Wednesday, 8 July 2026

पद्मश्री, पद्मभूषण अउ पद्मविभूषण तीजन बाई - पंडवानी के निधन

 


पद्मश्री, पद्मभूषण अउ पद्मविभूषण तीजन बाई - पंडवानी के निधन


कला के दुनिया में अपन लोहा मनवा के भारत देश के तीन-तीन ठन पोटलगहा गहना पद्‌मश्री, पद्मभूषण अउ पद्मविभूषण ला पहिन के हाँसत बदन छत्तीसगढ़ के दुलौरिन बेटी तीजन बाई सरग में वास करे बर निकल गे । ए कह सकथन के तीजन के संगे-संग पंडवानी के घलो निधन होगे । काबर कि तीजन अउ पंडवानी एक दूसर बर बने रिहिन, कहे के मायने एक दूसर के पूरक रिहिन । एकरे सेतिक लिख पारें के पंडवानी के घलो निधन होगे । हाँलाकि छत्तीसगढ़ में पंडवानी के कतको गायक मन ए पंडवानी के चमकत झंडा ल थाम के चलत हें।

   छत्तीसगढ़ के लोकसंस्कृति,  लोककला अउ लोकगाथा के पोटलगहा परंपरा पंडवानी हर भारतीय सांस्कृतिक  धरोहर के हिस्सा आय। ए समृद्ध परंपरा मा पंडवानी एक अइसन लोकगायन शैली आय, जेन हर महाभारत के कथा ला गीत, संगीत, अभिनय अउ हाव-भाव के माध्यम ले जीवंत रूप में प्रस्तुत करथे। पंडवानी कला ला राष्ट्रीय अउ अंतरराष्ट्रीय स्तर में मान दिलाय बर जेन लोक कलाकार के नाम सबले पहिली सम्मान के साथ ले जाथे, ओ हावय तीजन बाई। ओमन सिरिफ एक लोकगायिका नइ, भलुक छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक अस्मिता, लोकपरंपरा अउ महिला सशक्तिकरण के प्रतीक बने हवंय।


धन्य-धन्य वो गनियारी गाँव अउ धन्य-धन्य ओकर दाई-ददा जेमन के कोख ले जगमगात जुगनू अवतरे रिहिस, ओखर संगे- संग सब्बो अनर होगिन । तीजन बाई के जनम सन् 1956 मा ओ समय के दुर्ग जिला अब बालोद जिला के गनियारी गांव माँ एक सामान्य पारधी परिवार मा होय रहिस। बचपन ले ओमन के मन मा लोककला अउ महाभारत के कथा के प्रति बनेच लगाव रहिस। ओमन अपन नाना ब्रजलाल पारधी ले महाभारत के कथा सुनत-सुनत पंडवानी के प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करिन। पइसा-कौड़ी के अभाव अउ सामाजिक बंधना के बाद भी ओमन अपन कला साधना ला सरलग जारी रखिन। इकर कला भिलाई मा आय के बाद दिनो-दिन परवान चढ़त गिस । ओ समय ए कलाकार के कला ला देखे बर , हाव-भाव के साथ महाभारत के कथा के रस लेहे बर गाँव-गाँव मा पोता दसा के जगहा पोटारंय । रात भर ओकर मुखारवृन्द ले गाना, कथा, नाचा, जोश मा पाँव के पटकइ, कोस्टाहु लुगरा, रंग-रंग के गहना, मुँह मा बीड़ा पान के लाली, तंबूरा ला देख के अकबका जावंय ।


ओ समय मा पंडवानी गायन हर पुरुष कलाकार मन के क्षेत्र माने जावत रहिस। महिला मन के मंच मा खड़े होके पंडवानी प्रस्तुत करना सामाजिक रूप ले स्वीकार नइ रहिस। फेर तीजन बाई अपन मन के मनसूबा, आत्मविश्वास, संघर्षशीलता अउ कला के प्रति समर्पण के बल मा ए रूढ़िवादी सोच ला चुनौती देवत सरलग आघु बढ़िस।


पंडवानी के दू प्रमुख शैली – "वेदमती" अउ "कापालिक" – प्रसिद्ध हवंय। वेदमती शैली मा कलाकार मन बइठ के गायन करथे, जबकि कापालिक शैली मा कलाकार मन खड़े होके अभिनय, संवाद, स्वर परिवर्तन अउ नाटकीय अभिव्यक्ति के माध्यम ले प्रस्तुति देथें।

तीजन बाई कापालिक शैली के सबले ज्यादा प्रसिद्ध अउ प्रभावशाली कलाकार माने जाथें। ओमन अपन प्रस्तुति मा एक साधारण तंबूरा ला भीम के गदा, अर्जुन के गांडीव, दुर्योधन के अस्त्र अउ कइठन प्रतीकात्मक रूप मा उपयोग करत रिहिन। ए प्रकार के अभिनय कौशल, हाव-भाव अउ स्वर के मिठास हर दर्शक मन ला मंत्रमुग्ध कर देथे।

संघर्ष अउ सफलता के यात्रा मा

तीजन बाई के जीवन संघर्ष, परिश्रम अउ आत्मविश्वास हर प्रेरणादायक उदाहरण आय। समाजिक विरोध, आर्थिक समस्या अउ पारिवारिक चुनौती के बाद भी ओमन अपन कला यात्रा ला बंद नइ करिन। धीरे-धीरे ओमन के प्रतिभा के पहचान स्थानीय मंच ले निकल के भिलाई होवत राष्ट्रीय मंच तक पहुंचिस।


भारत के प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर, रंगनिर्देशक बी.वी. कारंत अउ पोटलगहा कला समीक्षक मन तीजन बाई के प्रतिभा ले प्रभावित होके ओमन ला बड़े मंच प्रदान करिन। एखर बाद तीजन बाई देश-विदेश के बनेच अकन सांस्कृतिक कार्यक्रम मन मा पंडवानी के प्रस्तुति दीन अउ छत्तीसगढ़ के लोकसंस्कृति ला वैश्विक मंच तक पहुंचाइन।


तीजन बाई हर भारत सहित फ्रांस, इंग्लैंड, अमेरिका, जर्मनी, जापान, स्विट्जरलैंड, रूस, ऑस्ट्रेलिया अउ कइठन देश मा पंडवानी के नाम कमाय लायक प्रस्तुति दे चुके हवंय। ओमन के गायन अउ अभिनय शैली हर विदेशी दर्शक मन ला घलो बनेच प्रभावित करय। ए प्रकार ओमन छत्तीसगढ़ के लोकसंस्कृति के वैश्विक राजदूत के रूप मा प्रतिष्ठित होइन।


तीजन बाई के कारण आज पंडवानी कला विश्व स्तर मा पहिचान प्राप्त कर चुके हावे। कतको शोधार्थी, संगीतकार अउ लोकसंस्कृति विशेषज्ञ मन ओमन के कला शैली ऊपर अध्ययन करे अउ करत हवंय।


तीजन बाई के असाधारण योगदान बर भारत सरकार अउ विभिन्न संस्थान मन ओमन ला आनी- बानि के सम्मान प्रदान कर चुके हवंय, जेमां प्रमुख हवंय –पद्मश्री सम्मान (1988), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1995),

पद्मभूषण सम्मान (2003), नृत्य शिरोमणि सम्मान, संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप, पद्मविभूषण सम्मान (2019), अउ बनेच अकन राष्ट्रीय अउ अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक सम्मान पा चुके हें। ए सम्मान मन केवल तीजन बाई के व्यक्तिगत उपलब्धि नइ, भलुक छत्तीसगढ़ के लोकसंस्कृति के गौरव के प्रतीक हवंय।


तीजन बाई के व्यक्तित्व मा कइठन पोटलगहा गुण देखे बर मिलथे –

गजब के आत्मविश्वास, कला के प्रति समर्पण, सरलता,  सहजता, हँसमुख, 

परंपरा के संरक्षण के भावना,

नवा पीढ़ी ला प्रेरित करे के क्षमता,

राष्ट्रीय अउ सांस्कृतिक चेतना आदि ।

ओमन कतको युवा कलाकार मन ला पंडवानी के प्रशिक्षण देके ए लोककला के संरक्षण अउ संवर्धन मा बनेच अकन योगदान देत रिहिन।


तीजन बाई छत्तीसगढ़ के माटी के ओ दुलौरिन रतन हवंय, जेन अपन कठिन परिश्रम, प्रतिभा अउ पोठ संकल्प के बल मा पंडवानी लोककला ला नवा ऊँचाई प्रदान करिन। ओमन सिद्ध करिन कि प्रतिभा, लगन अउ आत्मविश्वास के माध्यम ले कोनो मनखे विश्व मा पहचान प्राप्त कर सकथे।

पंडवानी के इतिहास मा ओमन के नाम सबो काल बर स्वर्ण अक्षर मा अंकित रही अउ आने वाला पीढ़ी मन बर प्रेरणा के स्रोत बने रही।


डॉ. कृष्ण कुमार चन्द्रा

सचिव

मुकुटधर साहित्य समिति

कोरबा

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