Sunday, 20 February 2022

छत्तीसगढ़ का आंचलिक साहित्य परंपरा परिदृश्य और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में युवा*

 *छत्तीसगढ़ का आंचलिक साहित्य परंपरा परिदृश्य और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में युवा*


 हमर छत्तीसगढ़ मा आंचलिक साहित्य के अमरत्वपूर्ण समृद्ध संसार हवे | साहित्य हमर धर्म और आस्था के केंद्र बिंदु हरे, हमन ला एमा साक्षात सरस्वती दाई बिराजमान दिखथे | हमन अपन घर के ग्रंथ ला सौंहत देवी देवता मान के पूजा करथन | हमर छत्तीसगढ़ मा आंचलिक साहित्यकार मन के छत्तीसगढ़ के लोक जीवन मा बहुत मान्यता हे | जन-जन के आस्था के केंद्र बिंदु ये साहित्यकार मन हमर अंचल ला प्रभावित करथे | जब हमर छत्तीसगढ़ मा छत्तीसगढ़ी साहित्य लेखन चालू नहीं होय रीहिस, तभे हमर छत्तीसगढ़ के साहित्यकार मन हिंदुस्तान के बड़का शासक अउ ओकर जनमानस ला अपन लिखित कविता के माध्यम से जागृत करेके उदिम कर डारे रीहिसे | गोपाल मिश्र ला छत्तीसगढ़ के वाल्मीकि कह जाथे, वो हा अपन साहित्य खूब तमाशा के जोर ले औरंगजेब के शासनकाल में ओकर दमनकारी नीति के विरोध मा साहित्य के माध्यम ले अपन स्वर बुलंद करे रिहिस | गोपाल मिश्र के ही एक ठन अउ कृति सठ-शतक जन जागृति के बहुत बड़का साहित्य रीहिसे, जेन हा वीर रस से सराबोर  कविता  के माध्यम ले जन जागृत के अलख जगाइस | साहित्य  के ये परंपरा आगू बढ़के हमर छत्तीसगढ़ी साहित्य में देखे ला मिलिस | 

       छत्तीसगढ़ के आंचलिक साहित्यकार मा माखन मिश्र, रेवाराम बाबू , प्रहलाद दुबे, लक्ष्मण कवि आदि साहित्यकार मन से हमर आंचलिक साहित्यिक परंपरा ला नवा दशा अउ दिशा मिलिस |

ये कड़ी मा पं. सुंदर लाल शर्मा हा छत्तीसगढ़ी दान लीला,  छत्तीसगढ़ी राम लीला आदि ग्रंथ लिखत हमर साहित्य ला समृद्ध  करत आगू बढ़ाइस | इही कड़ी मा नारायण लाल परमार के नाम गर्व से लिए जा सकथे, जेन हा साहित्य के सबे विधा के विशेषज्ञ रीहिस | परिवार मा रहिके भी सन्यासी जीवन व्यतीत करत परमार जी हा पूरा देश मा छत्तीसगढ़ के नाम रोशन करे हवे | प्राइमरी स्कूल के ये गुरुजी के सफर, हिंदी विभागाध्यक्ष तक पहुंचिस | परमार जी के साहित्यिक योगदान ला छत्तीसगढ़िया मन कभू नइ भुला सकन | छत्तीसगढ़ के आंचलिक साहित्यिक परिपेक्ष मा पं. द्वारिका प्रसाद मिश्र विप्र के नाम सम्मान से लिए जाथे | दयाशंकर शुक्ल हा छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य मा नींव के पहली पथरा छत्तीसगढ़ी लोक साहित्य के अध्ययन के रूप में डालिस | जेन ला शिवदत्त शास्त्री इतिहास समुच्चय, लोचन प्रसाद पांडेय हा छत्तीसगढ़ी नाटक कलिकाल लिखके छत्तीसगढ़ के आंचलिक गद्य साहित्य लागू बढ़ाईस | 

      छत्तीसगढ़  मा आंचिलक साहित्य  के झंडा बुलंद  करैया  मा कोदूराम दलित के सियानी गोठ, माधव राव सप्रे के रामचरित्र बलदेव प्रसाद मिश्र के छत्तीसगढ़ परिचय, पंडित केदार नाथ ठाकुर के बस्तर भूषण, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी के उत्कृष्ट साहित्य हमर छत्तीसगढ़ अंचल के साहित्य ला समृद्धि करिस | पुरुषोत्तम अनासक्त के भोंदू पुरान, हरिठाकुर के छत्तीसगढ़ी गीत कविता, गुलशेर अहमद खान 'शानी' के व्यवस्था के खिलाफ आक्रोश देखावत साहित्य लिखाई हमन ला नवसृजन करेके प्रेरणा दीस | इही कड़ी मा लतीफ घोंघी के व्यंग्य विधा ले साहित्य में नवाचार के सुग्घर रद्दा खुलगे, जेनला डॉ. धनंजय वर्मा के अंधेर नगरी, त्रिभुवन पांडेय के भगवान विष्णु की भारत यात्रा, विनोद कुमार कुमार शुक्ला, गजानन माधव मुक्तिबोध के लिखे साहित्य मन आंचलिक साहित्य ला पोठ करके समाज में सुधार के संदेश बगरइस |  श्यामलाल चतुर्वेदी के राम वनवास अउ पर्रा भर लाई,  डॉ.पालेश्वर प्रसाद शर्मा के तिरिया जनम झनी दे, सुसक झन कुरदी सुरताले,  विशेष उल्लेखनीय हवे | ये कड़ी मा समीक्षा विमर्श और शोध के शिखर साहित्यकार डॉ. विनय कुमार पाठक जी छत्तीसगढ़ी आंचलिक साहित्य मा बहुत महत्वपूर्ण काम करथे | पाठक जी सीता के दुख नांव के खंडकाव्य लिखके सशक्त  नारी चरित्र के विमर्शात्मक चित्रण करेके संग मा सामाजिक विसंगति ऊपर बहुत महत्वपूर्ण विषय में लिखें शोध ग्रंथ ले छत्तीसगढ़ ही नहीं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर मा हमर छत्तीसगढ़ के नाम उजागर करथे |

        हमर छ्त्तीसगढ़ महतारी  के अनमोल रतन छत्तीसगढ़ गद्य साहित्य मा छत्तीसगढ़ के प्रेमचंद के नाम ले विभूषित डॉ.परदेशी राम वर्मा जी छत्तीसगढ़ के आंचलिक साहित्य में बड़का काम करत हवे | उंकर लिखे उपन्यास कहानी कविता के संग ऊंकर द्वारा  संपादित त्रैमासिक पत्रिका आगासदिया अउ आगमन पत्रिका के संग डॉ. परदेशी राम वर्मा जी द्वारा छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पथ ऊपर लिखे छत्तीसगढ़ी गीतनाटिका विशेष उल्लेखनीय हवे, जेमा गीतनाटक के माध्यम ले हमर छत्तीसगढ़ के लोक संस्कृति, भगवान राम के प्रति आस्था के संग भॉचा मन के आदर सत्कार के बड़ सुग्घर संदेश मिले हे |  

     केयूर भूषण लिखित कहां बिलागे मोर धान के कटोरा गद्य साहित्य के माध्यम ले आंचलिक पृष्ठभूमि में तत्कालीन छत्तीसगढ़ परिवेश  के मार्मिक चित्रण करे हवे |

        छत्तीसगढ़ मा जनकवि के रूप मा विख्यात कोदूराम दलित, उधोराम झखमार, डॉ.नरेन्द्र देव वर्मा, लक्ष्मण मस्तूरिहा, बाबूलाल सीरिया, अखेचंद क्लांत, लाला जगदलपुरी, राजेन्द्र तिवारी, विसंभर यादव मरहा , द्वारिका प्रसाद तिवारी के संग गजपति राम साहू , बुटूराम पूर्णे, देवनारायण नगरिहा, हेमलाल साहू निर्मोही, के नाम उल्लेखनीय हे |

       छत्तीसगढ़ अंचल ला अपन अद्भुत काव्य सृजन ले प्रभावित करैया कवि मन मा पद्मश्री डॉ सुरेन्द्र दुबे, पं. दानेश्वर  शर्मा,  मुकुंद कौशल, मुकुटधर पांडेय रामेश्वर वैष्णव के नाम अपन अलग मुकाम हासिल करे हवे | नरसिंह दास वैष्णव, पवन दीवान, महाकवि कपिलनाथ कश्यप , विमल कुमार पाठक, शेषनाथ शर्मा शील के साहित्य हमर छत्तीसगढ़ अंचल के अनमोल धरोहर हरे |

        हमर छत्तीसगढ़  महतारी  के कोरा मा साहित्य  के सतरंगी रंग मा बोले मा हमर नारी शक्ति  के योगदान  बहुत महत्वपूर्ण हे,  एमा छ्त्तीसगढ़ के पहिली महिला साहित्यकार निरुपमा शर्मा के पतरेंगी, शकुंतला शर्मा लिखत चन्दा के छॉव मा, सुधा वर्मा  के उपन्यास *बन के चन्दैनी* अउ *तरिया  के आंसू* सरला शर्मा के *आखर के अरघ* शैल चन्द्रा शकुन्तला वर्मा, वसंती वर्मा, असन कतको नारी शक्ति  मन साहित्य साधना  मा अपन उपस्थिति दर्ज  करवाय  हे | 

            कविसम्मेलन  के मंच मा अपन सार्थक काव्य प्रस्तुति मा शकुन शेंडे बचेली के नाम प्रमुखता से लेना चाहहूं , जिंकर  श्रेष्ठ काव्य प्रस्तुति हा नारी शक्ति  के उद्घोष करथे -- 


संगवारी रे मोरो गॉव आगे मानसून, 

तीपत भोंभरा मुहूं लुकागे,चलदिस छुट्टी चौमासा |

ये अगास मा माँदर बाजत, बादर खेलत हे पासा |

बिजुरी कैना बड़ इतरावय, नाचे इंदर सभा मोहावय |

इन्द्र धनुष के रंग मा मनखे, सपना लेथे बुन ....


संगवारी रे मोरो गॉव आगे मानसून |


ऐसने शशि तिवारी महुआ, गीता विश्वकर्मा नेह, निशा तिवारी, संतोषी महंत श्रद्धा, हर्षा देवॉगन, संध्या राजपूत के कविता  जनमानस के बीच अगले पहिचान  राखथे |

      जनमानस मा पोठ संदेश देवैया आंचलिक साहित्यकार मा पवन दीवान के भागवत  मंच अउ कविसम्मेलन मन मा ठहाका भरत कविता  के उद्घोष जन जन मा लोकप्रियता  के दुवारी खोल दे रीहिस | बद्री विशाल परमानंद , लक्ष्मण मस्तूरिहा, हरिठाकुर, रामेश्वर वैष्णव, दानेश्वर शर्मा, मुकुन्द कौशल के सदाबहार गीत आज तक हमर छत्तीसगढ़ अंचल मा अपन सार्थक उपस्थिति  बनाय हवे | ऐसने स्व. गजानंद प्रसाद देवांगन के कविता मन मा जीवन के सुक्ष्म विवेचन हवे --

कोरी कोरी कतको बछर रो धोके पहागे |

बांचे खोंचे जिनगी पहाड़ असन  लागथे |

लहू चुहकत हे कई झन, प्रजातंत्र के काया के |

ये बैरी  मन ढेकना  मसाड़ असन लागथे |

स्व. मेहत्तर राम साहू के कविता मा आंचलिकता के गहरा बोध हवे --

पसिया के हांड़ी, मरत हे पियास |

औसने तलफतहे हमर इतिहास |

आशा भरोसा बिश्वास  हा 

बरफ एसन घूरथे |

दया मया पिरिया हा करेल 

असन डुबक डुबक के चुरथे |साहित्य मन मा 

कुंज बिहारी चौबे के बियासी गीत, गयाराम साहू पथिक के रखिया अउ जागिस छत्तीसगढ़ के माटी के कविता मा मानवीय मूल्य अउ ओकर संदेशा मा छत्तीसगढ़ महतारी के छटवी सातवीं सदी के दशा झॉकत दिखथे | किसान के पीरा, खेती किसानी के दुर्दशा, बैला नॉगर, धान गहूं सरसों तिवरा के खेत, मउंहा बोईर तेंदू टोरई, साग भाजी बेंचई, खेत कोठार जंगल मा लगे आगी, मनखे के टीबी धुकी बीमारी मा गॉव के गॉव उसलई, ऐसन मार्मिक चित्रण साठ सत्तर  अस्सी अउ नब्बे के दशक तक आवत कविता के रंग मा थोकनी बदलाव आवत गीस, अब कवि मन इक्कीसवीं सदी में ओग्गर भविष्य के सपना भूख गरीबी मा सुधार, छत्तीसगढ़ राज निर्माण के जरूरत छत्तीसगढ़  महतारी  के बेड़ी टोरे  के आह्वान करत कविता कहानी के रेला बोहागे | पढ़के सुग्घर जिनगी गढ़े के आह्वान  करत जीये बर संघर्ष करत किसान बनिहार  के मेहनत के चित्रण करत कवि लेखक  मन अंचल  मा जागरुकता  लाय के बड़का उदिम  करिस | 

        छत्तीसगढ़ राज मिले के बाद सबके भाग फरिहाइस  अब कवि के कविता मन मा तक बहुंत बदलाव  आगे  हवे  , आजके कवि साहित्यकार  मन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम  ले कविता कहानी  संस्मरण यात्रा वृत्तांत छंदबद्ध काव्य लेखन करत आंचलिक साहित्य मा नवा नवा रंग घोरथे | ये मा अरुण निगम जी के छंद के छ परिवार के  साहित्यकार  मन के प्रयास सराहनीय हवे जेन मन छंदबद्ध साहित्य के माध्यम ले आंचलिक साहित्यिक खजाना मा नवा नवा रतन पिरोवथे |

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मा युवा साहित्यकार  के सक्रियता सबले जादा वाट्सएप अउ फेसबुक मा देखे ला  मिलथे जेमा कवि साहित्यकार मन लेख कहानी कविता लिखते भार तुरते भेजके  सैकड़ों संगवारी मनले वाहवाही पा लेथे | एकर  ले एमनके  उत्साहवर्धन होथे अउ नवा नवा साहित्य लिखे के प्रेरणा तको मिलथे | ए कड़ी मा मैंहा कुछ सक्रिय अउ उम्दा साहित्य लिखैया युवाकलमकार के गोठ अउ ऊंकर कविता  के उदाहरण देना चाहहूं ,जेमा कविमन समाज  मा सुधार  अउ बेवस्था  मा बदलाव  के सुंदर संदेश देवथे | एमा महेन्द्र बघेल मधु के पंक्ति मा संदेश देखव ---

*जतन नी जानिस जीवन भर मरगे महतारी पुट्ट ले |*

*सगा सोदर ला देखायबर सुपेती उघारिस खुट्ट ले |*

*जाड़ मा भुर्री बर झिटका नोहर,*

*आज चिता बर लकड़ी गंजाथे*

*जीयत मा नवा लुगरा नोहर*

*बेटा आज कफन बिसाथे*

जीयत भर पूछेन नहीं,

मरगे तब सोरियावतहन,

जग मा नइहे तेकरबर हम  कैसन समाज बनावत हन |

        कन्हैया साहू अमित छंदबद्ध विभिन्न कविता के माध्यम ले जन जागरुकता लाय के बड़का उदिम करथे --

छप्पय छंद मा स्वच्छता के संदेश देखव-- 

एती ओती देख कतिक बगरगे कचरा, 

एकर करव सरेख पसरगे काबर पचरा |

जुरमिल देवव टार जोर दव कूढ़ादानी, 

अपन बढ़ावव हाथ होय सुग्घर जिनगानी |

      इही कड़ी मा देवजोशी गुलाब के पंचायती राज मा अबादी भुईंयॉ के बंदरबाट ऊपर गजब के व्यंग्य समाज ला जागृति के संदेशा देवथे---

ये पंच मनला आँकलेव,

मोरो जेब ला झॉकलेव, 

तहॉले जावनगा ,

सबे भाठा डाहरला नापलेव |

     कन्हैया लाल बारले के सुप्रसिद्घ कविता जेमा कड़ही बनायके विधि के संग मा आमा अमली  के पेड़ लगायके संदेश ले कविता  के सुंदर  समापन देखे के लाइक हे --

ए वो टुरी अँड़ही तैं रांध लेना कड़ही,

अमसुरहा खाइ लेबोना,

सुघर जिनगी पहाइ लेबोना |

      देवनारायण नगरिहा रायपुरा के कविता - 

गंधारी ऑखी ले पट्टी खोल के देखतिस  ते का होतिस, 

कविता  मा गजब के संदेश देय हवे |

ऐसने ईश्वर साहू आरुग हर आरुग चौरा नाम के मासिक पत्रिका निकालके छत्तीसगढ़ भर के साहित्यकार  मनला एक मंच मा सकेले सुंदर प्रयास करे हवे | ओकर  कविता  मा रुख लगाय के महत्व के बानगी देखव -- 

ददा उठाही भार तभे सुख लइका पाही |

गुरू बताही ज्ञान, तभे कोनो सुर सजाही |

एक दिन मा पेड़ हा, नइ देवय फुल फर ला |

बबा लगाही पेड़ तभे फर नाती पाही |

अजय अमृतांशु के हरिगीतिका छंद म बेटी बर  लिखे  सुंदर संदेश 

बेटी हवय अनमोल जी दाहिज मा  झन तोल गा |

आघू बढ़ाही नाम ला, अॉखी अपन तैं खोल गा ||

आकाश मा बेटी उड़य, पॉखी लगे हे ज्ञान के |

आघू बढ़नदे रोक झन ओला  बने सम्मान दे ||

मनीराम साहू मितान के रोला छंद मा संदेश जीवन मा उतारे ला पड़ही -- 

झिल्ली कचरा डार पाट झन नदिया तरिया |

गंदा पानी ढील फरी ला झन कर करिया ||

नइ रखबे गा साफ,  गुजर तैं कामा करबे |

तोरे हवय बिगाड़ बिगर पानी के मरबे ||

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मा सक्रिय युवा साहित्यकार मा तोषण चुरेन्द्र दिनकर, धर्मेन्द्र श्रवण, सुनील शर्मा नील, वीरेन्द्र तिवारी वीरू, लखन साहू लहर,  भरत बुलंदी, पुष्कर राज, मनोज श्रीवास्तव, शरद यादव अक्स, दिनेश दिव्य, धनराज साहू , मुकेश पटेल, निरंजन ठहाका, जयकांत पटेल, गणेश यदु, अशोक कुमार यादव, हीरालाल साहू समय, लोकनाथ साहू आलोक सहित सैकड़ों  कवि साहित्यकार मन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम ले आंचलिक साहित्य ला पोठ करथे | 

ये कड़ी मा नवोदित कवि नोकेश तांडे के प्रकृति के विरोध मा आक्रोश व्यक्त करत पंक्ति देखव --

बता तैं हमला भरे बरसात मा दॉत निपोरे काबर |

आज जरुवत नइ हे त बिहने ले झोरे काबर |

अइसने नवोदित कवि आकाश किरण के हमर छत्तीसगढ़ महतारी बर समर्पित पंक्ति  मा  ओकर  भाव अभिव्यक्ति --

उवत सुरुज के लाली कस, मैं उज्जर सोनहा थारी अँव |

सुख अउ दुख  मा  संग देवैया  छत्तीसगढ़  महतारी अँव ||

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मा सबले जादा युवा मनके भागीदारी रहिथे फेसबुक वाट्सएप टि्वटर इंस्ट्राग्राम मा युवा साहित्यकार मनके भागीदारी हा प्रिंट मीडिया ला बहुत प्रभावित करेहे | इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बात करथन तब छत्तीसगढ़ के आंचलिक साहित्य ला इलेक्ट्रॉनिक  मीडिया में लाय मा संजीव तिवारी के वेब पोर्टल गुरतुर गोठ के उल्लेख करना जरूरी हो जथे,  जेकर माध्यम ले संजीव तिवारी जी हा नवा जुन्ना साहित्यकार मनला अपन  वेब पोर्टल मा लाके ऊंकर साहित्य ला इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मा सक्रिय युवा मनके बीच परोसेके  नवाचार करिस जेनहा सफलता के शिखर चूमत कई ठन वेब पोर्टल ला जनम देयके रद्दा खोलिस | इही कड़ी मा मैंहा रमेश चौहान के नाम लेना चाहहूं  , जेनहा फेसबुक मा छत्तीसगढ़ी साहित्य मंच के स्थापना करके पागा कलगी नाम मा कविता प्रतियोगिता के सफल संचालन करीस | ओकर ये प्रतियोगिता मा छत्तीसगढ़ के सैकड़ों वरिष्ठ अउ नवोदित साहित्यकार मन भाग लेके अपन काव्य कौशल के प्रदर्शन करिस | छत्तीसगढ़ी हिन्दी समसामयिक साहित्य ला इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मा लाये मा रमेश चौहान जी के सुरता नाम के वेबसाइट पोर्टल के बड़का योगदान हवे,जेमा हमर छत्तीसगढ़ अंचल के सबे विधा के साहित्यकार मन के कविता कहानी आलेख प्रलंब काव्य,  पुस्तक समीक्षा, जीवनी, यात्रा वृत्तांत, संस्मरण के रूप मा सैकड़ों  साहित्यकार मनके साहित्य हा जनमानस तक बगरके हमर छत्तीसगढ़ अंचल के साहित्य संस्कृति अउ लोकजीवन  के दिग्दर्शन कराय मा बड़का योगदान देहे | 

        बस्तर जिला मा  साहित्य के सतरंगी पताका थामे नवोदित कलमकार मनके समूह ला संग धरके रेंगैया साहित्यकार मा विश्वनाथ देवांगन के अलगे पहिचान बनगेहे जेन ला मुस्कुराता बस्तर के नाव मा पहिचाने जाथे | आज वहू हा मुस्कुराता बस्तर अउ सरगी फूल नाम के फेसबुक पेज, वेब पोर्टल अउ वाट्स अप पटल मा लगातार सक्रिय साहित्य सेवा करथे | एकर मोटका दादा  रिसर्च  पेपर हा बस्तर के पुरातत्विक  महत्व  का दुनिया  के आगू लायके  बड़का  काम  करिस |

कुल मिला के हमर छत्तीसगढ़ अंचल मा सक्रिय साहित्यिक सृजनशीलता मा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बहुत बड़े सहयोग हमर छत्तीसगढ़ के साहित्यकार मन ला मिलथे | एकर सही  उपयोग करेलेे हमर अंचल के साहित्य हा अउ सशक्त होही एमा कोनो संदेह नइ हे |


    लेखक 

डॉ. अशोक आकाश 

ग्राम कोहंगाटोला पो. ज/सॉकरा तह जिला बालोद छ ग 491226

मो. नं. 9755889199

email : ashokakash1967@gmail.com

Tuesday, 15 February 2022

सुरता - श्री रघुवीर अग्रवाल "पथिक"


 

*"दूसर पुण्यतिथि मा विनम्र श्रद्धांजलि"*


सुरता - श्री रघुवीर अग्रवाल "पथिक" 


पथिक जी के जनम जन्म 4 अगस्त 1937 के ग्राम मोहबट्टा मा होइस। इनकर पिताजी के नाम नरसिंह प्रसाद अग्रवाल, माता जी के नाम अरुंधति देवी अग्रवाल अउ धर्मपत्नी के नाम निरूपण अग्रवाल हे।

 पथिक जी हिंदी और अर्थशास्त्र मा एम. ए. करे रहिन। उन मन  "साहित्य रत्न" के परीक्षा घलो पास करे रहिन। 

बी.एड. करे के बाद दुर्ग अउ विद्यालय मा अध्यापन के कार्य करिन। अगस्त 1995 मा बीएसपी कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला सेक्टर 2 भिलाई ले वरिष्ठ उप प्राचार्य के रूप में सेवानिवृत्त होए रहिन। पथिक जी 15 फरवरी 2020 के हम सब ला छोड़ के ब्रह्मलीन होगिन।


पथिक जी सन 1956 ले लेखन प्रारंभ करे रहिन। अनेक कविसम्मेलन के मंच मा आप काव्य पाठ करे रहेव। दूरदर्शन अउ आकाशवाणी ले अनेक कविता प्रसारित होए रहिन। राष्ट्रीय प्रादेशिक अउ क्षेत्रीय पत्र-पत्रिका मन मा आपके रचना प्रकाशित होवत रहिन। कई काव्य संग्रह में रचनाएं संग्रहित।


पथिक जी के पहिली हिन्दी काव्य संग्रह "जले रक्त से दीप" 1970 मा प्रकाशित होए रहिस।  छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह "उजियारा बगरावत चल" 2004 अउ 2009 मा प्रकाशित होइस। "काव्य यात्रा के 50 वर्ष" नाम के समीक्षात्मक पुस्तक 2011 मा प्रकाशित होइस। तेकर बाद "आही नवा अंजोर" नाम के  छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह 2015 मा प्रकाशित होइस। 


उत्कृष्ट लेखन बर पथिक जी ला अनेक संस्था मन सम्मानित करे रहिन। जइसे - 

प्रयास प्रकाशन एवं जिला छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति बिलासपुर द्वारा साहित्य सम्मान 2004 

अधिक सम्मान छत्तीसगढ़ लेखक संघ रायपुर 2008 

नारायण लाल परमार सम्मान धमतरी द्वारा प्रांतीय छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति रायपुर 2010 छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग द्वारा जगदलपुर में साहित्य सम्मान 2010 दुर्ग जिला हिंदी साहित्य समिति दुर्ग द्वारा आदर्श शिक्षक सम्मान 1999 एवं हिंदी दिवस पर शब्द साधक सम्मान 2001 सामुदायिक विकास विभाग भिलाई स्टील प्लांट भिलाई द्वारा साहित्य सम्मान 2002 स्टेट बैंक आफ इंडिया मुख्य शाखा दुर्ग द्वारा राजहरा सम्मान 2002 गायत्री प्रज्ञा पीठ आश्रम पुलगांव दुर्ग द्वारा प्रज्ञा प्रतिभा सम्मान 2010 गांधी विचार यात्रा के अंतर्गत ग्राम पारा में साहित्यिक सम्मान 2002 निवास शिक्षक नगर चिन्हारी सम्मान छत्तीसगढ़ साहित्य समिति दुर्ग द्वारा 2012 हीरालाल का उपाध्याय सम्मान रायपुर में सितंबर 2012


रघुवीर अग्रवाल "पथिक" जी के हिन्दी अउ छत्तीसगढ़ी भाषा ऊपर समान अधिकार रहिस। उँकर हिन्दी काव्य-संग्रह के कुछ पंक्ति मा उँकर शैली अउ श्रेष्ठता के सुग्घर परिचय मिल जाथे -   


जलें रक्त से दीप उठे ,बलिदानों की आरती।

उठो जवानो आज देश की धरती तुम्हें पुकारती ।।

(कविता - जलें रक्त से दीप के अंश)

 

हर सुबह यही लिखता सूरज का उजियारा 

संदेश सुनाता यही रात को हर तारा।

भारत का है कश्मीर सिर्फ भारत का है

लो घूम घूमकर पवन लगाता है नारा।

(कविता - अंगार उगलने लगी सुबह की लाली भी, के अंश) 


नौजवानों फिर हमें दी है चुनौती दुश्मनों ने 

फिर दिखा देंगे उन्हें क्या शौर्य है तूफान का 

मर मिटेंगे पर न देंगे हम कभी कश्मीर उनको 

जान ले संसार ही संकल्प हिंदुस्तान का 

(कविता - संकल्प हिंदुस्तान का, के अंश) 


*मुक्तक*


पसीने से लिखो साथी नए युग की कहानी 

दफन कर दो क्षमता की सभी बातें पुरानी 

हमारा देश मांगे रक्त या श्रम हम उसे देंगे 

बढ़ो आगे कहीं कल तक न ढल जाए जवानी ।।


*मुक्तक*


क्या पार हमारे भारत से टकराएगा 

क्या अंधकार सूरज से आँख मिलाएगा 

पाकिस्तानी शासन की अर्थी पर बैठे 

भुट्टो साहब क्या ढोलक रोज बजाएगा।।


रघुवीर अग्रवाल "पथिक" जी चार डाँड़ के मुक्तक असन कविता खूब करंय। उनकर पड़ोस मा कोदूराम "दलित" जी के निवास रहिस। दलित जी उँकर चार डाँड़ के कविता ला "चारगोड़िया" नाम दे रहिन। पथिक जी ला छत्तीसगढ़ी-चारगोड़िया के प्रवर्तक माने जाथे। छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह "उजियारा बगरावत चल" ले एक चरगोड़िया - 


*छत्तीसगढ़ी चारगोड़िया*


एक जन्म के नाता ला तुम टोरौ झन

सुनता के सुग्घर बँधना ला छोरो झन

बसे बसाई अपन देसला फोरो झन

बिख महुरा अलगाववाद के घोरव झन।


*छत्तीसगढ़ी दोहा* - 


राजनीति ल देख लौ, आजादी के बाद

संसद म टूटत हवै, संसद के मरयाद।।


ये मंदिर कानून के, बनिस अखाड़ा आज

मल्ल युद्ध नेता करें, देखे सकल समाज।।


हंगामा के होत हे, संसद म बरसात

धक्का मुक्की तो उहाँ, हे मामूली बात


*छत्तीसगढ़ी गजल*


गाँव सो कर मया दुलार संगी

गाँव चल देख खेतखार संगी।

देख आमा बगइचा के शोभा

धान के खेत कोठार संगी।। 

तैं गरीबी अउ अशिक्षा ला

देखबे गांव म हमार संगी।


*छत्तीसगढ़ी कविता*


कुर्सी फेंक, माइक टोर

अउ ककरो मूड़ी ल फोर

राजनीति म रोटी सेंक

पद अउ पइसा दुनों बटोर।

अतको म नइ काम बनय तौ

कालिख पोत दाँत निपोर

इही असीम ले हमर देश मा

जल्दी आही नवा अँजोर।


 आज दूसर पुण्यतिथि मा दुर्ग जिला हिन्दी साहित्य समिति, दुर्ग के श्रद्धांजलि


*आलेख - अरुण कुमार निगम*

छत्तीसगढ़ी गीत अउ बॉलीवुड के गायक गायिका



*छत्तीसगढ़ी गीत अउ बालीवुड के गायक गायिका*

                छत्तीसगढ़ अपन संस्कृति,संस्कार, बन, नदिया, पहाड़, खनिज, खेल,खेती किसानी, साहित्य,समाज अउ गीत संगीत के दम मा दिनों दिन वैश्विक पटल मा छावत जावत हे। नवा राज बने के बाद सरलग विकास के रद्दा मा रेंगत हे। आखिर भारत के ह्रदय के रूप मा विख्यात मध्यप्रदेश के एक चानी छत्तीसगढ़(ह्रदय के टुकड़ा) कइसे सबके चहेता नइ रही। आज बात  करबों हमर राज के गीत संगीत मा बॉलीवुड के गायक गायिका मनके योगदान के बारे मा। वइसे तो हमर राज मा कतको सुर साज के धनी गायक गायिका हे, जिंखर सुमधुर आवाज सुबे शाम जम्मो छत्तीगढ़िया मनके कान मा मधुरस घोरत रहिथे, तभो कोई गीत ला कोनो नामी गायक गायिका स्वर देथे, ता ओखर का कहना। बॉलीवुड मा बतैर अभिनेता, अभिनेत्री, गीतकार, संगीतकार, नर्तक, निर्देशक, अउ कतको काम मा छत्तीसगढ़ के शक्स मन अपन स्थान बना चुके हे, अउ अभो अपन लोहा मनवावत हे। बॉलीवुड अउ छत्तीसगढ़ के बड़ जुन्ना नता हे, जे आजो सरलग निभत हे। छत्तीसगढ़ के पहली फिल्म कहि देबे संदेश(1965) मा भारत के मशहूर गायक रफी साहब अपन आवाज के जादू बिखेर चुके हे। छत्तीसगढ़ के पहली(कहि देबे सन्देश 1965) के अलावा दूसरा फिलिम(घर द्वार 1971) मा पूरा बॉलीवुड गीत संगीत मा दिखिन। एखर आलावा राज निर्माण के बाद घलो बॉलीवुड के महान हस्ती मन अपन स्वर ले छत्तीसगढ़ी गीत ला अमर करिन।बॉलीवुड के बहुत अकन गायक गायिका मन छत्तीसगढ़ी फिलिम अउ एलबम मा अपन आवाज देहे,आवन कोन कोन बॉलीवुड के गायक गायिका मन का का छत्तीसगढ़ी गीत गायें हें ,उंखर विस्तार ले चर्चा करिन-

1, *मोहम्मद रफी साहब*
रफी साहब ना सिर्फ भारत बल्कि पूरा विश्व मा अपन आवाज के जादू बिखेर चुके हे। उन मन  कतको अकन गीत कतको भाषा मा गायें हें। उंखर मुखारबिंद ले छत्तीसगढ़ी गीत घलो सुने बर मिले हे, जे हम सब छत्तीगढ़िया मन बर गर्व के बात आय। रफी साहब सन 1965 के छत्तीसगढ़ी फिलिम कहि देबे सन्देश अउ सन 1971 के फिलिम घर द्वार मा छत्तीसगढ़ी गीत गा चुके हे, जे आजो मन ला मोह लेथे।
*झमकत नदिया बहिनी लागे,पर्वत मोर मितान* (फिलिम कहि देबे संदेश, ये रफी साहब के पहली छत्तीसगढ़ी गीत रिहिस।)
*तोर पयरी के झनर झनर, जीव ला ले लेइस* (फ़िल्म कहि देबे सन्देश)
*मैना तही मोर मैना,आजा नैना तीर, आजा रे* (फ़िल्म कहि देबे सन्देश)
*गोंदा फुलगे मोर राजा, छाती ला मारे बाण* (फिल्म- घर द्वार)
*सुन सुन मोर मया पीरा के संगवारी रे, आजा जिवरा तीर आजा रे* (फ़िल्म घर द्वार)
ये दुनो शुरूवाती फिलिम मा हरि ठाकुर, हेमन्त नायडू राजदीप जइसन सशक्त गीतकार अउ रफी साहब, मन्ना डे, महेंद्र कपूर, सुमन कल्यानपुर, मीनू पुरषोतम जइसन महान गायक, गायिका मनु नायक, मलय चक्रवती के महिनत, छत्तीसगढ़ी गीत संगीत के दुनिया मा आजो धूम मचावत हे।

2, *सुमन कल्याणपुर जी*
सुमन कल्याणपुर जी रफी साहब के संग कहि देबे सन्देश अउ घर द्वार फिलिम मा मुख्य गायिका रिहिन, उंखर गाये गीत- *झन मारो गुलेल, बाली उमर लरकइयाँ, सुन सुन मोर मया पीरा के संगवारी रे, मोर अँगना के सोन चिरइया नोनी* बेहद मनभावन हे। 
*मोर अँगना के सोन चिरइया वो नोनी, ये गीत ला फिल्मकार मन लता जी ला गवाना चाहत रिहिन, फेर समय अउ बजट के चलते सम्भव नइ हो पाइस, तेखर बाद मुबारक बेगम जी मन तैयार होगिन, पर गीत के एक शब्द "राते अँजोरिया" ला बार बार रिहर्सल के बाद घलो राते अँझुरियाँ केहे के कारण, अंततः सुमन जी ला ये गीत ऑफर होइस।*

3, *लता मंगेशकर दीदी जी*
सुर सम्राज्ञी लता जी  घलो अनेक भाषा मा कतको अकन अमित गीत गाइन, जेखर पार पाना असम्भव हे। साक्षात सुर साज के देवी लता जी के मुख के छत्तीसगढ़ी गीत निकलना छत्तीसगढ़ वासी मन बर वरदान बरोबर हे। सन 2005 मा भकला फिलिम मा लता दीदी मन एक विदाई गीत *(छूट जाही अँगना अटारी)* गाये रिहिन, जे आजो बर बिहाव के बेरा खूब बजथे। लता जी ये गीत के एवज मा घलो कुछु नइ ले रिहिस, गीतकार मदन शर्मा जी के योगदान घलो अविस्मरणीय हे। लता जी मन छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग के एक टाइटल सांग घलो गाइन हे। कहि देबे सन्देश मा विदाई गीत, फिल्मकार मन लता जी ला सन 1965 मा गवाना चाहत रिहिन, पर संयोग ले 2005 मा लता जी मन अंततः भकला फिलिम मा एक दूसर विदाई गीत गाइन।

4, *सोनू निगम जी*
सोनू निगम जी के जतका छत्तीसगढ़ी  गीत सुने बर मिलथे, ओला देखत अइसे लगथे कि, बॉलीवुड गायक गायिका मन मा सोनू निगम जी मन छत्तीसगढ़ी मा सबले ज्यादा गीत गाये हे। उन मन खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय ले संगीत के शिक्षा घलो लेहे।उंखर गाये 20 ले घलो ज्यादा गीत हे, कुछ एलबम अउ कुछ फिलिम मा घलो ले गेहे। सोनू निगम जी के कुछ सुपरहिट छत्तीसगढ़ी गीत-

*तोर नथनी के मोती रे, मारे टूरा मन ला गोंटी रे।*
*तैं आगास के बन जा सुरुज।*
*ना धरती मा हे कोनो, ना कोनो आगासे मा।*
*छुनुर छुनुर पैरी बाजे।*
*गोरा बदन मा लाली चुनरिया, उड़ा देथे मोर निदिया।*
*कारी कजरेरी गोरी, झूम के नाचे रे।*
*तोर नाम ला सुनके करौंदा।*
*टूरी निकले हे सज सँवर के रे, येला लाज नइ लागे।*
*ऐ वो जवैया का नाम।*
*मोर प्रेम प्रसंग मा।*
*दौना के पान ला।*
*ऐ हँसनी, ऐ रागिनी।*
*मोर मैना मंजूर।*
*तैं हलो हलो केहे।*
*मोर सोना चाँदी हीरा रे।*
*जब ले देखेंव दिल मा।*
*तोर पाँव मा काँटा गड़ जाही, गोरी धीरे धीरे रेंग*
*जिनगी के आजा गोरी मजा उड़ाले, नैन लड़ाले*
*खोंच मोंगरा के फूल, तोर बेनी मा झूले झूल*
*मात गेहे बगिया मा फूल रे संगी झुलबो झूलना रे झूल।*
*तोर मया के मारे।* (फिलिम- तोर मया जे मारे, टाइटल सांग)
*मैं होगेंव दीवानी रे।* (फिलिम मया देदे मया लेले)
सोनू निगम जी के ये सब गीत सन 2000 मा आइस, तब छत्तीसगढ़ी संगीत मा एक तूफान आगे रिहिस, सबे कोती इहिच गीत मन सुनाये, ये गीत मनके आजो माँग बरोबर हे।  लोक गायिका पद्म श्री ममता चन्द्राकर जी मन संग सोनू निगम जी मन एलबम अउ फिलिम मा गीत गाये हे।

5,*मोहम्मद अजीज जी*
बॉलीवुड के मशहूर गायक मोहम्मद अजीज जी दूसर नम्बर मा सबले ज्यादा छत्तीसगढ़ी गीत गाये हे। उन मा फिलिम मयारू गंगा(2017), जय जगन्नाथ, मोर धरती मइया के संगे संग एलबम तै मोला जहर देदे, तोला अब्बड़ मया करथों,गाबों अउ गवाबों  मा घलो स्वर दिये हें, कुछ मनभावन गीत प्रस्तुत हे-

*गुइयाँ रे ऐ गुइयाँ, परी कि तैं सोन चिड़िया।* (एलबम गीत)
*तँय मोला जहर देदे।* (दर्द भरे गीत)
*खिलौना समझ के दिल ला तोड़े।* (दर्दीला गीत)
*जिनगी मा आके तैं चल दे रे।*
*चैत कुंवार मा मोर महारानी,महामाया दाई।* (जस गीत)
*मैं आयेंव दुवारी तोर।* (जस गीत)
*तोला जब ले देखे हँव हिरनिया।*
*सुख दुख मा जिनगी बीते।*
*मयारू गंगा।* (फिलिम मयारू गंगा टाइटल सांग)
*कलयुग के नारायण तिहीं जगन्नाथ हो।* (फिलिम- जय जगन्नाथ,2007)
*महाशक्ति सुन मोर विनती, नटखट ये सब तिहीं करे हस।* (फिलिम जय जगन्नाथ)
*महामाया दाई वो मैं*
एखर आलावा अउ कई गीत अजीज साहब मन गाये हे, जे आजो बरोबर मन लगाके पूरा छत्तीसगढ़ मा सुने जाथे।

6, *कुमार सानू जी*
बॉलीवुड के मशहूर गायक कुमार सानू जी मन घलो छत्तीसगढ़ी गीत ला अपन आवाज दे हें, कुछ गीत देखिन-
*मोर मनके मनमोहनी, मोर दिल के तैं जोगनी वो। *
*देखे हँव जबले तोला, मोला प्यार होगे रे।*
*फुलगे मनके फूल, होगे पिरित कुबूल।*
*मन के मन मोहनी, मोर दिल के तैं जोगनी वो।*
*मया करबे का।* (मया करबे का छत्तीसगढ़ी एलबम)
*तै बिलासपुरहिंन अस।*
*तोर संगी मोला बनाले*
*तोला मया होगे न*
*मोला चुम्मा दे दे(मयारू भौजी फिलिम)।*
*बइहा पगला दीवाना गाये गाना।*
*तोर संग जीना तोर संग मरना फिलिम मा घलो कुमार सानू जी मन अपन आवाज दिये हे।*

7, *अलका याग्निक*
*आजा रे निंदिया, चंदा के पलना मा झूला झुलाये* ये छत्तीसगढ़ी लोरी गीत ला अलका जी मन सुमधुर स्वर दे हवे।

8, *साधना सरगम*
*अबड़ तैं गोठियाथस तोर मनके भरम गा, ठुमुक डार के* ये प्रसिद्ध गीत ला साधना जी मन अपन आवाज मा  घलो गाये हे।
*साधना जी मन फिलिम मोर संग चलव रे मा अपन सुमधुर आवाज दिये हे, उंखर गाये गीत कोन इहाँ बाँसुरी बजाथे, बाँसुरी के धुन मा सोये ला जगाथे।* बहुत ही मनभावन हे।
*साधना सरगम जी महान संगीतकार कल्याणसेन जी के निर्देशन मा मयारू भौजी अउ जय महामाया फिलिम मा अपन आवाज देय रिहिस* 
कुछ गीत- *बन रसिया के मारे।*
*ए भौजी मोर मन हा उड़त हे आगास मा।*
*महिमा हे तोर अपार।*
*जा रे पिरोहिल।*
*महामाया सुन ले पुकार।*
*मैया फूल गजरा।*
*सिद्ध हे माई*

9, *अनुराधा पौडवाल*
अनुराधा जी मन अपन खनकत आवाज मा कतको एलबम *(झर झर नदिया, माँ तारा तारिणी, जान ले पहिचान ले)* मा गीत गाइन। फिलिम मोर संग चलव रे मा घलो अनुराधा जी मन अपन आवाज के जादू बिखेरे हें। कुछ गीत के मुखड़ा प्रस्तुत हे-

*छम छमाछम पैरी बाजे आयेंव सजन के द्वार।*
*झर झर नदिया के पानी, नीम अउ पीपर के छाँव, मोर सजना के गाँव।*
*जरा हलू हलू मया मा पास आना।*
*तारे नारे तारे नाना, तोर मोर एके गाना,संगे जीना संगे मरना*
*जिनगी के दुख हरौ माँ।* (जस गीत)
*लेजा लेजा पतिया लेजा, मया के चिठिया ले जा।*
*कोन रे इहाँ बंसुरी बजात हे/दिल दीवाना गावय गाना* (फिल्म-मोर संग चलव)

10, *नितिन मुकेश जी*
तोला अब्बड़ मया करथों एलबम मा अजीज जी के संग नितिन मुकेश जी मन घलो अपन आवाज के जादू बिखेरे हे।  लक्षमण मस्तूरिहा जी के गीत- *तोला अब्बड़ मया करथों रे, तोला अब्बड़ मया करथों* येला नितिन मुकेश जी गाये हे। नितिन मुकेश जी मन छत्तीसगढ़ी भक्ति एलबम  *शबरी के राम* मा अपन आवाज दिन। गीत के बोल *शबरी वो दाई चीख चीख जूठा बोइर ला खवाये सिया राम ला।*

11, *सुरेश वाडेकर*
मस्तूरिहा जी के प्रसिद्ध गीत *मोर संग चलव जी* ला वाडेकर जी मन अपन आवाज मा घलो स्वर दिये हे। एखर आलावा छत्तीसगढ़ी फिल्म बनिहार मा *कइसे आवँव तोर दुवारी* गीत ला स्वर दिन। मोर संग चलव फिल्म मा साधना सरगम, सुरेश वाडेकर, अभिजीत, अनुराधा पौडवाल मन लक्ष्मण मस्तूरिहा के लिखे गीत मन ला अल्का चन्द्राकर, मस्तूरिहा अउ दिलीप षडंगी मन संग मिलजुल के गायें हें।

12, *शान जी*
*सजनी हा दिल चुराये हे, मया के गीत सुनाये हे, दिलबर जानी* अइसन मनभावन गीत ला शान जी मन अपन आवाज देके अउ मनमोहक बना दिये हे।

13, *उदित नारायण जी*
बॉलीवुड के मश्हूर सिंगर उदित जी घलो छत्तीसगढ़ी गीत अउ ददरिया ला अपन आवाज  मा गाके अउ मनमोहक कर दे हे।

*बटकी मा बासी अउ चुटकी नून*
*बागे बगीचा दिखेल हरियर*
*चना के दार राजा।*
*लाली चुनरिया तोर लचके कमरिया तोर।*

14, *शंकर महादेवन जी*
स्वच्छता बर शंकर महादेवन जी एक गीत गाये हे,*स्वच्छ बने छत्तीसगढ़, छत्तीगढ़िया सबले बढ़िया*

15, *विनोद राठौर जी*
विनोद राठौर जी के गाये गीत *ऐ हंसनी, ऐ रागनी, तोला सपनावँव* बहुतेच जादा प्रसिद्ध होइस, आजो सुने मा मन बड़ भावन लगथे। एखर आलावा कल्याण जी के निर्देशन मा मयारू भौजी फिलिम मा *तँय बिलासपुरहिन अउ मैं रायगढ़िया(गीतकार- रामेश्वर वैष्णव), अउ खनके जब चूरी जइसे मनभावन गीत गाये हे।

16, *अभिजीत जी*
सुपरहिट छत्तीसगढ़ी फिलिम *मोर संग चलव रे* मा अभिजीत जी ला सुने जा सकथे।
*दिल दीवाना गावय गाना*(फिल्म- मोर संग चलव रे)

17, *महेंद्र कपूर जी*
महेंद्र कपूर साहब मन घलो छत्तीसगढ़ी मा बड़ अकन मनभावन गीत गाये हें। कपूर साहब मन *कहि देबे सन्देश के आलावा मोर धरती मइया फिलिम मा अपन आवाज के जादू बिखेरे हे।* उंखर कुछ गीत के मुखड़ा-

*ऐ वो नखरा वाली, जान देना वो।* (फिलिम- मोर धरती मइया)
*होरे होरे होरे होरे, कोयली कुहके आमा के डार।* (कहि देबे सन्देश)
*संगी हाथ लमाबो, संगी हाथ बढ़ाबो।* (गीतकार- दुर्गाप्रसाद पारकर, फिल्म- मोर धरती मइया )
*दुर्गा भवानी जग कल्याणी*
             *बालीवुड के अउ कतको सिंगर  मन ला मोर धरती मइया फिलिम मा कोरस करत सुने जा सकथे जेमा- *हेमलता, एस ए कादर, चंदारानी,सतीश,अउ दीपमाला जी मन के नाम प्रमुख हे।*

18, *मन्ना डे साहब*
मशहूर गायक मन्ना डे साहब मन छत्तीसगढ़ के पहली फिलिम कहि देबे सन्देश के टाइटल साँग *(कहि देबे सन्देश, दुनिया हा आघू बढ़गे।)* के आलावा रफी जी ला उही फिलिम मा कोरस मा साथ दे रिहिन।

19, *मीनू पुषोत्तम*
*मीनू पुरषोत्तम जी सुमन कल्याणपुरी जी कस कुछ गीत ला कहि देबे सन्देश फिलिम मा अपन आवाज देय हे।*
*बिहनिया के उगत सुरुज देवता।* (कहि देबे सन्देश)
*सुवा गीत- तरी हरी* (कहि देबे सन्देश)
*होरे होरे होरे, कोयली कुहके।* (कहि देबे सन्देश)

20, *कविता कृष्णमूर्ति जी*
 मोर धरती मइया फिलिम मा कविता जी मन मुख्य प्लेबैक गायिका रिहिन हे। उंखर कुछ गीत प्रस्तुत हे-
*मोर बगिया मा तैं गोंदा असन, ममहावत रबे।*
*ये कजुवा के मन डोले, मादर थाप मा।*
*ए गा बैला गाड़ी वाला, लॉन देना*
*तोर संग जीना तोर संग मरना फिलिम मा घलो कविता जी मन अपन स्वर दिये हें।*

21, *बाबुल सुप्रियो*- 
*ए हंसिनी, ए रागिनी, तुही ला मैं गाओं,तोला सपनाओं*
*कुछु कुछु होय गोरी मोला,जोन दिन ले देखेंव गोरी तोला-फिल्म गीत*

22, *कैलाश खेर*- फिल्म भूलन काँदा के टाइटल गीत- भूले से जो खुंद गया

अउ कतको अकन बॉलीवुड के मशहूर गायक गायिका मनके सुर साज मा सजे छत्तीसगढ़ी गीत जे समय बनिस वो समय अउ आजो कर्णप्रिय हे, मनभावन हे। छत्तीसगढ़ के गीत संगीत बॉलीवुड के गायक गायिका मन ला खासा प्रभावित करिस, तभे तो उंखर लगाव,झुकाव अतिक अकन दिखिस अउ आघू घलो दिखही। छत्तीसगढ़ी गीत संगीत मा बॉलीवुड के गायक गायिका मनके योगदान ला कभू नइ भुलाये जा सके। लगभग बनेच अकन बॉलीवुड के गायक गायिका मन छत्तीसगढ़ी गीत ला अपन आवाज दिन,फेर छत्तीगढ़िया मन के रग मा छत्तीसगढ़ के लोकल गायक गायिका मनके गीत जादा रचे बसे दिखथे। केदार यादव जी, साधना यादव जी, लक्षमण मस्तूरिहा जी, भैया लाल हेड़ाऊ जी, कविता वासनिक जी, अनुराग ठाकुर जी, पंचराम मिर्झा जी,धुर्वा राम मरकाम जी, लता खापर्डे जी, राकेश तिवारी जी,मेहतर राम साहू जी,सुनील सोनी जी, ममता साहू जी, कुलवंतीन बाई जी, रेखा बाई देवार जी, पद्मश्री तीजन बाई जी, चम्पा निषाद जी,ममता चन्द्राकर जी, गंगाराम शिवारे जी, अलका चन्द्राकर जी, छाया चन्द्राकर जी,  झाड़ूराम देवांगन जी,ऋतु वर्मा जी,बैतल राम साहू जी, महादेव हिरवानी जी, दीपक चन्द्राकर जी,गोरे लाल बर्मन, दिलीप सडंगी जी, दुकालू यादव जी, कुलेश्वर ताम्रकर, भूपेंद्र साहू,देवदास बंजारे, लक्ष्मीनारायण पांडे, नीलकमल वैष्णव,पूनम तिवारी, नवलदास मानिकपुरी जी जइसे अनेको लोक गायक मनके स्वर, छत्तीसगढ़ के माटी के महक ला छत्तीगढ़िया मनके अन्तस् मा बगरावत दिखथे। छत्तीसगढ़ के कतको नवा जुन्ना गायक मन बॉलीवुड के गीत तको गा चुके हे। तभे तो कथे छत्तीगढ़िया सबले बढ़िया।

जीतेंन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"
बाल्को, कोरबा(छग)

Monday, 14 February 2022

कोकिल कंठी, भारत रत्न लता मंगेशकर जी ल विनम्र श्रद्धांजलि:

 कोकिल कंठी, भारत रत्न लता मंगेशकर जी ल

विनम्र श्रद्धांजलि:

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मध्यप्रदेश इंदौर रियासत के नाम जइसे ही मन मा आथे, सुध-बुध मा संगीत-साहित्य के संचार हो जाथे। ये रियासत हा बड़े बड़े साहित्यकार, अभिनेता, कवि, संगीतकार ला जनम दे हे। इही रियासत मं 28 सितंबर सन् 1929 मं प्रसिद्ध मराठी संगीतकार दीनानाथ मंगेशकर के घर पहली संतान के रूप मं लता मंगेशकर के जनम होइस। पिता, संगीतकार होय के कारण घर मं साहित्य, संगीत के कक्षा निरंतर चलत रहय इही कारण बचपन ले लता के संगे-संग आशा, मीना, उषा अउ हृदयनाथ मंगेशकर पांचों बहन-भाई ला संगीत कला विरासत मं मिलिस। लता जी बचपन ले ही गायिका बनना चाहत रहिस। निर्माता कुंदन लाल सहगल के फिल्म “चंडीदास” ले लता बहुत प्रभावित होइस।

एक दिन पिता के अनुपस्थिति मं संगीत कक्षा लता जी ल देखना पड़गे। सबों विद्यार्थी लता जी के स्वर-साधना मं झूमगे। पिता जी बेटी लता के संगीत स्वर ज्ञान देख अचंभित होगे। अउ कक्षा के दुआरी मं तब तक खड़े रहिस, जब तक संगीत पाठ समाप्त नइ होगे। दीनानाथ जी ला बेटी के भीतर सरस्वती पाके बड़ गर्व होइस।

फिल्म-कीर्ति मं लता जी पहली बार गायिका के रुप काम करिन।  पिताजी नइ चाहत रहिस कि लता फिल्म-संगीत के दुनिया मं कदम रखय। पिता के अनुरोध मं फिल्म ले लता के आवाज हटाए बर पड़िस।

1950-55 के दशक मं फिल्म दुनियां ल हर कोई पसंद नइ करत रहिन। फिल्म मं बेटी जात के  काम करना एक अच्छा घर खानदखान के पहचान नइ माने जाय।

फेर समय ल कोन जानथे, जेन जेकर बर बने रथे ओला बनाय बर समय खुद रद्द बना देथे। 1942 मं पिता के 41 वर्ष के उम्र मं असमय निधन के कारण घर के आर्थिक स्थिति खराब होंगे। चारों भाई बहन मन के पालन-पोषण की जिम्मेदारी के चिंता बड़े दीदी लता ऊपर आगे अइसन परिस्थिति मं बेटी लता,बेटा बनके घर के भार ला बोहलिस।

 परिवारिक जिम्मेदारी खातिर लता जी ला हिंदी और मराठी फिल्म मं काम करना पड़िस। अभिनेत्री के रूप मं उंकर प्रथम फिल्म मंगलागौर रहिन। 1952 मं फिल्म *बड़ी मां* मं लता जी नूरजहां के संग अभिनय करिन। स्वर के रानी ला भला फिल्म अभिनेत्री के रूप मं कइसे मया मिलय? ओला तो संगीत के सिन्हासन मं बईठना रहिस। 1942 मं लता जी के गायन शैली, मधुर कंठ सबके सामने आगे।

फिल्म *महल* के गीत- “आयेगा आनेवाला” सबके जुबान मं आगे। ये फिल्म लता के संगे संग अभिनेत्री मधुबाला घलो ला प्रसिद्ध बनादिस। एंकर बाद एक ले बढ़के एक हीट गीत मं लता जी के नाम लीखागे ।  लता जी कोरी भरके भाषा ले भी ज्यादा भाषा मं 40,000 ले भी ज्यादा गीत गा चूके हे। दुनिया मं सबले ज्यादा गीत गायन के गिनीज बुक रिकॉर्ड घलो उंकर नाम हे।

बछर 1958 ले 1962, 1965, 1969, 1993 अउ 1994 मं लगातार फिल्म फेयर पुरस्कार मिलिस।

 संगे-संग पद्म भूषण, दादा साहब फाल्के, राजीव गांधी पुरस्कार, महाराष्ट्र भूषण जिसे विशिष्ट पुरस्कार उंकर झोला मं हे।   आत्मा ही का नाम ले पुरस्कार की घोषणा अलग स्थान देते लता मंगेशकर फिल्म इंडस्ट्री के व्यक्तित्व भारत दादा साहब फाल्के पुरस्कार के विद्यालय के

लता मंगेशकर फिल्म इंडस्ट्री के पहली अइसन व्यक्तित्व आय जेन भारत रत्न और दादा साहब फाल्के पुरस्कार ले विभूषित हे। लता जी छ: भारतीय विश्वविद्यालय के साथ न्यूयार्क विश्वविद्यालय ले डी.लिट. के मानद उपाधी ले विभूषित हे। लता जी के जित्ते-जियत उंकर नाम ले पुरस्कार के घोषणा उॅंनला विशिष्ट दर्जा वाले पहली पंक्ति मं खड़ा करथे। अइसन विभूति के जगह भविष्य पर कोई ले नइ सकय। 6 फरवरी 2022 के दिन भले उंकर शरीर पंचतत्व मं मिलगे फेर कलाकार कभू मरय नही वो सदा अमर रथे। अइसन व्यक्तित्व, स्वर के देवी ला मोर शत शत नमन।

✍️मिलन मलरिहा

मल्हार बिलासपुर छत्तीसगढ़

Sunday, 13 February 2022

ये दुनिया की रस्म है , इसे मुहब्बत न समझ लेना

 ये दुनिया की रस्म है , इसे मुहब्बत न समझ लेना

                   मेंहा सोंचव के तुलसीदास घला बिचित्र मनखे आय । उटपुटांग , “ भय बिनु होई न प्रीति “ , लिख के निकलगे । कन्हो काकरो ले , डर्रा के , प्रेम करही गा तेमा ...... ? लिखने वाला लिख दिस अऊ अमर घला होगे । मेहा बिश्लेषण म लग गेंव ।  

                  सुसइटी म चऊँर बर , लइन लगे रहय । पछीना ले तरबतर मनखे मन , गरमी के मारे , तहल बितल होवत रहय । सुसइटी के सेल्समेन , खाये के बेरा होगे कहिके , सटर ला गिरावत रहय , तइसने म खक्खू भइया पहुँचगे । गिरत सटर अपने अपन उठगे , खक्खू भइया के चऊँर तऊलागे , पइसा घला नइ दिस । सेल्समेन के चेहरा म , दर्दीला मुस्कान दिखत रहय । भइया ला शरबत घला पियइस । ओकर जाये के पाछू , दुकान के कूलर म टिप टिप ले पानी भराये के बावजूद , हावा गरम गरम फेंके लगिस । सेल्समेन के देंहे , पइसा के भरपाई हिसाबत , पछीना पछीना होगे । लइन म लगे मनखे मनले घला , बिरोध के कन्हो स्वर सुनई नइ दिस बलकि , जम्मो झिन भइया ला हाथ जोर के , नमस्कार तक करिन । ओकर जाये के पाछू , सेल्समेन ला , तैं बिगन लइन लगे कंन्हो ला रासन कइसे दे कहिके बखानिन ..... अऊ अइसन रासन लेगइया बर घला बुड़बुड़इन । यहू तिर , भय दिखिस , फेर पिरीत नइ दिखीस ।

                   मोर गाँव के एक झिन मनखे , अतेक सुंदर लिखय के , जब ओकर रचना छ्पय , बिगन पढ़हे , ओकर संगवारी मन , बहुत सुंदर रचना , बधई हो , अइसे कहय । में सोंचेव , मोरो कभू कभार छपथे , बिया मन एको झिन कहींच नइ कहय । पाछू पता चलिस के , ओकर जम्मो संगवारी मन ओकर ले डर्राथे अऊ उही डर के मारे , बहुत सुंदर रचना कहत , बधई पठो देथे । फेर मोला लागथे , येमा प्रेम कती तिर उपजिस होही ..... ? खैर , बात अइस गिस निपटगे । 

                    लइका के जाति प्रमाण पत्र बर , कतेक दिन होगे रहय , तहसील दफ्तर के चक्कर काटत । बाबू ते बाबू , अर्दली तक ला खवा पिया डरे रहंव । एक दिन तमतमाके आपिस पहुँचेंव , बाबू साहेब ला खिसियाहूँ सोंचेंव । अर्दली मोला बाहिर म छेंक दिस । थोकिन बेर म एक झिन ननजतिया अइस , बिगन रोक छेंक , खुसरिस । आधा घंटा म , हाथों हाथ लइका के जाति प्रमाण पत्र धरके निकल गिस । अर्दली हा आये जाये के दुनो बेरा म नमस्कार ठोंकिस , फेर थोकिन दुरिहइस तहन , फोकट राम कहिके , बखानिस । तुलसीदास जी के , भय बिनु होई न प्रीति , यहू तिर फेल होगे । 

                    तुलसीदास के चौपाई गलत होही त , लोगन येला पढ़थेच काबर । मोर दिमाग चले लइक नइ रहिगे काबर के , चुनई आगे । बड़े बड़े मइनसे मन , नान नान , चाँटी फाँफाँ चिरई चिरगुन कस मनखे मनले , अतेक प्रेम करे लगगे के , ओकर प्रेम गाड़ा म नइ हमावत रहय । नानुक बइगा घर के छट्ठी , पहटिया घर के काठी , रेजा घर के बिहाव , मिस्त्री घर के कथा पूजा , बढ़ई घर के रमायन , चपरासी के लइका के जनम दिन , कोटवार घर के जवारा , कहींच नइ छूटत रहय । इहाँ तक प्रेम उमड़गे रहय के , काकर घर काये होने वाला हे , जेमा जाके , प्रेम बाँट सकन , तेकर तैयारी एडवांस म होये लगगे । कोन ला काये बात के कमी हे अऊ काकर तिर काये बिपदा हे तेला दुरिहाये बर  , एसी म रहवइया बपरा मन , गाँव गाँव , गली गली , जंगल जंगल , धूप छाँव ला झेलत किंजरत रहय । ऊँकर प्रेम के गहराई म .. सागर उथला परगे । उदुपले अतेक प्रेम पाके , मनखे के सुकुरदुम हो जाना स्वाभाविक हे । इही बेरा म , तुलसीदास जी के चौपाई के अर्थ मिलगे । में जान डरेंव तुलसीदास इही बेरा बर लिखे रिहीस होही । चुनई आगे , खुरसी बचाना हे या खुरसी पाना हे । खुरसी गँवाये के या खुरसी तक नइ पहुंच सके के डर हा , बड़का मनखे मन के हिरदे म , अतेक प्रेम भर दिस के , तुलसीदास के चौपाई , अक्षरसह सच होगे के , भय बिनु होई न प्रीति .......। छ्त्तीसागढ़िया का जानय अइसन फरेबी प्रेम ला । प्रेम देवइया अपन मतलब साध के , भेंट लागत , अपन बात कहत , धीरे से मसक दिस –

महफिल में गले मिल के , वो धीरे से कह गए । 

ये दुनिया की रस्म है , इसे मुहब्बत न समझ लेना । 

हरिशंकर गजानंद देवांगन , छुरा .

नंदावत हे छिंद पान के मऊर--

 नंदावत हे छिंद पान के मऊर--


छत्तीसगढ़ में बर-बिहाव में पहली छिंद पान के मऊर के अब्बड़ महत्ब रहय। ओकर बिन कोनो समाज के बिहाव नई होय। बिहाव म सबले बड़े जरूरी चीज मऊर रहय। येला छिंद पान के सुग्घर ढंग ले बनाये रथे। छिंद पान के बुता करईया पारधी जनजाति मन येला बनाये। कोनो-कोनो दूसर समाज के घलो मन जेन ल मऊर बनाये के कला आये बनात रिहिस। पहली मोर बबा रामसिंह सहारे ह रहय त घलो अइसने मऊर बनाये ल आये। अपन तीर-तखार अउ अपन परिवार, समाज के बिहाव म ओला बनाये बर कहय।


छिंद के मऊर छिंद के पान के बनथे। जेला नान्हे बड़े पेड़ ले लु के लाये के पीछू बनाये जाथे। बस्तर के जनजाति मन ले येला जादा बढ़िया ढंग ले बनाये के बुता होथे। छिंद के मऊर बनाना घलो कोई कलाकारी ले कम नई हे। मऊर बनाये के पीछू हरदी के पानी ले रंगाये ले अब्बड़ पिंयर-पिंयर चमक रथे। बीच-बीच म देवी-देवता के फोटू अउ कई रंग के चिकमिकी झिल्ली ल गाँथे ले अउ अब्बड़ सुग्घर दिखथे। बाजार म बिहाव के लगती म जगह-जगह देखे ल मिल जाथे।


छिंद के मऊर बस्तर के खजूर पाम प्रजाति के छिंद के पान ले बढिया बनाये जाथे। जेकर वानस्पतिक नाम फोनिक सिलवेसट्रीस आय,इंकर पत्ता ले चटई,बाहरी,टुकनी घलो बनथे। बस्तर म इंकर पत्ता अउ तना ले घर घलो बनाथे। आदिवासी समाज म मऊर ल बनाके बाजार म बेचे बर लेजथे। जेंकर ले उँकर मन के रोजगार घलो चलथे।


समय के संगे-संग अब बाजार म रंग-रंग के मऊर दिखे ल धर लेहे। अब दुनिया के देखा-देखी चकाचौंध के मारे हमन प्रकृति ले मिले चीज ल बिसरावत जावत हन। अब तो नेंगहा म छिंद के मऊर के उपयोग होवत हवे। तेल-हरदी के दिन नान्हे मऊर जेला तेलमौरी कथे तेहा दुलही-दुलहा के मूड म दिखथे। मंगरोहन, मंडवा,करसा,देवतला के नेंग अउ मऊर सौंपे के समे दाई-माई मन मुड़ म बांध के घूमथे। टिकान के समे साफा म कोई-कोई मनखे जेन ल अब घलो अपन संस्कृति ले लगाव हवे छोटे छिंद के मऊर ल ओधा में खोच ले रथे। नहिते अब साफा के जमाना मे कोई नई पहिरे। आदिवासी समाज में अभी घलो छिंद पान के मऊर अउ सफेद धोती-कुरता अब ले नई छूटे हे। आदिवासी समाज मन आज घलो जुन्ना संस्कृति ल बचा के रखे हवे। इहि मन सहीराये के लाईक संस्कृति बर भीड़े हवय।


अब के समे में छिंद के मऊर पहिरैया मन ल निचट देहाती समझते। नवा-नवा फेशन के लुगरा-कपड़ा ल पहिरे दुलही-दुलही ल पढ़े-लिखे अउ बड़का मनखे मानथे। अपन पुरखा मन के रीति-नीति अउ प्रकृति ले मिले चीज के उपयोग म कोनो बुराई नई हे। जरूरत हवे अईसन ल बढ़ावा देके। जेकर ले छिंद पान के सामान बनइया समाज मन ल रोजगार अउ काम बुता मिलत रहय।



         हेमलाल सहारे

मोहगांव(छुरिया)राजनांदगांव

सोनहा सुरता रामू के (संस्मरण कहिनी)*

 *सोनहा सुरता रामू के (संस्मरण कहिनी)*


ये सोनहा सुरता ले भरे संस्मरण कहिनी ये रामू के , जेखर डर मा गाँव के लोगन मन हा हमर घर के दुवारी मा नई चढ़त रिहिन हे । जेला आज भी पूरा गाँव बस्ती भर के मनखे मन हा सुरता करत पूछत रहिथें , रामू हा तो नइये घर मा कहिके । संगवारी हो ये कहिनी कोनो मनखे के नही , असल मा एक ठन पोसवा कुकुर के आय , जेला हमन घर मा नाँव दे रेहेन रामू । रामू हमर घर के एक ठन सदस्य के बरोबर रहिस , वोला हमर घर के लइका ले सियान तक सबो झीन बड़ मानय । यहाँ तक के गाँव मा पढ़ाय बर अवइया गुरूजी मन तक रामू ला वोकर नाम अउ काम ले जानत रिहिन हे । 


रामू के ननपन : - जब हमन लइकापन मा छोटे छोटे राहन ता नान नान कुकुर के पीला मन ला पोसबो कहिके सउखे - सउख मा घर ले आवत रेहे हन , कुकुर के नान्हे - नान्हे पीला मन हर हम लइका मन बर खिलौना असन राहत रहिस हे । जेखर संग हमन दिन भर खेलन कुदन अपन संग मा खवावन पियावन अउ वोला अपन संग मा दिन भर घुमावन । तभो ले वो कुकुर पीला मन हर घर मा नई टिकत रिहिन भाग जवत रिहिस हे । वो समे हमर घर मा पोठ बारी बेला लगावत रिहिन हे , हमर गाँव हा शिवनाथ नँदिया तीर मा बसे हावय जेहा भर्री भाठा नँदिया कछार संग धनहा डोली मन ले भरे पूरे गाँव आय । वो समे हमर गाँव के आधा ले जादा मनखे मन सब खेती बाड़ी संग जीवन यापन करे बर बारीच बेला लगावत रिहिन हे ।


ओइसने एक दिन हमर घर ददा हा सौदा लेके मंगल के कड़ार बाजार गे रहिस , अउ बाजार ले लहूटती खानी (समे) एक ठन बढ़िया नानकुन सादा के कुकुर के पीला ला अपन संग झोला मा धर के ले आइस । नानकुन कुकुर के पीला देख के हमन अब्बड़ खुश राहन अउ ओखर संग मा बिकट खेलन , ददा हा वोकर नाँव रखे रिहिस रामू । अब कोनो भी बारी जातिस ता रामू ला अपन संग मा लेके जातिस अउ लानतीस । कहे जावय ता बारी हा रामू के डेरा बनगे रिहिस ।

गाय गरुवा बेंदरा भलुवा मन ला बारी रखवार संग कुदाना भगाना वोकर रोज के काम बनगे रहिस । रामू छू अतके बस कहिदेते तहाले ओखर कुदान नई बनत रिहिस हे , बेंदरा भलुवा तो बेंदरा भलुवा मनखे मन हर तक वोकर डर मा हलाकान राहय । 


रामू हा मानो हमर घर के कोनो अइसन सदस्य राहय जेला पूछे बीना बाहर वाले कोनो भी मनखे हमर घर के चौखट मा नई चढ़त रहिस होही । रामू हा घर मा हे कि बारी गेहे अउ घर मा हे ता खुल्ला हे कि बंधाय हे , अइसन पूछ परख हा रामू बर तो रोज के आम बात रहिस । गाँव बस्ती तो गाँव बस्ती हमर घर अवइया सगा पहुना मन घलो वोकर मारे थर राहय , पूरा बस्ती भर रामू ला जानत रिहिस । वोला खतरनाक हे कहिके कतकोन मनखे मन हर वोला मारे के बड़ कोशिश करिन फेर रामू के कुछ नई कर पाइन । मोर ननपन ले लेके पढ़ई लिखई तक लगभग बारह - पन्द्रह बछर ले ऊपर रामू हा हमर संग मा रिहिस , हमर घर के कतकोन लइका मन के बचपन हा रामू के संग बाढ़त खेलत कूदत बीते हे । 


लइका मन रामू ला अपन संग मा घलो खाववत पियावत रहिन हे । एक दिन तो हम सबो ला ये दुनिया ला छोड़ के जानाच हे , ओइसने रामू हर घलो आज हम सब ला छोड़ के चल देहे । भले आज रामू हा हमर संग मा नई हवय फेर वोकर सोनहा सुरता ले भरे वो दिन मन आज ले हमर संग हम सबला याद हे । सिरतोन मा कहिथें ना अगर वफादारी सीखना हे ता कुकुर ले सिखय , जउन हा अपन मालिक बर सरी जिनगी समर्पित होके बुता करथें । नई तो आज के अइसन समे मा तो सग बाप अउ भाई मन घलो मुकर जथें । रामू हा एक ठन जानवर होय के बावजूद भी आज अपन छाप ला हमर बीच अइसे छोड़ के गेहे कि हम वोला आज भी सुरता करत रहिथँन । कहे के मतलब तो आप मन समझी गे होहुँ कि "कर्म इहाँ प्रधान हे" मनखे होय या जानवर (पशु) सब ला इहाँ ओखर करम ले ही जानें अउ पहिचाने जाथें । 


                 *मयारू मोहन कुमार निषाद*

                  *गाँव - लमती , भाटापारा ,* 

               *जिला - बलौदाबाजार (छ.ग.)*