Sunday, 20 August 2023

चन्द्रयान-3*

 *चन्द्रयान-3*


      14 जुलाई 2023 शुक्रवार दिन मंझनिया 2:35 बेरा हा हमर भारत देश अउ दुनिया बर घातेच सुग्घर रहिस जब हमर देश के इसरो संस्था हा अपन तीसरइया मून मिशन चन्द्रयान-3 ला श्रीहरिकोटा ले चंदा के भुँइया मा जायबर छोड़िन। ये यान हा पांच अगस्त के वो आर्बिट मा अमरिस जौन ला हमर वैज्ञानिक मन तय करे रहिन पाछू छै, नौ अउ चउदा अगस्त के चन्द्रयान-3 हा अपन घूमत कक्षा ला छोड़के दूसर रद्दा मा घूमेबर लगगे हे। अब लैंडर ला घलाव अपन ले अलगा डरे हवय। ओहा अब आगू के रद्दा ला अकेल्ला रेंगही।कहे जावत हे कि चंद्रयान-3 हा चंद्रयान-2 के आगू के  बढ़िल भाग आय। जौन हा 23 नइते 24 अगस्त के चंदा के भुंइया मा अमरही।

           अभी तो चंद्रयान-3 हा चंदा कर जावत हवय। एक लाख किलोमीटर के रद्दा ला सत्तर हजार ले आगर दउड़ गे हवय। चंदा हा जइसे गोल गोल घूमते हे वइसने चन्द्रयान-3 ला घलो घुमाके ओखर गति ला काबू करके धीर लगहा उहाँ उतारे जही। पाछू बेरा उतारत खानी चंदा अउ चंद्रयान-२ के चलइ हा नइ संघरिस तेखर सेती अलहन होगे रहिस। तब वैज्ञानिक मन गल्ती ला सुधार के नवा रुप मा चन्द्रयान-3 बनाय गीस।हमन जानथन कि चीन, रूस मन जब अइसने यान भेजथँय ता ओहा तीन - चार दिन मा चंदा मा अमर जाथे हमर चंद्रयान-3 ला अमरे बर अतका जादा दिन एखर सेती लगत हवय काबर कि हमन जंबो राकेट नइ बउरत हवन। जंबो राकेट मा अड़बड़ अकन खरचा आथे। ओखर वजन घलो जादा रहिथे अउ उपर डहर जादा वजनी जिनीस भेजे मा खतरा जादा रहिथे । हमर देश हा कम खरचा मा यान भेजथँय भलुक जादा दिन लगय हमर  चंद्रयान-3 कम वजन अउ कम खरचा मा बने यान हरय। चंद्रयान-3 हा वजनदार हवय। फेर चीन, रुस के यान अतिक वजन नइ हे।चंद्रयान-3 के वजन 3900 किलो हवय। जेमा 2148 किलो प्रोपत्शन माड्यूल अउ 1752 किलो लैंडर माड्यूल हवय।

    चंद्रयान-3 ला चंदा के भुँइया मा तीन बूता करे बर भेजत हवय। पहिली विक्रम लैंडर ला सही सलामत उहाँ उतारही।दूसरइया प्रज्ञान रोवर ला चंदा के भुँइया मा रेंगाही, दउड़ा के देखाही अउ तीसर वैज्ञानिक मन के परीक्षण करे खातिर। ये तीनों बूता के पूरते साट हमर भारत देश के नाव  संसार के 200 ले आगर देश मा चउथा नम्बर के देश मा लिखा जाही अउ कम खरचा मा यान भेजइया दुनिया के पहिला देश बन जाबो। एखर पहिली जब मंगलयान भेजे रहेन तभो हमन संसार के चउथा नम्बर के देश बने रहेन। फेर मंगलयान के बखत एक अउ बात रहिस कि भारत देश हा पहिली पइत मंगलयान भेजिस अउ ओहा पहिलीच पइत मा सही सलामत अमर गे। अइसन करइयाच भारत पहिली देश रहिस तेखर पहिला उदिम हा सफल होय रहिस। चीन रुस जापान मन कइ पइत कतको खरचा करे पाछू सफल हो पाइन। यहू दारी हमन ला ओइसनेच सफलता मिलही अइसे आश लगे हे।


*आज बर अतकेच*


हीरालाल गुरुजी "समय"

छुरा, जिला-गरियाबंद

पुरखा के सुरता// छत्तीसगढ़ म पत्रकारिता के पुरोधा स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी


 

पुरखा के सुरता//

छत्तीसगढ़ म पत्रकारिता के पुरोधा स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी

    आज के नवा छत्तीसगढ़ म पत्रकारिता के भीष्म पितामह के रूप म चिन्हारी रखइया पं. स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी जी जब बाइस बछर के रहिन तभे बछर 1942 म केशव प्रसाद वर्मा जी संग मिल के अग्रदूत समाचार पत्र के संपादन शुरू करे रिहिन हें. तब अग्रदूत ह साप्ताहिक पत्र के रूप म निकलत रिहिसे, जे ह बछर 1983 ले दैनिक समाचार पत्र के रूप म निकले के चालू होइस. अउ ए ह कतका संजोग के बात आय के बछर 1983 म घलो स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी जी ए अखबार संग सलाहकार संपादक के रूप म जुड़े रिहिन हें.

    मोर जिनगी म जे मन लेखन के रद्दा म अंजोर बगरावत डहर देखाय के बड़का उदिम करीन वोमा त्रिवेदी जी के घलो बड़का ठउर हे. वइसे तो मैं अपन लेखक अउ शिक्षक सियान रामचंद्र वर्मा ल घर म लिखत-पढ़त देख के कागज-कलम डहार चेत करेंव, फेर एमा ठोसहा बुता अग्रदूत के कार्यालय म जाए के बाद ही होइस.

    बछर 1982 के आखिर म मैं अग्रदूत अखबार म काम करे बर गेंव, तब अग्रदूत ह साप्ताहिक निकलत रिहिसे. बछर 1983 म ए ह दैनिक होइस. वो बखत मैं ह कम्पोजिटर के रूप म काम करे बर गे रेहेंव. कविता-कहानी लिखे के उदिम तो छात्र जीवन के बेरा ले अपन सियान ल लिखत-पढ़त देख के होगे रिहिस, फेर पत्रकारिता के समझ नइ रिहिसे.

    अग्रदूत के दैनिक चालू होए के बाद एक दिन मैं एक लेख लिखेंव जेला आदरणीय स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी जी ल देखाएंव. वोला देख के उन खुश होगे, अउ वोमा कुछ काट-छांट कर के दैनिक अग्रदूत के संपादकीय वाले पृष्ठ म छाप दिए रिहिन हें. ए ह मोर जीवन के पहला प्रकाशन रिहिसे.

   फेर मैं कविता कहानी तो पहिलीच के लिखत रेहेंव, भले वो मन कभू छपे नइ रिहिसे. आदरणीय त्रिवेदी जी के द्वारा मोर लेख ल छापे के बाद थोरिक हिम्मत बाढ़ीस, त फेर वो बखत दैनिक अग्रदूत म साहित्य संपादक के रूप म काम करत हमर अंचल के प्रसिद्ध व्यंग्यकार रहे विनोद शंकर शुक्ल जी ल अपन कविता अउ कहानी मनला देखाय लगेंव. आदरणीय शुक्ल जी घलो वोमन ल सुधार सुधार के अग्रदूत के साहित्यिक अंक मन म छाप देवत रिहिन हें.

   तब तक मैं हिंदी म ही लिखत रेहेंव. ए ह संयोग के संगे-संग मोर बर सौभाग्य के बात आय के वो बखत अग्रदूत अखबार म स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी जी अउ विनोद शंकर शुक्ल जी के संगे-संग टिकेन्द्रनाथ टिकरिहा जी घलो संपादकीय विभाग म रिहिन हें. पत्रकारिता के क्षेत्र म मोला त्रिवेदी जी प्रोत्साहित करीन अउ साहित्य लेखन डहार शुक्ल जी त छत्तीसगढ़ी लेखन खातिर टिकरिहा जी. एकरे मन के संगत ह मोर जीवन म गुरुकुल के बुता करीस.

    स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी जी के जनम 1 जुलाई बछर 1920 म होए रिहिसे. उंकर सियान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. गया चरण त्रिवेदी जी रिहिन. त्रिवेदी जी के प्राथमिक शिक्षा रायपुर के नयापारा स्कूल म होए रिहिसे. जेला हमन सप्रे स्कूल के नॉव ले जानथन, वो ह तब लारी स्कूल के नॉव ले जाने जाय, जिहां त्रिवेदी जी हाईस्कूल के शिक्षा पाइन. 

    त्रिवेदी जी अपन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सियान ले प्रभावित होके नान्हे उमर ले ही देश के आजादी खातिर रेंगइया मन के रद्दा धर लिए रिहिन हें. बछर 1935 ले उन साहित्य अउ पत्रकारिता म सक्रिय होगे रिहिन हें. हिन्दी साहित्य मंडल रायपुर के साहित्यिक पत्रिका 'आलोक' के उन संपादक बनीन. एकर आगू बछर उनला कांग्रेस के पत्रिका के संपादक चुन ले गे रिहिन. बछर 1942 म केशव प्रसाद वर्मा जी के संग मिल के अग्रदूत के संपादन करे लगिन. बछर 1946 म महाकोशल साप्ताहिक के संपादक बनीन. इही महाकोशल अखबार ह बछर 1951 दैनिक अखबार के रूप म छत्तीसगढ़ के पहला दैनिक अखबार के रूप म चालू होइस, अउ एकर संपादक बनीन स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी जी.

   बछर 1954 ले त्रिवेदी जी मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग म चल दिए रिहिन, जिहां 1978 तक उच्चाधिकारी के रूप म बुता करत रिहिन. 1987 म शासकीय सेवा ले सेवानिवृत्त होए के पाछू फेर दैनिक महाकोशल म संपादक बनगे रिहिन. अउ फेर अग्रदूत ह जब बछर 1983 म दैनिक अखबार के रूप म चालू होइस, त फेर स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी जी एकर सलाहकार संपादक बनीन. अइसे किसम देखे जाय त त्रिवेदी जी अपन पूरा जिनगी कलम के साधना म मगन रिहिन. ए बखत उन पत्रकारिता के संगे-संग साहित्य सृजन घलो करत रिहिन. मैं उंकर कतकों कहानी अउ कविता मनला अग्रदूत म पढ़त रेहेंव.

   आदरणीय त्रिवेदी जी मोला गजब मया करंय. वइसे तो अग्रदूत अखबार के कार्यालय म अबड़ झन कर्मचारी रेहेन, फेर उन सब मा मैं अकेल्ला रेहेंव जेकर संग उन छत्तीसगढ़ी भाखा म गोठियावंय. अइसने जब कभू अपन घर ले कोनो पत्र-पत्रिका आदि मंगवाना या पहुँचाना होवय, त मुहिच ल जोंगय. उंकर घर तब अग्रदूत प्रेस ले पांच मिनट के रद्दा म ही रिहिस. बाद म मैं जानेंव, के उंकर बेटा के घलो नॉव मोरे असन 'सुशील' हावय. त मोला समझ आइस उंकर अतेक दुलार के कारण ह. आदरणीय त्रिवेदी जी के बेटा आज हमर छत्तीसगढ़ म वरिष्ठ साहित्यकार के रूप म प्रतिष्ठित हावंय- डॉ. सुशील त्रिवेदी जी, जे मन छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद ले सेवानिवृत्त होए हावंय. डॉ. त्रिवेदी जी संग घलो मोर मयारुक संबंध हे. उंकर संग जब कभू भेंट होथे त उन मोला नॉव ले के संबोधित नइ करंय, भलुक हमर छत्तीसगढ़ी परंपरा के अनुसार 'सहिनॉव' कहिथें.

   स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी जी बछर 1935 ले ही साहित्य अउ पत्रकारिता के रद्दा म रेंगे लगे रहिन हें. 1935 म उन हिंदी साहित्य मंडल के गठन करे रिहिन हें. 1940 के दशक म हिंदी साहित्य सम्मेलन के साहित्य मंत्री रिहिन. वोमन हमर मन असन नवा पीढ़ी ल सरलग आगू बढ़े खातिर प्रोत्साहित करत रिहिन. बछर 1951 म हिंदी साहित्य सम्मेलन के अधिवेशन जबलपुर म होए रिहिसे, तब पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी ल अध्यक्ष अउ स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी जी ल प्रधानमंत्री चुने गे रिहिसे. 

    स्वराज्य प्रसाद त्रिवेदी जी सरलग लिखत तो रिहिन हें, संग म छपत घलो रिहिन हें. कविता संग्रह भूख, बरसों बाद भाषण के पौधे हरियाये, स्वराज गान अउ आदमी रहे न रहे बात रह जाती है, तीसरा किनारा आदि साहित्यिक कृति मन के प्रकाशन होय रिहिसे. 

    साहित्य अउ पत्रकारिता दूनों के रद्दा म त्रिवेदी जी के कलम जिनगी के अंतिम बेरा तक सरलग चलत रिहिसे. उन 11 जुलाई 2009 के ए नश्वर दुनिया ले बिदागरी ले के परमधाम के रद्दा धर लिए रिहिन हें. उंकर सुरता ल पैलगी जोहार.

-सुशील भोले

संजय नगर, रायपुर

मो/व्हा. 9826992811

20 अगस्त पुण्यतिथि म सुरता// त्याग अउ करुणा के देवी रहिन नगरमाता बिन्नी बाई सोनकर


 

20 अगस्त पुण्यतिथि म सुरता//

त्याग अउ करुणा के देवी रहिन नगरमाता बिन्नी बाई सोनकर

    "मैं नून चटनी म बासी खाके जी लेहूं फेर कोनो किसम के सरकारी सहायता नइ झोंकव" ए कहना रिहिस रायपुर नगर निगम द्वारा नगरमाता के उपाधि ले सम्मानित बिन्नी बाई सोनकर के. 

    आज के बेरा म जब लोगन अपन अंगरी के नख ल कटा के शहीद होए के या कुछ एती-तेती के उदिम कर के समाजसेवी अउ दानदाता होए के देखावा करत सरकारी पद अउ पइसा झोंके बर लुलुवालत रहिथें, अइसन बेरा म हमन बिन्नी बाई सोनकर सहीं वइसनो देवी के साक्षात दर्शन करे हावन, जेन ह अपन पैतृक खेती-खार के संगे-संग साग-भाजी बेच-बेच के अपन जिनगी भर के सकेले पइसा ल लोककल्याण के कारज सेती दान कर दिए रिहिसे अउ जब सरकार ह बदला म उंकर बुढ़ापा ल देखत मासिक पेंशन दे खातिर घोषणा करिस त वो सोज्झे कहि दिस- "मैं नून चटनी म बासी खाके जी लेहूं फेर सरकार के कोनो किसम के सहयोग नइ झोंकौं."

     रायपुर के पुरानी बस्ती स्थित सोनकर पारा म घुटरू सोनकर अउ महतारी रामबाई के घर सन् 1927 म जनमे बिन्नी बाई सोनकर ल हमन छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति के सदस्य रहे रामबिशाल सोनकर के माध्यम ले जानेन. तब हमू मन साहित्य समिति के सदस्य रेहेन, अउ हर इतवार के टिल्लू चौक के देवबती सोनकर धरमशाला म होवइया कवि गोष्ठी म जावत रेहेन. रामबिशाल जी बिन्नी बाई के भतीजा रिहिस, जेकर संग जा-जा के ही बिन्नी बाई ह जम्मो किसम के दान-धरम अउ सामाजिक कारज ल करय.  रामबिशाल जी हमन ल बिन्नी बाई के समाजसेवा अउ दानशीलता के बारे म बतावंय तब हमूं मन बिन्नी बाई के घर उंकर संग भेंट करे बर चल देवत रेहेन. 

    ए बात ल तो सबो जानथें, के तइहा के बेरा म सियान मन पढ़ई-लिखई ल जादा महत्व नइ देवत रिहिन हें. तेमा नोनी मनला पढ़ाए के तो चेते नइ करत रिहिन हें. एकर ले जादा उंकर मन जगा रंधना-गढ़ना अउ खेती-किसानी के बुता जादा करवाए जाय. बिन्नी बाई ल घलो स्कूल के बदला रंधनी खोली अउ पैतृक धंधा बारी-बखरी म भेज दिए गिस. संग म बारी के साग-भाजी टोरई अउ बजार लेग के बेचई म लगा दिए गिस. 

    उमर के बाढ़ते उंकर बिहाव ल भांठागांव के आंधू सोनकर संग कर दिए गिस. बिहाव के दू बछर के होवत  उन एक नोनी के महतारी घलो बनगें, जेकर नांव धरिन फागन. तभो बिन्नी बाई ल ससुरार के जइसन सुख मिलना रिहिस, तइसन नइ मिलिस. उंकर जांवर-जोड़ी के संगति ह बने नइ रिहिस, तेकर सेती वो पियई-खवई अउ जुआ-चित्ती के चिभिक म बुड़गे राहय.

    ए बीच बेटी फागन ह बर-बिहाव के लाइक होगे, त फेर वोकरो बिहाव ल रायपुरे के रामकुंड म बसंत सोनकर संग कर दिस. एकर खातिर बिन्नी बाई ल अपन महतारी-ददा के सहयोग लेना परिस. 

    बेटी के बिदा करे के बाद तो बिन्नी बाई के जिनगी अउ जादा पीरा म समागे, त थक-हार के वोहा अपन ससुरार ल छोड़ के अपन मइके आगे, अउ इहें अपन पुरखौती रोजगार म हाथ बटाए लागिस. रोज पुरानी बस्ती ले  रामकुंड के बारी रेंगत जावय. उहाँ कुआँ म टेड़-टेड़ के साग-भाजी के कियारी मन म पानी पलोवय अउ टोरे के लाइक साग-भाजी ल टोर के बजार लेगय अउ अपन सियान के पसरा म बइठ के उनला बेंचय. जब जमो बेचा जावय त रतिहा 8-9  के बजत घर लहुट आवय.

    कुछ दिन बाद उंकर महतारी सियान दूनों वोला छोड़ के ये दुनिया ले बिरादरी ले लेइन. तब बिन्नी बाई निच्चट अकेल्ला रहिगे. काबर ते वोकर बेटी घलो अपन घर-परिवार म रमगे राहय, वो अपन दाई-ददा के कभू सोर नइ लेवत राहय.

    दाई-ददा के सरग सिधारे के बाद बिन्नी बाई के जिनगी  भइगे मशीन बरोबर होगे राहय, सूत के उठे ले लेके रतिहा सोवा के परत ले बस काम काम अउ काम. इही बीच वोकर मन म भाव जागिस- आखिर ए सब मैं काकर बर करत हौं? आखिर अतका पइसा ल मैं का करहूं? नता-गोता मन तो मोर ए पइसा खातिर लड़ई-झगरा  मता डारहीं. तेकर ले कुछ अइसे करे जाय जेकर ले गरीब गुरबा मन के मदद हो जाय, मैं उंकर सहारा बन जावंव. 

    तब उन अपन जम्मो धन-दोगानी ल जनकल्याण के कारज म लगाए के गुनिस. सबले पहिली वो ह अपन घरे जगा के लोहार चौक म शिव मंदिर बनवाइस. अपन खुद तो पढ़-लिख नइ पाए रिहिसे, तेकर पीरा जानत 1987-88 म अपन कुशालपुर रिंग रोड के जमीन ल बेच के रामकुंड म एक प्रायमरी स्कूल खोलवाइस. ए स्कूल ल अभी बिन्नी बाई सोनकर के नांव ले ही जाने जाथे. 

    सन् 1993 म जब उन इलाज खातिर इहाँ के बड़े अस्पताल पं. जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल हास्पिटल म भर्ती रिहिस, त देखिस के उहाँ इलाज करवाए बर दुरिहा-दुरिहा के लोगन आथें. फेर उंकर रूके-ठहरे खातिर उहाँ कुछुच नइए, खाए-पीए बर बने गतर के जगा नइए. ए सबला देख के उंकर मन म पीरा जागिस अउ वो उहाँ धरमशाला बनवाए के गुनिस. एकर खातिर उन अपन जिनगी भर म साग-भाजी बेंच-बेंच के जोड़े 10 लाख रुपिया ल सरकार ल दे दिए रिहिसे ए धरमशाला के कारज वतका म पूरा नइ हो पाइस त पांच लाख अउ दिए रिहिन हें. जेकर ले बने धरमशाला के 1997 म बिन्नी बाई के नांव ले ही उहाँ उद्घाटन होइस. तब के मुख्यमंत्री ह वो धरमशाला के उद्घाटन करत बिन्नी बाई ल हर महीना एक हजार रुपिया पेंशन दे के घोषणा करे रिहिसे, जेला बिन्नी बाई ह 'मैं नून चटनी म बासी खा लेहूं फेर सरकार के कोनो सहायता ल नइ झोंकंव' कहे रिहिसे. 

     बिन्नी बाई सोनकर के अइसने जनकल्याण के कारज मनला देखत रायपुर नगर निगम डहार ले 1998 म उनला "नगरमाता" के  उपाधि ले सम्मानित करे गे रिहिसे. छत्तीसगढ़ शासन के समाजसेवा के क्षेत्र म दिए जाने वाला प्रतिष्ठित पुरस्कार 'मिनी माता सम्मान' ले घलो बिन्नी बाई सोनकर ल सम्मानित करे गे रिहिसे. 20 अगस्त 2004 के ए दया अउ करुणा के देवी ह अपन नश्वर देंह ल छोड़ के परमधाम के रद्दा धर लिए रिहिसे.

    इहाँ ए जानना जरूरी हे, तब अभी के डाॅ. अंबेडकर अस्पताल के तब नांव नइ धरा पाए रिहिसे, तब हमन वो अस्पताल के नांव ल बिन्नी बाई के नांव म करे खातिर मांग करे रेहेन. फेर इहाँ राष्ट्रीयता के नांव म क्षेत्रीय उपेक्षा के जेन खेल चलत हे, तेन ह पहिली घलो चारों मुड़ा दिखय. आखिर हमर समिति के प्रयास ले भांठागांव के हाई स्कूल के नांव ल " नगरमाता बिन्नी बाई सोनकर शा. उ. मा. विद्यालय " करे गिस. मैं बिन्नी बाई ले बहुतेच प्रभावित रेहेंव, तेकर सेती उंकरे संदर्भ म कुछ कल्पना के सहारा लेवत एक कहानी घलो लिखे रेहेंव- 'धरमिन दाई' ए कहानी ह मोर संकलन 'ढेंकी' म संकलित हे.

    आज बिदागरी तिथि के बेरा म उंकर सुरता ल पैलगी जोहार...

-सुशील भोले

संजय नगर, रायपुर

मो/व्हा. 9826992811

चंद्रयान

 *चंद्रयान-3*


    मनखे सुरुच ले खोजी प्रवृति के आय ।आदिमनखे आगी के खोज करिस अउ जंगली जंतु ले अपन जीव ला बचाइस।चक्का के खोज करिस अउ कृषि जीवन ला अपनाइस।अउ धीरे धीरे विकास के रद्दा मा आघू बढ़त गिस।

मशीन के खोज,भाप इंजन के खोज ,बिजली के खोज,इन सब मन मनखे के सोच ला पंख दिहिस अउ सहिच मा वो हा हवाई जहाज मा बइठ के अकास मा उड़े लागिस अउ अब ओखरो ले आघू के सोचे लागिस।ये दरी मनखे अंतरिक्ष मे पहुँच गिस।पहली उपग्रह स्पूतनिक-1 ला सोवियत संघ हा 1956 मा प्रक्षेपित करिस। अउ दुनिया मा अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा शुरू होगे।  पहली चन्द्र इम्पेक्ट लूना-2,पहिली बिनमनखे चन्द्र सॉफ्ट लैंडिंग लूना -9 सोवियत संघ हा भेजिस ।

         आजादी मिले के  बाद हमर देश हा घलौ विकास के रद्दा मा रेंगे बर धर लिहिस।अउ सबो क्षेत्र मा उन्नति करे लागिस ता अंतरिक्ष के क्षेत्र मा कइसे पाछू रहितिस।काबर कि तइहा ले विज्ञान प्रौद्योगिकी मा हम कखरो ले कम नइ रहेन जंतर-मंतर येखर उदाहरण आय।हमर ज्योतिष विज्ञान तो ग्रह नक्षत्र के चाल के गणना सुरुच ले करत हे।सन् 1975 मा 19 अप्रेल के दिन हमू अपन पहिली उपग्रह आर्यभट्ट ला प्रक्षेपित करेंन अउ अंतरिक्ष मा अपन गोड़ ला जमखम ले धरेन।

            ननपन ले चंदा करा हमर अलगेच लगाव हावय।चन्दा  ममा ला देखात देखात कब हमर दाई हर हमर मुँह मा दूध भात ला चुपे चुप डार देवय हमला पता नइ चले अउ हमर पेट भर जावय।एक ठन गीत  घलौ हावय-

          *चन्दा मामा दूर के ,पुये पकाये गुड़ के

          आप खाये थाली में,हमको दे प्याली में*

  कवि मन चंदा कस सुग्घर मुँह ला कहे हे।अउ कतको गीत लिखे हे।

       भारत के पहिली चंद्र मिशन 22 अक्टूबर 2008 के दिन पीएसएलवी-सी11 ले भेजे गिस जेहा चंदा के चारों मुड़ा 3400 ले आगर  परिक्रमा करिस 29 अगस्त 2009 के संचार छूट जाय ले ये मिशन ला बंद करे बर पड़िस येला चंद्रयान-1 कहे गिस। येखर उद्देश्य हमर भुइयाँ  के लकठा अउ दूरिहा ले एटलस बनाई अउ चंदा के रासायनिक खनिज नक्शा बनाई।

 चंद्रयान1 ले चंदा के भुइयाँ मा पानी अउ हायड्राक्सिल(OH) के अणु के पता लगिस।चंद्र भुइयाँ मा मैग्नीशियम,एल्युमिनियम, सिलका,कैल्शियम के उपस्थिति के पता लगिस। चंद्रयान 1  हा 1380 किलो वजनी रहिस। येखर कंपोनेंट मा ऑर्बिटर लैण्डर प्रज्ञान रोवर रहिस हे।

         चंद्रयान 2 ला 2019 मा  15 जुलाई के लॉन्च करे गिस।  फेर डाटा मा असामान्य तापमान के कारण ये अभियान घलौ विफल होगे।येखर कम्पोंनेंट मा ऑर्बिटर लैण्डर अउ रोवर रहिस हे।ये हा चंदा के धरातल के अबड़े कन फोटो भेजिस।चन्द्रयान2 ला चांद सामरिक वैज्ञानिक तकनीकी अवधारणा के अध्ययन अउ अनुसंधान बर भेजे गिस। चंद्रयान2 हा चंद्र सतह ले 2.1 किमी.के दूरी ले चुक गिस फेर चंद्र भुइयाँ मा हीलियम 3 के उपस्थिति के पता चलिस।चंद्रयान 2 हा 3850 किग्रा. वजनी रहिस ।चन्द्रयान2 के समय इसरो के अध्यक्ष के.सिवान जी रहिन।

         चंद्रयान 3 हा चंद्रयान 2 के अनुवर्ती मिशन आय। शुक्रवार 14 जुलाई 2023 के दिन आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र ले मंझनिया के बेरा 2 बजके 35 मिनट मा लांच करे गिस इसरो के प्रमुख एस.  सोमनाथ अउ डायरेक्टर मोहन कुमार के मार्गदर्शन मा।येखर कम्पोनेंट मा ऑर्बिटर रोवर हे।

चंद्रयान 3 हा 3900 किग्रा. वजनी हावय। येखर काम चंदा के भुइयां मा जाके बेहतरीन अउ उच्चतर रचना के पता लगाना हे। लान्चिंग के बाद ले चंद्रयान3 हा हमर भुइयाँ के  5 परिक्रमा कर डारे हे।अउ चंदा के कक्ष मा  5 अगस्त के पहुँच गिस हे।बुधवार 16 अगस्त तक चंदा के आखरी अउ पाचवाँ कक्ष मा पहुँच गिस। गुरुवार के दिन  चंद्रयान के लैण्डर मॉड्यूल ले अलग हो जाहि अउ 23 अगस्त के दिन संझौती बेरा मा चंदा के दक्षिणी ध्रुव मा सॉफ्ट लैंडिंग करहीं।अउ ये तरह से 23 अगस्त 2023 के दिन हा भारत के इतिहास मे सोनहा आखर मा लिखा जाहि।  अमेरिका, रूस,चीन के पाछू भारत चौथइया देश बन जाही हमर चंदा ममा के घर जवइया।

          मंगलयान 3 मा मातृ शक्ति के योगदान घलौ हावय। मिशन डायरेक्टर रितु करिधाल ला राकेट वुमन कहे जाथे।टेशी थामस अग्नि पुत्री के नाव ले जाने जाथे।एम.वनिता, अनुराधा टीके,एन.वलरमती,मोमिता दत्ता, मंगला मणि,कृति फौजदार, मीनाक्षी संपूर्णेश्वरी सहित 54 महिला वैज्ञानिक मन  अपन अपन  बुता ला करे मा पुरुष मन ले पाछू नइ रहिन।

                 हमर छत्तीसगढ़ बर घलौ ये  हा अबड़े गरब के बात आय के इहाँ

 के होनहार बेटा मन घलौ चंद्रयान 3 मिशन ले जुड़े हावयँ, बिलासपुर के विकास श्रीवास, भिलाई के पढ़े बालाजी नटराजन, सरगुजा के निशांत सिंह, जांजगीर जिला के बनारी गाँव के मनोज।

       हम जम्मो देशवासी मन 23 अगस्त के रद्दा जोहत हन जब हमर चंद्रयान 3 चंदा ममा मा उतरहि।अउ अपन अपन भगवान ले चंद्रयान 3 के सफलता के बिनती बिनोवत हावन।

     

 हे विघ्नहर्ता! जम्मो विघ्न बाधा ला दूरिहा करव।



चित्रा श्रीवास

बिलासपुर

छत्तीसगढ़

Saturday, 19 August 2023

देश के आजादी मा छत्तीसगढ़ी साहित्यकार मन के योगदान


 

देश के आजादी मा छत्तीसगढ़ी साहित्यकार मन के योगदान


साहित्य ल समाज के दर्पन कहे जाथे. साहित्य के माध्यम ले जुन्ना बेरा के संगे संग वर्तमान बेरा के स्थित - परिस्थिति हा मालूम होथे. साहित्य ले हमर इतिहास के जानकारी होथे ता साहित्य हा इतिहास घलो गढ़थे. बंकिम चन्द्र चटर्जी के आनंद मठ के "वंदेमातरम", श्याम लाल पार्षद के "विजयी विश्व तिरंगा प्यारा", डा. मोहम्मद इकबाल के" सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा",रामप्रसाद बिस्मिल के "सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है",सुभद्रा कुमारी चौहान के "खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी "जइसन कालजयी रचना हा भारतवासी मन मा जिहां आजादी बर प्रेरणा दिस ता देश खातिर अपन जान के बाजी घलो लगा दिस. भारतेंदु हरिश्चंद्र हा" भारत दुर्दशा "लिखके जनता मन मा जागृति फैलाइस. हमर छत्तीसगढ मा घलो बुधियार साहित्यकार मन हा अपन फर्ज ला सुग्घर ढंग ले निभाइन. पं सुंदर लाल शर्मा,  गिरवर दास वैष्णव,कुंज बिहारी चौबे, खूबचंद बघेल, हरि ठाकुर, केयूर भूषण,कोदू राम दलित, द्वारिका प्रसाद तिवारी विप्र अउ आने  बुधियार साहित्यकार मन अपन कलम के माध्यम ले जिहां जन जागरण फैलाइस ता खुद आंदोलन के अगुवाई  घलो करिन.  माधव राव सप्रे हा सन 1900 मा पेण्ड्रा ( बिलासपुर) ले एक साहित्यिक पत्रिका' छत्तीसगढ़ मित्र ' के प्रकाशन करिन ता राजनांदगांव मा त्यागमूर्ति ठाकुर प्यारेलाल लाल सिंह हा सन 1909 मा सरस्वती पुस्तकालय के स्थापना करिन. येकर माध्यम ले छत्तीसगढ़ के जनता मा जागृति आइस.  असहयोग आन्दोलन के बेरा मा  छात्र मन शासकीय स्कूल के बहिष्कार करिन. अइसन स्थिति मा 5 फरवरी 1921 मा रायपुर मा एक राष्ट्रीय विद्यालय खोले गिस. विद्यालय के स्थापना खातिर माधव राव सप्रे हा सियान मन के बैठक बुलाईस. येमा स्थानीय नेता मन के संग पं. रविशंकर शुक्ल के सक्रिय सहयोग रीहिन. पं. माखनलाल चतुर्वेदी जी हा राष्ट्रीय जागरण के उद्देश्य ले कर्मवीर पत्रिका के संपादन करिन. चतुर्वेदी जी ला अंगेज सरकार हा गिरफ्तार कर लिस .12 जून 1921 मा आरोप लगा के कारावास के सजा दे दिस.ये घटना के विरोध मा बिलासपुर मा पं. रविशंकर शुक्ल के अध्यक्षता मा एक बड़का सार्वजनिक सभा होइस. येमा प्रमुख वक्ता ई. राघवेन्द्र राव रीहिन. येकर ले बिलासपुर मा अंग्रेजी शासन के विरुद्ध असंतोष पनप गे.


ता आवव‌ हमन हमर छत्तीसगढ के साहित्यकार मन के आजादी मा कइसन योगदान हे वोकर चर्चा करथन.


पं. सुंदर लाल शर्मा - छत्तीसगढ़ के गांधी नांव ले प्रसिद्ध पं. सुंदर लाल शर्मा हा हमर छत्तीसगढ मा सामाजिक अउ राजनीतिक आंदोलन के अगुवा माने जाथे. वोहा बड़का साहित्यकार के संगे संग स्वतंत्रता सेनानी रिहिस.प्रयागराज राजिम के तीर चमसूर गांव मा सन 1881 मा अवतरे शर्मा जी हा दानलीला प्रबंध काव्य लिख के प्रसिद्धि पाइस ता आजादी के आंदोलन मा घलो बढ़- चढ़ के भाग लिन. अनुसूचित जाति मन के उद्धार खातिर अब्बड़ योगदान दिस ता वोमन ला राजीव लोचन मंदिर मा प्रवेश कराके एक बड़का कारज करिस. येकर बर खुद वोकर समाज ले नंगत ताना सुने ला पड़िस.  पर वोहा हार नइ मानिस. ये कारज ला तो वोहा सन 1917 ले चालू कर दे रिहिन तभे तो जब महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ आना होइस ता ये काम बर वोला अपन गुरु कहिके  अब्बड़ सम्मान दिस.


शर्मा जी हा अपन राजनीतिक जीवन के शुरूआत सन 1905 ले करिन. 1906 मा वोहा सामाजिक सुधार अउ जनता मा राजनीतिक जागृति फैलाय खातिर "संमित्र मंडल" के स्थापना करिन.1907 के सूरत कांग्रेस अधिवेशन मा शर्मा जी हा भाग लिस. इहां उपद्रव के बेरा लोकमान्य बालगंगाधर तिलक ला मंच मा चढ़ाय मा जउन लोगन मन के भूमिका रिहिन वोमा नवजवान शर्मा घलो अगुवा रिहिन. ये अधिवेशन मा कांग्रेस हा गरम अउ नरम दल मा बंटगे. कांग्रेस अउ देश मा मा नवा तेवर के नेता लोकमान्य बालगंगाधर तिलक,लाला लाजपतराय अउ विपिन चन्द्र पाल हा अब्बड़ लोकप्रिय नेता के रूप मा उभरिन.


रायपुर मा सतनामी आश्रम खोलिस.वोहा सतनामी भजनावली ग्रंथ के रचना करिन. शर्मा जी हा लाल-बाल-पाल युग मा सन 1910 मा राजिम मा पहली स्वदेशी दुकान लगाय के कारज करिन.  शर्मा जी हा सन 1918 मा भगवान राजीव लोचन मंदिर राजिम मा कहार मन के प्रवेश के आंदोलन चलाइस.


सन 1920 मा असहयोग आंदोलन के बेरा मा हमर छत्तीसगढ मा कंडेल सत्याग्रह चलिस. येकर अगुवाई शर्मा जी, नारायण लाल मेघावाले अउ छोटे लाल श्रीवास्तव हा करिन.  किसान मन नहर जल कर ले नंगत परेसान रिहिस. शर्मा जी के अब्बड़ प्रयास ले 20 दिसंबर 1920 मा गांधीजी के रायपुर,धमतरी अउ कुरूद आना होइस. गांधीजी के पहली बार छत्तीसगढ़ आय ले इहां के जनता मा अब्बड़ उछाह छमागे. अइसन बेरा मा अंग्रेजी शासन ला झुके ला पड़िस अउ किसान मन के नहर जल कर हा माफ कर दे गिस.

21 जनवरी 1922 मा सिहावा नगरी मा जंगल सत्याग्रह होइस. लकड़ी काट के ये सत्याग्रह के शुरूआत करे गिस.येकर मौखिक सूचना वन विभाग के स्थानीय अधिकारी मन ला दे गिस.

येकर अगुवाई शर्मा जी अउ नारायण लाल मेघावाले करिन. इंहा वन विभाग के अधिकारी मन आदिवासी जनता ला कम मजदूरी देवय.संगे संग आने प्रकार ले शोषण क‌रय. आंदोलन के जोर पकड़े ले आदिवासी मन के मांग मान ले गिस. इही बेरा मा शर्मा जी ला अंग्रेज शासन हा गिरफ्तार कर लिस. वोला एक बछर अउ मेघावाले ला आठ माह के सजा सुनाय गिस.  ये बेरा मा 1922 मा जेल पत्रिका ( श्रीकृष्ण जन्म स्थान) रचना लिखिस.


शर्मा जी हा " भारत में अंग्रेजी राज" रचना लिखे रिहिन तेला अंग्रेज सरकार हा प्रतिबंधित कर दिस.

23 नवंबर 1925 मा शर्मा जी के अगुवाई मा अछूतोद्धार खातिर अस्पृश्य लोगन के एक बड़का समूह हा  राजीव लोचन मंदिर मा प्रवेश करके पूजा- पाठ करिन. अनुसूचित जाति मन ला जनेऊ धारन करवाइस. 

 23 से 28 नवंबर 1933 के बीच गांधीजी के दूसरइया बार छत्तीसगढ़ मा आना होइस. ये बेरा मा गांधी जी हा अछूतोद्धार कारज के अवलोकन करिन अउ अब्बड़ प्रशंसा करिन.28 दिसंबर 1940 मा शर्मा जी के निधन होइस. ता ये प्रकार ले हम देखथन कि शर्मा जी के सोर साहित्य के संगे संग आजादी के सेनानी के रूप मा बगरिस.वोहा संवेदनशील रचनाकार के संगे संग मंजे हुए राजनीतिज्ञ रीहिन. शर्मा जी हा छत्तीसगढ़ राज्य के प्रथम संकल्पना करिन 


कुंजबिहारी चौबे - संस्कारधानी राजनांदगांव मा 15 जुलाई 1916 मा जनम होइस.सिरिफ 16 साल के उमर ले वोहा हिंदी अउ छत्तीसगढ़ी मा रचना लिखे के चालू करिस.वोकर कविता मा आक्रोश, क्रांतिकारी विचार, निर्भीकता, स्वाभिमान अउ विद्रोह के भाव राहय. वोकर पहिचान विद्रोही कवि के रूप मा होइस. वोहा कर्म ले क्रांतिकारी अउ मन ले कवि रीहिन.स्वतंत्रता आंदोलन मा छत्तीसगढ़ के क्रांतिकारी कवि के रूप मा नांव ले जाथे.विद्रोही कवि के रुप मा पहचान बनइया चौबे जी के प्रमुख कविता मा " बियासी के नागर","मैं पापों का शुचि गान किया करता हूं "शामिल हावय. छात्र जीवन मा अपन स्कूल मा अंग्रेज मन के झंडा ला निकाल दिस तेकर सेति वोला बेत ले मारे गिस तभो ले ये वीर बालक हा भारत माता की जय अउ महात्मा गांधी की जय बोलत रिहिन. वोकर ये रचना ले अब्बड़ प्रसिद्ध कमाइस - "अंग्रेज तंय हा हमला बनायेस कंगला, लूट - लूट के तंय हा टेकायेस बंगला".वोकर 100 कविता के संग्रह" अवशेष " नांव ले प्रकाशित होइस. छत्तीसगढ़ी मा कम रचना उपलब्ध होय के कारण साहित्यकार पं. दानेश्वर शर्मा जी हा येला छत्तीसगढ़ के चंद्रधर शर्मा गुलेरी किहिस. सन 1943 मा कम उमर मा ये विद्रोही कवि के देहावसान होगे. 


द्वारिका प्रसाद तिवारी विप्र - 


छत्तीसगढ़ ला एक अलग राज्य के रूप मा स्थापित करे खातिर साहित्य अउ जन आंदोलन के माध्यम ले सुग्घर उदिम करइया रचनाकार मन मा पं. द्वारिका प्रसाद तिवारी' विप्र ' के नांव प्रसिद्ध हे.


 विप्र जी के जनम 6 जुलाई 1908 मा बिलासपुर मा  अउ 2 जनवरी 1982 मा निधन होइस.  विप्र जी 1922 ले सरलग 60 बछर तक छत्तीसगढ़ी अउ हिंदी मा हजारों कविता, निबंध अउ एकांकी के सृजन करिन.विप्र जी हा नवजवान रीहिन तब ले छत्तीसगढ़ अउ छत्तीसगढ़ी के सेवा बर अपन जिनगी ला समर्पित कर दिस. उंकर पहली किताब" कुछु कांही" सन 1934 मा प्रकाशित होइस.पर 1958 मा प्रकाशित उंकर कविता संग्रह " सुराज गीत" ले अब्बड़ लोकप्रिय होइस. उंकर जिनगी एक रचनात्मक आंदोलन रीहिन. विप्र जी कवि सम्मेलन मा खूब सराहे गिस. विप्र जी के गीत 'धमनी के हाट' आजो जन जन मा लोकप्रिय हावय. 


कृति - सुराज गीत,  गांधी गीत , धमनी के हाट , कुछु कांही,डबकत गीत,राम अउ केंवट संवाद. विप्र जी के रचना के संकलन नंद किशोर तिवारी जी के संपादन मा लोकाक्षर पत्रिका के द्वारा प्रकाशित कराय गे हावय. 


गिरिवर दास वैष्णव - वैष्णव जी के जनम सन 1897 मा बलौदा बाजार के गांव मांचाभाठा देंदुआ मा होइस.


कृति- छत्तीसगढ़ सुराज गीत


कोदू राम दलित - जन कवि कोदू राम दलित  कुंडलियां लेखन खातिर अब्बड़ प्रसिद्ध हे. वोहा छत्तीसगढ़ के गिरधर कवि राय के नांव ले प्रसिद्ध हावय.दलित जी के जनम 5 मार्च1910 मा  बालोद जिला के अर्जुन्दा ले लगे गांव टिकरी मा होय रीहिस. दुर्ग मा शिक्षकीय कार्य के दायित्व निभावत साहित्य सेवा करिन.दलित जी के रचना मा अंग्रेजी शासन के खिलाफ प्रतिकार देखे ला मिलथे या दूसर कोति  गांधीवादी विचारधारा ले ओत प्रोत रचना के सृजन करे हावय. दलित जी के रचना मा सियानी गोठ ,हमर देश, कृष्ण जन्म, बहुजन हिताय बहुजन सुखाय ,छन्नर- छन्नर पैरी बाजय, कनवा समधी,अलहन,दू मितान प्रमुख हे.  दलित जी कवि सम्मेलन के सफल कवि रीहिन. हास्य व्यंग्य मा माहिर रीहिन. दलित जी के देहावसान 28 सितंबर 1967 मा होइस. दलित जी के पुत्र आदरणीय अरुण कुमार निगम जी छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार हे. छंद के छ नांव ले नि: शुल्क आनलाइन क्लास चलाथे. संगे संग छत्तीसगढ़ी पद्य खजाना अउ छत्तीसगढ़ी गद्य खजाना नांव ले ब्लाग चलात हे . 


खूबचंद बघेल - पेशे ले चिकित्सक,समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी, साहित्यकार , राजनीतिज्ञ अउ पृथक छत्तीसगढ़ राज्य के सपना देखइया डा. खूबचंद बघेल के जनम 19 जुलाई 1900 मा रायपुर जिले के पथरी गांव मा होइस. उंकर पिता जी के  जुड़ावन प्रसाद अउ माता के नांव केकती बाई रीहिन. राज कुंवर के संग बिहाव होइस.

रायपुर मा पढ़ाई करत रीहिन ता पं. द्वारिका प्रसाद मिश्र के संपर्क मा आइन अउ राजनीति मा रूचि ले लगिस.सन 1920 मा कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन मा भाग लेइस.असहयोग आंदोलन के बेरा मा अपन मेडिकल कॉलेज के पढ़ाई ला छोड़ के खादी के प्रचार मा लग गे.जेल के सजा होइस फेर उहां ले लहुंट के 1923 मा एल.एम.पी. (एम. बी. बीएस.) के परीक्षा पास करिन.बघेल‌ जी 1925 मा एल.एल. बी. के परीक्षा पास करिन. 13 अप्रैल 1930 मा रायपुर मा आयोजित महाकौशल राजनीतिक परिषद के अधिवेशन मा भाग लिस.

1931 मा सहायक चिकित्सा अधिकारी के पद ला छोड़ के कांग्रेस मा प्रवेश करिन.1931 मा स्वयं सेवक संगठन के स्थापना करिन. भारत छोड़ो आन्दोलन के बेरा मा मुंबई अधिवेशन मा शामिल होय बर जावत रीहिन तब 9अगस्त 1942 मा छत्तीसगढ़ के आने नेता मन के संग मलकापुर रेलवे स्टेशन ले गिरफ्तार कर ले गिस. वोकर संग उंकर धर्म पत्नी राज कुंवर देवी ला घलो 6 माह के जेल होइस. डा. साहब ला नागपुर के सेन्ट्रल जेल मा राखे गिस.


नाटक के माध्यम ले समाज सुधार -


डा. साहब हा छत्तीसगढ़ मा व्यापत छुआछूत अउ पिछड़ा पन के पीरा ले भली भांति परीचित रीहिन. येहा वोला अब्बड़ पीरा देय. अउ ये पीरा ला दूर करे खातिर साहित्य सेवा के माध्यम ले एक आंदोलन चलाइस.  अपन समाज के एक सियान के सामाजिक बहिष्कार हा वोला नाटक लिखे बर प्रेरित करिन.डा. साहब छत्तीसगढ़ के पहली नाटककार माने जाथे.स्वतंत्रता आंदोलन के समय" ऊंच नीच" नाटक लिख के वोकर मंचन घलो कराइन. अपन कूर्मि समाज ला एकता के सूत्र मा बांधे पर सुग्घर उदिम करिन. वो खुद मनवा कुर्मी रीहिन अउ अपन बेटी के बिहाव दिल्लीवार कुर्मी समाज मा करिन. वइसने छोटे बेटी के बिहाव राजेश्वर पटेल संग करिन. ये कारज के कीमत वोहा अपन सामाजिक बहिष्कार के रूप मा चुकाइस.आजादी के बाद करम छंड़हा,लेड़गा,जनरैल सिंह ,बेटवा बिहाव, किसान के करलई

नाटक लिख के छत्तीसगढ़ अंचल मा जन जागृति फैलाय के काम करिन.


आजादी के बाद कांग्रेस ले वोकर मोह भंग होगे  1950 मा आचार्य कृपलानी के किसान मजदूर पार्टी मा शामिल होगे. डा. साहब 1951 ले 1962 तक विधायक रीहिन.1956 मा राजनांदगांव मा उंकर अध्यक्षता मा छत्तीसगढ़ महासभा के गठन होइस . डा. साहब येकर माध्यम ले अलग छत्तीसगढ़ राज्य बर उदिम करिन.1965 मा संसद बर चुने गिस. वोहा राज्य सभा के सदस्य बनाय गिस. राजनीति ले 1968 तक जुड़े रीहिन. डा. साहब 22 फरवरी 1969 मा अपन नश्वर शरीर ला छोड़ के स्वर्गवासी बन गे. छत्तीसगढ़ के अस्मिता के रखवार डा. साहब हा

 अपन जस रूपी शरीर ले  हम सब के बीच अमर हे. 


हरि ठाकुर -  छत्तीसगढ़ के अस्मिता के गायक, अलग छत्तीसगढ़ राज्य बर आंदोलन के अगुवाई करइया हरि ठाकुर के पूरा नांव ठाकुर हरिनारायण सिंह रीहिन. वोहा त्यागमूर्ति, स्वतंत्रता सेनानी अउ मजदूर नेता ठाकुर प्यारेलाल लाल सिंह के सपूत रीहिन. उंकर जनम 16 अगस्त 1927 मा रायपुर मा होइस. ठाकुर साहब स्वतंत्रता सेनानी परिवार ले रीहिन. स्वाभाविक रूप से वोहा स्वतंत्रता आंदोलन मा भाग लिस. 50 -60 के दशक मा नारायण लाल परमार अउ देवी प्रसाद वर्मा के संग मिल के छत्तीसगढ़ मा साहित्यिक चेतना बर सुग्घर उदिम करिन. 1963 मा ठाकुर प्यारेलाल लाल सिंह के जीवनी लिखिन. ठाकुर साहब के शोध निबंध उत्तर कौशल बनाम दक्षिण कौशल अउ शहीद वीर नारायण सिंह पर बड़का  कविता लिखिन जउन 1990 मा प्रकाशित होइस. ये दूनों कृति हा छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान ला जगाय के काम करिन. कुछ समीक्षक मन येला छत्तीसगढ़ी मा लिखे वीर रस के पहली खंड काव्य मानिन. कृतिकार अउ चिंतक ठाकुर साहब हा जिनगी भर सुग्घर कारज करिन.1965 मा राजनांदगांव के विद्रोही कवि कुंजबिहारी चौबे के छत्तीसगढ़ी कविता के संपादन अउ प्रकाशन के संगे संग "धनी धरम दास के छत्तीसगढ़ी पद" , छत्तीसगढ़ी दान लीला के संपादन करिन. हरि ठाकुर के देहावसान 3 दिसंबर 2001 मा होइस.


अइसने छत्तीसगढ़ी साहित्यकार मन  आजादी के आंदोलन मा भाग लिस या तो अपन रचना के माध्यम ले जनता मा आजादी के भावना जगाइस वोमा पं. मुकुटधर पांडे,कपिलनाथ कश्यप, प्यारे लाल गुप्त,केयूर भूषण,  पुरूषोत्तम लाल,विश्वंभर यादव मरहा,मेहत्तर राम साहू के नांव प्रमुख हे.


                      - ओमप्रकाश साहू 'अंकुर '

सुरगी, राजनांदगांव ( छ.ग.)


मो.7974666840

साग भाजी ला समेटे छत्तीसगढ़ी गीत-महँगाई के बेरा मा*


 

*साग भाजी ला समेटे छत्तीसगढ़ी गीत-महँगाई के बेरा मा*


                 आजकल बड़े लगत हे न छोटे सबे आफत मा अवसर ताकत दिखथे, ईमान धरम तो दूसर लोक के शब्द होगे हे, ये लोक मा अब नही कस हे। कभू कभू अइसन बेरा आथे कि कुछ चीज के उपज/उत्पादन स्थिति परिस्थिति अनुकूल नइ होय के कारण कमती हो जथे, अउ वोकर माँग बढ़े ले, वो चीज महँगा हो जथे। फेर अइसनो नइ होय, जेमा बंगाला 250 रुपिया किलो तक पहुँच जाय, ये तो अंधेर होगे। ये सब काला बाजारी अउ जमाखोरी के नतीजा आय, एक विशेष हाथ मा सरी चीज जाये ले अइसने स्थिति बनथे, तेखरे सेती तो पहली घरों घर कोठी रहय, जेमा धान पान साल भर बर भराय रहय, फेर आज मनखे पइसा के लालच मा कोठी ला फोड़ फाड़ व्यापारी ला सबें धान पान ला बेंच देवत हे। अइसन मा व्यापारी मन मनमानी तो करबे करही, अउ ये सब दिखत तो हे, चाँउर, दार, साग संग कतको भाजी पाला----जइसन मूल जरूरत के चीज सबे महँगात हें। मैं तो एक कविता मा तको लिखे हँव-- *जे दिन तक कोठी मा धान रही, ते दिन तक दुनिया मा ईमान रही।*  खैर छोड़व, आज छत्तीसगढ़ी लोक गीत जेमा साग भाजी के वर्णन हें, वोला महँगाये बेरा मा सुरता करथन अउ गुनथन-------


*चौरा मा गोंदा रसिया, मोर बारी मा पताल*-

जनकवि लक्ष्मण मस्तूरिहा के कलम ले सँवरे अउ स्वर कोकिल कविता वासनिक के गाये,ये मनभावन गीत, हर छत्तीसगढ़िया के अन्तस् मा समाय हे। फेर जब पताल के भाव 200 रुपिया किलो ले घलो पार चलत रिहिस, ता कोनो मयारू अपन बारी मा पताल हे कहिके बतातिस, ता कोनो भी मनखे सात जनम बर सिरिफ पताले खातिर मया मा बँधा जातिस, रंग रूप मया मोहनी ला छोड़िच दे।  छोटे मनखे ला तो तिरियई दे, बड़का बड़का मनखे मन तक, बाजार ले पताल के भाव पूछ दुच्छा घर आ जावत रिहिस। अइसन मा कखरो भी बारी मा पताल रहितिस ता वो धरती लोक मा पइसा छाप पताल लोक मा घलो राज करतिस। फेर आज राज करत हे जमाखोर मन, जे मन मनमर्जी दाम वसूलत हे। हाय रे पताल, बड़का बड़का ला देयेस हँकाल।


*एक पइसा के भाजी ला दू पइसा मा बेचँव गोई,गोंदली ला रखँव जी मंडार के*

शेख हुसैन जी के लिखे अउ गाये ये मनभावन जुन्ना नाचा गीत जेमा बड़ अकन साग भाजी के वर्णन हे। ये गीत मा सब्जी बेचइया मरारिन पेट परिवार पाले बर एक पइसा के भाजी ला दू पइसा मा बेचे के बात करत हे। फेर आज सबें कोती पैठ जमाये व्यापारी मन पेट परिवार नही, बल्कि सात पीढ़ी ला पाले बर ईमान तक ला बेचत दिखथें। एक के ला दू नही,बल्कि कुछ दिन जमा करके,बाजार मा तंगई लावत, सौ गुना अधिक दाम मा बेचथें।  इंखर कृपा ले कभू पताल,  ता कभू गोंदली, ता कभू अउ कुछु आने साग भाजी महँगायेच रथे। 


*करुहा रे करेला------बखरी के लाल मिर्चा लइका ला रोवाय*

शिवकुमार तिवारी जी के गाये ये गीत कोन नइ सुने होही? फेर जब आज साग भाजी महँगाये हे, ता करुहा करेला होय, चाहे मीठ कुंदरू, तरे के बाद तो मिठाबेच करथे, फेर बाजार ले झोला मा नपावत बेरा ही बड़ खुशी दे देथे। काबर कि महँगाई मा कढ़ाई ले पहली झोरा मा तो आना चाही।महँगाये मिर्चा हा सिरिफ लइका मन भर ला नइ रोवावत हे, सियानो मन ला रोवावत हे। रुपिया दू रुपिया मा कुढ़ी कुढ़ी मिलइया मिर्चा आज कोरी भर मा तको गिन के आवत हे।


*दमांद बाबू दुलुरु काबर रिसागेस, आलू अउ गोभी के सुवाद थोरकिन देख ले*

फिरन लाल वर्मा जी अउ संगवारी मन के गाये ये जोक्कड़ गीत जे बेर सुनबे ते बेर मजा आथे। हो सकथे ये गीत मा दमांद बाबू कूकरी बोकरी खाय बर रिसाय रिहिस होही,, फेर आज आज जब पियाज, टमाटर आलू गोभी----दाम मा कूकरी ले घलो अघवा गे हे, अइसन मा दमांद बाबू दुलरू हाँस हाँस के आलू गोभी के साग खाही, वो भी बिगन मुंह फुलाये।


*भाँटा मिर्चा अउ धनिया पताल लेले गा, का लेबे कुंदरू करेला हे*

कुल्वनतींन बाई अउ पंचराम मिर्झा के सधे स्वर मा ये गीत बड़ मन भावन लगथे। ये गीत मा मरारिन गली गली घूमत साग भाजी बेंचत हे, अउ वाजिब भाव तको बतावत हे। सुनहू ता पता लगही कि वो बेरा आठ आना, एक रुपिया किलो मा तको साग भाजी आय। फेर आज तो आना के जमानच नइहे। कई सैकड़ा खर्चे मा तको झोला भर नइ पाये। महँगाई के दौर मा भाजी पाला बेचइया पसरा लगाये अँटियावत बइठे हे,अइसन मा घर घर जाके लेले लेले थोरे कही। जेला लेना हे ते हाट बाजार जायें।


*झुमकी तरोई गा भैया, राजा झुमकी तरोई गा भाई*

मेहत्तर राम साहू जी के लिखे अउ साधराम मरावी जी के गाये ये गीत जब रेडियो मा बजे ता सच मा मन झूमर जाय। घरों घर बारी मा तरोई,बरबट्टी,रमकेरिया, खीरा------- मन ला मोह लेय। पितर पाख मा तरोई बरबट्टी बारी ले सहज निकले, कोनो बाजार हाट के मुँह नइ ताके। फेर आज पितर पाख मा तरोई तो महँगाबेच करथे, आन समय तको हाथ नइ आय। एखर बर जरूरी हे, सबके बारी फेर झुमरे, तभे मन ये गीत संग झुमरही। 


*बखरी के तुमा नार बरोबर मन झुमरे*

मस्तूरिहा जी के लिखे अउ कविता वासनिक जी संग गाये ये गीत गजब गुरतुर हे। तुमा नार, जइसे छानी मा चढ़के झुमरथे वइसने वोला देख मन सहज मगन हो जथे। फेर आज बारी बखरी ले नाता टोरत मनखे, महँगाई के बेरा मा काय झुमरही, बल्कि तुमा, रखिया, कोमढ़ा के भाव सुनत बक्क खा जावत हे।


*जिमी जिमी जिमी,कांदा कांदा कांदा*

पॉप स्टाइल मा ये गाना बड़ चलिस। पहली कांदा कुशा भाजी पाला ला गरीबहा साग काहय फेर आज उल्टा होगे हे, इही सब मन महँगाये हे। जिंमी कांदा हमर छत्तीसगढ़ मा भारी फेमस हे। एखर कढ़ी, भुजिन्या बड़ मिठाथे। के गीत ला सुनत मुंह मा पानी आ जथे।


                   वइसे तो अउ बड़ अकन गीत मा भाजी पाला आथे, सब ला सँजो पाना मुश्किल हे। मोर मनसा गीत के बहाना आज अउ काली के बेरा ला परिभाषित करना रिहिस। जे बेर मा ये सब गीत मन ला लिखे अउ गाये गे रिहिस वो बेर मा वो आनंद सहज झलकत रिहिस, फेर आज जब मनखे बाजार  भरोसा होगे हे, तब ये सब गीत ताना मारे बरोबर लगथे।  महँगाई मा एक वर्ग पोखाथे ता एक वर्ग सोखाथे, या काहन ता एक बर महँगाई डायन आय, ता एक बर भौजाई।खैर महँगाई के कारण अउ निवारण ला सबो जानथन, तभो एक दूसर ला कोसत रहिथन, फेर गीत गीत होथे, तन मन सबो ला गदगद कर देथे, ता सुनव अइसन जुन्ना गीत मन ला अउ गुनव तको।


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

Saturday, 29 July 2023

लोक परंपरा के मोहक रूप 'नगमत'

 लोक परंपरा के मोहक रूप 'नगमत'

    हमर छत्तीसगढ़ म सांस्कृतिक विविधता के अद्भुत दर्शन होथे. इहाँ कतकों अइसन परब अउ परंपरा हे, जेला कोनो अंचल विशेष म ही बहुतायत ले देखे बर मिलथे. हमर इहाँ एक 'नारबोद' परब मनाए जाथे, एला जादा कर के वन्यांचल क्षेत्र म ही जादा कर के देखे जाथे. ठउका अइसने 'नगमत' के परंपरा घलो हे, जेला क्षेत्र विशेष म ही बहुतायत ले देखे जाथे.

    'नगमत' के आयोजन ल जादा करके नागपंचमी के दिन ही करे जाथे. वइसे कोनो-कोनो गाँव म एकर आयोजन ल हरेली या पोरा के दिन घलो कर लिए जाथे. जानकर मन के कहना हे, बरसात के दिन म सांप-डेड़ू जइसन जहरीला जीव-जंतु खेत-खार आदि म जादा कर के निकलथे, अउ ठउका इही बेरा खेती किसानी के बुता घलो भारी माते रहिथे, अइसन म लोगन ल खेत-खार जाएच बर लागथेच एकरे सेती उंकर मनके प्रकोप ले बांचे खातिर एक प्रकार के पूजा-बंदना करे जाथे. उंकर मनके जस गीत गा के सुमिरन करे जाथे.

    ग्रामीण संस्कृति म बइगा कहे जाने वाला मंत्र साधक के अगुवाई म नगमत के आयोजन होथे. एमा बइगा ह अपन अउ मंत्र साधक चेला मन संग मिलके नगमत के जोखा मढ़ाथे. बताए जाथे, जे बइगा ह सांप चाबे के जहर ल उतारे म सक्षम होथे, तेनेच ह ए आयोजन के अगुवाई करथे, अउ ए आयोजन म जेन चेला के सबो चेला मन म श्रेष्ठ प्रदर्शन करथे, वोला ए सांप के जहर उतारे वाले बुता म या कहन बइगई करे के अनुमति देथे. बाकी चेला मनला घलो अनुमति होथे, फेर वो मनला सिरिफ छोटे-मोटे फूक-झाड़ के ही.

    इहाँ ए बात जाने के लाइक हे, हमर छत्तीसगढ़ म हरेली परब के दिन अपन-अपन मांत्रिक शक्ति के पुनर्जागरण या पुनर्पाठ करे के परंपरा हे. इही दिन गुरु-शिष्य बनाए के परंपरा हे, जेला इहाँ पाठ-पिढ़वा देना या लेना कहे जाथे. ठउका अइसने च नगमत के आयोजन ले जुड़े परंपरा घलो हे. 

    वइसे नगमत के आयोजन ल सांप मनके पूजा-सुमरनी अउ  पुराना पीढ़ी द्वारा नवा पीढ़ी ल अपन परंपरा के पोषण अउ आगू ले जाए के जिम्मेदारी खातिर प्रेरित करे के उद्देश्य खातिर घलो करे जाथे. कतकों लोगन खातिर ए ह सिरिफ मनोरंजन के माध्यम होथे, तेकर सेती वो मन सावन महीना के लगते एकर आयोजन के जोखा म लग जाथें. एकर मनोरंजक रूप के आनंद ले खातिर आस-पास के गांव वाले मन घलो गंज संख्या म सकलाथें.

    नगमत के शुरुआत गाँव के ठाकुर देव, मेड़ो देव अउ आने जम्मो ग्राम्य देवता मन के संगे-संग अपन-अपन ईष्ट देवता मनके पूजा-सुमरनी के साथ होथे. जइसे गौरा-ईसरदेव परब म कोनो विशेष जगा ले पवित्र माटी लान के चौंरा बनाए जाथे, ठउका अइसने च एकरो खातिर नाग मन के रेहे के ठउर जेला भिंभोरा या बांबी आदि कहे जाथे, उहाँ ले माटी लान के एकरो खातिर एक चौंरा बनाए जाथे, जेमा पूजा-अर्चना करे जाथे. जस गीत गाने वाला सेउक मन नाग देवता के मांदर-ढोलक,   झांझ-मंजीरा संग जस गान करथें.-


गुरुसर गुरुसर गुर नीर गुरु साहेर शंकर 

गुरु लक्ष्मी गुरु तंत्र मंत्र गुरु लखे निरंजन 

गुरु बिना हुम ला हो काला रचे हो नागिन


गुरु के आवत जनि सुन पातेंव

चौकी चंदन पिढ़ुली मढ़ातेंव

लहुर छोड़ के अंगना बहारतेंव

रूंड काट मुंड बइठक देतेंव

जिभिया कलप के हो....


    इही बीच बइगा ह अपन मंत्र शक्ति के प्रयोग ले इच्छित लोगन के ऊपर नाग या अन्य सांप मनके आव्हान करथे, जेकर ले उनमा उंकर आगमन होथे, तहाँ ले जेन सांप उंकर ऊपर आए रहिथे, वोकरे अनुसार वोमन झूमथें-नाचथें, अंटियाथें-फुफकारथें, भुइयां म घोनडइया मारथें. इही बेरा ह देखइया मन बर मोहनी हो जाथे. एक निश्चित बेरा के बाद वोकर मन के शरीर ले वो सांप ल उतारे के परंपरा ल पूरा करे जाथे.

    आखिर म वो जगा सकलाय लोगन ल परसाद बांटे जाथे. ए परसाद म नांगजरी के विशेष महत्व होथे. उहू ल लोगन ल अउ आने परसाद संग संघार के दिए जाथे. एला कोनो भी बिखहर सांप के जहर उतारे बर रामबाण दवा माने जाथे. ए नांगजरी ल बइगा ह विशेष पूजा-पाठ कर के लाने रहिथे. हमन ल बताए जाय, रिंगनी पेंड़ के जड़ ल कोनो निश्चित दिन म निमंत्रण देके, रतिहा म पूजा-पाठ कर के लाने जाथे. नगमत के परंपरा ल पूरा करे के बाद जेन चेला ल विशिष्ट रूप ले मंत्र दीक्षा दिए जाथे, वोला कहूँ जगा ले भी सांप चाबे के जानकारी मिलथे, उहाँ जाना जरूरी होथे.

-सुशील भोले

संजय नगर, रायपुर

मो/व्हा. 9826992811