Sunday, 25 February 2024

आजादी के लड़ाई म नारी शक्ति के योगदान

 आजादी के लड़ाई म  नारी शक्ति के योगदान


पहली हमर देश ह "सोन के चिरइया" कहलाय। भारत वर्ष ह धन धान्य, खनिज संपदा के संगे -संग संस्कृति अउ सभ्यता ले अब्बड़ समृद्ध रिहिन हे। सिंधु घाटी के सभ्यता, नालंदा विश्वविद्यालय के संगे संग इहां के ऐतिहासिक अउ धार्मिक ठउर येकर उदाहरण हावय।  हमर देश म विदेशी लोगन मन बेपारी मन के आइस। इहां के राजा- महाराजा मन ले बेपार के अनुमति लेके इहां बेपार करे लागिस। इहां पुर्तगाली, फ्रांसीसी, डच, अंग्रेज आइस अउ अपन-अपन बेपार म लग गे। इंकर बीच बेपार खातिर आपस म नंगत लड़ाई चलिस जेमा आगू चलके अंग्रेज मन अपन धाक जमाय म सफल होइस। अंग्रेज मन हमर देश म एक छत्र राज करिस। फूट डालो अउ राज करो,हड़प नीति ल अपना के इंहा के राजा - महाराजा ल आपस म लड़ाइस। अंग्रेज मन भारतवासी मन उपर नंगत अत्याचार करिस।1857 म पहली बार हमर देश के राजा- महाराजा मन सुनता के गांठी म बंधके  लड़ाई लड़िन। कित्तूर के रानी चेन्नमा,भीमा बाई होल्कर, रामगढ़ की रानी,रानी जिंदन कौर,रानी टेसबाई,बैजा बाई, चौहान रानी, तपस्विनी महारानी जइसे कतको नारी शक्ति मन घर के चार दीवारी ले निकल के अपन धरती माता के संगे संग नारी जात के स्वाभिमान बर लड़िन।


    हमर देश के आजादी के लड़ाई म नारी शक्ति मन के अब्बड़ योगदान हावय। 1857 के पहली भारतीय स्वतंत्रता संग्राम म झांसी के रानी लक्ष्मीबाई, झलकारी बाई अउ झांसी के कतको वीर नारी मन के योगदान ल भला कभू भुलाय जा सकथे का। सुभद्रा कुमारी चौहान ह अमर कविता के रचना करिन - खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी.......।अइसने रानी दुर्गावती, अहिल्या बाई, बेगम हजरत महल, अउ ऊंकर सहयोगी वीर नारी मन के वीरता ले पूरा भारतवासी परिचित हावय। इंकर वीरता ले अंग्रेज शासन म हड़कंप मच गे रिहिस।


 ‌ आधुनिक काल म आजादी के लड़ाई के संगे संग पुनर्जागरण म नारी शक्ति के अब्बड़ योगदान हे। सावित्री बाई फूले ह पहिली महिला शिक्षिका के रुप म अपन अलग पहिचान बनाइस त आजादी के लड़ाई म घलो योगदान दिस।।नाना प्रकार के पीरा सहिस पर अपन उदिम ल नइ छोड़िन अउ नारी मन के जिनगी म शिक्षा के सुघ्घर अंजोर बगराइस। आयरिश महिला एनी बेसेंट भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहिली महिला अध्यक्ष बनिन। वोहा तिलक जी के साथ जुड़ के विदेशी जिनिस मन के बहिष्कार स्वदेशी जिनिस मन के प्रचार प्रसार म योगदान दिस। अंग्रेज सरकार के विरुद्ध अपन आवाज बुलंद करिन। अइसने मेडम भीकाजी कामा, सिस्टर निवेदिता ,कैप्टन लक्ष्मी सहगल,,सरोजिनी नायडू , सूचेता कृपलानी  कस्तूरबा गांधी, कमला नेहरू,राज कुमारी अमृत कौर,अरुणा आसफ अली,विजया लक्ष्मी पंडित, मीरा बेन, कमलादेवी चट्टोपाध्याय,इंदिरा गांधी जइसन महान नारी मन आजादी के  असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा अउ भारत छोड़ो आंदोलन म पुरुष मन संग कदम ले कदम मिला के भाग लिस अउ देश खातिर जेल गिस।


  हमर छत्तीसगढ के नारी शक्ति मन आजादी के लड़ाई म कइसे पाछू रहितिस। निकल पड़िस भारत महतारी के रक्षा खातिर। अंग्रेज मन ले जोम देके लड़िन। 1910 म बस्तर म भूमकाल विद्रोह म रानी सुवर्ण कुंवर के अब्बड़ योगदान रिहिन।रानी सुवर्ण कुंवर अउ लाल कलेन्द्र सिंह ह वीर गुंडाधूर ल भूमकाल विद्रोह के सेनापति बनाके अंग्रेज़ी शासन के अब्बड़ अत्याचार के विरोध म बस्तर के लोगन मन ल लड़े बर प्रेरित करिन।


  जब हमर देश म गांधी युग चलिस त वो बेरा म इंहा के नारी शक्ति मन असहयोग आंदोलन, कंडेल नहर सत्याग्रह, नमक कानून तोड़ो आंदोलन ( सविनय अवज्ञा आंदोलन), जंगल सत्याग्रह अउ भारत छोड़ो आंदोलन म अब्बड़ उछाह ले भाग लिस। गांधी जी के अहिंसक आंदोलन अउ उंकर बताय रद्दा शराब बंदी, स्वदेशी जिनीस के प्रचार प्रसार, विदेशी जिनिस मन के बहिष्कार अउ होली जलाना, कुटीर उद्योग ल अपनाय जइसे रचनात्मक कारज मन ल करिन। छत्तीसगढ़ म  आजादी के आंदोलन म भाग लेवइया 

नारी शक्ति मन म डा. राधा बाई,  बालिका दयावती,मिनीमाता,मूलमती, रोहिणी बाई परगनिहा,केकती बाई बघेल, रूक्मिणी बाई जइसन हजारों नारी मन  के  नांव सामिल हावय।


    ओमप्रकाश साहू" अंकुर"

    सुरगी, राजनांदगांव

मंच माईक अउ मँय जी*. (ब्यंग)

 *मंच माईक अउ मँय जी*.               

(ब्यंग)


           एक ठन हाना हे कि, राजा के पदई पाये ते हागत खानी गीत गाये। थोर बहुत नाम अउ पदवी पाये ले मनखे अपन आप ला खास मन के टोली मा सँघेर लेथे। अइसन मौका तलासी नामधारी मन अपन पहिचान ला जियाके राखे बर कोनों ना कोनों मंच मा हाजरी के मौका खोजत मिलथें। खुद के मँय मा अतका खुसर जथें कि फुनगी मा दीया बारत दिखथें। अपन आगू मा कोनों दूसर ला देखना सुनना नइ चाहे। ओइसे देखे जाय तौ मनखे के पहिचान तीन चीज के थुनही मा टेके हे। जेकर ले पान गुटका खाके थूँक मा ललियाय पथरा ला भगवान कहिके पैलगी करइया बुद्धिजीवी समाज आदर के भाव ले देखथे। इही तीन चीज ला हम मंच माईक अउ मँय के  रूप देख सकथन। जेन जगा मा तीनों के हाजरी हे तब वैचारिक शिखर वार्ता मा हिस्सा लेके खुद ला साबित करना मुख्य मंसा रथे।

मंच-----ये हा सबो साधन सुविधा ले सोभित जगा होथे। अइसन जगा मा भले जमघट कम रहय फेर बइठे के ठिकाना दू गुना रहना चाही। काबर कि कतको बखत खाली खुरसी ला घलो सुनाना परथे। अइसन मंच के खास बात ये होथे कि आखरी छोर पिछोत मा बइठने वाला ला घलो माईक उपर खड़े मँय जी के दरसन पा सके।

माईक-------जेकर अवाज उँकरो कान तक जाना चाही जे मन चाह के घलो सुनना नइ चाहे।

मँय-----ये जीयत जागत मानुस प्राणी होथे। जेला खास नेंवता देके मँगाए जाथे। इही तीसर हर दूनो के भोक्ता होथे। मंचासीन होय के बाद माईक तक चरण चल दिस तब एकर बीच हम या हमर, तोर तुँहर बर कोनों जगा नइ रहय। रथे तो फकत मँय।

            इही आदरणीय मँय जी ले भेंटाय के मौका पीछू हप्ता हमरो बनगे। घर मोहाटी मा पींयर चाँउर छिंतके जाही तभे बिहाव के नेंवता माने जाही अइसे नइये। वाट्सअपी निमंत्रण के नवाचार घलो उधो के पाती ले कम नइये। जेला स्वीकार के हमू मन चल पड़ेन। दुरिहा दुरिहा ले पधारे नामधारी अतिथि के सँग तिर तखार के  वरिष्ठता के गमछा टाँगे वाला मन के आगमन रिहिस। पारा मुहल्ला के गोठ होतिस तब तो माईक पोंगा के मुँहूँ ला हमरे घर कोती रखवातेन अउ परछी मा बइठके ज्ञान गंगा मा उबुक चुबुक होतेन। गहिरा बिचार मंथन के रसपान करतेंन।

     वो तिर मा आवत हे तब फरज बनथे कि दू लीटर पेट्रोल फूँक के एकाद झोरा सुविचार सीख संदेश लाने जा सके। उपर वाले जतका देय हवे वोमा खाल्हे वाले के ला अउ समोये जा सके। हमर असन के जेब मा दू रुपिया वाले लिखो फेंको अउ आधा लिखे कविता के सइघो कागज के छोड़े अउ कुछु नइ रहय। इही अधुरा कविता बर ज्ञान सकेले के फेरा मा चल पड़ेन। रसता मा सँगवारी मन ला ये कहिके चाहा पानी नइ पियायेन कि उँहा सबके तइयारी हे। आयोजक संयोजक मन ला धन्यवाद एकर सेती जरूरी हे कि अइसन सत्संग मा आधा तो बराती बनके पदार्पण करथें। जेकर सम्मान जरूरी हे। काबर कि दुलहा ला दुलहिन मिलथे समधी ला दाइज डोर। बजनिया अउ बराती ला तो पेटभरहा पकवान ही चाही। ओइसे आजकल तो भात देखके ही भीड़ बाढ़थे। भीड़ हर ही आयोजन के सफलता के सूत्रधार होथे।  भीड़ सकेलना घलो कला होथे। बेंदरा के करतब कइसनों रहय। डुगडुगी जोरलगहा बजना चाही। एकर ले जे नइ जाने कि वो आवत हे ओहू जान लेथे कि वो आवत हे। राजनीति के मंच होथे तब भीड़ बर दिन के रोजी खाना पीना अउ आवाजाही बर मोटर गाड़ी सब मिलथे। भीड़ मा खींचे फोटू ला सम्हाल के एकर सेती रखना परथे कि भगदड़ मा नेताजी के भक्ति मा चपकागेस तब माला डारे बर फोटू तो होना चाही।

           वरिष्ठ विचार वाचक वक्ता वो होथे जे मंच मा अपन बर पहिली ले जगा पोगराय के सामर्थ राखथे। राखथे के मतलब रिजर्वेशन आरक्षण करवाना। नइते वेटिंग लिस्ट वाले वक्ता मन समझौता करके अपन नाम के बोरा जठाय मा पीछू नइ रहय। काबर कि मंचासीन बने बर सम्मान सकेले बर समझौता वादी कायदा चलन मा हे। इँहा हर तिसरा कलम के सिपाही सफल वक्ता हें। चारन भाट गिरी करइया कवि मन राष्ट्रीय कवि मा गिने जाथे।बस नेता जी अउ वोकर पारटी के महिमा आरती गाये बर झन छोड़। 

            आदरणीय मँय जी ला बने फूल माला मा लादके मंचासीन कराये गिस लाम लाहकर परिचय देय मा संचालक जी कोनों कमी नइ करिस। माईक तक ताली पिटवा के हाजिर करे गिस।अब ओकर बाद मँय से शुरू। मँय ये करेंव मँय वो करेंव। मँय कठिन तप साधना करके छै ठन ग्रंथ लिखेंव। मँय साहित्य के सबो विधा ला घोर के पी डारे हवँ। कविता कहानी उपन्यास नाटक सब के दू दू जोड़ी छपवा डारे हवँ। मँय कोरी अकन जगा मा सम्मानित होय हवँ। मोर संस्मरण सुरता के तिसरा संकलन जल्दी अवइया हे। बड़का साहित्यकार जे मन ये दुनिया मा नइये उँकर सँग रेंगे के सुरता ला सकेलत हवँ। मँय जी अपन उपलब्धि ला सवा घंटा सुरता कर करके सुनाय के बाद हुरहा सुरता आइस कि समय के मरियादा हे। महानुभाव जी मँय मा अतका बुड़गे कि मँय अउ मोर के छोड़ तुम या तुँहर बर कुछु नइ बाचिस।

             भीड़ अगास ले रसगुल्ला बरसे के आस मा मुँहूँ फार के देखत रहिगे। काम के बरसा ला आदरणीय जी के उपलब्धि के हवा फाँक दिस। सबो श्रोता समाज मँय जी के उपलब्धि ला गठियाके लेगे बर गमछा के छोर तमड़त रिहिस। आयोजन मा चरचा तो पूस के रात उपर होना रिहिस फेर  वरिष्ठ वक्ता मँय जी के गोठ जेठ के मँझनिया मा फँसे रहिगे। विचार विन्यास धरती मां के करुण पुकार उपर होना रिहिस। फेर मँय जी अपन ससुरार यात्रा संस्मरण मा हास्य किस्सा सुनाके ताली पिटवाय मा मगन रिहिस। हम घर ले ये सोच चले रेहेन कि कम खरचा मा केसर युक्त पान मसाला खाय बर मिलही। आज हमर आधा अधुरा कविता बर मसाला मिल जही। फेर चिचोल बीजा ला सुपारी समझ के पघुरात रहिगेन। चरचा के विषय मँय जी के उपलब्धि मा रमँजागे। बुद्धिजीवी श्रोता मन ताली पीट पीट के अपन गुस्सा शांत करत मिलिस। आदरणीय मँय जी के उदारता ये रिहिस कि वो बड़का मंच के नेवता ला छोड़ के इँहा के नेवता स्वीकारे रिहिस।  जे हर ये मंच के उपलब्धि ले कम नइ रिहिस। अइसन सफल आयोजन के खबर वाट्सअप के ये डारा ले वो डारा बेंदरा कस कूदे मा कमती नइ करिस। आयोजन समाचार बनके अखबार मा अउ फ़ेसबुक मा सदा दिन बर लटकगे ।

           जेमन ला मँयमयी बिचार राखे के मौका नइ लगिस, वो ईर्ष्यालु बराती रूपी वक्ता मन घराती ला ताना सुनाके आधा बीच मा आधा सुनके चुकता प्रस्थान कर लिन। अवइया बेरा मा आयोजक मंडल अउ बड़का मंच सजाके कोनों नामधारी विचार वाचक ला हाजिर करहीं। तब हमर अधुरा कविता बर सीख सकेलाही। बिनती ये रही कि मंच मा विषय रहय, विषय संगत विचार रहय। अपन खुद के उपलब्धि के बोजहा धरके रेंगइया कोनों मँय जी झन रहय।


राजकुमार चौधरी "रौना"

टेड़ेसरा राजनांदगांव।

आदरणीय केशव शुक्ल जी, (बिलासपुर) वरिष्ठ रचनाकार, पत्रकार और समीक्षक हैं। श्री शुक्ल जी की समीक्षा सादर अवलोकनार्थ-------।

 आदरणीय केशव शुक्ल जी, (बिलासपुर) वरिष्ठ रचनाकार,  पत्रकार और समीक्षक हैं। श्री शुक्ल जी की समीक्षा सादर अवलोकनार्थ-------।


"बलदाऊ राम साहू अग्रिम पंक्ति के हैं

      बाल साहित्यकार "

------------------------●केशव शुक्ला●

बाल साहित्य लेखन की दिशा में जिन साहित्यकारों का नाम आता है उनमें अग्रिम पंक्ति के साहित्यकार बलदाऊ राम साहू जी हैं।आपके 7 हिंदी बाल गीत संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।

      हाल ही प्रकाशित बाल कहानी संग्रह  " उड़ान " में 24 कहानियां दर्ज हैं।सभी कहानियां बाल मनोविज्ञान पर आधारित प्रभावशाली एवं पठनीय हैं।ये कहानियां किशोर होते बच्चों के स्तर की हैं जिनमें संस्कार,शिक्षा,साहस आदि गुणों को पुष्पित-पल्लवित करती हैं।

   " मेरे मन की बात " में आप लिखते हैं-" कहानी की भी कहानी होती है।या यूँ कहें,कहानी का जन्म किसी न किसी घटना से होता है।जब कोई घटना हमारे मन को भा जाती है,तब कहानी का सृजन हो जाता है।जीवन में ऐसे बहुत से अवसर आते हैं जो मन को किसी न किसी रूप में प्रभावित करते हैं।इनमें कुछ सकारात्मक होते हैं कुछ नकारात्मक भी,किंतु कहानीकार उन्हीं को अपनी परिकल्पना से कुछ नए मोड़ देकर कहानियां बना देता है और ये कहानियां हमसे बहुत कुछ कहती हैं।"

        इस संग्रह के प्रकाशक कांकेर साहित्य संस्थान है।इसके प्रकाशक ने अपने प्रकाशकीय में लिखा है- "बलदाऊ राम साहू जी की रचित ' उड़ान ' हिंदी कहानियों का उत्कृष्ट रोचक संग्रह है जिसे राज्य के बाल एवं किशोर विद्यार्थी व हिंदी साहित्य के सुधी पाठकों के समक्ष रखते हुए हमारे प्रकाशन संस्था को असीम प्रसन्नता हो रही है। "

      कहानियों के शीर्षक उड़ान, सबक,इनाम के हकदार, न्याय, टी-शर्ट, जंगल में सावन,स्मृतियां, गिलहरी का बच्चा, जंगल में छब्बीस जनवरी,चटोरी बकरी,स्कूल में मेला, मेरी दादी,सौतेला बेटा,अहसास, नौसिखिये के नौ दिन,नन्हा कौआ,दुख का कारण,सुबह का भूला,ममता की जीत,पतंग, जुगत,छातिम का पेड़,झूठ का फल और पप्पू जीत गया है।

     कहानी की भाषा-शैली पर चर्चा के पूर्व उड़ान कहानी के अंश देखें-" बच्चों तुम अभी छोटे हो,जब तुम बड़े हो जाओगे तो अवश्य मेरे साथ चलना।देखो,तुम्हारे पंख अभी कितने छोटे हैं।" भाषा कितनी नपी-तुली और सधी हुई है इसका यह उदाहरण है।चिड़िया और चूजों के बीच का यह संवाद सरल , सहज रूप में अभिव्यक्त है।यह कहानीकार की सफलता है।

       कहानियों की शैली रोचक है जो बच्चों से लेकर किशोर मन को प्रभावित करते हैं।उनकी कहानी इनाम के हकदार का प्रसंग देखें- "भले ही मैं परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करता हूँ ,परन्तु उधो मुझसे किसी मायने में कमतर नहीं है।जितना समय मुझे पढ़ने के लिए मिलता है उतना समय उसे नहीं मिलता।"

       बलदाऊ राम जी ने अपनी कहानियों में लोक कहावतें ,मुहावरों का प्रयोग भी किया है यथा-" खरतरिहा ल तुतारी " अर्थात जो काम करता है उसे अधिक जोता जाता है," सौ भाखा और एक लिक्खा," हिंदी में सौ बक्का और एक लिक्खा प्रयोग किया जाता है।इस तरह हम यह भी कह सकते हैं कि वे प्रयोगवादी कहानीकार हैं।

     उड़ान की कहानियों में बलदाऊ राम जी ने बालगीतों को भी तरजीह दी है।दृष्टव्य है-

" हमें नहीं आता है कुछ भी,

कैसे गीत सुनाएं।

मूड़ मुड़ाते पड़ गए ओले

पीड़ा किसे बताएं।"

दूसरी रचना देखें-

" हम जंगल के वासी हैं

हिलमिल कर हम सब रहते हैं।

बाधाएं जो भी आए

कभी नहीं हम डरते हैं।"

       ये गीत भी उनकी ही अपनी रचना है।104 पृष्ठ की इस किताब का मूल्य मात्र 230 रुपये है।यह कहानी संग्रह न केवल पठनीय है वरन् संग्रहणीय भी है।मेरी उन्हें शुभकामनाएं हैं कि बाल साहित्य जगत में उनका नाम अग्रणीय रहे।

                             

                                                      पत्रकार कॉलोनी

                                                       हाउस नम्बर-37

                                                           गौरव पथ

                                                      रिंग रोड क्रमांक-2

                                                           नर्मदा नगर

                                                            बिलासपुर

                                                            छत्तीसगढ़

                                                         पिन-495001

नाव दोष

 नाव दोष


          एक झन राजा रिहिस । राजा हा बिहाव नइ करे के परन कर डरे रिहिस । ओकर मन हा नियम धरम पोथी पतरा कोति जादा रहय .. राज काज म नइ लगय । देश कइसे चलही .. जम्मो झन के मन म फिकर हमागे रहय । विचारवान मन भविष्य म देश चलाये बर .. राजा ला .. एक झन बेटा गोद लेहे के सलाह दिन । राजा हा हव कहत एक झन बेटा गोद ले लिस । बेटा बड़ चंचल सुभाव के रिहिस .. ओहा राजा के नियंत्रण म नइ रहय । बेटा सम्हलत नइ रहय .. तेकर सेती .. बेटा ला अऊ देश ला सम्हाले बर .. प्रजा हा राजा ला बिहाव करे के सलाह दिस । हाँ ना करत राजा हा .. देश खातिर अपन परन ला तिलांजलि देवत .. बिहाव करे बर तैयार होगे । शुभ मुहूरत देख बहुत जोर शोर से राजा के बिहाव होगे । बिहाव होतेच साठ .. पूरा राज ला रानी हा कब्जिया डरिस .. । ओहा प्रजा के बीच म लोकप्रिय होय लगिस । सबो झन अपन आवश्यकता बर रानी कोति निहारत गिन । कुछ दिन म .. प्रजा ला राजा के आवश्यकता नइ रहिगे । राजा के बेटा कति किंजरत हे तेकर खोज खबर के कोनो जरूरत नइ रहिगे । रानी बहुत दुष्टिन रहय । ओहा एक कोति राजा के बारा हाल करय त दूसर कोति ओकर बेटा ला घेरी बेरी मारे के प्रयास घला करय । राजा हा बहुत दुखी रहय .. फेर कोन ला अपन दुखड़ा सुनावय .. । ओकर तो आँखी बिहाव होतेच साठ फूट चुके रहय .. कान म परदा नइ रहय .. जबान ला तो अतेक थुथरवा डरे रहय के .. बोले नइ सकय । राजा अऊ रानी के बीच कोनो अच्छा सम्बंध नइ रहय । रानी बहुतेच उच्छृंखल रहय । राजा के इशारा मानना तो धूर .. ओला देखय सुनय तको निही । जब पाये तब .. राजा ला अपन हिसाब से तैयार करत सुधार देवय । जे इच्छा रानी के रहय .. उही म राजा के हामी दिखय । राजा ला बने राखे हे कहिके सबो कहँय .. इही बताये देखाये बर .. रानी हा राजा के मुहुँ कान म .. आडम्बर छबड़ देवय । जब पाये तब .. ओकर जेला पाये तेला बदल देवय । बपरा राजा हा अतेक आतंक के बावजूद कुछ नइ कर सकय । ओहा कलेचुप रानी के सरी आतंक ला सहत रहय । 

          एक दिन रानी उपर .. राजा ला दुख दे के अऊ ओकर बेटा ला मार डरे के आरोप लगिस । चारों मुड़ा म हल्ला होय लगिस । अच्छा सम्बंध नइ होये के बावजूद .. राजा हा बदनामी के डर म ...  रानी ला खूब संरक्षण दिस अऊ ओकर उपर लगे सरी इल्जाम ले ओला बरी कराके दम लिस । अतका के बावजूद ... रानी हा .. राजा के उपर अत्याचार बंद नइ करिस । जब पाये तब ओला आहत करत रिहिस । एक दिन प्रजा ला असलियत पता लगिस .. राजा के उपर दया आ गिस । ओमन रानी ला बदले के उपाय खोज डरिस अऊ शुभ मुहुरत म .. ओकर जगा म दूसर रानी लान के खड़ा कर दिस । जुन्ना रानी हा बहुत हाथ गोड़ मारिस फेर प्रजा घला ... रानी बदले के कसम खा चुके रिहिस । 

          नावा रानी .. जुन्ना ले जादा खतरनाक रिहिस । ओहा आते साठ .. सउत बेटा के सीधा हत्या के प्रयास करे लगिस .. ओला घेरी बेरी आहत करे लगिस .. ओकर देंहें ला केऊ बेर आगी म दागे लगिस । अपन रहन सहन के हिसाब से राजा के रंगा ढंगा बदल दिस । ओला पेंट के जगा धोती पहिरा दिस । राजा बहुत आहत रहय ... । ओकर मुड़ से लेके गोड़ तक .. चोट के निशान बन चुके रिहिस । तभो ले बपरा हा आह नइ बोलय .. कोनो ला अपन अपन दुर्दशा देखा बता नइ सकय । 

          प्रजा जागरूक हो चुके रिहिस .. ओमन जान डरिन .. ये पइत तो ओकरो ले जादा निर्दयी रानी मिलगे ... फेर अब ओला बदले कइसे .. ? जब तक मुहुरत नइ आही तब तक ... बदल नइ सकय । तब तक ... जुन्ना अऊ नावा रानी हा .. प्रजा ला दू फाँकी कर डरे रिहिन । कुछ मन जुन्ना रानी ला गद्दी देवाये बर मुहुरत के अगोरा करय .. अऊ कुछ मन .. नावा रानी के उपकार म भीतर तक अतेक आल्हादित .. आच्छादित अऊ प्रभावित रहय के .. ओमन अलग रद्दा अख्तियार कर ले रहय । 

          एक दिन प्रजा के हिम्मत जोर मारिस । शुभ मुहुरत म अइसन उपकार पवइया के विरोध ला दरकिनार करत ... रानी ला बदल दिन ... जुन्ना रानी हा फेर आगे । ये पइत जुन्ना रानी हा जम्मो झन ला खमाखम आश्वासन दे के आये रहय के .. ओहा राजा के हिसाब से चलही ... ओकर बेटा ला सुखे सुख म राखही ... फेर रानी बनते साठ .. सरी आश्वासन ला कोंटा म त्याग .. राजा अऊ ओकर बेटा के बारा हाल करे लगिस । 

          देश विदेश के नामी पंडित मन .. राजा अऊ ओकर बेटा के उपर घेरी बेरी आवत संकट के निवारण बर ... बहुत विचार विमर्श खोजबीन करिन ... पोथी पतरा अऊ कुंडली के अध्ययन मनन ले पता लगिस .. सरी दोष हा नाव के आय । राजा के नाव संविधान रहय .. ओकर बेटा के नाव लोकतंत्र .. अऊ राजा संविधान के कुंडली म लिखाये रहय के ... उही हा ओकर पत्नि बनही .. जेकर नाव सरकार रइहि । नाव के सेती जिनगी भर .. न केवल ओकर घर म बल्कि देश म घला कलह माते रहय अऊ बपरा बाप संविधान अऊ बेटा लोकतंत्र हा .. दुख पाये बर मजबूर रहय .. अऊ सरकार नाव के रानी हा .. देश म राज करत मजा मारत रहय ..  ।  


हरिशंकर गजानंद देवांगन , छुरा .

पुस्तक समीक्षा -* आल्हा छंद - जीवनी (छत्तीसगढ़ के छत्तीस साहित्यकार) **************************


 *पुस्तक समीक्षा -*  

आल्हा छंद - जीवनी (छत्तीसगढ़ के छत्तीस साहित्यकार)

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   आल्हा छंद ले भक्तिकाल म भक्तिभाव ले अपन ईष्टबर, गुरु वंदना के पद, स्तुति बर छंद बहुत रचे हावँय| जगनिक ह आल्हा छंद  म सुग्घर पद सृजित करे हवँय| आल्हा के शौर्य वर्णन ल वीर भाव( विरता के भाव ) म रचे के कारण ही ए छंद के नाम वीर हर पात्र के नाम म *आल्हा छंद* पड़गे| जबकि ए तो वीर छंद आय |


आल्हा छंद*   दू डाँड़ के  सम मात्रिक छंद आय, एकर खास विशेषता हवय के ए छंद के विधान 16-15 के भार ले कुल 31मात्रा होथे अउ आखिर म गुरु लघु के होय म गायन ले माधुरता उत्पन्न होथे| वीर भाव म शौर्य लिए प्रयोग ले छंद कर्ण प्रिय अउ हृदय ग्राह्य होगे हे| | 

   भक्तिकाल के विषय परिस्थिति अलग रहीस | ए काव्य हर वर्तमान माध्यम ले कहि सकत हवन केभविष्य ल सँवारना हे  तव वर्तमान के जानकारी रहय| आज के पीढ़ी ल अपन पुरखा मन के थाती के ज्ञान होना चाही|

   इहाँ संत महात्मा, समाज - सुधारक, क्रातिकारी,स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, लोक कलाकार,राजनीतिक छवि वाले मनखे मन, पत्रकार , साहित्यकार अउ आने आने क्षेत्र के ख्याति वाले पुरोधा मन अपन अपन विधा म, क्षेत्र म सुरुज कस अँजोर बगराय हें| जेकर ज्ञान अँजोर हर कई बछर तक नवा पीढ़़ी ला रद्दा देखाही| 

कुछ साहित्यकार  हरि ठाकुर, डाॕ बलदेव साव,डाॕ परदेशीराम वर्मा, सुशील यदु,जे आर सोनी, सुशील भोले,चोवाराम बादल, मनीराम साहू 'मितान', लोक नाथ साहू 'ललकार' आदि मन गद्य अउ पद्य म इन पुरोधा मन के गाथा, कृतित्व, व्यक्तित्व ल उकेरे के काम करे हें| उही मन म बोधन निषाद जी के नाम घलो शामिल होगे|

अल्हा छंद म सृजित पहली कृति आय|

  आल्हा छंद - जीवनी म छत्तीसगढ़ के 36 (छत्तीस ) साहित्यकार मन के जीवन वृत्त ल जाने बर मिलही|सृजित काव्य हर  छत्तीसगढ़ी भाषा के विशेष रुप लिए कभू शौर्य के तव कभू परिचयात्मक पद मन समाय हवँय|  

 ए मा विविध  कवि लेखक साहित्यकार मन के गाथा हर छंद बद्ध हे|


सरस्वती वंदना- 

जय हो शारद माता तोरे तहीं ज्ञान के भण्डार |

मँय अज्ञानी लइका आवँव, मोरो बिनती ला स्वीकार||

हे जगदम्बा आदी भवानी,हँस हरे माँ वाहन तोर|

एक हङथ मा बीना सोहे, एक हाथ मा ज्ञान अँजोर||



एक छंद देखन-

छत्तीसगढ़ राज के बेटा, नाम रहिन हे हीरा लाल|

लिखिन व्याकरण छत्तीसगढ़ी, छोट उमर मा करिन कमाल||

तीस रुपैया महवारी मा,करिन सहायक शिक्षक काम|

बिलासपुर के स्कूल प्राथमिक, बना डरिस विद्या के धाम||

शुरु करिन हे गायन वादन,रहै इँखर वो बड़ विद्वान|

अपन लगन महिनत के पाछू, हीरा जी पाइन सम्मान||


अइसने बढ़िया बढ़िया शब्द मन के संयोजन ले ये कृति हर पढ़े पढ़े के मन करथे|


एक अउ छंद देखन-


महानदी बोहावत सुग्घर, कल -कल - कल- कल सुन लौ धार|

राजिम नगरी तीर बसे हे, गाँव चँद्रसुर हे चिनहार||


चित्र कला अउ मूर्तिकला मा, पारंगत शर्मा विद्वान|

नाट्य कला के सुग्घर ज्ञाता, बने सिखाइन नाटक ज्ञान||

ग्रंथ लिखिन अठ्ठारह ले जादा, छत्तीसगढ़ी हिंदी लेख|

काव्य दान लंला बहुचर्चित,उपन्यास नाटक ला देख||

विक्टोरिया वियोग लिखिन अउ, सतनामी के भजन सुनाय|

छत्तीसगढ़ी रामायण अउ, श्री रघुनाथा गुण बरसाय||

अइसने अइसने घात नीक छंद बद्ध पद मन मा बंध मन मा रचना हर अपन डहर खीचते हवय|


भारत भुइयाँ- के छत्तीसगढ़िया सपूत मन के एक ले एक छत्तीस महान विभूति मन के जीवनी पढ़ सकत हवन|


गाँनी टोपी पहन पजामा, छाता धरै हाँथ मा एक|

मिलनसार सब ला वो चाहय, काम करै वो जन बर नेक||


कोदू राम समाज सुधारक,मानवता के बनिस मिसाल|

संस्कृत निष्ठ व्यक्ति अवतारी, भारत भुइयाँ के ये लाल||

 गोठ सियानी लिख कुण्डलिया, आडम्बर ल दूर भगाय|

छत्तीसगढ़ी दलित कहाये,ये गुरुजी गिरधर कविराय||

कुछ एक बानगी अउ देखन वीर छंद मा-

माटी पुत्र दुलरवा बेटा,माटी के करके गुणगान|

छत्तीसगढ़ी गीत लिखिन हे,अउ किसान के करिन बखान||


छत्तीसगढ़ी काव्य गगन मा, मेत्तर साहू जब आय|

सुरुज बरोबर चमकिन वो तो,छठी दशक मा नाम कमाय||

उही बछर मा एक पत्रिका,मासिक निकलय बड़ अनमोल|

होवत रहै प्रकाशित रचना,सबले जादा गुरतुर बोल||

संगी भागी रथी तिवारी, नरसिंह जी


ये कृति हर छत्तीसगढ़ी भाषा साहित्य ल पोठ करही|

 *काव्य तत्व* मन के बहुत सहज रुप म प्रयोग होय हे|

अलंकार ले युक्त छंद मन अनुपम अनुभूति देवत हें| 

अलंकृत शब्द, भाव लालित्य मन अलौकिक अउ शास्त्रीय होकर के भी मानवीय संवेदना म पाग धरे रस म भिंजोवत हें|

अनुप्रास, उपमा अलंकार , ध्वन्यात्मकता हर मनमोहत हे|

     वइसे तो कवि के छंद म ए हर चौंथा कृति आय| एकर पहली भी ओमन के "अमृतध्वनि छंद संग्रह" "छंद कटोरा" अउ "हरिगीतिका " प्रकाशित हो चुके हे| आपमन  छत्तीसगढ़ी भाषा म लिखइया एक स्थापित कवि आवव|


      बोधन राम निषादराज 'विनायक' जी के पेशा कहन तव   छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग म व्याख्याता के पद "शास.उ.मा.वि.सिंघनगढ़" म पदस्थ हावँय| 


ए कृति हर छत्तीसगढ़ी भाषा के कोठी ल भरत हे, छत्तीसगढ़ी भाषा - साहित्यकार मन के विकास म उपयोगी सिद्ध होही| नवा पीढ़ी मन ल सुग्घर साहित्य लिखे पढे़ बर रद्दा दिखाही अउ पाठक मन के दिल ल छूही अइसे विश्वास हे|


मै उँकर उज्जर जिनगी के कामना करत बहुत बहुत बधाई देवत हँवव|


कृति-आल्हा छंद - जीवनी (छत्तीसगढ़ के छत्तीस साहित्यकार)

छत्तीसगढ़ी में ;

 *छत्तीसगढ़ राज भाषा आयोग* डहन ले प्रकाशित

 मुद्रक- छत्तीसगढ़ संवाद


 *छंदकार-* 

बोधन राम निषाद 'विनायक'

स/ लोहारा जिला कबीरधाम

मूल्य-दू सौ रुपिया


समीक्षक- *अश्वनी कोसरे

कवर्धा कबीरधाम

छत्तीसगढ़

धुँधरा चन्द्रहास साहू मो 8120578897

 धुँधरा

                              चन्द्रहास साहू

                          मो 8120578897


एक लोटा पानी पीयिस  गड़गड़-गड़गड़ बिसालिक हा अउ गोसाइन ला तमकत झोला ला माँगिस। आगू ले जोरा-जारी कर डारे रिहिस। अउ झोला...?  झोला नही भलुक संदूक आय दू दिन के थिराये के पुरती जिनिस धराये हाबे।  गोसाइन घला कोनो कमती नइ हाबे। बिहनिया चारबज्जी उठके सागभाजी चुनचुना डारिस । चुल्हा-चुकी सपूरन करके टिफिन ला जोर डारिस। गोसइया ला खाना खवइस। गोसइया तियार होइस अउ एक बेर फेर देवता कुरिया मा खुसरगे। ससन भर देखिस बरत दीया अउ अगरबत्ती ला। दूनो हाथ जोरके कुछु फुसफुसाइस अउ जम्मो देबी देवता के पैलगी करिस। लाल ओन्हा मा बँधाये रामायण, फोटो मा दुर्गा,काली, हनुमान अउ बंदन पोताये तिरछुल वाला देवता, लिम्बू खोंचाये लाली पिवरी धजा - जम्मो ले आसीस माँगिस। 

       अब शहर के रद्दा जावत हावय। डोंगरी पहाड़ ला नाहक के मेन रोड मा आइस । फटफटी मा पेट्रोल भरवाइस। ......अब शहर अमरगे। शहर के कछेरी अउ कछेरी मा अपन वकील के केबिन कोती जावत हाबे।

"नोटरी करवाना हे का ?''

"लड़ाई झगरा के मामला हे का ?''

"जमीन जायदाद के चक्कर हे का ?'' 

आनी-बानी के सवाल पूछे लागिस वकील के असिस्टेंट मन। बिसालिक रोसियावत हाबे फेर शांत होइस।  कुकुर भूके हजार हाथी चले बाजार । बिसालिक काखरो उत्तर नइ दिस अउ आगू जावत हे। वोकर वकील के केबिन सबले आखरी मा हाबे। 

"तलाक करवाना हे का ?''

एक झन वकील के असिस्टेंट पूछिस अउ बिसालिक आसमान मा चढ़गे।

"बिहाव के चक्कर हाबे का भइयां ! लव मैरिज फव मैरिज।''

"हंव बिहाव करहुँ तुंहर बहिनी मन हाबे का बता ....?'' 

अब सिरतोन तमतमाये लागिस बिसालिक हा।

"का भइयां ! तहुं मन एकदम मछरी बाजार बरोबर चिचियावत रहिथो। दू झन लइका के बाप आवंव भइयां । मोर बर- बिहाव होगे हे। ....अउ मेहां कोन कोती ले कुंवारा दिखथो ? आनी-बानी के सवाल झन पूछे करो भई।''

बिसालिक अब शांत होवत किहिस ।

"अरे ! आनी-बानी के सवाल नइ हाबे। सरकारी उमर एक्कीस ला नाहक अउ कभु भी बिहाव कर कभु भी तलाक ले...! उम्मर के का हे....? उम्मर भलुक बाढ़ जाथे फेर दिल तो जवान रहिथे। पच्चीस वाला घला आथे अउ पचहत्तर वाला घला  आथे बिहाव करवाये बर या  तलाक लेये बर।''

असिस्टेंट किहिस अउ दूनो कोई ठठाके हाँस डारिस। कम्प्यूटर मा आँखी गड़ियाये ऑपरेटर अउ टकटकी लगाके देखत परिवार के जम्मो मनखे करिया कोट मा खुसरे वकील पान चभलावत नोटरी अउ दुख पीरा मा दंदरत क्लाइंट । 

                  बिसालिक घला क्लाइंट तो आय नामी वकील दुबे जी के। वकील केबिन ला देखिस झांक के। दुबे जी बइठे रिहिस। कोनो डोकरी संग कोई केस साल्व करत रिहिस। अब क्लाइंट मन बर लगे खुर्सी मा बइठगे। असिस्टेंट नाम पता लिखिस पर्ची मा अउ वकील दुबे जी के आगू मा मड़ा दिस।

               झूठ लबारी दुख तकलीफ सब दिखथे कछेरी अउ अस्पताल मा। उहाँ मनखे जान बचाये बर जाथे अउ इहाँ ईमान बचाये बर। उहाँ मरके निकलथे अउ इहाँ मरहा बनके निकलथे मनखे हा। नियाव मिलही कहिके आस मा हर पईत आथे बिसालिक हा फेर मिल जाथे तारीख। तारीख बदलगे, मौसम बदलगे, बच्छर बदलगे, वकील कोर्ट जज बदलगे फेर नइ सुलझिस ते एक केस। बिसालिक अउ वोकर नान्हे भाई बुधारू के बीच के जमीन विवाद।

               बिसालिक गाँव मा रहिथे अपन परिवार संग अउ बुधारू हा शहर मा अपन परिवार के संग। दाई ददा के जीते जीयत बाँटा-खोंटा होगे रिहिन। नानकुन घर खड़ागे। खार के खेत दू भाग होगे। अउ बाजार चौक के जमीन ....? इही आय  विवाद के जर । दाई ददा के सेवा-जतन सूजी पानी ऊँच नीच जम्मो बुता बिसालिक करिस। शहरिया बुधारू तो सगा बरोबर आइस अउ सगा बरोबर गिस। ऊँच नीच मा कभु दू चार पइसा दे दिस ते .?....बहुत हे। 

"ड्राइवर के बुता अउ आगी लगत ले महंगाई , वेतन पुर नइ आवय भइयां।''

अइसना तो कहे बुधारू हा जब पइसा मांगे बिसालिक हा तब। दाई ददा के जतन करे हस बाजार चौक  के जमीन तोर हरे बिसालिक। गाँव के सियान मन किहिस। कोनो विरोध नइ करिस। अब अपन कमाई ले बिसालिक काम्प्लेक्स बना दिस आठ दुकान के । ....अउ बुधारू के आँखी गड़गे। 

"मोर दू झन बेटा हाबे बिसालिक भइयां ! दू दुकान ला दे दे। नौकरी चाकरी नइ लगही ते दुकान धर के रोजी रोटी कमा लिही लइका मन ।''

 अतकी तो अर्जी करे रिहिस बुधारू हा। बिसालिक तो तमकगे। 

"मोर कमई ले दुकान बनाये हंव नइ देवंव कोनो ला।''

अब घर के झगरा परिवार मा गिस। परिवार ले पंचायत अउ अब कोर्ट कछेरी। छे बच्छर होगे केस चलत। पइसा भर ला कुढ़ोथे अउ नियाव नइ मिले तारीख मिलथे....।

 "बिसालिक !''

आरो करिस  असिस्टेंट हा अउ बिसालिक वकील के कुरिया मा खुसरगे। जोहार भेट होइस। अपन जुन्ना सवाल फेर करिस।

"केस के फैसला कब होही वकील साहब !'' 

अवइया तीस तारीख बर अर्जी करहुं जज साहब ले। उही दिन फैसला हो जाही। केस जीतत हन संसो झन कर। साढ़े सात हजार फीस जमा कर दे असिस्टेंट करा ।''

वकील किहिस अउ आस मा पइसा जमा करिस बिसालिक हा। घर लहुटगे अब।


 "बड़ा बाय होगे बिसालिक !''

रामधुनी दल के मैनेजर आय। दउड़त हफरत आइस अउ किहिस।

"का होगे कका! बताबे तब जानहुं।''

"का बताओ बेटा ! फभीत्ता हो जाही, जग हँसाई हो जाही अइसे लागथे। राम के पाठ करइया गणेश हा अपन गोसाइन संग झगरा होके भागगे रे ! गुजरात जावत हे कमाये खाये बर। वोकर पाठ ला कोन करही एकरे संसो हाबे बेटा ! तेहां करबे न !'' 

"मेंहा...? नइ आय कका ! जामवंत रीछ के पाठ करथो खाल ला ओढ़के उही बने लागथे। ''

बिसालिक अब्बड़ मना करिस फेर मैनेजर मना डारिस। 

          आगू गाँव भर मिलके कलामंच मा रामलीला करे अउ रावण मारे फेर अब तो गाँव भर दुराचारी रावण होगे हे तब कोन मारही रावण......? रामलीला नंदा गे। अब रामधुनी प्रतियोगिता होथे उही मा झाँकी निकाल के रामकथा देखाथे मैनेजर हा। जब तक मैनेजर जियत हे तब कलाकार के हियाव होवत हाबे। मैनेजर सिरा जाही...जम्मो नंदा जाही अइसे लागथे। संसो करे लागेंव मेंहा। जम्मो कलाकार मन ला जुरिया के लेगिस आमदी गॉंव अउ तियारी करे लागिस अपन कार्यक्रम के।

               गवइया सुर लमाइस। नचइया  मटकाइस मंच मा बाजा पेटी केसियो ढ़ोलक मोहरी बाजिस। अब मंगलाचरण आरती होये के पाछू कथा शुरू होइस राम बनवास के कथा। बिसालिक पियर धोती पहिरे हे। मुड़ी मा जटा, बाहाँ मा रुद्राक्ष के बाजूबंद, नरी मा रुद्राक्ष के माला, गोड़ मा खड़ाऊ, कनिहा मा लाल के पटका। माथ मा रघुकुल के तिलक अउ सांवर बरन दमकत चेहरा। दरपन मा देख के अघा जाथे। धनुष बाण के सवांगा मा सौहत राम उतरगे अइसे लागत हे।

          राजा दशरथ कोप भवन मा जाके अपन गोसाइन केकयी ला मनाथे। .......अउ नइ माने तब पूछथे का वचन आय रानी माँग ले।

"मागु मागु पै कहहु पिय कबहुँ न देहु न लेहु।

माँग -माँग तो कथस महाराज फेर देस नही।'' 

कैकयी हाँसी उड़ावत किहिस। 

"दुहुँ सिरतोन !''

"रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई ।''

"तब सुन महाराज ! मोर पहिली वचन

सुनहु प्रानप्रिय भावत जी का। देहुं एक बर भरतहि टीका॥

दुसर वचन

तापस बेष बिसेषि उदासी। चौदह बरिस रामु बनबासी॥

राम ला चौदह बच्छर के वनवास अउ मोर भरत ला राजगद्दी।

अइसने किहिस कैकेयी हा। दशरथ तो पछाड़ खा के गिरगे। अब्बड़ मार्मिक कथा संवाद मैनेजर गा के , रो के रिकम-रिकम के अभिनय करके बतावत हे।

 जम्मो  देखइया के आँसू चुचवाये लागिस। कतको झन कैकयी के बेवहार बर रोसियाये घला लागिस। 

राम के बरन धरे बिसालिक सबले आगू कैकेयी के पाॅंव परके आसीस माँगथे। फूल कस सीता घला रिहिस। लक्ष्मण घलो संग धरिस अउ गोसाइन उर्मिला ले बिदा माँगिस। उर्मिला मुचकावत बिदा दिस। अउ गंगा पार करके चल दिस जंगल के काॅंटा खूंटी रद्दा मा। भरत तमतमाये लागिस। राजपाठ ला नइ झोंको कहिके, अउ राम के खड़ाऊ ला धर के लहुटगे। भाई भरत तपस्वी होगे अउ शत्रुघन राज चलावत हे। 

              सिरतोन कतका मार्मिक कथा हाबे। समर्पण अउ त्याग के कथा आय रामायण। जम्मो ला देखाइस बिसालिक मन। बिसालिक गुनत हे जम्मो कोई अपन सवांगा ला हेर डारिस अब फेर बिसालिक नइ हेरिस।

कार्यक्रम सुघ्घर होइस बिसालिक घला बने पाठ करिस। अब गाँव वाला मन ले बिदा लेवत हाबे। 

"चाहा पीके जाहूं। छेरकीन डोकरी घर हाबे जेवनास हा।''

गाँव के सियान किहिस अउ चाहा पियाये बर लेग गे।

जम्मो कोई ला चाहा पियाइस डोकरी हा। राम लक्ष्मण भरत शत्रुघन के पाठ करइया मन चाहा पीयिस फेर मंथरा अउ कैकेयी ला नइ परोसे।

"दाई यहुँ बाबू ला दे दे ओ !''

मैनेजर के गोठ सुनके दाई खिसियाये लागिस।

"इही मन तो बिगाड़ करिस मोर फूल बरोबर सीता ला, राम ला बनवास पठोइस। नइ देंव चाहा।''

डोकरी बखाने लागिस। राम बने बिसालिक किहिस चाहा बर तब वोमन चाहा पीयिस। 

"तेहां काहत हस बेटा राम ! तब देवत हंव नही ते सुक्खा टड़ेड़तेंव।''

डोकरी किहिस।

"सबके घर मा तोर बरोबर मर्यादा पुरुषोत्तम राम अवतरे बाबू तभे ये दुनिया मा सत्य अउ धर्म के स्थापना होही। सब बर छाहत रह मोर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम।''

डोकरी अब भाव विभोर होगे।

अब जम्मो के आसीस लेके लहुट गे अपन गाँव बिसालिक अउ संगवारी मन।

       अधरतिया घर अमरिस बिसालिक हा। गोड़ हाथ धो के सुतिस फेर नींद नइ आय। गुने लागिस रामायण ला। नत्ता ला कइसे निभाये जाये ..? त्याग समर्पण इही तो सार बात आय रामायण के। ददा के बात मान के राम जंगल गिस - पुत्र धर्म के मान राखिस। गोसइया के संग देये बर फूल कस सीता चल दिस। उर्मिला मुचकावत लक्ष्मण ला बिदा दिस। भरत राजपाठ तियाग के तपस्वी होगे।...... अउ छोटे भाई शत्रुघन राज करत हे। जम्मो अनित करइया,चौदह बच्छर के बनवास भेजइया माता कैकयी ला प्रथम दर्जा देथे राम हा। कोनो बैर नही कोनो मन मइलाहा नही.....! जम्मो कोई ला मान देवत हे। अतका होये के पाछू घला भरत बर मया......? सिरतोन राम तेहां मर्यादा पुरुषोत्तम राम आवस।


बिसालिक गुनत हे।..........अउ मेंहा .....?अपन छोटे भाई संग का करत हंव.......? 

               मुँहू चपियागे। लोटा भर पानी पी डारिस। अब महाभारत के सुरता आये लागिस। पांडव मन आखिरी मा पाँच गाँव तो माँगिस वहुं ला नइ दिस चंडाल दुर्योधन हा अउ अपन कुल के नाश कर डारिस।

मोर छोटे भाई हा घला दू दुकान ला मांगत हाबे अउ मेंहा कोर्ट कछेरी रेंगावत हंव......?  का होइस दाई ददा के कमती सेवा जतन करिस ते .....? सिरतोन महंगाई मा वोकर घर नइ चलत होही ....? कभु एक काठा चाउर तो नइ पठोये हंव मेंहा एक्के मे रेहेंन तब। ड्राइवर के कतका कमई ...?  दुर्योधन बरोबर मोर बेवहार ....?

नत्ता-गोत्ता मा बीख घोर डारेंव....। भलुक राम नइ बन सकंव ते का होइस...भरत बन के दू दुकान के तियाग कर देंव.....?

बिसालिक अब्बड़ छटपटावत हे अब। 

अब नवा संकल्प लिस मेंहा लहुटाहूं आठ में से चार दुकान ला । बिहनिया जाहूं छोटे भाई घर ....। सुख-दुख जम्मो बेरा मा नत्ता निभाहूं.....। बिसालिक अब अगोरा करे लागिस बिहनिया के । करिया रात छटिस अउ सुरुज के उजास बगरे लागिस। हलु-हलु धुंधरा भागे लागिस। ...बिसालिक के मन के जम्मो मइलाहा घला  धोवा गे रिहिस। अब मन के धुँधरा सफा होगे रिहिस। 

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चन्द्रहास साहू द्वारा श्री राजेश चौरसिया

आमातालाब रोड श्रध्दानगर धमतरी

जिला-धमतरी,छत्तीसगढ़

पिन 493773

मो. क्र. 8120578897

Email ID csahu812@gmail.com

रोज एक पुड़िया

 [1/27, 6:23 AM] +91 98261 60613: रोज एक पुड़िया 😃

नानकुन कहानी -


"  बात तो बनगे  "


  साग -भात,रांधत -रांधत गोठ -बात घलो मोबाइल म हो जथे l

" तुंहर आदमी बने हे, तनखा लाके दे थे जउन खर्चा करना हे कर पूछय घलो नहीं बने l कतेक खर्चा करे हच ? हमला तो पूछथे कहाँ गे पूरा तनखा के पइसा? हमला तो इही टेंशन हे l" भउजी के गोठ पूरा नई हो पाइस ओती ले ओकर दीदी के -"का हिसाब वो, घर ला औरत मन चलाथे उही मन जानथे l आदमी जात का जानही l

अपन ला देख नवा सोना के डिजाइन वाले झुमका आये हे

मै तो लुहूँ मोला बने लागिस l"


"महूँ ला बताबे कब जाबे ते l"


"तोर करा तो पइसा नई होही "


"हो जही, ओइसने गोठियाये के हरे वो आदमी मन ला खर्चा के गोठ सुनावत रहिबे त बने कमा थे l  अपने च बर तो लेथव "


"देख ले, ले बताबे , का साग रांधत हस त "


"हत तो बही बताते नहीं,ले जर गे वो बरी आलू हरे l"


"खिसियाही तोला "


"का खिसियाही,तेल सिरागे रहिस पानी म भूंज के रांधे हव

कहि दुहूँ तोर तनखा के पइसा पूरय नहीं तो मै का करहूँ कहि दुहूँ l"

"बड़ चतुरा हस बहिनी, ले मोबाइल ला बंद कर l ले,मोर बूता परे ओ l "

 साग -भात,भले जरगे lबात तो बनगे l


मुरारी लाल साव

कुम्हारी

[1/29, 10:36 AM] +91 98261 60613: रोज एक पुड़िया 😃

नानकुन कहानी -


     "मन मरजी "


   बिचारा चल दीस l बने  रहिस गुरूजी ह l सबसे मेल -जोल हित -मीत  करे म आघू रहिस l  किसुन अपन समय के गाँव के पहिली गुरूजी l ओकर पढ़ाये लइका मन ऊंचहा नौकरी करत हे l

बने मान सम्मान मिलत रहिस

किसुन गुरूजी ल l फेर अपन बेटी के मन मरजी के आघू कुछु नई चलिस l इही गोठ गाँव म होवत रहिस l

      ओकर दू बेटा दू बेटी l सबके बिहाव होगे हे l बेटी बेटा मन बने संस्कार नई  सीख पाइस l मया दुलार म  उज्जड  निकलगे l कामनी  ओकर छोटे बेटी अलग सोच के l 

"मोर मर्जी ले पति चाही l अपन मन ले बिहाव करहूँ" l किसुन गुरूजी बने  घर घराना देख के ओकर बिहाव करे रहिस l बिहाव होये दू महीना बाद  कामनी मइके म बइठ गे l बैठक पंचाईत होइस कामनी मुड़ी पटक दीसl ससुराल नई जाना हे , नई जाना हे l मन मरजी के चलते रिस्ता टूट गे l ककरो बात ल नई मानिस l

कारन एके ठो  बताइस झूठ बोलके बिहाव करें हे -पीते खाथे l 

 दस साल पुरो दीस मइके मा बइठ के  कामनी ह l  एती ओती घुमाई फिरई म मटर मटर म l अउ दूसर लड़का छांटत -छांटत l

अभी के बेरा म ओला सब पीने खाना वाला दिखीस हे  लबारी अइसे लगय lकामनी ला घमंड घलो रहिस अपन रूप रंग के l पढ़ाई मेट्रिक पास फेर चटर पटर म हुशियार l

किसुन गुरूजी के मन म डर भीतरी  म समाये रहिस l भरे जवानी म कुछु काँही मत कर लय l घऱ ला छोड़ के भाग मत जाय l एखरे सेती ओकर हर बात ल मानय l


चिंता आथे त रपोट के जघा पोगराथे l मर जथे इही चिंता म का होही?l अपन बेटी ला समझाये  अउ कहे रहिस- अपन मर्जी ले रिस्ता ल टोरे हस बेटी,दूसर रिस्ता ल जोड़ना सरलअउ आसान नोहय  l चार के मर्जी सलाह अउ आशीर्वाद काम आथे lअपन मर्जी सब जघा नई चलय कुछ सुन समझ l" सुरता हे कामनी ल फेर समझ नहीं l

आखिर म  कामनी अपन मर्जी फेर चलाईस l

 कामनी  दूसर रिस्ता तो बना लीस  l  महीना दिन नई पुरिस इहु रिस्ता ला नई निभाईस अपन उज्जड पन देखा ना  नई छोड़िस l दूसरैया ससुराल म ओकर मन मरजी

नई चलिस l उहू रिस्ता ला टोर दीस  l

   किसुन बिचारा चल दीस फेर ओकर चिंता ठाड़े रहिगे l


मुरारी लाल साव

कुम्हारी

[1/31, 5:23 AM] +91 98261 60613: रोज एक पुड़िया

 " चिबरी भात "

मजा के दिन म खीर भात बिगड़े दिन म चिबरी भात l जगत सुरता करत बइठे -बइठे सोचत रहिस l अपन गोसाइन परेमीन के बारे म l

  परेमीन के मया  के खीर भात के सुरता कम, चिबरी भात खाये रहिस तेन जादा आवत रहिस l

एक दिन के बात ए l परेमीन मया म अपन मन से भोजन बना वत रहिस l बढ़िया सोच के  बने बने ख्वाहूँ त मया जादा करही l मोर मन के राजा खुश होही l कीमती ऊंचहा लुगरा लेवाहूँ l

उही दिन ओकर भाई सगा अस आगे l बड़ ख़ुशी होइस l फेर जगत ला अचरज होइस l आज ओकर भाई आये हे त कइसे मन लगाके भोजन बनाही lजगत सोचिस अइसने रोज सगा आवत रहय बने बने खाये पिए के ब्यवस्था होवत रहय l जगत घलो बने आव भगत म लग गे l आज तो खीर भात खाये ला मिलही l

बात निकल गे तीजा के लुगरा के l

परेमीन कहिस -"भाई लुगरा देनी लेनी के चीज ए l मन ला मढ़ाये के l फेर भउजी के आदत बने नई ए ओला सुधार दे l" ओकर भाई कहिस -"मोर बस के बात नोहय l ओकर मर्जी  ओकर हरे l"

परेमीन गुस्सा करके -"ले जा लुगरा ला ओकर मर्जी के ए l"

"बहिनी मोर डहर ले "जगत बीच म गोठिया परिस -"तुंहर भाई बहिनी म अतेक मया हे

त मोर बर का बाँचीस? ये गोठ परेमीन ला झार लगगे l जगत ला रोज कहय  "बने ऊंचहा लुगरा ले l " उही लुगरा बर मन नई मिलत रहिस l तीजा के लुगरा  रंग ढंग नहीं भाई के मन के नोहय l भाई के मन लुगरा म नहीं ब्यवहार म रहिस lगोठ गुंग्वावत रहिस तीनो के भीतरी l जइसन मन ओइसन अन l

देखते देखत मन बिगड़गे l बात बनिस नहीं l बात कुछु नई रहिस l बात संग भात चिबरी होगे l


मुरारी लाल साव

कुम्हारी

[2/1, 8:06 AM] +91 98261 60613: रोज एक पुड़िया 😃

नानकुन कहानी -

   "  सुध अउ बुध "


दूनो पक्का संगवारी सुध अउ बुध l रहिथे एके संग जाही एके संग l सुध भोला अउ भुलक्कड़ बुध अकड़ू अउ घमंडी l दूनो म एक दिन  खटपट होगे l एक दिन सुध जंगल गे रहिस l जंगल  के बिस्तार अउ सुंदरता ला देख सुध के मन रम जथे l उही जंगल म सुन्दर रंग रूप वाली मोहनी मिलगे l सुध ओला देख के अपन बुध ला भुलागे l ओकर रंग रूप म अपन सब सुध ल खो डरिस l

बुध अंकडू रहिस सोचिस -परबूधिया मन ला कोन समझाये दू दिन के जवानी अउ दू दिन के मया मा भुला जथे l भटकन दे,मरन दे l

बुध अकेल्ला  कुछ दिन रहिस l बुध आखिर सुध बिना अकेल्ला कइसे रह पाही?एक दिन सुध ला चिल्लाईस -

"कहाँ जात हस एती आव?"

सुध कहिस -मजा म हँव l तै कइसे हस? बुध कहिस -"तोर बिना अधूरा हँव l"

तै आना l "  बुध के तीर कोनो मोहनी नई आवय lउही बेरा  अकेल्ला के हथोड़ी फेका के बुध के मुड़ी म लाग जथे l बुध अपन बुध ल खो डरिस l सुध घलो नई रहिस l

बिना बुध के सुध मोहनी के मया म फँसे हे l एती बिन सुध के बुध  आफत म कल्हरत परे हे l

मोहनी एक दिन हेचकार के कहिस "-तोर बुध कहाँ हे कुछु अक्कल हे लोरघे परे हस  तीर म l " तब सुरता आथे बुध के l सुध पल्ला भागिस बुध करा l तभे संत मन कहिथे -" जउन जतके मया म लप टाये रही  सुध बुध खो के ओकर दुर्गति होही l जेकर सुध नई हे बइहा होथे l जेखर बुध नई हे भकला होथे l अकेला बुध बेसुध परे रहीथे l "

 मोहनी के माया सुध अउ बुध ला अलगा के रखथे lदूनो के बिना ककरो पार नई लगय l सुध बुध के संग जिनगी चलथे l


मुरारी लाल साव

कुम्हारी 

"

[2/2, 8:20 AM] +91 98261 60613: रोज एक पुड़िया

नानकुन कहानी -

    " अपन मान  बर "

सिरतोंन म  बेरा एती ले ओती होगे l गोठ नई सिरईस अउ लामत गे l उंगरी ले बीता अउ बीता ले पोरीस भर l माथा म टीका लगाही सोचत रहिस फेर ये तो उल्टा होगे l चुंदी ला धर के इंचत हे l संभलू के दिन रात एके होगे l मंगलीन के मन नई माढ़ीस गोठियाये के l पति के संग रति तभे नौ लखिया हार आँखी म झूलत हे ओकर l

संभलू कहत कहत थक गे -रात होगे चुप राह l

मंगलीन के चार मांग संभलू बर पहाड़  धकेले बरोबर l कइकेई के दू मांग दसरथ बर भारी होगे l संभलू  महाराजा बने हे l छोटकुन घर चार एककड़ खेत अकेला कोनो परिवार नहीं l धरम पत्नि चल बसीस l मंगलीन ला लानिस l

ले मंगलीन मांग -बता?

मंगलीन कहिस -"मोला  पत्नी बनाये हस ना त अतका करे ला परही l पहिली मोर नाम म घर बार खेत खार ला रख l

दूसर  मोर बर गहना गूंठा ले के दे l

तीसर बैंक मा मोर नाम के खाता खोल दस हजार महीना दे l तोला जिनगी भर साथ दुहूँ l "

संभलू कहिस -अउ बता? मंगलीन कहिस -

"अपन  लरा जरा मन के बात झन मान l"

संभलू अइसे सुनिस संभल के l मंगलीन ला शक सुभा होगे l

मंगलीन ला भरोसा नहीं होइस l मोला कइकेई अस समझे नई करिस lपरान भले चल दय वचन काबर दिही l

संभलू ठोस अउ एक जुबान म कहिस -" मै तोर कोन अँव

मोला अपन जान  -मोला अपन मान l अतेक हिन मान अपमान झन कर  जघा जघा l एला -ओला बताके l भाड़ा किराया अस रिश्ता बनाये ले जिनगी नई चलय l"

मंगलीन  के मंथरा के बुध काम नई आइस l  मंगलीन पारा भर किंजर किंजर के सब ला बतावत हे lमोर बुद्धि काम नई करत हे राँहाव कि छोड़ दव मोला कुछु नई सूझत हे का करंव?

अपन मान बर जोखा उदिम करिस l


मुरारी लाल साव

कुम्हारी

[2/3, 9:14 AM] +91 98261 60613: रोज एक पुड़िया 😃

नानकुन कहानी -

 " खा झन मोटा झन "


कुरिया म लगे परदा हालिस l

चल उठ, बिहनिया होगे l दाई चिल्लाईस -बेरा उगे हे अतेक

कतेक सूतहू ते l"

बेटा उही हरे नवा बहूआहे हे घऱ म l

बहू उठिस l

सास अपन जात ला देखाइस l

"बेटी,  तोपे ढांके नई अस ना

दूध म चांटी परगे हे देख?"

बहू -" चांटी अतलंग करत हे "

खा झन मोटा झन l पियत हन त पी डरेव कहिके कहिते l

चांटी ला पियन दे l "फेर कहिस -

"दाई तहूँ बहू बन आये रहे त दूध ला पियत रहे त चांटी मन

देखत रहिस होही ना!"

सास सुनिस अउ कहिस  - "हमर जमाना म कसेली कसेली दूध होवय l"

तभे मोटायेहस घोसघोस ले बड़बड़ावत बहू कुरिया म आगे परदा ला गिरा दीस l


मुरारी लाल साव

कुम्हारी

[2/9, 6:12 AM] +91 98261 60613: रोज एक पुड़िया 😃

नानकुन कहानी -

   " मुँहरन  "

जचकी अस्पताल म रेवती ला भर्ती करे रहिस l घात पीरा  सहत रहिस बिचारी l नर्स आके बताथे -"लड़की हुई है बधाई l" सब ला ख़ुशी होइस सुनके l

"कतका जोर देखाबे मेडम हमर नवा सगा ल l "

"देखेच देखेच के मन होवत हे नोनी ल l" समारीन पूछिस l

थोकिन  बाद नर्स लेके आथे l

"ये लो देखो l"

बुवा ददा दादी कका काकी सब देखिस नोनी ल, नोनी के मुँहरन ला l सबके मन गदगद रहीस l  "आपस म एक दूसर ला बधाई दीस बड़ सुगघर भगवान देहे l"अपन डहर ले कोनो चंदा असन कोनो पुतरी बरोबर त कोनो सास आये कोनो लछमी के मुँहरन म देखिस l पडोसी सुखिया कइथे -" बजरहिन असन लागिस l ओकर दाई हाट बजार बने घूमे हे  जुगर जुगर बने सबो देखत हे l" रेवती सुन पाइस l "मोर बेटी के मुँहरन ला भगवान गढ़े हे ,फेर उल्टा पुल्टा नाव झन धरव l"  "जाकी रही भावना जैसी तिन मुरत देखी तिन तैसी l"सुखिया सुने रहिस बजार म बोधी के दुकान म रेवती बैठय l ओकरे मुँहरन  तो --? 

नानूक नोनी घलो देखिस सब झन ला सबके मुँहरन ला जुगर -जुगर,दीया असन लिप -लिप

मिळखी मार के l

अतका ल सुन के सुखिया ल अच्छा नई लागिस l अपन देवी मन ला  घलो कहि देथन -         कँकलहीन,  फुरहीं, फुलेशरी l"

नर्स कहिस - "देख लिए ना मुँहरन l "

  सुखिया के मुँहरन बिगड़े रहिस l भरमहीन,तउला मुँह बनाये l 


मुरारी लाल साव

कुम्हारी