Wednesday, 8 July 2026

छत्तीसगढ़ी के अमर गीतकार - लक्ष्मण मस्तुरिया

 पुरखा के सुरता   


7 जून - जयंती म विशेष 


    छत्तीसगढ़ी के अमर गीतकार - लक्ष्मण मस्तुरिया 


                       मोर संग चलव रे, मोर संग चलव जी… मंय छत्तीसगढ़िया अंव… पता दे जा रे गाड़ी वाला… पड़की मैना… मंगनी म मांगे मया नइ मिलय… मन डोले रे माघ फगुनवा… घुनही बंसुरिया… सोना खान के आगी… जइसे गीत के लिखइया जन कवि स्व. लक्ष्मण मस्तुरिया के 7 जून के 77वीं  जयंती हे।मस्तुरिया जी हा अपन अपन गीत, कविता अउ गायन के माध्यम ले छत्तीसगढ़िया मन के स्वाभिमान ला जगाइस अउ सुग्घर ढंग ले अपन हक खातिर लड़े के रद्दा बताइस। वोकर गीत म एक डहर छत्तीसगढ़ महतारी के गजब बखान हे त दूसर कोति छत्तीसगढ़वासी मन के भोला पन के वर्णन के संगे- संग किसान, मजदूर ला जगाय के उपाय हे।

जिनगी भर छत्तीसगढ़िया मन के मान मर्यादा बर लड़इया अइसन क्रान्तिकारी कवि अउ गीतकार

के जनम बिलासपुर जिला के मस्तुरी गाँव म 7 जून 1949 के होय रिहिन हे।शुरुआत के जिनगी गजब संघर्ष ले बीतिस।फेर  राजकुमार कालेज रायपुर

म शिक्षक के रूप म अपन सेवा दिस. बाद म हिंदी विभागाध्यक्ष घलो रिहिन।

जउन मन ह दाउ रामचन्द्र कृत चंदैनी गोंदा ल अपन खूब मिहनत ले ऊँचाई तक पहुँचाइन वोमा लक्ष्मण मस्तुरिया ह प्रमुख रिहिन हे। लक्ष्मण मस्तुरिया ह चंदैनी गोंदा के गीत अउ गायन पक्ष ल गजब सजोर बनाइन।

मस्तुरिया जी के लिखे अउ गाये

गीत ह जनता के बीच गजब लोक प्रिय होइस । छत्तीसगढ़ के आकाशवाणी केन्द्र मन म उंकर गीत ह खूब चलिस।रायपुर दूरदर्शन म गीत प्रसारित होइस। मस्तुरिया जी के गीत ल सुन के मन ह खुशी से झूमे लागथे त कतको गीत ह छत्तीसगढ़िया मन के स्वाभिमान ल जगाय के काम करिन। मस्तुरिया जी के गीत के खूब आडियो अउ वीडियो रूप बनिस। पान ठेला, होटल के संगे संग बर बिहाव, षट्ठी, कोनो भी सार्वजनिक कार्यक्रम म मस्तुरिया जी के गीत रंग झाझर मंता देय।मस्तुरिया जी के गीत ल सभा -संगोष्ठी म बजा के / गा के जनता म जोश भरे जाथे।स्कूल /कॉलेज के वार्षिक समारोह म मस्तुरिया के गीत ह कार्यक्रम म जान डाल देथे।

लक्ष्मण मस्तुरिया के बारे म डॉ. बल्देव जी ह लिखथे –“लक्ष्मण मस्तुरिया हमर अग्रज कवि हरि ठाकुर जइसन वीर अउ ऋंगार, क्रांति अउ पीरित के अद्वितीय गायक आय .कहूँ -कहूँ उन बहुत करीब हे, लेकिन शैली के थोर बहुत अन्तर तो रहिबेच करही”।

छत्तीसगढ़वासी मन के स्वाभिमान ल वो कइसे जगाइस वोकर उदाहरण देखव                              –सोन उगाथौं माटी खाथौ ।

मान ल देके हांसी पाथौ ।।

खेती खार संग मोर मितानी ।                                                           घाम मयारु हितवा पानी ।।


मोर इही जिनगानी मंय नगरिया अंव ग

किसन के बड़े भइया हलधरिया अंव रे …

झन कह मोला लेढ़वा डोमी करिया अंव ग

सिधा म सिधा नइ तो डोमी करिया अंव रे…

मैं छत्तीसगढ़िया अंव रे…


मोर संग चलव गीत म वोहर छत्तीसगढ़िया मन ल जगाय के काम करथे. बिपत संग जूझे बर कहिथे.

मोर संग चलव रे, मोर संग चलव जी

वो गिरे थके हपटे मन अउ परे

डरे मनखे मन

मोर संग चलव रे, मोर संग चलव ग

बिपत संग जूझे बर भाई मंय बाना बांधे हंव ।

सरग ल पिरथी म ला देहू प्रन अइसे ठाने हंव ।।

मोर सुमता के सरग निसेनी जुरमिल सबो चढ़व रे….

मोर संग चलव रे, मोर संग चलव जी…

मस्तुरिया जी के ऋंगार गीत ल सुन के मन ह मयूर जइसे नाचे ल लगथे. अंतस ह मगन हो जाथे.


पता दे जा ले जा गाड़ी वाला रे

तोर नाम के तोर गाँव के तोर काम के…

पता दे जा…

जियत जागत रहिबे बयरी

भेजबे कभू ले चिठिया

बिना बोले भेद खोले रोये

जाने अजाने पीरीतिया

बिन बरसे उमड़े घुमड़े

जीव मया के बयरी बदरिया

पता दे जा रे गाड़ी वाला…

अइसने “पड़की मैना “गीत ल सुनके हिरदे ल गजब उछाह लागथे.


वारे मोर पड़की मैना, तोर कजरेली नैना

मिरगिन कस रेंगना तोरे नैना

मारे वो चोंखी बान, हाय रे तोर नैना…


वियोग ऋंगार रस मा मस्तुरिया के गीत ल सुन के मया करइया मन के आंसू ह टपक जाथे.


काल के अवइया कइसे आज ले नइ आये

तोला का होगे, रस्ता नइ दिखे बइरी तोर…

का कहूं रस्ता म काहीं अनहोनी होगे

का कहूं छोड़ मया ल संगवारी जोगी होगे

घेरी बेरी डेरी आंखी कइसे फरकाये

तोला का होगे, टीपकी टीपकी आंसू गिरे मोर…


अइसने अउ उदाहरण प्रस्तुत हे..


सरी रतिहा पहागे तैं नइ आये रे

तोला घेरी बेरी बइरी मंय सपनायेंव रे…

अइसन का होगे काम

भूलिगै देह ल परान

का तो महि हौं अभागिन

अपने होगे आन

आ आ नींद बइरी आंखी ले उड़ि जाय रे…


शोषण करइया मन ल मस्तुरिया जी खूब ललकारय .

हम तो लूट गयेन सरकार तुंहर भरे बीच दरबार

खुल्लम -खुल्ला राज म तुंहर अहा अत्याचार

रइहो रइहो खबरदार…

हाय विधाता दिन -दिन बाढै देस म अत्याचारी

परमिट वाले डाकू भइगे जन सेवक सरकारी

सुतरी सुतरी छांद फांद के लूटै पारी -पारी

हांस रे लछमन करम ठठा नइ रोवे म उबार

हम तो लूट गयेन सरकार तुंहरे भरे बीच दरबार…


मस्तुरिया जी ह “सोनाखान के आगी” म शहीद वीर नारायण सिंह के वीरता ल गजब सुग्घर ढंग ले प्रस्तुत करे हवय .


फेर सुरता आगे उही प्रन के ।                                                        फरकिस भुजा बरन ललियाय ।।                                                          आंखी जले लगिस लक लक l                                                              कटरै  दांत , बदन अटियाय  !!                                 


नहीं नहीं संगी ये मरना तो ।

कायर अउ मन हारे के ।।

मोर जिनगी मोर परजा खातिर।

जे मोला मुखिया माने हे ।।


जमींदार मंय सोना खान के ।

सोना उपजै मोर माटी म ।।

जिहां के भुंईधर भूख मरत हे ।

आग बरै मोर छाता म ।।


रचनायें… 

मस्तुरिया के रचना म हमू बेटा भुइंया के (काव्य संग्रह),

चंदैनी गोंदा में लक्ष्मण मस्तुरिया के गीत ,छत्तीसगढ़ के माटी (छत्तीसगढ़ दर्शन ),सोना खान के आगी, माटी कहे कुम्हार से (निबंध संग्रह) अउ घुनही बंसुरिया (गीत संकलन) प्रमुख हे।

मस्तुरिया जी ह सन् 2000 मा बने मोर छइंहा भुइंया, मंजरी सहित कतको छत्तीसगढ़ी फिलिम बर गीत लिखे के सँगे सँग गायन करिन।

कछ बेरा तक लोकासुर मासिक पत्रिका के संपादन घलो करिन।


सम्मान –  छत्तीसगढ़िया जन जागरण के अग्रदूत मस्तुरिया जी ल राज्य सरकार द्वारा जउन सम्मान मिलना रिहिस वो नइ मिल पइस. आंचलिक साहित्य म गजब लिखइया साहित्यकार मन ला शासन द्वारा पं. सुंदर लाल शर्मा सम्मान देय जाथे. वहू नइ देय गिस।जबकि मस्तुरिया जी के कई ठन गीत ह छत्तीसगढ़ के स्वभिमान गीत हरे।पृथक छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन के समय मस्तुरिया के गीत मोर सँग चलव रे… मयँ छत्तीसगढ़िया अवँ …ह शंखनाद के काम करिन।  मस्तुरिया जी ह जनता के प्यार ल सबसे बड़े सम्मान माने. एक चैनल म इंटरव्यू देत समय पूरा दम खम के साथ येला बोले रिहिन हे।

                        हमर छत्तीसगढ़ के कतको साहित्यिक अउ सांस्कृतिक संस्था मन हा मस्तुरिया जी ल सम्मानित करिन येमा छत्तीसगढ़ी काव्य भूषण, लोक स्वर, विशेष प्रतिभा सम्मान, स्व. ठाकुर प्यारे लाल सिंह सम्मान, छत्तीसगढ़ी विभूषण, सृजन सम्मान, रामचंद्र देशमुख बहुमत सम्मान शामिल हे।


  रेडियो म मस्तुरिया जी के गीत ल ननपन ले सुनत हन।गिने चुने जउन गीतकार, गायक मन जनमानस म अपन अलग प्रभाव छोड़िस वोमा लक्ष्मण मस्तुरिया प्रमुख रिहिन हे ।                      मस्तुरिया जी के कवि सम्मेलन म अब्बड़ मांग रहय।छत्तीसगढ़ के सबो प्रमुख शहर अउ कतको गाँव म वोहा काव्य पाठ करे हे।मस्तुरिया जी के लोक प्रियता ल देख के भीड़ भाड़ ल रोके बर वोला आखिरी डहर काव्य पाठ म आमंत्रित करे जाय।मंय हा  मस्तुरिया जी ल  कन्हारपुरी राजनांदगांव,लखोली, राजनांदगांव म आयोजित कवि सम्मेलन के संगे संग छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग अउ प्रांतीय छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति के प्रांतीय सम्मेलन म काव्य पाठ करत सुने रहेंव।छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के कार्यक्रम म  मस्तुरिया जी ले भेंट होय ।             मस्तुरिया जी ह 20 जनवरी 1974 म नई दिल्ली के लालकिले म गणतंत्र दिवस के अवसर म आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन म काव्य पाठ करिन। येमा देश के नामी कवि/गीतकार गोपाल दास नीरज, बाल कवि बैरागी, इन्द्रजीत सिंह तुलसी, रामावतार त्यागी, रमानाथ अवस्थी मन संग अपन प्रस्तुति दिस।वो समय मस्तुरिया जी सिरिफ 25  बछर के रिहिन हे।येहर छत्तीसगढ़ म वोकर लोक प्रियता के सबले बड़का उदाहरण हे ।

छत्तीसगढ़ के ये रतन बेटा ह 3 नवंबर 2018 म परम लोक चले गे. श्रद्धेय मस्तुरिया जी ल  सत् सत् नमन हे।


           ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर’

         सुरगी, राजनांदगांव ( छत्तीसगढ़)

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