Thursday, 30 April 2026

बजारू पसरा मा विज्ञापन*. (ब्यंग)

 *बजारू पसरा मा विज्ञापन*.

                                (ब्यंग) 


        बजारवादी पसरा मा विज्ञापन शिलाजीत के काम करत बैपार मा यौनशक्ति बढ़ावत हे। गिराहिक के समझदारी ये हे कि तमड़ के छू के निमार के खरीदे के जगा मोबाईल मा फोटू देखके आनलाईन घर बइठे सौदा बिसावत हें। जे समान विज्ञापन के नोहे माने बजार के नोहे। अउ बजार के नोहे माने तोर काम के नइये। विज्ञापन ले ही इस्तेमाल करे के पहिली भरोसा जागथे। आदमी उपर विज्ञापन के असर अतका हे कि पाँच प्राण तत्व ला बचाए बर बजार के खजरी दायक विज्ञापन के सिरहाना के सहारा लेना पड़थे। ये तो बने हे कि टी वी वाले घर बइठे बजार घुमा देथे। हमला जेकर जरूरत नइये वोकरो जरूरत पैदा कर देथें। पसरा लमाके बेचइया के भले बोहनी झन होय फेर आनलाईन खरीदी ले बजार मंदा हे कहना माने दू बियाय अउ एक बताय।

          विज्ञापन के बैसाखी ले बजार चलत नइए उड़त हे। छानी मा होरा कोन भूँजिस होही नइ जानन, फेर वो भुँजइया जरूर विज्ञापन वाले असन रिहिस होही। इंडिया टीम ला जिताय बर अपन दिन भर के हाजरी गँवाके टी वी के आगू बरफ जमे असन जम गैंव। एती दू ठन चउवा छक्का का परिस, विज्ञापन वाले कूद कूद के देखाए के शुरू कर दिस कि अमूल दूध पीता है इंडिया। बस गली के मरहा बालर फिल्डर बाल के पीछू कम अमूल दूध के पीछू भागे मा लगगे। चार रन बनाके आउट होइस तब डा. आर्थो वाले बैट ला गोटानी बनाके पँहुचगे। एकर ले साफ हे कि नतो दूध पीये मे कामयाबी हे न तो आर्थो असरकारक हे। टीम इंडिया के हार मा गठिया बात वाले मन विज्ञापन के गुणवत्ता मा दोष निकाल डारिन। ये डहर इंदिरा आई व्ही एफ वाले मन नस्ल सुधार के वीधी ला हफर हफर के बतावत मिलिस। तब समझ मा आइस कि इंडिया टीम घेरी बेरी काबर हारथे। संतुष्टि ये सोच के करना परथे कि तुक्का के खेल जमगे तो जय श्रीराम, नइते गिल्ली डंडा तो राष्ट्रीय खेल है ही। जे मन सिफारिश मा जगा पाय हें वो मन के औसत रन रेट पँदरा प्लस अउ गिल्ली खेल के जोर अजमिस वो मन सतक ले चुकगे। क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष ला इंटरव्यू मा पूछेगिस कि बैट के मुठिया कते कोती होथे। तो जवाब मा किहिस कि अइसन गंभीर सवाल के जवाब गौतम गंभीर ही दे सकथे। या तो टी वी डिबेट के त्रिपक्षीय चरचा मा समाधान आ सकथे। अभी हमर टीम संकट के घड़ी ले गुजरत हे, हम संकटमोचन वाले विज्ञापन के अगोरा मा हावन।

       मोर घरवाली ला सीरियल देखे के मियादी बुखार हे। सिरियल मे का होइस नइ बता पाये। फेर विज्ञापन मा देखाय छूट वाले साड़ी के महासेल के सुरता जरूर रखथे। समाचार सुने के गरज ले टीवी मा मूड़ी खुसेरबे तब सबले पहिली हाजमोला वाले पेट सफा के शीशी ला रामबाण बताथे। काबर कि समाचार अपच अउ बदहजमी वाले रथे ये बात हाजमोला वाले घलो जानथे। हमू ला पता हे कि एकर असर समाचार सुनत ले रही। घरवाली एती खाना के सथरा धरके आथे अउ वोती टीवी मा हार्पिक धरके संडास धोवइया। अइसन संजोग आये दिन होवत रथे। एक दिन तो हार्पिक मा हग्नालय ला अतका धोइस कि साग मे फर वाले धनिया के सवाद दबगे। आधा खाना छोड़के उठना परिस। खुद के चवनप्रास ला खुदे रामदेव खाके घोड़ा सँग दँउड़त दिखिस। दूसर दिन च्यवनप्राश के जगा घोड़ा के दाम बाढ़गे। बिना विज्ञापन के अब दुलहा दुलहिन नइ मिले। फेर सोनार के सोना कतको कैरेट के रहय। बेंचही तो उँचहा दाम मा ही। खुद बनाय के जगा रेडिमेंट अवास उपर भरोसा एकर सेती रथे कि विज्ञापन मा शीशमहल देखे रथे। भले साल भर मा भाँड़ी भसक जाय। पानी केंट के शुद्ध होथे ये बात लइका मन के दिमाग मा विज्ञापन वाले मन ही भरे हे। करसा मटकी के विज्ञापन ले एसी फ्रीज कम्पनी वाले मन काठी कफन के समान तो नइ बेचे। फेर हाँ हमर तिर कालीचरण के दुकान के बोर्ड मा साफ लिखाय हे कि जनम से लेके मरनी हरनी तक के समान उचित मुल्य मे मिलथे। मरईया लाखों के सम्पत्ति छोड़के मरथे, तभो ले मरनी के समान बर उचित मुल्य के दुकान खोजे ला परथे। तभे तो कालीचरण के दुकान के पता सब जन  जानथे।

     बेटी के जोरन मा चकाचक वाले बीमबार जोरे ले बहू सास के ताना ले बाँच जही, ये बात बर्तन बार वाले खुलके नइ बताय। कभी सास भी बहू थी सीरियल के अगोरा मा बइठे सास के मन मा आसा रथे कि एम डी एच वाले मसलहा साग जीयत मर मिलत रहय। गुप्त खबर ये हे कि मसाला बेचइया सफेद मेंछा पगड़ी वाले बबा ला मसलहा ले परहेज हे वो खुद दलिया अउ मुसब्बी के जूस मा जीयत हे। तभो ले कसम खा डारे हे मसलहा खवाके जनता के बीपी बढ़ाए के। बजारू विज्ञापन के गोदाम मा अतका कचरा सकेला गेहे कि मुसवा काकरोच मन पहुनाई के ढीठपना ले आदमी के जिनगी मा डेरा जमा डारे हे। इन मन के बजार ला कुतरे के पहिली बजारवादी मन रेडहिट ला देखा डारिन। मुसवा दवा अउ रेडहिट ला घर मा स्टाक करके  रखना खतरा ले भरे हे। कारन कि पति हर पत्नी ला काकरोच अउ पत्नी हर पति ला मुसवा के नजर ले देखथें।

            आमदनी के बजार मा जेकर कीमत नइ बाढ़िस वोकर बर विज्ञापन के भूतहा कलाकार जे फिल्मी दुनिया के खूँटादार हे वोला धराके कुदवा दे। समान बजार मा कूदे लगही। धन्य हो वो माचिस जे हर विज्ञापन के बजारू पसरा मा अपन इज्जत ला नइ उतारे हे। कफ सीरफ के माँग अतका बढ़िस कि नशा अउ नाश दूनो बर खरा उतरगे। बिमारी जादा ही बढ़त हे तब आयुष्मान धारी मन अनुबंधित अस्पताल के विज्ञापन खोजत हें, कि कते अस्पताल मा पाँच लाख तक सीरफ मिलही। प्राण छूट जाय फेर उज्जर दाँत निपोर के मरे बर दंतकांति डेंटिस्ट मन पेस्ट धरके सलाह देवत मिलथें। सहानुभूति के आशोकारिष्ट मा बाँझपन दूर होथे। वोकर पहिली लइका बर कते क्रीम पाउडर डाइपर काम करही एकर जानकारी विज्ञापन ले लेके रखना परथे। 

    लँगोटी से लेके चड्डी तक के सफर आसान रिहिस फेर अब चड्डी अउ चायपत्ती कते ब्रांड के बउरना हे सोचनिय बिषय हे।सिलपट चटनी नइ मिठाय, बजार वाले सॉस के शीशी कैचप मिठाथे ये बात लइका लइका जानथे। सस्ता समान के जोरलगहा विज्ञापन ले दाम चार गुना बाढ़े लगथे। बजार वाले के चकाचक अउ आम जनता मँहगाई के नाम मा फोकट सरकार ला कोसत रथे। कबीरा खड़े बजार मा माने कबीर जी बजार मा पसरा लमाके लट्ठा कपड़ा बेचिस होही। फेर  विज्ञापन के अभाव मा कम बेचिस, तभे खिसिया के उलटबासी लिखिस होही। अब तो बस विज्ञापन मा पसरे बजार उपर नजर लगाके रखना सार हे। मौका हाथ ले झन छूटे। 


राजकुमार चौधरी "रौना" 

टेड़ेसरा राजनांदगांव।

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