*बरी*
बरी के नाम सुनबे तेमे मुहूं मे पानी आ जथे। बरी किसम किसम के होथे।रखिया बरी, पोंगा बरी, अदौरी बरी, सोयाबीन के बरी।फेर सबके सुवाद अलग-अलग होथे,जनाथे। बरी बनाना बड़ पिचकाट के काम आय।वइसे बरी ल कोनो साग संग मिझार के रांध सकथन।फेर बरी के नाम लेथन त फट ले आलू बरी,मुनगा बरी,के नाम आथे।नेंग नत्ता बर घलो बरी के बड़ महत्ता हे। बेटी के बीदा बर, छट्ठी भात म ऐकर नेंग बिना अधूरा रहिथे।
बरी कहिथन त एक ठन जेल वाले बरी घलो होथे।ये हर भागमानी विशेष किरपा पवइया मन ल मिलथे।जईसे कोनो ल सोला सोमवारी उपवास के पाछु वर मिलथे।अऊ कई झन के बाते अलग रहिथे।फुटहा करम के फुटहा दोना पानी बोहागे चारो कोना। कोनो ह जेल गेहे एकर मतलब समझ सकथन वो हर कोनो बने कारज तो नी करे होही। बरी कस इंखरो बड़ कैटेगिरी होथे। कोनो गांजा बरी, कोनों दारू बरी, कोनो मडर, अपहरण बरी, कोनो यौनशोषण बरी।गरिबहा (छुटभैया)मन सिरिफ बरी होय के सपना देख सकत हे।अऊ सपना देखे के अजादी तो गरिबे मन ल हे।ठोसहा मन तो सीधा बीसा लेथे। व्यवस्था,बेवस्था म बीजी हे। व्यवस्था बेवस्था के आगू नतमस्तक हे।वो तो गांधारी के भाग, समझदारी ( किस्मत)रिहिस जेन अपन आंखी म पट्टी बांध लिस अऊ अपन बेटा मन के पाप ल अपन आंखी ले नी देखिस। व्यवस्था के लीला अपरंपार हे जवान ठोसहा मन बरी अऊ चौरासी बछर के बुढ़वा जेल तरी।हो सकत हे सोला सोमवारी मे एकातठन ल भुला गे रिहिस होही।
कोनो एकात घांव जमानत म बरी होवत हे त कोनो बरी पुट बरी होवत हे।जेन मन बरी पुट बरी होवत हे इही मन भागमानी आय। विशेष किरपा वाले। जेकर लउठी तेकर भइंस।
तमाम सबुतों और गवाहों को देखते हुए
ठट्ठा दिल्लगी म कही सकत हन कानून सब बर बरोबर होथे?
कहीं दीप जले कहीं दिल
कही जले फटे नोट मिल।
फकीर प्रसाद साहू
सुरगी 🙏
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