*घमंड*
एक ठन मेढक अपन तीन झन लईका संग जंगल मे नदिया तिर राहत रिहिस।उंकर घुमइ फिरइ उहिचे तक रिहिस। दुनिया दारी ले कोई लेना-देना नइ रिहिस। एक दिन तीनों लईका घुमत घुमत जंगल तिर के गांव मे पहुंच गिस।उहां ओमन खेत म चरत बईला ल देख परिस।वतिक जन जीव ओमन कभू नी देखे रिहिस।उही समे बईला हर जोर से नरियाइस। तीनो लईका डर के मारे भागत घर आगे।लईका मन ल डर्राय देख के पूछथे काय होगे।त लईका मन बईला के बात ल बताईस। मेढक जोर ले सांस तिरिस अउ हवा भरके अपन तन फुलाइस।अउ पूछथे का अतिक बड़?लईका मन कहिथे नही ऐकर ले अउ बड़े। मेढक अपन तन ल अउ फुलाइस अउ पुछथे का अतिक बड़।।?लईका मन फेर मुड़ी ल डोलाके नही कहिथे। मेढक ह घमंड के मारे कहिथे आखिर कोनो जीव ओकर ले कइसे बड़े हो सकत हे?अब वो अपन तन ल अतिक फुलाइस के फुट के मरगे।
फकीर प्रसाद साहू
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