" घाम "के अलग अलग नाम
-मुरारी लाल साव
बेरा याने सुरुज भगवान l घाम लेके आथे l बेरा निकलिस घाम जनाथे l रोजे घाम होथे l ऋतु बदल थे,मौसम बदलथे l उही घाम आने आने जनाथे l अभी भागत जेठ के घाम ला देखत हन,जानत हन,सहत हन l ओकर नाम जेठ हरे -जेठ के घाम l हर महीना के घाम अपन अनुभूति कराथे l पूस के घाम के अलग आनंद l बरसात आही बरसाती घाम l घाम के संग पानी गिरे ओला कोलिहा के बिहाव घाम कहिथे l "घाम उवत हे घाम उवत हे कोलिहा के बिहाव होवत हे l,लइका मन नाच नाच के गाथे l
"लोक जीवन म सब अनुभूति करे हे l अनुभव होथे ओइसन नाम धर देथन l घाम जियानिस त कहिथन जइसे -लक लक ले घाम,रग रग ले घाम,चक चक ले घाम, टक टक ले घाम,लेसलेसहा घाम,
बदरहा/ बदराहा घाम,
रउंनिया घाम, भोरहा घाम,
कोवंरहा घाम,कुंवरहा घाम,फुसफुसहा घाम,जोरदरहा घाम,मँझनीहा घाम,संझाउती घाम l आखिर म येदे अउ सुरता आगे चर चरहा घाम l
सुरता राखे रहू अउ बताहू l
हमर छत्तीसगढ़ी कतका पोठ हे है ना l
-कुम्हारी जिला दुर्ग
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