Wednesday, 8 July 2026

लेड़गा*

 *लेड़गा*

        लेड़गा कहिथे सुने हों तहूं  ल मंच म कविता पढ़े के मौका मिलिस।मे कहेंव हव रे लेड़गा मे भुल्लकड़ मनखे तांव भुला भुला के पढ़हत रहेंव त मंच संचालक ह कहिस मंच म कम से कम एक ठन कविता बिना देखे पढ़े ल आना चाहि।लेड़गा कहिथे तोर कहे के अरथ हे जेन मंच म बिना देखे कविता पाठ करथे तेन कवि आय।हव रे लेड़गा ।अब मंच म चढ़े के पहिली साक्षात्कार होही। मेमोरी टेस्ट।जइसे डाक्टर तिर म जाबे त इलाज करे के पहिली टेस्ट लिख देथे।हो सकत हे मुंह म अंगरी डालके,टारच मारके देख सकत हे।

        सवाल करे बर अघवा लेड़गा हर पूछथे कवि अऊ साहित्यिकार मे का फरक हे?

मे कहेंव कवि हर साहित्यिकार हो सकत हे,फेर साहित्यिकार कवि होय जरुरी नइ हे ।कतनो मन मंचीय कविता पढ़ देथे फेर साहित्य म ओकर आधा एक डिसमिल जगा नी राहय।कतरो मन अधिया रेगहा कस दूसर के कविता ल जमा के सबासी घलो लुट लेथे।अऊ कतनो झन बड़का साहित्यिकार मन मंच म कविता घलो बोल नी पाय।

           लेड़गा फेर पुछथे ये बुद्धिजीवी?मे कहेंव अब जादा झन ओरिया।जेन देश समाज अपन तिरतखार के हाव-भाव ल देख समझ के समाज म परोसथे उही हरे बुद्धिजीवी।वतका म लेड़गा गुनगुनाय ल धरलिस।

हे शारदे मां हे--------।

     फकीर प्रसाद साहू 

             सुरगी 🙏

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