Saturday, 8 February 2025

बसंत ऋतु ठौर खोजत हे

 बसंत ऋतु ठौर खोजत हे


बसंत ऋतु सर्दी अउ गर्मी के मौसम के बीच के संक्रमण काल ​​आये। दिन बड़े हो जाथे अउ रात छोटे हो जाथे, तापमान कम हो जाथे, फूल खिले लग ले जथे। हवा में वसंत ऋतु के गर्म हवा शुरु हो होथे। वसंत मार्च ले शुरू होके  मई या जून तक रहिथे।

वसंत ऋतु हमर भारत देश क  छः: मुख्य ऋतु   में के एक ऋतु आये। ये करीब करीब  फरवरी के आखरी म या मार्च महिना के शुरुआत म शुरू होथे। ये ह  मई महिना तक चलथे। अइसे माने जाथे के माघ महीना क शुक्ल पंचमी ले वसंत ऋतु के शुरुआत होथे। फाल्गुन 

अउ चैत्र मास वसंत ऋतु के माने  गे हावय मतलब बसंत ह ये दू महिना प्रकृति म घूमत रहिथे। फाल्गुन बछर के आखरी महिना आये अउ चैत्र ह पहिला। ये प्रकार से हिंदू पंचांग के बछर के अंत अउ शुरुआत वसंत में ही होथे। ये ऋतु आथे त आसमान साफ अउ मौसम सुहावना हो जाथे। सर्दी के जूड़ जूड़  हवा ह  धीरे-धीरे हल्का गर्म होय ले रग जथे। मौसम म गर्माहट के मस्ती आ जथे। पक्षिमन के चहचहाहट चारोडाहर हवा म गूंजे ले लग जथे । प्रकृति घलो अपन नींद ले जागथे अउ पेड़-पौधे उपर नवा नवा पाना डारा अउ फूल आये ले लग जथे। सुप्तावस्था म परे जीव मन जागे ले लग जथें। सांप बिच्छू मेचका मन अटिवात बाहिर आथें। रंग-बिरंगा फूल खिलके चारो डाहर वातावरण ल महकाथे। चारो डाहर सरसों के फूल खिल जथे अउ खेत मन पींवरा लुगरा पहिर के सज जथें।

वसंत ऋतु के सबले महत्वपूर्ण तिहार आये  बसंत पंचमी के तिहार जेन ह  ज्ञान, कला अउ संगीत के देवी, सरस्वती माता के सम्मान म मनाये जाथे। ये दिन, लोगन पीला रंग के कपड़ा पहिरथेंं, काबर के ये ह सरसों के खेतों के खिल के महके के अउ वसंत के आये के प्रतीक आये। विद्यार्थीमन सरस्वती के पूजा करके प्रार्थना करथें अउ ओखर वेदी उपर अपन संगीत वाद्ययंत्र, किताब अउ कलम चढ़ाथें। अइसे माने जाथे के ये दिन देवी के आशीर्वाद लेय ले मनखे के ज्ञान अउ रचनात्मक क्षमता म वृद्धि होथे। नृत्य संगीत के कार्यक्रम होथे। जगह जगह उत्सव मनाये जाथे। चारो डाहर.पींवरा ही पींवरा रंग दिखाई देथे। किसान मन ये मौसम म अपन दूसर फसल के बोनी शुरू कर देथे, अनुकूल मौसम के कारण फसल के विकास तेजी से होथे। खेत ह हरियर.हरियर दिखे ले धर लेथे।बसंत ऋतु के आये ले लोगन के जीवन म ताजगी आ जथे। एक बेर फेर जाये के ईच्छा उठ जथे। ठंड अउ निराशाजनक जाड़ ल सहन करे के बाद, वसंत के गर्मी अउ सुंदरता ह आत्मा ल ऊपर उठाथे। मन म आशा के किरण जागृत होथे। मनखे मन ये सुहावना मौसम के अधिक से अधिक  लाभ उठाये.बर बाहिर घूमे बर जाथें। प्रकृति के सुंदरता के मजा लेय बर पिकनिक, क्रिकेट मैच के मजा लेथें। प्रकृति की सैर करे बर बाहिर घूमेबर जाथें।


 आज बसंत कब अइस पता नइ चलय। लोगन घर म टी वी म मस्त रहिथें। भइगे गमला के फूल दिखगे, मौसम म गरमाहट आ गे। समझ गें के मोसम बदल गे। आज न तो लइकामन तितली के पाछू भागंय अउ न पक्षी मन के आवाज के मजा लेवंय। बसंत घलो सोचथे के कोन मेर मैं रुकंव? गमला म कब तक रहिहुं, बड़े पेड़ हावय फेर रद्दा तीर म। फूल के पेड़ नंदावत हावय शो के पेड़ बाढ़त हावय। शहर म बसंत बस घूमत रहि जथे। एक ठऊर तो होना जिंहा रूक के मनखे मन के भाव ल देख सकय। डऊर खोजत खोजत कई बछर होगे। बंद करव पर्यवरण के नाश बलावव एक बेर फेर बसंत आये।

सुधा वर्मा, 2/2/2025 मड़ई

(यात्रा वृतांत) देख रे आँखी,सुन रे कान

 (यात्रा वृतांत)

देख रे आँखी,सुन रे कान

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 जब ले नवाँ साल 2025 आइस तब ले समाचार पत्र,टी० वी० अउ सोशल मिडिया मा प्रयागराज मा आयोजित होवइया महाकुंभ जेकर महिमा मा बताये गेइस के अइसन ज्योतिषीय संयोग 144साल बाद आये हे अउ त्रिवेणी संगम मा स्नान मोक्षदायिनी हे तब ले थोड़-बहुत धार्मिक स्वभाव होये के सेती उहाँ जाये बर मन मचले ला धर लेइस।मोर धर्मपत्नी जी के आग्रह अउ भारी इच्छा हा तको ये विचार ला हवा देये मा कोनो कमी नइ करिच। तहाँ ले ट्रेन मा रिजर्वेशन टिकट बर प्रयास शुरु होगे फेर कन्फर्म टिकट मिलबे नइ करिस।

  आज से लगभग 15 दिन पहिली भागवताचार्य पं० प्रदीप चौबे जी ,जेकर संग नेपाल यात्रा मा गे रहेंन तेकर संदेश मिलिस के बसंत पंचमी के शुभ अवसर(2फरवरी,3फरवरी 2025) मा महाकुंभ प्रयागराज मा जे मन ला आस्था के डूबकी लगाये बर जाना हे ते मन तुरंत सम्पर्क करव--बस मा कुछ सीट बाँचे हे। मैं तुरंत सम्पर्क करके दू सीट रिजर्व करवा लेंव।अँधवा ला का चाही--दू आँखी।

  यात्रा के तिथि शनिवार1फरवरी 2025 ,दोपहर 12बजे तिल्दा ले रहिसे। इही बीच 29 जनवरी के मौनी अमावस्या के दिन महाकुंभ प्रयागराज मा बड़का दुर्घटना घटगे जेमा कतको यात्री मरगें--कतको घायल होगें। टी०वी० मा,पेपर मा समाचार देख- सुनके उहाँ जाये बर मन डाँवाडोल होये ला धरलिस।बेटा-बहू,परिवार जन अउ ईस्ट मित्र मन तकों मना करे ला धरलिन। पाँच-दस झन जे मन हमरे संग बुकिंग करवाय राहयँ ते मन कैंसिल करवा लेइन। जीव के डर सबले जादा होथे।मोरो मन डाँवाडोल होये ला धर लेइस।अपन धर्मपत्नि ला पूछेंव ता वो कहिस-- कोनो कुछु काहय, कुछु करय हमन जाबोच।लेगही राम ता राखही कोन--राखही राम ता लेगही कोन।वोकर बात मोर मन ला भागे।

  जइसे 31जनवरी आइस ता यात्रा के नेतृत्व करइया आचार्य पं० प्रदीप चौबे जी से सम्पर्क करेंव के हो सकथे परस्थितिवश यात्रा स्थगित होगे होही? वो कहिस-- वर्मा जी 1तारीख के तइयार रहिबे।तुमन ला हथबंद से ले लेबो।बस हा हथबंद- भाटापारा--बिलासपुर--अम्बिकापुर होवत प्रयाग राज निकलही। मैं कहेंव--ठीक हे महराज जी फेर सुने होहू उहाँ करोड़ों मनखे मन के भींड़ अउ माते भगदड़ मा बँहुतेच मनखें मर गेहें।लोगन बतावत हें के शासन प्रशासन हा बस मन ला बीस-पच्चीस किलोमीटर दूरिहा मा रोंक देवत हे।उहाँ ले पैदल चलके संगम तक जाये बर परथे।हम भला वोतेक कहाँ रेंगे सकबो? दू-चार किलोमीटर के बात अलग हे।अभी यात्रा ला स्थगित करके डेट ला आगू खिसका दे रहितेव।वो कहिस-- बसंत पंचमी के डेट बँधा गेहे।ये तिथि दूबारा नइ आवय। जेन होही तेन देखे जाही। महूँ हा अपन 75 साल के महतारी अउ पूरा परिवार ला लेके जावत हँव।राम अउ माया एक संग नइ मिलय। यात्रा मा जेन कष्ट उठाये जाथे या मिलथे तेने हा व्रत ये-- उही हा तपस्या ये। वो एक ठन भजन के चार पंक्ति ला सुनाइस--

*इतना तो करना स्वामी,जब प्राण तन से निकले*

*श्री गंगा जी का तट हो, जमुना का वंशी वट हो,मेरा साँवरा निकट हो*

*जब प्राण तन से निकले*

    विद्वान पंडित चौबे जी हा बात ला फोरियावत कहिस-- हमन भजन ला सुनथन-- गाथन भर अउ जब अवसर आथे ता पालन नइ करन। वो कहिस- वर्मा जी अब तुमन  देखलव, जाहू धन नहीं तेला।हथबंद के दू झन मन अपन यात्रा ला कैंसिल कर दे हें।

  मोर साहित्य अनुरागी मन हा वो भजन के मर्म ला समझगे।वास्तव मा कहे भर ले कुछु नइ होवय,कोई बात ला अमल मा लाना हा असली होथे।मैं तुरंत निर्णय लेवत कहेंव-- हम जबो।आप आवव।

   1फरवरी के दोपहर 12बजे लगभग 50 यात्री ला लेके बस आगे।हम तो तइयारे रहेन।बहुत कम समान-- छोटे छोटे दू ठीन बेग ला धरके हम दूनों परानी तको बस मा चढ़गेंन।हँसी -खुशी लगभग 850 कि०मी० के यात्रा प्रारंभ होगे।बस मा यात्रा के लाभ ये रहिस के यात्री मन के चाय-पानी पिये बर या फ्रैश होये बर जेन मेर चाहयँ-जब चाहयँ बस हा रुक जावत रहिसे,भले समय कुछ जादा लगिस।

  2 फरवरी के सुबह-सुबह 8-9 बजे प्रयाग राज ले लगभग 90 किलोमीटर दूरिहा मिर्जापुर मा बस पहुँचिस तहाँ ले उत्तर प्रदेश शासन के मेला प्रबंधन के प्रभाव दिखे ला धरलिस।जगा-जगा यातायात पुलिस के बेरियर। येती मत जाव-वोती ले जाव --अइसे करत करत लगभग 400 

कि० मी० उपराहा घुमके लगभग 12 बजे बस हा नैनी (प्रयागराज) पहुँचिस।संगम ले लगभग 20 कि०मी० दूरिहा अरेल क्षेत्र मा यात्री मन के निवास अउ वाहन स्टेंड बने हवै।उँहे सेक्टर 6 मा छत्तीसगढ़ शासन के तको हावय। थोकुन तीर के उहाँ  बने स्टेंड मा बस खड़ा होगे। विचार विमर्श के बाद तय होइस के आज बसंत पंचमी आय जेन 3फरवरी के सुबह 7बजे ले रइही।जादा भींड़ ले बँचे बर आजे रात-बिकाल ले संगम मा स्नान करे जाय।सबो समान ला बसे मा छोंड़ के सिरिफ पूजा पाठ अउ स्नान के बाद बदले बर कपड़ा ला धर के संगम कोती रेंगना चालू करेन। व्यवस्था ये बनाये गेइस के हमर दल के पहिचान के एक झंडा आगू मा रइही अउ एक झंडा पाछू मा रइही।सब झन ला एक लाइन मा ही एकर बीच मा चलना हे।सबके जेब मा अपन अता-पता अउ आधार कार्ड अनिवार्य रूप ले राहय।एक दूसर ला छोंड़ना नइये।

  मन मा बीस किलोमीटर रेंगइ अउ भींड के भारी डर के बीच पैदल चलना चालू होइस।ठंड मिले तेज धूप हा अपन असर बताये ला धरलिस।सबके स्वेटर साल गुमटाके झोला मा धरागे।

  पैदल चले के डर कुछ समे के बाद सिरागे जब ये पता चलिस के प्रशासन हा यात्री मन के परेशानी ला देख के मेला क्षेत्र मा वाहन मन के प्रवेश मा 30जनवरी ले जेन प्रतिबंध लगाये रहिसे तेमा ढिलाई देवत दूपहिया-चार पहिया छोटे वाहन मन ला संगम मेला क्षेत्र ले चार- पाँच कि०मी० दूरिहा तक पहुँचे के छूट देये हे।जान के अइसे लागिस के गंगा- मइया के कृपा बरसे ला धरलिस।

  जम्मों झन टेक्सी मा बइठ के (एक झन के 50/किराया) संगम कोती चलेन।उहाँ फोर्स के बेरियर लगे राहय। आगू वाहन प्रवेश निषेध रहिसे।सब झन उतर के जयकारा लगावत पैदल चलना चालू करेन।रस्ता मा गजब के व्यवस्था रहिसे।जगा-जगा वाशरूम,पिये के पानी, शांति वयवस्था, कोनो रेल-पेल,धक्का-मुक्की नहीं,बस आनंद अउ खुशी। मन के बाँचे-खुचे जम्मों डर सिरागे। रस्ता मा वो हैलीपैड तको मिलिस जिहाँ 1300/प्रति व्यक्ति किराया लेके मेला क्षेत्र के आसमान ले दर्शन कराये जावत रहिसे।मोरो मन होइस फेर समूह धर्म के पालन करना जरूरी रहिसे।

  लगभग 4कि०मी० पैदल चलके हम संगम घाट मा पहुँच गेन। हमर सौभाग्य रहिसे के जेती ले आयेन तेती ले संगम लकठा मा रहिसे।

 दिन के लगभग 3/4बजे संगम मा पूजा-पाठ अउ पवित्र डूबकी लगायेन।कोनो भींड़-भाड़ नइ रहिसे।हजारों मनखे डूबकी लगावत रहिन हें।

    आस्था के पवित्र डूबकी सम्पन

होगे।यात्रा के थकावट दूर होगे।अइसे लागिस के ये सफल तीर्थ यात्रा ले जीवन धन्य होगे।

 स्नान के पाछू वापसी के पहिली मेला क्षेत्र ला घूमे बर निकलगेन। बहुत जादा भींड़  कोनो जगा नइ रहिसे। भींड़ नइ रहिसे तेकर कारण समझ मा ये आइस हे के 29 जनवरी के घटना के बाद शासन प्रशासन के सख्त अउ चुस्त दुरुस्त तैयारी। यात्री मन ला एक जगा जुरियाके बइठन अउ सोवन नइ देना। चलते राहव कहना। 14 फरवरी तक मेला क्षेत्र मा वी आई पास ला रद्द करे के सेती बाहरी वाहन मन के नइ चलना।जम्मों पीपा सड़क मन ला आवाजाही बर खोल देना।वन वे ट्रेफिक। साधू संन्यासी मन बर एक अलग रस्ता अउ घाट।बड़े बड़े मंदिर मन मा दर्शन ला रोंक देना। एक दिन आके चार पाँच दिन ले मेला क्षेत्र मा जमे करोड़ो मनखे मन ला हटा देना आदि। 

 50/60 किलोमीटर क्षेत्र मा फइले मेला क्षेत्र ला जादा नइ घूम पायेन।घूमत घामत रात के अपन बस तीर सकुशल वापस आगेन अउ रातों-रात घर वापसी बर निकलगेन। रास्ता मा जगत प्रसिद्व *विंध्यवासिनी मंदिर* के दर्शन करेन जेन हा विश्व के 51शक्ति पीठ मा एकमात्र आय जिंहा *आदि शक्ति* हा अपन पूरा शरीर के साथ बिराजे हे।मंदिर मा बहुत भींड़ रहिसे फेर दर्शन होगे। 3 फरवरी के देर रात घर पहुँच के चिरस्मरणीय यात्रा निर्विघ्न सम्पन्न होगे।आँखी मा जेन उहाँ देखेन अउ कान मा अफवाह के रूप मा जेन कई बात सुने रहेन तेमा जमीन आसमान के फरक मिलिस। हाँ ट्रेन मा मनमाड़े भीड़ अउ परेशानी अउ प्रयाग ले अयोध्या ,प्रयाग ले काशी जवइया सड़क मा घंटो जाम अउ भारी भींड़ के जानकारी मिलिस।

  धन्य हे महान भारत देश के सांस्कृतिक-धार्मिक विरासत।धन्य हे महाकुंभ प्रयागराज जिंहा देश विदेश के लोगन संग इहाँ के हर जिला-,हर क्षेत्र के मनखे आस्था के डूबकी लगावत हें।


चोवा राम वर्मा 'बादल'

हथबंद,छत्तीसगढ़

सुरता--- बचपन अउ चुनावी रंग

 सुरता--- बचपन अउ चुनावी रंग


                    कहे जाथे सबले सोनहा बेरा बचपन होथे, अउ येमा कोनो शक तको नइहे। फेर पहली के लइका मन के बचपन अउ आज के लइका मन के बचपन मा धरती आसमान के अंतर हे।  हमर बेरा के बचपन के अइसने एक सुरता, नजरे नजर मा झूलथे। जब चुनाव के बेरा आय, ता बड़े मन अपन अपन दल बल मा माते रहे, फेर हम सब लइका मन मा कोनो पार्टी विशेष के नशा मा नही, बल्कि लईकई के नशा मा माते रहन। कोनो भी पार्टी के प्रचार गाड़ी होय, ए कोती ले वो कोती गाड़ी के पाछू पाछू भागना, कोनो दल के रैली होय सब मा शामिल होके मनमाड़े चिल्लाना, पेंटर मन जब दीवाल मा प्रचार बर कुछु लिखे ता वोला टकटकी लगाके घण्टो देखना, प्रचार गाना बाजा मा नाचना, सबो पार्टी के बिल्ला, पाम्पलेट, टिकली, झंडा ला सँकेलना--- आदि आदि, इही सब हमर बुता रहय। जेमा बड़ आनंद आवव, फेर पार्टी विशेष के मोह दूर दूर तक नइ रहय। हाँ फेर कभू लगे कि फलां छाप बढ़िया पाम्प्लेट देथे, ता ओखर इंतजार जरूर रहय। पार्टी मन द्वारा बाँटे टोपी, गमछा, स्टीकर अउ रंग बिरंगी बिल्ला,पाम्प्लेट बड़ मन मोहक लगे,तेखरे सेती हम सब सहज खीचा जावन। न हमन वोट डारन न कोनो पार्टी ल जानन फेर चुनावी रंग मा चुनाव के बेरा मनमाड़े रँगे रहन।

                  पहली सबे पार्टी द्वारा एक ले बढ़के एक रंगीन बिल्ला, पाम्प्लेट, झंडा छपवाके बाँटे, अउ प्रचार गाड़ी वाले मन हम सब लइका मन ला देख के फेके, जेला सँकेले बर गाड़ी के पाछू पाछू भागन।  उहू का दिन रिहिस जब थैली मा रंग रंग के बिल्ला पाम्पलेट धन बरोबर धराय रहय। जेन जतका सँकेले वो ओतकेच धनी जनाय। आलपिन, काँटापिन के अभाव मा काँटा मा तको थैली ला छेदा करके बिल्ला लगावन। लगे बिल्ला भले कोनो दल के राहत रिहिस होही, फेर हमन कखरो दल बल बर नही अपन उमंग बर ये सब करन, या या कहन लईकई के लगन मा सवार रहन। सबे पार्टी के नाचा गम्मत, गाना बाजा ला बड़ चाव ले देखन सुनन। कभू कभू तो कोनो ला लिखत देख मन मा पेंटर उमड़ जाय अउ छुही, गेरू ला घोर के कतको दीवाल ला कोनो पार्टी के नही बल्कि अपन उमंग के रंग मा रंग देत रहेन। भले बनाये या लिखे चीज कोनो पार्टी के नकल रहय, फेर ये सब करत बेरा हमर कहाँ अकल रहय।

                  आज के लइका मन मा अइसन कहाँ दिखथे, अउ पहली कस पाम्पलेट बिल्ला फेकना तको नही के बरोबर दिखथे। भले रंग रंग के बैनर, पाम्पलेट, स्टीकर, गाना, बाजा, नाचा आजो होथे फेर आज के लइका मन ना पहली कस जुरे अउ ना वो मन ला भाव मिले। काबर कि ओमन वोटर थोरे हरे। पार्टी वाले मन काम के आदमी ला, जेन वोटिंग करथे, ओखरे तीर मा लोरे दिखथे, अउ उही मन ला रिझाथे। लइका बिचारा मन तो मोबाइल ,कार्टून मा बिजी दिखथे, भला उंखर कर भला, हमर कस समय कहाँ?जेन चुनावी रंग मा रँगे। आज यदि कोनो लइका मन हमर वो समय कस करही ता दाई ददा मन तको नइ भाही, अउ दू चार मुटका खा तको जाही, काबर कि आज हर मनुष के मन मा पार्टी/दल बिराजमान हे। सब कोनो ना कोनो दल के चेला हें, कोनो स्वतंत्र नइहे, अइसन मा लइका मन कइसे स्वतंत्र हो पाही? फेर हमर लईकई के स्वतन्त्रा, आज कोनो ना कोनो पार्टी के साँकड़ मा बंधा गय हे। *एक वो बेर रिहिस अउ आजो एक बेर हे। फेर ये बेर वो समय के पार नइ पा सके।*


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

कहिनी *// फइसला //*

 कहिनी             *// फइसला //*

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                      मनराखन अपन पार्टी के जबर निष्ठावान कार्यकर्ता रहय।ओकर आघू म पार्टी के विरोध म कोनों कुछू गोठिया झन पारहीं ओकर *पोड़कीपइयां बजा* देवय।ओहर पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता के संगे-संग दरी बिछइया सकलइया,झण्डा-बेनर टंगइया अऊ पार्टी के जिन्दाबाद नारा लगइया रहय।ओकर पहनइ-ओढ़इ ल देखबे त सादा कुरता-पैजामा अरारोड लगे ठाड़ किरिच वाला पहिरे,ओकर किरिच म *तुमा पउला* जाही अइसन जनावय।ओहर दू बछर पहिली ले जिला पंचायत के चुनाव म प्रत्याशी बनहूं अऊ जिला पंचायत अध्यक्ष बने के सपना मन म संजोय रहिस।जिला पंचायत अध्यक्ष बने के पाछू एकठन कारन घलो रहिस कि अवइया विधानसभा चुनाव म पार्टी तरफ ले टिकट मिल जाही कहिके के तियारी करत रहिस।

               ओहर जइसन सोचे रहिस तइसन  जिला पंचायत के अध्यक्ष पद घलो अनारक्षित होय रहिस,ते पाय के ओकर मन म *आसरा के अँजोर* जगमगावत रहिस।पार्टी मोला समर्थित प्रत्याशी बनाबेच करही।मोला नि दिही त अऊ कोन ल दिही मन म सोचे लागिस।पार्टी संगठन के बड़का-बड़का नेता मन संग ओकर चिन्हारी रहय ते पाय के समर्थित प्रत्याशी बनाही कहिके पूरा आसरा रहिस।

              उही क्षेत्र म पार्टी के कतको झन कार्यकर्ता रहंय।पार्टी के समर्थित अऊ जमीनी कार्यकर्ता के डांड़ म बैसाखू के नांव घलो चिन्हारी रहिस।पार्टी के जिला अध्यक्ष अऊ बैशाखू लइकुसहापन के जून्ना संगवारी घलो रहय।जिला अध्यक्ष बनाय म बैशाखू के हाथ रहिस।पार्टी के बड़का-बड़का नेता मन संग ओकरो उठना-बइठना रहय ते पाय के ओकरो मन म *आसरा के जोत* जगमगावत रहय।जिला पंचायत के चुनाव म समर्थित प्रत्याशी बनाबेच करहीं अइसे मन *आसा के डोरी* बंधाय रहिस।

              मनराखन अऊ बैसाखू दूनोंझन पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता रहंय।दूनोंझन म कोनों एक दूसर ले एको रंच कम नि रहंय।क्षेत्र म दूनोंं के कारज कोनों किसिम के कमी नि रहिस।दूनोंझन के गुन ल आकब करे म कम नि जनावय।दूनों के दूनोंं बरोबरी रहय।पार्टी घलो असमंजस म पर गिस कोन ल समर्थित प्रत्याशी बनाईन।येती दूनोंझन चुनाव लड़े बर जोमियाय रहिन।एकोझन पाछू घूंचे के नांव नि लेवत रहिन।

                एती नामांकन भरे के आखरी दिन लकठियावत रहे।सबो संसय म परे रहे कि पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी कोन रही।सहीच म दूनोंझन के बीच म कोनों किसिम के कमी नि रहिस तेकर ले पार्टी घलो असमंजस म परगे।पार्टी मनराखन ल प्रत्याशी बनाही त बैशाखू के जीव दुख पाही अऊ बैशाखू ल प्रत्याशी बनावत हे त मनराखन के आत्मा करलाही।पार्टी तो एकेझन अधिकृत प्रत्याशी बनाही।

               समारु घलो पार्टी के बड़का कार्यकर्ता रहिस।ओहर दूनोंझन के फारम भरे म पार्टी के वोट बंटनिया हो जाही अऊ हमर पार्टी के प्रत्याशी हार जाही.....जिलाध्यक्ष ल चेतावत रहिस।तैं ठीकेच कहत हावस समारु.....जिलाध्यक्ष कहिस।तहुं तो जबर गुनिक हावस अब काय करिन तेन बता?.....सलाव पूछत जिलाध्यक्ष कहिस।नामांकन भरे के आखरी,दू दिन बाद आइच गिस.......कुछू उपाय बता समारु....जिलाध्यक्ष फेरेच कहिस।फारम भरे के ठीक पहिली दिन एक बड़का बइठक करवाय परही....उदीम बतावत कहिस।

                 दूनोंझन के समझउता करवाय बर एक बड़का बइठक करवाय गिस जेमा ओ क्षेत्र के सबो छोटे-बड़े कार्यकर्ता मन सकलाइन।मनराखन अऊ बैशाखू अपन-अपन समर्थक धर के संगे-संग लाने रहिन।एकठन बड़का हाल म सभा करे गिस।जिहां मनखे मन खचाखच भरे रहिस।खैमो-खैमो मनखे मन जुरियाय रहिन।ओमन आपस म खुसुर-फुसुर करे धर लिन।कोनों मनराखन बर सहमति देवत रहिन, कोनों बैशाखू कोती होवत रहिन।जिलाध्यक्ष घलो बैशाखू के खासम-खास हावे.....भुखउ कहिस।

               ठउका  बेरा म पार्टी पदाधिकारी मन के आय के आरो मिलिस।थोरिक बेरा म आके ओहूमन संघरिन।आघू मंच म पदाधिकारी मन बइठ गिन।बइठका शुरू करे गिस,मनराखन अऊ बैसाखू ल आघू म आय बर कहिन दूनोंझन आघू आके बइठगिन।पार्टी के अध्यक्ष दूनोंझन ल पूछे लागिस।एकबार दूनोंझन फेर सोच विचार लेवौ....अध्यक्ष समझावत कहिस।बैशाखू के एकझन समर्थक मुरली तेन ह खड़े होके गोठियाइस कि बैशाखू चुनाव लड़बेच करही।दूनोंझन के नांव लेके लाखा निकल देवा जेकर नांव निकलही तेन ह फारम भरही....समझावत किशन कहिस।किशन ठीकेच कहत हावे .....जवाहिर हं म हं मिलावत रहिस।लाखा म निकले के झन निकले बैशाखू चुनाव लड़बेच करही...मुरली अकड़त कहिस।

                  पार्टी जेन फइसला करहि तेन ल दूनोंझन ल माने बर परही.....अध्यक्ष समझावत कहिस।कस ग बैशाखू तैं बता कि पार्टी जेन फइसला करही तेन ल मानबे कि नहीं...... अध्यक्ष कहिस।तुमन कुछू करव मैं चुनाव लड़बेच करहूं...... बैशाखू कहिस।तैं बता मनराखन पार्टी जेन फइसला करही तेन ल मानबे कि नहीं...... अध्यक्ष कहिस।पार्टी जेन कहि देही तेन ल मैं माने बर तियार हंव......अध्यक्ष के पांव तरी गिर के मनराखन कहिस।मनराखन के सुभाव ह *अँजोरी रात के चन्दा अँजोर* कस फकफक ले ओग्गर दिख गिस।आखरी बार अऊ पूछत हंव बैशाखू पार्टी जेन फइसला करही तेन ल मानबे.......अधयक्ष समझावत फेरेच कहिस।मैं चुनाव लड़बेच करहूं मोर सबो समर्थक मन कहत हें......बैशाखू जवाब देवत कहिस।ओला पूरा आसरा रहिस कि जिला अध्यक्ष बनाय म मोर हाथ रहिस ते पाय के ओहर मोला जरुर प्रत्याशी बनाही।

              बैशाखू पार्टी के फइसला ल नि मानत हे अऊ मनराखन पार्टी के फइसला मानहूं कहत हावे।येहर पार्टी के संग म हावे त मनराखन के नांव म पार्टी अपन सहमति दे देवत हावे।येहू बात घलो कहे गिस के जेन ह पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के विरोध म कारज करही तेन ल पार्टी कोती ले बाहिर के डाहर छै बछर बर देखा दिये जाही....अध्यक्ष फइसला सुनावत कहिस।

✍️ *डोरेलाल कैवर्त " हरसिंगार "*

          *तिलकेजा, कोरबा (छ.ग.)*

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Tuesday, 4 February 2025

सुरता--- बचपन अउ चुनावी रंग

 सुरता--- बचपन अउ चुनावी रंग


                    कहे जाथे सबले सोनहा बेरा बचपन होथे, अउ येमा कोनो शक तको नइहे। फेर पहली के लइका मन के बचपन अउ आज के लइका मन के बचपन मा धरती आसमान के अंतर हे।  हमर बेरा के बचपन के अइसने एक सुरता, नजरे नजर मा झूलथे। जब चुनाव के बेरा आय, ता बड़े मन अपन अपन दल बल मा माते रहे, फेर हम सब लइका मन मा कोनो पार्टी विशेष के नशा मा नही, बल्कि लईकई के नशा मा माते रहन। कोनो भी पार्टी के प्रचार गाड़ी होय, ए कोती ले वो कोती गाड़ी के पाछू पाछू भागना, कोनो दल के रैली होय सब मा शामिल होके मनमाड़े चिल्लाना, पेंटर मन जब दीवाल मा प्रचार बर कुछु लिखे ता वोला टकटकी लगाके घण्टो देखना, प्रचार गाना बाजा मा नाचना, सबो पार्टी के बिल्ला, पाम्पलेट, टिकली, झंडा ला सँकेलना--- आदि आदि, इही सब हमर बुता रहय। जेमा बड़ आनंद आवव, फेर पार्टी विशेष के मोह दूर दूर तक नइ रहय। हाँ फेर कभू लगे कि फलां छाप बढ़िया पाम्प्लेट देथे, ता ओखर इंतजार जरूर रहय। पार्टी मन द्वारा बाँटे टोपी, गमछा, स्टीकर अउ रंग बिरंगी बिल्ला,पाम्प्लेट बड़ मन मोहक लगे,तेखरे सेती हम सब सहज खीचा जावन। न हमन वोट डारन न कोनो पार्टी ल जानन फेर चुनावी मा चुनाव के बेरा मनमाड़े रँगे रहन।

                  पहली सबे पार्टी द्वारा एक ले बढ़के एक रंगीन बिल्ला, पाम्प्लेट, झंडा छपवाके बाँटे, अउ प्रचार गाड़ी वाले मन हम सब लइका मन ला देख के फेके, जेला सँकेले बर गाड़ी के पाछू पाछू भागन।  उहू का दिन रिहिस जब थैली मा रंग रंग के बिल्ला पाम्पलेट धन बरोबर धराय रहय। जेन जतका सँकेले वो ओतकेच धनी जनाय। आलपिन, काँटापिन के अभाव मा काँटा मा तको थैली ला छेदा करके बिल्ला लगावन। लगे बिल्ला भले कोनो दल के राहत रिहिस होही, फेर हमन कखरो दल बल बर नही अपन उमंग बर ये सब करन, या या कहन लईकई के लगन मा सवार रहन। सबे पार्टी के नाचा गम्मत, गाना बाजा ला बड़ चाव ले देखन सुनन। कभू कभू तो कोनो ला लिखत देख मन मा पेंटर उमड़ जाय अउ छुही, गेरू ला घोर के कतको दीवाल ला कोनो पार्टी के नही बल्कि अपन उमंग के रंग मा रंग देत रहेन। भले बनाये या लिखे चीज कोनो पार्टी के नकल रहय, फेर ये सब करत बेरा हमर कहाँ अकल रहय।

                  आज के लइका मन मा अइसन कहाँ दिखथे, अउ पहली कस पाम्पलेट बिल्ला फेकना तको नही के बरोबर दिखथे। भले रंग रंग के पाम्पलेट, स्टीकर, गाना,बाजा,नाचा आज होथे फेर आज के लइका मन ना पहली कस जुरे अउ ना वो मन ला भाव मिले। काबर कि ओमन वोटर थोरे हरे। पार्टी वाले मन काम के आदमी ला, जेन वोटिंग करथे, ओखरे तीर मा लोरे दिखथे, अउ उही मन ला रिझाथे। लइका बिचारा मन तो मोबाइल ,कार्टून मा बिजी दिखथे, भला उंखर कर भला  हमर कस समय कहाँ?जेन चुनावी रंग मा रँगे। आज यदि कोनो लइका मन हमर वो समय कस करही ता दाई ददा मन तको नइ भाही, अउ दू चार मुटका खा तको जाही, काबर कि आज हर मनुष के मन मा पार्टी/दल बिराजमान हे। सब कोनो ना कोनो दल के चेला हें, कोनो स्वतंत्र नइहे, अइसन मा लइका मन कइसे स्वतंत्र हो पाही? फेर हमर लईकई के स्वतन्त्रा, आज कोनो ना कोनो पार्टी के साँकड़ मा बंधा गय हे। *एक वो बेर रिहिस अउ आजो एक बेर हे। फेर ये बेर वो समय के पार नइ पा सके।*


जीतेन्द्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)

Monday, 27 January 2025

आजादी के लड़ाई म राजनांदगांव जिले के योगदान

 








आजादी के लड़ाई म राजनांदगांव जिले के योगदान 


  जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस म गरम दल के नेता मन के धाक जमे लगिस तब भारतीय जनता म अंग्रेजी सासन के विरुद्ध भीतरे- भीतर आगी सुलगत 

गिस। वो समय लाल- बाल -पाल के रूप म लाला लाजपतराय, लोकमान्य बालगंगाधर तिलक अउ विपिनचंद्र पाल के अब्बड़ सोर रिहिस। 1905 म बंगाल विभाजन ले ये चिंगारी ह आगी बन गे अउ जनता मन अंग्रेज़ी सासन बर बागी बनगे। हमर देश के नेता मन जनता ल समझाय लगिस कि अंग्रेजी सासन फूट डालव अउ राज करव के नीति ल अपना के शुरू ले सासन करत आवत हे अउ बंगाल के विभाजन येकर एक बड़का उदाहरण हे।  देशभर म अंग्रेजी सासन के विरुद्ध वातावरण बनिस। अइसन बेरा म 1905  म राजनांदगांव में ठाकुर साहब के अगवाई म छात्र मन के पहली हड़ताल होइस ।ठाकुर साहब अपन सहयोगी छविराम चौबे अउ गज्जू लाल शर्मा के संग मिलके राजनांदगांव म राष्ट्रीय आंदोलन ल ठाहिल बनाइस। ये देश के छात्र मन के पहली हड़ताल माने जाथे।

अइसन दौर म छत्तीसगढ़ के कांग्रेस सदस्य मन घलो गरम दल के नेता मन ले प्रभावित होके उंकर संग सामिल होगे। बछर 1907 म सूरत म आयोजित कांग्रेस अधिवेशन म कांग्रेस दू भाग म बंट गे। अब उदारवादी नेता मन के जगह उग्रवादी दल के नेतामन के दौर चालू होगे अउ अंग्रेजी सासन के सोसन के विरुद्ध जनता संगठित होय लगिस। अइसन बेरा म छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले म घलो आजादी खातिर जन जागृति फैलाय बर सुघ्घर कारज होइस। छत्तीसगढ़ म स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के अर्जुन ठाकुर प्यारेलाल लाल सिंह बछर 1909 म राजनांदगांव म सरस्वती पुस्तकालय के स्थापना करिन। आगू चलके सरस्वती पुस्तकालय ह राजनीति गतिविधि के ठउर बनगे। अंग्रेजी सासन ल पता चलिस त सरस्वती पुस्तकालय ल जब्त कर लिस।


  बछर 1915 म महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका ले भारत लहुंटिस अउ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस म सामिल होगे। गांधी जी ह देश के दसा ल जाने खातिर दौरा करिन। अंग्रेज मन के सोसन ल जानके वोहा अहिंसक ढंग ले लड़ाई के योजना बना के जन जागृति के सुघ्घर कारज करिन। धीरे से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस म गांधी जी के धाक जमगे जेहा आजादी तक जारी रिहिस। गांधी जी के मानना रिहिस कि अंग्रेजी सासन ले अहिंसा अउ सत्याग्रह ल अपनाके लड़ना ठीक रहि। येकर प्रयोग गांधी जी ह दक्षिण अफ्रीका म मजदूर मन के हक खातिर लड़ाई म कर चुके रिहिन। भारत म खेड़ा सत्याग्रह के माध्यम ले गांधी जी अहिंसक आंदोलन के सुरुआत करिन। सितंबर 1920 में कलकत्ता म लाला लाजपत राय के अध्यक्षता म कांग्रेस के विशेष अधिवेशन आयोजित होइस ।येमा गांधी जी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन चलाय के स्वीकृति दे गिस ।फेर कांग्रेस के अधिवेशन नागपुर में 26 दिसंबर 1920  म होइस जेकर अध्यक्षता विजय राघवाचार्य करिन ।ये अधिवेशन म हमर छत्तीसगढ़ ले आने नेता मन  संग ठाकुर प्यारेलाल सिंह ह सामिल होइन।रोलेट एक्ट जइसे करिया कानून अउ जलियांवाला बाग हत्याकांड के सेति देश भर म अंग्रेज सरकार के विरुद्ध चिंगारी सुलगत रिहिस हे। अइसन समय म गांधी जी का आह्वान कर चुके रिहिन कि अंग्रेज

 सरकार के गुलामी ले छुटकारा पाय खातिर स्थानीय समस्या ल आधार बना के असहयोग आंदोलन चालू करय। 

ठाकुर प्यारेलाल सिंह ह असहयोग आंदोलन के समय वकालत छोड़के राजनांदगांव म राष्ट्रीय विद्यालय के स्थापना करिन ।हजार भर के संख्या म चरखा बनवा के जनता ल बांटिस । चरखा के महत्तम समझाइस अउ खादी के प्रचार करिन। ठाकुर साहब खादी पहने लागिस।राजनांदगांव ले हाथ में लिखे पत्रिका घलो निकालिन जउन ह जन चेतना बर अब्बड़ सहायक होइस। 


 गांधी जी जब पहिली बार 20 दिसंबर 1920 म छत्तीसगढ़ आइस त  इहां के नेतामन के संगे -संग जनता मन म अब्बड़ उछाह छागे। गांधी जी कंडेल नहर सत्याग्रह के सिलसिले म आय रिहिन। गांधी जी के छत्तीसगढ़ आय ले अंग्रेजी सासन म हड़कंप मचगे।गांधी जी के कंडेल जाय से पहिलीच अंग्रेजी सासन ह आंदोलनरत किसान अउ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन के बात ल मान लिस।


सन 1923 में जब झंडा सत्याग्रह चालू होइस त ठाकुर साहब ल प्रांतीय समिति द्वारा दुर्ग जिला ले सत्याग्रही भेजे के काम सौंपे गिस।नागपुर म सत्याग्रह आंदोलन चालू होइस ।झटकुन  नागपुर सत्याग्रह के प्रमुख ठउर  बनगे। 1924 में जब बीएनसी मिल के दुबारा हड़ताल चालू होइस तब ठाकुर प्यारेलाल सिंह ल जिला बदल कर दे गिस। राजनांदगांव ले निष्कासित करे के बाद सन 1925 म ठाकुर साहब रायपुर चले गे अउ अपन जिनगी के आखिरी तक ऊंहचे रहि के अपन राजनीतिक काम मन ल संचालन करत रिहिन। ठाकुर साहब के उदिम ले राजनंदगांव,  छुईखदान, खैरागढ़ रियासत मन मा कांग्रेस संगठन के निर्माण होइस।


बछर 1929 म भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन म पंडित जवाहरलाल नेहरू के अध्यक्षता म पूर्ण स्वाधीनता के प्रस्ताव पारित होइस ।येकर बाद  26 जनवरी 1930 म स्वाधीनता दिवस के रूप म मनाय गिस । गांधी जी देशवासी मन ले आह्वान कर चुके रिहिन कि स्थानीय समस्या ल लेके  आंदोलन चालू करय। अइसन बेरा म राजनांदगांव ,छुई खदान, मोहला ,मानपुर , कौड़ीकसा,डोगरगढ़ डोगरगांव ,  सहित छुरिया क्षेत्र के बादराटोला, चिरचारीकला, घोघरे, बापूटोला ( चिचोला)क्षेत्र ह आंदोलन के प्रमुख केंद्र बन गे।

   राजनांदगांव म विद्रोही कवि कुंज बिहारी  चौबे छात्र जीवन म  अंग्रेज शासन के झंडा ल उतार के भारतीय झंडा फहरा दिस । येकर सेति वोला बेत ले अब्बड़ मारे गिस पर वोहा महात्मा गांधी के जय अउ भारत माता के जय कहत गिस। 

1930 में गांधीजी ह नमक कानून तोड़ो आंदोलन चालू करिन अउ येकर असर  राजनांदगांव जिला म देखे ल मिलिस। सन 1930 में राजनांदगांव म स्टेट कांग्रेस के स्थापना  आर . एस. रूईकर के मार्गदर्शन म होइस ।कांग्रेस के प्रथम बैठक मानिक भाई गोंदिया वाले के मकान म रखे गिस जेमा जिले के 162 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन भाग लिस। फरवरी 1932 में देश -प्रदेश के  संगे- संग राजनंदगांव, छुईखदान ,छुरिया के बादराटोला बापूटोला (चिचोला), मानपुर , कौड़ीकसा,मोहला ,डोंगरगांव, डोंगरगढ़  क्षेत्र म ब्रिटिश शासन अउ स्थानीय राजशाही के विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन आवाज बुलंद करिन। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विश्राम दास बैरागी ला आजादी के लड़ाई म भाग ले खातिर सिद्ध दोष कैदी के रूप म  1932 म पहले रायपुर केंद्रीय जेल म रखे गिस फेर वोला अमरावती जेल में स्थानांतरित कर दे गिस।


22 नंबर 1933 म महात्मा गांधी छत्तीसगढ़ म द्वितीय प्रवास के रूप म आइस। येकर सुरूआत दुर्ग ले होइस।हरिजन मन के उत्थान, तिलक फंड अउ स्वराज्य फंड खातिर आयोजित कार्यक्रम म दुर्ग के मोती तालाब मैदान म गांधी जी के सभा म 50,000 ले अधिक लोगन मन  सामिल होइस। गांधी जी के दौरा 22 नवंबर ले 28 नवंबर तक रिहिन हे। 24 नवंबर 1933 म गांधी जी ह पं. सुंदर लाल शर्मा द्वारा संचालित सतनामी आश्रम के निरीक्षण करिन।  येकर बार सभा ल संबोधन करे के बेरा म शर्मा जी द्वारा करे गे हरिजन उद्धार के कारज बर गांधी जी ह उंकर अब्बड़ तारीफ करिन अउ ये काम खातिर शर्मा जी ल अपन गुरु कहिस। शर्मा जी ह गांधी जी ले 8 बछर पहिली हरिजनोंद्धार के बुता ल चालू कर दे रिहिन।


 गांधी जी के ये दूसरा दौरा  ह राजनांदगांव जिला के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी  मन ल अब्बड़ प्रभावित करिन अउ गांधी जी के दर्शन लाभ पाय बर इहां के कतको स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन दुर्ग पहुंचिस । घोघरे, छुरिया के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विश्वेश्वर प्रसाद यादव जउन ह लालूटोला स्कूल म शिक्षक रिहिन वोहा अपन स्कूल ल बंद करके गांधी जी के दर्शन करे खातिर अपन चचेरा भाई विद्या प्रसाद यादव जी के संग गिस।

सन 1938 म हरिपुर कांग्रेस अधिवेशन म राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ह रियासती जनता मन ले आजादी के आंदोलन म भाग लेय के आह्वान करिन। ए बछर छुईखदान म जंगल सत्याग्रह चालू होगे। गोवर्धन लाल वर्मा, गुलाब दास वैष्णव, अमृतलाल महोबिया मन सत्याग्रह के अगुवाई करिन।ठाकुर प्यारेलाल सिंह ह अपन प्रमुख सहयोगी राम नारायण हर्षुल मिश्र ल  कांग्रेस संगठन के मार्गदर्शन बर कवर्धा भेजिस ।राजनांदगांव जंगल सत्याग्रह के अगवाई ठाकुर लोटन सिंह के हाथ म रिहिन।


छत्तीसगढ़ ह वन संपदा ले भरपूर हावय। येहा इहां के रहवासी मन के जिनगी गुजारे के प्रमुख साधन हरे। अंग्रेजी सासन के गलत वन नीति के सेति जंगल क्षेत्र के रहवासी मन ल नंगत तकलीफ उठाय ल पड़त रिहिस। अंग्रेज जंगल ल अपन संपत्ति समझय। रक्षित वन क्षेत्र म मवेशी मन ल घास चराय खातिर कांजी हाउस म डाल दय येकर ले पशुपालक मन ल अब्बड़ परेसान होवय।अइसने जब लोगन मन जंगल ले लकड़ी अउ कांदी ( घास)काट के लाय त अंग्रेज मन नाना प्रकार के अतियाचार करय अउ गिरफ्तार कर लेय। येकर ले अंग्रेजी सासन के विरुद्ध जनता  मन म अब्बड़ गुस्सा छमागे।येकर परिणाम जंगल सत्याग्रह के रूप म सामने आइस। हमर छत्तीसगढ म सिहावा नगरी डाहर के जंगल सत्याग्रह ह देशभर म एक मिसाल बनगे।


जंगल सत्याग्रह अउ बादराटोला गोलीकांड 


राजनांदगांव रियासत म बछर 1939 म जंगल सत्याग्रह चालू होइस।  येकर सूचना भेज दे गिस।21 जनवरी 1939 के दिन राजनांदगांव जिले के छुरिया विकासखण्ड के बादराटोला म आस -पास  गांव  के जनता मन जंगल सत्याग्रह खातिर इकट्ठा होय लगिस। हजारों के भीड़ बादराटोला म सकला गे। इहां जंगल सत्याग्रह के अगुवाई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बुध लाल साहू करत रिहिन। तहसीलदार सुखदेव देवांगन ह 50 सशस्त्र पुलिस बल के संग बादराटोला पहुंच के सबले पहिली जंगल सत्याग्रह के मुखिया बुध लाल साहू ल गिरफ्तार कर लिन। येकर ले बादराटोला म सकलाय लोगन मन ल अब्बड़ गुस्सा आगे अउ तहसीलदार ल भीड़ ह घेर लिन।  बुधलाल साहू के चरवाहा रामाधीन गोंड ह तहसीलदार के सामने आके खड़े होगे अउ  महात्मा गांधी के जय,भारत माता के जय,वंदे मातरम के नारा लगा के गिरफ्तारी के विरोध करिस। भीड़ के  गुस्सा ल देखके तहसीलदार घबरा गे अउ जनता ल तितर बितर करे खातिर पुलिस मन ल गोली चलाय के आदेश दे दिस। ये गोली काण्ड म रेवती दास ल गोली लगिस अउ घायल स्थिति म अस्पताल ले जाय गिस। रामाधीन गोंड के छाती म गोली लगिस अउ शहीद होगे। सिरिफ 27 बछर के उमर म रामाधीन अपन मातृभूमि के रक्षा खातिर सहीद होगे अउ इतिहास म अमर होगे।  1939 म

जंगल सत्याग्रह म सामिल होय खातिर विश्वेश्वर प्रसाद यादव, विद्या प्रसाद यादव, तुलसी प्रसाद मिश्रा अउ आने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन ल जेल म डाल दे गिस।


राजनांदगांव , खैरागढ़ - छुईखदान - गंडई अउ मानपुर -मोहला -अंबागढ़ चौकी जिले के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन म  ठाकुर प्यारेलाल सिंह,लोटन सिंह ठाकुर,  गोवर्धन लाल वर्मा, गुलाब दास वैष्णव, अमृत लाल महोबिया, दामोदर प्रसाद त्रिपाठी, छवि राम चौबे, गज्जू लाल शर्मा 

रामाधीन गोंड,विश्राम दास बैरागी, बुध लाल साहू,रेवती दास, बहुर सिंह,विश्वेश्वर प्रसाद यादव, विद्या प्रसाद यादव, तुलसी प्रसाद मिश्रा, दामोदर दास टावरी,पी. वी. दास,देव प्रसाद आर्य, कुंज बिहारी चौबे,कन्हैया लाल अग्रवाल, दशरथ साहू,ईशना पवार , सतानंद साहू के संगे -संग आने नांव सामिल हे। वनांचल मानपुर -मोहला क्षेत्र म कतको स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रिहिन। अइसन भूले बिसरे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन उपर काम करे के जरूरत हे।


                ओमप्रकाश साहू अंकुर 

           सुरगी, राजनांदगांव।


Thursday, 23 January 2025

नवा साल मा का नवा

 नवा साल मा का नवा


                   मनखे मन कस समय के उमर घलो बाढ़थे, येदे देखते देखत एक साल अउ बाढ़गे। 2024 ले 2025 होगे। बीते समय सिरिफ सुरता बनगे ता नवा समय आस। सुरुज, चन्दा, धरती, आगास, पानी, पवन सब उही हे, नवा हे ता घर के खूंटी मा टँगाय कलेंडर, जेमा नवा बछर भर के दिन तिथि बार लिखाय हे। डिजिटल डिस्प्ले के जमाना मा कतको महल अटारी मा कलेंडर घलो नइ दिखे, ता कतको गरीब ठिहा जमाना ले नइ जाने। आजकल जुन्ना बछर ला बिदा देय के अउ नवा बछर के परघवनी करे के चलन हे, फेर उहू सही रद्दा मा कम दिखथे। आधा ले जादा तो मौज मस्ती के बहाना कस लगथे। दारू कुकरी मुर्गी खा पी के, डीजे मा नाचत गावत कतको मनखे मन घुमत फिरत होटल,ढाबा, नही ते घर,छत मा माते रहिथे। अब गांव लगत हे ना शहर सबे कोती अइसनेच कहर सुनाथे, भकर भिकिर डीजे के शोर अउ हाथ गोड़ कनिहा कूबड़ ला झटकारत नवा जमाना के अजीब डांस संगे संग केक के कटई, छितई अउ एक दूसर ऊपर चुपरई, जइसन अउ कतकोन चोचला हे, जेला का कहना । 

              भजन पूजन तो अन्ग्रेजी नवा साल संग मेल घलो नइ खाय, ना कोनो कोती देखे बर मिले। लइका सियान सब अंग्रेजी नवा साल के चोचला मा मगन अधरतिहा झूमरत रहिथे, अउ पहात बिहनिया खटिया मा अचेत, वाह रे नवा साल। फेर आसाढ़, सावन, भादो ल कोनो जादा जाने घलो तो नही, जनवरी फरवरी के ही बोलबाला हे। ता भले चैत मा नवा साल मनाय के कतको उदिम करन, नवा महीना के रूप मा जनवरी ही जीतथे, ओखरे संग ही आज के दिन तिथि चलथे। खैर समय चाहे उर्दू मा चले, हिंदी मा चले या फेर अंग्रेजी मा, समय तो समय ये, जे गतिमान हे। सूरुज, चन्दा, पानी पवन सब अपन विधान मा चलत हे, मनखे मन कतका समय मा चलथे, ते उंखरें मन ऊपर हें। समय मा सुते उठे के समय घलो अब सही नइ होवत हे। लाइट, लट्टू,लाइटर रात ल आँखी देखावत हे, ता बड़े बड़े बंगला सुरुज नारायण के घलो नइ सुनत हे। मनखे अपन सोहलियत बर हाना घलो गढ़ डरे हे, जब जागे तब सबेरा---- अउ जब सोय तब रात। ता ओखर बर का चौबीस अउ का पच्चीस, हाँ फेर नाचे गाये खाय पीये के बहाना, नवा बछर जरूर बन जथे।आज मनखे ना समय मा हे, ना विधान मा, ना कोनो दायरा मा। मनखे बलवान हे , फेर समय ले जादा नही।

           वइसे तो नवा बछर मा कुछु नवा होना चाही, फेर कतका होथे, सबे देखत हन। जब मनुष नवा उमर के पड़ाव मा जाथे ता का करथे? ता नवा साल मा का करही? केक काटना, नाचना गाना, पार्टी सार्टी तो करते हे, बपुरा मन। वइसे तो कोनो नवा चीज घर आथे ता वो नवा कहलाथे, फेर कोनो जुन्ना चीज ला धो माँज के घलो नवा करे जा सकथे। कपड़ा,ओन्हा, घर, द्वार, चीज बस सब नवा बिसाय जा सकथे, फेर तन, ये तो उहीच रहिथे, अउ तन हे तभे तो चीज बस धन रतन। ता तन मन ला नवा रखे के उदिम मनखे ला सब दिन करना चाही। फेर नवा साल हे ता कुछ नवा, अपन जिनगी मा घलो करना चाही। जुन्ना लत, बैर, बुराई ला धो माँज के, सत, ज्ञान, गुण, नव आस विश्वास ला अपनाना चाही। तन अउ मन ला नवा करे के कसम नवा साल मा खाना चाही, तभे तो कुछु नवा होही।  जुन्ना समय के कोर कसर ला नवा बेरा के उगत सुरुज संग खाप खवात नवा करे के किरिया खाना चाही। जुन्ना समय अवइया समय ला कइसे जीना हे, तेखर बारे मा बताथे। माने जुन्ना समय सीख देथे अउ नवा समय नव आस। इही आशा अउ नव विश्वास के नाम आय नवा बछर। हम नवा जमाना के नवा चकाचौंध  तो अपनाथन, फेर जिनगी जीये के नेव ला भुला जाथन। हँसी खुसी, बोल बचन, आदत व्यवहार, दया मया, चैन सुकून, सेवा सत्कार आदि मा का नवा करथन। देश, राज, घर बार बर का नवा सोचथन, स्वार्थ ले इतर समाज बर, गिरे थके, हपटे मन बर का नवा करथन। नवा नवा जिनिस खाय पीये,नवा नवा जघा घूमे फिरे  अउ नाचे गाये भर ले नवा बछर नवा नइ होय।

               नवा बछर ला नवा करे बर नव निर्माण, नव संकल्प, नव आस जरूरी हे। खुद संग पार परिवार,साज- समाज अउ देश राज के संसो करना हमरे मनके ही जिम्मेदारी हे। जइसे  कोनो हार जीते बर सिखाथे वइसने जुन्ना साल के भूल चूक ला जाँचत परखत नवा साल मा वो उदिम ला पूरा करना चाही। कोन आफत हमला कतका तंग करिस, कोन चूक ले कइसे निपटना रिहिस ये सब जुन्ना बेरा बताथे, उही जुन्ना बेरा ला जीये जे बाद ही आथे नव आस के नवा बछर। ता आवन ये नवा बछर ला नवा बनावन अउ दया मया घोर के नवा आसा डोर बाँधके, भेदभाव, तोर मोर, इरखा, द्वेष ला जला, सबके हित मा काम करन, पेड़,प्रकृति, पवन,पानी, छीटे बड़े जीव जन्तु सब के भला सोचन, काबर कि ये दुनिया सब के आय, पोगरी हमरे मनके नही, बिन पेड़,पवन, पानी अउ जीव जंतु बिना अकेल्ला हमरो जिनगी नइहे। बहर हाल सरी दुनिया मा जनम मरण, दिन तिथि इही अनुसार चलत हे ता, नवा बछर के बधाई बनबेच करथे, सादर सादर बधाई -----जोहार


जीतेंद्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को, कोरबा(छग)