लघुकथा -"भोंदू के मतलब "
-मुरारी लालसाव
इंटरव्यू के ऑफिस म अपन नंबर बुलाये के इंतजार करत अव्वल कुमार सोचत रहिस l का पूछही? तीर म एक झन अउ बइठे रहिस l ओला पूछिस -" अरे भाई तै का तैयारी करे हस? "
ओहर कहिस -"का तैयारी? जुगाड़ करे ला पड़ही l"
अव्वल कहिस -" का जुगाड़?" धुरिया घूंचत कहिस -"अरे भोंदू हस का?"
"भोंदू मतलब? गुस्सा ला रोक लीस l मने मन सोचिस l जउन गुरूजी मार मार के पढ़ाइस ओहा मोला "भोंदू "नइ कहिस कभू l मुरख़ भले कहिस l मुरख़ कहि कहिके मोला योग्य बना दीस पढ़ा लिखा समझा के l इही बात बताइस "न जुगाड़ काम आवय न नकल बेटा तै सफल होबे त अपने अकल से l" नम्बर आगे भीतर बुलाइस l
बड़े अधिकारी पूछिस सवाल -" जमींदार मन के रियासत ला अंग्रेज मन कइसे छिनिस? "
अव्वल कुमार के पास कई ठन उत्तर रहिस फेर आखिर म उही बात ला सोच के कहिस -" रियासत के जमींदार मन "भोंदू " रहिस l"
अधिकारी आँखी ला देखत रहिगे,जवाब ला सुनके l फेर पूछिस -" भोंदू मतलब पूरा बताओ l"
अव्वल आत्म विश्वास ले कहिस -" जुगाड़ करे ला छोड़ दीस l" अच्छा जाओ l अधिकारी सोचिस -"स्वाभिमानी हे l "
रिजल्ट आइस त देखिस अव्वल कुमार के नाँव ऊपर म रहिस l
-कुम्हारी जिला दुर्ग
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