइ दे सकँय तेन ल चिरकावन।    झोला म स्लेट पट्टी अउ पेंसिल (छूही के) संग दू ठन किताब अउ कापी राहय। गुरुजी कक्षा म नइ राहय तहान स्लेट ल तिरछा टेंका के पेंसिल जीत घलव खेलन। हार जवन त रेंधई करत गुरुजी मेर शिकायत कर दन कि मोर पेंसिल ल  फलाना ह चोरा लिस। अउ जीतइया के नाँवले देवन।

          दूनो गुरुजी जइसने पढ़ावँय वइसने मारँय। जायसवाल गुरुजी कनिहा तिर ल धर के उठावय अउ छत म मुड़ ल टकरावय। नइ ते रूल म जोर से मारय। मार के डर म जेन लइका  मन चेत लगा के पढ़िन तउन मन बने बने रोजगार पागे हवँय। 

      नवा गुरुजी पेड़ पौधा के बड़ शौकीन रहिन। रकम रकम के फूल लावय अउ लगवावय। आठ दस ठन नीलगिरी अउ गुलमोहर के पेड़ तियार होगे रहिस। क्यारी बनवा के धनिया मेथी अउ फूल लगवावय अउ तीसरी कक्षा ले पाँचवी कक्षा तक ल पानी डारे बर पारी बाँध दे रहिन। देवारी अउ गरमी छुट्टी म घलव पारी बनाय रहिन।


पोखन लाल जायसवाल

पलारी (पठारीडीह)

राखही राम त लेगही कोन , लेगही राम त राखही कोन -हरिशंकर गजानंद देवांगन

 राखही राम त लेगही कोन , लेगही राम त राखही कोन -हरिशंकर गजानंद देवांगन


               एक गांव म दू झिन भाई परिवार समेत एके संग रहय । दुनों के बीच राम अऊ भरत जइसे परेम रहय । काम बूता जरूर अलग अलग करय फेर एक दूसर ला अगोरे बिगन , न बिहिनिया के बासी खाये , न मंझनिया के पेज , न सनझाती के बोरे , न रात के भात ...... । कहाँचो बाहिर जाना होतिस त एके संघरा ...... । राम रमायन नाटक लिल्ला बर बिहाव तको म एके संघरा दिख जाय । एक दिन खेत म काम करत उदुपले छोटे भाई के छाती म पीरा उचिस । अपन दुकान बंद करके बड़े भाई के आवत ले छोटे भाई नइ अगोरिस । दुनों के जनम जनम के संग साथ छुटगे । घर म रोवा राही के ठिक्काना निही ...... । गांव भर सोक मातगे । बड़े भाई न रो सकय , न बोल सकय । 

               दसकरम निपटगे फेर घर के माहोल ले सोक जाबे नइ करिस । कन्हो सपना म नइ सोंचे रिहीन के जवानी म छोटे भाई ला भगवान लेग जही ...... । छोटे भाई के लोग लइका ला देखय तहन , बड़े भाई हा डेंहेक डेहेंक के रोवय । न पेट भर खाये न नींद भर सुतय । धंधा घला चौपट होय लगिस । घर म अव्यवस्था बगरे लगिस । मई लोगिन मनला फिकर हमागे । अइसे तइसे करत तीन मस्सी के हुम डारे के समे आगे । तीन मस्सी हुम म प्रसाद खाये बर , बड़की हा एक झिन महराज ला निमंत्रण दिस । घर के गमगीन माहोल देख के महराज रात रुकगे । घर के सबो झिन अंगना म ला बइठार के महराज हा शिक्षा दे बर लगिस । बड़े भाई के आकुल बियाकुल हिरदे हा , जवान भाई के मृत्यु के परम सत्य ला स्वीकार नइ कर पावत रिहीस । ओकर कहना रिहीस के , मेहा भाई ला बचाये के कोई उदिम नइ कर सकेंव । मोर भाई जाये के लइक नइ रिहीस । न देंहे से कमजोर रिहीस ..... न इमारी बिमारी रिहीस ....... न बुढ़हापा आये रिहीस । 

               महराज हा पूछिस – सही टेम म पहुंच जतेस त अपन भाई ला बचा डरतेस गा ... ? बड़े भाई किथे – जरूर ..... । डाक्टर तिर लेगतेंव ...... महंगा ले महंगा उपचार करवातेंव ...... कइसे नइ बांचतिस मोर भाई हा ? महराज किथे – जेकर जतका दिन के अन्न जल लिखाहे ... तेकर ले उपरहा एक मिनट जिये ला नइ मिलय ओला । जतका सांस ततका आस । भगवान के नियम ला कन्हो काट नइ सकय । मृत्यु अकाट्य सत्य हे । 

               ओकर संखा दूर करे बर महराज हा एक ठिन कहिनी सुनाये लगिस - एक बेर के बात आय । भगवान बिष्णु हा गरूड म बइठके अगास मार्ग़ ले भगवान शिव से मिलके स्वर्ग वापिस जावत रिहीस । तभे गरूड के नजर हा पहाड़ म छटपटावत एक ठिन नानुक चिरई उपर पर गिस । गरूड पूछथे – भगवान ! ये चिरई काबर छटपटावत हे । पहाड़ उपर न अन्न के कमी हे न पानी के । बिमार हाबे का ..... ? भगवान किथे – हव । येहा बहुत बिमार हे । ओकर जोड़ी छुटे के समे बहुत नजदीक हे गरूड ..... । तेकर सेती तहल बितल करत हे । गरूड किथे – जोड़ी छूटे ले बचाये नइ जा सकय का भगवान ? भगवान किथे – बिधि के बिधान के आगू सब नतमस्तक हे गरूड । गरूड मन म सोंचिस के मय बचाहूं । काल के गति से जादा गरूड के गति रिहीस । ओहा कुछ नइ किहीस । अपन गति ला अऊ बढ़हा दिस । भगवान ला छोड़िस अऊ थोकिन आवत हंव कहिके फुर्र ले उड़ियागे । 

               बिमार चिरई के आखिरी सांस चलत रहय । गरूड़ हा बिमार चिरई अऊ ओकर जोड़ी ला धरके बहुत दूर एक ठिन पहाड़ के खोलखा म राख दिस । जिंहा तक काकरो पहुंच सकना संभव नइ रिहीस । वापिस भगवान तिर आगे । भगवान पूछिस तब गरूड़ अपन आये जाये के बारे म कुछ नइ बतइस । भगवान सब देखत रहय । ओहा किथे – तैंहा जोड़ी ला बचा नइ सके गरूड । गरूड ला बिस्वास नइ होइस । ओहा सहीच म जाके देखिस । बिमार चिरई ला जियत देख वापिस होगे अऊ भगवान ला किथे – मोर गति के आगू काल काहे भगवान । फेर अइसे जगा म मेंहा चिरई ला लुका के आये रेहेंव के उहां तक काल के पहुंचना समभव निये । बिमार चिरई हा न केवल जियत हे बलकी एकदमेच स्वस्थ होगे हे । मोला देख के ओकर आंसू हा कृतज्ञता जाहिर करत बाहिर निकल अइस । भगवान किथे – बने देखे हस गरूड ? गरूड किथे – हव बने देखे हंव भगवान । भगवान किथे – एक बेर अऊ देख के आ । चिरई हा खोलखा म काकर दाह संस्कार के तियारी करत हे ?

                गरूड फेर गिस । उहां बिमार चिरई हा खोरावत खोरावत लकड़ी छेना सकेल के अपन जोड़ी के दाह संस्कार के तियारी करत रहय । गरूड ओला पूछिस – काकर अंतिम संस्कार के तियारी करत हस जी , कोन मरगे तेमा ? बिमार चिरई किथे – मोर जोड़ी छुटगे गरूड जी ......  गरूड ला पोटार के दंड पुकार के रोय लगिस । गरूड वापिस आगे अऊ किथे – बिमार चिरई ला बंचा डरेंव भगवान , तैं कइसे किथस । भगवान किथे – बिमार चिरई के काल थोरेन आय रिहीस गरूड ? जेला बचाना हे तेला कहां बचा सके ? मेहा तोला उंकर जोड़ी छुटही केहे रेहेंव । बिमार चिरई मरही थोरेन केहे रेहेंव । स्वस्थ चिरई के मौत पहाड़ी के खोलखा म लिखाये रिहीस । ओहा अपन से चलके अतका धूर अऊ अतेक जलदी जा नइ सकत रिहीस ......। तैं काल के माध्यम बनगे । होनी ला कन्हो टाल नइ सकय । गरूड पूछथे – खोलखा म काल नइ पहुंच सकय भगवान । फेर अइसे कइसे होगे ? भगवान किथे – खोलखा म काल पहिली ले अगोरत रिहीस हे गरूड । सब बिधि के बिधान आय जी । जेला जाना हे ते कइसनो जतन कर ....... जाबेच करही । तभे तो स्वस्थ चिरई मरगे अऊ बिमार हा जियत हे ...।   

               भगवान के बात गरूड़ समझगे । चाहे कतको प्रयास कर ....... बिधि के बिधान  टारे नइ टरय । गरूड जान डरिस के अबक तबक मरइया जीव हा , राम के बिधान के अनुसार बांच जथे अऊ एकदमेच स्वस्थ जीव हा राम के बिधान म , राम म सामिल हो जथे । महराज के बात बड़े भाई समझगे । घर के बेवस्था हा कुछ दिन म पटरी म लहुंटगे । अभू घला जे नइ जाने ...... नइ समझे तेहा ...... मरइया के सोक म बुड़े रहिथे अऊ जे बिधि के बिधान ला स्वीकार कर लेथे तेहा , सोकमुक्त रहिथे अऊ इही म संतोस कर लेथे - राखही राम त लेगही कोन अऊ लेगही राम त राखही कोन ..... ।  

  

                                          हरिशंकर गजानंद देवांगन , छुरा .

मिटत न हिय को सूल"* - *लक्ष्मण मस्तुरिया*

 *"मिटत न हिय को सूल"* - *लक्ष्मण मस्तुरिया*


संसार भर मे बुनियादी सुरुआती पढ़ाई पहली पांत (कक्षा) ले सुरु होथे। पहली कक्षा के पढ़ाई अपन माइभासा ले पढ़ाये के हमर देस म नियम हे। अपन माइभासा म प्राथमिक शिक्षा पाए के हर लइका-बाला मन के मूल अधिकार हे। जेमन ल अपन माइभासा म पढ़े-लिखे के अवसर नइ मिलै, वो मन के अकल-बुध प्रतिभा ज्ञान कला कमजोर होथे। अपन जनम भूमि म, अपन माइभासा म शिक्षा पाए के हक ले वंचित करना, भारी अपराध माने जाथे।


छत्तीसगढ़ नवा राज के पहिचान छत्तीसगढ़ी भासा ले हे। भासा के बिना मनखे के पहिचान नइ बनै। भासा संग संस्कृति जुड़े रहिथे। संस्कार, बेवहार, करम, कमाई नीत-नियाय, दया-मया संग ज्ञान-गौरव अपन भासा म पढ़े-लिखे बिना हिरदे म नइ संचरे। आन के भासा म जानकारी के डबरा ल भरे जा सकथे फेर आत्मज्ञान के ओगरा के कुँआ अपन माइभासा ले भरे जाथे। सकेले हर सुखा जाथे, स्त्रोत (ओगरे) हर मनखे मन ल सरस बनाथे। छत्तीसगढ़ राज म छत्तीसगढ़ी मनखे संग भारी दगाबाजी होवत हे। मूल निवासी ऊपर बाहरी चढ़े जात हे। किसान मजदूर भटकत हें, उजोगी बयपारी बढ़त जात हें। वोसने छत्तीसगढ़ी भासा ल दबाए जात हे। छत्तीसगढ़ी ल राजभासा बनाके घलो दू नम्बरी दर्जा म खड़े करत हें। छत्तीसगढ़ राज के पहिली राजभासा हिन्दी अउ दूसर छत्तीसगढ़ी कहत हें। छत्तीसगढ़ी के विकास बर अकादमी नइ हे। पढ़ाई-लिखाई बर पहली कक्षा ले गोल-माल चलत हे। 


जब छत्तीसगढ़ी ल पहली कक्षा ले बुनियादी ढंग ले नइ पढ़ाये जाही, तब ऊपर कक्षा ले एक-दू पाठ जोड़ के पढ़ाये के ढोंग करे म फायदा का मिलही? देस के कानून ल छत्तीसगढ़ के सरकार नइ मानत हे। वो छत्तीसगढ़ ले छत्तीसगढ़ी ल मेटाय बर छल-परपंच करत हे। छत्तीसगढ़ी भासा संग दोगलाई करके इहाँ के मनखे के संग साहित, संस्कृति, प्रकृति अउ पुरखा मन के मान घटाना चाहत हे। 


हमर छत्तीसगढ़ राज्य निर्माता कवि हृदय माननीय अटल बिहारी बाजपेयी के उदारता अउ दूरदृष्टि ले हमर छत्तीसगढ़ के सरकार मन कुछू सीखत काबर नइ हे? उन आदिवासी, हरिजन, पिछड़े मन के उद्धार करे बर छत्तीसगढ़ राज बना दिन अउ ए मन ल राज भोगे के अवसर मिलगे। आज छत्तीसगढ़ के ए सरकार छत्तीसगढ़ी के जीभ काटे के उपाय करत हे। छत्तीसगढ़ के लइका-बाला मन के मूल अधिकार के हतया करत हे। छत्तीसगढ़िया मन के मातृभासा ल बदल के हिन्दी ल छत्तीसगढ़ में के उद्गार माइभासा छत्तीसगढ़ी संग हमर छत्तीसगढ़ के सरकार छल-परपंच काबर करत हे? का वोमन ल अतको जानकारी नइ हे के -


निज भासा उन्नति अहै, सब उन्नति के मूल।

बिन निज भासा ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।


*लेखक - श्री लक्ष्मण मस्तुरिया*


*(वैभव प्रकाशन, रायपुर द्वारा सन् 2015 म प्रकाशित लक्ष्मण मस्तुरिया जी के पुस्तक "छत्तीसगढ़ी गुनान गोठ" ले साभार)*

मोर प्राथमिक शाला के सुरता -ओमप्रकाश साहू अंकुर


 

मोर प्राथमिक शाला के सुरता -ओमप्रकाश साहू अंकुर



  स्कूली जीवन ह जिनगी के अनमोल समय होथे. ये समय म बने चेत लगाके के पढ़ई -लिखई कर लेबे त भविष्य ह उज्जर होथे. प्राथमिक स्कूल के पढ़ई ह नेंव हरे. जइसे घर बनाय बर मजबूत नेंव धरे ल पड़थे वइसने अपन जिनगी रुपी घर ल सुग्घर बनाय बर बने धियान देके के पढ़े लिखे ल लगथे. अउ पढ़इया लइका मन के पोठ नेंव बनाय के काम प्राइमरी स्कूल के गुरुजी अउ बहिन जी मन ह करथे. लइका मन माटी के समान होथे अउ गुरुजी मन ह कुम्हार कस मिहनत करके उंकर जिनगी ल बने गढ़थे. जइसे कुम्हार ह कोनो बर्तन, मूर्ति ल सुग्घर अकार देय बर माटी ल नँगत मताथे ,वोमे ले गोटी ल निकालथे ।फेर गजब नरम बनाके, ठोंक -पीट के अउ सँगे सँग अपन हाथ म सहला के बढ़िया रुप गढ़थे. वइसने पहिली के गुरुजी मन के काम राहय. लइका ल बने बनाय बर मारय- पीटय अउ प्रेम घलो करय. 

    मोर जनम भूमि सुरगी हरे. राजनांदगॉव ले अर्जन्दा रोड म 13 किलोमीटर म बसे हवय. सुरगी ह बड़का गाँव हरे. हमर गाँव म अंग्रेज जमाना ले प्राथमिक स्कूल हे. मोर बबा श्रद्धेय घुनारी राम साहू जी ह  1 मई 1922 म पहली कक्षा  म भर्ती होय रिहीस हे . मोर बबा के जनम 1914 म होय रिहिस हे. मोर बबा ह रामायन के टीका करे बर प्रसिद्ध रिहीस हे. हमर गाँव के प्राथमिक शाला ह बस स्टेन्ड अउ शनिचर बाजार चौक के बीच म हे. जब मेहा सत्र 1980-81 म 1 ली म भर्ती होयेंव त स्कूल ह खपरैल वाला रिहिस. मोर बाबू जी श्रद्धेय मेघू राम साहू जी ह मोला भर्ती करे बर ले गीस. बहिन जी श्रीमती फूल बाई देवदास ह जनम तिथि पूछिस त बाबू जी ह नइ बता सकीस अउ बहिन जी ह मोर जनम तिथि लिखीस - 03-01-1973 . मोर बबा ह भले चौथी पास रिहीस हे फेर मोर बाबू जी ल कोनो कारन ले नइ पढ़ा पा रीहीस. 

  ये प्रकार ले मेहा पहिली कक्षा म भर्ती होगेंव. पढ़ई लिखई म मोर नेंव बहिन जी फूल बाई देवदास ह बनाइस. हमर घर ह हाईस्कूल डहर हवय. हमरे पारा म देवदास बहिन जी ह घलो किराया के घर म रहय. हमर बहिन जी ह पढ़ई लिखई म गजब मिहनत करय. देवदास बहिन जी ह हमर गाँव के तीन पीढ़ी ल पढ़ाय हवय. ये हमर सौभाग्य हे कि बहिन जी ह नौकरी पूरा होय के बाद सुरगी म बसगे अउ भगवान के कृपा ले अभी जीवित हे. मँय मोर बहिन जी ल घेरी बेरी प्रणाम करत हवँ. वर्ष 2019 म हमर गाँव म पोला महोत्सव म बहिन जी के सम्मान करे गीस. त वो मंच म बहिन जी के सँग महू ल बइठे के सौभाग्य मिलीस. 

  हमर समय के पढ़ई गजब कड़ई रहय. गुरुजी /बहिन जी मन कमजोरहा लइका मन ल अब्बड़ मारय. कई घांव होशियार बच्चा मन जब कोनो प्रश्न के उत्तर नइ दे पायेंव त वहू मन मार ल झेलय. वो समय सजा के रुप म हाथ से मारना, छड़ी म मारना, कनबुच्ची धरई, उठ-बैठक ,घुंटना टेकई शामिल रहय. 

जहां तक मोर पढ़ई के बात हे त मोर गिनती हुशियार बच्चा म होय. हमर समय स्कूल के प्रधान पाठक श्री देवांगन गुरुजी (अर्जुन्दा वाले) रिहीस. मोला चौथी पढ़ईस ते बहिन जी के नाँव श्रीमती ओछला यादव (राजनांदगॉव )रिहीस. यादव बहिन जी ह घलो हमर पड़ोसी हेमनाथ साहू जी के घर किराया म रहय. बहिन जी मन जब मारय त उंकर चुड़ी ह फूट जाय तहां ले फेर गुस्सा म दू चार घांव उपराहा जमा देय. मोला 5 वीं  म देवांगन गुरुजी (माहुद) ह पढ़ईस. शरीर से गठीला, रौबदार अवाज देवांगन गुरुजी ह लइका मन ल पढ़ाय लिखाय म अब्बड़ मिहनत करय. गजब अनुशासन प्रिय रिहीस हे. देवांगन गुरुजी ह पांचवीं के पाछू चार -पांच साल के 

बोर्ड परीक्षा के प्रश्न ल रखे रहय अउ जमगरहा समझाय अउ हमन ल गृह कार्य देय. गणित समझाय बर अब्बड़ नाँव चलय. गणित समझाय के बाद लइका मन ल पूछे कि समझेंव कि नइ. नइ समझ अइस कहितीस त अउ समझाय. समझ म आगे कहय अउ पूछे त कोनो लइका ह नइ बता पाय त नँगत ढढाय. 

   पांचवीं बोर्ड परीक्षा होय त महू ह नँगत मिहनत करे रेहेंव. फेर 31 अक्टूबर 1984 के दिन प्रधानमंत्री मंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी जी के हत्या कर दे गीस. तहाँ ले वो समय परीक्षा नइ होइस 

अउ मेहा जनरल प्रमोशन के रुप म आगू कक्षा छठवीं म पहुंच गेंव. 

परीक्षा नइ होइस त मोला अउ हुशियार बच्चा मन ल अब्बड़ अखरे रिहीस. 

    ननपन म छुटपुट हरकत घलो कर डरवं. बचपना होथेच वइसने. 

एक बार स्कूल के खिड़की ल धर के झूलत रेहेंव त वो खिड़की ह जेहा पहिली ले कमजोरह रिहीस वोहा भड़ाक ले टूटगे. सब लइका मन चिल्लाय लगिस कि ओमप्रकाश ह खिड़की ल तोड़ दीस.  फेर मेहा सकपका गेंव. लइका मन मोला धरके गुरुजी /बहिन जी मन जेकर बइठे रिहीस वोकर ले गीस. फेर मोला दू -चार रहपट गिनीस अउ समझइस कि अइसन अब मत करबे. 

    पढ़ई लिखई के सँगे सँग खेलकूद के समय दौड़, खो -खो म भाग लेवन. प्राथमिक शाला म पढ़ई के समय के सँगी- सँगवारी मन के याद करथवं त दू झन सहींनाँव  ओमप्रकाश निषाद, ओमप्रकाश साहू, चुम्मन साहू(भिलाई),ललित जैन, माखन साहू, घना राम साहू, स्व. ओंकार दास साहू, अनुरागिनी शर्मा, एकता जैन, स्व. लक्ष्मी जैन, माधुरी साहू के नाँव सुरता   आथे.

हमर घर म बड़े दीदी अउ बड़े भइया श्री कुंज राम साहू जी ह मोला घर म बने पढाय -लिखाय. 

त अइसन ढंग ले मोर प्राथमिक शाला के पढ़ई होइस हे. आगू के अउ पढ़ई के चर्चा कभू अउ करहू. मोर प्राथमिक शाला के जम्मो बहिन जी /गुरु जी मन के सँगे सँग मोर दाई -बाबू अउ भइया  दीदी मन ल घेरी -बेरी प्रणाम करत हवँ .


            ओमप्रकाश साहू" अँकुर "

            सुरगी, राजनांदगॉव (छ. ग. )

मोर प्राथमिक शाला के सुरता-गीता साहू

मोर प्राथमिक शाला के सुरता-गीता साहू


 सुरता मोर प्राथमिक शाला के  जब जब करथौं , गांव अऊ शहर दूनो जगह के मोर प्राथमिक स्कूल आंखी -आंखी म झूलथे । राजा नंद ग्राम मोर शहर आये,घर ले दू कदम पे चौक ,अऊ चौक के वोप्पार मोर स्कूल ,बीच म बजार घलो भराय ,संग म आनी -बानी के दुकान घलो सजे रहे। चौक काय  ए ,तिगड्डा ए, इंहां ले बालोद ,गुंडरदेही अउ डोंगरगांव जाय के । अवइया जवइया के घर  ,घरे ले बस ल  रोकवावन ।बबा के इंहां घर बनई ,पढ़ई  लिखई से लेके सब्बो जिनीस बर सुविधा जनक रिहीस हवे । हमर दीदी भैया मन सब् इही घर में रहिके पढ़े रहिस, वइसे हमर घर ह मिनी धर्मशाला घलो कहलाय, काबर कि पढ़इया लइका बड़ झन हो जान।शुरुआती कक्षा ला हमन सब झन गांव म पढ़ेंन , पर परीक्षा के समय पढ़इया लइका मन बर खाना बनाय बर आय महतारी ज़िंहा रहे मोला ऊंहा के स्कूल म जाना रहे ,गांव म हे त गांव के स्कूल  म ,शहर म हे त शहर के स्कूल म। इही पाय के कक्षा पहली जरूर मय ह शहर म पढ़ेव , फेर आधा दूसरी ले पांचवी तक गांव म पढ़अई होइस । शहर के ये प्राथमिक स्कूल के सुरता बस अतकी हे कि पक्का बडे़ जन स्कूल रहिस हे बरामदा मैदान से बनेच ऊंचहा रिहीस हे , अऊ चारो डहर मेंहदी ले घेराय रहिस हे। पर अपन गांव के स्कूल जे इंहा ले बीस किलो मीटर दूर हावे , के सबो सुरता हवे काबर की हमन छुट्टी में गांव जान त स्कूल घुमे बर जान ,अउ कोन्हों कक्षा ल पढ़ाय ल कहे त पढ़ावन घलो  ,बड़े होत तक के स्कूल मा गे आय हवन । ओकर ले बड़े बात ए आय कि लइका कोन्हो भी हो अपन प्राइमरी स्कूल के गुरुजी बहनजी ला कभू नहीं भुलाए ,काबर की अनगढ़ माटी ला गढ़े के  श्रेय इही गुरुजी -बहनजी मन ला मिलथे । इही पाय के आज भी मोला अपन प्राथमिक स्कूल के गुरुजी- बहन जी के सुरता नाम -गाम सहित हवे । गुरुजी के नाम के नांव पर हमन अतकी जानथन कि वोकर सरनेम पवार रहीस , अऊ बहनजी के नाम राजेश्वरी रहीस । गुरुजी थोरकन गरम मिजाज के रहिस हे ,जेन होना तो होना,  नहीं त हाथ ला उल्टा करवा के रूल मा घलो मारे, वहू अंगरी मन के हड्डीच -हड्डीच म,बेसरम के कच्चा लौठी तक चिथा जाय ,उकर मरई म ।आज के महतारी -बाप असन तब के दाई -ददा मन लइका के पक्ष नइ लेवे , उल्टा कहे - बने ठठा के पढ़ाहू -लिखाहू, कुछू बदमासी करही त बताहू , बिचारा लइका  मन दूनो डहर ले मार खाय ,तेकर सती सबो लइका पहिली पढई- लिखई ल करे ,तेकर पाछू खेले कूदे ।  फेर गुरुजी के पढ़ाई समझाई में कौन्हो कमी नई रहिस् चाहे वह मन गणित हो, इमला हो ,रोज के पट्टी म नकल और पहाड़ा लिखई हो, गणित के सवाल रोज घर म बनाए बर देवे, वोला बना के ही लेगन ,चाहे फेर वो अकल से हो कि नकल से हो ,वो नकल बर भी बड़ अकन अकल लगाय ल पडे । गुरुजी के उलट उंकर धर्मपत्नी राजेश्वरी बहनजी ह कनिहा ल थोरकुन झुका के कदमताल संग हाथ झूला झूला के आजा आ राजा ,मामा ला बाजा ..ला गा -गा के बड़ मया से  पढ़ावे । दूनो झन के बड़ मया दुलार पाय हव ।

 हमर बस्ता म एक दू ठन कापी -किताब अऊ कलम -पट्टी के संग म बाटी-भौंरा ,गोटा ,बिलस,पासा अउ रंग बिरंगा कांच के चूड़ी के नान नान टुकड़ा घलो रहे ,सब खेल ,खेले के काम आये। तइहा के सब खेल, पइसा लगे न कौड़ी ते पाय के  सबो खेल ल हमन खेले हवन।      नागपंचमी के दिन पट्टी म  सुघ्घर नाग बना के पूजा करन त  पट्टी ल साफ करे बर ,थूक म घलो पोंछे हवन।तख्ता ल करिया करे बर भेंगरा के पाना लान त सगोना के उलूहा पाना म होंठ ल घलो लाल करे हवन ।   

           हमर प्राथमिक स्कूल, पहिली के गुरुकुल बरोबर आए जिंहां पढ़ई -लिखई से लेके खेलई -कुदई अउ संग म चाय -पानी तो चाय -पानी  ,खेती -किसानी के गुर ल घलो हमर गुरुजी मन ह हांसत-गोठियावत सीखो डरे ।  नवां कोई घटना होय त वोला सौंहत देखावे, जइसे एक घांव एक ठन अजगर ह खेखर्री ल खा डार रहे ,पर खात बने न निगलत ,जइसे  स्थिति म छुइयां नरवा के खाल्हे अटियात पड़े रहिस । ये नरवा ह स्कूल ले दू किलो मीटर दूरिहा म हे तभो ले गुरुजी ल जइसने पता चलिस सबो पढ़इया लइका मन ल धर के  देखाय बर लेग गे , गुरुजी मन ह जानथे कि, अइसन ज़िनिस बार -बार देखे बर नई मिले ,फोटो के जमाना नइ रहिस तभो ले आज भी वो अटियात अजगर ह आंखी म झूलथे ।

         हमर स्कूल के जमीन माटी के रहिस ते पाय के वोला हर शनिवार के गोबर से लिपे ल पड़े चौथी वाले मन गोबर लाय अऊ पांचवी वाले मन लीपन ,अइसन बैवस्था बने रिहीस हे स्कूल के साफ सफाई बर ,जेकर हमुमन पालन करे हन ।आज तो नियम कायदा मीडिया अऊ स्टेट्स के अतिक जोर हे कि बाल श्रम उल्लंघन या मानवाधिकार के उल्लंघन म स्कूल अऊ गुरुजी मन उपर कार्यवाही हो जाहि ,अऊ ऐकर ले बड़े बात ए आय कि आज कल के लइकामन भी एक कनिक कुछू नई करना चाहे ,फेर वो जमाना में किसन अउ सुदामा सबो अइसने पढ़े हन।

         अइसने छेरछेरा तिहार के घलो ज़ब्बर सुरता हे ,स्कूल बर पांचवी कक्षा के लइकामन  ल छेरछेरा मांगना रहे डंडा अऊ सुवा नाच के । गांव घर म सरमावन त बाजू के गाँव कन्याडबरी ले लावन ,आज सोचथो संस्कृति के हमर गुरू जी मन कतिक बड़े संवाहक रहिस हे । धन भाग हमर कि हमन ल अइसन  गुरुजी बहनजी के आशीष मिलीस  ।।

        कक्षा पाँचवी म पाँच झन लड़का अऊ छ झन लड़की रेहेन सबो झन के नाम आज भी याद हे ,एक दू झन ल छोड़ बाकी सबो झन सन गोठ बात हो जथे, सब कोई अपन अपन घर परिवार म राजी खुशी हवे ,अऊ हां सब के नाती पंथी घलो आ गे हे ,दू झन ल छोड़ के ।ये दूनो मन पढ़त गिस अउ आघू डहर बढ़त  गिस ,वोमे के एक झन मे हरो ।

✍️श्रीमती गीता साहू

         कोरबा छ.ग.

        30.06.2021

Thursday, 24 June 2021

चिट्ठी पाती

 चिट्ठी पाती


💐श्री गणेशाय नमः💐

                        शुभ जगहा-पलारी

                        तारीख २३/०६/२०२१

मयारुक संगवारी

       जय राम जी की🙏


           लिखना समाचार मालूम हो कि मँय इहाँ भगवान के किरपा ले आनंद कुशल हँव अउ घर म सबझन बने बने हें। हाँसी-खुशी ले मजा मजा म हवय। आशा करत हँव कि उहाँ आपो मन उहाँ आनंद कुशल ले होहू। 

         आगू समाचार मालूम होवय कि हमर कोति नवटप्पा के बीते पाछू सरलग पानी गिरे ले आगी बरसावत गरमी के नाँव बुतागे हवय। कूलर आराम फरमावत हे। पँखा मच्छर भगाय के बूता जादा करत हे। 

       बादर महराज के पहुनई म खेती खार गजमज गजमज करे धर लिस। नँगरिहा मन - 'मोर खेती खार रुमझुम मन भँवरा नाचे झूम झूम.....' गावत झूमरे लगत हे। त कतको मन खिसा म धरे मोबाइल ले गीत के आनंद लेवत हें।

           ए अलगे बात आय कि अब आगू जइसे किसानी नइ होवत हे। खेती किसानी बइला नाँगर ले कमतिया गेहे। सबो टेक्टर ले बूता कराना पसंद करत हें। चार दिन के बूता दूए दिन म निपट जात हवै। हरर हरर के कमई के दिन बीतगे। विज्ञान के मिले बरदान ले सबो ल आराम हे। असो एक ठन फरक देखे ल मिलत हवय। पहिली कस सँझा के बेरा गुड़ी चउँक म बइठइया मन के कमी होगे हे। बइरी कोरोना के आय ले सबो घरखुसरा बनगे हे। कखरो तिर मन भर हाँस के गोठियाय अउ दुख पीरा बाँटे बर समे नइ रहिगे हे। सबो डर्रात हे। डर्राना जरूरी घलव हे। आखिर जिनगी के सवाल जउन हे। गाँव भर उमहियाके धान बो डरे हे। सोलाआना बाउँत होगे हवय। दस बारा दिन ले सूरूज देवता के दर्शन नइ होत रहिस हे।  तरिया के मन दू मन अगरा गे हे। बोरिंग अउ कुआँ ल नवा जिनगी मिलगे हे। पेड़ पउधा मन  उल्हवा पाना ले सजगे हे। धरती दाई ह हरियर सँवागा म सबके मन ल हरसावत हे। बम्बरी ह सोनहा फूल ल धरे बरसा के स्वागत म खड़े हे, त कोयली ह अपन मीठ बोली ले करिया करिया बादर ल रिझावत हे। ए सब ल देख के मोर का सबो के हिरदे गदगद हो जात हे। कालीच के बात आय लक्ष्य ह अपन महतारी ले बरसत पानी म काग़ज के डोंगा बना गली म बोहावत पानी म के चलाहूँ कहिके जिद करत रहिस। ओकर जिद ले हमर लइकापन के सुरता आगे। ...तब गाँव मन म गली कँक्रीटीकरण नइ होय रहिस। माड़ी भर चिखला म रेंगन। तरिया अउ खेत के मेड़ पार आवत जावत कतको बेर बिछल के उतान गिर जवत रहेन। संगी साथी ल गिरत देख कभू हँसी मजाक करन तव कभू दुखी घलव हो जवत रहेन। एके छाता ल दू तीन झन सँगवारी ओढ़के रेंगन। प्राइमरी पढ़त राहन त चूमड़ी ल मोड़के कमपापड़(झिल्ली) के ओढ़नी कस बना ओढ़के स्कूल जान। कतिक मजा आत रहिस। चउमास के चार महीना गली म चप्पल पहिनबे नइ करत रहेंन। पानी थोरकिन थिरातिस तहाँ चिखला माटी खेलन। नाली बनावन अउ डोंगा चलावन। अब कँक्रीटीकरण के होय ले चिखला माटी खेले के मउका नइ मिलय।

        अभी लगातार तीन दिन होगे, संझौती बेरा बादर ह अपन किरपा करत हे। बाउँत पंदरही होय ले धान के नकसानी ल बचाय खातिर गाँव म गरवा मन के रोका छेंका बर बइठका सकेलाय रहिस अउ रखवार के बेवस्था घलव होगिस। 

       पड़ोसी गाँव कौड़िया म नवयुवक संगी मन डाहर ले पड़ती भुइँया म पौधारोपण के उदिम होवत हे। जउन पर्यावरण के सुरक्षा बर सराहे के लइक हे। एकर चर्चा जिला भर म जोर शोर ले होवत हे। ए एक अभियान के रूप ले ले हे। 

         कोरोना काल म सबके बया भुलागे हवय। बेवसाय मन पटरी म लहुटे नइ हे। अइसन म रायपुर शहर म परिवार सहित रहना बड़ मुश्किल के बात आय। अभियो सावचेत ले रहे के जरूरत हवय।अउ हाँ टीका खच्चित करके लगवा लेहू। कहूँ काम धंधा बरोबर नइ चलत होही त गाँव आके खेती किसानी म चेत लगातेव। अउ पूरा परिवार एके जगा रहितेव अइसे मोर सुझाव हे। जादा अउ का लिखँव, आप खुद समझदार हव। 

      चिट्ठी पातेच खानी गाँव लहुटे के खुशखबरी देहू के आशा बाँधे हँव।

          तोर संगवारी

      पोखन लाल जायसवाल

पठारीडीह वाले

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भेजइया--

पोखन लाल जायसवाल

पलारी बलौदाबाजार छग. ४९३२२८

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         प्रति,

                भुवन सिंह कमल

 मोवा मार्केट चउँक रायपुर छग. ४९२००१