Monday, 15 August 2022

बियंग- बाढ़ ले आये बढ़वार

 बियंग-   बाढ़ ले आये बढ़वार


असाड़ बुलक गे। सावनो निकलइया हे। लपरहा बादर हँ चुनावी डंगचगहा मन कस घूम -घूमके भासन दे - देके रहि गे। बिजली घलो दू  - चार घँव मटमटाइस। 

नवा बइला के नवा सींग चल रे बइला टिंगे- टिंग। 


किसान मुँहू फारे उप्पर डाहर ल देखत बोमियावत रहिगे - गिर भगवान गिर। उप्पर वाले भगवान हँ भुईंया के भगवान ल फेर एक घँव बेवकूफ बना दिस। बेवकूफ का बनाए बर लगही किसाने खुद बेवकूफ हे। तोर केहे भर म सब हो जही ? 

टीटही के गोड़ टाँगे ले सरग नइ टँगा जय। 


भिंदोल के बोमियाए ले बदरा बरस गे तब तो कर डरिस भगवान हँ भगवानी अउ सरकार हँ दुकानी। सरकार हँ बोर कोड़वाए के मसीन निकाल दे हे। मरहा - खुरहा किसान के नान - मुन, डोली - डांगर, खेत -खार ल खनके नाहर बना दे हे त तुम उप्पर वाले ल काबर सिमरौ - सोरियावौ। बोर नई कोड़वाए सकव ? माने तुम उप्पर वाले ल सुमर के खालहे वाले जीयत - जागत भारी भरकम शक्ति के खुल्लम-खुल्ला बिजती करत हौ। 


सरकारी रिन लेए बर  थोक बहुत कमीसन के जुगाड़ करलौ। रोकड़ा खरचौ , फोकट झन खुरचौ। तुँहर बोमियाए ले कुछु नई होवय। चुचुवावत -चिचियावत रहव। आजकल खुरचन के भरोसा बड़े -बड़े पहाड़ ल बिन खुरचे पार करे जा सकथे, खेत के मेड़ का चीज ये।

सरकारी तुर्रमखान मन जब देखिस, पानी नई गिरत हे। चारो मुड़ा ल सुख्खा घोसित कर दिन। चारा के बाढ़ ल आवत देख ललचाहा बाबू करमचारी मन के बसियाए-फुसियाए मुँहु पनिया गे। उन दुनियाभर के मगजमारी म लगगे। नवा - नवा योजना कागज म दउँड़े लगिस। 


झिल्ली म तोपाए - ढँकाए छानही वाले सरकारी आफिस। एक टाँग टूटे रेचेक -रेचेक बाजत खुरसी। ओ रेचका - खोरवा खुरसी म ईंटा टेकाए बइठे डेढ़ ले दू हुसियार बाबू। जनम के बीमरहा-केचकेचहा खेर -खेर करत पंखा के हावा लेवत योजना तैयार करथे। जेकर फायदा आम जनता अउ सरकार ल होवय चाहे झन होवय बाबू अउ ठेकादार ल बजुर होथे। 


ओइसने म बादर ल लहरावत देखके बाबू करमचारी मन के थोथना ओथर-ओरम गे। उन्कर मन म सरकारी खजाना के नई बरसे ले अपन थइली म परत अकाल के डर समा गे। घूस कहव के चढ़ावा मानौ, बाबू मन नरियर के तरी -तरी सौ -सौ के पाती दबाइन। मिलावटी तेल के दीया म घींव के बूड़े बाती जलाइन अउ भगवान के चरणार्थी-षरणार्थी होगे। 


घोड़ी के लात ल घोड़वे साहय। बरोबर के ल बरोबरे वाले सुनथे - देखथे-मानथे।


उही समे रदरद-रदरद अतका पानी गिरथे के नदियाँ, नरवा, डबरा, ढोड़गा सबो कोती पानी-च -पानी हो गे। बाबू करमचारी - सकलकरमी खुस होके तरी -तरी खिस -खिस दाँत -निपोरत हाँसे -खाँसे लगिन। 

काँही होवय भइया । इन्करे बने हे गा। सुक्खा परे म गुलाब जामुन, तरी -तरी होगे त रसगुल्ला।


 किसान फेर चुचुवाए लगिन। किसान पानी नई गिरय त टेटकके मर जथे अउ बरसथे त सबे बोहा जथे। 

माने टेटकना-अटकना, चुहना-बोहाना, खुरचना -मरना किसाने के भाग म होथे। 

किसान तरूवा धरके बइठ गे- बस कर भगवान ! 

बाबू करमचारी मन हुमन -हवन करवाए लगिन-बाढ़ आना चाही भगवान। 


बरोबर के ल बरोबरे वाले सुनथे - देखथे अउ करथे - निभाथे। बाढ़ आ गे। जगहा- जगहा भरका फूटे लगिस। घर-दुवार धसके-ओदरे लगिस। कतको मरे बरोबर जीयत -जागत मनखे मन मलमा म दब -दबके मर गे। आसरा के मोटरा ल धरे  -पोटारे कतको मनखेमन धारे -धार बोहाए लगिन। 


सरकार देखिन के बाबू करमचारी मन के आसरा के बाँध म सपना के पानी हँ टोम -टोम ले भर गे हे । सरकारो हँ भ्रस्टाचार म भरे-बँधाए खजाना के बाँध के गेट ल खोल दिस। बाँध के गेट खुलिस के दू -चार मनखे फेर बोहा गे। 


बन्ने होइस। बन्ने होइस। ओमन अभीन जीयत रहितीन त सरकार के आघू म अड़िया -थेभके खडा़ हो जातिन- राहत रासि दे ! क्षतिपूरति कर !! अब उन्कर राहत रासि अउ क्षतिपूरति के पइसा म बाबू करमचारीमन ल राहत मिलही। उनमन इन्करे पइसा म कलम के नांगर जोंतही। नवा फसल उगाही। हुकड़ -हुकड़के खाही। उँसर -पुँसर के खाही अउ हुँकड़ -हुँकड के दौरा करही। 


सकलकरमी-करमचारी मन जम्मो गरीबी रेखावाले रूनियाए चाउँर के बोरा ल खाली कर दिन । खजाना के पइसा ल बोरा म भर -भरके एती -उती मोटर -कार दऊँड़ाए लगिन। दू कोस के जगहा म बाढ़ के सेती घूम-फिरके चार कोस जाये बर परथे कहि-कहिके कार म दू के जगहा दस लीटर पिटरोल भरवइन। 

राहत सिविर म डोकरी -ढाकरी मन के जुन्नाहा झेंझरा लूगरा के पाल तानिन। मँगनी-जचनी अउ जनसहयोग के लुगरा म मोटहा कपडा़ (कनात) के जगहा पिलास्टिक पाल के बिल बनवाईन। 


मलमा म दबे -मरे मनखेमन ल निकाले बर पारा -परोस के मनखेमन के सहयोग ले गइस। ओमन मजुरी के जगहा पेपर म अपन गाँव के, घर के नाँव छपे -देखे के आसरा भर पाइन। 


सहींच् होगे गा ! पेपर म गाँवे भर के नाव रिहिसे। ताहेन जम्मो जघा साहेब बाबू करमचारी मन के फोटू देखे बर मिलिस। बडे़ -बडे़ टेंड़ाए मेछा के बीच बटरेंगवा-बटरेंगवा आँखी वाले। 


राहत सिविर मन म जा -जाके साहेब बाबू मन नड्डा, मुरकू अउ मिच्चर बाँटके तार दिन। ओकर जगहा पौस्टिक अहार, खाना के पाकिट, सेव, केरा के बिल बनाके अपनमन परिवार सहित पगुरावत तर गे। 


जगा -जगा बाढ़ सहयता दल बन गे। जेमन सरकार अउ समाज दूनो जघा ले चंदा के रपोटिन अउ चाँदी बना लिन। ओकरे भरोसा बाघ गुर्रावत अपन छितका - छेपका कुरिया ल सोन कस लंका गढ़ - मढ़ डारिन। 


राजा सरकार हवई जहाज म चढके उपर ले उढावत बाढ़ ल देखे बर आइन। वो अनभो ले लगिन के बोहावत मनखे कइसे दिखथे। मरत मनखे के आसरा उन्कर आँखी म कतेक पन चमकथे। उड़त -उड़त सरकार के नजर पेड़ म चघे मनखे के ऊपर जा परिस। डोर ल ओरमा दिस - धरबे त धर, नहि ते धारे धार जा। मर -जी तोर मरजी।

 

मनखे डोर ल धर के ऊपर चढ़ गे अउ बाँच गे। ओला देखे - देखाए बर राजा सरकार हँ बंगला म ले गे। अपन खुरसी म बइठ, ओला बाजू म खडा़ करके फोटु खिंचवइन। 

पीछु जुवार बाबू करमचारी -सकलकर्मी घला पारी -पारी ले ओ मुरझुठहा मनखे संग फोटु खिंचवइन। उन सब फोटू के खिंचवावत भर ले चाइना मॉडल म देखउटी मुस्कावय। 


मने -मन गारी देवय - जी के तैं हँ अपन नाम के राहत रासि ल कटवा दिये रे चंडाल ! माने हमरो थैली ल काट दिए। 

मरहा मनखे सरकार, साहेब, बाबू, करमचारी सबो के बीच घेराए कुकुर कस उन्कर गिध - दृष्टि ल पढ़ डारिस। ओ हँ थोथना ओरमाए अइसे खडे़ हावय जइसे बडे़ घर के बने -बने पहिरे ओढ़े उतलइन, उजबक अउ अवारा लइकामन के बीच चोरी करत पकडाए नंगरा घर के लइका ठाढ़ नंगरा खडे़ हे। 


अब देखहु आफिस के दुवारी मन म नवा -नवा गाड़ी के फूल, चदैंनी -गोंदा कस रिगबिग ले फूल जाही। शहर - नगर म साहेब बाबू मन के बंगला हँ गोल्लर कस हुँकड़त अँड़ियाए -अँटियाए लगही। कुल मिलाके बाढ़ ले आए बढवार - पइदावार अब दिखे लगही, चक्क - चकाचक।


मैं तो बिनती बिनोथौं- देष के बढ़वार खातिर अइसन बाढ़ के आना नंगत जरूरी हे।


धर्मेन्द्र निर्मल

9406096346

सुरता-महेन्द्र देवांगन "माटी" जी के


 

सुरता-महेन्द्र देवांगन "माटी" जी के


समाचार पत्र के ऊपर ले गुजरइया हरेक नजर महेंद्र देवांगन माटी जी ल जानथे अउ पहिचानथे। साहित्य म रूचि रखइया पाठक मन तो माटी जी ल खोज के पढॅंय। परब-तिहार के बेरा के अंक म तो माटी जी के प्रकाशित रचना ह विशेष आदर पावय, काबर के परब तिहार ले जुड़े लोकमान्यता,परम्परा,तिहार मनाय के तरीका,विधि-विधान ल बड़ सुग्घर ढंग ले माटी जी ह अपन रचना म प्रस्तुत करत राहय। महेंद्र देवांगन"माटी"जी के प्रसंशक अउ पाठक मैं अपन महाविद्यालयीन अध्ययन समय ले हॅंव। ओ समय ले ले के आज तक उनला सरलग पढ़त हॅंव। शिक्षण कार्य म आय के बाद पठन के संग लेखन म घलव हाथ आजमाय ल धर लेंव।इही बीच भाई हेमलाल साहू जी के कृपा ले परमपूज्य गुरुदेव श्री अरुण कुमार निगम जी के सानिध्य मिलिस। छन्द के छ सत्र-03 के कक्षा म गुरुदेव चोवाराम बादल अउ गुरु दीदी आशा देशमुख मनके आशीर्वाद मिलिस। छन्द के साधना शुरू होइस। गुरुज्ञान प्रसाद के परताप आय जेखर कारण फेसबुक म छत्तीसगढ़ के साहित्य जगत के ख्यातनाम साहित्यकार मन फेसबुक फ्रेंड बनना स्वीकार करत गिन। एक दिन रतिहा के बात आय फेसबुक ल कोचकत रहॅंव के महेंद्र देवांगन माटी जी के फोटू मोला दिखगे add friend लिखाय, देरी कहॉं करतेंव तुरते फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दियेंव। बिहनहा देखेंव त माटी जी ह मोर फ्रेंड रिक्वेस्ट ल स्वीकार कर ले राहय।मन म बड़ खुशी होइस। अब सरलग माटी जी के रचना पढ़े बर मिले लगिस। छन्द कक्षा म अभ्यास के दौरान लिखाय रचना ल फेसबुक म सेयर करे के बड़ उत्सुकता राहय। रचना म माटी जी के प्रतिक्रिया अउ प्रोत्साहन सरलग मिले लगिस। एक दूसर ल जाने चिन्हे लग गेन। 10 जनवरी 2018 के गुरुदेव के पोस्ट के माध्यम ले सुखद समाचार मिलिस के माटी जी अब हमर छन्द के छ सत्र-06 के छन्द साधक बनगे हे।इही बीच असमंजस देखव, सत्र-06 म गुरु के भूमिका म गुरुदेव जी ह अजय अमृतांशु सर के साथ मोरो नॉंव ल शामिल कर दिये हे। असमंजस एखर सेती रहिस के जेखर रचना ल पढ़त पढ़त मैं लिखे बर धरे रहेंव अब ओखरे रचना ल जॉंचे के बड़का दायित्व निभाना परही। महेंद्र देवांगन माटी जी के महानता देखव उन कब्भू अपन आप ल वरिष्ठ के रूप म प्रस्तुत नइ करिन। हमेशा मन लगाके छन्द अभ्यास करिन अउ कक्षा के मार्गदर्शन ल सहज स्वीकार करिन।

माटी जी के अन्दर एक बीस वर्षीय युवक सहीं सीखे के ललक अउ उत्साह देखते बनय। आजो ओ दृश्य ह मोर बर वंदनीय अउ प्रेरणादायक हे। लगभग चार महिना बाद मनीराम साहू मितान जी के संयोजन म दिनांक 13/05/2018 के सिमगा म छन्द के छ के तीसरइया आयोजन होइस। इही आयोजन म मोर भेंट श्री महेन्द्र देवांगन माटी जी ले आमने-सामने होइस। माटी जी गला मिलके भेंट करे रहिन। आत्मीय भेंट के ओ सुरता जब जब आथे ऑंखी म ऑंसू भर देथे। सेना के जवान सहीं पॉंच हाथ ऊॅंचा गोरिया-नरिया पोठ शरीर वाले जवान के भीतर सरल सहज सौम्य बहुत भावुक कोंवर कवि हृदय वाले व्यक्तित्व के दर्शन होय रहिस। साहित्य के ओ विभूति ह कच्चा काया के तासिर ल जइसे जानत रहिस हे तभे अपन आप के परिचय महेंद्र देवांगन "माटी" देवत कार्यक्रम म मार्मिक मनभावन दोहा अउ रोला के प्रस्तुति दिये रहिस हे। ए कार्यक्रम के बाद मेल-जोल अइसे बाढ़िस के जिला म आयोजित होवइया लगभग सबे कार्यक्रम म उॅंखर साथ मंच शेयर यर करे के अवसर मिलत राहय। जिला ले बाहिर के कार्यक्रम चाही ओ हमर छन्द के छ के आयोजन होवय के अन्य साहित्यिक मंच के आयोजन होवय, जब भी जावन ज्ञानू मानिकपुरी जी, बोधनराम निषादराज जी, डी पी लहरे जी, रामकुमार साहू जी, अश्वनी कोसरे जी, मैं अउ माटी जी सॅंघरा आवन-जावन। छन्द के छ के चौथइया आयोजन के आयोजक बने के सौभाग्य जब कबीरधाम जिला ल प्राप्त होइस त ये आयोजन ल सफल बनाय बर माटी जी तन मन धन ले सहयोग तो करबे करिन संगे संग उॅंखर गहिरा अनुभव ले बहुत मदद मिलिस। गुरुजन मनके मार्गदर्शन अउ आशीर्वाद ले सबोझन जुरमिल के कार्यक्रम के आयोजन दायित्व ल ठीक ठीक निभा पायेन। माटी जी के व्यवहार जम्मो झन संग मित्रवत राहय। उॅंखर साहित्यिक अनुभव ले हमेशा कुछ न कुछ सीखे ल मिलय। एक बेर उन बतावत रहिन के कोई अजनबी महिला ह बस म सफर के दौरान उॅंहला पहिचान लिस अउ अपन आप ल उॅंखर प्रसंशक बताइस। जइसे सॉंगर-मोंगर माटी जी ल पहिली बार सिमगा म देखे रहेन वइसने सॉंगर-मोंगर अपन 15 अगस्त के पोस्ट म तिरंगा ल सलामी देवत दिखिन। कोन जानत रहिस के ये पोस्ट ह उॅंखर आखरी पोस्ट हो जही। 16 अगस्त के लोकाक्षर म उॅंखर निधन के दुखद समाचार पोस्ट होइस। फेर ये दुखद खबर म कोनो विश्वास नइ करिन। कुछ समय बाद उॅंखर बेटी ले संपर्क साधे गिस, निधन के खबर के खंडन आइस त थोकन राहत मिलिस। तहॉं निधन के खबर फेर वायरल होय लगिस। इही बीच गुरुदेव श्री निगम जी ले बात होइस गुरुदेव बड़ व्याकूल लगिन। मिनेश साहू जी ले बात होइस उहून बहुत ब्याकूल दिखिन। माटी जी के पोस्टिंग पण्डरिया म रहिस, उन उहें निवासरत रहिन। पण्डरिया वाले साहित्यकार साथी मन ले फोन करके पूछेन उहू मन ब्याकूल दिखिन। घण्टा दू घण्टा बाद आखिरकार ओ दुखद खबर ह पूरा छन्द के छ परिवार सहित छत्तीसगढ़ के साहित्यक जगत अउ साहित्यक रूचि रखइया पाठक मन ल ऑंसू गिरा के रोय बर मजबूर कर दिस।16अगस्त 2020 माटी जी हमर बीच नइ रहिन। माटी जी अपन कालजयी रचना मन म सदा अमर रइहीं। उॅंखर पुण्यतिथि के अवसर म उनला शत् शत् नमन। विनम्र श्रद्धांजलि। 💐💐💐🙏


सुखदेव सिंह"अहिलेश्वर"

Sunday, 14 August 2022

समीक्षा- पोखनलाल जायसवाल


 समीक्षा- पोखनलाल जायसवाल

*'बहू हाथ के पानी' - खुशहाल घर-परिवार के प्रतीक आय।*


         छत्तीसगढ़ी साहित्य दिनोंदिन गद्य साहित्य ले भरत जावत हे। पाछू कुछ बछर ले छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य म बढ़िया लेखन होवत हे।पुरखा साहित्यकार मन छत्तीसगढ़ी साहित्य ल बड़ जतन ले सिरजाय हें। आज उँकर दे थरहा ले रोपे सजोर पउधा मन के फरे-फूले के दिन आगे हे। कुछ पुरखा मन सरग ले अशीष देवत हें, त कुछ मन छात-छात हाथ धरा के सिखोवत हें। अपन पुरखौती ल धरवट सहीं सहेज के रखे के लइक बनावत हें। गीत कविता के सकला (संग्रह) बड़ निकलत हे। स्वागत करे के हे, फेर इही मन थोरिक अउ मिहनत करके गद्य साहित्य के रद्दा ल चतवारहीं, त छत्तीसगढ़ी के मान अउ बाढ़े लगही। अभी गद्य साहित्य के धरवट कमती हे। आज छपास बीमारी के चलत कुछ मन मिहनत ले बाँचे के उदिम करत हें, एकर ले भागत हें, घलव कहे जा सकत हे। गद्य साहित्य लिखे बर समय जादा चाही। कतकोन मन इही समय के रोना रोथें, अउ अपन क्षमता ल कम आँक लेथें। कुछ मन अपन कमजोरी ल छुपाय बर यहू कहे लग गेहें कि अब लोगन तिर पढ़े बर समय नइ हे। लम्बा-लम्बा कहानी अउ लेख ल पढ़े ले असकटाथें। क्रिकेट के पंडित मन आजो असली खिलाड़ी उही ल मानथें, जेन खिलाड़ी टेस्ट मैच खेल लेथे। वइसने सपूरन साहित्यकार बने बर पद्य के संग गद्य के चेत करे ल परही। कुछ गद्य साहित्य म काम तो होय हे, फेर डायरी ले किताब के शिकल म नइ आ पावत हे, यहू लागथे। छत्तीसगढ़ी पत्र-पत्रिका के कमती घलव ह एक ठन वजह हो सकत हे। साहित्य सिरिफ गीत कविता लिखई ह नोहय। यहू ल सबो लिखइया मन ल समझे ल परहीं। बेरा के संग लेखन के विषय ल बदलत समाज हित म लिखे के जरूरत हे। साहित्य अपन समे के समाज के रपट आय। कोनो समे के साहित्य ओ समे के समाज के बारे म जानबा देथे। अपन समे के समाज के उत्थान अउ समाज म व्याप्त बुराई अउ कुरीति मन के नाश बर लिखई साहित्यकार के धरम आय। पारिवारिक अउ सामाजिक चेतना बर लिखइया ल समाज हाथों-हाथ उठा लेथे। जब-जब कहानी अउ उपन्यास के बात आथे, कथासम्राट मुंशी प्रेमचंद जी सुरता करे जाथे। मुंशी प्रेमचंद जी के बेरा म समाज म कतकोन समस्या रहिन। जेकर ऊप्पर उन खूब लिखिन। कथा-कहानी अउ उपन्यास के चर्चा प्रेमचंद के बिगन अधूरा माने जाथे। उँकर मुताबिक उपन्यास मानव के चरित्र का चित्रण है। आजो कतकोन समस्या हें, स्वरूप भले बदले हे। किसान के पीड़ा, जात-पात, अमीर-गरीब, जइसे कतको किसम के असमानता अउ भेद समाज ल घुना सहीं करोवत हे। बट्टा लगावत हे। आगू बढ़े ले रोकत हे। एकर ऊप्पर लिखे के जरूरत हे।

      तुलसीदास जी मन अपन लिखई ल स्वांतःसुखाय जरूर बताय हें, फेर उँकर लिखना जग बर वरदान बनगे हे। आजो स्वांतःसुखाय लिखे म कोनो आपत्ति नइ हे। फेर स्वांतःसुखाय ले उबर के लिखे के बेरा हे। आज स्वांतःसुखाय के मायने बदल गे हे या फेर लिखइया मन एकर भाव ल बदल डारे हें। जिनगी म मया परेम जरूरी हे। फेर मया-परेम के जउन गीत लिखे जाथे वो मन चरदिनिया आय। मन बहलाव आय। मया-परेम जिनगी म होना जरूरी आय, फेर एकर ले पेट नइ भरय। पेट भरे बर उदिम करना पड़थे। 

          परिवार के जम्मो मनखे के पेट भरे के संसो घर के माई मुड़ी ऊपर रहिथे। पारिवारिक अउ समाजिक जिम्मेदारी घलव उँकरे मुड़ म रहिथे। एक कोति कन्या दान करथे तव दूसर कोति बहू हाथ के पानी पिए के साध घलव मरथे।

         'बहू हाथ के पानी' श्री दुर्गा प्रसाद पारकर के लिखे एक उपन्यास आय। जेकर कथानक अउ घटनाक्रम छत्तीसगढ़ के आरो देथे। इहाँ के सामाजिक तानाबाना अउ आर्थिक पहलू ल अपन भीतर समेटे हवय। अइसे भी उपन्यास ऐतिहासिक घटना नइ ते सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक विषय अउ विसंगति के संग साँस्कृतिक मूल्य मन ल समोखे रहिथे। 

          छत्तीसगढ़िया के भलमनसाहत हे, दूसर के दुख पीरा ल अपन मान सहारा दे के ठगाय के चित्रण हे, त परदेशिया मन के चतुरई अउ ठगफुसारी ल वर्णन कर उँकर ले सावचेत रहे के संदेश हे। छत्तीसगढ़ ल चरागाह समझत इहाँ कतको चिटफंड कंपनी आइन अउ सब ल लूट भगागे। बाँचे रहिगे त पछतावा अउ नता-गोत्ता म अनबनता। अपने ले विश्वास टूटगे। पढ़ई लिखई ले जिनगी कइसे सुधरथे एकर साखी हे ए उपन्यास। छत्तीसगढ़ के सामाजिक ताना-बाना अउ बर-बिहाव ल लेके इहाँ के परम्परा अउ लोक मानता देखे बर मिलथे। देशभक्ति के भाव हे त लइकई मति म लइका मन ले होवय गलती, गँवई-गाँव म नशाखोरी, अंधविश्वास, रोग-राई के डक्टरी इलाज छोड़ बइगा-गुनिया के चक्कर, शहरी वातावरण के नकल करत खेती-खार ल बिगाड़ भेड़ चाल चलत कंगाल होवत छत्तीसगढ़िया के दुर्दशा के संग घर बँटवारा के पीरा अउ नता-गोत्ता सुवारथ के भेंट कइसे चढ़थे, ए सबो वर्णन मन 'बहू हाथ के पानी' ल अपन समे के चर्चित उपन्यास के श्रेणी म खड़ा करथे। बहू हाथ के पानी सुनतेच मन म एक साध अउ अभिलाषा जागथे। इही साध ल सँजोए दुर्गा प्रसाद पारकर जी के लिखे ए पारिवारिक उपन्यास के भाषा शैली म कथानक के हिसाब ले प्रवाह दिखथे। उपन्यास म आय जगहा के नाँव अउ गायत्री परिवार के संग पंथ छत्तीसगढ़ के परिवेश ल बतावत हे। छत्तीसगढ़ी के संग अँग्रेजी के शब्द मन के बढ़िया प्रयोग होय हे। मुहावरा अउ हाना मन के सुग्घर प्रयोग मिलथे। पात्र मन संग होय मुँहाचाही म व्यंग्य के सुर घलव दिखथे। संवाद मन म बढ़िया गढ़ाय हे। चरित्र मन के भाव बढ़िया ढंग ले उभरे हे। 

      ए उपन्यास म नारी पात्र मन अतेक जादा उभरे हें, कि 'बहू हाथ के पानी' ल नारी-विमर्श के उपन्यास कहे जा सकथे।छत्तीसगढ़ के नारी के सबो रूप के दर्शन पाठक ल ए उपन्यास म होही। 

      सरला ए उपन्यास के मुख्य किरदार आय। जउन सुशील, सुसंस्कारित, समर्पण के मूर्ति, सुशिक्षित आधुनिक नारी के अगुवाई करथे। उहें निरुपमा बहू के जम्मो भलमनसई ल ताक म रख के अंधविश्वासी अउ अप्पढ़ सास के पात्र संग नियाव करत दिखथे।

      दुलारी धर्मपरायण, सास ससुराल के हितैषी, पतिव्रता, जमाना के संग चलइया विचारवान अउ साहसी नारी ए। हंसा घर के लाज ल सम्हाल करइया अउ सहनशील नारी के संग बड़ मिहनती अउ अपन परन पूरा करइया। बैसाखिन जइसन ललचहिन अउ स्वार्थी बहू के आय ले घर परिवार के सुमता सुलाव ल गरहन धर लेथे, घर के बिगाड़ तय हो जथे। त सरला जइसे सरल सुभावी नारी के रहिते घर सरग जनाथे अउ नता गोत्ता म मया-परेम के संग विश्वास घलव अपन जरी खोभे रहिथे। तब जाके कहूँ सियान मन कहिथे-  'बहू हाथ के पानी' पिए के साध अब पूरा होवत हे।

      कोनो सगा पहुना के आय ले जेन घर म स्वागत म 'बहू हाथ के पानी' मिलगे त समझव के वो घर खुशहाल हे अउ परिवार समृद्ध अउ संस्कारित परिवार आय। तभे तो बर-बिहाव म नइ आ पाय नता गोत्ता अउ परोसी मन कहिथे- 'बहू हाथ के पानी' पिए के आस म डहरचलती आय हन।


रचना- बहू हाथ के पानी

रचनाकार- दुर्गा प्रसाद पारकर

प्रकाशक- आशु प्रकाशन रायपुर

पृष्ठ सं. 213

मूल्य- 250/-


पोखन लाल जायसवाल

पठारीडीह पलारी

जिला- बलौदाबाजार छग.

Saturday, 13 August 2022

आजादी के अमृत महोत्सव म विशेष... आजादी के सिपाही - ठाकुर प्यारेलाल सिंह







 

आजादी के अमृत महोत्सव म विशेष...


आजादी के सिपाही - ठाकुर प्यारेलाल सिंह 




आज हमन आजादी के अमृत महोत्सव मनाथन. ये आजादी पाय बर भारत माता ह अपन कतको बेटा -बेटी मन के कुर्बानी दिस. अब्बड़ झन क्रांति कारी मन ल अ़ग्रेज शासन ह फांसी म चढ़ा दिस. भारतीय जनता मन उपर नाना प्रकार ले अत्याचार करे गिस. तभो ले हमर देश अउ प्रदेश के नेता अउ जनता मन हा गोरा मन के आगू नइ झुकिस.

   आजादी के लड़ाई म हमर छत्तीसगढ म पं. सुंदर लाल शर्मा, वामन लाल लाखे, ई.राघवेन्द्र राव, पं. रविशंकर शुक्ल, ठाकुर छेदीलाल सिंह अउ ठाकुर प्यारेलाल सिंह जइसे  जुझारू,कर्मठ अउ मातृभूमि बर समर्पित नेता रिहिन  हे. ठाकुर प्यारेलाल सिंह  ल आजादी के आंदोलन के अर्जुन कहे जाथे.


   त्याग अउ न्याय मूर्ति ठाकुर प्यारेलाल सिंह के जनम 21 दिसंबर 1891 ई. म राजनांदगांव -खैरागढ़ मार्ग म ठेलकाडीह से  बुरती दिशा म  3 किलोमीटर दूरिहा    सेम्हरा दैहान गांव म होय रिहिस हे. ये ग्राम पंचायत डुमरडीहकला के आश्रित गांव हरे. ठाकुर प्यारेलाल लाल सिंह जी के 

 के पिताजी के नांव ठाकुर दीन दयाल सिंह अउ महतारी के नांव नर्मदा देवी रिहिन हे. ठाकुर साहब के पिताजी राजनांदगांव के प्रतिष्ठित स्टेट स्कूल के प्रथम प्रधानाचार्य रिहिन हे अउ बाद म शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारी घलो बनिन.

ठाकुर साहब के पिताजी ह शांत, गंभीर अउ अनुशासन प्रिय मनखे रिहिन. प्यारेलाल के प्राथमिक शिक्षा राजनांदगांव म अउ उच्च शिक्षा रायपुर, नागपुर, जबलपुर अउ इलाहाबाद म होइस हे. बी. ए .पास करे के बाद सन् 1916 म इलाहाबाद विश्वविद्यालय से वकालत पास करिन .


    छात्र मन के हड़ताल के अगुवाई करिन 


     आजादी के लड़ाई के समय म जब हमर देश म लाल- बाल- पाल के जोर चलत रिहिन हे त ठाकुर साहब बंगाल के कुछ क्रांतिकारी मन के संपर्क म आइस अउ क्रांतिकारी साहित्य के प्रचार करत  अपन राजनीतिक जीवन शुरू करिन. इही  समय ठाकुर साहब स्वदेशी कपड़ा पहने के व्रत ले लिस . युवावस्था म  विद्यार्थी मन ल संगठित करे के काम करिन. राजनांदगांव म 1905 में ठाकुर साहब के अगुवाई में छात्र मन की पहली हड़ताल होइस. ठाकुर साहब अपन सहयोगी छविराम चौबे अउ गज्जू लाल शर्मा के संग मिलके राजनांदगांव म राष्ट्रीय आंदोलन ल ठाहिल बनाइन.


येहा देश के छात्र मन के पहली हड़ताल माने जाथे.


     राजनांदगांव म सरस्वती पुस्तकालय के स्थापना 


 सन 1909 म ठाकुर प्यारेलाल सिंह ह राजनांदगांव म सरस्वती पुस्तकालय के स्थापना करिन. आगू चल के येहा राजनीतिक गतिविधि के जगह बनगे. आगू  चल के ये पुस्तकालय ल  शासन ह  जब्त कर लिस.

ठाकुर साहब ह पढ़ईया  लइका मन के जुलूस म वंदेमातरम के नारा लगाय. वो बेरा म अइसन करना अपराध माने जाय.पर प्यारे लाल  सिंह जी डरने वाला मनखे  नइ रिहिन  हे. सन 1916 में ठाकुर साहब ह  वकालत चालू करिन. पहली दुर्ग म फेर बाद म रायपुर म वकालत करिन. कम समय म शठाकुर साहब ह  वकालत म प्रसिद्ध होगे.


   सितंबर 1920 म कलकत्ता म लाला लाजपत राय के अध्यक्षता म कांग्रेस के विशेष अधिवेशन आयोजित होइस. येमा गांधी जी के नेतृत्व म असहयोग आन्दोलन चलाय के स्वीकृति दे गिस. फेर कांग्रेस के अधिवेशन नागपुर म 26 दिसंबर 1920 म होइस जेकर अध्यक्षता विजय राघवाचार्य करिन. ये अधिवेशन म हमर छत्तीसगढ ले आने नेता मन के संग ठाकुर प्यारेलाल सिंह ह घलो शामिल होइन. रोलेट एक्ट अउ जलियांवाला बाग़ हत्या कांड के सेति देश भर म अंग्रेज सरकार के विरुद्ध चिंगारी सुलगत  रिहिस हे. 


   अइसन समय म गांधी जी ह आह्वान कर चुके रिहिन  कि अंग्रेज सरकार के गुलामी ले छुटकारा  पाय खातिर स्थानीय समस्या ल आधार बना के असहयोग आन्दोलन चालू करय. 



   बी.एन.सी. मिल के बारे म जानकारी


 वो समय राजनांदगांव म बी.एन.सी.मिल्स चलत रिहिसि.बंगाल -नागपुर काटन मिल्स म हजारों मजदूर काम करय. येकर स्थापना 23 जून 1890 म होय रिहिस हे अउ उत्पादन के काम नवंबर 1894 म चालू होइस हे.  वो समय राजनांदगांव म वैष्णव राजा बलराम दास के राज्य चलत रिहिन  हे. राजा साहब मिल के संचालक बोर्ड के अध्यक्ष रिहिन  हे. ये मिल्स के निर्माता बम्बई के मि. जे.वी. मैकवेथ रिहिस हे. कुछ समय चले के बाद मिल ल घाटा होइस. येकर सेति ये मिल ल कलकत्ता के मि. शावालीश कंपनी ह खरीद लिस  जउन ह नांव बदलके बंगाल -नागपुर काटन मिल्स कर दिस. स्थापना के समय येकर नांव

सी.पी. मिल्स रिहिस हे.


 मजदूर मन के  36 दिन के ऐतिहासिक हड़ताल के अगुवाई 


सन 1919 ले ठाकुर प्यारेलाल सिंह ह राजनांदगांव के मजदूर मन ल एक करके जागृति फैलाय के काम चालू कर दे रिहिन  हे. अंग्रेज शासन के समय म जनता के शोषण जिनगी के हर पहलू म आम बात रिहिस हे. इहां के मजदूर मन के नंगत शोषण होत रिहिस हे. मिल  मालिक ह मजदूर मन ले 12- 13 घंटा काम लेय .येकर ले सन् 1920 म बी.एन.सी. मिल्स के मजदूर मन म अंग्रेज सरकार के विरुद्ध असंतोष फैलगे. 


  अइसन बेरा म छत्तीसगढ़ म मजदूर आंदोलन के प्रमुख केन्द्र राजनांदगांव ह बनगे.ठाकुर प्यारे लाल सिंह अउ डॉ.बल्देव प्रसाद मिश्र मजदूर यूनियन के अगुवाई करय. ये काम म शिव लाल मास्टर अउ शंकर खरे सहयोग करय.


सन्  1920 में असहयोग आंदोलन के बेरा म ठाकुर प्यारेलाल सिंह  के अगुवाई म अप्रैल 1920 में बीएनसी मिल्स  के मजदूर मन  के  36 दिन के  ऐतिहासिक हड़ताल होइस. अत्तिक लंबा समय तक चलने वाला ये  देश के पहली हड़ताल रिहिस हे. ये हड़ताल ले राजनांदगांव के अब्बड़ सोर होइस. ये आंदोलन ले ठाकुर साहब के प्रसिद्धि देश भय म फैलगे. 

संस्कारधानी ह राष्ट्रीय आंदोलन के मुख्यधारा ले जुड़गे.


     

 असहयोग आंदोलन के समय वकालत छोड़िन


   गांधी जी के नेतृत्व म जब देश भर म असहयोग आंदोलन ह  चालू होइस त ठाकुर साहब ह अपन वकालत छोड़ दिस. राजनांदगांव म  राष्ट्रीय विद्यालय के स्थापना करिन. हजार भर के संख्या में चरखा बनवा के जनता ल  बांटिन ,चरखा के महत्व समझाइस अउ खादी के प्रचार करिन . ठाकुर साहब खुद खादी  पहने  लागिस. राजनांदगांव ले हाथ ले लिखे पत्रिका घलो निकालिन   जउन ह  जन चेतना  बर अब्बड़ सहायक होइस.


 झंडा सत्याग्रह म भागीदारी 


  सन 1923 में झंडा सत्याग्रह चालू होइस  त ठाकुर  साहब ल प्रांतीय समिति द्वारा दुर्ग जिला ले सत्याग्रही भेजे के काम सौंपे गिस . नागपुर म सत्याग्रह आंदोलन चालू होइस.एकदम जल्दी नागपुर सत्याग्रह के केंद्र बन गे.


    मजदूर मन के दुबारा हड़ताल


 सन 1924 में राजनांदगांव के मिल मजदूर मन ठाकुर साहब की अगुवाई में फिर हड़ताल करिन. कतको मन के गिरफ्तारी होइस. ठाकुर साहब पर सभा लेय अउ भाषण देय बर रोक लगा दे गिस. ठाकुर साहब  ल जिला बदर कर दे गिस .राजनांदगांव ले निष्कासित करे के बाद सन 1925 म ठाकुर साहब रायपुर चले गिस अउ आखरी तक ऊंहचे रहिके अपन राजनीतिक काम मन ल संचालन करत रिहिन. 


   सविनय अवज्ञा आंदोलन के नेतृत्व 


     सन 1930 में गांधी जी द्वारा चालू करे गे  सविनय अवज्ञा आंदोलन म  ठाकुर साहब बढ़- चढ़कर भाग लिस.शराब दुकान म धरना दिस. ठाकुर साहब किसान मन मा जागृति फैलाय बर अंग्रेज शासन लगान मत दो, पट्टा मत लो आंदोलन चलाइस. एकर  सेतिज्ञ ठाकुर साहब  ल 1 साल के सजा दे गिस. सिवनी जेल म  भेज दे गिस. गांधी- इरविन समझौता होइस त आने  राज -बंदी मन के संग रिहा होइन.

   सन 1932 में जब सत्याग्रह फिर से चालू होइस त ठाकुर साहब पंडित रविशंकर शुक्ल के संगे संग आने नेता मन संग संचालन के दायित्व संभालिन. 26 जनवरी 1932 में गांधी चौक मैदान में सविनय अवज्ञा के कार्यक्रम के संबंध में भाषण देत  समय ठाकुर साहब ल अंग्रेज सरकार गिरफ्तार कर लिस .  2 साल के कठोर सजा अउ जुर्माना लगाय गिस. ठाकुर साहब जब जुर्माना नहीं देइस त अंग्रेज सरकार ह उंकर  संपत्ति  ल कुर्की कर दिस . ठाकुर साहब के वकालत के लाइसेंस ला जप्त कर लिस. जेल के सी क्लास म रखे गिस.


  जेल से छूटे के बाद  ठाकुर साहब फिर से आजादी के लड़ाई अउ जनसेवा बर समर्पित होगे.


   हिंदू -मुस्लिम एकता बर काम  


1933 में वह महाकौशल अंग्रेज कमेटी के मंत्री चुने गिस. 1938 तक ये पद म रहिके पूरा प्रदेश के दौरा करिन .  कांग्रेस संगठन ल फिर से मजबूत करे के काम करिन.  सन 1937 में ठाकुर साहब विधानसभा के सदस्य चुने गिस.  रायपुर नगर पालिका के अध्यक्ष घलो निर्वाचित होइस. ये  पद म रहिते  ठाकुर साहब राष्ट्र जागरण और हिंदू -मुस्लिम एकता बर काम करिन. डॉ बी.एन. खरे के मंत्रिमंडल में कुछ समय तक शामिल रिहिन.


तीसरा मजदूर आंदोलन


 रायपुर म  निष्कासन के समय घलो ठाकुर साहब के धियान राजनांदगांव के मजदूर मन डहर राहय.ये बीच म बी.एन.सी.मिल्स के मालिक मन मजदूर मन के पगार म 10 प्रतिशत कटौती कर दिस. येकर ले मजदूर मन  फेर नाराज होगे अउ हड़ताल के तैयारी करे लागिस. ठाकुर साहब ह मजदूर मन के जायज मांग के समर्थन करिन. इही बीच रूईकर समझौता के कारण 600 मजदूर बेकार होगे. मजदूर मन फिर से त्यागमूर्ति ठाकुर साहब के पास समस्या के निदान बर गोहार लगाइन. ठाकुर साहब ह नया समझौता प्रस्ताव प्रस्तुत करिन जेला मिल प्रबंधन ह स्वीकार कर लिस अउ काम ले निकाले गे मजदूर मन ल फिर से नौकरी मिलगे. ठाकुर साहब के राजनांदगांव ले जिलाबदर के आदेश घलो निरस्त होगे. ये प्रकार ले सन् 1937 म ठाकुर साहब के नेतृत्व म मजदूर मन के तीसरा आंदोलन सफल होइस.  ये प्रकार ले 1918 ले 1940 तक मजदूर आंदोलन के इतिहास म ठाकुर साहब ह सक्रिय भूमिका निभाइन. 





 छत्तीसगढ़ महाविद्यालय के स्थापना म योगदान 


   छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के कमी ल  दूर करे खातिर 1937 महाकौशल समिति की स्थापना करिन अउ रायपुर म  1938 म छत्तीसगढ़ महाविद्यालय के स्थापना म योगदान दिस.



1942 म भारत छोड़ो आंदोलन म ठाकुर साहब बढ़-चढ़ के भाग लिस. ठाकुर साहब के नेतृत्व म  1942 के आंदोलन एकदम सफल होइस. कोनो प्रकार ले हिंसात्मक घटना नहीं घटिस.



           सरलग...


            ओमप्रकाश साहू अंकुर

          सुरगी, राजनांदगाँव

       मो. 7974666840

छत्तीसगढ़ के संस्कृति में शामिल--अखण्ड रामायण पाठ


 

छत्तीसगढ़ के संस्कृति में शामिल--अखण्ड रामायण पाठ


हमर छत्तीसगढ़ी संस्कृति में अखण्ड रामायण पाठ बहुत गहरई ले जनमानस के अंतस में समाय हे। गांव में आज भी रामायण के बड़ सममान, आदर,अउ श्रद्धा लोगन में मन म भरे हावे हे। ये हमर छत्तीसगढ़ के जादा गांव में हर बछर होवइया तिहार हरे। गांव-गांव मे रक्षाबंधन,जन्माष्टमी,पोरा तिहार में अब्बड़ धूमधाम ले ये कार्यक्रम ल पूरा करे जाथे।


तैयारी--

            एकर बर बहुते जादा तैयारी करे के जरूरत नई हे, कोई कला मंच,ककरो परछी,सामाजिक भवन में,चौक मे घलो आयोजित करे जाथे। 3-4 ठन बड़े सम्पूर्ण रामायण के जरूरत होथे। एक ठन कुर्सी में भगवान रामजी,शिवजी के फोटो अउ रेडियो लगगे त अउ जादा मजा आथे।अलग-अलग दल बनाके गांव भर ल शामिल करें जाथे।


शुरुआत--

          बिहिनिया ले पहली दल वाले मन अउ गांव के सियान पंच-पटेल मन हुम् धूप पूजा पाठ करे के संगे संग मंगलाचरन ले पढ़े के चालू करथे। जे हर आखिरी लाइन तक उरकत ले दलवार पढ़े जाथे।


कइसे पढ़थे--

              एमे एक झन दल पहली लाइन के आधा तक पढही,फेर दूसर दल बचे लाइन ल पूरा करही। अइसन ढंग ले पढ़े के सरल रूप हावे ले सरलग चलत रहिथे। जैसे--

एक दल- दीन दयाल विरद सम भारी,

दूसर दल- हरहु नाथ मम संकट भारी।।


दल--

        रामायण पढ़े बर गांव भर के लोगन मन के अलग-अलग दल जेमे 10-12 झन के नाम से सूची बनाके चौक-चौक में चिपकाए रथे। 1-2 घण्टा के बाद पोंगा में अगले दल वाले मन के नाव पुकारे जाथे। ताकि पढियईया मन ल आराम करे बर समय मिल जाये। येकर ले टीम भावना व आपसी सहयोग, समरसता के भाव बने रथे।


महिला-पुरूष--

           अखण्ड पाठ में गांव के सबो माई पिला जेमे महिला- पुरूष, जवान-सियान,लोग-लइका जेमन पढ़ डारथे सब झन मिल के कार्यक्रम ल पूरा करे जाथे। सामाजिक सद्भाव के ये बड़ अच्छा उदाहरण गांव मे मिल जाथे।


समापन--

          रामायण के सबो दोहा-चौपाई पढ़े के बाद समापन हो जाथे। फेर हवन पूजन करे के बाद सबो देव धामी ल सुमरत हुम धूप करके स्तुति करत गलती बर पराथना करथे। अउ गाँव के खुशियाली बर कामना करथे।


विसर्जन--

        अखण्ड पाठ कार्यक्रम समापन के बाद विसर्जन के कार्यक्रम करे जथे। जेमे कुर्सी में विराजित भगवान रामचंद्र जी, शिवजी के फूल-पान, गुलाल-बंदन,पिला चाऊंर,धूप-अगरबत्ती ल गली घुमत गावत-बजावत गांव के माई तरिया में विसर्जित कर देथे। गांव वाला मन अपन दुआरी म भगवान आये के कहिके आरती-पूजा करत नरियर,खीरा, फल फूल श्रध्दा ले चढ़ा देथे।


दही-लूट--

         विसर्जन कार्यक्रम में गांव के उत्साही जवान मन येकर मजा  ल जादा अउ बनाये बर दही लूट के रूप में चौक-चौक के खंभा म कुछु समान बांध के टांग देथे। जेमे नानकुन मरकी में दही,नरियर,कपड़ा, पैसा, पटका, साड़ी, प्लास्टिक के समान ल रखे जाथे। खम्भा में तीली पाना के रस ल लगा देथे जेहर बिसलाहा रथे। तेकर ल चढियईया मन म अउ जोश आ जथे। बिसलाहा पाय से अउ जादा मजा आथे। विसर्जन के संगे संग यहु कार्यक्रम चलत रथे। येकर ले कार्यक्रम के मजा दुगना हो जथे।


संदेश--

     अखण्ड रामायन पाठ के सबले बड़े संदेश आपसी भाईचारा, प्रेमभाव, सहयोगी भाव,सद्भावना, समरसता अउ मिलजुलके काम करे के गुण जागथे,काबर की ये काम मे सबो माई पिला गांव भर के मन जुरियाय रथे। छत्तीसगढ़ के जादा गांव मे ये सुंदर सांस्कृतिक रूप देखे बर मिलथे। गांव के आपसी सहयोग प्रेम भाव सद्भावना के बड़ सुग्घर छत्तीसगढ़ी संस्कृति हरे।


                             हेमलाल सहारे

                   मोहगांव(छुरिया)राजनांदगांव

ददरिया अउ साल्हो छत्तीसगढ़ी लोक साहित्य के विलक्षण पद्य रचना - ददरिया

 














 

ददरिया अउ साल्हो 


छत्तीसगढ़ी लोक साहित्य के विलक्षण पद्य रचना -  ददरिया 


 किसान अउ बनिहार मन के गीत हरे ददरिया 


   हमर छत्तीसगढ़ म लोक साहित्य ह अब्बड़ पोठ हे.  इहां किसम -किसम के लोकगीत, लोकगाथा अउ लोककथा मन के खजाना भरे हे. पंडवानी, भरथरी ,बांसगीत जइसन गीत मन हर इहां के गजब सुग्घर लोकगाथा हरे. वइसने सुआ, कर्मा, ददरिया, डंडा अउ पंथी मन हर इहां के प्रसिद्ध लोकगीत हरे. 

     आवव आज छत्तीसगढ़ी लोकाक्षर ग्रुप म दे गे विषय "ददरिया अउ साल्हो" उपर चर्चा करथन .ददरिया किसान अउ बनिहार मन के द्वारा  खेत- खार अउ जंगल -पहाड़ म काम के बखत गानेवाला गीत हरे. येमा चेलिक -मोटियारी मन के प्रेम के सुग्घर अभिव्यक्ति रहिथे. येमा मिलन अउ बिछुड़न के भाव ह उभर के सामने आथे. संयोग अउ वियोग श्रृंगार के सुग्घर दर्शन होथे. येमा नायक अउ नायिका के बीच संवाद अउ सवाल -जवाब होथे. जब चेलिक- मोटियारी मन म प्रेम के रंग चढ़ जाथे तब मगन होके ददरिया गाथे अउ जब दूनो म कोनो ह दगा दे देथे त अपन दिल के दरद ल ददरिया के रुप म गाके दूसर संग अपन पीरा ल बांटथे. संगे- संग दगाबाज प्रेमी -प्रेमिका ल नंगत छरथे. जब कोनो के प्रेमी -प्रेमिका ह आने गांव या परदेश चल देथे त अइसन स्थिति म येमन चकोर पक्षी कस प्रेमरुपी स्वाति नक्षत्र के पानी बर तरसथे तभो अपन हिरदे के पीरा ल ददरिया के रुप म गाथे. जब येमन अब्बड़ समय बर एक- दूसरा ले अलगा जाथे त अपन अंतस के दर्द ल ददरिया रुप म व्यक्त करथे. 



 ये गीत म कोनो बाजा अउ मंच के जरुरत नइ पड़य . प्रकृतिरुपी सुग्घर अंगना ह येकर मंच  अउ काम म मगन नर- नारी मन येकर गवइया -सुनइया होथे.  खेत- खार अउ जंगल- पहाड़ म काम के समय बाजा -गाजा के कल्पना घलो नइ करे जा सकय. 


पर समय के संग येकर प्रस्तुति अब मंच म कतको प्रकार के वाद्य यंत्र के संग करे जावत हे. लड़का -लड़की मन ल नचावत हे. येला समय के संग बदलाल कहन कि पारंपारिता के संग खिलवाड़. खेत खार म नंगत बिधुन होके जउन गाये म मजा आवत होही वइसने मंच के प्रस्तुति म आवत होही का? 



कुछ ददरिया मन म जिनगी के क्षणभंगुरता के भाव घलो झलकथे. 

    ददरिया के पद मन के रुप अउ  रचना हर दोहा छंद के जइसन होथे पर मात्रा के हिसाब ले येहा दोहा छंद ले अलग होथे. ददरिया हर लोकगीत अउ विषम मात्रिक छंद हरे.

   बुधियार साहित्यकार मन के मानना हे कि ददरिया आदिवासी गोंडी बोली म गाये जाय. पर अब येहा छत्तीसगढ़ के सबो कोति गाये जाथे.

लोक साहित्य विद्वान मन के कहना हे कि  दादर माने ऊंचा जगह,जंगल, पहाड़ म ये गीत ल गाये जाय तेकर सेति येकर नाम ददरिया पड़िस.कुछ विद्वान मन के विचार हे कि दादरा  जइसन समान होय के सेति

गीत/ताल ले ददरिया पड़िस .पर यहू

सच हे कि पहिली ददरिया म साज -बाज के प्रयोग  नइ होत रिहिस हे.


 लोक साहित्य के जानकार मन ददरिया के चार प्रकार बताय हे -


1. ठाड़ ददरिया


2. सामान्य ददरिया 


3.  साल्हो ददरिया 


4. गड़हा ददरिया


           साल्हो ददरिया


   बैला  गाड़ी    हकइया द्वारा गाये जाने वाला ददरिया गड़हा ददरिया कहे जाथे. येकरे मुताबिक साल जंगल म गाये जाने वाला ददरिया ल साल्हो कहे गिस होइस. त का नागर चलात नगरिहा द्वारा गाये जाने वाला ददरिया ल नगरिहा ददरिया कहे जाथे का? ये तरह ले ददरिया के प्रकार उचित  नइ लगत हे!  जउन भी हो ददरिया ल हमर छत्तीसगढ़ी लोक गीत मन के राजा कहे जाथे. ठाड़ ददरिया अउ सामान्य ददरिया ल खेत म काम    करइया बनिहार अउ किसान मन ले सुने जा सकथे. ददरिया के स्वर गजब मीठा होथे. ददरिया ल सुन के तन - मन मयूर  

कस नाचे ल लागथे.

    जब रेडियो म लोक गायक शेख हुसैन, केदार यादव, लक्ष्मण मस्तरिहा अउ आने कलाकार मन द्वारा गाये ददरिया ल सुनथन त अब्बड़ मजा आथे.

 ददरिया के कुछ  उदाहरण ...


     1. बटकी म बासी ,अउ चुटकी म नुन,

    मंय गावत हंव ददरिया, तंय कान देके सुन .


2.  नवा सड़किया, रेंगे ल मैना .

 दू दिन के   आवइया,लगाये महीना.


3.  माटी की मटकी , फोड़े म फुटही.


तोरे -मोरे पिरीत हर, टोरे म  टूटही.


4. बागी बगीचा, दिखे ला हरियर.

 दुरुगवाला   नइ दिखे,बदे हंव नरियर.


5. करिया रे हड़िया, उज्जर हवय भात.

निकलत  नइ बने, अंजोरी हवय रात.



ददरिया ह वइसे तो प्रेम के गीत हरे. पर

येमा अलौकिक प्रेम के घलो दर्शन हो जाथे.  उदाहरण...


1. चारे रे खूंटा,चारे हे पाटी.


कंचन तोरे काया ,हो जाही माटी.


2. धाने  रे लुए, उड़ाथे कंसी.

 भगवान के मंदिर म, बाजाथे बंसी.


 ददरिया ह पद्य रचना आय त येमा 

छंद तो होबेच करही.


छंद के हिसाब ले ददरिया हर एक विषम मात्रिक छंद हरे. मतलब येकर चारों चरण म अलग-अलग संख्या म मात्रा होथे. सरलगहा  हिसाब लगाय ले येकर विषम चरण में 8  अउ 13 अउ सम चरण मा 9 अउ 10 मात्रा होथे. कुछ अपवाद हो सकथे. 

 ददरिया के पद /अंतरा म वोकर सम चरण म तुकांत होथे.


संदर्भ - 

1. साकेत स्मारिका 2019 म प्रकाशित - छत्तीसगढ़ी ददरिया म लोक चेतना, लेखक - श्री कुबेर सिंह साहू जी 

2.  छत्तीसगढ़ी लोक गीत -विविध आयाम, डा. पीसी लाल यादव जी 



    ओमप्रकाश साहू अंकुर

    सुरगी, राजनांदगांव

  मो. 7974666840


 






       


               

Wednesday, 10 August 2022

लोक परंपरा के मोहक रूप 'नंगमत'



 

लोक परंपरा के मोहक रूप 'नंगमत'

    हमर छत्तीसगढ़ म सांस्कृतिक विविधता के अद्भुत दर्शन होथे. इहाँ कतकों अइसन परब अउ परंपरा हे, जेला कोनो अंचल विशेष म ही बहुतायत ले देखे बर मिलथे. हमर इहाँ एक 'नरबोद' परब मनाए जाथे, एला जादा कर के वन्यांचल क्षेत्र म ही जादा कर के देखे जाथे. ठउका अइसने 'नंगमत' के परंपरा घलो हे, जेला क्षेत्र विशेष म ही बहुतायत ले देखे जाथे.

    'नंगमत' के आयोजन ल जादा करके नागपंचमी के दिन ही करे जाथे. वइसे कोनो-कोनो गाँव म एकर आयोजन ल हरेली के दिन घलो कर लिए जाथे. जानकर मन के कहना हे, बरसात के दिन म सांप-डेड़ू जइसन जहरीला जीव-जंतु खेत-खार आदि म जादा कर के निकलथे, अउ ठउका इही बेरा खेती किसानी के बुता घलो भारी माते रहिथे, अइसन म लोगन ल खेत-खार जाएच बर लागथेच एकरे सेती उंकर मनके प्रकोप ले बांचे खातिर एक प्रकार के पूजा-बंदना करे जाथे. उंकर मनके जस गीत गा के सुमिरन करे जाथे.

    ग्रामीण संस्कृति म बइगा कहे जाने वाला मंत्र साधक के अगुवाई म नंगमत के आयोजन होथे. एमा बइगा ह अपन अउ मंत्र साधक चेला मन संग मिलके नंगमत के जोखा मढ़ाथे. बताए जाथे, जे बइगा ह सांप चाबे के जहर ल उतारे म सक्षम होथे, तेनेच ह ए आयोजन के अगुवाई करथे, अउ ए आयोजन म जेन चेला के सबो चेला मन म श्रेष्ठ प्रदर्शन करथे, वोला ए सांप के जहर उतारे वाले बुता म या कहन बइगई करे के अनुमति देथे. बाकी चेला मनला घलो अनुमति होथे, फेर वो मनला सिरिफ छोटे-मोटे फूक-झाड़ के ही.

    इहाँ ए बात जाने के लाइक हे, हमर छत्तीसगढ़ म हरेली परब के दिन अपन-अपन मांत्रिक शक्ति के पुनर्जागरण या पुनर्पाठ करे के परंपरा हे. इही दिन गुरु-शिष्य बनाए के परंपरा हे, जेला इहाँ पाठ-पिढ़वा देना या लेना कहे जाथे. ठउका अइसने च नंगमत के आयोजन ले जुड़े परंपरा घलो हे. 

    वइसे नंगमत के आयोजन ल सांप मनके पूजा-सुमरनी अउ  पुराना पीढ़ी द्वारा नवा पीढ़ी ल अपन परंपरा के पोषण अउ आगू ले जाए के जिम्मेदारी खातिर प्रेरित करे के उद्देश्य खातिर घलो करे जाथे. कतकों लोगन खातिर ए ह सिरिफ मनोरंजन के माध्यम होथे, तेकर सेती वो मन सावन महीना के लगते एकर आयोजन के जोखा म लग जाथें. एकर मनोरंजक रूप के आनंद ले खातिर आस-पास के गांव वाले मन घलो गंज संख्या म सकलाथें.

    नंगमत के शुरुआत गाँव के ठाकुर देव, मेड़ो देव अउ आने जम्मो ग्राम्य देवता मन के संगे-संग अपन-अपन ईष्ट देवता मनके पूजा-सुमरनी के साथ होथे. जइसे गौरा-ईसरदेव परब म कोनो विशेष जगा ले पवित्र माटी लान के चौंरा बनाए जाथे, ठउका अइसने च एकरो खातिर नाग मनके रेहे के ठउर जेला भिंभोरा या बांबी आदि कहे जाथे, उहाँ ले माटी लान के एकरो खातिर एक चौंरा बनाए जाथे, जेमा पूजा-अर्चना करे जाथे. जस गीत गाने वाला सेउक मन नाग देवता के मांदर-ढोलक,   झांझ-मंजीरा संग जस गान करथें. इही बीच बइगा ह अपन मंत्र शक्ति के प्रयोग ले इच्छित लोगन के ऊपर नाग या अन्य सांप मनके आव्हान करथे, जेकर ले उनमा उंकर आगमन होथे, तहाँ ले जेन सांप उंकर ऊपर आए रहिथे, वोकरे अनुसार वोमन झूमथें-नाचथें, अंटियाथें-फुफकारथें, भुइयां म घोनडइया मारथें. इही बेरा ह देखइया मन बर मोहनी हो जाथे. एक निश्चित बेरा के बाद वोकर मन के शरीर ले वो सांप ल उतारे के परंपरा ल पूरा करे जाथे.

    आखिर म वो जगा सकलाय लोगन ल परसाद बांटे जाथे. ए परसाद म नांगजरी के विशेष महत्व होथे. उहू ल लोगन ल अउ आने परसाद संग संघार के दिए जाथे. एला कोनो भी बिखहर सांप के जहर उतारे बर रामबाण माने जाथे. ए नांगजरी ल बइगा ह विशेष पूजा-पाठ कर के लाने रहिथे. हमन ल बताए जाय, रिंगनी पेंड़ के जड़ ल कोनो निश्चित दिन म निमंत्रण देके, रतिहा म पूजा-पाठ कर के लाने जाथे. नंगमत के परंपरा ल पूरा करे के बाद जेन चेला ल विशिष्ट रूप ले मंत्र दीक्षा दिए जाथे, वोला कहूँ जगा ले भी सांप चाबे के जानकारी मिलथे, उहाँ जाना जरूरी होथे.

-सुशील भोले

संजय नगर, रायपुर

मो/व्हा. 9826992811