Wednesday, 8 July 2026

नानकुन कथा - " गुपती के राज "

 नानकुन कथा -

   "  गुपती के राज "

हमर सियान बबा नवा नवा तरीका अजमावत रहितीस l ए दफे देखेन l ओकर कनिहा म एक ठन गुपती खोचाये रहिस l गुपती थैली ला कहिथे l चौबीस घंटा लटके रहितिस l गुपती के भीतर पइसा कौड़ी चाबी कुची कुछु नइ रहय l तभो ले फूले रहय l नाती नतनिन म झाँक झाँक के छुवय देखय l "एमा का धरे हस बबा, बताना " कहिके पूछय l एक दिन गुपती ओसक गे रहिस l फेर पूछिस एतो ओसक गेहे कुछु नइये हे l अब बताना गो!

तब सियान बबा कहिथे -" तोर डोकरी दाई के मुँह फूले रहय त मोर गुपती फूले रहय अब ओकर मुँह ओसक गे त गुपती घलो ओसक गे l सब हाँसे ला धर लीस l पहिली रोना धोना रहिस त फूले रहय,हमर घर म हाँसी ख़ुशी समागे हे अब तो l

  मुरारी लाल साव, कुम्हारी

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