Wednesday, 8 July 2026

छत्तीसगढ़ी व्यंग्य सड़क में मछरी पालन

 छत्तीसगढ़ी व्यंग्य


सड़क में मछरी पालन

वीरेन्द्र ‘सरल‘

गरमी के दिन में बने नवा चमचमाती सड़क ह बरसात के पहिलीच पानी में हिरोइन के मेक-अप असन धोवागे अउ रेती, सिरमिट, डामर अउ बजरी गिट्टी मन भिंगे उड़िद दार के फोकला कस उफलगे। सड़क ह चुहके आमा के फोकला कस खोचका-डबरा होगे। 

जी पराण देके जनता के सेवा करइय्या भैय्या जी किसम के मनखे मन तुरते ये बात के शिकायत सड़क बनवइय्या  बड़े साहब मेरन जा के करिन। पत्रकार मन घला साहब मेरन पहुँचगे।

पत्रकार मन साहब ला पुछिन-‘‘कस साहब! आजकल लाखों-करोड़ो रुपया के बने पुल-पुलिया अउ चमचमाती सड़क मन बरसात के पहिलीच पानी में चाउर असन धोआ जावत हे। ये बड़ अचंभा के बात आय भई। अभी घला अंग्रेज जमाना के बने कतकोन पुल-पुलिया अउ भवन मन वइसनेच के वइसने हावे। फेर नवा मन कइसे निचट सिगसिगहा होवत हे? आज बनत हे तेखर चिन्हा कालीच सिरा जावत है, ये काय बात आय ? "

साहब पहली अपन पेट में हाथ ला फेरिस अउ डकार लेवत किहिस- ‘‘ येमें अचंभा के काय बात हे यार! सियान मन कहिथे ‘तइहा के बात ला बइहा‘ लेगे। पहिली के सड़क ह जुन्ना तकनीकि में बने। अब के मन बिल्कुल नवा तकनीकि ले बनत हे। बेरा के संगे-संग तकनीकि ह तो बदलबे करही। हमन तो ‘सियाराम मय सब जग जानि‘ के सिद्धाँत ला अपना के सबके कल्याण करत हन। देखत नइ हव सड़क में आज कल कतेक मनखे मन कल्याण होवत हे?  अरे भई! जब तरिया डबरी मन पटावत हे तब मेंचका-मछरी के रहे-बसे बर जगा लागही कि नइ लागही?  जउन ला तुमन खोचका - डबरा समझत हव तउन सब मेचका-मछरी आवास योजना के अन्तर्गत इखर बर बनाय आवास आय, समझगेव? "

दूसर बात ये आय कि आजकल मनखे मन गजब सुविधाभोगी होगे हावे। मिहनत के काम जादा नइ करे तेखर सेती किसम-किसम के बीमारी ओमन ला घेरे रहिथे। शरीर ह निचट कमजोर होवत जावत हे। खेल मैदान अउ चरागन में मनखे मन अवैध कब्जा करके बइठे हे। तिही पाय के हमन सोचे हन मनखे जब उबड़-खाबड़ सड़क में चलही तब उखर अच्छा व्यायाम होही। जिनगी के ऊँच-नीच रद्दा में चले के अभ्यास होही। हमन जउन नवा तकनीकि ले सड़क बनावत हन ओमें कई किसम के फायदा हे। पहली बात तो ये हे कि हम जनसंख्या नियंत्रण अउ अंधत्व निवारण  बर स्वास्थ्य विभाग ल अपन भरपूर सहयोग देवत हन। जउन मनखे हमर बनाय सड़क म बने सोझ बाय रेंगत हे मतलब समझ जाओ कि ओखर दोनों हेड लाइट  ठीक हे अउ जउन सड़क के खोंचका -  डबरा म झपा के गिरत - हपटत हे माने उंखर आँखी के फ्यूज होय के डर हे। ओला बिना जांच - पड़ताल के सोझे ऑपरेशन थियेटर म ओईलाय के जरूरत हे, समझेव? तीसर बात ये हे कि आजकल अंतरराष्टीय खेल प्रतियोगिता में हमर खिलाड़ी मन अपन खेल के प्रदर्शन  ठीक से नई कर पावत हे, एखर कारण ल जानथव, नहीं ना? एखर कारण खेल मैदान के कमी होना आय। मोला पक्का विश्वास हे हमर खिलाड़ी मन हमर  नवा तकनीक के सड़क म जब कूदत-फाँदत रेंगहीं तब उंखर अच्छा प्रेक्टिस होही अउ ओमन कहीं नहीं ते लम्बी कूद अउ ऊंची कूद म सफल हो के  हमर देश बर जरूर मेडल जीत के लानही। चौथा फायदा ये हे कि सड़क के गड्ढा म जब पानी भरे रही तब जल संरक्षण घला होही। पानी भरे सड़क म चलइय्या मोटर गाड़ी मन अपने आप धोवाही तब उंखर मालिक मन के पइसा बाँचही । सड़क के दचाका में कोन्हों मोटर गाड़ी बाँचगे तब समझ लेव कि गाड़ी बहुत मजबूत हे, मतलब एखर ले गाड़ी के मजबूती के घला जांच होही अउ--------।

  साहब के गोठ ल सुनके सुनइय्या मन ल तीन डिग्री के बुखार धर लिस, ओमन मुड़ धरके बइठगे।  एक झन किहिस - " भइगे ददा! हमन समझ गेन, आप मन अइसन सड़क के माध्यम ले गजब अकन कल्याणकारी योजना चलावत हव। हमी मन मूरख अन ददा जउन आप मन के योजना ल आज ले नई समझे रहेन। अब समझ गेन अउ जादा झन समझा।  जादा समझे म तो हमर इंहचे कल्याण होय के डर हे। हमन जावत हन मोर बाप।"

 साहब ह हव कहिके मुड़ी ल डोलावत अपन पेट म हाथ फेरिस, वतकीच बेर ओला डकार आगे। कुरिया भर डामर अउ सीमेंट के बदबू भरगे। उँहा रिहिन तउन मन नाक ल चपक के थू -थू कहत भागिन।

 वीरेन्द्र सरल

बोडरा ( मगरलोड )

जिला- धमतरी ( छत्तीसगढ़ )

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