Wednesday, 17 January 2024

रोज एक पुड़िया 😃 नानकुन कहानी -

 रोज एक पुड़िया 😃

नानकुन कहानी -

     गोमती 

सगा मन आगे l बबलू  कहाँ हच रे? जा जा जल्दी जा l

गरम गरम लाबे समोसा  अउ बने अस मिठई l भीतर ले बबलू के माँ चिल्लाईस l बबलू झोला धरके निकल गे l"

बबलू के बाबू,

जादा एती ओती के गोठ झन करहू l आज कल के सगा मन उही बात  ल धर लेथे, बिचक जथे " बबलू के माँ चेताइस l

   " आव आव बैठव "

सगा मन  आगे l उनला बैठारिस  l

" घर पता पूछे म कुछ तकलीफ  नई होइस होही ना ? "

सगा मे से एक झन कहिस - नहीं नहीं दुकान वाले ल पूछेन तहाँ बता दीस l"

गोमती पानी लेके आइस l सब झन ला नमस्ते कहिस l "पाँव पर बेटी सगा मन के l"

गोमती पाँव पर लीस l बइठ नोनी  एक झन सगा कहिस l

"नोनी पढ़े हस त का?करबे अब "

गोमती कहिस -"अभी नई सोचे हँव l" इसारा करत लड़का के पिताजी कहिस -मोर बेटा इही हरेl बी काम 

पढ़े हे l कुछू नई करत हे बिहाव के बाद बिजनेस करही l" 

बबलू के माँ हाथ ला पोंछत आगे 

नमस्ते कहत खड़े होगे ll

 बबलू के बाबू  के तीर म बैठत बैठत पूछिस -" बाबू का बिजनेस करही?"   "रेती सीमेंट के दुकान खोल के देबोन l" "अभी के कारोबार म "

"एती ओती जमीन बिक्री करवाना l"

गोमती सुनत रहिस l गुनत रहिस अपन भाग ल lनई बोलत हँव त रिस्ता लग जही l मने मन सोचत हे बाबू ला चिंता हे बेटी बाढगे हे एक तो तीन साल ले कोनो रिस्ता नई आए रहिस l माँ हे तेन घऱ दुवार ला देखथे  l गोमती  के हिम्मत घर चलाये के संभाले के हे l सब चर्चा के बाद गोमती ले पूछिस गोमती कहिस -"मोला बहू बनाके रखहू कि बेटी बरोबर l अपन माँ बाप के एके झन बेटी अँव l"

लड़का के पिताजी जवाब नई  दे पाइस l न लड़का कह पाइस बिहाव के बाद ---l

 सगा मन सोच के बताबो कहत निकलगे  घर ले l

सगा आवत हे -जात हे l गोमती  अस कतकों

l काकर मति अइसन म नई फिरही?

कोन ओला बेटी बनाके रखही  बहू बनाके के सब लेगथे l  ससुराल म भाग जाने मन बेटी असन रहिथे l संस्कार गुन करम धरम  बताथे l गोमती के मन म डर बइठे हे बहू बनाके लेगथे तेला दहेज़  के सेती मार डरथे l इही डर म गोमती के मति फिर गे हे lमति ला मार के  कतेक दिन ले सगा देखही?


मुरारी लाल साव

कुम्हारी

नानकुन कहानी " सब राजी "

 रोज एक पुड़िया 😃


नानकुन कहानी

  "   सब राजी "


गाँव भर के लोगन मन सकलाये रहिस l सियानहा कम  झन जवान मन जादा  रहिस l दुर्गा मंच के उद्घाटन कराये बर l

चुनाव होय  के बाद फेर ओकर झार बनेच दिन ले उड़त रहिथे l जेन जीतीस तेन बहुत कम वोट ले l हारिस तेखर  दबदबा  अभी  भी हे l

इही मेऱ पउर  साल कबड्डी,रस्साखींच,कूद फुगड़ी दौड़ सब होय रहिस l वो खेल के हार जीत म सबला आनंद आये रहिस l ये हार जीत म आधा झन मुंह फुलाए हे आधा झीन मुड़ी ओरमाए हे l वोटिंग मशीन संग खेल होइस ना l

खड़े होके एक झन कहिस -

"नवा विधायक बने हे उही ला मुख्य अतिथि बनाबो l " बात ला काटत दूसर कहिस -

" वो तो अभी बनिस हे lपूर्व विधायक के निधि ले बने हे

ओला मुख्य अतिथि बनाओ l"

"फेर रस्सा खींच शुरू होही l

अइसन म माते गाँव नई सुध रय l मुख्य अतिथि बना लेना इज्जत के सवाल बन गे हे l एक झन कहिस -वोकर ले   बीराजो दीदी करा उद्घाटन कराना ठीक हे l  हव ओकरे करा उद्घाटन करा बो l"  केदार सियान ह सुझाव दीस l "सबको सम्मति दे भगवान, बिगड़े  मति ला हर भगवान l" lतीसर मत बने लागिस l        बीराजो दीदी  ठीक हे l जउन नवा नवा रोजगार करे के प्रशिक्षण देथे l हमरे गाँव के बहू हे l गाँव के नाम रोशन होवत हे " उजियार रोजगार कार्य शाला " l

पार्टी -सार्टी अउ नेता- फेता के चककर छोड़ो अभी l बबा बने सुझाव दीस l ठीक हे l बस तो

होगे फाइनल l

      बिन  पार्टी के बात होही तभे  सुमत बनथे l नई तो सब पार्टी के खात हे पार्टी बर मरत हे पार्टी ल लेके गाँव म दुपार्टी के खेल खेलत हे l  दूरमत फैला के राखे हे पार्टी हर l झगड़ा के जड़ मुख्य अतिथि होथे l अपन अपन घर जावत -जावत इही सोचत रहिन  सब l

सब राजी होगे एक मत म l काम करथे तेला मान सम्मान दव lहमर गाँव ला हम नई संवारबो त कोन संवारही l



मुरारी लाल साव

कुम्हारी

रोज एक पुड़िया 😃 नानकुन कहानी- " काठी "

 रोज एक पुड़िया 😃

नानकुन कहानी-


     " काठी "


"काठी परगे हो---l हमर गाँव के सियान धनऊ राम के स्वर्ग वास होगे  हे हो --l"  गाँव के कोटवार हाँका पारिस l कोनो सुनिस कोनो नई सुनिस मुनादी तो होगे l

     पाँच -पाँच छेना  लकड़ी चौरा म सकलाये ला धर लीस l

पूछा- पाछी के गोठ बात घलो शुरू होगे l कब होइस?कइसे होइस? इलाज बने नई करईस?

बने होगे सजा भोगत रहिस?

तरह तरह के गोठ सुने ला मिलगे l 

 धनऊ के  मरे शरीर  काठी म परे हे नवादसी  कपड़ा (कफ़न )ओढ़े l 

पार पांगर के अपन  अलग नियम नीति जुन्ना लबादा ला ओढ़े l

एक झन परिहा कहिस - "काठी कइसे निकलही? अपन नाती के छट्टी के नेंग नई कराये हे  l पार ले छूटे हे?

एखर नियाव पहिली होही? "

सकलाइस पार वाले मन l

पार मुखिया पूछिस - केदार ले बता का करना हे तोर ददा के काठी बर l "

अपन लइका के छट्ठी भात नई खवाए हस l ओकर दांड परही l 

तूहीँ मन बताव गलती तो होगे हे मानबो l

निर्णय होइस पाँच हजार दांड

देये ला परही l कलेवा भोज पूरा परिहा मन ला  खवाये ला परही l

बाप के मरनी बाप के करनी बेटा ला भुगते ला परही l

केदार हव कहिस l

पार वाले मन फेर धनऊ के काठी निकालिस l

चारो खुरा चार झन बोहे हे l छेना लकड़ी लेगिस मरघट्टी म l

"राम नाम सत हे

सबके इही गत हे "  चिल्लावत गइन l 

कठियारा बनके l


मुरारीलाल साव

कुम्हारी

नानकुन कहानी - बाहिर -भीतरी

 नानकुन कहानी -


      बाहिर -भीतरी


बबा कहिस - "बहू,बाहिर -भीतरी होवत हस lका बात ए?"

" नहीं,कुछु बात नइये l" बबा जोर देके पूछिस कुछ तो बात हे l

"हाँ बबा, तुंहर नाती रात भर बाहिर म हे अभी तक नई आये हे l" कुछु न बताये न चेताये हे l 

बबा सुन के  चुप होगे l राधा अब का बताय? उहू कुछु ल नई जानय l सक -सुभा घलो नहीं l

न सास हे न ससुर l बबा के बुढ़ापा अउ घरगिरहस्थी के सेवा l

कुंजू उही बेरा पटका म मुँह तोपत आइस l

बबा बलाईस तीर म - "तै कहाँ रहिथस रात भर?"

" बूता रहिस बबा l"

"एती बहू बाहिर -भीतिरी होवत हे, चिंता म lओती तै बाहिर -भीतरी खेलत हस l

 नहीं बबा ओइसन जुवा -पत्ता ल नई जानव l

रजऊ कका के बेटी ला अस्पताल ले गे रहेव

बिचारी रात भर दरद के मारे बाहिर - भीतरी होवत रहिस l लइका पेट मा पानी पी डरे कहत रहिस डॉक्टर ह l बांचगे बपुरी ह l"  भीतरी ले खींच के बाहिर निकालिस l

"नोनी होइस बबा l "

जानके बड़ ख़ुशी मनाइस बहू घलो l


मुरारी लाल साव

कुम्हारी

Monday, 18 December 2023

पौनी पौसारी


पौनी पौसारी

लोक जीवन म पौनी पौसारी के अपन अलग जघा हे l हमर सामाजिक जीवन म खासा योगदान हे l कर्म के अनुसार वर्ग बनिस l वर्ग म अलग अलग जात के समाज l नाउ धोबी राउत मेहर बढ़ई एमन सब पौनी पसारी म आथे l पौनी पसारी के मतलब पनाह देके पसर भर देवन इही भाव हे l अपन संग जुड़े रहय l

सबो समाज अपन संरक्षण म राखे हे l हर धार्मिक काम काज म पौनी पौसारी के जघा हे l बिन नाउ धोबी के शुद्धिकरण नई होवय मरनी हरनी छट्टी म l जचकी हो या मरनी  के काम म इंखर भूमिका आघू हे l  मुड़ी ला मुड़वाये ला पड़थे lउंकर काम के पीछू कुछ अंशदान निकल के देथे l ये अंशदान  सगुन के बतौर हे लेकिन सामाजिक व्यवस्था के तहत उंखर मान सम्मान खातिर हे l

सामाजिक भाई चारा ला जोड़े बर परिपाटी चलत हे l पूजा पाठ म तोरन  दोना पतरी इही मन लाथे l स्वस्थ परम्परा ए मेऱ छुवा छूत भेदभाव नई मानय l उंखर उपस्थिति ला बने माने जथे l सेर के रूप म सूपा म चाउंर दार नून मिरचा आलू बरी कांदा सब भोजन के सामान देके बिदा करे जाथे l पौनी पसारी के प्रथा अब टूट गे या टूटत हे ओखरो कारण हे l

  अब उहू नंदावत जावत हे l सेवा सहिष्णुता नई रही गे l हमर परम्परा हमर संस्कृति म औदार्य  गुन हे l जेखर गुन गाथन l

कइसे बचाबो? गोठ म पदोंलीं

दुहू l

 

मुरारी लाल साव

कुम्हारी

3 दिसम्बर पुण्यतिथि म सुरता// क्रांतिकारी व्यक्तित्व के धनी हरि ठाकुर


 

3 दिसम्बर पुण्यतिथि म सुरता//

क्रांतिकारी व्यक्तित्व के धनी हरि ठाकुर 

    पुरखा साहित्यकार हरि ठाकुर जी के चिन्हारी आमतौर म एक मयारुक गीतकार के रूप म जादा हे, जेकर असल कारण आय, छत्तीसगढ़ी भाखा म बने दुसरइया फिलिम "घर द्वार" म लिखे उंकर गीत मन के अपार सफलता. फेर मैं उंकर एक इतिहासकार, पत्रकार के संगे-संग  क्रांतिकारी रूप के जादा प्रसंशक हंव. 

    उंकर संग मोर चिन्हारी सन् 1983 म तब होए रिहिसे जब हमन अग्रदूत प्रेस म नवा-नवा काम करत रेहेन. उहाँ पुरखा साहित्यकार अउ पत्रकार आदरणीय स्वराज प्रसाद त्रिवेदी जी तब सलाहकार संपादक रिहिन हें. उंकर संग मेल-भेंट करे बर आदरणीय हरि ठाकुर जी के संगे-संग अउ तमाम साहित्यकार मन आवंय. तब उंकर मन संग मोरो भेंट-चिन्हारी हो जावत रिहिसे. आगू चलके जब मैं साहित्यिक अउ सामाजिक गतिविधि के संगे-संग छत्तीसगढ़ राज आन्दोलन म संघरेंव, तहाँ ले घनिष्ठता अउ बाढ़त गिस.

    उंकर जनम 16 अगस्त 1927 के रायपुर म होए रिहिसे. उंकर सियान ठाकुर प्यारेलाल सिंह जी ल हम सब त्यागमूर्ति के संगे-संग लोकप्रिय महान श्रमिक नेता, आजादी के आन्दोलन के योद्धा, सहकारिता आन्दोलन के कर्मठ नेता, पत्रकार, विधायक अउ रायपुर नगर पालिका के तीन घांव रह चुके अध्यक्ष के रूप म जानथन. अपन सियान ले उन ला प्रेरणा मिले रिहिसे. एकरे सेती उन अपन छात्र जीवन म सन् 1942 म असहयोग आन्दोलन म शामिल होगे रिहिन हें. 1950 म छत्तीसगढ़ महाविद्यालय रायपुर म उन छात्र संघ अध्यक्ष बनगे रिहिन हें. इहें ले उन कला अउ विधि म स्नातक के उपाधि पाके दस बछर अकन ले वकालत घलो करे रिहिन हें.

    देश ल आजादी मिले के बाद सन् 1955 म पुर्तगाली शासन के विरुद्ध गोवा मुक्ति आन्दोलन म घलो संघरे रिहिन हें. सन् 1956 म डा. खूबचंद बघेल के संयोजन म राजनांदगाँव म होए "छत्तीसगढ़ी महासभा" घलो म उन संघरे रिहिन हें, जिहां उन ला ए संगठन के संयुक्त सचिव बनाए गे रिहिसे. ए छत्तीसगढ़ राज आन्दोलन रूपी यज्ञ म फेर वो जीवन भर आहुति देवत रिहिन हें. मैं उंकर इही रूप के सबले जादा प्रसंशक रेहेंव. काबर ते ए आन्दोलन म महूं एक नान्हे सिपाही के रूप म जुड़े रेहेंव, अउ आजो वो अस्मिता आधारित राज निर्माण के कल्पना म संघरेच हावन. काबर ते अभी घलो अस्मिता आधारित राज निर्माण के सपना ह सिध नइ पर पाए हे. हमन ल एक अलग राज के रूप म चिन्हारी तो मिलगे हवय, फेर अभी घलो इहाँ के भाखा अउ संस्कृति ह स्वतंत्र पहिचान खातिर आंसू ढारत हावय. अभी तक छत्तीसगढ़ी ह शिक्षा अउ राजकाज के भाखा नइ बन पाए हे, उहें इहाँ के आध्यात्मिक संस्कृति के सबले जादा दुर्दशा देखे बर मिलत हे. 

     राज आन्दोलन के बखत ठाकुर साहब इहाँ के राजनेता मन के दु-मुंहिया गोठ ले घलो भारी नाराज राहंय. एक डहार तो ए नेता मन हमर मन जगा राज आन्दोलन के समर्थन के गोठ करंय, अउ जब दिल्ली-भोपाल म अपन आका मन के आगू म जावंय, त कोंदा-लेडग़ा होगे हावंय तइसे कस मुसवा बरोबर खुसरे असन राहंय. उंकर मन के इही चाल देख के उन नाराज राहंय. मोला सुरता हे, छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति के जलसा, जेन इहाँ मठपारा के दूधाधारी सत्संग भवन म होवत रिहिसे, उहाँ उन मंच ले कहे रिहिन हें-"ए नेता मन माटी पुत्र नहीं, भलुक माटी के पुतला आंय". छत्तीसगढ़ राज निर्माण के बाद घलो उन कहे रिहिन हें, जब तक इहाँ के भाखा अउ संस्कृति के स्वतंत्र चिन्हारी नइ बन जाही, तब तक ए राज निर्माण के अवधारणा ह अधूरा रइही. एकर बर मैं इहाँ के जम्मो कलमकार अउ छत्तीसगढ़ी अस्मिता के हितवा मनला आव्हान करत हंव, उन ए बुता म चेत करंय.

    हरि ठाकुर जी हिन्दी अउ छत्तीसगढ़ी म सरलग लिखिन. महूं घलो अपन संपादन म वो बखत रहे छत्तीसगढ़ी मासिक पत्रिका "मयारू माटी" म घलो उन ला लगातार छापत रेहेंव. तब हमन छत्तीसगढ़ी म गद्य रचना मन के जादा ले जादा प्रकाशन के पक्ष म राहन. ठाकुर साहब काहयं घलो-हम ला छत्तीसगढ़ी के बढ़वार खातिर गद्य रचना मन डहार जादा चेत करना चाही.

   आवव, उंकर सन् 1979 म छपे छत्तीसगढ़ी रचना के संकलन "सुरता के चंदन" जेला वो मन देवीप्रसाद वर्मा 'बच्चू" अउ श्यामलाल चतुर्वेदी जी ल भेंट करे हें. उंकर कुछ अंश ला झांक लेइन-

कतका दुख सहे आदमी, बादर घलो दगा देथे

उमड़-घुमड़ के आथे अउ बिन बरसे कहाँ परा जाथे

जरत भाग के होले ला अउ बार बार बगरा जाथे

सपना खंड़हर होत, करम के अक्षर घलो दगा देथे

कतका दुख ला सहे आदमी, बादर घलो दगा देथे.

* * * * *

अटकन मटकन दही चटाकन

लउहा लाटा करै गगन

फुगड़ी खेलत हवय पवन


चौक पुराए असन घाम हर

खोर खोर म बगरे हे

जुन्ना पाना झरय

उल्होवै नावा पाना सनन सनन

फुगड़ी खेलत हवय पवन...

* * * * *


गहरी हे नदिया के धार बैरी

जिनगी परे हे निराधार बैरी

लहरा बने हे पतवार बैरी

बिजली के तने तलवार बैरी


डोंगी हवै बिच मझधार बैरी

लदे हवै पीरा के पहार बैरी

चारो कोती हवै अंधियार बैरी

सपना के होगे तार तार बैरी.

* * * * * 


खुडुवा खेलत हवै गगन भर

मंझन भर चितकबरा बादर

अउर सांझ कुन हंफरत हावै

जीभ लमाए झबरा बादर


आज बरसही काल बरसही

कहिके भुइयां जोहत हावै

टुहूं देखा के आनी-बानी

कइसन मन ला मोहत हावै

माते हाथी अस उमड़त हे

भरे न तब ले लबरा बादर

खुडुवा खेलत हवै गगन भर

मंझन भर चितकबरा बादर..

* * * * *

   सन् 1956 म छत्तीसगढ़ राज आन्दोलन के नेंव रचे के संग ले जुड़े रेहे हरि ठाकुर जी 1 नवंबर 2000 के बने नवा छत्तीसगढ़ राज के नवा रूप ल तो देखिन, फेर सिरिफ कुछ महीना भर ही अपन पूरा होए सपना ल देखे पाइन अउ 3 दिसंबर 2001 के ए दुनिया ले बिदागरी ले लेइन. उंकर सरग सिधारे के पाछू सन् 2011 म अनामिका पाल जी ह "हरि ठाकुर के साहित्य में राष्ट्रीय चेतना" विषय म पं. रविशंकर विश्वविद्यालय ले पीएचडी करे हावय, जेकर माध्यम ले आदरणीय हरि ठाकुर जी के जम्मो कारज ल एके जगा जाने अउ पढ़े जा सकथे.

   उंकर सुरता ल डंडासरन पैलगी...🙏

-सुशील भोले

संजय नगर, रायपुर

मो/व्हा. 9826992811

4 दिसंबर पुण्यतिथि// पंडवानी के पुरोधा नारायण प्रसाद वर्मा


 

4 दिसंबर पुण्यतिथि// 

पंडवानी के पुरोधा नारायण प्रसाद वर्मा

      आज के नवा छत्तीसगढ़ म पंडवानी गायन ल एक बड़का विधा के रूप म देखे जाथे, माने जाथे अउ गाये घलोक जाथे। एकरे सेती आज एकर गायक-गायिका मनला पद्मश्री ले लेके कतकों अकन राष्ट्रीय अउ राज्य स्तर के सम्मान मिलत रहिथे। फेर ये बात ल कतका झन जानथें के ये विधा के जनमदाता कोन आय, ए विधा ल गावत कतका बछर बीत गये हे?


     आप मनला ये जान के सुखद आश्चर्य होही के नवा बने जिला बलौदाबाजार के गांव झीपन (रावन) के किसान मुडिय़ा राम वर्मा के  सुपुत्र के रूप म जनमे नारायण प्रसाद वर्मा ला ये पंडवानी विधा के जनमदाता होय के गौरव प्राप्त हे। वोमन गीता प्रेस गोरखपुर ले छपे सबल सिंह चौहान के किताब ले प्रेरित होके वोला इहां के लोकगीत मन संग संझार-मिंझार के पंडवानी के रूप म विकसित करीन।


    मोला नारायण प्रसाद जी के झीपन वाला घर म जाये अउ उंकर चौथा पीढ़ी के सदस्य संतोष अउ नीलेश के संगे-संग एक झन गुरुजी ईनू राम वर्मा के संग गोठबात करे के अवसर मिले हे। ईनू राम जी ह नारायण प्रसाद जी के जम्मो लेखा-सरेखा ल सकेले के बड़ सुघ्घर बुता करत हवय। संग म गांव के आने सियान मन संग घलोक मोर भेंट होइस, जे मन नारायण प्रसाद जी ल, उंकर कार्यक्रम ल देखे-सुने हवयं। उन बताइन के धारमिक प्रवृत्ति के नारायण प्रसाद जी सबल सिंह चौहान के संगे-संग अउ आने लेखक मन के किताब मनके घलोक खूब अध्ययन करयं, अउ उन सबके निचोड़ ल लेके वोला अपन पंडवानी के प्रस्तुति म संघारंय।


    पंडवानी शब्द के प्रचलन

नारायण प्रसाद जी ल लोगन भजनहा कहंय, ये हा ये बात के परमान आय के वो बखत तक पंडवानी शब्द के प्रचलन नइ हो पाये रिहिस हे।  पंडवानी शब्द के प्रचलन उंकर मन के बाद म चालू होय होही। काबर के आज तो अइसन जम्मो गायक-गायिका मनला पंडवानी गायक के संगे-संग अलग-अलग शाखा के गायक-गायिका के रूप म चिन्हारी करे जाथे। जइसे कापालिक शैली के या फेर वेदमती शाखा के गायक-गायिका के रूप म।


    नारायण प्रसाद जी अपन संग म एक सहयोगी घलोक राखयं, जेला आज हमन रागी के रूप म जानथन। रागी के रूप म उंकरेच गांव के भुवन सिंह वर्मा जी उंकर संग म राहंय, जउन खंजेरी बजा के उनला संग देवयं। अउ नारायण प्रसाद जी तबूंरा अउ करताल बजा के पंडवानी के गायन करंय। उंकर कार्यक्रम ल देख के अउ कतकों मनखे वइसने गाये के उदिम करंय, एमा सरसेनी गांव के रामचंद वर्मा के नांव ल प्रमुखता के साथ बताये जाथे। फेर उनला वो लोकप्रियता नइ मिल पाइस जेन नारायण प्रसाद जी ला मिलिस।


    रतिहा म गाये बर प्रतिबंध

नारायण प्रसाद जी के लोकप्रियता अतका जादा बाढग़े रिहिस हवय के उनला देखे-सुने खातिर लोगन दुरिहा-दुरिहा ले आवंय। जिहां उंकर कार्यक्रम होवय आसपास के गांव मन म खलप उजर जावय। एकरे सेती चोरी-हारी करइया मन के चांदी हो जावय। जेन रतिहा उंकर कार्यक्रम होवय वो रतिहा वो गांव म या आसपास के गांव म चोरी-हारी जरूर होवय। एकरे सेती उनला रतिहा म कार्यक्रम दे खातिर प्रतिबंध के सामना घलोक करना परीस। एकरे सेती उन पुलिस वाला मनके कहे म सिरिफ दिन म कार्यक्रम दे बर लागिन।


     एक मजेदार घटना के सुरता गांव वाले मन आजो करथें। बताथें के महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र म उंकर कार्यक्रम चलत रिहिसे। उहों ले चोरी-हारी के शिकायत मिले लागिस। अंगरेज शासन के पुलिस वाले मन उनला ये कहिके थाना लेगें के वो ह कार्यक्रम के आड़ म खुद चोरी करवावत हे। बाद म असलियत ल जाने के बाद उनला छोड़ दिये गेइस। उन 18 दिन तक जेल (थाना) म रहिन, अउ पूरा 18 दिन उहाँ पंडवानी सुनाइन. तहाँ ले उनला छोड़ दिए गिस. जानबा राहय के उंकर पंडवानी के कार्यक्रम ह चारोंमुड़ा होवय, उन सबो डहर जावयं।


    प्रशासनिक क्षमता

नारायण प्रसाद जी एक उच्चकोटि के कलाकार अउ सांस्कृतिक कार्यक्रम  के पुरोधा होय के संगे-संग प्रशासनिक क्षमता रखने वाला मनखे घलोक रिहिन हें। उन अपन जिनगी के अखिरी सांस तक गांव पटेल के जि मेदारी ल निभावत रिहिन हें। एकर संगे-संग गांव म अउ कुछु भी बुता होवय त अगुवा के रूप म उन हमेशा आगू रहंय।


     लगातार 18 दिन तक कथापाठ

अइसे कहे जाथे के पंडवानी या महाभारत के कथा ल लगातार 18 दिन तक नइ करे जाय। एला जीवन के आखिरी घटना के संग जोड़े जाथे। फेर नारायण प्रसाद जी ये धारणा ल झूठलावत अपन जिनगी म दू पइत ले 18-18 दिन तक पंडवानी के गायन करीन हें। एक पइत जब उन शारीरिक रूप ले बने सांगर-मोंगर रिहिन हें, तब पूरा बाजा-गाजा के संग करे रिहिन हें, अउ दूसरइया बखत जब उंकर शरीर उमर के संग कमजोर परे ले धर लिये रिहिस हे, तब बिना संगीत के सिरिफ एकर वाचन भर करे रिहिन हें।


     अइसे बताये जाथे के पहिली बखत जब उन 18 दिन तक पंडवानी के गायन करे रिहिन हवयं तब ये अफवाह फैल गे रिहिस हावय के ये 18 दिन के गायन के तुरते बाद उन समाधि ले लेहीं, एकरे सेती उन 18 दिन तक गायन करत हावंय। काबर ते अइसन गायन ल जीवन के अंतिम समय के घटना संग जोड़े के बात जनमानस म रिहिस हे। एकरे सेती उनला देखे के नाम से चारोंमुड़ा ले जनसैलाब उमड़ परे रिहिस हे।  दूसरइया बखत जब उन 18 दिन तक पंडवानी के गायन करीन तेकर बाद उन खुदेच जादा दिन तक जी नइ पाइन, कुछ दिन के बाद ही उन ये नश्वर दुनिया ल छोड़ के सरग सिधार देइन।


   मठ अउ जनआस्था

हमर समाज म अइसे चलन हवय के घर-गिरहस्ती के जिनगी जीने वाला मनके देंह छोंड़े के बाद उनला मरघट्टी म  लेग के आखिरी क्रिया-करम कर दिये जाथे। फेर नारायण प्रसाद जी के संग अइसन नइ होइस । उनला मरघट्टी  लेगे के बदला गांव के तरिया पार म मठ बना के ठउर दे गइस। अउ सिरिफ अतकेच भर नहीं उनला आने गांव-देंवता मन संग संघार लिये गइस। अब गांव म जब कभू तिहार-बार होथे त गांंव वाले मन आने देवी-देवता मन के संग म उंकरो मठ म दीया-बत्ती करथें, अउ उंकर ले गांव अउ घर खातिर सुख-समृद्धि मांगथें। अइसे कहे जाथे के सन् 1974 म 4 दिसंबर के जब उन सरग सिधारीन तब उंकर उमर करीब 80 बछर के रिहिस हवय। सियान मन बताथें के तिंवरा लुवई के बखत उन सरग लोक वासी होइन.


पारिवारिक स्थिति

नारायण प्रसाद जी के वंशवृक्ष के संबंध म जेन जानकारी मिले हे तेकर मुताबिक उंकर सियान के नांव मुडिय़ा राम वर्मा रिहिस हे। फेर नारायण प्रसाद जी, नारायण जी के बेटा होइस घनश्याम जी, अउ घनश्याम जी के बेटा होइस पदुम जी। पदुम जी के दू झन बेटा हवयं संतोष अउ निलेश जउन मन अभी घर के देखरेख करत हवंय।


इहां ये बताना जरूरी लागथे के नारायण प्रसाद जी के बेटा घनश्याम घलोक ह अपन सियान सहीं कथा वाचन करे के कोशिश करयं, फेर उन बिना संगीत के अइसन करंय। उंकर बाद के पीढ़ी म पंडवानी गायन या वाचन डहर कोनो किसम के झुकाव देखे ले नइ मिलिस। आज उंकर चौथा पीढ़ी के रूप म संतोष अउ निलेश हवंय, फेर इंकर पूरा बेरा सिरिफ खेती किसानी तक ही सीमित हे। एकरे सेती हमला नारायण प्रसाद जी के संबंध म वतका जानकारी नइ मिल पाइस, जतका मिलना रिहिस हे। कहूं उंकर वारिस मन घलोक ये रस्ता के रेंगइया रहितीन या लिखने-पढऩे वाला होतीन त पंडवानी के ये आदिगुरु आज लोगन के बीच अनचिन्हार बरोबर नइ रहितीन, पूरा देश-दुनिया म उंकर सोर-खबर रहितीस।


-सुशील भोले 

संजय नगर , रायपुर 

मो/व्हा. 9826992811