Saturday, 14 August 2021

तिरंगा कब ऊँच होही- हरिशंकर गजानन्द देवांगन

 तिरंगा कब ऊँच होही- हरिशंकर गजानन्द देवांगन

                              रिगबिग सिगबिग चारों मुड़ा दिया कस बरत रहय झालर लट्टू । झिमिर झिमिर गिरत पानी बरसात म .. किंजरे बर निकले शंकर भगवान पूछिस – ए काये होवथे पार्वती । पार्वती मइया किथे – तहूँ मन कहींच नइ जानव हो .. पंद्रह अगस्त के भारत आजाद होये रिहीस .. ओकरे खुशी म इहाँ के जनता मन अपन झंडा ल फहराये के तैयारी अऊ बेवस्था करत हे .. मिठई बनावत हें .. नाचत गावत हें । भगवान किथे - खाये पीये नाचे कूदे के बात समझ आगे पार्वती .. फेर झंडा काबर फहराथे .. मे समझेंव निही या । मइया किथे - दुनिया ल देखाथें के .. हमन अजाद हन .. देखव हमर झंडा .. एकर ले ऊँच कहींच निये .. एकर तरी म हमर समृद्धि अऊ खुशी देखव .. कहिथें । भगवान मने मन सोंचत हे - काये काये करथे बिया मन.. इच्छा जागृत होगे जाने अऊ देखे के ।  

                              पंद्रह अगस्त के दिन , बिहिनिया ले .... शंकर जी हा नावा पटका सलूखा पहिरीस अऊ निकलगे । पार्वती मइया हा शंकरजी ल भीड़ भड़क्का म जाये बर बरजिस । फेर भोले बाबा सुनय तब ...... । मइया किथे - नइ मानव तूमन ....... जाये बर जावव फेर .. कुछू उलटा सीधा झिन करहू । शिवजी सभा स्थल तिर पहुंचके .. बइठे के जगा खोजे लागिस । भीड़ भड़क्का म जाये बर पार्वती मइया हा बरजे हे तेकर सेती .. खाली दिखत मंच म चइघगे । उहाँ बींचों बीच एक ठिन बड़े जिनीस चमचम चमकत खाली खुरसी दिखीस .. मोरे बर राखे होही कहिके ... टप्पले बइठगे । भोले बाबा ला देख .. हथियार धरे एक झन मनखे पहुंचगे । भगवान ल लगिस पूजा करे बर आये होही ... ओहा आँखी मूँद लिस । थोरिक बेर म भगवान के आँखी खुलिस त .. अपन आप ल अंधियारी खोली म पइस । अपन देहें म कतको अकन चोट के निसान देखिस ... कपड़ा घला चिरागे रहय । उहाँ ले ड्रेस बदल के फेर पहुंचगे मंच तिर । तभे एक झिन मनखे पहुँचगे ... उही खुरसी म बइठिस .. तइसने म दूसर मनखे घला तिर म आगे अऊ जै जोहार करत बाजू के खुरसी म बइठगे । भगवान जान डरिस .. येमन तो उही आये जेमन .. कुछेच दिन पहिली बड़का खुरसी म बइठे बर लड़त रिहीन अऊ कस के लड़ लीन .. तँहंले कोंटा म जाके समझौता घला कर डरिन के .. कुछ समे तें बइठ .. कुछ समे में .... फेर ....... तोर … मोर या हमर परिवार के अलावा अऊ कन्हो झिन बइठे पाय … एकर ध्यान रखना हे । भगवान जान डरिस के येहा .. बेचरऊहा खुरसी आय .. अऊ ओहा बिगन बिसाये बइठत रिहिस ... तेकर सेती ओला मार पीट के ... काल कोठरी म फटिक दे रिहीन । 

                              भगवान देखत रहय .. बड़का खुरसी वाला मनखे .. एक ठिन बड़े जिनीस खम्बा के तिर म गिस । कोन जनी काये करिस .... सुट ले एक ठिन बड़े जिनीस झंडा ऊँच म लहराये लागिस । जम्मो मनखे खड़े रिहीन । भगवान बइठेच रहय .. कहींच नइ दिखिस .. न समझ अइस । तब भगवान हा नारद ल सुरता करिस । नारद किथे - इहाँ कइसे भगवान ? भगवान किथे - देख तो नारद .. बड़ बिचित्तर खेल चलथे । डोरी म बंधाये .. एक ठिन झंडा ल फहराये के पाछू भजन गइस .. तहँले झंडा देखते देखत करियागे । इहाँ के मनखे मन तो देवता मन ले घला जादा मंतर जानथे तइसे लागथे रे .... । नारद किथे - तैंहा कहींच नइ जानस भगवान .. इहां के मनखे मन जे करतब जानथे .. तेकर पार .. ब्रम्हा घला नइ पा सकय । रिहीस बात झंडा फहराये के .. त सुन भगवान ...... येमन जेन झंडा ल फहराये हे .. उहीच अतेक ऊँच म जाके लहरावत हे । वा .... तेंहा नइ देखे हाबस नारद .. एमन तिरंगिया झंडा फहरइन हे .. फेर ऊँच म करिया झंडा लहरावथे – भगवान फेर पचारिस । नारद किहिस - तैं निच्चट सिधवा अस जी भगवान .. तीन रंग के झंडा फहराये बर केवल आजादी के पहिली मरत रिहीन इहाँ के मनखे मन । जब ले देश आजाद होये हे तब ले .. सब अपन मनपसंद झंडा फहराये अऊ लहराये बर धर लिन ।  तिरंगा देखा के जनता ला ठगथे । भगवान किथे - कोन मनखे आये ओहा .. अऊ काबर अइसने करथें .. मजा बताथँव इँकर .... । नारद जवाब दिस - थोरेच बेर पहिली तोर बहाँ ल हेचकार के .. खुरसी ले उतार दे रिहीस तेला भुलागेस का ? मजा पाये ल धरबे या बताये ल धरबे ते .. मई पिल्ला ला जेल म डार दिही .. जिनगी भर सरत रहिबे .. नंगरा अभिनेता हरस तेंहा .. जींस वाला नोहस .. तेमा कुछ भी करे के छूट मिल जही । नारद बताये लगिस - खुरसी वाला मनखे मन .. जनता ल देखाये बर तिरंगा ल बांधथें .. ओहा बंधायेच रहिथे .. ऊप्पर म इँकर करिया झंडा पहुंचथें .. अऊ उही ल फहराथें । वास्तव म ये .. राजनीति के झंडा आये | ये झंडा के खासियत ये आये के .. जे मनखे एकर तरी म आथें तेहा .. भ्रस्टाचार .. मक्कारी अऊ धोखाबाजी सीख जथे । एकर तरी म भलुक गिनती के मनखे मन रहिथे .. फेर उही मन देस म राज करथें .. अऊ गजब फूलथे फरथे । साधारन मनखे ल एकर दायरा म खुसरे के कनहो अधिकार निये । फेर एकर छाँव के सुख .. एकर तरी म ठाढ़ नइ होवइया .. घला पा जथे ।   

                             भगवान प्रश्न करिस -  त ये तिरंगा काये .. कोन फहराथें एला ? नारद जवाब देवत किहीस - एहा आम जनता बर आये .. उही मन फहराथें .. चल दूसर कोती तोला देखाहूँ .....। दुनों झिन उहाँ ले उच के रेंग दिन । ठईं म .. बड़े जिनीस खम्बा गड़े देखिन ...। ओमन सोंचिन एमा जरूर तिरंगा होही .. झंडा लहर लहर लहरावत रहय .... येमे तो दूये रंग के झंडा रहय .. उहू अलग अलग कपड़ा म । भगवान पूछिस - तैं तो केहे नारद के तीन रंग के झंडा इहाँ के जनता फहराथें कहिके ? नारद किथे - ये जेन झंडा दिखथे भगवान … यहू इहाँ के जनता के नोहे .. ये झंडा साम्प्रदायिकता के झंडा आये .... कभू केसरिया ऊँच होवथे .. कभू हरियर । भगवान पूछथे - त एकर तरी म जनता घला ठाढ़हे हे ? नारद किथे - एमन भटके मनखे आये .. इही झंडा वाला मन .. हमर ले बेहतर कन्हो निये कहिके जनता ल बरगलाके .. अपन उल्लू सोज करे बर .. इही झंडा के तरी म सुकून मिले के सपना देखाथें । 

                             तिरंगा कइसना होथे .. जेला फहराये के लबारी बर अतेक बड़ जश्न मनाथें .. ढमढम करथें .. भगवान के मन म देखे के इच्छा बलवती होगे । भगवान किथे - चल अऊ कहूँ करा .. कहूँ न कहूँ तिर मिलबे करही । नारद किथे - तैं उहाँ जाये के साध झिन कर भगवान ..., तैं जा नइ सकस ओ तिर .... । भगवान किथे - तैं चल तो ... । थोरेच आगू म लामी लामा खम्बा म सफेद झंडा फहरावत दिखिस । नारद बतावत रहय - येहा झूठ , फरेब अऊ बईमानी के झंडा आये भगवान । यहू बड़ ऊँच ऊँच म फहरथे । एकरो चमक दमक अऊ महक बड़ दूरिहा दूरिहा तक बगरे हे । फेर एकर तरी म दूसर ल खुसरे बर सोचे परथे । एकर तरी म केवल एकर फहराने वाला या ओकर परिवार खुसर सकत हे .. तभे तो एला सार्वजनिक नइ फहाराये .. अपन अपन घर म फहराथे । येहा व्यापारिक झंडा आय .. एकर छाँव केवल ओतकेच झिन ल सुख देथे .. जेमन एला फहराये के उदीम करथे ।

                              थोरेच कुन दूरिहा म .. बड़े जिनीस बंदूक के नली के ऊप्पर म .. लाली झंडा फहरावत दिखिस । नारद बतावत रहय – ये आतंक के झंडा आये भगवान । एला कभू उग्रवादी  कभू नकसलवादी त कभू अलगाववादी मन ऊँच करत रहिथे । एकर छाँव कन्हो ल सुकून नइ देवय । फेर केवल अपन बात मनवाये अऊ अपन जिद पूरा करे बर येमन बंदूक म अपन झंडा फहराके दुनिया म अपन नाव ल बगराना चाहथे । एकर तरी कन्हो स्वेच्छा से आना नइ चाहे .. कभू आक्रोश कभू दुख कभू पीरा त कभू स्वारथ त कन्हो मजबूरी म .. ठाड़ हो जथे ।  

                              भगवान कथे - परब तो एमन तिरंगा फहराये के खातिर मनाथे .. फेर कहुँच करा नइ अमरावत हन ओला । अऊ कतका रेंगे लागही नारद ? नारद किथे - तैं काबर साध करत हाबस भगवान .. तिरंगा देखे के ..... । या तो वापिस चल .. या कलेचुप रेंगत रहा मोर संग .. उदुप ले कहूँ तिर मिल सकत हे ..... ये देख में केहेंव न ..... आगे  तिरंगा तइसे लागत हे । या यहू नोहे भगवान , येहा नीला रंग के झंडा आये या येहा गुलाबी होगे .. अरे देखते देखत पिंवरावत घला हे । केऊ रंग बदल डरिस थोरकेच बेरा म । ये झंडा स्वार्थी मन के आय । एकर फहराने वाला सुख पाथे जरूर .. फेर ओकर बर ओला कतको झूठ बोले बर परथे .. केऊ बेर अपन ईमान बेंचथें .. अपन जमीर के हत्या कर देथें । 

                               थोकिन आगू गिन त  भगवान किथे - ये काकर झंडा आये .. कन्हो नइ दिखत हे नारद । नारद बतइस - ये तीर झंडा कहाँ हे भगवान । केवल खम्बा भर खड़े हे । ये अकर्मन्यता के झंडा आये .. जेहा दिखय निही । येला सरकारी कर्मचारी मन फहराथें । ये झंडा के तरी म ठाढ़ होवइया ल बिगन काम बूता करे समृद्धि मिल जथे । इँकर अपन अलग ले कन्हो अस्तित्व निये । समे अनुसार देखाये बर के .. हमन तुँहर कोती हाबन कहिके .. अपन झंडा बदलत रिथे .. फेर उहू दिखय निही के .. काकर झंडा ल फहरावत हे । 

                               भगवान केहे लागिस - अरे बापरे ! थक गेंव नारद । गोड़ पिरागे । तिरंगा देखे के साध म .. अब मोरो शक्ति जवाब देवत हे ।  नारद किथे - थोरेच कुन अऊ सबर कर भगवान ..... , थोरिक आगू म ..... मोला तिरंगा कस दिखत हे । तिरंगा तिर जाये के रसता म ..... माड़ी भर चिखला .. काँटा खूँटी .. उघरा नंगरा खेलत कूदत लइका .. बलकरहा मेहनतकस जवान .. खाँसत खखोरत बइठे सियान .. मुड़ी ढाँके हउँला धरे लजावत रेंगत नावा बहुरिया .. खदर छानी माटी के घर कुरिया .... । भगवान पूछिस - तैं कतिहाँ मोला लेगत हस नारद ? नारद किथे - मे तोला केहे रेहेंव न भगवान .. तेंहा झिन साध कर तिरंगा तिर जाये के , तिरंगा तिर पहुंचे के रद्दा म .. न आजादी के पहिली सुख रिहिस .. न अभू हे .. फेर तोर इच्छा देख लाने बर परिस । भगवान प्रश्न करिस - जेकर मन तिर कहींच निये ते मनखे मन .. का तिरंगा फहरावत होही .. कइसे झंडा ल ऊंच रखत होही .. अऊ कइसे झंडा के सुख के अनुभौ करत होही ............ ? 

                              तभे तिरंगा दिखगे । भगवान खुश होके थपड़ी पीटत किहिस - वा ..... उही तिरंगा आये का जी ? कइसे भुंइया म माढ़हे कस दिखत हे ? नारद बतावथे – नानुक ढारा म लटके हे भगवान ... बने देख । तिर म जाये बर धरिन । भारी भीड़ । जेती देख तेती मनखे के रेलम पेल । हरेक मनखे तिरंगा के छांव म जाना चाहत रहय । भगवान किथे - कइसे करथे बिया मन नारद ...... ? नानुक झंडा , एक कनिक ऊंच ..... कतका छांव मिलही ..... कतेकेच मनखे हमाही ओकर छाँव तरी । ध्यान से देखे लागिस । जे मनखे रहय तेला .. सुख पाये बर .. ओकर तरी जाके ओकर छाँव पाये के आवसकता नइ परय .. धूरिहा रहि के घला ओकर छाँव के कल्पना करइया ला अपने अपन सुकून मिल जाय .. सुख शांति मिल जाय । नारद किथे – इही तिरंगा आये भगवान .. जेला आजादी के बाद ले अभू तक जनता मन , फहरा के राखे हे । ये बात जरूर हे के येला ओमन ऊँच नइ कर सकत हें .. फेर येकर छाँव म जनता बनके रहवइया कन्हो भी मनखे ल .. सुख शांति अऊ सुकून मिलत हे । तिरंगा के सुख पाके .. शंकर भगवान जी अतका बइहागे के .. अपन असली रूप म आगे । ओला देखते साठ जनता ओकरे कोती दउँड़े लगिन अऊ पान फूल चइघाके अपन झंडा ल सबले ऊँच करे के माँग करिन । भगवान प्रसन्न होके किहिन के - बाकी झंडा मन के लंबरदार मन तुँहर सुकून ल देख नइ सकय .. तेकर सेती .. तिरंगा के हक ला .. हकले मारके .. ऊँच होये ले छेंकत हे । जे दिन तूमन जागरूक हो जहू .. जम्मो लबरसट्टा मनला चिन डरहू .. उही दिन सबले पहिली करिया झंडा .. अपने अपन कोन जनी .. कती करा गिर जही तेकर पता नइ चले । करिया झंडा ल गिरत देख .. भटकइया मनके एको झंडा नइ ठहर पाही .. सब्बो तरी ऊप्पर पड़पड़उँवा गिरके भुंइया म हमा जही .. अऊ उही दिन ले देश भर केवल तिरंगा लहराही ... अऊ अतका ऊँच म लहराही के जम्मो धरती एकर खालहे म आके .. एकर छाँव म सुख के अनुभौ करही । 

 हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन .. छुरा

Thursday, 12 August 2021

13 अगस्त : स्व. डॉ. नरेश कुमार वर्मा के 62 वीं जयंती पर विशेष लेख...



















13 अगस्त : स्वर्गीय डॉ. नरेश कुमार वर्मा जी के 62 वीं जयंती पर विशेष लेख...
जनम - 13 अगस्त 1959  

 देहावसान - 27 अप्रैल 2021

छत्तीसगढ़ महतारी बर अपार श्रद्धा रखइया साहित्यकार - नरेश वर्मा 

हमन महान व्यक्ति के जीवनी पढ़थन ता पता चलथे कि वोहर अपन जीवन मा कत्तिक संघर्ष करके आगू बढ़ीस हे. कम सुविधा के बावजूद जब कोनो मनखे हा अपन जीवन मा कुछ करे बर ठान लेथे अउ जब अपन मंजिल ल प्राप्त करथे ता अइसन मनखे हा दूसर मन बर प्रेरणास्रोत बन जाथे. गरीबी ला झेलके आगू बढ़इया मा एक नाँव हवय श्रद्धेय स्वर्गीय डॉ. नरेश कुमार वर्मा जी. स्वर्गीय वर्मा जी गरीब परिवार मा जनम लेके बावजूद प्रोफेसर बनीस अउ अपन कर्म के माध्यम ले दूसर मन बर एक उदाहरण बनके सामने आइस. 
  नरेश कुमार वर्मा के जनम 13 अगस्त 1959 मा बलौदाबाजार जिला मा भाटापारा ले 12 किलोमीटर दूरिहा फरहदा गाँव मा छोटे किसान परिवार मा होय रीहीस. वोकर पिता जी के नाँव उदय राम वर्मा अउ माता जी के नाँव पुनौतिन वर्मा रीहीस हे. वोमन तीन भाई अउ तीन बहन रीहिस हे. तीन भाई मा वोहा सबले बड़े रीहीस हे.
 
    पढ़ाई -लिखाई 

माता -पिता के अनपढ़ अउ आर्थिक समस्या के बावजूद अपन मन ला पढ़ई डहर खूब लगाय राहय. गाँव मा प्राथमिक शिक्षा पूरा करे के बाद मीडिल स्कूल के पढ़ाई जरोद अउ हायर सेकण्डरी के पढाई भाटापारा मा करीस. महासमुंद ले बीटीआई अउ बीए व हिन्दी अउ भूगोल मा एमए बलौदाबाजार ले करीस. राजनांदगॉव के दिग्विजय कॉलेज मा सहायक प्राध्यापक पद मा रहत वोहा हिन्दी मा पीएचडी करीन. 
   1975 मा वोहा बीटीआई महासमुंद ले अध्यापक प्रशिक्षण बर प्रवेश परीक्षा 75 प्रतिशत अंक के साथ उत्तीर्ण की. 

प्राथमिक शाला के शिक्षक ले प्रोफेसर तक के सफर 


 1979 मा शासकीय प्राथमिक शाला वटगन (रायपुर) मा शिक्षक बनके गीस. येखर बाद विश्वविद्यालय के सबो परीक्षा मन ला स्वाधायी छात्र के रुप मा दिलइस अउ उच्च अंक के साथ उत्तीर्ण होत गीस. 
  कॉलेज के प्रोफेसर बनना अपन जीवन के लक्ष्य बनाय रीहीस अउ येला वोहा गजब संघर्ष करके प्राप्त करीन. आर्थिक समस्या ले जूझत अपन रास्त बनइस. जब हिन्दी के सामान्य वर्ग ले  आठ पद बर अखिल भारतीय विज्ञापन आधार मा वोकर नियुक्ति होइस ता अपन लक्ष्य ला प्राप्त करके अपन जीवन के सबले बड़े खुशी प्राप्त करीस. 
   1986 मा ऊंकर नियुक्ति शासकीय माखन लाल चतुर्वेदी महाविद्यालय बाबई (होशंगाबाद)मा हिन्दी के सहायक 
प्राध्यापक पद मा होइस. 1987 मा वोहा दिग्विजय कॉलेज राजनांदगॉव मा स्थानांतरित होके आइस. इहां वोहा जुलाई 2008 तक रीहीन. 21 वर्ष तक ये कॉलेज म टिके रीहीस यहू हा गजब बड़े उपलब्धि रीहीस. 2006 मा वोहा सहायक प्राध्यापक ले प्राध्यापक (हिन्दी) बनगे.  21 वर्ष मा वोहा अपन एक अलग छाप छोड़िस. वोहा महाविद्यालय के शैक्षणिक गतिविधि के सँगे सँग साहित्यिक, सांस्कृतिक अउ राष्ट्रीय सेवा योजना के गतिविधि के जिम्मेदारी ला बने ढंग ले निभाइन. 

    पीएचडी के उपाधि 

  वर्मा जी हा 1992 मा विद्वान  डॉ. गणेश खरे जी (राजनांदगॉव) के प्रेरणा ले डॉ. गीता पाठक के मार्गदर्शन मा " साठोत्तरी हिन्दी कविता में राष्ट्रीय -सामाजिक चेतना "विषय मा पीएचडी के उपाधि प्राप्त करीस.

स्थानांतरण पर हाईकोर्ट ले स्टे लाइस 

छत्तीसगढ़िया व्यक्तित्व के धनी जत्तिक सरल, सहज अउ सरस रीहीस वतकी दृढ़ता के घलो प्रतीक रीहीस. जब साभिमान ला ठेस पहुंचे के नौबत आय ता करिया डोमी कस फूंफकार के अपन मान -मर्यादा के रक्षा करे. 
2007 मा वर्मा जी के स्थानांतरण दिग्विजय कॉलेज राजनांदगॉव ले कवर्धा के नया कॉलेज मा सहायक प्राध्यापक मा करे गीस जबकि वोहा 2006 मा प्राध्यापक बन गे रीहीस. कवर्धा कालेज में हिन्दी में प्राध्यापक के पद नइ रीहीस हे. इहां वर्मा जी हा अपन हक बर लड़ाई करत हाई कोर्ट ले स्टे ला लीस अउ ये प्रकार ले ऊंकर स्थानांतरण रुकगे. वर्मा जी हा शासकीय दिग्विजय स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष रीहीन. 

स्वेच्छा स्थानांतरण मा भाटापारा गीस
   21 साल तक दिग्विजय कॉलेज मा सेवा देय के बाद जुलाई 2008 मा अपन स्थानांतरण अपन जनम भूमि फरहदा के तीर भाटापारा कॉलेज मा करा लीन.  जुलाई 2008 मा साकेत साहित्य परिषद् सुरगी जिला राजनांदगॉव द्वारा दिग्विजय कॉलेज के नवीन सभागार मा विदायी समारोह के आयोजन करे गीस जेमा जेमा जिला भर के तीन दर्जन साहित्यकार मन अपन उपस्थिति देके वर्मा जी के प्रति अपन मया ला उड़ेलिन. उंकर विदायी बेला मा सबके आँखी हा डबडबागे. ये प्रकार ले वर्मा जी हा अपन दृढ़ता अउ दूरदर्शिता ले शासकीय गजानन स्नातकोत्तर महाविद्यालय भाटापारा मा आके सेवा करे लागीस. इहां वोहा हिन्दी विभागाध्यक्ष रहे के सँगे सँग 
2017 मा प्रभारी प्राचार्य घलो रीहीन. कॉलेज मा राष्ट्रीय स्तर के सेमीनार करइस .अपन दूरदर्शिता ले प्रभारी प्राचार्य रहत भाटापारा कॉलेज के नेक का मूल्यांकन कराय मा सफल होइस. ये प्रकार ले  भाटापारा कॉलेज ला नेक से मान्यता प्राप्त कॉलेज के श्रेणी मा आगे. 

विश्वविद्यालय के हिन्दी अध्ययन मंडल के अध्यक्ष बनीस 

श्रद्धेय वर्मा जी के योग्यता अउ विद्वता ला देख के  नवंबर 2020 मा पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर मा हिन्दी अध्ययन मंडल के अध्यक्ष बनाय गे रीहीस. येकर सदस्य पहलीच ले रीहीस हे. 

     साहित्य सेवा 

वर्मा जी हा 1975 ले कविता लिखे के शुरु करीस. महतारी भाखा छत्तीसगढ़ी अउ हिन्दी मा समान रुप ले लिखे हवय. रायपुर के कतको अखबार मा ऊंकर रचना छपिस. छत्तीसगढ़ महतारी के प्रति गजब प्रेम रखइया वर्मा जी हा 1979 मा अलग राज खातिर अपन लहू मा चिट्ठी लिखके छत्तीसगढ़ राज्य के समरथन करीन. 
वर्मा जी के आलेख, शोध पत्र, संस्मरण, समीक्षा, कविता हा कतको राष्ट्रीय अउ स्थानीय पत्र -पत्रिका मा प्रकाशित होत रीहीस हे. उंकर प्रकाशित पुस्तक मा "साठोत्तरी हिन्दी कविता में राष्ट्रीय -सामाजिक चेतना (शोध ग्रन्थ) 1999, "समकालीन हिन्दी कविता और राष्ट्रीय परिदृश्य "
(शोध पत्रिका संपादित) 2000, छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह "माटी महतारी 2001 , पुरातत्व अउ संस्कृति मंत्रालय छत्तीसगढ़ शासन के सहयोग अउ जिला प्रशासन राजनांदगॉव के सहयोग ले 2002 मा "छत्तीसगढ़ की अभिव्यक्ति, इतिहास एवं स्वतंत्रता", 2003 मा "छत्तीसगढ़ की जनभाषा और कथा कंथली " के संपादन,साकेत छत्तीसा भाग -1 (2003),साकेत छत्तीसा भाग -2 (2004),साकेत छत्तीसा -3(2005) के संपादन करीन. समकालीन हिन्दी कविता पर विश्व विद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली के सहयोग ले 2000 मा राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी के आयोजन के दायित्व ला गजब सुग्घर ले निभाइस. लखनउ अउ रायबरेली के अखिल भारतीय कवि सम्मेलन मा भागीदारी करीस. 

   साहित्य सम्मान 

डॉ. वर्मा जी ला साहित्य सेवा खातिर कतको संगठन हा सम्मानित करीस. मध्यांचल कल्याण समिति उत्तरप्रदेश अउ महिला प्रगति संस्थान रायबरेली द्वारा " साहित्य शिरोमणि सम्मान "(1998),साकेत साहित्य परिषद् सुरगी जिला राजनांदगॉव द्वारा " साकेत साहित्य सम्मान "(2002),छत्तीसगढ़ी राजभाषा अउ आदिवासी संस्कृति संस्थान रायपुर द्वारा  "छत्तीसगढ़ी रत्न सम्मान "(26 नवंबर 2007 ) आदर्श युवा संगठन मुड़पार 
(सुरगी)  द्वारा "साहित्य सम्मान "के सँगे सँग कतको संगठन मा सम्मानित करीस. 

नवा प्रतिभा मन ला पलोंदी देवइया साहित्यकार 

वर्मा जी हा नवा लिखइया रचनाकार मन ला गजब पलोन्दी देय के काम करीस. दिग्विजय कॉलेज मा सेवा 
काल के समय साहित्य अउ भाषण कला मा रुचि रखइया छात्र मन ला आगू बढ़े बर मार्गदर्शन करय. राष्ट्रीय सेवा योजना के अधिकारी के रुप मा युवा वर्ग ला रचनात्मक अउ समाज सेवा के कार्य करे बर प्रोत्साहित करीस अउ साहित्य डहर जाय बर रास्ता घलो बतइस. महाविद्यालय मा आयोजित परिचर्चा, भाषण अउ वाद विवाद स्पर्धा, सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता मा विद्यार्थी मन ला भाग लेय बर अब्बड़ प्रोत्साहित करे.  1997 मा आजादी के स्वर्ण जयंती के सुग्घर बेला मा दिग्विजय कॉलेज मा स्वतंत्रता सग्राम पर परिचर्चा आयोजित करे गे रीहीस वोमा मुख्य अतिथि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्रद्धेय कन्हैया लाल अग्रवाल माई पहुना रीहिस. येमा प्रोफेसर मन के सँग महू ला अउ वक्ता सरोज कुमार मेश्राम ला विचार रखे बर बुलाय गे रीहिस. येमा वर्मा जी के ही हाथ रीहिस हे. मेहा उँहा काव्य पाठ घलो करे रेहेंव. कार्यक्रम के संचालन जाने माने वक्ता डॉ. चन्द्रकुमार जैन हा करत रीहिस हे. साकेत साहित्य परिषद् सुरगी के प्रमुख सलाहकार के पद के दायित्व ला सुग्घर ढंग ले निभावत 
येमा जुड़े जम्मो साहित्यकार मन ला अब्बड़ मया दीस. रचना लिखे बर गजब प्रोत्साहित करीस अउ अपन अमूल्य मार्गदर्शन ले नवा रास्ता दिखाइस. साकेत छत्तीसा भाग -1,2, 3(2003,2004,2005) के माध्यम ले नवा रचनाकार मन ला पलोंदी दीस. कार्यक्रम बर आर्थिक सहयोग करके साहित्यकार मन ला संबल प्रदान करय. वर्मा जी हा कॉलेज के प्रोफेसर होय के बावजूद ग्रामीण साहित्यकार मन सँग बहुत सरल,सहज अउ सरस ढंग ले पेश 
आय. कोनो सुझाव ला सुग्घर विनम्र ढंग ले बताय. गुनिक विद्यार्थी मन ला आर्थिक सहयोग घलो करय. 

हमर राजनांदगॉव जिला मा साहित्य के क्षेत्र मा आदरणीय वर्मा जी अउ आदरणीय कुबेर सिंह साहू जी के जोड़ी गजब सुग्घर ढंग ले चलीस. दूनों के जोड़ी हा साकेत साहित्य परिषद् सुरगी ला एक नवा ऊंचाई दीस.
दूनों के सुग्घर प्रयास ले हमर साकेत साहित्य परिषद् सुरगी जिला राजनॉदगॉव के वार्षिक सम्मान समारोह मा अंतरराष्ट्रीय पंथी नर्तक स्व. देवदास बंजारे जी, संत कवि पवन दीवान जी, तत्कालीन उपनेता प्रतिपक्ष अउ वर्तमान मुख्यमंत्री माननीय भपेश बघेल जी, प्रसिद्ध साहित्यकार,डॉ. परदेशी राम वर्मा जी, प्रख्यात भाषाविद् अउ छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार पाठक जी, डॉ. विमल कुमार पाठक जी जइसे साहित्यकार मन हा पहुंच के क्षेत्र के साहित्यकार मन के मान बढ़इस. 






  कतको संगठन मा दायित्व ला निभाइस 

वर्मा जी हा साकेत साहित्य परिषद् सुरगी जिला राजनांदगॉव के प्रमुख सलाहकार, छत्तीसगढ़ हिन्दी साहित्य परिषद् के कार्यक्रम मंत्री, छत्तीसगढ़ी साहित्य परिषद् राजनांदगॉव के जिला संयोजक, राष्ट्र भाषा प्रचार समिति उपाध्यक्ष, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर मा हिन्दी अध्ययन मंडल के अध्यक्ष रहे के सँगे सँग मनवा कुर्मी क्षेत्रीय समाज राजनांदगॉव के अध्यक्ष अउ सर्व कुर्मी समाज के उपाध्यक्ष के दायित्व ला बखूबी निभाइस.

घर परिवार के जिम्मेदारी ला गजब सुग्घर निभाइस 

वर्मा जी हा छोटे किसान परिवार ले रीहीस. अब्बड़ संघर्ष करके आगू बढ़े रीहीस हे. तीन भाई मा सबसे बड़े रीहीस हे. वर्मा जी हा बड़का भाई के फर्ज ला सुग्घर ढंग ले निभाइस. जब वोहा राजनांदगॉव मा पदस्थ रीहीस ता अपन छोटे भाई अउ छोटे बहिनी ला अपन तीर रखके बने पढ़इस -लिखइस .छोटे भाई हा जब दूसर करा काम मा जाय ता अपन गाँव फरहदा मा रोड जगह मा जमीन खरीद के दुकान खोले मा सहयोग करीन अउ आत्म निर्भर बने के प्रेरणा दीस. जब भाटापारा कॉलेज मा स्थानांतरण होके गीस तब हर सप्ताह माता -पिता के दर्शन करे बार अपन गाँव फरहदा 
जरुर जाय. अपन घर परिवार के प्रति वर्मा जी के मन मा अगाध प्रेम राहय.  22 फरवरी 2017 के उंकर माताजी के निधन होइस. 

2018 मा विधानसभा चुनाव के समय अति व्यस्तता मा वर्मा जी के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ीस. 17 नवंबर 2018 मा बीमार पड़गे. रायपुर के मित्तल हास्पिटल मा 17 नवंबर 2018 से 1 जनवरी 2019 तक ईलाज चलीस. इही समय मेहा हमर पुरवाही साहित्य समिति पाटेकोहरा विकासखंड छुरिया जिला राजनॉदगॉव के अध्यक्ष भाई शिव प्रसाद लहरे के संग वर्मा जी ला देखे बर हास्पिटल पहुंचेन. वर्मा जी हा हमर दूनो सँग 
सुग्घर गोठ -बात करीस. वर्मा जी हमर सँग अउ बहुत कुछ बात करना चाहत रीहीस हे पर स्वास्थ्य ला देखत उंकर पुत्र मयंक वर्मा हा जादा बात करे ले रोकीस अउ कीहिस कि ले पापा जब पूरा ठीक हो जाहू ता बहुत अकन बात कर लेहू ता इही जगह वर्मा जी हा कीहीस मेहा ठीक हवँ मयंक. मोला बात करन दे. कई चीज हा कई घांव बतात ले छूट जाथे. वर्मा जी हा इहां अपन कवर्धा स्थानांतरण के बात करत छत्तीसगढ़िया अस्मिता के चर्चा करत रीहीस हे. थोरकुन बात सुने के बाद महू हा केहेंव कि ले सर जी जब आप हा पूरा ठीक हो जाहू ता बहुत सारा बात करबो. अभी आप मन आराम करव. हमन गुरुदेव जी के आशीर्वाद लेके हास्पिटल ले बिदा लेन. 
 ये बीच मा वर्मा जी के स्वास्थ्य हा पूर्णत : ठीक नइ हो पाइस. 20,21,22 अप्रैल 2019 तक मित्तल हास्पिटल मा फेर ईलाज बर भर्ती होइस. 7 जून 2019 के फिर से स्ट्रोक मा अटैक आगे. निमोनिया घलो होगे. ये बीच मा वर्मा जी ला कोनो चीज ला गुटके मा परेशानी होय लागीस. 
12 जुलाई से 12 अगस्त 2019 तक अमलेश्वर मा ईलाज चलीस. 
 13 अगस्त 2019 मा अपन जनम दिन मा कॉलेज ज्वाइन करीस. अक्टूबर 2019 मा बेल्लोर (तमिलनाडु) जांच हेतु ले जाय गीस. उँहा के डॉक्टर मन हा कीहिस कि वर्मा जी आप बने हवव.
  27 मार्च 2021 मा वर्मा जी के पिता जी गुजर गे. वोकर ठीक एक महीना बाद  27 अप्रैल 2021 मा वर्मा जी हा घलो ये दुनियां ला छोड़ दीस. लॉकडाउन के समय कुछ नकारात्मक खबर हा घलो वर्मा जी ला तोड़े के काम करीन . ये बीच मा अपनों अउ 
अपन जान- पहचान के गुजरे ले वोला धक्का लागत गीस. काबर कि पहिली ले वोकर स्वास्थ्य हा पूरा ठीक नइ रीहीस हे. 
वर्मा जी हा अपन यश रुपी शरीर ले हमर बीच जीवित हवय. वर्मा जी पत्नी के नाँव श्रीमती मीना वर्मा, बेटा मयंक वर्मा अउ बेटी भुप्रिया वर्मा हे. श्रद्धेय वर्मा जी हा सरल, मृदुभाषी अउ उदार मनखे रीहीस हे.वोहा भाषाविद्, कुशल संपादक, बड़का विद्वान, दूरदर्शी,स्पष्ट वक्ता अउ छत्तीसगढ़िया व्यक्तित्व के धनी रीहीस हे. महतारी भाखा छत्तीसगढ़ी के बारे मा उंकर कहना राहय कि " छत्तीसगढ़ी मा भाषा के सबो गुन हे. एक दिन वोला भाषा के दर्जा मिलके रहिही. "छत्तीसगढ़िया मन के स्वाभिमान खातिर लड़इया स्व. वर्मा जी ला 62 वीं जयंती पर शत् शत् नमन है. विनम्र श्रद्धांजलि. 

        ओमप्रकाश साहू "अंकुर "
       सुरगी, राजनांदगॉव 
       मो.  7974666840


 


Wednesday, 11 August 2021

गुरुमाता ममतामयी मिनी माता जी* *के सुरता*


 

*गुरुमाता ममतामयी मिनी माता जी* *के सुरता*  


 जब भुँई मं  कोनो अड़चन 

आइस,

 गुरु संतन मुख बात कहिन|

सत कारज सिरजाय खातिर कोनो सतपुरुस अवतार लिहिन ||


ए एक ठन विचार आए 

का सहींच म अइसन होवत होही?

धरती म बहुत अकन महान जीव हंसा मन के जनम भइस |

हमन सुनत पढ़त आवत हवन |

एक ले बढ़ के एक महिमा हे|

कई वीर पुरुस वीर माता  मन अपन नाम के निशान ए धरती म छोड़े हवँय|

आज हमन गुरु माता मिनी माता के पावन स्मृति ल ,जीवन चरित्र ल जाने के कोशिश करबो माता जी के जनम- 13 मार्च 1913 फागुन पुन्नी  के मध्य रात्री म  कांती मय आभा लेहे होइस| महंत बुधारी दास जी के घर म अँजोर होगे| दुनिया म होगे सोर....कोनो 

सतलोक के किरपा आए हे|

माता जी के जनम असम म होइस|

 *जनम स्थान- असम के नुवागाँव जिला के जमुनामुख गाँव म होय रहीस|* 

माता- देवमती पिता बुधारी दास महंत 

माता देव मती के पिता जी 1897 म घोर अकाल परे के कारन चाय बगानम काम करे बररोजी रोटी जिनगी जीये के  विवशता म गइन| बिलास पुर के पंडरिया जमीदारीके सगौना के माल गुजार अघारी दास महंत जी दू बछर के दुकाल म अपन मालगुजारी छ छोड़ पलायन करिन|

प्रकृति के आए आपदा व झेले खातिर बिलास पुर के ठेकेदार के भरोसा करत अपन गाँव ले अपन अर्धांगिनी बुधियारिन अउ तीन बेटी चाउँरमति, देवमति और पारबती ल लेके बिलास पुर आगे|

बिलास पुर ले असम जाय बर रेल गाड़ी म बैठ के जावत रहँय| बीच रद्दा म बड़े बेटी संग छोड़ गइन| माता पिता मन छाती म पथरॎ लदक के

गंगा नदी म उंकर पार्थिव शरीर ल  अरपन करिन| 

असम पहूचत ले छोटे बेटी पारबती भी चलबसिन घात दुख के बोझ म महंत अघारी दास बियाकुल होके ब्रहमपुत्र नदिया म उंकर शरीर ल प्रवाहित करिन|

देव मती अउ अपन दूनो परानी चाय बगान जोहट क्षेत्र पहुँच गे|

चार पाँच बछर गुजरे बाद महंतीन बुधियारिन गुजर गे |बेटी 

देव मति बिमार होगे इही समय म अघारी दास तको गुजर गे| देव मति के देख भाल पालन पोषण अस्पताल के नर्स मन करिन| बड़े होके देव मती के बिहाव बुधारी दास महंत संग होगे| इन दूनो के संतान मीनाक्षी के जनम फागुन पुन्नी के रात म होइस|

मीनाक्षी देवी ल घर म प्यार से मिनी मिनी कहे जावय|

मिनाक्षी बड़े होवत रहय वो कर पिता जी एक ल पढ़ाय- लिखाय के चिंता होय लगिस|

 *शिक्षा* : असम के जमुनामुख जिला म चाय बगान के मालिक के सहयोग ले मीनाक्षी देवी के प्राथमिक शाला म नाव दर्ज होइस| माध्यमिक  स्तर तक इँहे शिक्षा ग्रहण करिन| आप मन ल 

असमिया, बंगला , अँगरेजी ,हिन्दी व छत्तीसगढ़ी के बहुत अच्छा ज्ञान रहिस|

मिनी जी बचपन ले ही कुशाग्र बुद्दी के गंभीर अंतर्मुखी बालिका रहिन|

पर अपन जहुँरिया नोनी मन के अगुवा रहिन|

पढ़त पढ़त सुराज के जानकारी होगे | अँगरेजी सरकार  के शोषण अउ दमन के नीति ल जाने लगिन 1920 के आस पास स्वदेशी आंदोलन के प्रभाव मिनाक्षी ल घलो होगे| उही समय ले खादी कपड़ा धारण करे लगिन| सौम्य और सुशांत मनी मीनाक्षी विदेशी वस्त्र के होली तको जलाइन| 

राष्ट्रीय आंदोलन के सुराग बंगाल असम प्रांत मन म सुलगे लगिस| 

मिनी जी के   किशोरा पन ले युवा पन म पदार्पन होगे| 

 *छत्तीसगढ़ म माता जी के आगमन* 

सन् 1932 म सतनाम पंथ के चौथा वंश धर्म गुरु, गुरुगोसाई श्री अगम दास जी सतनाम धर्म के प्रचार खातिर असम गइन |  असम के जोरहाट क्षेत्र के चाय बगान म काम करवइया बहुत झन मनखे छत्तीसगढ़ ले पलायन कर के काम करे बर आए रहिन | और बहुत से परिवार नुवागाँव , देवगाँव, जमुनामुख, जोरहाट म बस गे रहिन, स्थापित होगे रहीन| एला जाने बर थोकन पिछू के इतिहास ल जाने बर हे| इही समय गुरुगोसाई अगम दास जी हर सतनाम नाम पान, गुरुदीक्षा और सतनाम प्रचार के परमुख उद्देश्य लेके अपन कुछ सहयोगी राज महंत मन संग असम के यात्रा प्रवास म जमुना मुख पहुँचिन और बुधारी दास महंत के घर रुके रहँय| बुधारी दास महंत जी वो समय असम के जोरहाट म एक कुशल किसान हो गय रहिन जउन  लीज म चाय के खेती करवावँय |

बहुत से जरुरतमंद मनखे मन ल अपन चाय बगान म काम दिलावँय| बुधारी दास महंत जी के घर सुशील, सौम्य, विवाह योग्य कन्या मिनाक्षी ल देख गुरु गोसाई अगम दास जी हर अपन जीवन संगिनी बनाय के प्रस्ताव महंत अपन जी पास रखीन| और महंत जी हर बुधारी जी के पास करिन|

गुर जी के ए बात ले बुधारी महंत के सगा -संबंधी परिवार म खुशी छा गए | विहाव मंगल उत्सव म बदल गए ए पावन बेला ले मीनाक्षी देवी गुरु माता हो गइन| मिनी माता कहलाय लगिन| 

गुरु गोसाई गुरु बबा अगम दास जी ,संगे म गुरु माता मिनी माता अउ  राजमहंत मन असम ले बिदा ले रायपुर लौट आइन| रायपुर म भव्य दरबार लग गे |महंत बाड़ा ल सजाय गइस , मंगल पंथी -चौका आयोजन होइस |एक पखवाड़ा तक उत्सव मनाय गइस |गुरु सभा आयोजित होइस, गुरु अनुयायी मन के  दरशन लाभ ले बर मेला लग गए| मांगलिक बेला म माता जी के आगमन ले सतनाम समाज म खुशी के लहर चलगे| महंत और आम जनता मन मेल मिलाप  खातिर घर आते जावत रहँय धीरे ले सबो ल गुरु माता जी जाने पहिचाने लगिन|

ए समय सुतंत्रता के समर चलत रहय| 




 *गृहस्थी सम्हालत स्वतंत्रता आंदोलन म भागीदारी*  सबो रुढ़ि और परंपरा ल तियागत माता जी आगू बढ़िन| वो समय महिला मन केवल चार दिवारी गृहस्थि म जकड़े रहँय| पर उन संत गुरु बाबा घासी दास जी के कुल म परपोता बहु रहिन | जउन छत्तीस गढ़ म मनखे मनखे के अलख जगाय रहिन| नारी पुरुस ल बरोबर बताय रहिन| परिवार म नारी सनमान के कोनो कमी नइ रहिस| गुरु परिवार के बहु होय के नाते पुरा समाज के भार रहय ,अपन गृहस्थी के संग,घर  अवइया जवइया सबो मनखे मन के भोजन प्रसाद के व्यवस्था महंत बाड़ा रायपुर म रहय|

     माता जी के देख रेख म ए सबो गतिविधि मन होवय| इही समय म गुरुबबा अगम दास जी के संग स्वतंत्रता आंदोलन म भाग लेवइया छत्तीसगढ़िया क्रांतिकारी और जन नायक मन के बैठक गुरु जी के घर म , महंत बाड़ा म होवय | क्रांति कारी गति विधि मन के संचालन के रणनीति बनय| पंडित सुंदर लाल शर्मा जी, ठाकुर प्यारे लाल सिंह जी, डाॕ राधा बाई, पंडित रविशंकर शुक्ल जी जइसन परमुख राजनइक मन के संग गुरु बा अगम दास जी के घर म अंगरेज मन के विरुद आंदोलन के योजना बनय | माता जी ल ए सब क्रांतिकारी गति विधि मन के संज्ञान रहय कइ - कइ  परमुख रणनिती म माता जी के सक्रिय भूमिका रहय| गुरुबबा अगम दास जी के सानिध्य म रहि के अपन व्यक्तित्व ल समृद्ध करे म बहुत सहयोग मिलय|  सुराज पाये बर समाज के बेटामन ल गुरुगोसाई के संग सियम माता जी हर तको अहवान करँय,प्रेरित करँय| सबो समाज के नवयुवक मन सुराज लाय बर रास्ट्रीय सुराज दल के गतिविधि म शामिल होवँय | उमन के संरक्षण माता जी अपन अँचरा म छ इहा देवत पुत्रवत  असीस देवय| ए समय माता जी के सुपुत्रय विजय गुरुजी गोदी म रहिन| वात्सल्य के असीस और स्नेह सबो क्रांति कारी मन ल मिलय|गुरु गोसाई अगम दास जी के अगुवइ म सतनाम समाज के अनगिनत जुझारू बेटा मन सुराज लाय खातिर जूझ गंय | इतिहास के पन्ना म दब गंय| उनकर नाम इतिहास म लिखे के जरुरत हे|

गुरुबाबा अगम दास जी के सुरता नइ बिसरावय 


 *गुरुगोसाई अगम दास जी, सतनामी के शान|* 

 *कुल सतनामी पहली सांसद, बाबा तोरे मान||* 


 *वीर सुराजी मुखिया बनके, रहे देश के साथ|* 

 *क्रांतीकारी सैनिक मनके , राहय मुड़ मा हाथ||* 


 *पंडित सुंदर माधव छेदी, रोज करँय संवाद|* 

 *क्रांतीकारी गुनके कारन, लेवँय आशीर्वाद* ||

 

 *जनहितकारी तँय उपकारी, बाड़ा देदे दान|* 

 *जुग जुग गाही देश-राज हर, तोरे जी गुनगान||* 


 *सतनामी आरुग सतनामी, जानय जग संसार|* 

 *रस्दा बने बताये बाबा, सदा हवय उपकार* || 


 *महतारी छत्तीसगढ़ बर, तँय बने सुत्र धार|* 

 *सपना होही पूरा हमरो, लाने नवा विचार* ||

 *

 *सपना अब सपना झन राहय, बाँटय हक अधिकार|** 

 *आजो ले संघर्ष के झंडा, फहरे हर घर द्वार|* 


 *राजनितिक म  पदार्पण* 

     देश ल  स्वतंत्रता बड़ संघर्ष के बाद मिलिस| गुरुबाबा अगम दास जी संसद सदस्य मनोनित होइन| दिल्ली तक गुरु बाबा के नाव बगरे रहय | पर नियति ल कुछ अलगे मंजूर रहय| स्वतंत्रता पाय के तीन बछर बाद असमय गुरु बाबा जी के सन्1952 म सतलोक गमन होगय | माता जी ऊपर दुख के पहाड़ टूट गे अइसे कलुस समय तको आइस| सबो समाज म  शोक के लहरा बोहाय लागिस| जनमन के  पुकार ल सुनत और वो समय के परमुख राजनइक  पंडित रविशंकर जी के

निवेदन ले  गुरु माता जी अपन राज अउ देश, समाज के पीरा ल सरेखत अपन सियम ल संभालत आगू आइन और अपन अदम्य साहँस के बल म गुरु बाबा जी के राजनितिक कारज के बागडोर ल समहारे के महान् उदिम करिन माता जी के ए कदम ले सबो समाज उत्साहित होइस| और छत्तीसगढ़िया अस्मिता अउ संरक्षण के जिम्मेदारी एक बेर फिर गुरु माता जी के सिर म आइस| 1955 के  उपचुनाव म मिनी माता जी प्रचंड बहुमत 60% से भी अधिक मत के एतिहासिक जीत दर्ज करिवइया सांसद बनिन|  *अउ छत्तीसगढ़ के पहिली महिला सांसद बन के एक मिशाल स्थापित करिन* | *ए बहुत बड़े गर्व और सम्मान के धरोहर बात बनगे|* *सबो समाज के महिला मन बर आगू बढ़े के रद्दा खुल गे|* अइसन उपलब्धि ले राज समॎज सबो के मस्तक गरभ ले ऊँच होइस| ए सिलसिला लगातार चार पंचवर्षी 1952 ले 1972 तक चलिस| गुरु माता मिनी माता जी पाँच बार एसेम्बली के चुनाव जीत. के एक आलग कीर्तिमानस्थापित करिन | एहर तको आजयतक एक एतिहासिक रिकार्ड आए| पर आज बहुत दुख होथे के माता जी के विरासत ल आगू बढवार करे बर अऊ कोनो विदुषी छत्तीसगढ़ म नइ दिखत हें|

गुरु माता जी के राजनितिक छवि देश के पुर्व प्रधान मंत्री स्व. इंदिरा गाँधी बर तको प्रेरना बनिस| संसद म  पंडित जवाहर लाल नेहरू जी , सरदार पटेल जी , श्रीमति इंदिरा जी मन के आत्मीय संबंध रहिस| *राष्ट्रपति डाॕ राजेंद प्रसाद जी गुरु माता मिनी माता जी के साफ सुथरी और प्रभावपूर्ण व्यक्तित्व को देख - समझ मध्य क्षेत्र की संरक्षिका के* *उपाधी दे रहिन|* 

गुरु माता जी दुर्ग- रायपुर - बिलास पुर संयुक्त संसदीय क्षेत्र ज उन वो समर सबले बड़े मध्य प्रदेश के सबले बड़े संसदीय क्षेत्र मन म एक अलग पहिचान रहय |

दू बखत सांसद रहिन| सारंग गढ़ संसदीय अतराप  और जांगी चापा से भी संसद म चुन के गइन एखर से सिद्ध होथे के गुरु माता मिनी माता जी संपूर्ण छत्तीसगढ़िया समाज के प्रतिनिधि रहिन| जन मानस म माता जी के लिएअपार श्रद्धा और सम्मान रहिस|

बदला म माता जी भी अपन प्रदेश के जनता के हर समस्या ल संसद तक जिम्मेदारी पुर्वक रखत रहिन|

और उनकर हक अधिकार खातिर लड़त रहिन|

छत्तीसगढ़िया मन के हक अधिकार बर अपने राजनीतिक दल ले बहस करँय , उलझ हावँय जब तक नियाय नइ हो जातिस| संसद म दहाड़ के अपन राज के अधिकार बर बात रखय , विधेयक पारित करवावँय|




 *ममतामयी काबर  कहाइन* मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ के दिल्ली म पढ़ई करे जवइया लइका मन और आने कोनो कारज खातिर दिल्ली जव इया मन मिनी माता के अवास म अपन घर बरोबर मान पावँय एक दू  के रहव इया मन चार दिन रही जावँय| 

    माता जी सबो बर भोजन परसाद के इंतिजाम करवातिन|

दिल्ली म खूब ठंड पड़य | माता जी जरुरत मंद हर मनखे मन ल कंबल ओढ़ावँय | एक बखत के बात हे रात के समय हाड़ कपउ ठंड में एक झन पढ़इया बच्चा बिना ओढ़े  सोय रहय| माता जी देखिन उनकर हृदय द्रवित होगय  दया भाव ममता ले भरगे अपन ओढ़े के कम्बल ल वो बच्चा ल ओढ़ा देइन |और स्वयं बिना कम्बल रहिन, जड़काला ल बजे खातिर सिगड़ी के सहारा ले इन पर उनकर कमरा म अधिक धुआँ होय के कारन बेहोश के  अस्वस्थ होगँय | बनेच दिन उपचार के बाद

धीरे - धीरे ठीक होइन| अइसन तियाग समरपन और वात्सल्य के मूरत रहिन|तव ममताग मयी मिनी माता कहलाइन|

*मजदूर अउ श्रमिक मन के हक के खातिर करे गए प्रयास -* 

दूसरा पंचवर्षीय योजना अंतरगत 

1955-56 म भिलाई स्पात संयंत्र के स्थापना करवाय म महत्व पूरण भूमिका माता जी के भी रहिस| एक समय अइसे होइस के 

भिलाई के लोहा कारखाना ले मजदूर मन के छटनी कर दे गइस माता जी लगातार चालीस दिन धरना म बैठ गइन  | जब मजदूर मन ल हक मिलिस तब अपन मजदूर आंदोलन ल वापिस लेइन| अइसन परित्याग और समरपन के प्रतिमूर्ति रहिन| श्रमिक मन के प्रशिक्षण और ट्रेनिंग खातिर औद्योगिक इकाई पालिटेकनिक कालेज , उनकर लइका मन बर पाठशाला, उनकर स्वास्थ खातिर अस्पताल के निर्माण म महती भूमिका निभाइन|

मजदूर और श्रमिक मन के  संरक्षण खातिर मजदूर संघ के निर्माण करिन सियम अध्यक्षता करिन|संगे संग करमचारी आवास बर भूमि उपलब्ध करवाइन|अपन 

अंचल के, छत्तीसगढ़ी अतराप के लोगन मन ल अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाइन| 


 *हे ममता मयी मिनी माता, जब सुरता तोरे आही|* 

 *आँखी ले तर तर तर दाई, आँसू मोरे बोहाही||* 


जिनगी भर बड़ टोरे तन ला, लड़े लड़ाई तँय भारी|

तभे हमन बन पाये हावन, छोटे मोटे अधिकारी||


बांध बनाये हिम्मत देके, छत्तीसगढ़हिन महतारी|

बाढ़िस हावय फसल सियारी, भागिस दुख के अँधियारी||


 *महिला मन बर रसदा बनगे, शिक्षा पाइन हितकारी|* *

 *तोर दया ले पढ़े लिखे बर, आगे बाढ़िन हे नारी||** 


तन बर बस्तर मन भर खाना, घर घर परचम लहराये|

हक अधिकार दिलाके दाई, भाग सबो के सहँराये||


जोर लगा के भेलाईमा, कलखाना तँय खुलवाये|

छत्तीसगढ़िया बेटा मन ला, रोजगार तँय दिलवाये||


संसद मा तँय खड़े रहे माँ, ममता राखे गुन भारी|

बिलख बिलख के रोवत हावन, सुरता मारे हुदकारी|| *


 *भेद मिटाये मनखे तन के, करे जगत ले रखवारी|** 

 *हाथ धरे तँय सुमता लाये, शोषित दुखिया सँगवारी||* 


 *छत्तीसगढ़ के निर्माण में योगदान:* छत्तीसगढ़िया समाज ल एकजइ  करतउंकर हक व अधिकार दिलाय बर , छत्तीसगढ़ के धन संपदा के समुचित दोहन कर समृद्धि खातिर अलग छत्तीसगढ़ी राज्य के मांग रखिन|

माता जी पहिली पहल महिला के रुप म राष्ट्रीय पटल म छत्तीसगढ़िया राज के प्रस्ताव रखवइया आवँय|

अइसन स्वपन्दृष्टा मन के असीस ले आज अपन राज के सपना सकार होगे पर उनकर समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ बने के सपना अभी अधुरा हवय| अवइया समय म  माता जी के मानवतावादी विचार और सद्भावना ले के चले के प्रेरणा ले भाईचारा स्थापित करत  पूरा करे बर लगही| उनमन जनमानस म आदर्श के जब्बर मिशाल रखिन| एक नारी होके हमन ल उपकृत करिन, उंकर हर सपना बज्जूर सुफल होही, हमन ल संगठित होके प्रयास करे के घात जरुरत हे|

*सामॎजिक चेतना व समाज उत्थान म करे गए काम*  सामाजिक सदभाव उंकर गहना रहिस | सबो समाज माता जी के कार्य शैली के मुरीद रहिन|

अधिकांश समय माता जी के अपन सेवा क्षेत्र | 

गुरुवइन डबरी काण्ड हर माता जी के हृदय म जबर अघात करिस| तव माता जी ल अपन शक्तिरूप म आय ल परगे| अउ

 शेरनी कस संसद म दहाड़त कहिन मोर ल इका मन कोनो गाजर मुर ई नोहे जिन निरापराध अबोध मन ल मारे काटे जावत हे|

गुरु माता के दखल ले वो क्षेत्र मुँगेली अतराप म होवत हिंसा शांत होइस| 

 *महिला उत्थान बर समरपन-* बालिका शिक्षा ल जन जन तक लेके जावँय |

आम जनता ल समझावँय | कमजोर आर्थिक परिस्थिति के प्रतिभावान बालिका मन ल अपन सियम के खर्चा ले पढा़इन | कतकोन मन डाक्टर ,इंजिनियर, प्रोफेसर और आने आने विभाग म नौकरी पाइन| गुरु माता जी के उपकार ल जिनगी भर बड़ सहरावत हें|  पूज्यनीय गुरु माता जी के कृपा ले कई पीढ़ी सुधर गे| कउनो दिन भी  उंकर अवदान ल भुला नइ जा सके|


 *किसान मन के पीरा हरे के उदिम*  आय दिन अकाल और सूखा पड़य प्रकृति के मार ल झेले ल पड़य | असाय किसान मन के पीरा ल ममता मयी मिनी माता जी जानत रहँय | उंकर खेती किसानी के गिरत दशा के चिंता माता जी ल बेचैन करदिस |एक बार बरसात के समर अपन क्षेत्र के दौरा करत जांजगीर - चापा के ग्रामीण अतराप म गे रहँय | हसदो नदी म खूब बाढ़ होय के कारन आवागमन बाधित रहय| अतेक पानी गिरे के बाद भी किसान मन ल सिंचाई के असली समय म पानी नइ मिल पावय | माता जी के मन म ए बात घर कर गे अतेक बरषा ले भी हमर किसान ल पर्याप्त पानी सही समय म नइ मिल पावय | तव ततकालिन समे के प्रधान मंत्री पंडित नेहरू जी ल ए समस्या ले अवगत करवाइन| 

अव बांगो बांध के नेव धरावत ले धीर नइ धरीन | अपन अनवरत प्रयास ले बांगो बांधा के निर्माण करवा के रहीन| ऐसे प्रतिबद्ध होके कारज मन ल सिधोवँय|

आज उंकर बनाय हर रद्दा जगरमगर होवत हे|


 *शिक्षा अउ नव युवक मन के ** *रोजगार खातिर उनकर संघर्ष** अपन कार्य काल म प्राथमिक, माध्यमिकऔर  उच्च शिक्षा के बहुत अकन संस्थान के दरवइ रखवाइन| खेति किसानी, निर्माण, औद्योगिक क्षेत्र के संग शिक्षा ल परमुखता ले बगरायवत समाज ल जागृत करँय|


 

 *सामाजिक उत्थान* 

समाज म व्याप्त कुरिती, छुआछूत,  अस्पृश्यता के निवारण और निदान खातिर संसद म 1955 म अस्पृशयता निवारण कानून पारित करवाइन| सबो मानव समाज के विद्यालय  मंदिर ,धर्मशाला , सार्वजनिक क्षेत्र अउ उपक्रम म आवाजाही सुगम होइस| समता, सदभावना और मानवता के पुरजोर समर्थक रहिन|

 *धार्मिक कार्य* माता जी समता वादी सोंच के अग्रदूत रहिन|

सबो धर्म ल सम्मान देवँय| मानवतावादी पक्ष लसदैव मनसे मनके बीच  रेखांकित करँय | 

भाईचारा ले रहे बर आहवान करँय| फिर भी कुछ उतार चढ़ाव हो जाय म सबो पक्षकार मन ल समझावँय | नहीं माने म ढाल बनके आगू आवँय| सतनाम धरम के ध्वज वाहक होय खातिर सत, अहिंसा और आपसी भाई चारा के परिपोषक रहिन| सतधाम मन के देख रेख और 

सतनाम पंथ और धरम के संरक्षण के कारज ल अपन जिनगी ले दुरिहा नइ होवन देहिन|

    संतशिरोमणी सदगुरु बाबा घासी दास जी के जन्म स्थली 

गिरौधपुरी पावन धाम, तपो भूमि , धर्म स्थल के संरक्षण बर महंत कमेटी के निर्माण करवाइन| मेला के समय दर्शनार्थी ,श्रद्धालू मन बर समुचित पेल जल सड़क व आवास के संस्थापना करवाइन|

पहली मेला माघ पुन्नी म भरय वही समयमेला शिवरी नारायण तुरतुरिया म घलो लगय | 

धार्मिक सदभाव रखते हुए फागुन पंचमी से सप्तमी तक आयोजित करवाय म महती योगदान हे|

गुरु माता जी के सर्व धर्म समाज बर समर्पित जिनगी के बखान करना हमर बस म नइ हे |


 *गौरव -सम्मान* 

गुरु माता जी केभारत , मध्य प्रदेश अउ  छत्तीसगढ़ म अवदान ल 

समझत राज्य सरकार हर 

छत्तीसगढ़ राज बने के समय विधान सभा भवन के नाम 

मिनिमाता जी के नाम रख के 

बढ़िया भावांजली देहे रहिन|

हसदो बांगो बांधा हर माता जी के नाव देहे गे हवय| राज्य शासन हर 

महिला उत्थान के क्षेत्र म उल्लेखनीय काम करवइया महिला पुरुष या संस्था ल सम्मानित करे के उदिम जरुर करे हे| पर ए पर्यापप्त नइ हे|

माता जी के जीवन वृत्त ल पाठ्यक्रम म शामील करना चाही| जेखर ले बालिका अउ महिला सशक्तीकरण खातिर माता जी के करे गे कारज म बढ़वार होवय|

 *सतलोक गमन* 

गुरु माता जी छत्तीसगढ़ और 

छत्तीसगढ़िया अस्मिता के मान खातिर सदैव तत्पर रहँय | संसद के कुछ जरुरी कारज ल संपन्न करे खातिर दिल्ली म बैठक रहय| पर प्रकृति और नियति शाश्वत  सत्य आए, जहाँ कुछ अलग चलत रहय,माता जी दिल्ली जाय बर भोपाल से रवाना होइन दिल्ली पहुँचे के बाद पालम हवाई अड्डा के समीप विमान हादसा म माता जी के सतलोक गमन होगय|

आज भी विश्वास न इ होवय के माता जी हमर बीच नइहे, पर उनकर आसीस सतलोक ले हमर छत्तीसगढ़ और  छत्तीसगढ़िया समाज बर सदैव बरसत हे|

गुरु माता जी की समाधी खडुआ पुरी धाम मे स्थित है| गुरुगोसाई गुरुबाबा अगम दास जी के समाधी  के बाजू म | ए पावन धाम खडुआ सिमगा के समीप दू मील दूरी म अवस्थित हे| खडुआ धाम सतनाम धर्म पंथ के परमुख आस्था पावन स्थली हे|

 *मन आजो कहिथे* 


 *मिनी माता- मिनी माता कराथौं पुकार ** 

*दाई सुन ले गोहार* ....* 


 *कोन बन -डोंगरी लुकाय हव* 

 *होगे जग अँधियार.....*

 *कोन धाम पुरी म लुकाय हव....* 

🙏🙏🙏🙏

आलेख 

अश्वनी कोसरे रहँगिया

कवर्धा कबीरधाम

छत्तीसगढ़

Sunday, 8 August 2021

बड़का तिहार हरेली-विजेन्द्र वर्मा


 

बड़का तिहार हरेली-विजेन्द्र वर्मा


हमर परंपरा अउ संस्कीरिति ले जुड़े छत्तीसगढ़िया मन के बड़का तिहार हरेली सावन महिना के अँधियारी पाख अमावस के दिन बड़ धूमधाम ले मनाथे। प्रकृति ले जुड़े खेती किसानी करइया किसान मन बर तो येकर ले बड़े कोनों तिहार नइ हो सकय। सावन महीना मा प्रकृति अपन पूरा शबाब मा रहिथे। चारों मुड़ा हरियर हरियर, रुख राई, डारा पाना, खेत खार उँचास भरत।कुँआ,तरिया,नदियाँ छलकत,सबो जीव जंतु मन मगन झूमत रहिथे। किसान मन के तको खुशी के ठिकाना नइ राहय।

*महिनत सन मँय बदेव मितानी*

*तोर भरोसा मा करथव किसानी*

खेत मा धान बियासे के काम अउ रोपा लगा के थोकिन फुरसत मिलथे।हरेली तिहार के दिन किसनहा मनखे मन अपन नाँगर बख्खर,राँपा,गैंती,रपली,आरी बसूला,टँगिया,कुदारी,अउ जतका किसानी काम मा जेन लोहा के अउजार काम आथे तेला धो माँज के अँगना मा मुरम के पाट बना के जम्मो अउजार ला वोमेर रख के पूजा पाठ करथे,सबो काम तुँहर किरपा ले बने बने होगे कइके आशीष माँगथे। बइला भइसा ला धो के अपन कुल देवी देवता के पूजा के संगे संग बइला मन के तको पूजा करथे।रिकिम रिकिम के खाई खजाना के संगे संग गुड़हा चीला,गुलगुला भजिया दाई माई मन बनाथे।अउ येकर भोग कुल देवी देवता के साथ किसानी अउजार मा तको चढ़ाथे।

*नाँगर बइला राँपा अउ कुदारी*

*इही तो किसान के हवै सँगवारी*

ये दिन राउत मन हा गाय गरवा बर गेहूँ पिसान के लोंदी मा नून,बरगंडा के पान अउ जड़ी बूँटी मिला के गाय गरवा बइला भइसा ला खवाथे।येकर पाछू इही बात हे कोनों रोग राई माल मता ला झन होवय कहिके।

गाँव मा घरो घर लुहार मन हा नीम के डारा ल घर घर के मुँहाटी मा खोचथे।नीम के पत्ती ला कीटाणु नाशक मानथे ओकरे सेती रोग हा घर दुवारी मा मत फटकय कहिके खोचथे।हमर जुन्ना परंपरा हे जेन पुरखा मन ले चले आवत हे।गाँव मा कोनों प्रकार के विपदा झन आवय कहिके बइगा हा मंत्र जाप ले गाँव के चारों दिशा ला पान फूल,नरियर चढ़ा के बाँधथे।

अउ इही दिन तो बइगा मन अपन मंत्र ला जागृत करे बर मंत्र जाप अउ पाठ करथे।नवा नवा मंत्र सिखइया चेला तको बनाथे।गाँव मा अइसन उछाह, हमर सियान मन हा लइका मन बर गेंड़ी तको बनाथे।बाँस के डंडा अउ बूच डोरी मा खपच्ची हा बँधाय,पाँव रखे के खपच्ची मा मजा लेय बर माटी तेल तको डालथे।जब लइका मन गेंड़ी चढ़थे त रचरिच रचरिच बाजथे,अउ बिकट मजा इही मा लेवत रहिथे। लइका मन तो गेंड़ी दउँड़ मा अपन करतब दिखावत मजा लेत रहिथे।हरेली एक अइसे तिहार ये जेमे किसान,मजदूर,लइका, सियान,नोनी,बाबू सबो ला अगोरा रहिथे।दोपहर बइला दउँड़,भाठा मा नोनी मन के फुँगड़ी,खो-खो,कबड्डी देखइया मन के भीड़ उमड़े रहिथे।अइसन जुड़ाव कोनों तिहार मा देखे बर नइ  मिलय।आजकल शहर के लइका लोग मन बर तो किस्सा कहिनी होगे हे।हमर जुन्ना परंपरा नँदाय कस लागथे, हमन ला अपन लइका लोग मन ला ये बड़का तिहार हरेली के महत्ता ला बताय ले परही तभे हमन अपन संस्कृति अउ परंपरा के रक्षा कर पाबो।इही बड़का तिहार ले तो हमर मन के तिहार मनई के शुरुआत होथे।

*चढ़व गेड़ी,खेलव फुँगड़ी,भौंरा अउ बाँटी।*

*आगे तिहार हरेली,ममहात हे हमर माटी।*

विजेन्द्र वर्मा

नगरगाँव(धरसीवाँ)

खेती किसानी ले जुड़े़ तिहार हरे हरेली ओमप्रकाश अंकुर




 खेती किसानी ले जुड़े़ तिहार हरे हरेली 

ओमप्रकाश अंकुर

हमर छत्तीसगढ़ हा कृषि प्रधान राज्य हरे. हमर प्रदेश के किसान मन धान के खेती जादा करथे.एकर सेति  छत्तीसगढ़ ला धान के कटोरा कहे जथे. इहाँ के कतको तिहार बार हा खेती किसानी ले जुड़े हवय. अक्ती तिहार हा धान बोवाई के संकेत हरय ता हरेली परब हा धान के सुग्घर हरियरपन दिखे के प्रतीक हरय. 


  हरेली तिहार हा सावन अमावस मा मनाय जथे. आषाढ़ मा किसान हा धान बोवाई के काम चालू कर देथे. जउन किसान मन के पास खुद के पास बोर, नदी, डेम ले पानी मिले के आसा नहिं रहय वोमन बोयता पद्धति ले धान बोथे. आज कल खेती किसानी मा बइला फंदाय नांगर के प्रयोग एकदम कम होगे हे. आज कल हर काम हा जल्दी मा होवत हवय. नांगर के जगह ला अब ट्रेक्टर हा ले डरे हवय. अब बहुत कम किसान मन हा बइला रखे हवय. खेत मा बइला अउ नांगर ला देखे बर आँखी तरस जथे. अइसे लगथे धीरे ले नांगर हा नंदा जही. पहिली बइला ला फांद के दंतारी अऊ पाटा चलाय जाय. अब ये सब ला ट्रेक्टर हा कर देथे. 


   जउन किसान मन के पास हाथ मा पानी रहिथे. बोर, नदी, बांध ले पानी खींच के पलो डलथे. अइसन किसान मन हा परहा पद्धति ले धान बोथे. एकर बर पहिली ले खेत के कोनो भी जगह धान के थरहा लगा देय रहिथे. जब थरहा हा लगाय के लइक हो जथे ता खेत ला बढ़िया जोत - मंताके ,पाटा मा बरोबर करके परहा लगाया जथे. अभी ए काम ला बनिहार मन हा करत हवय. का पता कल जाके यहू काम ला घलो सिरिफ मशीन हा करे ला लग जही. 


  आज कल आधुनिक तरीका ले खेती होवत हवय. पहिली गोबर खातू के उपयोग जादा करय. अब बहुत साल होगे हे रासायनिक खाद यूरिया, डीएपी, पोटास के गजब उपयोग करे जथे. बन ला मारे बर निंदानाशक दवा के छिड़काव करे जथे. बनिहार मन के काम हा कम होवत जावत हवय तभो ले बनिहार नहिं मिलय. खेती किसानी  करे मा बनिहार के समस्या हा गहरात जावत हवय. एक दू रुपया किलो चऊंर के सुविधा अउ खेती किसानी काम के प्रति लोगन मन के उदासीनता हा एकर प्रमुख कारण हरय. 


आवव अब हरेली तिहार के बात करथन. ये तिहार हा अइसे समय मा मनाय जथे जब खेत मा धान के फसल हा लहलहाय ला लग जथे. बोयता पद्धति के धान के बियासी हो जथे. कुछ बचे घलो रहिथे. वइसने परहा पद्धति के धान हा घलो सुग्घर ढंग ले पोठ दिखे ला लगथे. 


  ये तिहार ले किसान मन के संगे संग बइला -भईंसा के थके हरे जांगर ला सुसताय ला मिल जथे. खेती किसानी मा कट -कट काम करे ला पड़थे. खेती अपन सेती  कहे गेहे. ये तिहार मनाय से किसान, बनिहार मन ला कम से कम एक दिन आराम मिल जाथे. 


ए समय खेती किसानी मा प्रयोग होने वाला अवजार नांगर -बख्खर, पाटा, दंंतारी, रापा, कुदारी, गैंती, टंगिया, बसुला, भंवारी, हंसिया, साबर, तुतारी अउ अब नवा जमाना मा ट्रेक्टर,अ टिपर, हार्वेस्टर के पूजा करे जथे. घर के दुवार मा सुग्घर ढंग ले मुरमी डाल के ये अवजार मन ला रखे जथे. अब दुवार मा घलो पथरा लग गेहे ता कतको मन मुरमी नहिं डोहारय. सुग्घर ढंग ले किसान परिवार हूम -धूप ,फूल, दीया, अगरबत्ती के उपयोग कर पूजा करथे. पिसान के लेप बनाके जम्मो अवजार मा लगाथे. चीला चढ़ाय जथे. पशु धन बइला, गाय, भईंसा के पूजा करे जथे. ए दिन राउत मन गाय, बइला, भईंसा ला जड़ी बूटी से बने दवई खिलाथे. साथ मा किसान मन घलो आटा से बनाय लोंदी जउन में  नून घलो डलाय रहिथे. येला पशु धन ला खिलाथे. बरसात मा पशु धन के बीमार पड़े के संभावना जादा रहिथे. जड़ी बूटी अउ लोंदी हा हमर पशु धन के रोग प्रतिरोधक क्षमता ला बढ़ाथे अउ स्वस्थ रखथे. किसान मन राउत ला चांवल, दाल, नमक, मिर्च अउ जउन बन पड़े भेंट करथे. 


हरेली तिहार के दिन लोगन मन मा गजब उछाह रहिथे. घरो घर चीला, बरा, सोहारी, भजिया, अरसा, कटवा रोटी चुरथे. अपन घर परिवार अउ अड़ोस पड़ोस ला खाय बर बुलाथे. एकर ले मेल मिलाप अउ आपस मा भाई चारा के भावना हा बढ़थे. लईका मन के संगे संग बड़का मन घलो गेंड़ी मा चढ़ के मजा लेथे . पहिली गाँव के गली मा गजब चिखला रहय. एकर से बचे बर गेड़ी हा काम आय. आज कल अब गली के क्रांकीटीकरण होगे हवय. अउ कतको जगह होना बाकी हवय. कतको जगह गेड़ी दौड़ प्रतियोगिता होथे. अउ तरह तरह के ग्रामीण खेल कबड्डी, रस्सा खींच, मटका फोड़, फुगड़ी, बिल्लस, कुर्सी दौड़ के आयोजन होथे. ग्रामीण मन गाँव के मैदान मा सकलाके एक दूसर ले मिलथे जुलथे अउ सुख दुख के गोठ गोठियाथे. नवा नेवरनिन मन ला तीजा लाय के शुरुआत घलो हो जथे. अइसन सुग्घर ढंग ले हमर छत्तीसगढ़ मा हरेली तिहार मनाय जथे.   

        जय जोहार... 





                                   ओमप्रकाश साहू "अंकुर "


Thursday, 5 August 2021

छत्तीसगढ राजभाषा आयोग ले मोर अपेक्षा //*

 *//छत्तीसगढ राजभाषा आयोग ले मोर अपेक्षा //*

=======०००=========

     विगत चार दिन ले छत्तीसगढ़ी लोकाक्षर साहित्यिक वाट्सएप पटल म बहुत महत्वपूर्ण विषय -" छत्तीसगढ राजभाषा आयोग ले मोर अपेक्षा" के संबंध म विमर्श जारी हवय,ये विमर्श म कई साहित्यकार मन खूब सुग्घर अउ उपयोगी विचार लिख के पटल म भेजीन हवंय,हिरदय ले साधुवाद |

      *सब ले पहिली -"छत्तीसगढ़ या छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग" के संबंध म एक निष्कर्ष तय करना जरूरी हवय | "छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग कहना सही हवय ? " के  "छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग कहना सहीं हवय ?" कोई भी शब्द के हरेक मात्रा के खूब महत्व होथे,एक मात्रा गड़बड़ होथे,तौ अर्थ के अनर्थ हो जाथे,कभी-कभी तो शब्द के अर्थ म जमीन-आसमान के अंतर हो जाथे, जैसे :- कोटा शब्द के "ओ"  मात्रा के बजाय "आ" लिखा जाथे, तव "काटा" हो जाथे ! जैसे:-- हिन्दी शब्द के "दी" के बजाय "द" लिख देहे ले "हिन्द" हो जाथे, अर्थात भाषा ला व्यक्त नहीं करके "स्थान/देश" ला परिभाषित करथे | तईसनेच "छत्तीसगढ़ी" शब्द के "ढ़ी" के बजाय "ढ़" लिख देहे ले "छत्तीसगढ़" हो जाथे, अर्थात "भाषा" ला व्यक्त नहीं करके "स्थान/राज्य" ला परिभाषित करथे*

     *तेकरे सेती मोर मति अनुसार -छत्तीसगढ़ राजभाषा नहीं, बल्कि "छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग ही होना चाही | कोनो भी मनखे या स्थान के नाम म एक मात्रा के अंतर या एक डाट ...के अंतर होए ले गूगल के सर्वर ह स्वीकार हरगिज  नइ करै या फिर "छत्तीसगढ़ के राजभाषा आयोग (करण कारक "के" प्रयोग ) होना चाही* |

      *सब से महत्वपूर्ण बात हवय- गूगल के सर्वर म "छत्तीसगढ़ भाषा" ला सर्च करबो,तव का दिखाई देही ? हरगिज नहीं, जबकि "छत्तीसगढ़ी राजभाषा" सर्च करबो,तब खच्चित दिखाई देही,हालाकि गूगल सर्वर म कोई भी बात ला साफ्टवेयर इंजीनियर,प्रोग्रामर या फिर जानकार मनखे ही अपलोड करथैं,तव सहीं अपलोड होना चाही*

       *छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग कहे म सरगुजिहा,बस्तरिहा भाई मन सहमत होहीं के नहीं ? अईसन समस्या नहीं हवय | काबर के रायगढ़ से ले के राजनांदगांव,अउ सरगुजा से ले के बस्तर तक हम छत्तीसगढ़िया भाई मन एक हवन*

     *जैसे- राष्ट्र भाषा हिन्दी के सहयोगी उपभाषा-बघेली, बुंदेलखंडी,अवधी,ब्रज भाषा हवंय,तईसनेच "राजभाषा छत्तीसगढ़ी" के सहयोगी -कुडुक,सादरी ,गोंडी,हल्बी ला पूरा सम्मान सदैव मिलही*

      *२८ नवंबर/२००७ के दिन "छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग संबंधी विधेयक सर्वसम्मति से पारित होईस,तब से ले के छत्तीसगढ़ी साहित्य के हर विधा म लेखन अउ प्रकाशन म तेजी आए हवय,साथ ही उच्च स्तरीय साहित्य सृजन होवत हवय*

    *छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के उद्देश्य :- १. राजभाषा ल संविधान के ८वीं अनुसूची म शामिल करवाना | २. छत्तीसगढ़ी भाषा ल राज-काज के भाषा के रूप में उपयोग मे लाना, ३. त्रिभाषायी भाषा के रूप म शामिल करवाना, इंकर अलावा "माई कोठी" अउ"बीजहा" योजना घलो संहराए लाईक हवंय*

     * *छत्तीसगढ़ राजभाषा  आयोग के उद्देश्य/लक्ष्य ह तभे सफल होही,जब सरकार ह अन्य महत्वपूर्ण विभाग के क्रियान्वयन बर जैसे करोड़ों, अरबों-खरबों रूपीया के बजट  आबंटित करथें, तईसनेच भरपूर बजट स्वीकृत करही,लेकिन साहित्य,कला, संस्कृति के उन्नयन अउ विकास बर सरकारी बजट "ऊंट के मुंह में जीरा के समान रहिथै,अर्थात "तैं खड़े रह,मैं आवत हौं" कथन चरितार्थ होथे,तऊन बहुत दुखद बात आय*! 

     *भाषा, साहित्य, संस्कृति के संरक्षण अउ संवर्धन बर सरकार ला अन्य अति आवश्यक सेवा विभाग के भावना से काम करना चाही | भाषा, साहित्य,कला, संस्कृति के विकास होही,तब राज्य ह स्वयं विकसित अउ गौरवान्वित होही | प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर जी ह छत्तीसगढ के साहित्य,कला, संस्कृति ला दुनिया के कई देश म प्रस्तुति दे के लोकप्रिय अउ गौरवान्वित बनाईस, पद्मश्री स्व. देवदास बंजारे के पंथी नृत्य, पद्मविभूषण डाक्टर तीजन बाई के पंडवानी गायन हा दुनिया भर में खूब लोकप्रिय होईस,ढोला-मारू,लोरिक-चंदा,भरथरी,कर्मा,ददरिया,सुवा नृत्य ह देश-विदेश म खूब लोकप्रिय हवय*

      *तईसनेच छत्तीसगढ़ी साहित्य के देश-विदेश म एक विशिष्ट पहचान होना चाही, लोकप्रिय होना चाही,तब "छत्तीसगढ़ी राजभाषा ह संविधान के 8वीं अनुसूची म स्वमेव जघा बना लेही | छत्तीसगढ़ी साहित्य बर लिपि के समस्या बिल्कुल नहीं है,साथ ही  उल्लेखनीय विशिष्ट साहित्य सृजन होवत जाही,तब मानकीकरण भी स्वमेव होवत जाही*

      *एक महत्वपूर्ण प्रयास करना जरूरी हवय-छत्तीसगढ म जत्तेक कम्प्यूटर,लेपटाप, मोबाईल उपयोग म लाए जाथे,ऊंकर बिक्री के पहिली से ही साफ्टवेयर म छत्तीसगढ़ी डिक्शनरी,व्याकरण,हाना इत्यादि अपलोड कर देना चाही,एकर से छत्तीसगढ़ी साहित्य के सृजन अउ बोल-चाल म आश्चर्यजनक ढंग से सुधार होही,साथ ही कम्प्यूटर,लेपटाप, मोबाईल म छत्तीसगढ़ी भाषा म टाईप करे से डिफाल्ट हिन्दी शब्द स्वमेव आने-ताने टाईप हो जाथे,तऊन समस्या से निजात मिल जाही*

     *एक अउ महत्वपूर्ण सुझाव देना चाहत हौं - छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के अध्यक्ष, सदस्य के नियुक्ति दलगत राजनीति से पृथक होना चाही |  सिर्फ ०२ सदस्य "छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग म नियुक्त करें जाथे,तऊन संख्या ला बढ़ा के हर जिला म एक सदस्य के नियुक्ति होना चाही,तब  २८ जिला बर नियुक्त सदस्य मन अपन-अपन जिला के साहित्यकार लोककलाकार के सर्वांगीण विकास बर समर्पित भावना से काम करहीं,तब "छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग" के कामकाज हा सफल होही*

    *अन्य आयोग,मंडल, बोर्ड में सत्ता पार्टी के ब्यक्ति ला नियुक्त कर देथैं,जबकि साहित्य,कला, संस्कृति के उत्थान बर दलगत राजनीति से हट के योग्य व्यक्ति ला नियुक्त करना चाही*

    *साहित्यकार, लोककलाकार के आर्थिक सुधार करे बर पर्याप्त बजट स्वीकृत करना चाही, प्राथमिक, माध्यमिक कक्षा में मातृभाषा (दूध के बोली) छत्तीसगढ़ी माध्यम से ही पढ़ाई होना चाही, शिक्षक छत्तीसगढ़ी भाषा साहित्य में पारंगत होना चाही | अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में भी एक विषय छत्तीसगढ़ी अनिवार्य होना चाही |साहित्यकार लोककलाकार के उत्थान बर कल्याणकारी योजना जैसे:- बीमारी, दुर्घटना, मृत्यु के स्थिति में तत्काल आर्थिक सहायता मुहैया कराना चाही, साहित्यकार लोककलाकार ला यथायोग्य रोजगार के साथ ही पेंशन सुविधा उपलब्ध कराना चाही*

       *छत्तीसगढ़ी भाषा में बोलचाल शासकीय,अर्धशासकीय,निजी संस्थान के कार्यालय में अनिवार्य करना चाही | जैसे :- कोई उड़िया,बंगाली,गुजराती,मराठी, राजस्थानी,मलयालम,तेलगू,कन्नड़,तमिल भाषी लोगन अपन राज्य के लोगन से मातृभाषा में  ही बात करथैं,तईसने हम सब छत्तीसगढ़िया ला हाट-बाजार,बस स्टेंड, रेलवे स्टेशन,शापिंग माल,कस्बा,शहर में अपन भाषायी मनखे संग सिर्फ छत्तीसगढ़ी में ही बात करना चाही,तभे छत्तीसगढ़ी भाषा ह जन-जन के भाषा साबित होही*

      *छत्तीसगढ राजभाषा आयोग के गठन होए लगभग साढ़े तेरह बच्छर हो गए हवय,लेकिन अपेक्षित उपलब्धि बहुत कम नजर आवत हवय | अभी हाल में ही छत्तीसगढ के कई मंडल, बोर्ड,आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य मन के नियुक्ति करे गईस हवय, लेकिन छत्तीसगढ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष, सदस्य के नियुक्ति करे बर का दिक्कत होवत हे ? समझ से परे हवय ? यथाशीघ्र योग्य व्यक्ति ला नियुक्त करना चाही*

      *आखिर म भारतेंदु हरिश्चंद्र जी के लिखे दोहा के उल्लेख करना चाहत हौं :-*


*निज भाषा उन्नति अहै*

*सब उन्नति को मूल*

*बिन निज भाषा ज्ञान के*

*मिटत न हिय की सूल*



*गया प्रसाद साहू*

  "रतनपुरिहा"

(कवि, लेखक, गीतकार एवं गायक)

मुकाम व पोस्ट-करगी रोड कोटा जिला बिलासपुर (छ.ग.)


🙏🏼🖕✍️❓✍️👏

टिप्पणी

 टिप्पणी 

****** 

     हिंदी , छत्तीसगढ़ी अउ  बंगला के कई ठन समूह संग जुरे हंव त होत बिहान ले आधा रात तक बहुत अकन पोस्ट पढ़े बर मिल जाथे । सबो ल पढ़े के समय नइ मिलय त बहुत अकन पोस्ट बर बिहाव , जनमदिन , किताब / रचना प्रकाशन , सनमान पत्र  त मरनी हरनी के घलाय रहिथे ..जथा जोग निपटाथंव सिरतो कहवं त बिन पढ़े डिलीट घलाय कर देथवं ..। 

फेर साहित्यिक पोस्ट ..वाह ..मन मोह लेथें जी ..जीव जुड़ा जाथे । किताब पोथी , पत्र पत्रिका बिसाये , उधार मांगे के जरूरते नइ परय दूसर बात घर नइ भरय । नानकुन घर कतेक किताब उताब समाही तेकर ले जीव बांचीस ...। 

  समूह मं आये रचना मन तो बने लागबे करथें फेर बुधियार पढ़इया , लिखइया मन के लिखे टिप्पणी मन ल पढ़ के आंखी उघर जाथे । एके विषय वस्तु ल आने आने मनसे अपन अपन नजरिया से पड़थे ओइसनहे लिखथें भी ...धीरे धीरे महूं टिप्पणी लिखे बर सीखत हंव ..। 

फेर ...बढ़िया , बड़ सुग्घर , शानदार , अति उत्तम एसनहे टिप्पणी मन ल पढ़ के मूड़ ल भीथिया मं  ठोंक देहे के मन होथे काय करबे भिथिया के तो कुछु नइ बिगड़य अपने मूड़ फूटही तेकर ले छोड़ देथंव । सबले फायदा के बात के आने मन के टिप्पणी पढ़ के महूँ सीखत हंव दूसर बात के  

बहुत अकन नवा नवा जानकारी इही पुरौनी टिप्पणी मन से मिल जाथे । 

अब जाने पाये हंव के टिप्पणी लिखना हर भी कम मेहनत , कम होशियारी के बात नोहय । 

 जेहर जतके जादा अध्ययन करे रहिथे ओकर टिप्पणी हर ओतके गम्भीर होथे । नवा नवा विचार जाने सुने बर मिल जाथे । 

   सरला शर्मा