*डिगिर डागर*
लेड़गा कहिथे कस जी भारी टेंशन म दिखत हस।मे केहेंव हव जी घर मे बाई चिल्लात रिहिस तोर तो रोज दिन घुमई ऐ।घर मे एक दिन थिरास घलो नही।रोज दिन के ये बैठक वो बैठक,ये गोष्ठी वो सम्मेलन के जव ई म चेंदरा परत हे।घर गहूं पिसाय बर परोसी के लईका ल तियारे ल पड़थे।तोर रोज दिन के नेता असन घुमई म दुपहिया घलो डिगिर डागर होगे।'चार आना के घाघर बारा आना के सुधरौनी'।लेड़गा कहिथे बने तो काहत हे तभो ले भऊजी ल समझाते नही जी मे बड़े-बड़े फलाना- फलाना समीति के पदाधिकारी हों।मंच म मुख्य अतिथि, अध्यक्ष, विशिष्ट अतिथि, के कुरसी हमर अगोरा करत रहिथे।अऊ सब पदे के खेल आय।नेता मन ल देखे हस? बाकी झंड़ा हलइया ल कोन पूछत हे।यहू एक ठन समाज सेवा आय।भऊजी के मन म जोश भर दे कर हम बदलेंगे युग बदलेगा।
अरे लेड़गा ते हमर पीरा ल नि जानस।करथे ते जानथे। दुनिया तो पदे ल देख के जोहार (सलाम )करथे । चाहे डाक्टर राहे,चाहे मास्टर अऊ कोनो नेता राहय चाहे अधिकारी।
कोनो चोर ल जोहार ले चोर,डांकू ल जोहार ले डांकू जी काहत सुने हस।यहु एक ठन मोह के कारण आय। धृतराष्ट्र ल पुत्र मोह ले डुबिस।जिहां मोह तिहा दुख हे।लेड़गा चुप।
दु दिन पाछु लेड़गा हांसत -हांसत आवत रिहिस।त मै पुछेंव काय होगे जी एकदम मुस्कुरात हस।त लेड़गा कहिथे मे लेड़गा समाज के ग्रामीण अध्यक्ष बन गे हो अऊ मंडल जिला म घलो पद मिले हे।अऊ आने आने समिति वाले मन घलो पदाधिकारी बनाय हे।अऊ ते अऊ दिल्ली वाले मन घलो एक्काइस सो रुपया के चंदा कांट के हमर जिला के अध्यक्ष घलो बनाय हे।हमरे पनही हमरे सर (मुड़)।मे हांथ मिलात केहेंव बधाई हो बधाई।दूधे खाव दूधे अचोंव।घर के खेत म कांटाखुटी दूसर के खेत म रोपा लगाव ।लेड़गा कथे का केहेस।मे केहेंव कुछु नही नास्ता मे खा हो।
फकीर प्रसाद
साहू फक्कड़ 🙏
सुरगी
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