Wednesday, 8 July 2026

बियंग - "भोंगरा" के पारदर्शीय व्याख्या "

 हास्य बियंग - "भोंगरा" के पारदर्शीय व्याख्या  " 

-मुरारी लाल साव 


"भोंगरा " के लोक व्यवहार मे बड़ा महत्व हे l भोंगरा के अर्थ आर पार दिखना l आकार प्रकार म छोटे बड़े हो सकथे l भोंडू टोड़ूँ, छेदा  छोटे रूप आय l कोनो परदा गोल आकार म फूट जथे आर पार दिखे लगथे  l बुलक जथे कोई चीज वस्तु  उही ला भोंगरा कहिथन l  कपड़ा लत्ता साड़ी धोती घलो बड़े चिराके फट जथे गोल उहू भोंगरा होगे बताथे lभोंडू के व्यापक अर्थ भोंगरा आय l भोंगरा ऊपर कई ठन हाना घलो हे l लोगन मन आचरण चरित्र म जोड़ के लोकोक्ति बनाथे l भोंगरा ले लुकाके गुप्त लेंन देन घलो कर लेथे l भोंगरा ले ताका पासा होथे l भोंगरा ले देखना अउ आमने सामने देखना म अंतर हे l

देखय्या मन जानथे काला कइसे देखना हे?दिखत हे-दिखत हे कइथे lका दिखत हे?काला देखत हे ? कइसे दिखत हे?कइसे देखत हस?काबर देखत हे ? कोन कोन देखे के काम करत हे l हमू मन ला देखना चाही lकामा देखत हे?

बहुत  अकन सवाल उठ जथे l सबो प्रश्न के उत्तर भोंगरा से हे l भोंगरा ले देखथे  तेन भोंदू कहाथे l बने बने मनखे घलो भोंदू बन जथे l  

भोंदू होना बड़े बात आय l अभी के समे म भोंदू बन जाना ठीक हे l ज्ञानी मन ला ज्ञान बघारे बर मौका मिलथे l भोंदू मन सरकार बनाथे l भोंदू जान के अपन खेल खेलथे l उहू मन ला मजा आथे l भोंदू जनता ला घलो सुख मिलथे l हमर इतिहास गवाही हे जमींदार मन भोंदू बना बना के जमीन सकेलिस l भोंदू कहि कहिके पंडित मन दान सकेलिस l भोंदू मन बर भगवान के घलो बने कृपा होथे l 

मंदिर धर्मशाला बन जथे पूजा पाठ चढ़ावा उही मन करथे l

समझदार मन हिसाब करके लेथे देथे l दान पान भोंदू करथे भोग जोग साधू बैरागी बर l 

ये सब भोंगरा ले दिखथे l रीति नीति नियम क़ानून सब भोंगरा ले देख l आर पार सब दिखही l

कोन देखथे,जेला मतलब हे l

काबर देखथे,ढोल पोल ला जाने बर l भोंगरा ले देख के 

ब्लेक मेल करथे l 

 जघा जघा भोंगरा खोजथे l 

एक झन पूछिस थाना कछेरी म घलो l पूछे के का बात हे संगी l

उहें के भोंगर�

सब ला बचाथे l

कछेरी अदालत म एक ले एक भोंगरा पाये जाथे बाहिर के ला अंदर अउ अंदर के ला बाहिर करना सब सिखाथे l

जनता ला सरकार घलो भोंगरा ले देखथे l जनता कइसे चिल्लावत हे?काबर चिल्लावत हे?जनता ला कोन भड़कावत हे ये सब अइसने देखथे l 

भोंगरा ले पइसा आथे जाथे l

कहे के मतलब इही भोंगरा ले देश राज्य के वित्तीय व्यवस्था चुस्त दुरुस्त होथे l 

घर परिवार समाज म घलो भोंगरा के अपन खास महत्व हे l पारदर्शिता ले देखबोन त समाज पूरा पूरा भोंगरा ले दिखथे l आदमी अपने इज्जत ला ढांके ला सीख लय l दूसर के भोंगरा ला खोजत रहिथे l

परिवार के हाल बेहाल परवाह करत हन कहिके अँख मुंदा होगे हे l बेटा के आये जाये के दरवाजा अलग l बेटी बहू के आये जाये के अलग दुवार l काला कहिबे ?अधरथिया होथे लड़थे चिल्लाथे त समझ में आथे l भोंगरा भरे व्यवस्था म रहना हे त अपन आदत आचरण ला ओइसने बनाये ला पड़ही l काला लुकाबे सब कभू न कभू उघरबे करही l

     सारांश म साहित्य के सहारा लेके भोंगरा ला अउ पारदर्शीय बनाये के कोशिश करबो l ककरो अहित मत होय l कोनो ला बुरा झन लगे l सबके भला होय सबके विकास होय इही बात के ध्यान सबो ला रखना हे l  

-कुम्हारी जिला दुर्ग

No comments:

Post a Comment