Wednesday, 8 July 2026

बईला**

 *बईला** 

एक ठन शेर हर हिरण के शिकार करे बर दंउड़ात राहय।हिरण हर दंउड़त- दंउड़त दू ठन बईला तिर पहुंच के बंचाय बर कहिथे ।करिया बईला,सफेद बईला मन कहिथे हमर राहत ले संसो झन कर।वतका म शेर आगे अऊ कहिथे ये मोर शिकार आय तूमन आगू ले हट जाव।बईला मन जोम दिस ऐकर ले पहिली तोला हमर ले निपटे ल पड़ही।सांगरमोगर(मोठडांट)बईला ल देख के शेर के दाल नी गलिस।अऊ लहुट गे।शेर मने मन गुने लगिस अऊ कोलिहा ल बुला के कहिथे,ते हर कसनो करके दूनो झिन ल एक दूसर ले लड़वा दे।ताहने दूनो झन ल एक एक करके खा जहूं।सबले पहिली कोलिहा हर सादा बईला तिर गिस अऊ कहिथे मे जे बात बताहूं तेला कखरो तिर मत गोठियाबे।अऊ कहिथे तै हर बहुत सुंदर अऊ समझदार हस तेकर सेती करिया बईला तोर ले जलथे।ताहने (फेर) कोलिहा हर करिया बईला तिर जाथे अऊ कहिथे तै हर अतिक मोठडांट ताकत वाला हस अऊ वो सफ़ेद बईला हर कहिथे,हमन ऐकर सेती बंचे हन के मोर मेर समझदारी हे नही ते शेर ह तईहा के खा जतिस।ये हर बने बात नोहे।मेहनत तो तै हर जादा करथस अऊ सबासी वो लुटत हे।अब धीरे-धीरे दूनो बईला मे मन मुटाव लड़ई शुरू हो जथे।अऊ अब दूनो झिन अलग-अलग रेहेके शुरू कर देथे।ऐकर फायदा उठा के शेर हर एक -एक झन ल शिकार बना लेथे।


           फकीर प्रसाद साहू 

                सुरगी 🙏

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