Friday, 3 December 2021

हास्य ब्यंग------- ==भाव बढिस बंगाला के===

 हास्य ब्यंग-------


==भाव बढिस बंगाला के===


       भोरहा मा झन रहिबे बाबू जी, समय आथे तब घुरवा के दिन घलो बहुरथे। काली तक मोला कोनो सोजबाय पूछत नइ रिहिस । आज मोर नाॅव सुनके खीसा मे जड़कला समावत हे।खीसा मा हाथ ड़ारत हाथ काॅपत हे। काबर  कि आज मॅय हर कपार ऊंचा करके रेंगत हवॅ। भले मोर ठाठ बाठ कतको दिन बर रहय । फेर मोला मौका मिले हे तब मॅय तो अॅटियाके लेंगबे करहूं। मोला लगथे कइयो जमाना के बाद मोर अवकात ला जनता जाने हे। ये बात ला मॅय हर निहीं रे भाई वो बजार के बंगाला कहत हवे । वोकर कारन अतके हे कि अचानक महिना दिन ले बंगाला के भाव सब साग भाजी ले जादा होगै।

         ओकर ठसन ला देख के चेंच भाजी जेकर तारी बंगाला सॅग कभू नइ पटिस, ताना मारत काहत रहय-------मेछराले    दुवे चार दिन इतराले रे बंगाला। पाच साल वाले होते ते का नइ करते । आगू के दुकान ले गोंदली उर्फ पियाज कहत हे-------हम तोर हाल जानत हन बंगाला अकरस पानी के सपेड़ा मा परबे तब टरक मे जोर के लेगहीं अउ सड़क के बाजू मा ढकेल के जाहीं। हरहा नेता कस हाल तोर होही । हर साल तोर हाल देखत हन। समे आवन दे घर के रबे न घाट के। ये तो सरकार के नाइन्साफी के सेती हम बैपारी मन के काला बजारी जमाखोरी ले बोचक के सफेद बजार मा फटेहाल डालर के भाव बेचावत हन। बंगाला कथे------कभू काल मा मैहर आज उपर उठेंव त सबके आॅखी गड़त हे। आज मॅय रोज बजार अखबार अउ मनखे के जबान चढे हवॅ तब सब जलन मरत हव। जेन दिन मोर हाल सरहा भाजी के लाइक नइ रहय। दस रुपिया मे चार किलो जाथॅव तब मोर आॅसू पोछे बर कोनो नइ आवव। इंहा तक कि रायगढ डहर के मन तो बिन मोल के हे कहिके मोर उपर टेक्टर चढा के रउद देथे। तब मोर आतमा का कहत होही? हारे नेता के तिर मनखे तो का माछी नइ ओधे अइसे हाल घलो रथे। कतको उजबक मन चिरकुट नेता के भासन मंच मा सरहा के जगा मा टाटक ला फेंकथे। तभो मॅय अपन आप ला कोसत रथों । फेर आज मोर तकदीर ला देख तुंहरो मन ले उंचहा जगा पाये हवॅ। ताना मारे के मिले मउका ला कड़हा भाॅटा गॅवाना नइ चाहत रहय। वो कथे-------अतको ऊंचा का काम के जेमा आदमी उपर कोती देखबे नइ करे ।अगास मा कतको उड़ आबे आखिर धरतीच मे। 

         मुंह अइंठत गोंदली ला देखके बंगाला कथे--------अब भाव खाना छोड़ दे गोंदली ।जतका आदर सम्मान मनखे समाज मा तोर हे ओतके मोरो हे। फेर तॅय कहूं जमाखोरी मुनाफाखोर बैपारी के सपेड़ा परबे तब तोला जबरन ऊंचा करही। येकर ले साफ हे कि तोर खुद के औकात नइये। मोर अपन अलग पहिचान हे। मॅय चाहे दस रुपिया किलो जाॅव चाहे सौ रुपिया किलो। मोर पहिचान अउ स्वाभिमान ला तॅय नइ गिरा सकस। मोर उमर भले चरदिनिया हे फेर मॅय कोनो बनिया के गोदाम मा कैद नइ रहवॅ। हम चलत फिरत दुनियादारी के बजार ला देखत रथन।  वो तोर बाजू मा बइठे हे आलू मोला जादा घूर के झन देखे अउ वो ह मोर सॅग का बात करही जइसे बिना गठबंधन के सरकार नइ चलय ओइसने बिना गठबंधन के आलू के साॅस नइ चलय। हालाकि तोर व्यक्तित्व अटल बिहारी कस हे तभोले तॅय अकेला सरकार नइ चला सकस । तोर सॅग जब तक चना  गोभी  कुंदरू साथ नइ दिही  कुछ नइ कर सकस। हम बहुमत मा जीते या हारे हुए निर्दली कस हन। कच्चा पक्का कइसनो होवय सील लोड़हा मे रगड़ा के ही अपन शान बना के रखथन। हम छेल्ला रहने वाला हरन। वो गोदली कस राजनीतिक लफड़ा मा नइ रहन। ओकर नाॅव लेके संसद असन मा हल्ला होवत रथे। पियाज के जमाखोरी काला बजारी बंद करव कहिके। तोर ला तिहीं जान के झन ला रोवाबे काकर कुरसी गिराबे तेला । आज  मोर भाब बढे के खुशी मा मॅय नाॅचत हाॅसत हवॅ। तब दाॅत मत कटर ।


राजकुमार चौधरी "रौना"

टेड़ेसरा राजनादगाॅव🙏

विमर्श के विषय - छत्तीसगढ़ी भाषा : पाठ्यक्रम जरूरी / माध्यम जरूरी / के दुनों जरूरी🌹*

 *विमर्श के विषय - छत्तीसगढ़ी भाषा : पाठ्यक्रम जरूरी / माध्यम जरूरी / के दुनों जरूरी🌹*


भाषा चाहे कोई भी रहय भाषा के व्याकरण ह ओकर देह आय काव्य, रस, दोहा, छंद, अलंकार आदि ओकर आत्मा आय पाठ्यक्रम ह हर पाठ के विषय वस्तु ल दर्शाथे अउ ओला नामांकित करथे जईसे देह के अंग प्रतिअंग के नाव होथे ओकर अर्थ अउ महत्व होथे जेकर सारगर्भित अध्ययन करे म सुलभता होथे ओकरे सेतिर भाषा मा पाठ्यक्रम होना जरूरी हे. 

हमर भारतीय संविधान म हिंदी ल राजभाषा के दर्जा दय गे हे येकर सँग म इहु प्रावधान देहे गिस कि अंग्रेजी भाषा मे भी केंद्र सरकार अपन कामकाज कर सकत हे,

शुरू म संविधान लागू होइस तेन समय सन 1950 म ये समय सीमा ह 15 साल तक रहिस मतलब अंग्रेजी के प्रयोग सरकारी कामकाज बर सन 1965 तक होतिस लेकिन बाद म संविधान संशोधन के द्वारा ये अवधि ल अनिश्चित काल तक बढ़ा दिन जेकर गहरा प्रभाव *माध्यम* म पड़िस.

हमन जानथन कि आज के समय भाषा के माध्यम होना कतका जरूरी हे बढ़त युग म सब रफ़्तार से बढ़ना चाहत हे अधिकांश मनखे मन प्राथमिक शिक्षा से लेके पद तक म अँग्रेजी माध्यम  अउ आंग्लज्ञानी आंग्लभाषी खोजथे ताकि ओकर ओहदा बढ़य.

अउ इही अंग्रेजी सोच के कारण हमर महतारी भाषा छत्तीसगढ़ी ल बिसरा देथे अउ अब के भावी पीढ़ी के लइका मन तो छत्तीसगढ़ी गोठियाय म घलो हिचकिचाथे, कईझिन मन तो छत्तीसगढ़ी बोले नई जानन कहिथे अइसना मनखे मन ल *का बताव ज्ञान के तुतारी देखाव*  कहुक मन लागथे.

 साहित्य सृजन करे अउ अध्ययन करे ब पाठ्यक्रम अउ माध्यम दुनों ही बिक्कट जरूरी हे काबर कि साहित्य ह राज्य अउ राष्ट्र के आईना होथे जेमा हमन अपन असली छवि देख सकन. अउ अतका ताकत रहय ये आईना म जेमा छत्तीसगढ़ी बोली-भाखा ल  बिसराने वाले पीढ़ी मन अपन स्वरूप ल देख के पानी-पानी हो जावय.....✍🏻


*सुनीता कुर्रे*

*आँकडीह (मस्तूरी)*

*मो न- 8435928307*

विमर्श के विषय--छत्तीसगढ़ी भाषा:पाठ्यक्रम जरूरी/माध्यम जरूरी/के दुनों जरूरी*

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*विमर्श के विषय--छत्तीसगढ़ी भाषा:पाठ्यक्रम जरूरी/माध्यम जरूरी/के दुनों जरूरी*


छत्तीसगढ़ के जनभाखा, हमर महतारी भाखा छत्तीसगढ़ी ला अबड़ेच ना नुकुर अउ टाल-मटोल के पाछू बहुतेच संघर्ष करे के बाद कानूनी रूप ले 28 नवम्बर 2007 के 'छत्तीसगढ़ के राजभाषा ' के दर्जा तो मिलगे फेर बड़ दुख के बात हे के आज 14 साल के बाद तको येला राजभाषा बनाये के एको ठन उद्देश्य पूरा नइ होये हे। न तो एमा राजकाज होवत हे ,न तो एमा आन राज्य मा जइसन उँखर राजभाषा,मातृभाषा  मा पढ़ाई होथे तइसन पढ़ाई-लिखाई होवत हे।

   अब तो 29 जुलाई 2020 के 'नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति' के घोषणा घलो होगे हे जेमा साफ-साफ कहे गे हे के 5वीं तक के प्राथमिक शिक्षा बच्चा मन ला उँखर मातृभाषा मा अनिवार्य रूप ले दे जाना चाही। जरूरत अनुसार मातृभाषा मा शिक्षा ला 8वीं कक्षा तक बढ़ाये के बात तको करे गे हे।

      मातृभाषा मा शिक्षा काबर देना चाही तेकर संबंध मा गुन्निक शिक्षा शास्त्री,बाल मनोवैज्ञानिक अउ साहित्यकार मन कई ठन तर्क देथें।उँखर कहना हे के बच्चा अपन मातृभाषा मा कोनो चीज ला सबले अच्छा सोच-समझ अउ सीख सकथे। बचपना मा उदुक ले आन भाषा उन ला अबड़ेच कठिन लागथे--समझ नइ सकयँ--- आन भाषा हा भारी बोझहा बरोबर हो जथे। आन भाषा मा प्राथमिक शिक्षा देये मा नेव कमजोर हो जथे।

    त कुल मिलाके सार बात इही हे के हमर छत्तीसगढ़ राज्य मा लइका मन ला प्राथमिक शिक्षा छत्तीसगढ़ी भाषा मा दे जाना चाही। 

   शिक्षा दे बर पाठ्यक्रम मतलब का पढ़ाना हे अउ माध्यम अर्थात भाषा दूनों के जरूरत होथे। छत्तीसगढ़ राज्य मा ये दूनो चीज छत्तीसगढ़ी मा होना चाही। पाठ्यक्रम बनाये के जेन भी सिद्धांत हाबय वोकर अनुसार   छत्तीसगढ़ी साहित्यकार मन ले पाठ तइयार करवाना चाही जेन छत्तीसगढ़ी भाषा मा राहय । एक दू पाठ नहीं ---प्राथमिक स्तर के जम्मों विषय के पाठ्यक्रम छत्तीसगढ़ी मा होना चाही।अतके भर नहीं ये लइका मन ला पढ़ाने वाला गुरुजी मन तको छत्तीसगढ़ी के बोलइया अउ जानकार होना चाही।

       हमरे देश मा कतेक राज्य अइसन हें जिंहा लइका मन ला अनिवार्य रूप ले मातृभाषा मा शिक्षा दे जावत हे।दुर्भाग्य के बात हे के छत्तीसगढ़ हा आज भी, छत्तीसगढ़ी राजभाषा बने के बाद भी -- हिंदी भाषी राज्य के सूची मा शामिल हे।पता नहीं अइसन का मजबूरी हे या कोनो दुर्भावना हे ते हमर छत्तीसगढ़ मा प्राथमिक शिक्षा छत्तीसगढ़ी राजभाषा मा नइ दे जावत हे।


चोवा राम वर्मा 'बादल'

हथबंद, छत्तीसगढ़

20 नवंबर जनमदिन साहित्य सिरजन ल धरम कारज मानथें डॉ. दशरथलाल 'विद्रोही'



 

20 नवंबर जनमदिन

साहित्य सिरजन ल धरम कारज मानथें डॉ. दशरथलाल 'विद्रोही'

  साहित्य सिरजन ल धरम कारज मनइया डा. दशरथ लाल निषाद 'विद्रोही' के कहना हे, लोगन ल अपन जिनगी ले धन नहीं, धरम लेके जाना चाही. एकरे सेती मैं सन् 1958 ले लेके आज तक सरलग साहित्य सिरजन म लगे हंव. अभी तक मोर 30 अकन किताब छपगे हावय, अउ अतके अकन के पुरती ह छपे के अगोरा म हे.

   धमतरी जिला के गाँव मगरलोड म 20 नवंबर 1938 के महतारी बोधनी बाई अउ ददा ठाकुर राम निषाद जी के घर जन्मे दशरथ लाल जी 1958 ले लेखन कारज म भिड़े हें. उंकर पहला साहित्य संकलन 1965 म 'राष्ट्रीय चेतना' के नांव ले आए रिहिसे. 

   दशरथ लाल जी संग मोर भेंट पहिली बेर तब होए रिहिसे, जब मैं छत्तीसगढ़ी मासिक पत्रिका 'मयारु माटी' के प्रकाशन- संपादन करत रेहेंव. बात सन् 1988 के आय तब मैं छत्तीसगढ़ी सेवक के संपादक जागेश्वर प्रसाद जी संग उंकर हांडीपारा रायपुर वाले कार्यालय म बइठे रेहेंव. तभे निषाद जी उहाँ पहुंचिन. उंकर संग मोर परिचय जागेश्वर जी कराइन, अउ बताइन के ए मन डा. दशरथ लाल जी आंय, क्रांतिकारी साहित्यकार हें. हमन मीसा बंदी हन. दूनों झन एके संग जेल म रहेन.

    दशरथ लाल जी के शिक्षा गाँव म आठवीं तक ही हो पाए रिहिसे. एकर बाद उन भिलाई चले गेइन वो बखत डेढ़ दू रुपिया म रायपुर अउ भिलाई म रोजी मजूरी करत आईटीआई म पढ़ीन. तेकर पाछू भोपाल म एक इंटरव्यू होइस, जेमा उन पास होइन, तहाँ ले उनला भिलाई टेक्निकल इंस्टीट्यूट म नौकरी मिलगे. 

    नौकरी लगे के बाद उन प्रायव्हेट म हायर सेकेण्डरी पास करीन. फेर डिप्लोमा घलो करीन. शिक्षा खातिर उंकर लगन अतेक रिहिस के आयुर्वेद रत्न, साहित्य रत्न अउ फेर कृषि रत्न के घलो उपाधि लेइन. उन भिलाई म रहिके ही अपन समाज के गतिविधि संग घलो जुड़िन. एक पाछू फेर साहित्य म आना होइस. 

   साहित्य म सफा-सफा बात लिखंय तेकर सेती उन अपन उपनाम 'विद्रोही' लिखे लागिन. इही कलम के विद्रोह के सेती उनला ए देश के लोकतांत्रिक व्यवस्था म काला अध्याय के रूप म चिन्हे जाने वाला 'मीसा काल' म करीब पौने दू बछर मीसा बंदी के रूप म जेल म बीताए बर लागिस. एकर एक दुष्परिणाम इहू होइस के भिलाई टेक्निकल इंस्टीट्यूट के नौकरी ले हाथ धोना परगे.   

      बाद म उन प्रायव्हेट नौकरी करत अपन परिवार के जीविका चलाए लागिन. तेकर पाछू फेर अपन जन्मभूमि मगरलोड लहुट आइन, जिहां 13 अक्टूबर 1996 म "संगम साहित्य एवं सांस्कृतिक समिति" के स्थापना करिन. ए समिति के माध्यम ले मगरलोड क्षेत्र के साहित्य प्रेमी मन ल जोड़िन. आज ए समिति के नांव पूरा प्रदेश म सम्मान के साथ लिए जाथे. एकर मन के साहित्य खातिर समर्पण अउ सक्रियता ल लोगन उदाहरण के रूप म रखथें, जे मन के  एक ग्रामीण क्षेत्र म रहि के घलो अपन खुद के भवन हे.

    निषाद जी के लेखन  छत्तीसगढ़ के विशेषता मन ऊपर बहुत होए हे. जइसे- छत्तीसगढ़ के बासी, छत्तीसगढ़ के मितानी, छत्तीसगढ़ के भाजी, छत्तीसगढ़ के गांधी, छत्तीसगढ़ के पान, छत्तीसगढ़ के भक्तिन, छत्तीसगढ़ के कांदा, छत्तीसगढ़ के सिंगार, एकर मन के संगे-संग राम-केंवट संवाद, मुक्तक संग्रह, जइसन अबड़ अकन विशुद्ध साहित्यिक विषय मन ऊपर घलोक लिखे हें. अभी तक उंकर 30 किताब प्रकाशित हो चुके हे, अउ अतकेच अकन के पुरती ह छपे के अगोरा म हे.

    दशरथ निषाद जी ल साहित्यिक अउ सामाजिक मिला के करीब 82 सम्मान मिल गये हे. फेर एक ताज्जुब के बात आय के अभी तक उनला कोनो किसम के सरकारी सम्मान नइ मिल पाए हे. एकर एक बड़का कारन मैं मानथंव, के एकर चयन विधि. सरकारी सम्मान खातिर सबले बड़े बाधा ए आय, के जे मन अपन सम्मान करे खातिर आवेदन करथें या कोनो समिति द्वारा ककरो नांव के प्रस्ताव भेजे जाथे, सिरिफ वोकरेच भर मन के नांव के चयन सम्मान खातिर होथे. जे मन आवेदन नइ करंय, तेकर मन के नांव ऊपर कोनो किसम के विचार नइ करे जाय.

  एकर संबंध म मोला छत्तीसगढ़ के महान संगीतकार रहे स्व. खुमान लाल साव जी के वो बात के सुरता आथे, जब उन कहंय के, "कोनो भी स्वाभिमानी मनखे मोर सम्मान कर दे कहिके आवेदन करय. मैं खुद नइ करंव, एकरे  सेती मोला आज तक कोनो किसम के  सम्मान नइ मिल पाये हे."

  मोला लागथे, के सरकार ल अपन ये नियम ऊपर फिर से विचार करना चाही, अउ साठ बछर ले ऊपर हो चुके कलाकार या साहित्यकार मन के खुदे सोर-खबर लेना चाही.

  आदरणीय निषाद जी के तो अड़बड़ सम्मान होए हे. दू पइत महूं ल उंकर सम्मान करे के सौभाग्य मिले हे. एक पइत जब उन अपन जिनगी के 75 बछर पूरा करीन, त संगम साहित्य समिति द्वारा उंकर प्रकाशित साहित्य म तउल के सम्मान के गे रिहिसे, संग म  एक स्मारिका के प्रकाशन घलो करे गे रिहिसे. ए ह मोर सौभाग्य आय के, ए कार्यक्रम म मोला अतिथि के रूप म उपस्थित होके आदरणीय निषाद जी के स्मारिका के विमोचन अउ सम्मान करे के अवसर मिले रिहिसे. दूसरा पइत तब, जब हमन रायपुर म छत्तीसगढ़ी व्याकरण के सर्जक हीरालाल काव्योपाध्याय जी के सुरता म कार्यक्रम करे रेहेन, जेमा छत्तीसगढ़ के पांच साहित्य रत्न मन के सम्मान करे रेहेन, वोमा के एक रत्न आदरणीय निषाद जी घलो रिहिन हें.

   वइसे तो मैं मगरलोड हर बछर के स्थापना दिवस कार्यक्रम म जावंंव त निषाद जी संग भेंट हो जावत रिहिसे. कभू कभार उन रायपुर के कार्यक्रम म आवंय तभो भेंट हो जावय. फेर जब ले (24 अक्टूबर 2018) मोला लकवा के अटैक आए हे, तब ले कोनो डहार बंद होगे. एकरे संग निषाद जी संग भेंट होवइ घलो बंद होगे. बीच- बीच म संगम साहित्य के सक्रिय सदस्य चिंताराम सिन्हा फोन के माध्यम ले निषाद जी संग गोठबात करा देथे, त जानेंव के उहू मन अभी खटिया म हें.

   भगवान उनला स्वस्थ करंय अउ लम्बा जिनगी देवंय, तेमा उंकर अप्रकाशित किताब मन छप सकय. संग म नवा पीढ़ी ले घलो भरोसा करत हंव के उंकर सपना ल पूरा करे के उदिम करंय.

-सुशील भोले

संजय नगर, रायपुर

मो/व्हा. 9826992811


उजाड़ गाँव म चिपरी मोटियारी

 उजाड़ गाँव म चिपरी मोटियारी 


          एक झिन राजा के राज म रात दिन अकाल दुकाल परत रहय । ओहा जनता ला भूख म मरत नइ देख सकत रहय । राजकोस घला रात दिन बाँटत बाँटत रिता होगे रहय । अवइया अकाल के भविष्यबानी सुनके मंत्री मन हा ओला नरूवा खँड़ के रकसा ला मनाये थोपाये बर किहिन । बइगा किथे – रकसा हा हमर का करही राजा साहेब ..... बुढ़हा देवता म हुम जग देथन .. गाँव के ठुठी मौली म फूल पान चइघाबो अऊ सहँड़ा देव म नरियर ... रिच्छिन देवी म खैरा कुकरा बद देथन .. अवइया बछर म शीतला माई म जग जँवारा घला मढ़हा देबो .. । मंत्री मन किथे – गाँव के देवता मन कुछ नइ कर सकत हे राजा साहेब ... सब देवता मन के शक्ति हा रकसा के आगू म छीण परगे हाबय .. उही ला महल म लान के स्थापित करबो , ओकर मान गउन करबो , तब राज के मनखे ला सुख मिलही ....... । 

          दूसर दिन मंत्रीमंडल के बात मान .....  राजा हा ..... रथिया होइस तहन ..... रकसा ला मनौती करके लाने बर चल दिस । हुम जग के गंध म रकसा के मुहु ले भयंकर अवाज निकलना सुरू होगे । बासी खवइया राजा हा अबड़ साहसी अऊ बलवान रिहीस । नइ डेर्रइस । रकसा हा राजा के साहस देख पूछे लगिस - तैं कोन अस , तोला का चाही ...... ? राजा हा किथे – मय राजा अँव । तोला अपन महल म लेगे बर आये हँव .... । रकसा किथे – मय जानत हँव के तैं राजा अस ... फेर तोर मोर रसता अलग अलग हे ... मय तोर संग रेंग नइ सकँव । मोला अपन संग खाँध म लेगबे तभे तोर महल तक जाहूँ .. फेर मोर एक सरत घला हे ... घर के पहुँचत ले उतारबे झन ..... अऊ गोठियाबे झिन । तैं गोठियाये या गरू लागत कहिके उतारे ..... ते में अपन जगा म वापिस लहुँट दुहुँ । राजा हव कहि दिस अऊ अधरतिया म .... रकसा ला अपन खांद म ओरमाके रकस रकस महल कोत रेंगे लगिस । 

          रसता म रकसा किथे - समे बिताये बर तोर से एक प्रश्न पूछत हँव महराज । तैं जान के उत्तर नइ देबे त .... इही तिर तोला मारके खा दुहुँ । राजा मुड़ी हलइस । रकसा पूछथे – देस म केवल नाव पद अऊ धन लोलुप मन मजा पावत हें अऊ असली हकदार मन कोंटा म परे हे ...... अइसन काबर ....... ? राजा किथे – हमर देस म विद्वान मन के कमी नइ रिहिस । आजो कमी निये फेर वाजिम म विद्वान मन के पूछ परख निये । असली हकदार मन या तो राज पक्ष के उपेक्षा के शिकार हे या करम दंड के ...... । वइसे येकर जुम्मेवार खुदे विद्वान मन घला हे । इहाँ एक विद्वान हा दूसर के गोड़ ईंचत हे त दूसर हा पहिली के टोंटा मसके बर तियार बइठे हे । अइसन चरित्तर देख के तीसर हा विद्वानी करे ले मुख मोर लेवत हे ....... अऊ चौथा हा पलायन कर लेवत हे । अइसने मउका के फायदा उचावत नाव पद धन लोलुप मन मजा पावत हे । 

          राजा बतावत रहय – आज निही ते कल हरेक गुनवान के पूजा खत्ता म होथे । फेर जब कन्हो राजा ला भरमा देथे या अइसन परिस्थिति जनम धर लेथे तब गैर हकदार मन जबरदस्ती मान सनमान पा जथे । रकसा हा बात नइ समझिस । राजा कोती प्रश्नवाचक हाथ बनाके देखइस । तब राजा हा किथे - तोला मोर बात समझ नइ आवत हे । मेंहा तोला एक ठिन कहिनी सुनावत हँव । 

           राजा केहे लगिस - एक बहुत बड़े जनपद म लोकतंत्र रिहीस । पांच बछर बर जनता हा अपन मन मुताबिक राजा चुन डरय । एक बेर राजा हा सत्ता पाये के पाछू गाँव गाँव जाके समस्या पता करे लगिस अऊ ओकर हल बर मेहनत करके उपाय निकाले लगिस । राजा के कुछ अइसे मनखे रिहीन जेमन समस्या सुलझाना नइ चाहय । ओमन समस्या गिना के ओकर हल के नाव म सरकारी खजाना ला लूटे हथियाये के अलावा कुछ नइ करना चाहय । ओकर मन के सोंचना रहय के .... पुलिया बन जही , सड़क बन जही , गुरूकुल खुल जही , तरिया खना जही तब मजदूर अऊ किसान तिर समस्या नइ बाँचही ...... तब हमन ला कोन पूछही । ओमन राजा ला भरमाये लगिस । राजा के ध्यान ला काम बूता डहर ले हटाये बर राजा उपर देखावाटी तरस देखाये लगिस । ओमन राजा ला बिहाव करके अपनों बर सुख संजोये के सपना देखा दिन । एक दिन राजा तियार होगे । राजा के सलाहकार मन .... राजा ला अपन बादशाहत कायम राखे बर ... केवल अपनेच जनपद के खबसूरत सबले योग्य नोनी संग बिहाव रचाये के घोसना करवा दिस । रानी चुने के प्रतियोगिता के तियारी सुरू होगे । अपन पहिचान के नोनी ला रानी बनवाये बर मंत्री मन भितरे भितर षडयंत्र म लगगे । 

          कोन नोनी हा रानी नइ बनना चाही । हरेक के खवाहिस हिलोर मारे लगिस । रंग रंग के लिपिसटिक पाऊडर स्नो क्रीम लवनटोकिया अऊ आलता बजार म उतरगे । येला चुपरके अऊ केऊ प्रकार के नावा किसिम के डरेस पहिरके एक दूसर ले श्रेस्ठ दिखे के होड़ मातगे । बैपारी मन कमा डरिन । मंत्री मन एक प्रतियोगी ला दूसर ले लड़ाना सुरू कर दिस । लोगन भड़कावा म आगे । रानी बने के लालच म एक दूसर ला नकसान पहुँचाये के कन्हो मउका ला हांथ ले नइ जावन दिन । काकरो कपड़ा चिराये लगिस ....... । काकरो थोथना म दाग लगा दिन ....... । प्रतियोगिता विकृत होगे । येला देख कुछ समझदार मन गाँव ले पलायन कर दिस ...... कुछ मन प्रतियोगिता ले .......... । 

          प्रतियोगिता के दिन राजधानी हा एकदमेच उजाड़ लगे लगिस ....... उहाँ मरे रोवइया नइ रहय ..... तइसे होगे । राजा के डर म .. मंत्री मन आपस म समझौता कर डरिन अऊ सबो एके होगे । तै समे म .. किराया के भीड़ सकलागे । रानी बने बर रजधानी के बीचों बीच बने भव्य मंच म , कुछ मंत्री मन के आसीरबाद पा , मुड़ी ढाँक के एक झिन नोनी अइस । सवाल पूछे के पहिली .. नोनी हा राजा के अस प्रशंसा करिस के ओकर सरी येब छुपगे । मंत्री मन अपन योजना म सफल होगे । बिगन देखे परखे .. राजा ला नोनी भा गे । बिहाव होगे । महल म लेगे के थोकिन बेर म पता चलगे के ...... रानी हा उपर ले दिखे म ... बहुतेच खबसूरत हे फेर ओला कुछ दिखय निही ... जइसे आँखी म चिपरा गोंजाये रहय , ओला कुछु गंध के आभास नइ होवय ... जइसे नाक म रेमट बोजाहे रहय अऊ काकरो बात सुनाबेच नइ करय .. जइसे कान म ठेठा भराये रहय । राजा धोखा खागे । अतेक जनता के बीच अपनाये रानी ला छोंड़ना राजा के मर्यादा के खिलाफ रिहीस । केवल अपनेच मनखे के भला करे बर .. अपनेच जनपद के नोनी हा रानी बनही ...... इही संकल्प हा राजा ला ले डूबिस । उजाड़ गाँव के चिपरी मोटियारी ....... रानी बनगे । 

          कहिनी बतावत बतावत राजा हा रकसा ला खांद म ओरमाये महल तिर पहुँचगे । रकसा किथे – मोर प्रश्न के उत्तर मिलगे राजन । में जान डरेंव के केवल नाव पद अऊ धन लोलुप मन काबर मजा पावत हें अऊ विद्वान मन कोंटा म काबर फेंकाये हे । फेर मेंहा तोला मुहुँ खोले से मना करे रेहेंव । तैं बोल पारे । में जावत हँव ........ । रकसा वापिस उड़ागे । गलत सलाह के सेती अपन गाँव के देवी देवता ला छोंड़ .... दुख देवइया रकसा ला .. रात भर खांद म बोहइया राजा के सपना हा केवल सपना रहिगे । बपरा राजा चुचुवागे । विद्वान मन आजो कोंटा म फेंकाये हे अऊ उजाड़ गाँव के चिपरी मोटियारी .... आज घला रानी बन मजा पावत हे ..... ।                            हरिशंकर गजानंद देवांगन , छुरा .

विषय--हमर राजभाषा छत्तीसगढ़ी सम्मान कइसे पाही*

 

*विषय--हमर राजभाषा छत्तीसगढ़ी सम्मान कइसे पाही*


कोनो भी दिवस ल जनजागरण लाये के उद्देश्य ले मनाये जाथे संगे संग वो दिन घटे कोनो विशेष घटना ल सुरता करके वोकर महत्व ल उजागर करे बर, लोगन तक पहुँचाये बर अनेक प्रकार के उदिम करे जाथे जेमा  साहित्यिक अउ सांस्कृतिक आयोजन शामिल होथे।

  आप सब जानत हव कि 28 नवम्बर के छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस धूमधाम ले मनाये जाथे। ए तिथि म हमर महतारी भाखा छत्तीसगढ़ी ल 28 नवम्बर 2007 के वैधानिक रूप ले छत्तीसगढ़ विधान सभा ह राजभाषा के दर्जा दे हावय।


*छत्तीसगढ़ राजभाषा बर संघर्ष*---

छत्तीसगढ़ ह राजभाषा सहजता ले नइ बने हे।वोकर रसता म बहुते काँटा बिछे रहिसे। अनेक रोड़ा रहिस हे जेन आज ले पूरा-पूरा नइ हटे ये।

  खैर! छत्तीसगढ़ी भाखा के जनभाषा ले राजभाषा बने के कहानी मुख्य रूप ले इहाँ के जागरूक साहित्यकार, कलाकार  मन के संघर्ष ले भरे हे। जेन मन छत्तीसगढ़ी ल राजभाषा बनाये बर लड़िन वोमा पं०श्याम लाल चतुर्वेदी जी, हरिठाकुर जी, केयूर भूषण जी,सुशील यदु जी ,नंदकिशोर शुक्ल जी ,गुरतुर गोठ के सम्पादक संजीव तिवारी जी अउ सन् 2000 ले 2008 तक के छत्तीसगढ़ी राजभाषा संघर्ष समिति के जम्मों जुझारू मन के बड़ योगदान हे। हमर पुरखा साहित्यकार मन तको नेंव धरे रहिन।

        छत्तीसगढ़ी ल राजभाषा बनाये के संघर्ष म आम जनता अउ राजनेता मन तको योगदान दे हावयँ जेमा पहिली बार छत्तीसगढ़ विधान सभा म छत्तीसगढ़ी ल राजभाषा बनाये बर 1नवम्बर 2000के विधानसभा म अशासकीय संकल्प प्रस्तुत करइया डोमेंद्र भेड़िया जी ,पूर्व मुख्यमंत्री डा० रमन सिंह जी,वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी, महामहिम राज्यपाल रमेश बैस जी,राज्यसभा सांसद छाया वर्मा जी आदि उल्लेखनीय हें।

    छत्तीसगढ़ महतारी भाखा के सम्मान बर छत्तीसगढ़ क्रांति सेना बहुत बढ़िया काम करत हे।


*राजभाषा के रूप म छत्तीसगढ़ी भाखा के दशा-दिशा*--

छत्तीसगढ़ी राजभाषा बन तो गे हे फेर जेन तीन प्रमुख उद्देश्य---संविधान के आठवीं अनुसूची म भाषा के दर्जा देवाना, राजकाज के भाषा बनाना, पाठ्यक्रम म शामिल करना। बड़ दुख के बात हे कि राजभाषा बने के 14 साल बाद तको एमा के एको ठन उद्देश्य पूरा नइ होय हे।

 राजनैतिक रूप ले सिरिफ भाषणबाजी होवत हे।आनी बानी के कारण बता-बता के ये मुद्दा ल लटकाये जावत हें। राजभाषा के असली दर्जा देवाये के संघर्ष संगोष्ठी, व्याख्यान ,कवि सम्मेलन अउ सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सिमट के रहिगे हे।

    कभू-कभू तो अइसे तको लगथे कि कतको आम जनता जेमा पढ़े लिखे मन जादा हें, हीनभावना ले ग्रसित होके एला गोठियाये म हिचकिचाथे त एहा राजकाज के भाषा कइसे बनही। अपन लइका ल हमन पाश्चात्य संस्कृति के चकाचौंध म मोहाके अंग्रेजी बोले अउ पढ़े ल बाध्य करबो त  पाठ्यक्रम म कइसे शामिल होही। अइसे भी अंग्रेजी शिक्षा के आँधी तुफान म  हमर देशी भाखा मन पाना-पतेवा कस उड़ियावत हें। अंग्रेजी के गरेरा म उड़े धुर्रा ले शासन के आँखी तको मुँदागे हे तभे तो अँग्रेजी माध्यम स्कूल मन के बाढ़ आगे हे।

       एक अउ समस्या हे कि इहाँ अबड़ कस बोली हे।का ओमन छत्तीसगढ़ी ल स्वीकार करत हें? जेन समस्या ले हिंदी जूझत हे उही बाधा ले छत्तीसगढ़ी घेरावत हे। छत्तीसगढ़ी के एक ठन मानक रूप बनाके अउ वोला सब स्वीकार करके ये समस्या ले पार पाये जा सकथे।

*हमर राजभाषा छत्तीसगढ़ी ह सम्मान कइसे पाही*

एखर उत्तर एकदम सरल तको  हे अउ अब्बड़ कठिन तके हे। सबले प्रमुख बात तो ये हे ----हमन सम्मान देबो तभे पाही।

     छत्तीसगढ़ी ह हमर प्रदेश के एकमात्र सम्पर्क भाखा आय त ऐला सबझन मुक्त हृदय ले स्वीकार करन, सत्ता ह सहयोग करय, आठवीं अनुसूची म तुरंत शामिल होवय, पूरा राजकाज छत्तीसगढ़ी म होवय,  सरकारी कार्यालय मन म संवाद के भाषा अनिवार्य रूप ले छत्तीसगढ़ी होवय। शासन के कर्ताधर्ता  मंत्री,संत्री ,अधिकारी ,कर्मचारी मन छत्तीसगढ़ी जानय अउ बोलय। कम ले कम प्राथमिक शिक्षा के पूरा पाठ्यक्रम छत्तीसगढ़ी भाषा म राहय अउ पढाये-लिखाये के तको  छत्तीसगढ़ी भाषा  राहय। उच्चशिक्षा म एक विषय छत्तीसगढ़ी साहित्य के राहय। छत्तीसगढ़ी साहित्यकार मन ल  शासन ले प्रोत्साहन अउ सम्मान मिलय। गाँव गाँव ,स्कूल-स्कूल म छत्तीसगढ़ी साहित्य के पुस्तकालय खोले जाय। हमर पुरखा साहित्यकार मन के कृति मन ल आम जन तक पहुँचाये जाय।

      छत्तीसगढ़ी ह जब तक रोजगार देवइया मतलब सरकारी नौकरी अउ फेक्टरी मन म काम देवइया भाषा नइ बनही तब तक  राजभाषा के दर्जा पाके घलो पिछुवाये बरोबर रइही।

  छत्तीसगढ़ी ल उचित सम्मान देवाय बर अदालती निर्णय तको छत्तीसगढ़ी म दे जाय एखर बर छत्तीसगढ़ी के जानकार न्यायधीश मन के नियुक्ति करे जाय।वकील मन तको छत्तीसगढ़ी म जिरह करँय।

    छत्तीसगढ़ी म दैनिक पत्र पत्रिका निकलय जेकर ले ये भाषा के प्रचार प्रसार होही।ए कड़ी म पत्रिका के पहट, देशबंधु के मड़ई, हरीभूमि के चौपाल अउ दैनिक भास्कर के संगवारी आदि के साप्ताहिक पेज अभिनंदनीय हे।

   छत्तीसगढ़ी म कहूँ धार्मिक पूजा-पाठ, राजनैतिक अउ आर्थिक काम  होये ल धर लेही त एखर सम्मान कई गुना बाढ़ जही।एखर बर पुरजोर प्रयास होना चाही।

 आम जन के हृदय म अपन महतारी भाखा बर प्रेम अउ श्रद्धा जागय  तभे राजभाषा बनाना  अउ राजभाषा दिवस मनाना सार्थक होही ।कविवर भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी के उद्गार ल हिरदे म बसाके अमल म लाये के जरूरत हे।उन कहे हें---


निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति के मूल।

निज भाषा ज्ञान बिन, मिटत न हिय को शूल।

अंग्रेजी पढ़ के जदपि, सब गुन होत प्रवीन।

पै निज भाषा ज्ञान बिन, रहत दीन के दीन।


चोवा राम 'बादल'

हथबंद, छत्तीसगढ़

रिपोर्ताज : छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस - 2021*



 

 मोहन मयारू: *सोनहा सुरता हमर छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस कार्यक्रम के* 


हमर छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस के आयोजन हर बछर के तरह ही इहु बछर 28 नवंबर के गुरु घासीदास संग्रहालाय संस्कृति विभाग के सभागार मा होइस , वो कार्यक्रम के माई पहुना हमर छत्तीसगढ़ शासन के केबिनेट अउ संस्कृति मंत्री श्री अमरजीत भगत जी मन रिहिन अउ कार्यक्रम के खास पहुना श्री अन्बलगन साहब  (संस्कृति सचिव) मन संघरे रिहिन , कार्यक्रम म हमर प्रदेश भर के भर के वरिष्ठ साहित्यकार मन के संग हमर जइसन कतकोन युवा साहित्यकार संगवारी मन घलो कार्यक्रम मा बढ़ चढ़ के हिस्सा लीन हे , गरिमामयी कार्यक्रम के रौनकता हर देखते ही बनत रिहिस बड़ आनंद आवत रहिस । 


कार्यक्रम के शुरवात हमर सकलाय जम्मो अतिथि पहुना मन दीया जलाके अउ हमर छत्तीसगढ़ महतारी के आशीर्वाद लेके करिन हे अउ हमर राजगीत के संग कार्यक्रम के श्री गणेश होइस ।  तेखर बाद हमर छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के सचिव बड़का भइया श्री डॉ. अनिल भतपहरी जी मन स्वागत भाषण के माध्यम ले कार्यक्रम मा जुरियाय जम्मो पहुना मन के संग प्रदेश भर के सकलाय साहित्यकार मन के कार्यक्रम का स्वागत करिन हे अपन गोठ बात ले । वोकर बाद कार्यक्रम मा जुरियाय हमर वरिष्ठ भाषाविद् साहित्यकार मन हा हमर छत्तीसगढ़ी भाखा के मानकीकरण संग हमर महतारी भाखा के बाढ़ अउ वोला शिक्षा के पाठ्यक्रम मा संघेरे के संग काम काज के भाखा बनाय जाय जइसन कई ठन बिषय  मन म अपन सब गोठ बात मन ला राखिन हे । 


सबो वक्ता मन के गोठ बात अउ विचार ला सुनके सिरतोन म अन्तस् गदगद होगे रिहिस हे , मोला तो अइसे लगत रिहिस हे मानो कार्यक्रम मा संघरना मोर सफल हो गीस । कार्यक्रम म हमर वरिष्ठ सियान साहित्यकार मन के सम्मान घलो होइस जेमे लगभग प्रदेश भर के 19 साहित्यकार मन ला हमर छत्तीसगढ़ी भाखा के संग साहित्य के सेवा मा देय उनकर योगदान खातिर हमर छत्तीसगढ़ शासन डहर ले सम्मानित करे गीस । कार्यक्रम मा माई पहुना अमरजीत भगत जी संस्कृति मंत्री के महतारी भाखा मा हंसी ठिठोली ले भरे उनकर भाषण सुनके अन्तस् गदगद होगे रिहिस , अउ एक ठन खास बात वो कार्यक्रम के जउन ला मँय कहिथँव त कार्यक्रम मा हमर जतेक संघरे साहित्यकार मन कभू नइ भुलावय वो रिहिस अन्बलगन साहब जी जउन मन साऊथ इंडीयन होय के बावजूद छत्तीसगढ़ी मा पढ़ के गोठियाय के कोशिश अउ अपन बात ला रखत उन अपन महतारी भाखा के परति श्रद्धा भक्ति संग आपार प्रेम ला बताइन


उन मन अपन बात ला रखत बताइन की उनकर लइका मन के पैदाइस हमर छत्तीसगढ़ ह हरय अउ उनकर लइका मन साऊथ इंडियन होय के बावजूद आज घर म ठेठ छत्तीसगढ़ी मा गोठियाथे , जउन ला सुनके सिरतोन मा हम छत्तीसगढ़िया मन के छाती हा फुलगे रिहिस ।

कार्यक्रम मा संचानालय के सचिव श्री विवेक आचार्य जी मन घलो संघरे रिहिन जउन मन घलो वो दिन हमर महतारी भाखा मा अपन बात ला राखे के कोशिश करिन हे । कार्यक्रम मा बड़ आनंद आवत रिहिस सबो वक्ता एक ले बढ़ के एक रहिस हे कउनो के गोठ सुनके नइ लगत रिहिस के हम कार्यक्रम मा असकटावत हन कहिके । कार्यक्रम मा सुग्घर भोजन के व्यवस्था हमर छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग डहर ले रखे रिहिन हे कार्यक्रम मा


 भात बासी खाय के बाद दूसर सत्र मा कवि सम्मेलन के आयोजन करे रिहिन हे जेमा प्रदेश भर ले सकलाय साहित्यकार मन हा महतारी भाखा मा लिखे रचना मन के पाठ करिन हे । कार्यक्रम मा गीत कविता मन के सुग्घर वर्षा होवत रहिस हे जउन हा रात कन लगभग पौने सात के आस पास सिराइस हे । कार्यक्रम मा हमर प्रदेश के चित परिचित सबो वरिष्ठ गुरूजन साहित्यकार मन के संग युवा साहित्यकार संगी संगवारी मन ले घलो मिलन भेट होइस जउन हा वो कार्यक्रम के खुशी ला अउ दुगना कर दे रिहिस आखिर के समापन के घोषणा हमर प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार श्री चोवाराम वर्मा "बादल" गुरूजी मन करिन ।


   *मयारू मोहन कुमार निषाद* 

    *गाँव - लमती , भाटापारा ,*

  *जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)*

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 28 नवम्बर 2021 इतवार के ऐतिहासिक दिन  छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के द्वारा संस्कृति अउ पुरातत्व संचनालय के सभागार मा छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस के यादगार आयोजन करेगे रहिस। ये आयोजन मा ट्रेन लेट होये के कारण कुछ देरी ले सहीं लगभग दोपहर 12:30 बजे   हमू ला सँघरे के सौभाग्य मिलिस।

     जब हम पहुँचेन त कार्यक्रम चालू होगे रहिस। हाल खचाखच भरगे रहिस तेकर सेती जगा बर नजर दँउड़ावत पाछू कोती जाय ला परिस फेर एहू हा यादगार होगे काबर के हमर छंद के छ परिवार अउ लोकाक्षर परिवार के बहुत झन सँगवारी मन ले जै जोहार होगे तहाँ ले एकदम पाछू के पंक्ति मा जगा मिलिस।परोसी रहिन श्री राजेंद्र झा जी अउ एम ए छत्तीसगढ़ी के मेरिटोरियस विद्यार्थी डा० हितेश तिवारी। जगा मिले के बाद जब मंच कोती ध्यान गिस ता उहाँ विद्वान साहित्यकार मन जिंकर सम्मान होना रहिस जेमा हमर प्रणम्य गुरुदेव श्री निगम जी(संस्थापक छंद के छ, एडमिन लोकाक्षर छत्तीसगढ़) तको  अतिथि मन संग विराजे रहिन। मंच मा राजभाषा आयोग के सचिव डा० अनिल भतपहरी जी अउ ऊँकर साथी मन के सक्रियता झलकत रहिस हे।  सुप्रसिद्ध रंगकर्मी साहित्यकार श्री विजय मिश्रा जी के निराला अउ सटीक मंच संचालन बार-बार ताली बटोर के आयोजन मा चार चाँद लगावत रहिस। ए बखत मा डा० बिहारी लाल साहू जी अउ सचिव अल्बगन जी के संबोधन बहुतेच प्रभावशाली अउ प्रेरणादायक रहिस। एक तमिल भाषी अधिकारी के हिंदी बोल अउ लिख लेना, छत्तीसगढ़ी भाखा ला समझ लेना वोकर दू झन लइका मन के छत्तीसगढ़ी बोल समझ लेना हिरदे मा छत्तीसगढ़िया गौरव ला जगावत रहिस। मुख्य अतिथि  मंत्री आद० भगत जी के संबोधन हा छत्तीसगढ़ी भाखा के उत्थान होही, वो कम से कम प्राथमिक शिक्षा तक पाठ्यक्रम मा शामिल होही अउ आगू चलके राजकाज के भाषा तको बनही के विश्वास जगावत रहिस।वक्ता मन के संबोधन मा छत्तीसगढ़ी के मानकीकरण के मुद्दा तको रखे गिस तहाँ ले वरिष्ठ साहित्यकार मन ला स्मृति चिन्ह भेंट करके सम्मानित करे गिस। गुरुदेव श्री निगम जी के सम्मान के बेरा बहुत झन के मोबाइल तको घेरी-बेरी आँखी झपकावत रहिस। सम्मान समारोह के बाद डा० भतपहरी जी हा भोजन अवकाश अउ वोकर पाछू काव्य गोष्ठी के घोषणा करिन।

      भोजन अवकाश मा छत्तीसगढ़ के कोना-कोना ले आये नवा-जुन्ना साहित्कार मन भेंट भलाई अउ जै जोहार करके फोटू खिंचवावत रहिन।

        जेवन-पानी के बाद फेर मंच सजिस। कुछ अउ संबोधन होइस तहाँ ले लगभग 4 बजे डा० भतपहरी जी हा सम्मानित होये साहित्यकार ,अतिथि, अधिकारी मन संग मुख्यमंत्री आवास चलदिन।

   अब कवि सम्मेलन सुप्रसिद्ध गीतकार श्री किशोर तिवारी जी के शानदार काव्यमय संचालन मा  प्रारंभ होइस। कविता पढ़े बर धिकतम तीन मिनट के समे दे गिस। ए सत्र के अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार श्री चेतन भारती जी करिन। मातु शारदा अउ गुरुकृपा ले मंच मा भारती जी के संग हमू ला बइठे के सौभाग्य मिलिस। ए काव्यगोष्ठी मा काव्यानंद के शाम 7 बजे तक अनवरत वर्षा होइस। अंत मा अध्यक्षीय उद्बोधन के बाद आयोग के तरफ ले मैं त्रुटि-फुटि भाखा मा धन्यवाद ज्ञापित करके अध्यक्ष जी के अनुमति ले कार्यक्रम समापन के घोषणा करेंव।

   कोरोना संकटकाल के बाद ये आयोजन उल्लेखनीय अउ शानदार रहिस फेर भोजन-पानी मा थोकुन अव्यवस्था दिखिस। काव्यगोष्ठी मा नइ रहिके मूर्धन्य वरिष्ठ साहित्यकार मन के अंते चल देना अच्छा नइ लागिस काबर के उन रहिंतिन ता उँखर सामने काव्यपाठ करके हमर जइसे कतको नवसिखिया रचनाकार मन ला बहुतेच प्रोत्साहन मिलतिस।

 कुल मिलाके ये आयोजन गरिमापूर्ण, यादगार अउ लाजवाब रहिस।

 राजभाषा आयोग ला बहुत बहुत बधाई अउ धन्यवाद।


चोवा राम वर्मा 'बादल'

हथबंद, छत्तीसगढ़

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रिपोर्ताज : छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस - 2021*


छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस के अवसर मा 28 नवम्बर 2021 के छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग, रायपुर अउ संचालक, संस्कृति एवं पुरातत्व, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आयोजित संगोष्ठी, सम्मान समारोह अउ काव्यपाठ के कार्यक्रम, ठउर संस्कृति विभाग सभागार, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, रायपुर मा सफलतापूर्वक संपन्न होइस। कार्यक्रम के माई पहुना श्री अमरजीत भगत (संस्कृति मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन) अउ खास सगा श्री अन्बलगन पी. (सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, संस्कृति विभाग) रहिन । 


*उपस्थिति*


आयोजन मा छत्तीसगढ़ी लोकाक्षर वाट्सएप समूह के संस्थापक डॉ. सुधीर शर्मा सहित समूह के सम्मानीय सदस्य डॉ. सुरेश देशमुख, डॉ. जे.आर.सोनी, डॉ. शकुन्तला तरार, डॉ. बलदाऊराम साहू, डॉ. दीनदयाल साहू, डॉ. अनुसुइया अग्रवाल, डॉ. अनिल भटपहरी, डॉ. अशोक आकाश, श्री किशोर तिवारी, श्री भोलाराम सिन्हा, श्री चेतन भारती, श्री बलदेव भारती जी, छत्तीसगढ़ी लोकाक्षर परिवार अउ छन्द के छ परिवार दुन्नो के सदस्य अरुण कुमार निगम, सर्व श्री अजय अमृतांशु, ईश्वर साहू आरुग, कौशल कुमार साहू (फरहदा), चोवाराम वर्मा बादल, जगदीश हीरा साहू, पोखनलाल साहू, मिलन मलरिहा, मोहनकुमार निषाद, राजेश कुमार निषाद, श्लेष चंद्राकर, हेमलाल साहू अउ छन्द के छ परिवार के सदस्य सर्वश्री दुष्यन्त कुमार साहू, राज निषाद, दिलीप कुमार पटेल, सुनील शर्मा नील, राकेश कुमार साहू के विशेष उपस्थिति दिखिस। (ये नाम छत्तीसगढ़ी लोकाक्षर अउ छन्द के छ परिवार के सदस्य मन के आँय। अगर ककरो नाम भुलावत हँव त माफी देहू) एकर अलावा अनेक जिला के अनेक जिला संयोजक, साहित्यकार अउ प्रबुद्ध जन उपस्थित रहिन। संस्कृति विभाग के सभागार खचाखच भराये रहिस। स्थायी व्यवस्था के अलावा उपराहा कुर्सी के व्यवस्था तको करे गे रहिस। ये उपस्थिति आयोजन के सफलता के प्रमाण रहिस। 


*कार्यक्रम के श्रीगणेश अउ वक्तव्य*


कार्यक्रम में कुशल संचालन सुप्रसिद्ध रंगकर्मी श्री विजय मिश्रा "अमित" जी करिन। औपचारिक शुरुवात पंथी नृत्य द्वारा होइस। कुछ लोक कलाकार मन छत्तीसगढ़ी गीत प्रस्तुत करिन। माई पहुना के आगमन के बाद छत्तीसगढ़ महतारी अउ सरस्वती दाई के फोटू के आगू दीप प्रज्ज्वलन होइस अउ छत्तीसगढ़ के राजगीत "अरपा पैरी के धार" के संग कार्यक्रम के विधिवत शुरुआत होइस। डॉ. अनिल भटपहरी (सचिव, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग) के स्वगात भाषण के बाद खास सगा श्री अन्बलगन पी. अउ श्री विवेक आचार्य

(संचालक, संस्कृति एवं पुरातत्व, छत्तीसगढ़ शासन) मन गैर छत्तीसगढ़ी भाषी होए के बावजूद अपन वक्तव्य के शुरुआत छत्तीसगढ़ी भाषा मा करिन। तेकर बाद डॉ. बिहारीलाल साहू, डॉ. सुरेश देशमुख, डॉ. अनुसुइया अग्रवाल अउ विद्वान वक्ता मन चर्चा गोष्ठी मा छत्तीसगढ़ी भाषा के बढ़ोतरी बर अपन बहुमूल्य विचार प्रस्तुत करिन। इही कड़ी मा महूँ अपन विचार प्रकट करेंव। 


*सम्मान*


छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस के अवसर मा छत्तीसगढ़ के 19 विभूति मन के सम्मान करे गिस। कार्यक्रम के माई पहुना श्री अमरजीत भगत जी सुरता-चिन्हा (मोमेन्टो) भेंट करके श्री बिहारीलाल साहू जी, श्री हरप्रसाद निडर जी, डॉ. अनुसुइया अग्रवाल जी, डॉ. सुरेश देशमुख जी, श्री पुनुराम साहू जी, अरुण निगम, डॉ. कुसुम माधुरी टोप्पो, श्री गिरवरदास मानिकपुरी जी, श्री रमेश विश्वहार जी, श्री बंधु राजेश्वर खरे जी, श्री श्याम वर्मा जी, श्री गुलाल वर्मा जी, डॉ. दीनदयाल साहू जी, श्री संदीप अखिल जी, श्री नवीन देवांगन जी, श्रीमती लता राठौर जी, डॉ. सुधीर पाठक जी, श्रीमती जयमती कश्यप जी अउ श्रीमती तृप्ति सोनी जी के सम्मान करिन। माई पहुना श्री अमरजीत भगत जी (संस्कृति मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन) ठेठ छत्तीसगढ़िया अंदाज मा उपस्थित जन-समूह ला अपन सारगर्भित गोठ-बात द्वारा संबोधित करिन।


*काव्यगोष्ठी*


भोजन काल के बाद कविगोष्ठी के सफल संचालन मधुर युवा कवि श्री किशोर तिवारी जी करिन। ये कविगोष्ठी मा लगभग 15 जिला के 45 कवि मन छत्तीसगढ़ी भाषा मा सरस काव्यपाठ करिन। श्री चोवाराम "बादल" जी सबके आभार प्रदर्शन करिन अउ संझा के सवा छै बजे कविसम्मेलन के समापन होगे।


*माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा सम्मान*


छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस मा सम्मान खातिर चयनित जम्मो उन्नीस विभूति मन के सम्मान साँझ के गरिमामय वातावरण मा मुख्यमंत्री-निवास मा होइस। मुख्यमंत्री निवास मा श्री भूपेश बघेल जी (माननीय मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़) गमछा अउ सम्मान-पत्र भेंट करके जम्मो उन्नीस विभूति मन ला सम्मानित करिन। मुख्यमंत्री-निवास मा घलो श्री विजय मिश्रा अमित जी संचालन के दायित्व ला कुशलतापूर्वक सम्हालिन। 


*व्यवस्था* 


(1) *निमंत्रण* - डॉ. अनिल भटपहरी (सचिव, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग) अउ जिला समन्वयक द्वारा व्यक्तिगत फोन द्वारा सभागार के क्षमता ला ध्यान मा रखके निमंत्रण दे गिस तभो ले क्षमता ले ज्यादा उपस्थिति रहिस। उपराहा कुर्सी लगाके सब झन के बइठे के सुग्घर व्यवस्था करे गिस।


(2) *फोल्डर* - प्रवेश दुवारी के आगू एक टेबल मा अवइया मन के नाम एक रजिस्टर मा अंकित करके फोल्डर प्रदान करे गिस।


(3) *सेनेटाइजर* - प्रवेश दुवारी मा सेनेटाइजर उपलब्ध रहिस।


 (4) *नाश्ता* - सभागार मा बइठे जम्मो साहित्यकार तीर जाके  नाश्ता बाँटे गिस।


(3) *पानी* - नाश्ता के संगेसंग सबो झन ला पानी के बोतल तको वितरित करे गिस। उपराहा पानी बर दुवारी के बाहर पानी के बोतल उपलब्ध रहिस।


(4) *चाय* - प्रवेश सवारी के किनारे फुल टाइम बर कंटेनर मा गरम चाय अउ डिस्पोजल कप उपलब्ध रहिस। 


(5) *भोजन* - आमंत्रित मन के संख्या के अनुसार भोजन उपलब्ध रहिस। आगंतुक के संख्या अनुमान ले ज्यादा बढ़े के कारण अतिरिक्त भोजन के व्यवस्था करे गे रहिस। 


(6) *वाहन* - मुख्यमंत्री निवास जाए बर आयोग अउ संस्कृति विभाग डहर ले वाहन के व्यवस्था करे गे रहिस। सम्मान होए के बाद हमन वही गाड़ी मा सभागार वापिस घलो आएन। 


(7) *ठहरे के व्यवस्था* - सम्मानित होवइया विभूति मन जेकर लहुटे के साधन नइ रहिस, वोमन ला ठहराए के व्यवस्था करे गे रहिस।


*ये जम्मो व्यवस्था अँखियन देखी आय। कोनो किसम के अव्यवस्था मोला नइ दिखिस।*


*एक बड़का आयोजन मा संतोष अउ असंतोष दुनों किसम के बात सुने बर मिलथे फेर आयोजक मन जानथें कि एक आयोजन बर कतका पहिली ले कतका किसम के व्यवस्था करे बर अनेक तनाव झेलना परथे। व्यक्तिगत आयोजन अलग बात हे फेर सार्वजनिक आयोजन मा आयोजक ला कोनो प्रकार के व्यक्तिगत फायदा नइ मिले।*


*मोर अनुभव के अनुसार छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस के आयोजन सोला आना सफल रहिस। कोनो किसम के अव्यवस्था या कमी नइ रहिस। कोनो किसम के अप्रिय घटना नइ घटिस। अनेक जिला ले पधारे अनेक मयारुक साहित्यकार मन संग आत्मीय भेंट करे के सुअवसर मिलिस। सार्थक वक्तव्य सुने बर मिलिस। सरस कविगोष्ठी सुने बर मिलिस। सौहार्द्रपूर्ण वातावरण मिलिस।*


*छत्तीसगढ़ी लोकाक्षर परिवार के उपलब्धि*


विशेष उल्लेखनीय हे कि आयोजक डॉ. अनिल भटपहरी (सचिव, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग) छत्तीसगढ़ी लोकाक्षर के सदस्य आँय। 


सम्मानित होवइया डॉ. सुरेश देशमुख, डॉ. अनुसुइया अग्रवाल, डॉ. दीनदयाल साहू, एडमिन अरुण कुमार निगम, छत्तीसगढ़ी लोकाक्षर के सदस्य आँय। 


कविगोष्ठी के संचालक श्री किशोर तिवारी छत्तीसगढ़ी लोकाक्षर के सदस्य आँय। 


छत्तीसगढ़ी लोकाक्षर अउ छन्द के छ के करीब 30 सदस्य मन ये आयोजन मा सम्मिलित रहिन। 


*ये सफल आयोजन बर डॉ. अनिल भटपहरी जी अउ उनकर आयोग के टीम, संस्कृति विभाग के सचिव, संचालक अउ उनकर टीम बधाई के पात्र हवँय। संगेसंग  उत्कृष्ट संचालन बर श्री विजय मिश्रा अमित जी अउ कविगोष्ठी के सफल संचालन बर श्री किशोर तिवारी जी बधाई के पात्र हवँय।*


*अरुण कुमार निगम*

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श्लेष चन्द्राकर 9: *मोर‌ अनुभव -*

‘छत्तीसगढ़ी लोकाक्षर’ समूह के माध्यम ले‌ छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा आयोजित ‘28 नवम्बर छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस' के उपलक्ष्य मा “सम्मान समारोह अउ कवि सम्मेलन” के सूचना मिल गे रिहिस। मँय अपन‌ संकोची स्वभाव के सेती जावँव धुन नइ जावँव, सोचत-सोचत थोड़कुन‌ देर ले घर ले निकलेंव। अउ महंत घासीदास सभागार, रायपुर मा लमसम 12 बजे पहुँचेंव। पहुँच के देखथँव, सभागार खचाखच भरे रिहिस। बइठे बर घला जगा नइ रिहिस। तब मोला अहसास होइस मोला राज्यस्तरीय कार्यक्रम कार्यक्रम के पहिली सत्र उद्घाटन-सम्मान-संबोधन मा जल्दी आना रिहिस। अब्बड़ देर ले सभागार के दरवाजा तीर खड़े-खड़े‌ वक्तामन के उद्बोधन ला सुनत रहेंव। 

जइसे-तइसे मोला सभागार मा सीट मिलगे। सम्मान समारोह के बेरा डॉ॰ ब्यास नारायण दुबे जी, डॉ॰ बिहारीलाल साहू जी, श्री हरिप्रसाद निडर जी, डॉ॰ अनुसुईया अग्रवाल जी, डॉ॰ सुरेश देशमुख जी, श्री पुनुराम साहू जी, श्री अरुण निगम जी, डॉ॰ कुसुम माधुरी टोप्पो जी, श्री गिरवरदास मानिकपुरी जी, श्री रमेश विश्वहार जी, श्री बंधु राजेश्वर खरे जी, श्री श्याम वर्मा जी, श्री गुलाल वर्मा जी, डॉ॰ दीनदयाल साहू जी, श्री संदीप अखिल जी, श्री नवीन देवांगन जी, श्रीमती लता राठौर जी, डॉ॰ सुधीर पाठक जी, श्रीमती जयमती कश्यप जी अउ श्रीमती तृप्ति सोनी जी ला हमर महतारी भाखा छत्तीसगढ़ी सेवा करे बर अउ विकास मा अपन अतुलनीय योगदान देय बर सबोझन मन सम्मान झोंकिन येकर साक्षी बनेँव। 


भोजन के बाद कार्यक्रम के माई पहुना माननीय अमरजीत भगत जी(संस्कृति मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन), पगरइत माननीय कुंवर सिंह निषाद जी (संसदीय सचिव, छत्तीसगढ़ शासन), खास सगा श्री अन्बलगन पी.(सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, संस्कृति विभाग) डॉ॰ अनिल भतपहरी(सचिव, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग), श्री विवेक आचार्य(संचालक, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग) अन्य विद्वान मन अउ छत्तीसगढ़ी साहित्यकार मन के छत्तीसगढ़ी भाषा के मानकीकरण, छ.ग. के सांस्कृतिक तत्व अउ लोकनायक मन के ऊपर लेखन, राज-काज मा छत्तीसगढ़ी, आठवीं अनुसूची मा छत्तीसगढ़ी, पाठ्यक्रम व छत्तीसगढ़ी के ऊपर बड़ सुग्घर-सुग्घर अउ तथ्यात्मक विचार सुने बर मिलिस। 

छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग हा पहुना मन बर भोजन के व्यवस्था रखे रिहिस। ओखर घोषणा होइस ता लोगन मन भोजन भुला के पहिली अपन-अपन चिनपहिचान वाले मन ले मिले बर शुरू कर दिन अउ एक-दूसर के हालचाल जाने लागिन। आज के दिन ला यादगार बनाये सब सेल्फी ले बर अउ ग्रुप फोटो खिंचवाये लागिन। ये बीच मोला छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ अउ नामी साहित्यकार मन ला तीर ले देखे बर मिलिस। कुछ झन ले नवा परिचय होइस। अउ मोला मोर संगी मन ले घलो मिले के मौका मिलिस। 


कार्यक्रम के दूसर ‘काव्य पाठ' सत्र मा छत्तीसगढ़ के जम्मों जिला ले आये प्रतिनिधि रचनाकार मन के कविता, गीत, छंद अउ ग़ज़ल सुने बर मिलिस। सबो रचनाकार मन के सबके प्रस्तुति जोरदार रिहिस। आदरणीय चोवाराम बादल जी, पोखन जायसवाल जी, सुशील शर्मा नील जी, मोहन निषाद मयारु जी, राजेश निषाद जी, हेमलाल साहू जी, राकेश कुमार साहू जी, अजय अमृतांशु जी, मिलन मलरिहा, जगदीश हीरा साहू जी, डिजेन्द्र कुर्रे जी, धनीराम नंद ‘मस्ताना’ जी, सुकमोती चौहान जी,  प्रेमचंद साव जी, मानकदास मानिकपुरी जी, डॉ॰ अनुसुईया अग्रवाल जी, बंधु राजेश्वर खरे जी, किशोर तिवारी जी आदि मन अपन प्रस्तुति ले श्रोता मन के मन मोह लिस। जिनकर मन के नाँव ला सुने रेहेंव या जिनकर रचना मन ला पत्र-पत्रिका या सोशल मीडिया के माध्यम ले पढ़े रेहेंव उँन मन के प्रस्तुति ला प्रत्यक्ष देखे के मौका मिलिस हे। बड़े रचनाकार मन के प्रस्तुति ले मोला जे-जे सीखे बर मिलिस ओ बस ला मँय सदा सुरता रखहूँ । राज्यस्तरीय मंच मा मँहू ला अपन रचना पाठ के अवसर मिलिस। ये मोर बर बड़े उपलब्धि रिहिस हे। ओ बखत ला मँय कभू नइ भुला सकँव।

अंत मा मँय अतके कहना चाहत हँव। कि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस के पबरित अवसर मा बड़ जोरदार आयोजन रिहिस हे। मंच संचालक मन के संचालन स्तरीय रिहिस। सबो चीज के सुग्घर व्यवस्था रिहिस हे। येमा मोला छत्तीसगढ़ी भाखा के के बारे मा नवा-नवा अउ उपयोगी जानकारी मिलिस हे। अइसने कार्यक्रम आगू बछर मा जब भी, जेन जगा आयोजित होही, ओमा मँय संघरे के खच्चित प्रयास करहूँ। 


*श्लेष चन्द्राकर*

खैरा बाड़ा, गुडरु पारा, 

महासमुंद (छत्तीसगढ़)

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