Sunday, 3 January 2021

शरीर के अंग के नाम

 शरीर के अंग के नाम


मूड़/मूड़ी

चेथी

गला

कपार

चुंदी

नरी

हाड़ा

माँस

पोटा

माड़ी

जाँघ

हाथ

गोड

कोहनी

घुटना

अंगरी (अंगुली)

माई ॲंगरी 

छिनी ॲंगरी

डूड़ी ॲंगरी

अंगठा

नख

मुँह

आँखी

कान 

नाक

दाँत

जीभ

कनिहा (कमर)

पीठ

बिनऊँरी

ऐडी

बाखा

भुजा

छाती

पेट

ओठ

माथा

गाल

डाड़हा

कनपट

मसूड़ा, मसकुरा

घेंच

टोंटा

पखउरा

पक्ती

बोर्री-नाभी

कुल्हा

पिड़री

तरपवॉं

नखसूत

खखौरी


छंद परिवार

बछर दू हजार बीस मा का पाएन,का गँवाएन*

 *बछर दू हजार बीस मा का पाएन,का गँवाएन*


कहे गे हे समय के चक्का घूमते रहिथे वो कभू एक जगा ठहरे नइ राहय। ए समय के धारा म बहुत कुछ बोहाके अथाह काल-सागर म समा जथे। एक पल नाहकिस तहाँ ले दूसरा पल आ जथे।दूनों म कोनो मेल नइ राहय। हाँ, अतका जरूर हे--गुजरे पल हा अपन पिछू कुछ चिनहा अइसे छोड़ देथे जेमा कुछ ल घेरी-बेरी सुरता करे के मन होथे त कुछ ल तुरते भुलाये के मन करथे। बादर कस उमड़त-घुमड़त कुछ सुरता मन मीठ-मीठ त कुछ जहर करुवा लागथे।

    असनेच कहानी चंद दिन के मेहमान बछर दू हजार बीस के हाबय ।एकर पन्ना ल पलटे  म उपलब्धि के तथाकथित बड़े बड़े कहानी जइसे कश्मीर ले अनुच्छेद 370 अउ धारा 35 A के हटना, तीन तलाक कानून, राम मंदिर निर्माण बर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसला अउ ओकर बिना खून-खराबा,बिना दंगा फसाद के आम भारतीय मन के सहर्ष स्वीकार करना आदि संगे संग कोरोना काल म तको कुछ राज्य म सफलता पूर्वक चुनाव ,चंद्र अउ मंगल अभियान, अटल टनल के निर्माण, अनेक पूल ,बाँध ,सड़क, भवन के निर्माण के कहानी लिखाये मिलथे। ए सबके गिनती बछर दू हजार बीस म पाये जिनिस कोती करे जा सकथे।

 समाजिक रूप ले देखन त बछर दू हजार म आये कोरोना संकट ह  दया,मया अउ सहयोग के भावना ल जगाये अउ बढ़ाये के काम करिस। देश प्रेम अउ एकता के भावना ल बढ़ाइस। कई महिना के लाकडाउन बखत अभाव म जिये ल सिखाइस। डाक्टर, पुलिस मन अपन जान के बाजी लगा के सेवा के उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करिन। परिवार म मेल जोल बढ़िस। 

  ए तो निर्विवाद रूप ले कहे जा सकथे कि दू हजार बीस म पर्यावरण  बनेच सुधरिस हे।

    अब अगर खोये का हन म बिचार करे जाय त गुनत गुनत माथा फट जही फेर खोये के गिनती नइ करे जा सकय। सबले पहिली नम्बर म विश्व व्यामी कोरोना संकट ह आही जेन ह लाखों मनखे मन ला मार डरिस।  मजदूर-गरीब मन जीते जी मरे बरोबर होगें। हजारों हजार मनखे मन के रोजी-रोटी छिनागे ।कतको परिवार ,देश अउ उद्योग धंधा चौपट होगे। राजनैतिक रूप ले मजदूर गरीब के सेवा के डंका पिटइया मन के ढकोसला टकटक ले देखे ल मिलिस।  बड़े बड़े हत्या, लूट अउ घृणित बलत्कार के दाग , जात-पात अउ धर्म के नाम म  अत्याचार तको होइस।

     कुल मिलाके हमर विचार ले ये दू हजार बीस के बछर ह अइसे अइसे चोट दे हे के सुरता करके जी घबरा जथे।


चोवा राम 'बादल'

नवा बछर-पूरन लाल जायसवाल

नवा बछर-पूरन लाल जायसवाल


 बछर दू हजार इक्कीस अवइया हे यानी दू हजार बीस साल भर पहिली जेकर स्वागत हम बड़ खुशी खुशी करे रहेन एक दू दिन मा जवइया हे।

समय वो चाहे पल हो घड़ी हो सेकंड, मिनट, घंटा, दिन, हप्ता, महिना हो चाहे साल हो गुजरेच खातिर बर आथे। कहे बर तो कहे गे हे- "बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुधि लेय।" फेर का ये अतका सरल होथे। अवइया दिन मन सही बीते बेरा मन भी अउ खासकर वो बेरा ले जुड़े सुरता अउ भावना मन भी हमर जिनगी के अइसे हिस्सा बन जाथे कि नइ चाहत हुए भी बेरा-कुबेरा हमर दिल दिमाग के अगास मा बादर कस घुमड़े लग जाथे।


थोकन व्यक्तिगत होवत कहँव तव मँय बहुत ही नीरस व्यक्ति अँव। सब दिन ला एके बरोबर जानके कोनो परब, कार्यक्रम मा उत्साह ले कम भागीदार रहिथौं, व्यवहार निभा मा कमी भी नइ करँव, हाँ, कखरो उत्साह ला कम नइ करँव। फेर कहूँ बछर दू हजार बीस के बात करँव तव। ये बछर हर मोर जिनगी भर के अनुभव ऊपर भारी, बिल्कुल अलग अउ झकझोर देने वाला हे। कहिथे समय अउ विपत्ति सबले बड़े गुरू होथे। बछर दू हजार बीस बर ये सिरतो लागू हावय। अउ सब ला आत्म-अवलोकन कराइस।


साल शुरू भर तो होय रहिस कि लॉकडाउन ... स्कूल, कॉलेज, दुकान, संस्थान सब बंद। सब मनखे घर मा धँधाय बर मजबूर होगेन। गाँव-गली, शहर, प्रदेश, देश नहीं पूरा दुनिया रुकगे। जी, मँय कोरोना (बीमारी, अजार, महामारी, आपदा, संकट काय ये अब तक अस्पष्ट हे) के बारे मा गोठियात हँव। जेकर कारण से पूरा देश दुनिया मा जिनगी के गाड़ी हा रुके भर नइहे बल्कि पटरी ले उतर गेहे।


 ये बछर हर कतको राष्ट्रीय उपलब्धि बर भी सुरता करे जाही, संगे संग कतको अपन प्रियजन ला भी हमन खोय हन, वोहू मन के सुरता सताही। तब ले अवइया बछरो-बछर तक ये बछर हर कोरोना बर ही सुरता करे जाही। कोरोना ले कहन तव सबले जादा नुकसान गरीब, मजदूर मन के रोजीरोटी छिना जाना अउ हमर देश के भविष्य नौनिहाल मन के बछरभर के पढ़ाई ठप्प हो जाना आय। ये बछर के आखिरी बेला मा वैक्सीन के बनना हर राहत तो देवत हे, फेर कोरोना वाइरस के देये घाव ला भरे मा अउ वोकर निशान ला मिटे मा कतको बछर खप जाही।


तब ले दुख ला बिसार के सुख अउ आनंद के संभावना खोजना, निराशा ला भुलाके आशा के दीया बारना, रद्दा के काँटाखूटी अउ ढेला पथरा ला टारत आगू बढ़ना, असफलता ला पीछू छोड़के सफलता के नवा आयाम गढ़ना जिनगी आय। ये सब ला समझत अउ धियान मा रखत नवा बछर ले हर बार बरोबर हमर आशा जुड़े हे, हमर सपना के गोंदा फूल फेर फुलही, महमहाही। हम जुन्ना सब हताशा ला भुलाके अवइया नवा बछर के हर बार बरोबर नवा बहुरिया कस पूरा ऊर्जा, आनंद अउ उछाह ले स्वागत करबो।


पूरन जायसवाल

बछर दू हजार बीस म का पाएन अउ का गँवाएन*

 *बछर दू हजार बीस म का पाएन अउ का गँवाएन*

       कहे जाथे कि समय के आगू कखरो नि चलय। मुठा म धरे रेती बानिक कब हाथ ले बिलम जथे, गम नि मिलै। अउ कहूँ अगोरा म रहिबे त बेरा पहावय नहीं। मन बइरी अगोरत अगोरत धं अँगना धं परछी करथे। अगोरा कब सिरावय लगथे। एक-एक छिन भारी हो जथे। दुख के घड़ी पहाड़ बरोबर हो जथे। एक-एक दिन एक -एक जुग जनाथे। कुछु हो समय अपन संग कतको अनभो लेके आथे, अउ चल घलव देथे। ए अनभो मन छाती म कतको घाव करथे, त कोनो-कोनो ह घाव बर मरहम घलव बन जथे। जउन ह जिनगी के कोनो पन्ना सरिख उलटत-पलटत नवा सिखौना बन के दंगदंग ले ठाढ़ हो जथे। इही हाल दू दिन बाद दू हजार बीस के होवइया हे। जउन अपन ओली म कतको करू-कस्सा अउ मीठ सुरता ले के हमर ले विदा हो जही। जउन ल अपन ओली म लुकाय लाय रहिस। जेकर परछो हम ल ओकर गुजरे ले होवत गिस। 

       जउन बने लगिस तउने ल पाय हँवन त जउन ह हमर मन म घाव कर दिस, हम ल चार आँसू रोवाइस। ओ बेरा हमर काँही कुछु गँवाए के गवाही बनगे।

*सामाजिक*-- दू हजार बीस सामाजिक रूप ले कतको बछर ले सुरता करे जाही। लॉकडाउन के लगे ले सबके खानपान एक जइसे हो गे। जेकर ले अभाव का होथे? साधन-संपन्न मनखे ल घलव पता लगिस। अभाव म कइसे जीना चाही सबो ल सीखे मिलिस। कतको दाई-ददा मन के हाथ पिंवराय के सपना सपना रहिगिस, त कुछ मन बर बरदान घलव बनगे अउ दुखम-सुखम सात-भाँवर  के परे ले आनी-बानी के ताम-झाम के खरचा घलव बाँच गिस। कोरोना काल म सामाजिक दूरी के चलत कतको सामाजिक आयोजन नि होना भविष्य बर शुभ अउ अशुभ दूनो कहे जा सकत हें। गणपति पूजा, नवरात्रि, छोटे बड़े तीज-तिहार के नि मनना  साँस्कृतिक रूप ले जोड़े के मउका ल आड़ कर दिस। उहें बर-बिहाव अउ आने सामाजिक कार्यक्रम म संख्या सीमित होय ले खरचा के कमतियाना, समाज बर शुभ कहे जा सकथे।

*आर्थिक*--- दू हजार बीस के करिया छइहाँ आर्थिक जगत ल सुरसा कस लील दीस । लॉकडाउन लगिस त फैक्ट्री, हाट-बजार दूकान सबो बंद। बिकास के चक्का थमगे। मजदूर वर्ग के रोजगार छीनगे। अवसरवादी मन कालाबाजारी करे लगिन। चीज के माँग बढ़िस त महँगई छानही म चढ़ नाचे लगिस। गरीब-मजदूर मन लाँघन भूखन दूर-देश ले घर दुआर लहुटिन।सबके कनिहा-कूबर टूटगे। चक्का थमे ले मोटर गाड़ी वाला मनके चेत हजागे। कुल मिलाके काहन त आर्थिक जगत के गाड़ी असो बेपटरी हो, एक्सीडेंट होवत ले दे के बाँचे हवै।

*स्वास्थ्य*--- मन चंगा त कठौती म गंगा कहे गे हे। फेर असो कोरोना के आय ले सबके मन डरे-डरे हे, आन के तान होत हवै। तन बने रहे म मन घलव बने रहिथे। तन कब काकर सपेटा म बिगड़ जही, एकरे गारंटी नि हे। अइसन म मानसिक रूप ले कतको के संतुलन बिगड़े हे, अउ मानसिक टेंसन, मोटापा, ब्लड प्रेशर, चिड़चिड़ापन बाढ़गे हवै। ए पीरा असो के बड़े घाव आय जेन भरे म बेरा लिही।

*शैक्षिक*---- शैक्षिक गतिविधि पूरा बछर भर घला गे। न स्कूल-कालेज खुल पाइस, न बरोबर परीक्षा हो पाइस। स्कूल कालेज के नि खुले ले पढ़ई के विकल्प ऑनलाइन आ तो गे जउन भविष्य बर अच्छा प्रयोग कहे जा सकत हे। फेर अभु एकर सफलता कतको कारण ले लक्ष्य ले कोस भर दुरिहाच हे। जुन्ना तरीका ले सरलग पढ़ई नि होय ले, एक ठन खाई बनगे, जेन ल पाट पाना बहुत मुश्किल हे। जउन ढंग ले परीक्षा आयोजन होवत हे या योजना देखे-सुने म आवत हे। ओकर तुरते फायदा दिखत हे। फेर लइका मन के नेंव कमजोर होवत हे। बहिरफट लइकामन ल पढ़ई ले जोर पाना अउ मुश्किल होही। जेकर दूरगामी प्रभाव पूरा समाज बर घलनहा होही।

*राजनीतिक*--- राजनीतिक उठापटक देश म अस्थिरता लाथे। लोकतंत्र के नींव ल कमजोर करथे। मध्यप्रदेश म कुर्सी दउड़ बर जउन कुछ होइस वो लोकतंत्र बर अच्छा नि कहे जा सकय। अपन माँग अउ सरकार के कोनो फैसला नीति के विरोध म आंदोलन होना चाही। फेर आंदोलन मन के लम्बा खींचे जाना सत्ता पक्ष के विफलता कहे जा सकत हे।

*साहित्यि*--- ए बछर साहित्यिक आयोजन बर जुराव पाछू बछर मन ले कम होय हवै। पत्रिका मन के प्रकाशन सरलग होइस, फेर ऑनलाइन ई-पत्रिका के प्रकाशन साहित्यिक नवाचार के रूप म आगू बढ़िस। ऑनलाइन जुराव ले साहित्यिक गतिविधि के चलना साहित्य अउ समाज दूनो बर शुभ संकेत आय।

         जीवन-मरण जमाना के अकाट्य सच आय। जेकर जनम होय हे, ओला ए दुनिया ले एक दिन जानाच हे। अवई कस जवई ओसरी-पारी होथे। कोनो अतेक आगू चल देथे कि ओकर बर दुनिया कहिथे, अभी नइ जाना रहिस। फेर ए अवई जवई म हमर बस नि चलै। अतके दिन बर आय रहिस, कहिके मन संतोष करे के सिवा कोनो चारा नि रहे। कोनो सहज गिन त कोनो घटना दुर्घटना ले त अउ बहुते झन कोरोना ले चल दिन।

      इही ढंग सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, साहित्यिक जम्मो क्षेत्र ले कतको हमर संग छोड़ दिन। उन सब ल सादर श्रद्धांजलि।

        दू हजार बीस अपन संग कोरोना ल ले के जाही, अउ जिनगी के अँगना टीका के फुलवारी ले महमहाही, इही आस के दीया जुगजुगावत हे।


पोखन लाल जायसवाल

पलारी (बलौदाबाजार

बछर दू हजार बीस के अनुभव'

 'बछर दू हजार बीस के अनुभव'


               हर बछर कुछु पाथन त कुछु खोथन घलो। औ पाना- खोना इही तो जिनगी के सार आय। वइसे तो हर बछर हमर जिनगी म कुछ न कुछ सुख- दुख, करु- मीठ औ उतार- चढ़ाव आथे। जेखर ले हमर अनुभव बढ़थे। 

              अक्सर ये कहे- सुने बर मिलथे के फलाना के सेती मोर काम बिगड़गे।  बहुत जल्दी हमन कखरो उपर दोष मढ़ देथन जबकि हम ल चिंतन, मनन करना चाही कहाँ मेर गलती होय हे। औ वो गलती ल सुधार करत अपन पाँव आगू धरना चाही। हम अपन दुख- सुख के खुदे कारण होथन। कोनो ल दोष देके बजाय खुद के अंदर झाँक लेना चाही।  

           सबले बड़े बात मोला लगथे सिरतों म समय अबड़ बलवान होथे। तिल ल ताड़ औ ताड़ ल तिल बना देथे। दू हजार बीस म बहुत मुसीबत आके टोरे के अथक प्रयास करिस फेर नइ टोर सकिस। बल्कि औ मजबूत बनाइस कुछ न कुछ सीख देके गिस। 

         सबले बड़े बात कोरोना बइरी के करथन। जेखर आए ले गाँव- शहर का देश- दुनिया म तबाही मचगे। मनखे मन डरे- सहमें घर म दुबक के रहिगे। तीज- तिहार के रंग फीका होगे। स्कूल- काँलेज,  मील- कारखाना का नान्हे- बड़े उद्योग सब बंद होगे।  मनखे मन के काम- धँधा छुटे ले सब हलाकान होगे। सरकार लाँकडाउन उपर लाँकडाउन करिस। तभो कोरोना ल अपन पाँव पसारे बर नइ रोक सकिस। 

           गाड़ी- मोटर सब बंद होगे इहाँ तक के रेलगाड़ी के चक्का घलो थमगे। हे भगवान ये कइसन दिन आगे कोनो मनखे के दिमाग काम नइ करत रिहिस। सरकार घलो सब ल भुलागे सिरिफ कोरोना के ही चर्चा करय। मनखे मन के कहूँ आना- जाना सब बंद होगे।  

         खाए- कमाए ल बाहिर गे मजदूर भाई मन तनानना होगे।  कतको 1500 - 2000 किलोमीटर रेंगत अपन घर भूखे- प्यासे आइन। जगह- जगह म पुलिस जवान मन के पहरा। लुकाछिपी करत कइसनो होय घर पहुँचिन। कतको मजदूर भाई मन काल के गाल म घलो समागे। गाँव पहुँच के 15-20 दिन ले गाँव के स्कूल म क्वारेंटाइन रहई। हाय रे तकलीफ।

        सरकार के नियम के तहत बर- बिहाव, छट्टी- बरही अउ मरनी- हरनी के कार्यक्रम सिरिफ औपचारिकता होगे रिहिस। नाममात्र के गिने- चुने मनखे रहय। ओ भी सोशियल- डिस्टेंस के पालन करना अनिवार्य। मनखे सिरतो म कठपुतली होगे रिहिस।

           महँगाई दिनोदिन सुरसा सही अपन मुँह बढ़ाइस। कतको अइसनो जेन 2 के समान ला 20 म बेचय। जमाखोर अउ मुनाफाखोर मन अपन कमई ल ही देखिन। मनखे आर्थिक तंगी ले बहुत जुझिन अउ जूझते हे।

              कलाकार बपुरा मन बिन काम के ठोठक गे। लइकामन के पढ़ई- लिखई छुटगे। घरे म धूम मचई होगे।  दाई- ददा मन हलाकान होगे। बस एक सहारा मनोरंजन के टी वी अउ मोबाइल रिहिस। मोबाइल कंपनी वाले मन के बल्ले- बल्ले रिहिस। कतको दयालु मनखे अउ एनजीओ वाले मन मदद करे बर घलो आगू आइन। 

            धीरे-धीरे कोरोना के डर कम होइस त मनखे मन सामान्य जिनगी जिये बर लगिन। तभो मन म दहशत बने रहय। सरकार बार- बार  चेतावनी देवय मुँह म माँस्क बाँधना अउ हाथ ल धोना-  सेनेटाइज करते रहना हे। पुलिस वाले, सफाईकर्मी अउ स्वास्थ्यकर्मी मन ड्यूटी करई हलाकान रिहिन। हा फेर हार नइ मानिन अपन ड्यूटी ल घर- परिवार ल छोड़के पूरा करिन।

             एक बात अउ कोरोना हम ल बहुत कुछ सिखाइस घलो। प्रकृति के साथ खिलवाड़ के दुष्प्रभाव, रिश्ता- नता के अहमियत। सिरतोन 2020 म कतको नामी मनखे इहाँ ले विदा होइन जेखर पूर्ति असंभव हे। सरकार द्वारा ठोस निर्णय घलो ले गिस जेन सराहे लाइक हे। सबके मंगल सबके भला होवय इही आशा करत अब तो बस 2021 के शुभआगमन के अगोरा हे।

               

     ज्ञानुदास मानिकपुरी 

चंदेनी- कवर्धा (छ्त्तीसगढ़)

नावा बछर के नावा कुरता -हरिशंकर गजानंद देवांगन छुरा

 नावा बछर के नावा कुरता -हरिशंकर गजानंद देवांगन  छुरा

                    तीन सौ पैंसठ दिन म एक बेर जलसा होये समय के घर म । अवसर रहय समय के बेटा “ बछर “ के जनम । भगवान आतीस अऊ नावा लइका बछर के देहें म जगजग ले नावा सफेद कुरता पहिरा के  ओकर उप्पर नम्बर लिख के नाव धर देतीस । ब्रम्हाजी के घड़ी म जइसे टेम होइस .... भगवान झम्म ले परगट होके ..... तुरते जनमे लइका “ नावा बछर “ ल नावा कुरता पहिरा दीस अऊ नाव धरत दू हजार इक्कीस लिख के जाये बर धरीस । समय किथे - भगवान , तैं हरेक दारी मोर नावा बछर बर नावा कुरता लान के पहिराथस , फेर ये दारी काये पहिरा दे हाबस ? कतको जगा ले मइलहा चिरहा अऊ केऊ रंग के दिखत हे ? भगवान किथे – तोर बेटा ... नावा बछर ल हरेक दारी नावा सफेद कुरता पहिरा के जाथंव , फेर देख ... जवइया बछर के कुरता के का हाल होगे हे , कुरता म तिल मढ़हाये के लइक जगा निये । जेती देख तेती दाग लहू अऊ राईस मिल ले निकले पानी ले जादा बदबू । समय किथे – तीन सौ पैंसठ दिन म कुरता मइलाबेच करही अऊ दुर्गंध तो आबेच करही भगवान .... । भगवान किथे – अइसे बात आय का .... वइसे हरेक दारी कस ... तोर नावा बछर बर ... नावा सफेद कुरता खिलवाये के कोसिस करेंव । नावा सफेद कुरता खिलवाये बर कतिहां कतिहां हाथ गोड़ नी मारेंव । फेर जेकर करा कुरता खिलवांव वो कुरता अपने अपन माढ़हेच माढ़हे दागदार हो जाय । चिरा जाय । अऊ बस्साये लगे । सुनदर दिखइया अऊ टिकइया कुरता खिले के ताकत इहां कनहो दरजी मेर निये । समय किथे - कइसे किथस भगवान इहां के मनखे ल देख । रंग रंग के कुरता पहिर किंजरत हे चारों खूंट । तैं दरजी नी मिलीस किथस । भगवान किथे - इंकर मन कस कुरता खिलइया दरजी तो कतको मिलय , फेर ........। 

                   समय पूछीस – का फेर , तैं कतिहां गे रेहे , फरिया के बता ? भगवान किथे – मंदिर के आगू बइठे दरजी करा गेंव । ओहा कपड़ा नाप लेके मोला पूछिस के ..... कतका रूपया वाला कुरता खिलवाबे ? में समझेंव निही । वो बतइस के मनखे अपन हैसियत के हिसाब ले .... एक रूपया ले लाखों रूपया के कुरता खिलवाथे । में केहेंव - खिलत तो उहीच मसीन ले होबे । उइसनेच तागा बउरत होबे , फेर खिलई के रेट म अतेक अंतर काबर ? ओ किथे – काकर आगू म बइठे हंव मेंहा , नी देखथस का ? भगवान के पूजा असन म जब रेट अलग अलग हो सकत हे तब का मोर खिलई के रेट ..... अलग अलग नी हो सकय । में तभो तियार होगेंव । तभे ओहा .... मोर जात पूछीस । मोला समझ नी अइस के ये का होथे । तब उही मोला बतइस । में सोंचेंव के में जात पात तो बनाये नियों इही मन बनाये हे । कहूं येकर बिजाती आवंव कहि देहू त .... येहा कुरता खिले बर इनकार झिन कर देवय । तेकर सेती अपन जात ला “ मनखे ” कहि पारेंव । वो दरजी मोर उप्पर भड़कगे । अऊ मोर कपड़ा ल फटिक दीस । अऊ किहीस के .... तेंहा अतका नीच जात के आवंव कहिके पहिली बताये रहिते ..... में तोर कपड़ा ल हाथ तको नी लगातेंव । ये दुनिया म सब जात बने हे , सिवाय मनखे जात के । में सुकुरदुम होगेंव ..... किलौली करेंव त मंदिर के ठेकेदार कस लुकाके ...... दान दक्षिना के बात करे लागीस । में तियार होगेंव । कुरता खिलागे । फेर ओमा जात पात ऊंच नीच अऊ छुआछूत के अतका अकन रंग लगे रिहीस के झिन पूछ । ओकर गंध तो कुकरी भुंजाए ले जादा महकत रिहीस । ओ कुरता ला नावा लइका ल पहिरा सकना समभव नी रिहीस । 

                    भगवान कहिते रहय – तब एक ठिन मस्जिद के आगू म बड़े जिनीस दरजी के दुकान म हिम्मत करके खुसरेंव । ओ दरजी हा बिगन पइसा के खिले बर तियार होगे । ओला बने आदमी समझेंव फेर ..... थोरेचकुन बेरा म उहू अपन रंग देखा दीस । मोर हाथ म बंदूक धरा दीस अऊ अपन बूता करे के बात करे लागीस । मोर धरम पूछीस । मोर से फेर गलती होगे । मेहा अपन धरम ला “ मानव धरम “ कहि पारेंव । दरजी भड़कगे अऊ केहे लागीस के अइसन कनहो धरम नी होय दुनिया म । तैं हमर धरम म संघर जा बड़ मजा पाबे । कनहो एके ठिन बात ल तीन घांव सरलग कहि देबे ते जिनगी भर बर छुटकारा पा जबे । बंदूक के बल म अपन धरम म संघेर घला लीस । ओकर धरम म ..... मोर बूता संझा बिहाने बांग देके लोगन ल दूसर धरम के खिलाफ भड़काना रिहीस । मोर कपड़ा के कुरता खिलागे । फेर ओमा बंदूक के गोली निंगे कस कतको छेदा ........... । जेती देख लहू बोहाये के चिनहा ....... अऊ ते अऊ ओमा नफरत के अतका कीरा बिलबिलावत रहय के .... ओ कुरता ला पहिरना तो दूर .... इहां तक धर के लान सकना मुसकिल रिहीस । 

                    लम्भा सांस लेवत भगवान केहे लगिस - गिरिजाघर के आगू बड़े जिनीस माल म खाये के विज्ञापन देख भूख हमागे । माल के बीचों बीच सोरूम म कुरता खिलइया ल देख मन खुस होगे । भूख ल भुलागेंव । कपड़ा झोंकते साठ ओ दरजी हा मोर बड़ सुवागत करीस । गांव के सिधवा गरीब आदिवासी मनखे समझ , मोला न जात पूछीस न धरम । कुरता ल फोकट म खिले बर तियार होगे । जिनगी भर पूरा परिवार के कुरता ल फोकट म खिले के आसवासन देवत हमर गांव के अऊ कतको मनखे मन के कतको बूता करे बर तियार होगे । गांव म बड़े जिनीस स्कूल अस्पताल अऊ पूजा खोली बना दीस । प्रार्थना सभा म जम्मो झिन ला अपन धरम म संघेर लीस । भूख अऊ गरीबी के सेती महू तियार होगेंव फेर ओकर खिले कुरता म छिछोरापन के रंग चढ़गे । झूठ अऊ व्यभिचार के दाग कुरता ल सनाये बर धर लीस । थोरेच कन बेरा म ओमा सम्राज्यवाद के बदबू आये बर धर लीस । ये कुरता हा एक दूसर धरम के बीच लड़ई करवाये के माध्यम बन गिस । 

                    पूजा स्थल के आगू बइठे दरजी मन उप्पर भरोसा उठगे । संसद भवन के आगू कतको दरजी बइठे रहंय ..... उही करा पहुंच गेंव । ऊंकर खिले कुरता कभू चारा कस हरियर हो जाये । कभू बोफोर्स कस तोप बन के डरवावय । कभू स्प्रेक्ट्रम कस ये मुड़ा ले ओ मुड़ा किंजरय । त कभू कोयला के आगी कस .... भभके ल धरय । सचिवालय के आगू कोट खिलइया मन करा चल देंव । कोट म अतका कस जेब के झिन पूछ । जुन्ना नोट अतका भरे रहय तेकर ठिक्काना निही । जुन्ना नोट चुमुक ले जइसे बंद होइस .... को जनी कती ले नावा नोट मन खुसरगे । फेर वो कपड़ा ले निकले ..... भ्रस्टाचार के दुर्गंध म नाक दे नी जाय । 

                      समय हा भगवान ला पूछिस – त अइसन बिन फबित के दागदार चिरहा कुरता ला नावा बछर हा कब तक पहिरहि भगवान ..... जिही देखही तिही हांसही .... तोला काहे .... । भगवान किथे ..... हासन दे ना जी । हंसइया मन ओकर बर उज्जर कुरता खिलवा के लान दिही का ...... ये बखत जे कुरता लाने हंव तेला गरीब ईमानदार मेहनतकस मजदूर किसान मन मिलजुर के खिले हे । केऊ हाथ के सेती भले मइलहा रंग बिरंग टप्पर लगे कस अऊ कहूं करा बिगन खिलाये दिखत हे । फेर येला एकर देहें ले उतारबे झिन । जइसे जइसे कुरता ले पछीना के गंध गहराही , देस के मनखे के जबर बढ़होतरी होवत जही । समय पूछथे – त नावा कुरता पहिराये के सउंक कब पूरा होही भगवान .... ? भगवान किथे – जब तक बड़का मन बर .... बड़का दरजी के खिले .... उज्जर सफेद कुरता के दाग ..... साधारन जनता ला नी दिखही अऊ जनता अपन ताकत ले ..... उज्जर पहिर के देश ला बर्बाद करके टेस मरइया ..... खुरसी ला पोगराये .... फसकरा के बइठे मनखे के कुरता ला तार तार होये बर मजबूर नी कर दिही तब तक ..... तोर नावा बछर के नसीब म उज्जर नावा कुरता नी आ सके ....... । जे दिन जनता के मन बदलही ..... ते दिन अइसन मन या तो सुधर जही या बदल जही .... तहन .... तोर बेटा बर उज्जर नावा सफेद झकाझक कुरता खिलइया कतको तियार हो जही ।  

    हरिशंकर गजानंद देवांगन  छुरा

जावत हे बछर 2020 -जीतेंन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

 जावत हे बछर 2020 -जीतेंन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"


                  मनखे चाहे कतको बलवान हो जाय, फेर सब ले बड़े बलवान होथे समय। देख न इही बछर 2020 ल, जे कोरोना धरके आइस, अउ ज्ञानी, गुणी, धनी,वीर, सबला

अपन आघू घुटका टेके बर मजबूर कर दिस। कइथे महिनत म सब सम्भव हे,फेर यदि समय साथ नइ देय त ,कुछु सम्भव नइ हो सके। ये कोरोना काल म लाखों, करोड़ो मनखे मनके सँजोये कतकोन सपना धरे के धरे  रिहिगे। मनखे पिंजरा के पंछी बरोबर लाकडाउन म, घर म धँधागे।ये आफत सिरिफ हमर देश भर म नही, बल्कि सबे जगत ल झकझोर दिस। रोज कमइया अउ खवइया  बपुरा मनके पेट म डाँका पड़गे। काम धंधा छुटगे, किस्मत फुटगे,अउ सपना घलो टुटगे। रेल अउ बस के पहिया थम गे, लाकडाउन लगे ले, इती उती फँसे, गरीब मनखे मन जुन्ना जुग कस , अपन ठिहा कोती हाथ गोड़ के माँस उकलत अउ लहू फूटत म घलो, रेंगें बर विवस होगे। कतकोन मन रेंगत रेंगत बीच डहर म ही साँस लेय बर छोड़ दिन , त कतको मन अइसन आफत ल नइ झेल सकिस अउ खुदे प्राण ल त्याग दिन।

                लइका मनके पढ़ाई लिखाई घलो राँई छाँई होगे। पढ़ई लिखई करके नोकरी के रद्दा जोहत संगवारी मन बर ए बछर काल बन गे, जे मन एक एक छिन ल कीमती मान के पढ़ाई करिस, वो मन सालभर बर ए साल घरे म बंद होगे। कतको संगी मन अपन पढ़ाई लिखाई ल अउ धार करिस त कतको मन हतास अउ निराश घलो होइन। काबर के डार के चुके बेंदरा अउ आसाढ़ के चुके किसान। वइसे  विवसता तो छोटे बड़े सबे मन झेलिन, फेर मार खाइस तेमा छोट मनखे ही शामिल रहिन, कथे न चिरई कुंदरा ले नइ निकलही त कइसे पलही। उही हाल होगे अइसन लाचार मनखे मनके, उन मन के घर म रहे त खाय। लाकडाउन म टीवी अउ मोबाइल भारी छागे। मनखे मोबाइल म घूस गे। पढ़ाई , लिखाई, गवई, बजई सबे सोसल मीडिया म शुरुवाती समय भारी जोर पकडिस, फेर आखिर म टाँय टाँय फीस घलो होगे। कतकोन तो मोबाइल ल ही अपन दुनिया मान लिन। फेसबुक अउ वाट्सअप म बउरागे।  घर म घलो मनखे परिवार संग एके जघा बइठे बइठे अकेल्ला होगे। चाऊंर दार  कस महँगा डाटा रिचार्ज ल छोटे बड़े सब करिन, अउ अब तो आदत बनगे,नेट बिना नींद घलो नइ आय। डाटा कंपनी वाले मनके बल्ले बल्ले होगे, ग्राहक एकदम से बढ़गे। बढ़े से एक अउ सुरता आवत हे कई वैपारी मनके बढ़वार घलो आहा आफत काल म दिखिस, अउ काबर नइ दिखही?काला बाजारी, जमाखोरी जे होय लगिस। नमक जइसे चीज के अफवाह ले बाजार गरम होगे रिहिस। चाऊंर, दार, तेल, फूल, आलू, प्याज मिलना मुश्किल हो गे रिहिस। अउ मिलत भी रिहिस त मनमाने भाव म। फेर पेट म उभरे भूख के घाव ल भरे बर, का भाव? सबे मजबूर होके बिसाइन अउ कइसनो करके जिनगी बिताइन।

                 बर बिहाव बाजा बैंड बराती सबके बारा बजगे।कलाकार मनके कला कल्हरे बर लग गिस, मजदूर मनके मजदूरी छिनागे। देश विदेश ले मनखे लहुट के अपन कुंदरा, अउ महल अटारी म आगे। कुंदरा म कल्हरई त अटारी म अट्टहास घलो सुनाइस। छोटे बड़े सबके घर मा सिपाही बरोबर सेनेटाइजर नांव के नवा चीज माड़गे। एक बछर एखरे थेभा म निकल गे। शुरू शुरू म कोरोना बैरी आइस त लगत रिहिस कि, ओखर पाँव म जमे जगत हा पलक झपकत समा जही, फेर धीर लगाके बेरा सहज होत गिस, मनखे मनके भयानक डर ह कमती होइस। कथे न भय ह भूत ए, वइसने होइस घलो डरे डर म कतकोन निपट गिन।

टीवी अउ येती वोती कोरोना के हाल बेहास स्थिति ल सुनके अइसे लगत रिहिस कि, कलयुग अबक तबक बस सिरा जही, फेर जाको राखे साँईयाँ मार सके न कोय। अइसन आफत के बेरा मन एक डहर कुछ मनखे मन के  लालच दिखत, त कुछ मन देवदूत बरोबर सेवा घलो करिन।

               एक तरफ मनखे मन लाचार दिखिन, त दुसर डहर प्रकृति म सृंगार। पर्वत, पठार, पेड़, पात, नदी,नाला, हवा, पानी सब सजे बर लग गिन। पशु,पंछी, मनके मनमोहक तान गूँजे बर धर लिस। अइसन होना लगभग असंभव रिहिस, जे कोरोना काल म संभव हो सकिस। येखर साथ साथ बनेच जुन्ना विवादित मुद्दा मन घलो ये बछर पार पाके,जेमा राम मन्दिर निर्माण, धारा 370, 35(A), CAA, अटल टनल, चंद्रयान आदि। कोरोना काल म कई बड़े बड़े हस्ती मन परलोक सिधार गिन, जिंखर भरपाई असम्भव हे। थोर बहुत कोनो खाँसे,छीके त आन मनखे का,सगा सम्बन्धी मन घलो दुरिहाय बर लग जावत रिहिस, जानो मानो सर्दी खाँसी अभिच के बीमारी आय। येखर सेती कतको मन तो डरे के मारे अपन सर्दी खाँसी ल, आन ल नइ बताइन अउ काल के शिकार हो गिन। रोज रोज कोरोना ले होवइया मौत, मतंग मनखे मनके मन म घलो मातम मता दिस। वाह रे बैरी कोरोना, तो झट परे रोना, बछर 2020 ल चुक्ता चाँट डरेस। मन पंछी के पाँख, पिंजरा म धंधाये धंधाये खियागे,त कतको लोभी के पाँख अउ काया मोटागे। ये दे अब तो दिसम्बर घलो जवइया हे,अउ अवइया हे बछर 2021। 2021, इक्कीस रुपिया बरोबर सब बर शुभ होय। अवइया नवा साल म कोरोना बैरी के नामो निशान झन रहे। सबे कोती सुख, शांति, खुशी अउ समृद्धि होय, इही कामना अवइया बछर 2021 ले हे।

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                  बछर 2020 म खोये कुछ महान व्यक्तित्व-


                           वइसे मौत तो मौत ए, फेर बत्तर, चाँटी, माखी, कुकुर, बिलई, बघवा, भलुवा अउ मनखे , सबके मरे म मानवीय संदेवना अलग अलग होथे। मनखे  होय चाहे कोनो जिनावर  दुनो के संवेदना आपसी लगाव म ही जादा होथे। मनखे मन के संवेदना सगा, सम्बन्धी के साथ साथ वो व्यक्ति जेखर ले ओ प्रभावित रथे या फेर जेखर ले श्रद्धा रखथे ओखरो प्रति देखे बर मिलथे। तभे तो राजनेता,अभिनेता,संत, ज्ञानी अउ कोनो महान हस्ती के निधन होय म आँखी छलक जथे। बछर 2020 बैरी बनके आइस, जे छोटे तो छोटे बड़े बड़े हस्ती ल घलो अपन गिरप्त म ले लिस। कोनो आम आदमी के मौत ले ओखर घर परिवार नता रिस्ता अउ  जादा होगे त पास पड़ोसी दुखी होथे। फेर कुछ अइसे मौत होथे जे, सबे ल झकझोर देथे। वइसे तो आना अउ जाना प्रकृति के नियम आय, तभो दुख सबके जाये म होथे,फेर कखरो असमय चल देना, अउ बहुत जादा पीड़ा पहुँचाथे। कला, साहित्य,समाज, राजनीति, खेल, फ़िल्म  सबे क्षेत्र म ए बछर अपूर्णीय क्षति देखे बर मिलिस।हमर बीच ले सदा दिन बर चीर निद्रा म सोये कुछु ऐसे हस्ती के नाम आज मैं श्रद्धांजलि स्वरूप, उन महान हस्ती मन ल नमन करत, रखे बर जावत हँव।

               राजनेता देवी प्रसाद त्रिपाठी, राजनेता अश्विनी कुमार चोपड़ा, साहित्यकार कृष्ण बलदेव वैद्य, साहित्यकार गिरिराज किशोर,राजनीतिज्ञ हंसराज भारद्वाज,फुटबॉल खिलाड़ी प्रदीप बनर्जी, अटॉर्नी जनरल अशोक देसाई, रंगकर्मी उषा गांगुली, सायर राहत इंदौरी, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, राज नेता जसवंत सिंह, राजनेता तरुण गोगोई, राजनेता अहमद पटेल, राजनेता भंवर लाल मेघवाल आदि के संग संग फिल्म सिटी मुम्बई ले अभिनेता इरफान खान, अभिनेता शशि कपूर, संगीतकार गायक एसपी बालासुब्रमण्यम, अभिजीत, सुशांत सिंह राजपुत, प्रेक्षा मेहता,योगेश गौर, सेजल शर्मा, मोहित बघेल, निम्मी, मनमीत ग्रेवाल, साईं गुंडेवार, सफीक अंसारी, अमोस, सचिन कुमार,बासु चटर्जी, कोरियोग्राफर सरोज खान,जगदीप, समीर शर्मा,दिलीप कुमार भटनागर, संजीव कुलकर्णी, चिरंजीवी सरजा आदि मनके अतिरिक्त अउ कई झन महान हस्ती मनके अपूर्णीय क्षति दुखद हे।

            येखर आलावा हमर छत्तीसगढ़ ले घलो कई नेता, साहित्यकार, पत्रकार, समाजसेवी मन हमर ले दुरिहागे, उन सबला घलो सादर नमन अउ  अश्रुपूरित श्रद्धांजलि।

2020 म परलोक सिधारे राजनेता  अजीत जोगी, राज नेता मोतीलाल बोरा, राजनेता झिथरू राम बघेल, अशोक सिंह, धनेश राम राठिया, पत्रकार पूरन साहू, पत्रकार शशिकांत शर्मा,वरिष्ठ पत्रकार अउ सम्पादक ललित सुरजन जी, आकाशवाणी रायपुर के उद्घोषक रामकुमार सिंह, साहित्यकार डॉ गणेश खरे,राजनीतिज्ञ घना राम साहू, महेंद्र सिंह टेकाम, मनोज प्रजापति, पूर्व न्यायाधीश अजय कुमार त्रिपाठी, डी पी धृतलहरे, शोभा सोनी, अमरनाथ अग्रवाल, कैलाश त्रिवेदी, किरण माहेश्वरी, बॉलीवुड के नवोदित कलाकार नेहा साहू,लोककलाकार प्रताप कुरेटी, छालीवुड अउ बॉलीवुड के कलाकार गायक भैया लाल हेड़उ,जर्नलिस्ट आनंद विश्वकर्मा, समाज सेवी बचना राम जी, हीरा सिंह मरकाम, अउ चिकित्सा के क्षेत्र म डॉक्टर बी पी बघेल, डॉक्टर रमेश के संगे सँग स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कन्हैयालाल अग्रवाल जइसे महान हस्ती मन संग अउ कतको अपूर्णीय क्षति ए बछर होइस। धन गँवाथे ल मिल जथे फेर तन एक बार साथ छोड़िस ताहन कभू नइ पास आये, अउ कहूँ  पास रहिथे त सिरिफ सुरता। बैरी बछर 2020 हमर अइसन महान हस्ती मन ल हम सब  ले छीन लिस। 


जीतेंन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को,कोरबा(छग)