Wednesday, 8 July 2026

सोचे अउ गुने के बात

 दिनांक ०८/०६/२०२६



सोचे अउ गुने के बात


ऊपरवाले! ए संसार ल बना के जम्मो जड़ चेतन के डोरी के एक छोर ल अपन हाथ म धरे बने नचवाथस। पशु-पक्षी जीव-जंतु मन ल बोले के अधिकार नइ दे हस। बुद्धि घलो नइ दे हस। एक बात हे; पेट सबो ल दे हस। त पेट भरे के उदिम जम्मो झन जानथें। ए बात अलग हे के मनखे ल छोड़ अउ जीव मन खा के अघा जथें। मनखे के भूखे नइ मिटाय। गरीब मन ल नइ कहॅंव। उन बिचारन तो पेज पसिया खा के रहि जथें। ए बात रईसन मन बर आय। अच्छा! इन दूनों के बीच म पिसाथें साधारण कमइया इंसान। जेन ल कथन "मध्यमवर्गीय परिवार"।  


अब भूख कइसे नइ मिटाय? खाहीं त उही दार भात साग। अभी त ए हाल होगे हे के जउन पेज पसिया, बोरे बासी ल मेहनत करइया मन पीयत आवत हें, उही ह अब सबो बर टॉनिक होगे हे।

डर ए बात के लगत हे के उहू ल गरीब गुरबा तिर ले लूट झन लॅंय। खैर! साधारण भूख तो सबो के मिटा जथे। भाई हो,  भगवान ह हरेक आदमी ल अउ उपरहा कई टाइप के भूख दे हवय। कोनो ल अपन दौलत के, कोनो ल हवस के, अउ कोनो क्षेत्र म होय सबले बड़का भूख बिन मिहनत के अगुवाय के....जेला हम शॉर्ट कट कथन। ए शॉर्ट कट के चक्कर म मनखे नाना प्रकार के उदिम करथे। 


ए उदिम हर अभी स्वास्थ्य अउ शिक्षा विभाग म अइसे दॅंउड़त हे के थकबे नइ करत हे।

खासकर शिक्षा विभाग म। बढ़िया इस्कूल ले लेके  डॉक्टरी अउ इंजीनियरिंग के अच्छा से अच्छा कॉलेज म भरती के पहिली परीक्षा लेवई।

दूसर;  एखर बर बड़े बड़े कोचिंग सेंटर, जिंखर मेर जादू के छड़ी रथे काय, अपन चहेता मन ल पास कराए के ठेकेदार, इंखर बढ़ोतरी। मनमाने फीस, लइका के रहे खाए के खर्चा अलग। साधारण कमाने वाला बाप के ताकत नइ रहय इंखर खर्चा उठाए के। बपुरा कइसनो करके इंतजाम करथे। चाहे अपन गोसइनिन के गहना गुरिया बेचय चाहे छोटे मोटे खेत खार ल। भगवान तिर दिन रात बिनती करत रथे अपन लइका के सफलता बर। पढ़इया लइकन दिन रात एक कर देथें। उन अगोरत रथें परीक्षा के दिन ल। वो दिन आ के निकल जथे। जम्मो झन ल आस रथे ए दरी मोर पेपर अच्छा बने हे,मैं निकल जहूॅं कहिके। ओतके म पता चलथे पेपर तो लीक हो चुके हे। रसूखदार के लइकन मेर पहिलिच ले आ गे रहिसे कहिके।  कोचिंग सेंटर 

चलवइया ले लेके परीक्षा नियंत्रक के अधिकारी कर्मचारी सब शामिल रथें एमा। अउ बीच बीच म टुटपुॅंजहा एजेंट, जइसे पान ठेला घलो के रैकेट रथे। अउ पोल खुलत जात हे नेता ले लेके जे बड़े बड़े अधिकारी रथें उंखर सगा संबंधी के पौ बारा...अइसन गड़बड़ी बिन बड़का नेता ऊता के सह पाए के संभव नइए। फेर वाह रे इंखर चरित्तर... कथें नहीं; "नकटा के नाक कटे सवा हाथ बाढ़े" कल्ला काटे बर नानमुन अधिकारी ऊपर एक्शन...बलि दे बर बोकरा खोजते रथें...।


पहिली जनाबे नइ करत रहिस। अभी के ए उदिम म लगे मनखे मन ल अइसन धॉंधली ल तगड़ा कान्फेडेन्शियल रखे म महारत हासिल 

नइए तइसे लगथे। मैनेजमेंट म उन कच्चा हें...तेकरे पाय के जल्दी उजागर होवत हे। लगथे इंखर मैनेजमेंट म ही जयचंद/विभीषण होहीं....


को जनि का का चरित्तर अउ देखे ल मिलही।

ईमानदारी अब एकदम बिदा ले के तैयारी म हे।

लइकन आत्म हत्या करत हें। एमा लिप्त बड़े मन ऊपर सख्त कार्यवाही होना चाही। फेर करहीं कोन? का सत्ता बदले भर ले बदलाव आ जाही?

इहॉं त सबो मौसेरा/कका बड़ा/ममा फुफू के भाइच तॉंय.....


जोहारत....🙏🙏🙏🌹🌹


सूर्यकांत गुप्ता, जुनवानी, भिलाई (छत्तीसगढ़)

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